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बुधवार, 30 अक्तूबर 2013

इस निर्वस्त्र बाबा के चमत्कारों को देख अचंभित रह जाते थे लोग, देखें तस्वीरें

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इस निर्वस्त्र बाबा के चमत्कारों को देख अचंभित रह जाते थे लोग, देखें तस्वीरें

संत शोभन सरकार को अनुयायी चमत्कारी मानते हैं। उनके सोने के खजाने संबंधी दावों ने एक बार फिर भारतीय बाबाओं को सुर्खियों में ला दिया है। इनसे पहले भी यहां कई ऐसे साधु-संत हुए हैं, जिनकी चर्चाएं रही हैं। इनमें नीम करोली बाबा और देवरहा बाबा का नाम प्रमुख है। दैनिकभास्कर.कॉम ऐेसे ही बाबाओं पर प्रस्तुत कर रहा है एक विशेष सीरिज। 
 
इसी कड़ी में प्रस्तुत है त्रैलंग स्वामी की कहानी
 
विचित्रता के लिए मशहूर भारत को साधु-संतों की भूमि के रूप में जाना जाता है। अपनी साधना, अलौकिक शक्ति और चमत्कार के लिए कई संत पूरी दुनिया में मशहूर हैं। इनमें त्रैलंग स्वामी का नाम सम्मान से लिया जाता है।
 
300 साल जीवित रहे त्रैलंग स्वामी ने अपनी साधना की शुरूआत शमशान घाट से की। उनके बारे में कहा जाता है कि कई बार जहर पीने के बाद भी वह जीवित रहे। वह कई बार गंगा के ऊपर बैठे रहते तो कभी कई-कई दिनों के लिए गंगा नदी के अंदर रहते। वह गर्मी के दिनों भी दिन के समय की कड़ी धूप में मणिकर्णिका घाट की गर्म शिलाओं पर बैठे रहते थे। 
 
त्रैलंग स्वामी ने बनारस पुलिस को अपने चमत्कार के रूबरू कराया। एक बार बनारस पुलिस ने उन्हें जेल डाल दिया था। जिस कोठरी में पुलिस ने स्वामी को ताला बंद कर रखा गया था। वहां से स्वामी बार-बार छत पर पहुंच जाया करते थे। हताश होकर पुलिस अधिकारियों ने कोठरी के सामने पहरा भी बैठा दिया था। किन्तु हर बार स्वामी छत पर टहलते दिखाई पड़ते थे।  
आगे जानिए इस चमत्कारी बाबा की अनोखी कहानियां...
 
DISCLAIMER- बाबाओं के चमत्कार संबंधी तथ्य उनके अनुयायियों की मान्यता और कुछ पुस्तकों पर आधारित हैं। vartabook.com किसी भी तरह के अंधविश्वास का विरोध करता है।

इस निर्वस्त्र बाबा के चमत्कारों को देख अचंभित रह जाते थे लोग, देखें तस्वीरें

त्रैलंग स्वामी कई हफ्तों तक बिना भोजन के रहा करते थे। उनके चमत्कारों के संबंध में यह भी कहा जाता है कि उनका शरीर बहुत विशाल था, वजन करीब 137 किलो का था। इसके बावजूद वह जिस भी रूप में चाहते, अपने शरीर का उपयोग कर लेते थे। 

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स्वामी जी लीला इतनी प्रचलित है कि उनके ऊपर बंगाली भाषा में दो फिल्मे भी बन चुकी हैं। 1971 में बनी यह दोनों फिल्मों में उनके जीवन का एक-एक घटना का वर्णन मिलता है। लेखक रॉबर्ट अर्नेट ने भी त्रैलंग स्वामी के चमत्कारों का बखान किया है। साथ ही उन्होंने स्वामी जी के बारे में बताते हुए यह भी कहा है कि वह लोगों या अपने नास्तिक आस्तिक भक्तों के मन को किताबों की तरह पढ़ लिया करते थे।
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गणपति सरस्वती का त्रैलंग स्वामी नाम उत्तर प्रदेश के वाराणसी की साधना के दौरान ही पड़ा था। 1887 में वाराणसी में मृत्यु से पहले स्वामी असी घाट. हनुमान घाट, दाशेश्वमेध घाट सहित कई यहां के कई अलग-अलग घाटों पर रहे। यही पर कई प्रमुख समकालीन बंगाली संतों जैसे रामकृष्ण, स्वामी विवेकानंद, महेन्द्रनाथ गुप्ता, लाहिरी महाशय और स्वामी अंभेदानंद, स्वामी भास्करानंद सरस्वती जैसे कई महान संतों ने उनसे मुलाकात की।
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त्रैलंग स्वामी का जन्म 1601 में हुआ। उन्हें गणपति सरस्वती भी कहा जाता है। उनके पिता का नृसिंह राव और माता का नाम विद्यावती था। अपनी माता की मृत्यु के बाद उन्होंने अपना घर छोड़ दिया था। 52 तक घर में रहने के बाद वह बाहर निकले और गुरू की खोज में जुट गए। शमशान घाट पर अपनी साधना की शुरूआत की, यहां उन्होंने 20 साल तक तपस्या की। इसके बाद वह कई स्थानों में घूमते हुए वाराणसी पहुंचे।

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वाराणसी में उन्होंने 150 वर्ष तक साधना की। इनकी बंगाल में बड़ी मान्यता थी। वहां स्वामी अपनी यौगिक एवं आध्यात्मिक शक्तियों एवं लंबी आयु के लिए खासा प्रसिद्ध रहे हैं। इन्हें भगवान शिव का एवं रामकृष्ण का अवतार माना जाता है। साथ ही इन्हें वाराणसी के चलते फिरते शिव की उपाधि भी दी गई है। अपने जन्म के 300 साल बाद पौष की एकादशी 1881 में उन्होंने उनकी मृत्यु हुई। 
इस निर्वस्त्र बाबा के चमत्कारों को देख अचंभित रह जाते थे लोग, देखें तस्वीरें
त्रैलंग स्वामी की रोचक बातें
 
