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गंजे सिर पर आएंगे बाल, अमेरिकी रिसर्चर्स ने खोजी गंजेपन की नई दवा

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न्यूयॉर्क।  अगर आपके सिर के बाल पूरी तरह से झड़ गए हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। अमेरिका के कुछ रिसर्चर्स ने ऐसी दवा खोजने का दावा किया है जो गंजे लोगों के सिर पर बाल उगाने में मददगार हो सकेगी। अभी इस दवा का यूज कैंसर के इलाज के लिए किया जा रहा है।  यह दावा अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर में किए गए एक एक्सपेरिमेंट के बाद किया गया है। रिसर्चर्स एन्जेला क्रिस्टियानो और सहयोगियों द्वारा किए गए इस एक्सपेरिमेंट में कैंसर के इलाज के काम आ रही रुक्सोलिटाइनिब और टोफासिटाइनिब नामक दवाएं गंजेपन के इलाज में भी यूजफुल पाई गई है। रिसचर्च ने चूहों पर यह सफल एक्सपेरिमेंट किया है। जिन चूहों पर यह एक्सपेरिमेंट किया गया, उनके शरीर के सारे बाल गिर चुके थे। रिसर्चर्स का कहना है कि बाल झड़ने की समस्या वाले इन चूहों की स्किन पर इन दवाओं का पांच दिनों तक लेप किया गया और दस दिनों के भीतर ही बालों की जड़ें फूटनें लगीं। लगभग तीन हफ्ते में ही काफी घने बाल आ गए। रिसर्चर्स ने एलोपेशिया एरिटा नामक बीमारी के इलाज के लिए चूहों पर यह एक्सपेरिमेंट किया था। मेल पैटर्न बाल्डनैस के लिए ज़िम्मेदार ए

पौरुष बचाना चाहते हैं तो तुरंत छोड़ दीजिए ये 10 गंदी आदतें

क्या आप जानते हैं अपनी उन आदतों के बारे में जो आपके पौरुष को घटा रही हैं? जाने आनजाने आप ऐसे कई काम करते होंगे जो आपके स्पर्म काउंट के लिए घातक हैं। हो सकता है इसमें से कुछ आप अभी भी कर रहे हों। देखिए क्या हैं वह आदतें और संभल जाइए।गर्म पानी से नहाने में शरीर को तो आराम मिलता है लेकिन यह मर्दानगी के लिए घातक है क्योंकि टेस्टिकल्स का तापमान बढ़ जाता है इसलिए यह स्पर्म काउंट भी घटाता है और उनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।बहुत कसे अंतरवस्त्र पहनने से टेस्टिकल्स में गर्मी बढ़ती है और स्पर्म काउंट घटता है। ब्रीफ के बजाए बॉक्सर पहने तो अच्छा है।सोया से बनीं कोई भी चीज आपके लिए सही नहीं है। इसमें ईसोफ्लेवोन्स होते हैं जो स्पर्म की गुणवत्ता भी खराब करते हैं।स्पर्म काउंट सही रखने के लिए यह भी जरूरी है कि नियमित रूप से सेक्स करते रहें। बहुत समय तक ऐसा न करने से स्पर्म अपना आकार बदल लेते हैं और पुराने होने लगते हैं। मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाले रेडिएशन का भी स्पर्म काउंट पर बुरा असर पड़ता है। खास तौर से लैपटॉप को गोद में रख कर काम करने पर। शराब पीने से भी टेस्टॉसटेरॉन की मात्रा कम होती है। इस

व‌िज्ञान आत्मा और भूत-प्रेतों की दुन‌िया

लिंग परिवर्तन अजय’ बन गया ‘आकृति’

