मौत के 25 साल बाद पुनर्जन्म ले वापस लौटी प्रेमिका
आज़ादी के कुछ सालों बाद ग्रेजुएशन कर रहे मनोज (बदला हुआ नाम) और शांति (बदला हुआ नाम) एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे। दोनों एमए के बाद शादी करने वाले थे।
मनोज ने शमशान घाट पर अपनी आंखों के सामने प्रेमिका को जलते देखा। शांति ने मानो उसी समय मनोज के कानों में ये कहा - 'मैं वापस आऊंगी और अगले जन्म में तुम्हारी बंनूगी।'
वह कोलकाता काम करने चला गया। 25 साल बाद उसकी मुलाकात ऐसे लोगों से हुई जो मृत आत्माओं से संपर्क साध लेते हैं। मनोज शांति की आत्मा से मिलना चाहता था।
मृत आत्माओं से संपर्क साधने वाले मिथलेश बाबू पितृ पक्ष की अमावस्या के दिन अपने घर के बड़े से हॉल में मृत आत्माओं से संपर्क लिए साधना को बैठ गए।
उन्होंने अपनी 20 वर्षीय बेटी मोहिनी (बदला हुआ नाम) को सामने बिठाया और साधना शुरू कर दी। मनोज का मिथलेश बाबू ने मोहिनी से परिचय करवाया।
धीरे-धीरे हॉल का माहौल रहस्यमय होता गया।
मोहिनी की आवाज भारी होने लगी, उसने उठकर मनोज को गले से लगा लिया और बोलने लगी 'मैं सुरभि हूं, जिसका तुमने शांति के जाने के बाद खूब इस्तेमाल किया और मरने के लिए सड़क पर छोड़ दिया।'
वह शांति की मौत के बाद मनोज के नजदीक आ गई थी। बाद में मनोज और सुरभि का रोड एक्सीडेंट हुआ, जिसमें सुरभि की मौत हो गई।
साधना फिर से शुरू करते हुए उन्होंने कुछ मंत्रों को पढ़ा और मोहिनी गिर पड़ी। चंद मिनटों बाद वह तपाक से फिर खड़ी हो गई। मोहिनी के कंठ से निकला - 'बेटा क्या कर रहे हो, सुरभि अतृप्त आत्मा है।
वह तुम्हारा जीवन बर्बाद कर देगी। अमावस्या की वजह से मैंने तुम्हें बचा लिया।' यह मनोज की मां थी। मां की आत्मा मोहिनी के शरीर में अचानक खूब जोर-जोर से हंसने लगी। मोहिनी के मुख से भारी आवाज आई - तुझे तेरा प्यार मिल गया, जिसकी वजह से तू 25 सालों तक भटकता रहा।
मोहिनी ही तेरी शांति है, जिसने इस जन्म में तुझे अपने पास बुला लिया है। मां की आत्मा मोहिनी के शरीर से निकलते ही मोहिनी को सबकुछ याद आ गया।
मनोज को सहज ही विश्वास नहीं हो पा रहा था। मोहिनी ने जब कुछ पुरानी बातों का जिक्र मनोज से किया तो वह समझ गया कि शांति का पुनर्जन्म हुआ है। उम्र के फासले के बाद भी दोनों विवाह को तैयार हो गए।