Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Item Post Navigation Display

Home Recent Posts Display

Related Posts Display

शनिवार, 26 अगस्त 2023

नौकरियों का सोर्स हो सकता है AI, लेकिन ह्यूमन कंट्रोल जरूरी: माइक्रोसॉफ्ट प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ

0

माइक्रोसॉफ्ट के वॉयस चेयरमैन और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ ने कहा, "निश्चित तौर पर AI और ChatGPT दुनिया में क्रांति लाएंगे, लेकिन इसके लिए व्यापक कानूनी और नियामकीय ढांचा (legal and regulatory framework) बनाने की जरूरत है, ताकि AI ह्यूमन कंट्रोल में रहे." 

दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence-AI) दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है. अब ज्यादातर कामों में AI का इस्तेमाल किया जा रहा है. बिजनेस बढ़ाने के लिए कंपनियां इसका इस्तेमाल कर रही हैं. ऐसे में नौकरियों पर खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है. हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयरमैन और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ (Microsoft President Brad Smith) ऐसा नहीं मानते. उनके मुताबिक, AI चुनौती नहीं, बल्कि मौका है. NDTV से खास बातचीत में ब्रैड स्मिथ ने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विकास का एक सोर्स हो सकता है. यह भविष्य के लिए उतना ही महत्वपूर्ण होगा, जितना महत्वपूर्व प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार था." ब्रैड स्मिथ अगले महीने होने वाले जी-20 समिट के लिए भारत आए हैं. इस समिट से पहले ग्लोबल बिजनेस लीडर्स ने दिल्ली में मुलाकात की.

ब्रैड स्मिथ ने इस दौरान AI के संभावित खतरों और ChatGPT जैसे जेनरेटर टूल के भविष्य पर भी बात की. NDTV से बातचीत में उन्होंने कहा, "निश्चित तौर पर AI और ChatGPT दुनिया में क्रांति लाएंगे, लेकिन इसके लिए व्यापक कानूनी और नियामकीय ढांचा (legal and regulatory framework) बनाने की जरूरत है, ताकि AI ह्यूमन कंट्रोल में रहे."


माइक्रोसॉफ्ट  के वॉयस चेयरमैन ब्रैड स्मिथ ने कहा, "मुझे लगता है कि AI एक डिवाइस है, जो लोगों को बेहतर ढंग से सोचने और अधिक तेज़ी से जवाब ढूंढने में मदद कर सकता है, लेकिन हमें खुद सोचना बंद नहीं करना चाहिए. AI हमें ज्यादा प्रोडक्टिव और ज्यादा कामयाब बना सकता है. यह हमें एक भाषा से दूसरी भाषा में ट्रांसलेट करने में मदद कर सकता है. मुझे लगता है कि यह ज्यादा विकास और ज्यादा नौकरियों के मौके बनाने में हमारी मदद कर सकता है.'' 

ChatGPT जैसे जेनेरिक टूल के भविष्य पर स्मिथ ने कहा, "...हम जिसे जेनेरिक AI कहते हैं, उसका भविष्य कुछ मायनों में अभी शुरू हो रहा है. यह डॉक्टरों को बीमारियों का इलाज करने में अधिक प्रभावी बना सकता है. मरीजों को ठीक करने के लिए नई दवाएं खोजने में भी मदद कर सकता है." बता दें कि Open AI कंपनी ने ChatGPT को 30 नवंबर 2022 को इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में लॉन्च किया था. आप ChatGpt से जो भी सवाल पूछेंगे, उनका सीधा जवाब आपको लिखित रूप (Text Format) में मिल जाएगा.

स्मिथ ने आगे कहा, "हम ChatGPT को छात्रों के लिए ट्यूटर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं." माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ने जोर देकर कहा कि AI या ऐसी टेक्नोलॉजी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ये कभी भी खतरा पैदा न करे.

उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि AI हमेशा ह्यूमन कंट्रोल में रहे. कंपनियों को जिम्मेदार तरीके से AI विकसित करने की जरूरत है. इसके लिए नए कानूनों और विनियमों पर फोकस होना चाहिए. भारत इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है."


ब्रैड स्मिथ ने आगे कहा, "AI कोई जादू नहीं है... यह नॉलेज का एक इंडिपेंडेंट सोर्स नहीं है. यह संवेदनशील नहीं है. यह एक मैथ है... मुझे लगता है कि जब यह अलग होगा, तो दूर का भविष्य हो सकता है. लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी टेक्नोलॉजी मानवता की सेवा करती है और मानव नियंत्रण में रहती है."

स्मिथ ने इस दौरान विभिन्न स्तरों पर डिजिटल पेमेंट सिस्टम और डिजिटलाइजेशन पर भी बात की. उन्होंने कहा, "मैंने भारत जैसा देश नहीं देखा, जो इतना एडवांस है और चीजों को इतनी जल्दी से ग्रैब करता है. माइक्रोसॉफ्ट में हमारे दृष्टिकोण से हम ये नहीं देखते हैं कि डिजिटल सिस्टम भारत में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए क्या कर रहे हैं, बल्कि यह दुनिया के लिए क्या कर सकते हैं... हम इसे ऐसे देखते हैं." Sabhar https://ndtv.in/india/ai-can-be-source-of-jobs-must-be-in-human-control-says-microsoft-president-brad-smith-to-ndtv-4329071/amp/1

Read more

Mann Ki Baat Live Updates: 'संकल्प के सूरज चांद पर भी उगते हैं', पीएम मोदी बोले- भारत संभावनाओं का देश

0

Mann Ki Baat Live 104th Episode, PM Modi News in Hindi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 'मन की बात' कार्यक्रम के जरिये देशवासियों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने चंद्रयान मिशन की तारीफ की और कहा कि इस उपलब्धि के बारे में जितनी बात की जाए कम है। 

लाइव अपडेट

11:50 AM, 27-AUG-2023

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। इसे कई आधुनिक भाषाओं की जननी भी कहा जाता है। संस्कृत अपनी प्राचीनता के साथ-साथ अपनी वैज्ञानिकता और व्याकरण के लिए भी जानी जाती है। भारत का प्राचीन ज्ञान हजारों वर्षों तक संस्कृत भाषा में ही संरक्षित किया गया है। आज देश में संस्कृत को लेकर जागरुकता और गर्व बढ़ा है। साल 2020 में तीन संस्कृत डीम्ड यूनिवर्सिटीज को सेंट्रल यूनिवर्सिटीज बनाया गया। अलग-अलग शहरों में संस्कृत विश्वविद्यालयों के कई कॉलेज और संस्थान भी चल रहे हैं। आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में भी संस्कृत केंद्र प्रसिद्ध हो रहे हैं।'


