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शनिवार, 23 सितंबर 2023

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य

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महान सम्राट विक्रमादित्य का इतिहास 

भारत में चक्रवर्ती सम्राट उसे कहा जाता है जिसका की संपूर्ण भारत में राज रहा है। ऋषभदेव के पुत्र राजा भरत पहले चक्रवर्ती सम्राट थे, जिनके नाम पर ही इस अजनाभखंड का नाम भारत पड़ा। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य भी चक्रवर्ती सम्राट थे। विक्रमादित्य का नाम विक्रम सेन था। विक्रम वेताल और सिंहासन बत्तीसी की कहानियां महान सम्राट विक्रमादित्य से ही जुड़ी हुई है।

 

 

विक्रमादित्य का परिचय : विक्रम संवत अनुसार विक्रमादित्य आज से 2288 वर्ष पूर्व हुए थे। नाबोवाहन के पुत्र राजा गंधर्वसेन भी चक्रवर्ती सम्राट थे। राजा गंधर्व सेन का एक मंदिर मध्यप्रदेश के सोनकच्छ के आगे गंधर्वपुरी में बना हुआ है। यह गांव बहुत ही रहस्यमयी गांव है। उनके पिता को महेंद्रादित्य भी कहते थे। उनके और भी नाम थे जैसे गर्द भिल्ल, गदर्भवेष। गंधर्वसेन के पुत्र विक्रमादित्य और भर्तृहरी थे। विक्रम की माता का नाम सौम्यदर्शना था जिन्हें वीरमती और मदनरेखा भी कहते थे। उनकी एक बहन थी जिसे मैनावती कहते थे। उनके भाई भर्तृहरि के अलाका शंख और अन्य भी थे।

 

 

उनकी पांच पत्नियां थी, मलयावती, मदनलेखा, पद्मिनी, चेल्ल और चिल्लमहादेवी। उनकी दो पुत्र विक्रमचरित और विनयपाल और दो पुत्रियां प्रियंगुमंजरी (विद्योत्तमा) और वसुंधरा थीं। गोपीचंद नाम का उनका एक भानजा था। प्रमुख मित्रों में भट्टमात्र का नाम आता है। राज पुरोहित त्रिविक्रम और वसुमित्र थे। मंत्री भट्टि और बहसिंधु थे। सेनापति विक्रमशक्ति और चंद्र थे।

 

कलि काल के 3000 वर्ष बीत जाने पर 101 ईसा पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का जन्म हुआ। उन्होंने 100 वर्ष तक राज किया। -(गीता प्रेस, गोरखपुर भविष्यपुराण, पृष्ठ 245)। विक्रमादित्य भारत की प्राचीन नगरी उज्जयिनी के राजसिंहासन पर बैठे। विक्रमादित्य अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे जिनके दरबार में नवरत्न रहते थे। कहा जाता है कि विक्रमादित्य बड़े पराक्रमी थे और उन्होंने शकों को परास्त किया था।

 

 

सम्राट विक्रमादित्य अपने राज्य की जनता के कष्टों और उनके हालचाल जानने के लिए छद्मवेष धारण कर नगर भ्रमण करते थे। राजा विक्रमादित्य अपने राज्य में न्याय व्यवस्था कायम रखने के लिए हर संभव कार्य करते थे। इतिहास में वे सबसे लोकप्रिय और न्यायप्रीय राजाओं में से एक माने गए हैं। 


 

कहा जाता है कि मालवा में विक्रमादित्य के भाई भर्तृहरि का शासन था। भर्तृहरित के शासन काल में शको का आक्रमण बढ़ गया था। भर्तृहरि ने वैराग्य धारण कर जब राज्य त्याग दिया तो विक्रम सेना ने शासन संभाला और उन्होंने ईसा पूर्व 57-58 में सबसे पहले शको को अपने शासन क्षेत्र से बहार खदेड़ दिया। इसी की याद में उन्होंने विक्रम संवत की शुरुआत कर अपने राज्य के विस्तार का आरंभ किया। विक्रमादित्य ने भारत की भूमि को विदेशी शासकों से मुक्ति कराने के लिए एक वृहत्तर अभियान चलानाय। कहते हैं कि उन्होंने अपनी सेना की फिर से गठन किया। उनकी सेना विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना बई गई थी, जिसने भारत की सभी दिशाओं में एक अभियान चलाकर भारत को विदेशियों और अत्याचारी राजाओं से मुक्ति कर एक छत्र शासन को कायम किया।