त्रैलंग स्वामी हमेशा नग्न रहा करते थे। इस वजह से उन्हें कई बार बनारस पुलिस ने जेल में भी डाला था। जिस कोठरी में पुलिस ने स्वामी को ताला बंद कर रखा गया था। वहां से स्वामी त्रैलंग बार-बार छत पर पहुंच जाया करते थे। पुलिस बार-बार कोठरी के ताले लगवाती और स्वामी शीघ्र ही छत पर टहलते दिखाई देते। हताश होकर पुलिस अधिकारियों ने कोठरी के सामने पहरा भी बैठा दिया किन्तु इस बार भी स्वामी शीघ्र छत पर टहलते दिखाई दिए।

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त्रैलंग स्वामी सदा मौन धारण किए रहते थे। वह निराहार रहने थे, इसके बावजूद भी यदि कोई भक्त कुछ पेय पदार्थ लाते तो उसे वह बहुत प्यार से गृहण कर अपना उपवास तोड़ते थे। एक बार एक नास्तिक ने एक बाल्टी चूना घोलकर स्वामी जी के सामने रख दिया और उसे गाढ़ा दही बताया। स्वामी जी ने तो उसे पी लिया लेकिन कुछ ही देर बाद वह नास्तिक व्यक्ति छटपटाने लगा। स्वामी जी से अपने प्राणो की रक्षा की भीख मांगने लगा। 

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त्रैलंग स्वामी ने अपना मौन भंग करते हुए कहा कि तुमने मुझे विष पीने के लिए दिया। तुमने यह नही जाना कि तुम्हारा जीवन मेरे जीवन के साथ एकाकार है। यदि मैं यह नही जानता होता कि मेरे पेट में उसी तरह ईश्वर विराजमान है जिस तरह वह विश्व के अणु-परमाणु में है तब तो चूने के घोल ने मुझे मार ही डाला होता। अब तो तुमने कर्म का देवी अर्थ समझ लिया है, अत: फिर कभी किसी के साथ चालाकी करने की कोशिश मत करना। इसके बाद वह नास्तिक कष्ट मुक्त हो गया। sabhar : bhaskar.com




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रविवार, 27 अक्तूबर 2013

अमिताभ की नातिन दे रही आलिया को टक्कर, पहनती है उनसे भी छोटी ड्रेसेस

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अमिताभ की नातिन दे रही आलिया को टक्कर, पहनती है उनसे भी छोटी ड्रेसेस

बॉलीवुड में आलिया भट्ट ऐसी एक्ट्रेस हैं जिन्हें शॉर्ट ड्रेस पहनना बहुत ही अच्छा लगता है। वो किसी भी पब्लिक इवेंट या पार्टी में जाती हैं तो अधिकतर शॉर्ट ड्रेस में अपने लेग्स एक्सपोज करते हुए दिख जाती हैं। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि कोई और भी है जो शॉर्ट ड्रेस में आलिया को टक्कर दे रहा है।
 
जी हां, ये दूसरी मोहतरमा हैं अमिताभ बच्चन की नातिन नव्या नवेली। नव्या अभी सिर्फ 16 साल की ही हैं और इन्हें अपनी पार्टी की तस्वीरें इन्टरनेट पर पोस्ट करना बहुत पसंद है। नव्या ने हाल ही में अपनी स्कूल पार्टी की और अपने फ्रेंड्स के साथ अपनी कुछ तस्वीरें इंटरनेट पर अपलोड की थीं जिनमें वो बेहद शॉर्ट ड्रेस में नजर आ रही थीं।
 
अगर स्टाइल की बात करें तो आलिया और नव्या, दोनों की ही शॉर्ट ड्रेस पहनना बहुत पसंद है। इस पैकेज के जरिए हम आपको दिखाएंगे इन दोनों स्टार्स की शॉर्ट ड्रेसेस में कुछ खास तस्वीरें। अब इन्हें देख कर आप खुद ही अंदाजा लगा लीजिए कि ऐसी ड्रेसेस में कौन लगता है ज्यादा हॉट और बोल्ड..
अमिताभ की नातिन दे रही आलिया को टक्कर, पहनती है उनसे भी छोटी ड्रेसेस


अमिताभ की नातिन दे रही आलिया को टक्कर, पहनती है उनसे भी छोटी ड्रेसेस


अमिताभ की नातिन दे रही आलिया को टक्कर, पहनती है उनसे भी छोटी ड्रेसेस

अमिताभ की नातिन दे रही आलिया को टक्कर, पहनती है उनसे भी छोटी ड्रेसेस

अमिताभ की नातिन दे रही आलिया को टक्कर, पहनती है उनसे भी छोटी ड्रेसेस

अमिताभ की नातिन दे रही आलिया को टक्कर, पहनती है उनसे भी छोटी ड्रेसेस

अमिताभ की नातिन दे रही आलिया को टक्कर, पहनती है उनसे भी छोटी ड्रेसेस
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ये हैं कुछ खास देसी नुस्खे, इन्हें अपनाकर बढ़ा सकते हैं पौरुष शक्ति!