11:36 AM, 27-AUG-2023

'इस बार 15 अगस्त के दौरान देश ने सबका प्रयास का सामर्थ्य देखा। सभी देशवासियों के प्रयास से हर घर तिरंगा अभियान को हर मन तिरंगा अभियान बना दिया। इस दौरान कई रिकॉर्ड बने। देशवासियों ने करोड़ों की संख्या में तिरंगे खरीदे। डेढ़ लाख पोस्ट ऑफिस के जरिए करीब डेढ़ करोड़ तिरंगे बेचे गए। इससे हमारे कामगारों, बुनकरों और खासकर महिलाओं की सैकड़ों करोड़ रुपये की आय हुई। तिरंगे के साथ सेल्फी पोस्ट करने में भी इस बार नया रिकॉर्ड बना। पिछले साल करीब 5 करोड़ देशवासियों ने तिरंगे के साथ सेल्फी पोस्ट की थी, इस बार यह आंकड़ा 10 करोड़ को भी पार कर गया।' 

11:30 AM, 27-AUG-2023

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'कुछ ही दिनों पहले चीन में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स हुए थे। इन खेलों में भारत का प्रदर्शन अभी तक का सबसे बेहतर रहा। हमारे खिलाड़ियों ने कुल 26 पदक जीते, जिनमें से 11 गोल्ड मेडल थे। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि 1959 से लेकर अब तक जितने भी वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स हुए हैं, उनमें जीते सभी मेडल्स को जोड़ भी दें तो ये संख्या 18 तक ही पहुंचती है।'


11:24 AM, 27-AUG-2023

'जनभागीदारी की हमारी इस कोशिश में एक ही नहीं बल्कि दो-दो विश्व रिकॉर्ड बन गए हैं। वाराणसी में हुई जी20 क्विज में 800 स्कूलों के सवा लाख छात्रों की भागीदारी एक नया विश्व रिकॉर्ड बन गया। वहीं लंबानी कारीगरों ने भी कमाल कर दिया। 450 कारीगरों ने करीब 1800 यूनिक पैचेज का आश्चर्यजनक कलेक्शन करके अपने हुनर और क्राफ्टसमैनशिप का परिचय दिया है।'


Sabhar amarujala.com

Read more

ये पेट्री डिश क्या है? क्या भविष्य में बच्चे इन्हीं में पैदा होंगे

0

ये पेट्री डिश क्या है? क्या भविष्य में बच्चे इन्हीं में पैदा होंगेहाल ही में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में डेवलेपमेंटल बॉयोलॉजिस्ट जर्निका गेट्ज और उनकी टीम ने एक ऐसी चीज खोजी है जिसमें सिंथेटिक मानव भ्रूण का शानदार विकास हुआ है. 

तकनीक इतनी तेजी से विकास कर रहा है कि आने वाले समय में इंसान मां की गर्भ से नहीं बल्कि मशीनों से बन कर निकलेंगे. हालांकि, इसके लिए अभी बहुत वक्त है. लेकिन आज हम जिस चीज की बात कर रहे हैं वो है पेट्री डिश. इसे लेकर कहा जा रहा है कि भविष्य में बच्चे इन्हीं में पैदा होंगे. चलिए आज आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि आखिर ये चीज है क्या और इससे इंसानों के जीवन पर कितना प्रभाव पड़ेगा.


पेट्री डिश क्या होती है?


पेट्री डिश दरअसल, वो ट्रे या प्लेट है जिसमें वैज्ञानिक कोशिकाओं को तैयार करते हैं. इसका उपयोग ज्यादातर जीव विज्ञानी ही करते हैं. सरल भाषा में कहें तो सबसे पहले इस डिश में कुछ बैक्टीरिया और कवक की छोटी छोटी कोशिकाएं डाली जाती हैं और फिर उनके डिजाइन और संवर्धन पर काम किया जाता है. पेट्री डिश शब्द का पहली बार इस्तेमाल जूलियस रिचर्ड पेट्री ने 1852 से 1921 के बीच किया था.  अब कहा जा रहा है कि इसी डिश में भविष्य में बच्चों को भी तैयार किया जाएगा.


क्या है ये चीज?


दरअसल, हाल ही में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में डेवलेपमेंटल बॉयोलॉजिस्ट जर्निका गेट्ज और उनकी टीम ने एक ऐसी चीज खोजी है जिसमें सिंथेटिक मानव भ्रूण का शानदार विकास हुआ है. वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने पहले ही अटेंप्ट में ह्यूमन स्टेम सेल के सबसे एडवांस स्तर का भ्रूण तैयार कर लिया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में वो इस खोज के जरिए इंसानों की ज्यादा मदद कर पाएंगी.


खासतौर से ब्लैक बॉक्स पीरियड के बारे में इससे काफी ज्यादा जानकारी मिलेगी. ब्लैक बॉक्स यानि भ्रूण के विकास का सबसे पहला स्टेज. अगर इंसान इसमें कामयाब हो गया तो ये बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा भगवान करते हैं. यानि इस चीज की जानकारी मिल जाएगी की गर्भ में किसी बच्चे का निर्माण होता कैसे है.


अपने हिसाब के बच्चे बना पाएगा इंसान?


अगर ये तकनीक सही में सौ फीसदी कामयाब हो गई तो इसकी मदद से इंसान जैसा चाहेगा उस तरह के इंसान का निर्माण कर लेगा. इसे लेकर एक तरफ जहां कुछ वैज्ञानिकों में खुशी है तो वहीं कई वैज्ञानिक ऐसे भी हैं जो ये मानते हैं कि इसका उपयोग गलत काम के लिए भी हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो ये मानवता को खत्म करने के बराबर होगा. Sabhar https://www.google.com/amp/s/www.abplive.com/gk/what-is-this-petri-dish-will-children-be-born-in-these-in-the-future-2464112/amp

Read more

Study: इस वजह से खतरनाक होता जा रहा है डेंगू, भविष्य में गंभीर रोग-मृत्यु का जोखिम भी अधिक

0

Study: इस वजह से खतरनाक होता जा रहा है डेंगू, भविष्य में गंभीर रोग-मृत्यु का जोखिम भी अधिक 

डेंगू के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। राजधानी दिल्ली में भी इन दिनों डेंगू के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि यहां डेंगू के टाइप-2 स्ट्रेन के मामले रिपोर्ट किए गए हैं जिसके कारण गंभीर रोग विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक हालिया अध्ययन में चेताया है कि समय के साथ डेंगू और भी खतरनाक होता जा रहा है, इसके कारण भविष्य में गंभीर रोगों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।


अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तापमान के कारण डेंगू वायरस अधिक खतरनाक होता जा रहा है। यानी कि अभी की तुलना में आने वाले वर्षों में डेंगू के कारण गंभीर रोग विकसित होने के मामले अधिक देखे जा सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पर्यावरण में हो रहा बदलाव कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने वाला माना जा रहा है, डेंगू का जोखिम भी उनमें से एक है।

उच्च तापमान और डेंगू का खतरा 


केरल स्थित राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (आरजीसीबी) के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। वैज्ञानिकों की टीम ने पशु मॉडल अध्ययन में पाया कि डेंगू अधिक गंभीर और जोखिम कारक हो सकता है। वातावरण में बढ़ता तापमान इसके खतरों को और भी बढ़ाता जा रहा है, इसके जोखिमों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।


एफएएसईबी जर्नल में हाल ही में प्रकाशित इस शोध में डेंगू की गंभीरता और इसके जोखिमों से बचाव के लिए प्रयासों पर जोर दिया गया है।

गंभीर हो सकते हैं डेंगू के मामले


आंकड़ों को मुताबिक हर साल 390 मिलियन (39 करोड़) से अधिक लोग डेंगू के शिकार हो रहे हैं। तापमान वृद्धि की स्थिति वायरस की विषाक्तता को प्रभावित करती हुई देखी जा रही है। यह पहला अध्ययन है जिसमें तापमान और डेंगू की गंभीरता को लेकर लोगों को सावधान किया गया है।


शोधकर्ताओं ने कहा, पर्यावरणीय तापमान में वृद्धि के मौसम में, रुक-रुक कर होने वाली बारिश से मच्छरों के प्रजनन में वृद्धि रिपोर्ट की जाती रही है। हमारा अध्ययन ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते दुष्प्रभावों और संक्रामक रोगों की गतिशीलता और इसके संभावित जोखिमों पर जोर देता है।


क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?


पहले के अध्ययनों में यह देखा गया था कि अपेक्षाकृत उच्च पर्यावरणीय तापमान मच्छरों में वायरस के इनक्यूबेशन पीरियड को कम कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप मानव संचरण में तेजी से वृद्धि हो सकती है। आरजीसीबी के निदेशक प्रोफेसर चंद्रभास नारायण बताया कि इस बार शोधकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि डेंगू कभी-कभी गंभीर क्यों हो जाता है?


दशकों के शोध के बाद भी, बार-बार होने वाली इस बीमारी को नियंत्रित करने या रोकने के लिए अभी भी कोई प्रभावी टीके या एंटीवायरल नहीं है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। sabhar Amar Ujala.com

Read more

शिव शक्ति' और 'तिरंगा' से पहले चांद पर मौजूद है 'जवाहर पॉइंट', जानिए पूरी कहानी

0

शिव शक्ति' और 'तिरंगा' से पहले चांद पर मौजूद है 'जवाहर पॉइंट', जानिए पूरी कहानी 

Chandrayaan Mission Site Name: यह एक वैज्ञानिक परंपरा है कि जिस जगह लैंडर उतरता है उसका नामकरण किया जाता है. चंद्रयान-3 की इम्पैक्ट साइट को 'शिव शक्ति' और चंद्रयान-2 की साइट को 'तिरंगा' नाम दिया गया है. इससे पहले मनमोहन सरकार में चंद्रयान-1 की इम्पैक्ट साइट को 'जवाहर पॉइंट' नाम दिया गया था, जिसे लेकर अब खूब चर्चा हो रही है.

चंद्रयान-3 के 'विक्रम लैंडर' ने चांद पर जिस जगह कदम रखा है उस पॉइंट को 'शिव शक्ति' नाम दिया गया है. इसके अलावा पीएम मोदी ने उस पॉइंट को 'तिरंगा' नाम दिया है जहां चंद्रयान-2 लैंडर क्रैश हुआ था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क मिशन कंट्रोल कॉम्प्लेक्स में वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए चांद पर दोनों पॉइंट के नाम की घोषणा की. इसके साथ ही पीएम मोदी ने हर साल 23 अगस्त को नेशनल स्पेस डे मनाने की घोषणा की है.

यह एक वैज्ञानिक परंपरा है कि जिस जगह लैंडर उतरता है उसका नामकरण किया जाता है. लेकिन चांद पर शिव शक्ति पॉइंट और तिरंगा पॉइंट से पचंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद से 'जवाहर पॉइंट' सोशल मीडिया पर ट्रैंड कर रहा है. बीजेपी के कई नेताओं और 'X' (पहले ट्विटर) यूजर्स चंद्रयान-1 मिशन की लैंडिंग साइट के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी. हले एक और पॉइंट है जिसका नाम 'जवाहर पॉइंट' है. 
चंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद से 'जवाहर पॉइंट' सोशल मीडिया पर ट्रैंड कर रहा है. बीजेपी के कई नेताओं और 'X' (पहले ट्विटर) यूजर्स चंद्रयान-1 मिशन की लैंडिंग साइट के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी. Sabhar aajtak.in

Read more

क्‍या वाकई अजर, अमर, अविनाशी होती है आत्‍मा? क्‍या कहता है विज्ञान

0

क्‍या वाकई अजर, अमर, अविनाशी होती है आत्‍मा? क्‍या कहता है विज्ञान 

Is human soul really immortal - धर्म कहता है कि आत्‍मा अजर, अमर, अविनाशी है. अलग-अलग धर्मों में इसे अलग तरीके से कहा गया है. विज्ञान व तकनीक की दुनिया में इस धारणा को बार-बार तर्कों की कसौटी पर भी परखा गया है. क्‍या विज्ञान इस धारणा को स्‍वीकार करता है? क्‍या वाकई इस धारणा में कोई दम है?

Is human soul really immortal - धर्म कहता है कि आत्‍मा अजर, अमर, अविनाशी है. अलग-अलग धर्मों में इसे अलग तरीके से कहा गया है. विज्ञान व तकनीक की दुनिया में इस धारणा को बार-बार तर्कों की कसौटी पर भी परखा गया है. क्‍या विज्ञान इस धारणा को स्‍वीकार करता है? क्‍या वाकई इस धारणा में कोई दम है?



दर्शन, धर्म और विज्ञान के लिए हमेशा से ये सवाल परेशान करता रहा है कि क्‍या आत्‍मा वाकई अमर होती है. 