 

 

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ऐतिहासिक व्यक्ति : कल्हण की 'राजतरंगिणी' के अनुसार 14 ई. के आसपास कश्मीर में अंध्र युधिष्ठिर वंश के राजा हिरण्य के नि:संतान मर जाने पर अराजकता फैल गई थी। जिसको देखकर वहां के मंत्रियों की सलाह से उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने मातृगुप्त को कश्मीर का राज्य संभालने के लिए भेजा था। नेपाली राजवंशावली अनुसार नेपाल के राजा अंशुवर्मन के समय (ईसापूर्व पहली शताब्दी) में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के नेपाल आने का उल्लेख मिलता है।

 

 

राजा विक्रम का भारत की संस्कृत, प्राकृत, अर्द्धमागधी, हिन्दी, गुजराती, मराठी, बंगला आदि भाषाओं के ग्रंथों में विवरण मिलता है। उनकी वीरता, उदारता, दया, क्षमा आदि गुणों की अनेक गाथाएं भारतीय साहित्य में भरी पड़ी हैं।

 

विक्रमादित्य के नवरत्नों के नाम: नवरत्नों को रखने की परंपरा महान सम्राट विक्रमादित्य से ही शुरू हुई है जिसे तुर्क बादशाह अकबर ने भी अपनाया था। सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों के नाम धन्वंतरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, बेताल भट्ट, घटखर्पर, कालिदास, वराहमिहिर और वररुचि कहे जाते हैं। इन नवरत्नों में उच्च कोटि के विद्वान, श्रेष्ठ कवि, गणित के प्रकांड विद्वान और विज्ञान के विशेषज्ञ आदि सम्मिलित थे।

 


 

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विक्रम संवत के प्रवर्तक : देश में अनेक विद्वान ऐसे हुए हैं, जो विक्रम संवत को उज्जैन के राजा विक्रमादित्य द्वारा ही प्रवर्तित मानते हैं। इस संवत के प्रवर्तन की पुष्टि ज्योतिर्विदाभरण ग्रंथ से होती है, जो कि 3068 कलि अर्थात 34 ईसा पूर्व में लिखा गया था। इसके अनुसार विक्रमादित्य ने 3044 कलि अर्थात 57 ईसा पूर्व विक्रम संवत चलाया।

 

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अरब तक फैला था विक्रमादित्य का शासन : 

महाराजा विक्रमादित्य का सविस्तार वर्णन भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। विक्रमादित्य के बारे में प्राचीन अरब साहित्य में वर्णन मिलता है। उस वक्त उनका शासन अरब तक फैला था। दरअसल, विक्रमादित्य का शासन अरब और मिस्र तक फैला था और संपूर्ण धरती के लोग उनके नाम से परिचित थे।

 

इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य का राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा ईरान, इराक और अरब में भी था। विक्रमादित्य की अरब विजय का वर्णन अरबी कवि जरहाम किनतोई ने अपनी पुस्तक 'सायर-उल-ओकुल' में किया है। पुराणों और अन्य इतिहास ग्रंथों के अनुसार यह पता चलता है कि अरब और मिस्र भी विक्रमादित्य के अधीन थे।

 

 