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ये हैं कुछ खास देसी नुस्खे, इन्हें अपनाकर बढ़ा सकते हैं पौरुष शक्ति!
भोपाल डेस्क: आमतौर पर शारीरिक समस्याओं में मुख्य होते हैं, नापुंसकता, इरेक्टल डिस्फक्शन, कामेच्छा का अभाव, जिनकी वजह से कई बार वैवाहिक जीवन टूटने की कगार पर आ जाता है। 
  
गौरतलब है कि आहार मे दुध का प्रयोग, उडद का प्रयोग, नये देसी घी का सेवन, नये अन्नॊ का सेवन, साठी चावल दुध के साथ सेवन, सुखे मेवे, खजुर , मुन्नका, सिंघडा, मधु, मक्खन, मिश्रि, आदि आहार वीर्य वर्धक होते है। 
 
इन समस्याओं से निजात पाने के लिए घरेलू और अनेकों आयुर्वेदिक उपाय हैं। आयुर्वेद में ऐसी अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियों का उल्लेख है, जिनके सेवन से आप शारीरिक समस्याओं से निजात पा सकते हैं। 
ये हैं कुछ खास देसी नुस्खे, इन्हें अपनाकर बढ़ा सकते हैं पौरुष शक्ति!
आयुर्वेदिक उपचार:
 
- प्रतिदिन दूध के साथ शतावरी का सेवन करें।
 
- दूध को बहुत उबाल कर ही पीएं।
 
- केले और संतरे का नियमित सेवन करें। 
 
- घी, मख्खन, हरी सब्जियां, फल और बादाम का रोजाना सेवन करें। इससे प्राटीन मिलता है और शुक्राणुओं में वृद्धि होती है।
ये हैं कुछ खास देसी नुस्खे, इन्हें अपनाकर बढ़ा सकते हैं पौरुष शक्ति!

प्रतिदिन एक ग्लास गाजर का जूस पिएं या फिर प्रतिदिन चार-पांच गाजर खाएं।
 
मूंगफली के दाने और सूखा नारियल खाना भी लाभदायक है।
 
सिर्फ दूध पीना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। दूध के पाचन के लिए जरूरी हे कि उसमें थोड़ी सी शक्कर भी मिलाई जाएं।

ये हैं कुछ खास देसी नुस्खे, इन्हें अपनाकर बढ़ा सकते हैं पौरुष शक्ति!

शरीर में विटामिन मात्रा बनाए रखने के लिए पालक, फूल गोफी, गाजर जैसी हरी-सब्जियों का सेवन करना बहुत आवश्यक है।
 
शरीरिक कमजोरी के मामले में एक बात का विशेष ध्यान रखें कि शराब-सिगरेट का सेवन बिलकुल न करें।
 
चिकित्सीय सलाह पर अश्वगंधारिष्ट का सेवन भी कर सकते हैं।
ये हैं कुछ खास देसी नुस्खे, इन्हें अपनाकर बढ़ा सकते हैं पौरुष शक्ति!
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ आहार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पाचन क्रिया भी सही होनी चाहिए।
 
इसके लिए नियमित एक्सरसाइज भी बहुत जरूरी है। नियमित एक्सरसाइज तनाव से मुक्ति व सेक्स लाइफ का खास टॉनिक है।
 
नोट: हर एक व्यक्ति की शारीरिक बनावट और क्षमताएं अलग-अलग होती है। इसीलिए किसी भी प्रकार की औषिधि या अन्य खाद्य पदार्थो का सेवन चिकित्सीय सलाक पर ही करें।
ये हैं कुछ खास देसी नुस्खे, इन्हें अपनाकर बढ़ा सकते हैं पौरुष शक्ति!

पुरुषत्व क्षमता बढ़ाने में शहद तथा भीगे हुए बादाम या किशमिश को दूध में मिलाकर रोजाना पीने से बहुत फायदा मिलता है। 
 
बादाम, किशमिश और मुनक्का को भिगोकर नाश्ते में लेने से भी लाभ होता है

ये हैं कुछ खास देसी नुस्खे, इन्हें अपनाकर बढ़ा सकते हैं पौरुष शक्ति!
फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट, पिज्जा, बर्गर और चाऊमीन का सेवन नियमित रूप से करने पर सेक्स ऊर्जा में कमी आने लगती है। ऐसे में इन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए।  sabhar : bhaskar.com





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ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो कभी नहीं आएगा बुढ़ापा!

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ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो कभी नहीं आएगा बुढ़ापा!

भोपाल डेस्क: बढ़ती उम्र का असर किसी व्यक्ति पर ज्यादा दिखता है, किसी पर कम। इसके पीछे कुछ ऐसी आदतें छिपी होती हैं, जो बुढ़ापे को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार होती हैं। रोजमर्रा की दिनचर्या में कुछ ऐसी आदतें होती हैं, जिन्हें चाहकर भी छोड़ा नहीं जा सकता, लेकिन इन आदतों के चलते हो सकता है कि आप जल्दी बूढ़े हो जाएं।
 
ज्यादातर लोग व्यस्त लाइफस्टाइल के कारण जीवन में खुद के लिए समय ही नहीं निकाल पाते हैं। ऐसे में कई आर रोजमर्रा की दिनचर्या में की गई लापरवाही का परिणाम चेहरे पर भी दिखने लगता है। 
ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो कभी नहीं आएगा बुढ़ापा!

ज्यादा देर तक जागना
 
न्यूयॉर्क स्थित एक अस्पताल के डॉ. एलन टोफिग के अनुसार रात को देर तक जागने से कम उम्र में बूढ़ा लगने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। रोजाना रात को देर तक जागने के कारण आपकी आंखों के आसपास स्थाई काले घेरे बन जाते हैं, जिससे आप बूढ़े दिखने लग जाते हैं। 
ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो कभी नहीं आएगा बुढ़ापा!

गुस्से पर काबू न रखना
 
जर्नल ऑफ बिहेवियरल मेडिसिन में छपे एक शोध में यह तथ्य सामने आया है कि गुस्से की आदत को नहीं छोड़ने के कारण आपके शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। ऐसा होने से आपके शरीर के सेल्स कमजोर हो जाते हैं। इससे आपको उम्र से पहले बुढ़ापा आ जाता है।
ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो बने रहेंगे जवां!

कभी-कभी कसरत करना
 
अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट मेडिसिन के अध्ययन के आधार पर यह आंकड़ा सामने आया है कि सिर्फ अपने बढ़ते वजन को कम करने के लिए कभी-कभी एक्सरसाइज करना आपकी सेहत पर बुरा असर डालता है। ऐसा करने से त्वचा पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं।

ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो बने रहेंगे जवां!