दर्शन, धर्म और विज्ञान के लिए हमेशा से ये सवाल परेशान करता रहा है कि क्‍या आत्‍मा वाकई अमर होती है.

Human Soul and Science: दुनिया में सबसे ज्‍यादा पूछा जाने वाला सवाल है कि क्‍या मनुष्‍य के भौतिक शरीर के मरने के बाद भी आत्मा जीवित रहती है? दर्शन, विज्ञान और धर्म ने अलग-अलग तरह से इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की है. दुनियाभर में माने जाने वाले धर्मों ने इस सवाल का जवाब अपने-अपने तरीके से दिया है. किसी धर्म में कहा जाता है कि आत्‍मा शरीर को कपड़ों की तरह बदलती है. एक शरीर के मरने के बाद आत्‍मा नए शरीर के साथ फिर जन्‍म लेती है. किसी धर्म के मुताबिक, शरीर के मरने के बाद आत्‍मा परम सत्‍ता में विलीन हो जाती है और फिर जन्‍म नहीं लेती है. हम विज्ञान के अलग-अलग सिद्धांतों और अध्‍ययनों के आधार पर जानने की कोशिश करेंगे कि क्‍या वाकई आत्‍मा अमर है?

सबसे पहले यह समझते हैं कि आत्मा का मतलब क्या है? आत्मा शब्द लैटिन एनिमा से आया है, जो ग्रीक एनीमोस से जुड़ा हुआ है, जिसका अर्थ सांस या हवा है. वहीं, सनातन परंपरा में हजारों साल पुराने वेदों, उपनिषदों और पुराणों में भी आत्‍मा का जिक्र किया गया है. भारतीय दर्शन में माना जाता है कि आत्‍मा अजर, अमर, अविनाशी है. कई आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं में आत्मा व्यक्तित्व का सार, आत्मा या मैं है. हालांकि, हाल के दिनों में आत्मा को मन या चेतना की तरह सोच-विचार का हिस्सा माना जाता है, जो विज्ञान की अलग-अलग शाखाओं के सबसे महान रहस्यों में एक है.

क्‍या है ऑर्केस्ट्रेटेड ऑब्जेक्टिव रिडक्शन

कुछ साल पहले एक भौतिक विज्ञानी के सहयोग से एक नया सिद्धांत विकसित किया गया, जिसमें शरीर के मरने के बाद आत्‍मा के अस्तित्‍व पर रोशनी डाली गई. इस सिद्धांत को ऑर्केस्ट्रेटेड ऑब्जेक्टिव रिडक्शन (ऑर्क-ओआर) कहा गया है. इसे 1990 के दशक में भौतिकविद रोजर पेनरोज और स्टुअर्ट हैमरॉफ ने विकसित किया था. शोध के मुताबिक, चेतना न्यूरॉन्स के बीच कम्‍युनिकेशन के बजाय उनके भीतर पैदा होती है. बता दें कि रोजर पेनरोज प्रतिष्ठित गणितज्ञ, भौतिक विज्ञानी और ब्रह्मांड विज्ञानी हैं. उन्‍हें भौतिकी में 2020 का नोबेल पुरस्कार दिया गया था. पेनरोज को ब्लैक होल पर उनके काम के लिए विज्ञान के सर्वोच्च सम्मानों में एक मिला है. उन्‍होंने खोज की थी कि ब्लैक होल का निर्माण आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत का नतीजा है.

आर्क-ओआर पर चल रहीं परियोजनाएं

रोजर पेनरोज ने कैंब्रिज में एक अन्य महान भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग के साथ लंबे समय तक काम किया था. पेनरोज ने हॉकिंग के साथ ब्लैक होल और गुरुत्वाकर्षण विलक्षणता के बारे में कुछ सिद्धांत विकसित किए थे. वैज्ञानिक स्‍टुअर्ट हैमरॉफ स्टुटिन एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और अमेरिका में एरिजोना यूनिवर्सिटी में लेक्‍चरर हैं. वह इस सिद्धंत के लेखकों में एक हैं कि आत्‍मा क्‍या है और क्‍या ये अमर है? बता दें कि ‘ऑर्क-ओआर’ अभी केवल एक सिद्धांत है. लेकिन, माना गया कि इस सिद्धांत पर परीक्षण किया जा सकता है. लिहाजा, इसके परीक्षण और सत्यापन के लिए परियोजनाएं चल रही हैं.

एल्‍गोरिदम से काबू नहीं हो सकता दिमाग

पेनरोज और हैमरॉफ के ‘ऑर्क-ओआर’ सिद्धांत के पीछे का विचार है कि मस्तिष्क को एल्गोरिदम से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है. इसका मतलब है कि मस्तिष्क के भौतिक गुण पारंपरिक गणितीय औपचारिकताओं से निर्धारित नहीं होते हैं, बल्कि क्‍वांटम मेकेनिक्‍स के दिलचस्प सिद्धांतों ये इनकी व्‍याख्‍या की जा सकती है. सिद्धांत के दोनों लेखकों में हैमरॉफ ने चेतना के जैविक घटक का अध्ययन किया है. उनके मुताबिक, चेतना की मुख्य संरचना मस्तिष्क में माइक्रोट्यूबल सेल्‍स हैं. वहीं, भौतिक विज्ञानी पेनरोज ने आत्‍मा के अमर होने के सवाल का जवाब तलाशने के लिए क्‍वांटम अप्रोच को अपनाया है.

चेतना कहां पैदा करती है कंपन

‘ऑर्क-ओआर’ सिद्धांत के मुताबिक, चेतना सब-एटॉमिक पार्टिकल्‍स के यूनिवर्स में कंपन करने वाली एक तरंग है. वहीं, दिमाग की माइक्रोट्यूबल सेल्‍स वास्तविक क्‍वांटम कंप्यूटर के तौर पर काम करती हैं, जो इन कंपनों को इस्‍तेमाल किए जाने लायक जानकारी में तब्‍दील करती हैं. बता दें कि क्‍वांटम कंप्यूटर सामान्य कंप्यूटर से अलग तरीके से काम करता है. सामान्‍य कंप्यूटर जानकारी को बिट्स यानी ज़ीरो या वन के रूप में प्रॉसेस करता है, जबकि क्‍वांटम कंप्यूटर क्यूबिट्स को प्रॉसेस करता है, जो एक ही समय में शून्य और एक दोनों हो सकता है. इससे क्‍वांटम सुपरपोजिशन बनती है, जो हमारे क्‍लासिकल मेकेनिकल माइंड्स के लिए समझने में दिक्‍कतें पैदा करता है.