तुर्की के इस्ताम्बुल शहर की प्रसिद्ध लायब्रेरी मकतब-ए-सुल्तानिया में एक ऐतिहासिक ग्रंथ है 'सायर-उल-ओकुल'। उसमें राजा विक्रमादित्य से संबंधित एक शिलालेख का उल्लेख है जिसमें कहा गया है कि '…वे लोग भाग्यशाली हैं, जो उस समय जन्मे और राजा विक्रम के राज्य में जीवन व्यतीत किया। वह बहुत ही दयालु, उदार और कर्तव्यनिष्ठ शासक था, जो हरेक व्यक्ति के कल्याण के बारे में सोचता था। ...उसने अपने पवित्र धर्म को हमारे बीच फैलाया, अपने देश के सूर्य से भी तेज विद्वानों को इस देश में भेजा ताकि शिक्षा का उजाला फैल सके। इन विद्वानों और ज्ञाताओं ने हमें भगवान की उपस्थिति और सत्य के सही मार्ग के बारे में बताकर एक परोपकार किया है। ये तमाम विद्वान राजा विक्रमादित्य के निर्देश पर अपने धर्म की शिक्षा देने यहां आए…।'

 


 

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अन्य सम्राट जिनके नाम के आगे विक्रमादित्य लगा है:- यथा श्रीहर्ष, शूद्रक, हल, चंद्रगुप्त द्वितीय, शिलादित्य, यशोवर्धन आदि। दरअसल, आदित्य शब्द देवताओं से प्रयुक्त है। बाद में विक्रमादित्य की प्रसिद्धि के बाद राजाओं को 'विक्रमादित्य उपाधि' दी जाने लगी।

 

विक्रमादित्य के पहले और बाद में और भी विक्रमादित्य हुए हैं जिसके चलते भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के बाद 300 ईस्वी में समुद्रगुप्त के पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय अथवा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य हुए।

 

 

एक विक्रमादित्य द्वितीय 7वीं सदी में हुए, जो विजयादित्य (विक्रमादित्य प्रथम) के पुत्र थे। विक्रमादित्य द्वितीय ने भी अपने समय में चालुक्य साम्राज्य की शक्ति को अक्षुण्ण बनाए रखा। विक्रमादित्य द्वितीय के काल में ही लाट देश (दक्षिणी गुजरात) पर अरबों ने आक्रमण किया। विक्रमादित्य द्वितीय के शौर्य के कारण अरबों को अपने प्रयत्न में सफलता नहीं मिली और यह प्रतापी चालुक्य राजा अरब आक्रमण से अपने साम्राज्य की रक्षा करने में समर्थ रहा।

 

 

पल्‍लव राजा ने पुलकेसन को परास्‍त कर मार डाला। उसका पुत्र विक्रमादित्‍य, जो कि अपने पिता के समान महान शासक था, गद्दी पर बैठा। उसने दक्षिण के अपने शत्रुओं के विरुद्ध पुन: संघर्ष प्रारंभ किया। उसने चालुक्‍यों के पुराने वैभव को काफी हद तक पुन: प्राप्‍त किया। यहां तक कि उसका परपोता विक्रमादित्‍य द्वितीय भी महान योद्धा था। 753 ईस्वी में विक्रमादित्‍य व उसके पुत्र का दंती दुर्गा नाम के एक सरदार ने तख्‍ता पलट दिया। उसने महाराष्‍ट्र व कर्नाटक में एक और महान साम्राज्‍य की स्‍थापना की, जो राष्‍ट्र कूट कहलाया।

 

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शुक्रवार, 22 सितंबर 2023

महिला आरक्षण बिल संसद से पास, किसने क्या कहा

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महिला आरक्षण बिल संसद से पास, किसने क्या कहा 

महिला आरक्षण बिल लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा में भी पारित हो गया है.


इस विधेयक में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है. महिला आरक्षण के लिए पेश किया गया विधेयक 128वां संविधान संशोधन विधेयक है.


इस बिल को लागू करने की राह में कई रोड़े हैं, जिसके चलते लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.


बिल में कहा गया है कि जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसके प्रावधान लागू हो सकेंगे.

परिसीमन में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर सीमाएं तय की जाती हैं.

पिछला देशव्यापी परिसीमन 2002 में हुआ था. इसे 2008 में लागू किया गया था.


परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के भंग होने के बाद महिला आरक्षण प्रभावी हो सकता है.


पक्ष में कितने वोट

केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया था.