मीठा अधिक खाना 
 
यदि आप मीठा खाने के शौकीन हैं तो यह आपको जल्दी उम्रदराज कर देगा। ज्यादा मीठा खाने से न केवल मोटापा तेजी से बढ़ता है, बल्कि इससे डायबिटीज का खतरा भी बढ़ता है। इतना ही नहीं, ज्यादा मीठा खाने से स्किन ढीली पड़ने लगती है। इससे बुढ़ापे के लक्षण ज्यादा घेरते हैं
ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो बने रहेंगे जवां!

शराब का सेवन
 
अमेरिका के डॉ. गॉर्डन द्वारा किए गए शोध में यह तथ्य सामने आया है कि दिन में 115 एमएल से ज्यादा शराब या ३क्क् एमएल से ज्यादा बीयर पीने से आप जल्दी बूढ़े हो जाते हैं।


ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो बने रहेंगे जवां!

तनाव से घिरे रहना 
 
यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका में हुए एक शोध के अनुसार ऑफिस और घर के तनाव को कम करने के लिए समय न मिल पाने के कारण 48 फीसदी लोगों में जल्दी बूढ़े होने के लक्षण देखे गए हैं।

ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो बने रहेंगे जवां!
धूम्रपान करना
 
अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में छपे आंकड़ों के अनुसार स्मोकिंग करने वाले लोगों की उम्र तेजी से कम होती है। इस अध्ययन में यह बताया गया है कि जो व्यक्ति 35 की उम्र में सिगरेट छोड़ता है, उसकी उम्र तब तक आठ वर्ष अधिक लगने लगती है।
ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो बने रहेंगे जवां!

आंखों को बार-बार मलने से आंखों के पास बुढ़ापे में होने वाली झुर्रियां कम उम्र में ही दिखाई देने लगती हैं।
 
20-30 किलो वजन बार-बार कम-ज्यादा होने से शरीर पर बुढ़ापे के ज्यादा लक्षण दिखने लगते हैं। 


ये हैं वो 10 बातें, जिनका ख्याल रखेंगे तो बने रहेंगे जवां!

45 प्रतिशत पेट के बल सोने वाले लोग अपनी उम्र से पांच वर्ष ज्यादा के लगने लगते हैं।
 
47 प्रतिशत ऐसे लोग जो सप्ताह में तीन से ज्यादा बार शराब पीते हैं, जल्दी बूढ़े हो जाते हैं
 sabhar : bhaskar.com


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शुक्रवार, 11 अक्तूबर 2013

वैज्ञानिकों ने त्वचा कोशिकाओं से बनाया इंसानी भ्रूण

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Scientists

दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। शोधकर्ता त्वचा कोशिकाओं से शुरुआती दौर का मानव भ्रूण तैयार करने में कामयाब हो गए हैं। उनकी इस सफलता से अब पार्किंसन, मल्टीपल सिरोसिस, रीढ़ की हड्डी में चोट और हृदय संबंधी रोगों में प्रत्यारोपण के लिए विशेष उत्तक कोशिकाओं को तैयार करने में आसानी होगी।
अमेरिका के ओरेगन नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने यह अहम उपलब्धि हासिल की है। सेंटर के वरिष्ठ वैज्ञानिक सुखरात मितालीपोव की अगुवाई में शोधकर्ताओं की टीम ने सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मानव शरीर की त्वचा कोशिकाओं को शुरुआती दौर के भ्रूण में तब्दील किया। समाचार पत्र इंडिपेंडेंट के अनुसार वैज्ञानिकों ने क्लोनिंग से डॉली भेड़ के जन्म के 17 वर्ष बाद यह उपलब्धि हासिल की है। अखबार में प्रकाशित शोध पत्र में कहा गया है कि त्वचा कोशिकाओं से भ्रूण तैयार करने में कामयाबी के बाद वैज्ञानिक अब क्लोनिंग के जरिये इंसान पैदा करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गए हैं।
मितालीपोव के मुताबिक अब अंग प्रत्यारोपण आपरेशन के लिए विशेष उत्तक का निर्माण मरीज की त्वचा से करना सहज होगा। उनका कहना था, हमारे शोध का गंभीर रोगों के इलाज के लिए भ्रूणीय स्टेम सेल तैयार करना था। इसका मानव क्लोनिंग संबंधी शोध से कोई लेनादेना नहीं है। जबकि दूसरे वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मानव क्लोनिंग की दिशा में एक अहम कदम है। sabhar :jagaran.com

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अब स्टेम कोशिकाओं से पैदा होंगे बच्चे

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Now stem cells
लंदन। स्टेम कोशिकाओं से मानव अंग विकसित करने के प्रयोगों के बाद अब वैज्ञानिकों ने इन कोशिकाओं से नए जीवन की पैदाइश में सफलता हासिल की है। जापान के शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए गए परीक्षण में इन कोशिकाओं का इस्तेमाल अंडाणु बनाने में किया।
शोधकर्ताओं ने बताया कि परीक्षण सफल रहा और चूहों का जन्म हुआ। कुल मिलाकर प्रयोग में शामिल हुए चूहों के वंश का मूल एक कोशिका है। स्टेम कोशिकाओं की खासियत है कि वह शरीर में किसी भी कोशिका का रूप ले सकती हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले क्योटो यूनिवर्सिटी में स्टेम कोशिकाओं से शुक्राणु बनाने के प्रयोग भी हो चुके हैं। अब इससे एक कदम आगे बढ़कर वैज्ञानिकों ने प्रजनन के लिए स्टेम कोशिकाओं से अंडा बनाने में सफलता पाई है। शोध के तहत वैज्ञानिकों ने पहले त्वचा और भ्रूण से स्टेम कोशिकाएं लीं। इसके बाद अंडाणु बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। इन अंडाणुओं को विकसित करने के लिए इनके आसपास गर्भाशय में मौजूद रहने वाली कोशिकाएं विकसित की गईं और फिर इन्हें एक मादा चूहे के शरीर में प्रत्यर्पित किया गया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस तकनीक से उन दंपतियों की मदद की जा सकती है, जिन्हें संतान का सुख नहीं मिल पा रहा है। अगर शोधकर्ता ऐसा करने में सफलता हासिल कर लेते हैं, तो यह पद्धति जीव-विज्ञान के इतिहास में बाइबल की तरह बन जाएगी। sabhar : jagaran.com