क्‍या है कई दुनिया का सिद्धांत

सैद्धांतिक भौतिकविद एवरेट के कई दुनियाओं के सिद्धांत के मुताबिक, जब कोई सेब या नाशपाती में से एक चीज खाने का फैसला करता है, तो सेब खाने का फैसला नाशपाती को अलग कर देता है. लेकिन, इसी फैसले के साथ नाशपाती दूसरी दुनिया में अलग से अस्तित्व में रहती है. दूसरी ओर, ‘ऑर्क-ओआर’ सिद्धांत कहता है कि नाशपाती खाने के विकल्प को चुना ही नहीं गया है. लिहाजा, नाशपाती अलग हो जाती है. लेकिन, यह एक अस्थिर स्थिति है. इसलिए कुछ समय बाद इसमें बदलाव आ जाता है.

कई दुनिया, लेकिन सिर्फ एक में चेतना

एवरेट के सिद्धांत के समर्थकों के मुता‍बिक, कई दूसरी दुनिया हैं, लेकिन केवल एक में चेतना है. वहीं, पेनरोज और हैमरॉफ के मुताबिक, हम ही एकमात्र वास्तविकता हैं, क्योंकि वैकल्पिक वास्तविकताओं का अस्तित्‍व अस्थिर होने के कारण खत्‍म हो जाता है. इस क्‍वांटम सोच को फिर मस्तिष्क में स्थानांतरित कर दिया जाता है, जहां चेतना को पहले सामान्य कंप्यूटर की तरह काम करने वाले न्यूरॉन्स के बीच कनेक्शन की एक श्रृंखला के रूप में माना जाता था. हैमरॉफ के मुताबिक, जब आप मस्तिष्क कोशिकाओं न्‍यूरॉन के बारे में सोचते हैं तो यह सोचना न्यूरॉन का अपमान है कि ये बंद या चालू हो जाते हैं.  Sabhar News18 India

Read more

शुक्रवार, 25 अगस्त 2023

VIDEO: विक्रम लैंडर ने ली पहली सेल्फी, कुछ ऐसे चांद की सतह पर उतरा था प्रज्ञान रोवर

0

VIDEO: विक्रम लैंडर ने ली पहली सेल्फी, कुछ ऐसे चांद की सतह पर उतरा था प्रज्ञान रोवर 

Chandrayaan-3 Updates: चंद्रयान-3 ने बुधवार शाम 6.04 बजे चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की, जिसके बाद भारत चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने वाला चौथा देश बन गया

.खास बातें

लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रेवर की चंद्रमा की सतह से पहली सेल्फी

चंद्रयान-3 ने बुधवार शाम 6.04 बजे चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की

भारत चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने वाला चौथा देश बना

नई दिल्ली: आखिरकार वह पल आ ही गया जिसका इंतजार एक अरब भारतीय बेसब्री से कर रहे थे. दरअसल, इसरो (ISRO) ने लैंडर विक्रम (Lander Vikram) से प्रज्ञान रोवर (Pragyan Rover) के चांद की सतह पर उतरने का वीडियो जारी किया . जिसमें देखा जा सकता है कि रोवर रैंप के सहारे चांद पर गया. लैंडर और रोवर बिल्कुल ठीक हालत में हैं.

लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रेवर की चंद्रमा की सतह से पहली सेल्फी जारी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) ने भारत के लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रेवर की चंद्रमा की सतह से पहली सेल्फी शेयर की है. जब प्रज्ञान रोवर अपनी कछुआ की गति से चल रहा था, तब विक्रम लैंडर ने इसके रैंप की फोटो और एक वीडियो लिया है. इसरो ने एक ट्वीट में वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "... यहां बताया गया है कि चंद्रयान-3 रोवर लैंडर से चंद्रमा की सतह तक कैसे पहुंचा."

https://twitter.com/i/status/1694713817916473530

Read more

सोमवार, 21 अगस्त 2023

चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर लैंडिंग कल:32000 सालों से कालगणना का पहला साधन है चंद्रमा, चीन-अरब ने भारत से सीखा लूनर कैलेंडर

0

 चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर लैंडिंग कल:32000 सालों से कालगणना का पहला साधन है चंद्रमा, चीन-अरब ने भारत से सीखा लूनर कैलेंडर

23 अगस्त की शाम चंद्रयान-3 चांद पर उतरेगा। चंद्रमा हजारों सालों से दुनिया भर के कल्चर्स में जिंदगी का अहम हिस्सा रहा है। इंसान जब आदिमानव से सामाजिक प्राणी होने की राह पर था, तभी से चांद उसके लिए समय की गणना करने का साधन रहा है। ऋग्वेद और शतपथ ब्राह्मण ये दो ग्रंथ बताते हैं कि हजारों साल से चांद इंसानों के लिए कालगणना का साधन रहा है।

जब समय पता करने का कोई साधन नहीं था, तब चंद्रमा के घटने और बढ़ने की स्थितियों से ही दिन और महीनों का अनुमान लगाया जाता था। 15 दिन अमावस्या और 15 पूर्णिमा के ऐसे दो पक्षों को मिलाकर महीने का कैलकुलेशन किया गया जिसे चांद्रमास यानी चंद्रमा का महीना कहा जाता है।


आज भी भारतीय ज्योतिष में हिंदू कैलेंडर चांद्रमास से ही बनाया जाता है। सारे तीज-त्योहार इसी से तय होते हैं। नासा की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाषाण युग में फ्रांस और जर्मनी की गुफाओं में रहने वाले आदिमानवों ने 32000 साल पहले चंद्रमा की गति का अध्ययन करके पहला कैलेंडर बनाया था। भारत में इसका सबसे सटीक गणित है। चीन और अरब देशों ने भी चांद से कैलेंडर बनाना भारत से सीखा है।


सूर्य से गणना मुश्किल थी तो चांद को साधन बनाया


जर्मन स्कॉलर प्रो. मैक्समूलर ने अपनी किताब “इंडिया व्हाट कैन इट टीच अस” में लिखा है- भारत ज्योतिष, आकाश मंडल और नक्षत्रों के बारे में जानने के लिए किसी दूसरे देश का ऋणी नहीं है, ये उसने खुद ईजाद किया है।


उन्होंने लिखा है कि चंद्रमा ही कालगणना का पहला साधन था। सूर्योदय के बाद नक्षत्रों और तारों को देख पाना या उनके बारे में अनुमान लगा पाना मुश्किल था। भारतीय विद्वानों ने चंद्रमा के आधार पर ही दिन, पक्ष, मास और साल की गणना की। चंद्रमा की विभिन्न कलाओं को देखते हुए आकाश को 27 नक्षत्रों में बांटा। मूल ज्योतिष का तत्व भारत से ही हजारों साल पहले उपजा है।