संसद की नई इमारत में 19 सितंबर को कार्यवाही शुरू हुई. पहले ही दिन क़ानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक पेश किया.


20 सितंबर को लोकसभा में करीब सात घंटे की चर्चा के बाद यह बिल पास हुआ. इसके पक्ष में 454 मत पड़े, जबकि दो सांसदों ने इसके विरोध में वोट दिया.


21 सितंबर, गुरुवार को 'नारी शक्ति वंदन विधेयक' राज्यसभा से पारित हुआ, जहां 215 सांसदों ने इसके समर्थन में वोट डाले. यहां एक वोट भी इसके विरोध में नहीं पड़ा.


राज्यसभा में बिल के पास होते ही संसद का विशेष सत्र भी खत्म हो गया. सत्र के आखिरी यानी चौथे दिन महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाई.

विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.


इसका मतलब यह हुआ कि लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.


लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सीटें आरक्षित हैं. इन आरक्षित सीटों में से एक तिहाई सीटें अब महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.


इस समय लोकसभा की 131 सीटें एससी-एसटी के लिए आरक्षित हैं. महिला आरक्षण विधेयक के क़ानून बन जाने के बाद इनमें से 43 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.


इन 43 सीटों को सदन में महिलाओं के लिए आरक्षित कुल सीटों के एक हिस्से के रूप में गिना जाएगा.


इसका मतलब यह हुआ कि महिलाओं के लिए आरक्षित 181 सीटों में से 138 ऐसी होंगी जिन पर किसी भी जाति की महिला को उम्मीदवार बनाया जा सकेगा यानी इन सीटों पर उम्मीदवार पुरुष नहीं हो सकते. Sabhar BBC.COM 

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मंगलवार, 19 सितंबर 2023

अश्लील वीडियो को इंटरनेशनल रेसलर ने साजिश बताया:अंशु मलिक बोलीं- लड़की हिमाचल, लड़का रोहतक का, बिना सच जाने मुझे दोषी करार दिया

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अश्लील वीडियो को इंटरनेशनल रेसलर ने साजिश बताया:अंशु मलिक बोलीं- लड़की हिमाचल, लड़का रोहतक का, बिना सच जाने मुझे दोषी करार दिया 

हरियाणा की इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए अश्लील वीडियो का खंडन किया है।

अंशु मलिक ने कहा- मेरा इस वीडियो से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद मुझ पर गंदे कमेंट्स किए जा रहे हैं। मैं किसी बड़ी साजिश का शिकार हुई हूं। मैं और मेरा परिवार मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहे हैं।


वीडियो में दिख रहा लड़का रोहतक और लड़की हिमाचल प्रदेश की है। वे दोनों रिलेशनशिप में हैं। अंशु ने लोगों से बिना सच्चाई जाने किसी भी नतीजे पर न पहुंचने की विनती की है।


अंशु ने लिखा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। आखिर में सत्य की जीत और झूठ की हार हुई।


अश्लील वीडियो को इंटरनेशनल रेसलर ने साजिश बताया:अंशु मलिक बोलीं- लड़की हिमाचल, लड़का रोहतक का, बिना सच जाने मुझे दोषी करार दिया


पानीपत3 घंटे पहले

इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने कहा कि उनके बारे में फैलाए गए झूठ की वजह से परिवार को मेंटल ट्रॉमा से गुजरना पड़ा। - Dainik Bhaskar

इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने कहा कि उनके बारे में फैलाए गए झूठ की वजह से परिवार को मेंटल ट्रॉमा से गुजरना पड़ा।

हरियाणा की इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए अश्लील वीडियो का खंडन किया है।



अंशु मलिक ने कहा- मेरा इस वीडियो से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद मुझ पर गंदे कमेंट्स किए जा रहे हैं। मैं किसी बड़ी साजिश का शिकार हुई हूं। मैं और मेरा परिवार मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहे हैं।


वीडियो में दिख रहा लड़का रोहतक और लड़की हिमाचल प्रदेश की है। वे दोनों रिलेशनशिप में हैं। अंशु ने लोगों से बिना सच्चाई जाने किसी भी नतीजे पर न पहुंचने की विनती की है।