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डॉक्टरों ने मां के गर्भ में की भ्रूण के दिल की सफल सर्जरी

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heart surgery

लॉस एंजलिस। अमेरिकी डॉक्टरों ने अपनी तरह की एक दुर्लभ हार्ट सर्जरी कर एक महिला के गर्भ में पल रहे 25 सप्ताह के भू्रण को नई जिंदगी दी। डॉक्टरों ने अजन्मे शिशु के हृदय की सर्जरी में बाल जैसे महीन तार, बारीक सुई और छोटे गुब्बारे का इस्तेमाल किया। इस सफल सर्जरी के पहले उन्होंने अंगूर पर इसका अभ्यास किया था।लॉस एंजिलिस टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में पता चला कि भूण ऐऑर्टिक स्टिनोसिस से पीड़ित है। इसमें हृदय का महाधमनी वॉल्व काफी संकुचित हो जाता है। इसके चलते उसके बायें वेंट्रकल (निलय) में खून का प्रवाह सामान्य रूप से हो नहीं पा रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी के बिना उसका बायां वेंट्रकल ठीक से विकसित हो नहीं सकता था। उसके हाईपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (एचएवएचएस) के साथ जन्म लेने की संभावना थी जोकि उसके जीवन के लिए गंभीर खतरा हो सकता था। उन्होंने कहा कि अजन्मे शिशु के हृदय के संकीर्ण महाधमनी वाल्व की सर्जरी को फोएटस ऐऑर्टिक वल्वुलोप्लास्टी कहा जाता है। सर्जरी के लिए शिशु और उसकी मां दोनों को बेहोश किया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी के बाद मां और शिशु दोनों ठीक हैं। इस सर्जरी को यहां सीएचए हॉलीवुड प्रेस्बिटेरियन मेडिकल सेंटर में अंजाम दिया गया। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जे प्रुएत्स ने बताया कि सर्जरी के कुछ सप्ताह बाद ही भ्रूण के हृदय में पहले की तुलना खून का प्रवाह ठीक से हो रहा है। sabhar : jagaran.com

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आसाराम करते थे विवाहिताओं का भी शोषण

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शाहजहांपुर [जागरण संवाददाता]। नाबालिग से रेप के आरोप में फंसे आसाराम के कृत्यों की फेहरिस्त में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आसाराम का 'शिकार' सिर्फ नाबालिग लड़कियां और युवतियां ही नहीं, बल्कि सुंदर विवाहिताएं भी थीं। खासकर वे जिनका अपने पति से अक्सर विवाद रहता था। आसाराम ऐसी महिलाओं को फंसाने के लिए त्रिकाल संध्या और ध्यान योग शिविर का सहारा लेते थे।
आसाराम को लेकर यह नया खुलासा किया है शाहजहांपुर निवासी उनके ही तीन पूर्व साधकों ने। आसाराम से दीक्षा लेकर 14 पूनम दर्शन और ध्यान योग शिविर करने वाले ये साधक सात साल से अपनी पत्नी से अलग हैं। अपने अलगाव के लिए वह आसाराम को ही दोषी मानते हैं। उन्होंने बताया कि त्रिकाल संध्या और गुरु को ही सर्वस्व मानने के मंत्र ने उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी।
विरोध को दी जाती गो हत्या की संज्ञापूर्व साधकों ने बताया कि आसाराम के क्रिया-कलापों का जब कोई साधक या उनके घर वाले विरोध करते तो इसे गोहत्या का पाप करार दिया जाता था। उन्होंने भी जब आसाराम की बुराई शुरू कर दी तो उनकी पत्‍‌नी ने भी गोहत्या का पाप बताते हुए उनसे पूरी तरह संबंध तोड़ लिए और अलग रहने लगी।
त्रिकाल पूजासाधकों ने बताया कि आसाराम त्रिकाल पूजा सुबह, दोपहर और शाम को कराते थे। इसके लिए खासकर उन महिलाओं को प्रेरित किया जाता था, जिनका पतियों से कुछ मनमुटाव रहता था। त्रिकाल पूजा दंपतियों के बीच फूट की पहली कड़ी होती थी। विवाद बढ़ने पर उसे वैराग्य की संज्ञा दी जाती थी। पूजा के दौरान पति का स्पर्श भी महापाप बताकर उन्हें लगातार अलग रहने को प्रेरित किया जाता था। एक माह, पांच साल और 17 साल की यह साधना होती थी।
ध्यान योग शिविर त्रिकाल पूजा के बाद पति से अलग होने वाली महिलाओं के लिए ध्यान योग शिविर में बुलाया जाता था। वे 15 दिन तक बापू की ध्यान कुटिया में रहती थीं। वहां आसाराम के अलावा किसी को जाने की अनुमति नहीं होती थी। यहां मोक्ष दिलाने के बहाने उनका शारीरिक शोषण होता था।
शायद, अब आबाद हो जाए परिवारपूर्व साधक आज भी अपनी पत्नी से लगाव रखते हैं। उन्हें भरोसा है कि जिस दिन उनकी पत्नी आसाराम की अंधभक्ति छोड़ देगी, उनका घर फिर से आबाद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आसाराम ने उन्हें विवेक शून्य बना दिया है। हालांकि, जब उन्होंने नजदीक से यह सब देखा तो पूजा-पाठ बंद कर दी और घर से आसाराम की तस्वीर हटा दी। sabhar : jagaran.com

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बढ़ती उम्र में भी बरकरार रहे आकर्षण