भारत से ही कालगणना चीन और अरब पहुंची


भारत के अलावा चीन और अरब देशों में भी कालगणना का पहला साधन चंद्रमा ही था। हिजरी संवत कैलेंडर में भी चांद से ही महीनों की गणना हुई है। अमूमन अरब देशों में सैकड़ों साल पहले दिन की बजाय चांद रातों की संख्या से ही समय तय किया जाता था। मुगल काल में भी कई कामों के लिए चांद रातों का जिक्र मिलता है। ये चंद्रमा और नक्षत्रों की गणना भारत से ही चीन और अरब देशों में पहुंची।


प्रो. कोलब्रुक और बेवर ने अपनी किताब ‘लेटर्स ऑन इंडिया’ में लिखा है कि भारत को ही सबसे पहले चंद्रमा और नक्षत्रों का ज्ञान था। चीन और अरब देशों के ज्योतिष का विकास भारत की ही देन है। उनकी कालगणना की चांद्र विधि भारत से ही प्रेरित है।

वेद और पुराणों में चंद्रमा


वैदिक काल से अब तक चंद्रमा की पूजा ग्रह और देवता, दोनों रूप में हो रही है। वहीं, ज्योतिर्विज्ञान में चंद्रमा को उपग्रह नहीं बल्कि ग्रह कहा गया है। धरती के काफी नजदीक होने से सूर्य के बाद चंद्रमा दूसरा ग्रह है, जो पृथ्वी पर रहने वाले हर इंसान को प्रभावित करता है। चंद्रमा के कारण ही धरती पर पानी और औषधियां हैं। जिससे इंसान लंबी उम्र जी पाता है। वेदों से लेकर पुराणों और ज्योतिष ग्रंथों में भी चंद्रमा को खास बताया गया है।


वेदों में चंद्रमा की गति, चमक और उसकी परिक्रमा के रास्ते के बारे में जानकारी दी गई है। वहीं, पुराणों में बताया गया है कि चंद्रमा की उत्पत्ति कैसे हुई।


चंद्रमा से कालचक्र का निर्धारण


ऋग्वेद के पहले मंडल के 84वें सूक्त मंत्र में बताया गया है कि चंद्रमा स्वत: प्रकाशमान नहीं है इस सिद्धांत की पुष्टि मंत्र में है। इसी के 105वें सूक्त में कहा है कि चंद्रमा आकाश में गतिशील है और नित्य गति करता रहता है।


एतरेय ब्राह्मण ग्रंथ के मुताबिक वैदिक काल में तिथियां चंद्रमा के उदय और अस्त होने से तय होती थी। चंद्रमा ही तिथियों के साथ महीने को शुक्ल और कृष्ण पक्ष में बांटता है। इस बारे में तैत्तरीय ब्राह्मण में बताया गया है कि चंद्रमा का एक नाम पंचदश भी है। जो 15 दिनों में क्षीण हो जाता है और 15 दिनों में पूर्ण हो जाता है।


इसके बाद ऋतुओं की बात करें तो अथर्ववेद के 14वें कांड के पहले सूक्त में कहा गया है कि चंद्रमा से ही ऋतुएं बनती हैं। वेदों में बताया गया है कि चंद्रमा के कारण ही ऋतुएं बदलती हैं। वहीं चंद्रमा के प्रभाव से ही 13 महीने हो जाते हैं, जिसे अधिकमास कहते हैं। इस बात का जिक्र वाजस्नेयी संहिता में किया गया है।


शतपथ ब्राह्मण में कहा गया है कि पृथ्वी पर उगने वाली औषधियों और वनस्पतियों में रस चंद्रमा से ही आता है। जो सोम रस देवता पीते हैं, उस बारे में ऋग्वेद में कहा गया है कि सोम नाम की लता चंद्रमा से ही रस बनाती है। चंद्र मंडल से देवताओं तक सोम का भाग पहुंचता है। चंद्रमा से ही देवगण सोमपान करते हैं।

चंद्रमा का रथ, गति और रूप


लिंग पुराण में चंद्रमा के रथ के बारे में कहा गया है कि चंद्रमा अपने रास्ते में मौजूद नक्षत्रों की परिक्रमा करता है। उसका रथ तीन पहियों का है। रथ के दोनों ओर सफेद रंग के सुन्दर और ताकतवर मन के समान तेजी से दौड़ने वाले दस घोडे़ जुते हुए हैं। चंद्रमा पितरों और देवताओं के साथ यात्रा कर रहा है।


मत्स्य पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने ऋषियों के कहने पर चंद्रमा को उत्तर दिशा का लोकपाल बना दिया है। चंद्रमा देवताओं में गंधर्वों का, मनुष्यों में ब्राह्मणों का, पशुओं में शश, औषधियों में लताओं और धर्म में तप-यज्ञ का अधिष्ठाता है।


एक्सपर्ट्स और रेफरेंस


डॉ. गणेश मिश्रा, ज्योतिषाचार्य, पुरी (उड़ीसा)

भारतीय ज्योतिष, नेमीचंद शास्त्री sabhar bhaskar.com 


Read more

रविवार, 20 अगस्त 2023

Chandrayaan-3: चांद से महज 25 किलोमीटर दूर लैंडर विक्रम, जानें लैंडिंग के लिए किस बात का है इंतजार

0

 चंद्रयान 3 मिशन ने सफलतापूर्वक अंतिम डीबूस्टिंग चरण पूरा कर लिया है। जिसके बाद चंद्रयान-3 की चांद की सतह से दूरी महज 25 किलोमीटर रह गई है। इसरो ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। इसरो ने बताया कि अब लैंडर मॉड्यूल की आंतरिक जांच की जाएगी और चांद पर उतरने की तय साइट पर अब बस सूरज के निकलने का इंतजार किया जा रहा है। इसरो ने बताया कि लैंडर मॉड्यूल 23 अगस्त 2023 को शाम करीब 5.45 बजे चांद की सतह पर उतर सकता है। सूरज निकलने का क्यों हो रहा इंतजार