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वडोदरा।  शहर के रावपुरा इलाके में रहने वाले अजय की इच्छा आखिरकार पूरी हो ही गई। वह पिछले 6 सालों से लिंग परिवर्तन करवाकर ‘युवती’ बनना चाहता था और वडोदरा के सयाजी हॉस्पिटल के चक्कर लगा रहा था। जबकि सेवासदन और खुद केंद्र सरकार ने तीन साल पहले ही अजय को ‘आकृति पटेल’ नामक ‘युवती’ का दर्जा दे दिया था। इसके बाद भी उसका लिंग परिवर्तन नहीं हो सका था। वह लगातार हॉस्पिटल के चक्कर लगाता रहा। अजय ने कोशिश जारी रखते हुए अपनी आवाज मीडिया के जरिए दुनिया तक पहुंचाई और उसकी मेहनत रंग ले आई। शुक्रवार को उसकी सफल सर्जरी हो गई और इस तरह वह पूर्ण रूप से स्त्री बन गया। इस सर्जरी को डॉ. गौतम अमीन (मनोचिकित्सक), डॉ. उमेश शाह (कॉस्मेटिक-प्लास्टिक सर्जन), डॉ. संजीव शाह (सर्जन) और डॉ. कमलेश परीख (किडनी स्पेशलिस्ट) की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। आकृति के बताए अनुसार गत 12 फरवरी 2009 में उसने लिंग परिवर्तन के लिए सयाजी हॉस्पिटल में संपर्क किया था। शुरुआत में अस्पताल के डॉक्टर्स ने यह कहकर उसे चलता कर दिया था कि अस्पताल में इस तरह का ऑपरेशन नहीं होता। इसके बाद 2005 में एक युवक ने सयाजी हॉस्पिटल मे

जहां लोग दिन में न चाहते हुए भी सो जाते हैं

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कजाकिस्तान में एक गांव ऐसा है, जहां लोग दिन में न चाहते हुए भी सो जाते हैं। इस बीमारी के कारण आधा गांव खाली हो गया है। अब तक इसका कोई ठोस कारण समझ नहीं आया है। दुनियाभर में कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें रात में भी नींद नहीं आती। इससे वे काफी परेशान भी रहते हैं। लेकिन कजाकिस्तान में एक गांव ऐसा है, जिसके रहवासी दिन में ही अपने आप सोने लगते हैं। इनके जागने का हिसाब-किताब भी अजीब है। कभी दो घंटे में ही जाग जाते हैं तो कभी दो दिन भी लग जाते हैं। कजाकिस्तान के इस गांव का नाम कलाची है। यहां के लोग जब दिन में सोने के बाद जागते हैं तो इन्हें कुछ भी याद नहीं रहता। कहा जाता है कि कई लोग जागने के बाद या तो भविष्य की बातें करने लगते हैं या फिर अपने अतीत की। उन्हें कभी परियां दिखाई देती हैं तो कभी दीवारों पर चलते हुए मेंढक। दिन होते ही किसी भी समय लोग सो जाते हैं। इन्हें जगाने की चाहे कितनी भी कोशिश करो, सब व्यर्थ है। यहां तक कि स्कूल जाने वाले अधिकतर बच्चे भी दिन के समय सो जाते हैं। यह सिलसिला मार्च, 2013 से चल रहा है। शुरुआत में गांव की आबादी 810 थी और करीब 140 लोग इससे पीड़ित थे। लेकिन इस अजीबो

जमीन के नीचे मिली थी ये 'देवताओं की बस्ती', 1400 साल पुराने मंदिर भी मिले

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ग्वालियर.  ग्वालियर से 30 किलोमीटर दूर पढ़ावली स्थित पहाड़ी पर ये है देवताओं की बस्ती। करीब 1400 साल से अधिक पुराने इन सैकड़ों मंदिरों में देवी-देवताओं के अलावा ऋषि मुनि के स्थान हैं। एक हजार साल पहले ये मंदिर भूकंप की भैंट चढ़ गायब था। 2005 में खुदाई के दौरान इसका पता चला। अब तक यहां 95 मंदिर खोजे जा चुके हैं और 110 होना बाकी हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में हजारों मंदिर और दबे हुए हैं। sabhar : http://www.bhaskar.com/