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Flawless beauty

बढ़ती उम्र की दहलीज पर कदम रखने के बाद भी जिंदगी का आकर्षण और जोश खत्म नहीं हो जाता। यदि आप अपनी सोच व जीवनशैली में सकारात्मक बदलावों को तरजीह देती हैं तो यह तय मानें कि बढ़ती उम्र में भी आप युवावस्था की तरह स्मार्ट और चुस्त-दुरुस्त बनी रहेंगी। साथ ही जिंदगी की नई पारी में सक्रियता से उपलब्धियों रूपी बेहतर बल्लेबाजी कर सकती हैं।
उम्र बाधक नहीं
उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक परिवर्तन होना तय है, इन्हें रोका तो नहीं जा सकता, पर इस परिवर्तन से होने वाले नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम जरूर किया जा सकता है। इस संदर्भ में नई दिल्ली की 45 वर्षीया दीपा सेठी अपनी जिंदगी की गतिशीलता को अपनी मां नीलम भाटिया को प्रेरणास्रोत मानती हैं। बकौल दीपा, मेरी मां एक कुशल गृहिणी हैं। गृहस्थी संभालने में उनका कोई सानी नहीं। उन्होंने अपनी चार संतानों की परवरिश पर बेहद गंभीरता से ध्यान दिया है। मैं जब स्कूली शिक्षा पूरी करके कालेज में पढ़ रही थी, तब उन्होंने अपनी प्रौढ़ावस्था में घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए फूड प्रिजर्वेशन व प्रोसेसिंग पाठ्यक्रम में दाखिला लिया। उन्होंने जैम, जेली, अचार, मुरब्बा आदि के निर्माण और रखरखाव की नवीनतम जानकारी ली। मुझे ताज्जुब होता है कि कम उम्र में शादी होने और उच्च शिक्षा से वंचित होने के बावजूद मां में कुछ नया सीखने की जिज्ञासा और ललक थी। कोर्स पूरा करने के बाद उन्होंने घर पर ही डिब्बाबंद खाद्य पदार्र्थो का निर्माण शुरू किया। कुछ समय बाद उन्होंने डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ बनाने वाली एक बड़ी कंपनी से करार किया और उसके लिए प्रोडक्ट बनवाने लगीं। सच कहूं तो उनके इस कारोबार ने हमारे घर में खुशहाली की बारिश कर दी। कहने का आशय यह है कि बढ़ती उम्र जिंदगी में कुछ कर गुजरने में बाधक नहीं है।
आशावादी सोच रखें
बढ़ती उम्र में अपने स्वास्थ्य को चुस्त-दुरुस्त रखने में जिंदगी के प्रति आशावादी व यथार्थवादी सोच का अपना एक विशिष्ट महत्व है। चाहे कैसी भी परिस्थितियां आएं अपनी सोच को सकारात्मक रखकर आप तनाव और टेंशन से बच सकती हैं। शहरों में रहने वाली एक बड़ी आबादी में तनाव से संबंधित तमाम समस्याएं नकारात्मक सोच के कारण ही उपजी हैं। इसलिए इनसे बचें।
शौक पालना जरूरी है
बढ़ती उम्र में स्वस्थ व सक्रिय रहने के लिए किसी न किसी प्रकार के रचनात्मक शौक में मशगूल होना बेहद आवश्यक है। इससे आप व्यस्त रहने के साथ-साथ कुछ नए अनुभव भी सीखती हैं। अगर आपके पास समय है तो सामाजिक कार्र्यो में भी बढ़-चढ़कर भाग ले सकती हैं। इससे आप अपने समय का बेहतर उपयोग कर सकती हैं। इससे सामाजिक दायरा बढ़ेगा। साथ ही नए-नए लोगों से संपर्क भी। एकरसता या बोरियत दूर करने के लिए आप पर्यटन स्थलों की भी सैर कर सकती हैं। इससे पूरे शरीर को ताजगी मिलती है। इसी प्रकार अपने मन की शांति के लिए कविता लिखना, कहानी लिखना, पेंटिंग करना आदि समय का बेहतर उपयोग है।
जब जागो तब सबेरा
अच्छी शुरुआत के लिए जरूरी नहीं कि कोई समय तय किया जाए। यह किसी भी समय की जा सकती है। सब कुछ आपकी संकल्प शक्ति या इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है। आप अपनी जिंदगी की दूसरी पारी के बारे में किस तरह का नजरिया रखती हैं। इसी सवाल के जवाब में आपकी प्रसन्नता का राज छिपा है sabhar : jagaran.com

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चंद्रमा के जन्म के दौरान नष्ट होते बची थी पृथ्वी

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न्यूयार्क। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि चंदा मामा यानी चंद्र देवता के जन्म के दौरान हमारी पृथ्वी नष्ट होते-होते बची थी। अपने नए शोध में अमेरिका स्थित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है।चंद्रमा के निर्माण की प्रक्रिया के दौरान ऐसा विशालकाय सौर गुबार पैदा हुआ था, जिसके प्रभाव से धरती का वातावरण नेस्तानाबूद हो सकता था।' हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के जिस दल ने यह दावा किया है, उसमें भारतीय मूल के वैज्ञानिक सुजय मुखोपाध्याय भी शामिल हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि धरती के शुरुआती वातावरण में ग्रहों के आकार के कई खगोलीय पिंडों के एक-दूसरे से टकराने के चलते ही चंद्रमा अस्तित्व में आए। हार्वर्ड के वैज्ञानिकों के हालिया दावे के विपरीत शोधकर्ता अब तक मानते रहे हैं कि चंद्रमा के जन्म समय पैदा हुए विशालकाय प्रभाव से धरती के वातावरण को कोई खतरा नहीं पैदा हुआ होगा। लेकिन हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने इस धारणा को खारिज कर दिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, 'लगभग साढ़े चार अरब वर्ष पहले धरती आज के मुकाबले इतनी तेज रफ्तार से घूमती थी कि उस समय एक दिन करीब दो या तीन घंटे का ही हुआ करता था। इतनी तेज रफ्तार से घूमती हुई पृथ्वी के वातावरण में चंद्र के निर्माण के दौरान पैदा हुए विशालकाय सौर गुबार से यकीनन सब कुछ नष्ट हो सकता था। क्योंकि दो बेहद गतिमान पिंडों के टक्कर से ही भयावह त्रासदी की स्थिति बनती है।' sabhar : jagaran.com

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क्या आप जानते हैं ? मौत के बाद भी शरीर के ये 8 अंग करते रहते हैं काम!