चांद पर एक दिन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है। अभी चांद पर रात है और 23 अगस्त को सूरज निकलेगा। यही वजह है कि दिन की रोशनी में ही लैंडर चांद की सतह पर उतरने की कोशिश करेगा ताकि रोवर बेहतर तरीके से वहां रिसर्च कर सके और बेहतर तस्वीरें भेज सके। भारत का चंद्रयान-3 मिशन चांद की सतह पर पानी की खोज करेगा, साथ ही चांद पर रसायनिक विश्लेषण भी करेगा। 
रूसी मिशन से है मुकाबला
चांद की सतह पर चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग के साथ ही इसरो इतिहास रच देगा। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा। चंद्रयान-3 के साथ ही रूस का लूना-25 स्पेसक्राफ्ट भी चांद की सतह पर उतरने की कोशिश करेगा। लूना-25 को 21 अगस्त को चांद की सतह पर लैंडिंग करनी है लेकिन फिलहाल रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने बताया है कि लूना-25 में कुछ तकनीकी खराबी आ गई है। ऐसे में लूना-25 को चांद की सतह पर उतरने में परेशानी हो सकती है। 

बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन का बजट करीब 615 करोड़ रुपये का है। इसरो चेयरमैन ने बताया कि चंद्रयान के लैंडर मॉड्यूल को चांद पर लैंड कराने में सबसे बड़ी चुनौती उसे लैंडिंग से पहले मोड़ना है। उन्होंने बताया कि जब लैंडर चांद की सतह पर लैंड करने के लिए उतरेगा तो वह क्षैतिज अवस्था में होगा लेकिन उसे लैंडिंग से पहले 90 डिग्री सेल्सियस पर मोड़कर लंबवत करना होगा। अगर यह सफलतापूर्वक हो गया लैंडर की चांद पर सफल लैंडिंग के चांस बढ़ जाएंगे। Chandrayaan-3 LIVE: चांद से महज 25 किलोमीटर दूर लैंडर विक्रम, बस सूरज निकलने का है इंतजार

Read more

उत्तराखंड-हिमाचल में बारिश से आफ़त, क्यों ख़तरनाक बन रहा है हिमालय?

0

हिमालय के क्षेत्रों में तेज बारिश से अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में वृद्धि हो रही है. मूसलाधार बारिश और बेतहाशा निर्माण दो महत्वपूर्ण कारण हैं जिससे हिमालय के इलाकों में प्राकृतिक आपदाएं आती है. लेकिन इलाके में बारिश में असामान्य वृद्धि ने इस इलाके को और ख़तरनाक बना दिया है. इसी महीने बादल फटने से हुई तेज़ बारिश और भूस्खलन से हिमाचल प्रदेश में कई लोगों की मौत हो गई. कई इमारतें, सड़कें और रेलवे ट्रैक बर्बाद हो चुके हैं. इस तरह के मौसम से पाकिस्तान और नेपाल के कुछ हिस्से भी प्रभावित हुए हैं. एक नई स्टडी में पाया गया है कि हिमालय सहित दुनिया भर के पहाड़ों में अब ऊंचाई वाली जगहों पर अधिक बारिश हो रही है, जहां अतीत में ज़्यादातर बर्फ़बारी होती थी. 

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव ने पहाड़ों को और अधिक खतरनाक बना दिया है, क्योंकि बढ़ता तापमान न केवल बारिश का कारण बन रहा है बल्कि बर्फ के पिघलने में भी तेज़ी आ रही है.


बारिश का पानी भी मिट्टी को ढीला कर देता है जिसके परिणामस्वरूप भूस्खलन, चट्टानें गिरना, बाढ़ आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं.


'नेचर जर्नल' में जून में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है, "हमारी फ़ाइंडिंग में पता चला है कि काफ़ी ऊंचाई पर, खासकर उत्तरी गोलार्ध के बर्फ वाले क्षेत्रों में बारिश में काफ़ी वृद्धि हुई है और इसके हमें कई सबूत मिले हैं."


यह अध्ययन 2019 में इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की एक विशेष रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें कहा गया था कि बर्फबारी में कमी आई है, खासकर पर्वतीय क्षेत्रों पर ऐसा देखा जा रहा है.

जरूरत से ज्यादा बारिश

फ्रांस में राष्ट्रीय मौसम विज्ञान अनुसंधान केंद्र के कार्यकारी निदेशक और विशेष आईपीसीसी रिपोर्ट के लेखकों में से एक सैमुअल मोरिन कहते हैं कि अब अधिक ऊंचाई पर हर मौसम में बारिश हो रही है. ये बारिश ज़रूरत से काफ़ी अधिक है.


ग्लोबल वार्मिंग के कारण ज़ीरो-डिग्री इज़ोटेर्म(वो हिमांक स्तर जिस पर बर्फ़ गिरती है) वह भी बढ़ गया है.


इस अध्ययन में कहा गया है, “परिणामस्वरूप, इन पर्वतीय क्षेत्रों को हॉटस्पॉट के रूप में माना जाता है जो अत्यधिक बारिश की घटनाओं, बाढ़, भूस्खलन और मिट्टी के कटाव के खतरों के प्रति संवेदनशील होते हैं.”


स्टडी के लीड ऑथर मोहम्मद ओम्बाडी ने बीबीसी को बताया कि उत्तरी गोलार्ध के रोकिज और आल्प्स पर्वतीय क्षेत्र की तुलना में हिमालय के क्षेत्र में ख़तरा अधिक है.


उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में ऐसी अतिरिक्ति परिस्थितियां हैं, जिससे यहां भीषण तूफान आते हैं.

जरूरत से ज्यादा बारिश

फ्रांस में राष्ट्रीय मौसम विज्ञान अनुसंधान केंद्र के कार्यकारी निदेशक और विशेष आईपीसीसी रिपोर्ट के लेखकों में से एक सैमुअल मोरिन कहते हैं कि अब अधिक ऊंचाई पर हर मौसम में बारिश हो रही है. ये बारिश ज़रूरत से काफ़ी अधिक है.


ग्लोबल वार्मिंग के कारण ज़ीरो-डिग्री इज़ोटेर्म(वो हिमांक स्तर जिस पर बर्फ़ गिरती है) वह भी बढ़ गया है.


इस अध्ययन में कहा गया है, “परिणामस्वरूप, इन पर्वतीय क्षेत्रों को हॉटस्पॉट के रूप में माना जाता है जो अत्यधिक बारिश की घटनाओं, बाढ़, भूस्खलन और मिट्टी के कटाव के खतरों के प्रति संवेदनशील होते हैं.”


स्टडी के लीड ऑथर मोहम्मद ओम्बाडी ने बीबीसी को बताया कि उत्तरी गोलार्ध के रोकिज और आल्प्स पर्वतीय क्षेत्र की तुलना में हिमालय के क्षेत्र में ख़तरा अधिक है.


उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में ऐसी अतिरिक्ति परिस्थितियां हैं, जिससे यहां भीषण तूफान आते हैं.

