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सोमवार, 7 अप्रैल 2014

डॉल्फिन ने की वैज्ञानिकों से बात कहा: मेरे पास कचरा पड़ा है

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डॉल्फिन ने की वैज्ञानिकों से बात कहा: मेरे पास कचरा पड़ा है

फ्लोरिडा. वह दिन दूर नहीं जब इंसान डॉल्फिनों से दोस्तों की तरह बात कर सकेंगे। ऐसे ही एक प्रोजेक्ट में शोधकर्ताओं को बड़ी सफलता मिली है। अमेरिका के फ्लोरिडा में एक डॉल्फिन ने उसके पास पड़े कचरे के बारे में शोध करने वाले बताया। इस प्रोजेक्ट का नाम ह्यूमन-टू-डॉल्फिन ट्रांसलेटर है।
 
प्रोजेक्ट प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. डेनिज हर्जिंग डॉल्फिन के रिस्पॉन्स से बेहद उत्साहित हैं। प्रोजेक्ट में सेटासियन हियरिंग एंड टेलिमेट्री डिवाइस (चैट) इस्तेमाल की गई। इसके जरिए डॉल्फिन का संदेश शोधकर्ताओं तक पहुंचा। चैट डिवाइस एक ट्रांसलेटर मशीन की तरह काम करती है। जो डॉल्फिन के भेजे संकेतों को पढ़ सकती है। 
 
तोते की तरह डॉल्फिन भी पकड़ती हैं शब्द 
 
हर्जिंग ने डॉल्फिन को आठ शब्द सिखाए हैं। यह डॉल्फिन की आवाज से मिलते-जुलते हैं। हर परिस्थिति के लिए अलग आवाजें निकालती हैं। जैसे समुद्री कचरे लिए अलग और तैरने के लिए अलग। हर्जिंग के अनुसार डॉल्फिन के पास इशारा करने के लिए अलग आवाज होती है। किसी परिचित इंसान के पास आने पर यह अलग आवाज निकालती हैं। वहीं खतरे से बचने के लिए अलग आवाज करती हैं। 
 
डॉल्फिन की आवाज होती ट्रांसलेट : चैट डिवाइस में माइक्रोफोन लगा है। जो डॉल्फिन की आवाज को रिकॉर्ड कर लेता है। फिर ट्रांसलेटर इस आवाज को इंसानी भाषा में बदलने की कोशिश करता है। जब डॉल्फिन बोलती है तो ट्रांसलेटर इसे इंसानी शब्दों से मैच कराने की कोशिश करता है। 
 
बनाएंगे डॉल्फिन की बोली की डिक्शनरी :हर्फिंग जॉर्जिया यूनिवर्सिटी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट थैड स्टार्नर से समझौता करेंगे। दोनों डॉल्फिन की आवाजों का विश्लेषण करेंगे। फिर इसकी डिक्शनरी तैयार होगी। इसे चैट डिवाइस में फीड किया जाएगा। sabhar ; bhaskar.com

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