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क्या आप जानते हैं ? मौत के बाद भी शरीर के ये 8 अंग करते रहते हैं काम!

क्या आप यह कल्पना कर सकते हैं कि आपके शरीर के मरने के बाद भी यह ब्रेन जिंदा रहेगा ? सुनने में भरोसा नहीं होता है, लेकिन यह सच है। विख्यात भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग के अनुसार टेक्नॉलॉजी से यह संभव है।
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार कैंब्रिज फिल्म फेस्टिवल के दौरान प्रो. हॉकिंग ने कहा कि मेरा सोचना है कि माइंड में ब्रेन एक प्रोग्राम की तरह है। यह एक कंप्यूटर की तरह है इसलिए सैद्धांतिक तौर पर कंप्यूटर में ब्रेन की कॉपी करना भी संभव है। यही कारण है कि मौत के बाद भी ब्रेन एक रूप में जीवित रहता है।
एक स्वतंत्र रिसर्च ग्रुप ब्रेन प्रिजर्वेशन फाऊंडेशन एक प्लास्टिक एम्बेडिंग प्रोसेसर विकसित करने में लगा हुआ है। यह प्रक्रिया ब्रेन को प्लास्टिक में बदलने से जुड़ी हुई है और इसे एक बहुत बारीक पट्टियों में खींचा जा रहा है।
मस्तिष्क के अतिरिक्त भी शरीर में ऐसे कई फंक्शन हैं, जो मौत के बाद भी कुछ मिनट, घंटों और दिनों तक जारी रहते हैं। दुनिया के बहुत से वैज्ञानिक बॉडी के उन अंगों के रहस्य खोजने में लगे हैं, जो मौत के बाद भी जीवित रहते हैं।
- नाखून और बालों का बढऩा : यह एक तकनीकी फंक्शन है न कि वास्तविक फंक्शन। बॉडी अधिक बाल और नाखून पैदा नहीं करती है, लेकिन ये दोनों मौत के बाद भी बढ़ते हैं। वास्तव में स्किन से नरमी खत्म होती है और पीछे की ओर खिंच जाती है, जिससे बाल बाहर की ओर अधिक निकल आते हैं और नाखून बढ़े हुए दिखाई देते हैं।
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त्वचा की सेल बढ़ती है : शरीर के मृत होने की प्रक्रिया में यह एक अन्य फंक्शन है। जब ब्लड सर्कुलेशन में कमी आती है तो इससे कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क की मौत हो जाती है, जबकि अन्य सेल्स का जीवित रहना जरूरी नहीं है लेकिन स्किन सेल्स कुछ दिन तक जीवित रह सकती हैं।
- मूत्र उत्सर्जन : हम यह सोचते हैं कि पेशाब करना एक ऐच्छिक फंक्शन है। ब्रेन मूत्र की पेशी को नियंत्रित करता है। हालांकि कठोर खांचा मशल्स को कड़ा कर देता है, इससे पेशाब नहीं होती है, लेकिन जब मौत के कुछ देर बाद मशल रिलैक्स होती है तो मौत के बाद भी पेशाब हो जाती है।
-पाचन : हम यह भूल जाते हैं कि हमारे शरीर में कई जीव भी होते हैं। मौत होने के बाद भी बैक्टीरिया शरीर में जिंदा बने रहते हैं, इनमें से बहुत से पैरासाइटिक भी होते हैं। ये डाइजेशन में हमारी मदद करते हैं। मौत के बाद भी ये अपना काम करते रहते हैं। बहुत से पैरासाइट आंतों के अंदर होते हैं और गैस बनाते हैं।
क्या आप जानते हैं ? मौत के बाद भी शरीर के ये 8 अंग करते रहते हैं काम!

 शिश्न का खड़ा होना और वीर्य का स्राव होना : जब हार्ट बॉडी के अंदर शरीर के खून को रोकता है तो यह एक छोटे से एरिया में इकट्ठा हो जाता है। मौत के बाद कभी-कभी कैलशियम के लिए झिल्ली पारगम्य हो जाती है और सेल्स इतनी अधिक नहीं फैलती हैं, जितना आयन (एक मॉलीक्युलर जो इलेक्ट्रिकली चार्ज होता है) बाहर आते हैं। इनके बाहर आने के कारण मसल सिकुड़ती हैं और इससे मौत के बाद शरीर कड़ा हो जाता है और इससे स्खलन हो सकता है।
क्या आप जानते हैं ? मौत के बाद भी शरीर के ये 8 अंग करते रहते हैं काम!

 मांसपेशियों (मसल)में हरकत : ब्रेन की डेथ होने के बाद भी शरीर के अन्य हिस्सों में स्नायु संस्थान सक्रिय हो सकता है। मौत के बाद भी शरीर की हलचल को अक्सर देखा गया है।  दरअसल नर्व स्पाइनल कॉर्ड को सिग्नल भेजती हैं न कि ब्रेन को। इससे मांसपेशियों में हरकत और ऐंठन दिखाई देती है

आवाज निकलना : मौत होने के बाद शरीर की सभी मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं, इसमें वोकल कॉर्ड्स (स्वर तंतु) भी शामिल है। मौत होने पर मांस पेशियां कठोर होती हैं इससे वोकल कॉर्ड्स के अकडऩे से भी डेडबॉडी से एक डरावनी आवाज निकलती है। लोगों को कई बार मृत शरीर से कराहने, आह, और चरमराने की आवाजें सुनाई देती हैं।
- जन्म देना : कभी बहुत ही रेयर घटनाक्रम में देखा गया है कि  गर्भवती महिलाएं मौत के बाद भ्रूण बाहर आ जाता है। यह शरीर के अंदर गैस बनने और मांस के साफ्ट होने के कारण होता है। इस तरह की घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं और कई बार अफवाहें भी आती रहती हैं। sabhar : bhakar.com