अंशु ने लिखा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। आखिर में सत्य की जीत और झूठ की हार हुई।


पुलिस ने सोमवार को इस वीडियो को अंशु मलिक का बता वायरल करने वाले आरोपी अमित उर्फ रावण को गिरफ्तार कर लिया। वह हिसार के बरवाला का रहने वाला है और DN कॉलेज में BSC का स्टूडेंट है।

पुलिस ने सोमवार को इस वीडियो को अंशु मलिक का बता वायरल करने वाले आरोपी अमित उर्फ रावण को गिरफ्तार कर लिया। वह हिसार के बरवाला का रहने वाला है और DN कॉलेज में BSC का स्टूडेंट है।

रेसलर अंशु मलिक के वीडियो की 5 अहम बातें...


1. मुझे बदनाम करने की बहुत बड़ी साजिश हुई

मैं अंशु मालिक आप सब से एक बेहद जरूरी बात शेयर करना चाहती हूं। पिछले कुछ दिनों से मेरे नाम से एक फेक वीडियो वायरल किया जा रहा था। मैं आप सबको बता दूं कि मैं उसे वीडियो में नहीं हूं। मुझे सरासर बदनाम करने की कोशिश की गई है। यह एक बहुत बड़ी साजिश रची गई है।


2. वीडियो में दिख रहे लड़का-लड़की रिलेशन में

इसमें दिख रहे लड़का-लड़की आज भी रिलेशनशिप में है। दोनों ने अपने बयान पुलिस को दे दिए हैं। पुलिस ने उन बयानों को सोशल मीडिया पर अपलोड भी किया है। जिस लड़के ने उन दोनों के वीडियो के साथ मेरा नाम जोड़कर वायरल किया था, उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसने अपना जुर्म पुलिस के सामने कबूल किया है। पुलिस ने उन बयानों को भी सोशल मीडिया पर अपलोड किया है।


3. मैं और मेरा परिवार मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहा

मैंने अपनी बेगुनाही के सारे सबूत दे दिए हैं। जो वीडियो मेरा नहीं है, उसे मेरा बता कर लोग बहुत गंदे कमेंट कर कर रहे हैं। क्या उन लोगों ने एक बार भी नहीं सोचा कि मुझ पर और मेरे परिवार पर क्या बीत रही होगी। मैं और मेरा परिवार किस मेंटल ट्रॉमा से गुजरा होगा। जिन्होंने बिना सच जान मुझे समाज के सामने दोषी करार कर दिया। उस लड़की को दोषी साबित कर दिया, जिसका इस पूरे प्रकरण से कोई लेना-देना भी नहीं है। sabhar Bhaskar.com

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सोमवार, 18 सितंबर 2023

वायरल वीडियो पर रेसलर अंशु मलिक ने बताई सच्चाई, मां ने कहा- दोषियों को मिले सख्त सजा

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वायरल वीडियो पर रेसलर अंशु मलिक ने बताई सच्चाई, मां ने कहा- दोषियों को मिले सख्त 

 देश की जानी-मानी पहलवान अंशु मलिक का कथित तौर एमएमएस वायरल होने को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. इस बीच अंशु मलिक और उनकी मां ने  करते हुए सच्चाई बताई.

पहलवान अंशु मलिक ने बताया, 'वायरल हो रही ये वीडियो उनकी नहीं है. यह वीडियो कई महीने पहले भी वायरल हो चुकी थी. इसमें जो नजर आ रहे हैं वो पति-पत्नी हैं. इसमें नजर आ रही लड़की हिमाचल प्रदेश की है. इस वीडियो से मेरा कोई लेना-देना नहीं है. किसी ने मुझे बदनाम करने के लिए मेरे इंस्टाग्राम से एक फोटो उठाया और उस वीडियो के साथ अटैच कर दिया.