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इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

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इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

आज हमे कई आधुनिक चीजें काफी आसानी से मिल जाती हैं और ये काफी एडवांस भी हैं। लेकिन  कुछ लोगों को ऐसी चीजों को इजाद करने या रिसर्च में हासिल करने में अपनी जान तक गंवानी पड़ी हैं।
ये प्रयोग बेहद कठिन और जानलेवा थे,लेकिन प्रयोगकर्ताओं ने अपनी जान दांव पर लगा कर इन्हें अंजाम तक पहुंचाने की भरपूर कोशिश की थी।
हम आपको यहां कुछ प्रयोगकर्ताओं और उनके ऐसे प्रयोगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

लिक्विड से संचालित रॉकेट कार (1930),  वैज्ञानिक मैक्स वेलियर  :  एक ऑस्टे्रलियन अनुसंधानकर्ता मैक्स वेलियर की 17 मई 1930 को तब मौत हो गई, जब वह बर्लिन में एक एल्कोहल से भरा रॉकेट टेस्ट बेंच में फट गया। 1928-29 में वेलियर ने फ्रित्ज वोन ओपेल के साथ रॉकेट पावर्ड कारों और एयरक्राफ्ट पर काम किया था। इसके बाद वेलियर लिक्विड से भरे रॉकेट्स पर काम कर रहे थे। उन्होंने ने 19 अप्रैल 1930 को राकेट कार की टेस्ट ड्राइव की थी। यह कार लिक्विड से संचालित थी। एक माह बार इस कार के टेस्ट में विस्फोट हो गया।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

-पैराशूट शूट (1912), खोजकर्ता- फ्रांज रिचेल्ट : ऑस्ट्रेलियन में जन्में फ्रैंच टेलर, शोधकर्ता और पैराशूटिंग में अग्रणी फ्रांज रिचेल्ट ने 4 फरवरी 1912 को एफिल टॉवर से छलांग लगाई। वह स्वयं का डिजाइन किया हुआ पैराशूट को टेस्ट करना चाहता था। हालांकि उसके दोस्तों और दर्शकों ने उसे काफी रोकने की कोशिश की, लेकिन वह टॉवर की पहले प्लेटफार्म से कूदा। दुर्भाग्य से उसका पैराशूट काम नहीं कर सका और वह चीन बर्फीली जमीन पर गिरा और उसकी जान चली गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान
शॉक ऑब्जर्वर (1985), प्रयोगकर्ता करेल सॉसेक : करेल सॉसेक एक प्रोफेशल स्टंटमैन था । वह कैप्शूल की खोज और नियाग्रा फॉल्स में इसकी सवारी करके विख्यात हुआ था। ऐसा करने में वह घायल हो गया और उसे कुछ चोटें भी आईं।
करेल सॉसेक ने 19 जनवरी1985 को एक कंपनी को टेक्सास स्थित ह्यूस्टन एस्ट्रोडोम से बैरल ड्राप करने का खर्च उठाने के लिए तैयार कर लिया था। 180 फीट ऊंचे स्ट्रक्चर से एक विशेष वॉटरफाल तैयार किया गय और एक टैंक भी खोदा गया था। लेकिन बैरल का रिम टैंक के पानी में गिरने की बजाय इसकी रिम से टकरा गया। इससे कैप्सूल फट गया। इससे सॉसेक को गंभीर चोंटे आई और दूसरे दिन उसकी मौत हो गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

 ऑक्सीजन रीब्रीदर (1876), प्रयोगकर्ता - हेनरी फ्लेस : ब्रिटिश वैज्ञानिक हेनरी फ्लेस ने 1876 में एक क्लोज सर्किट ऑक्सीजन रीब्रीदर की खोज की थी। इस शूट का प्रयोग कंप्रेस्ड हवा के बजाय कंप्रेस्ड ऑक्सीजन के लिए किया जाता था। उनकी इस खोज का मूल रूप ये यह इरादा था कि इसका प्रयोग भरे हुए जहाज के चेंबर में लगे लोहे के दरवाजों को रिपेयर करने में किया जा सके। फ्लेस ने अपने प्रयोग को पानी के 30 फीट अंदर आजमाना तय किया। दुर्भाग्य से उनकी ऑक्सीजन के प्रेशर से मौत हो गई। ऑक्सीजन अंडर प्रेशर होने पर इंसान के लिए नुकसानदायक होती है।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान
- रोटरी प्रिंटिंग प्रेस (1867), विलियम बुलोक : विलियम बुलोक एक अमेरिकी अनुसंधानकर्ता थे। उन्होंने 1863 में एक वेब रोटरी प्रिंटिंग प्रेस का अविष्कार किया था। बुलोक के इस अविष्कार ने प्रिटिंग इंडस्ट्री में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। एक बार जब वह अपनी इस नई प्रिटिंग मशीन को चला रहे थे तो उसी दौरान उन्होंने इसकी ड्राइविंग बेल्ट को किक मार मार दी। पुल्ली में पैर लगा और वह मशीन में बुरी तरह फंस गए। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। ऑपरेशन के दौरान पेनसेल्वानिया में 12 अप्रैल 1867 को मौत हो गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

- रीब्रीदिंग डिवाइस : (1772),  सिएर फ्रेमिनेट(वैज्ञानिक):
- 1772 में फ्रांसीसी सिएर फ्रेमिनेट ने स्कूबा डाइवर्स के लिए रीब्रीदिंग डिवाइस का अविष्कार करने की कोशिश में जान चली गई थी। यह डिवाइस बैरल से निकली हवा को रीसाइकिल करती है। दुर्भाग्य से इसके प्रयोग के दौरान ऑक्सीजन की कमी होने पर फ्रेमिनेट की मौत हो गई। यह डिवाइस डाइवर्स को पानी के अंदर 20 मिनट तक रखना खतरनाक साबित हुई। sabhar : bhaskar.com



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