अंशु मलिक ने कहा कि जिसने यह वीडियो वायरल किया है, पुलिस उसे गिरफ्तार कर चुकी है. इसके अलावा उस वीडियो में जो लड़का और लड़की हैं, वो भी पुलिस स्टेशन में हैं. अंशु मलिक के अनुसार उन्हें इस वीडियो के बारे में 16 सितंबर (शनिवार) को पता चला. घुटने की चोट के इलाज के लिए अपनी अंशु मलिक अभी चेन्नई में हैं.

अंशु मलिक ने बताया कि जब उन्हें इस वीडियो के बारे में पता चला तो उनके परिवार ने सबसे पहले एफआईआर दर्ज करवाई. उन्होंने कहा, 'इस लड़का और लड़की को मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा. समाज के लोग बिना कुछ सोचे समझे मुझे गंदी लड़की कहने लगे. लोग गंदे-गंदे कमेंट और मैसेज कर रहे हैं. जब हम सुरक्षित नहीं है तो जो लड़कियां छोटी हैं और जो खेलना चाहती हैं वो सब कुछ कैसे करेंगी.'



अंशु मलिक की मां ने क्या कहा?


इस घटना को लेकर अंशु मलिक की मां ने कहा कि जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. उन्होंने कहा, 'मैं अपनी बेटी के साथ परछाई की तरह रहती हूं. हमारी किसी से दूर-दूर तक कोई दुश्मनी नहीं है.' पहलवान अंशु मलिक की मां ने आरोपियों को कड़ी सजा देने की बात करते हुए कहा, 'पुलिस प्रशासन इस मामले की जांच में हमारा पूरा साथ दे रही है. पुलिस ने 24 घंटे के अंदर सभी आरोपियों के पकड़ लिया. जिसने भी हमारे साथ ऐसा किया है उसको सख्त से सख्त सजा दी जाए. ताकि और कोई भी किसी बेटी के साथ ऐसा करने की हिम्मत न करे.'



अंशु की मां के मुताबिक इस घटना की वजह से उनके परिवार को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा. अंशु की मां ने सीएम और पीएम मोदी से आरोपियों को सख्त सजा दिलवाने की मांग की. उन्होने कहा, 'सीएम और देश के पीएम से मेरी रिक्वेस्ट है कि जो भी सख्त प्रावधान हो उससे भी सख्त सजा मिले. ताकि जिसने देश का नाम रोशन किया उसके साथ कोई ऐसा करने की हिम्मत भी न करे. सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों को भी दायरे में रहना चाहिए. अगर किसी की भी इस तरह की वीडियो सोशल मीडिया पर आती है तो उसे तुरंत डिलीट कर देनी चाहिए.' Sabhar https:www.abplive.com

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शुक्रवार, 1 सितंबर 2023

1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला है एक बरगद का पेड़, उम्र 250 साल

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 जंगल नहीं यह एक पेड़ है :

1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला है एक बरगद का पेड़, उम्र 250 साल



दुनिया का सबसे चौड़ा बरगद का पेड़ 14500 वर्ग मीटर में फैला है। कोलकाता के पास आचार्य जगदीश चंद्र बोस बॉटनिकल गार्डन ( The Acharya Jagadish Chandra Bose Botanical Garden) में लगा ये पेड़ 250 साल से अधिक समय में इतना विशाल हो पाया है। दूर से देखने में ये पेड़ एक जंगल की तरह नज़र आता है। दरअसल,बरगद के पेड़ की शाखाओ से जटाए पानी की तलाश में निचे जमीन की और बढती है। वे बाद में जड़ के रूप में पेड़ को पानी और सहारा देने लगती है। ये सिलसिला चलता जाता है।


फ़िलहाल इस बरगद की 2800 से अधिक जटाए जड़ का रूप ले चुकी है। 19वीं शताब्दी में यहाँ आये 2 चक्रवाती तुफानो ने इसकी मूल जड़ को उखाड़ दिया था जो बाद में फंगस लगने के कारण खराब हो गई। 1925 में इस जड़ को काटकर अलग कर दिया गया पर तब तक कई दूसरी जटाए जड़ का रूप ले चुकी थी। इस कारण ये पेड़ आज भी बढता जा रहा है।

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