हिमालय क्षेत्र भारत, भूटान, नेपाल और पाकिस्तान में फैला हुआ है और इस इलाके में बहुत ही कम मौसम स्टेशन हैं जिससे बारिश के बारे सटीक आंकड़े हासिल करना भी मुश्किल है.


यही नहीं, कम ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में जो स्टेशन हैं, वो भी बारिश और बर्फबारी में अंतर नहीं कर पाते.


हालांकि, माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप स्थित मौसम स्टेशन ने पहाड़ पर एक जून से 10 अगस्त के बीच 245.5 मिमी वर्षण (बारिश और बर्फ दोनों के लिए इस्तेमाल होना वाला शब्द) दर्ज किया. इसमें से 70 प्रतिशत आंकड़ा बारिश का है.


पिछले साल जून और सितंबर में 32 फ़ीसदी बारिश दर्ज की गई थी, वहीं 2021 में 43 फ़ीसदी और 2020 में 41 फ़ीसदी बारिश दर्ज की गई थी.


नेशनल जियोग्राफिक के एक्सप्लोरर बेकर पेरी और टॉम मैथ्यूज ने बताया, ''हमारा मानना है कि बर्फबारी की तुलना में ज़्यादा बारिश होना हाल की स्थितियां हैं लेकिन हमारे पास लंबे समय का डेटा नहीं है जो इसको पूरी तरह साबित करे.''


क्षेत्रीय मौसम कार्यालय के प्रमुख बिक्रम सिंह ने बताया कि वर्षण में ये बदलाव हिमालयी राज्य उत्तराखंड में स्पष्ट दिख रहा है.


उन्होंने बताया, ''हम निश्चित तौर पर ये कह सकते हैं कि बर्फबारी में कमी आई है और 6,000 मीटर की ऊंचाई से नीचे वाले क्षेत्रों में ऐसा हुआ है. मानसून के दौरान निचले इलाकों में भारी बारिश होती है.''

नदियों का बदलता रूप

कुमाऊं यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर जे एस रावत ने कहा कि बर्फबारी में कमी और बारिश में वृद्धि का मतलब है कि इलाके की नदियों की प्रकृति बदली है.


उन्होंने कहा, ''अब अचानक बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि हुई है और नदियां जो कभी ग्लेशियर से पोषित थीं अब उनमें बारिश का पानी आता है. ''


तापमान में वृद्धि ने समस्या को और गंभीर कर दिया है क्योंकि इससे हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. इससे ग्लेशियर के झीलों में पानी भरता है और इससे बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाता है.


वैश्विक औसत दर की तुलना में हिमालय के तीन गुना अधिक गर्म होने की आशंका है, और कई अध्ययनों में अनुमान लगाया गया है कि इससे वहां वर्षा में काफी वृद्धि होगी.

सब कुछ तबाह हो गया'

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के मौसम में इलाकों में भूस्खलन और बारिश की घटनाओं में उन्होंने वृद्धि देखी है.


उत्तराखंड के चमोली जिले के मायापुर गांव के रहने वाले प्रभाकर भट्टा बताते हैं, ''पहाड़ों पर अधिक बारिश की वजह से मेरा गांव भूस्खलन के ख़तरों का सामना कर रहा था इसलिए इस जगह को खाली कर हमें कहीं और जाना पड़ा.''


14 अगस्त को रात में अचानक से बाढ़ आई और प्रभाकर का दो मंजिला घर मलबे, कीचड़ और पत्थर से दब गया.


प्रभाकर का परिवार अपनी जान इसलिए बचा सका क्योंकि उनसे ऊपर के इलाकों में रहने वाले लोगों ने उन्हें खतरे के बारे में बताया था इसलिए वो रात में जगे हुए थे और जैसे ही अजीब सी आवाजें सुनाई देने लगी, वो वहां से भाग खड़े हुए.


प्रभाकर का कहना है कि उनके पिता ने जिंदगी भर की कमाई लगाकर घर बनाया था और अब सब कुछ तबाह हो गया.

सर्दी में बर्फबारी की जगह हो रही है बारिश

विशेषज्ञों का कहना है कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में सड़क, सुरंग और जल विद्युत परियोजनाओं जैसे बुनियादी ढांचे के अंधाधुंध विकास से भी यहां प्राकृतिक विपदा आने की घटनाएं बढ़ी हैं.


हिमालय भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है जो हालात को और बदतर बनाता है.


बारिश में वृद्धि का असर सीमा पार भी दिखने लगा है. पाकिस्तान का उत्तरी क्षेत्र जहां हिमालय काराकोरम और हिंदूकुश की पहाड़ियों से मिलता है, वहां अचानक से बाढ़ आने की घटनाएं आम होती जा रही हैं.


इस इलाके के क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी के महानिदेशक कमल कमर ने बताया कि पिछले मानसून में गिलगित बाल्टिस्तान के इलाकों में अचानक बाढ़ की 120 घटनाएं आई हैं.


अगर इसकी तुलना 10-20 साल पहले से करें तो इसमें काफी बड़ा अंतर आया है.


उन्होंने बताया कि 4,000 मीटर की ऊंचाई पर गर्मी और सर्दी दोनों में बारिश हो रही है, जबकि सर्दी में तो बर्फबारी होनी चाहिए थी. नेपाल का भी हाल कुछ ऐसा ही है. यहां हाइड्रोपावर और पीने वाले पानी के प्लांट, सड़कें और पुल भारी बारिश और मलबे से तबाह हो रहे हैं.


नेपाल के स्वतंत्र पावर प्रोड्यूसर एसोसिएशन ने बताया कि इस मानसून में पूर्वी नेपाल में 30 हाइड्रोपावर प्लांट क्षतिग्रस्त हुए हैं. Sabhar BBC.COM 

Read more

गुरुवार, 17 अगस्त 2023

आयी कहानियों में एआई, लेखक डरे हुए हैं और मंत्रमुग्ध भी

0


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग करने वाले ही नहीं, कहानियां लिखने वाले भी डरे हुए हैं. बहुत से लेखकों को लगता है कि एआई उनकी आजीविका के लिए खतरा हो सकता है.

हाल ही में अमेरिका के ऑथर्स गिल्ड ने एक खुला खत लिखा, जिसका दस हजार से ज्यादा लेखकों ने समर्थन किया. इस पत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों से आग्रह किया गया कि वे कॉपीराइट के तहत सुरक्षित सामग्री का बिना इजाजत और भुगतान इस्तेमाल ना करे.


हालांकि एआई अपने आप में एक कहानी है, और यह अब सिर्फ साइंस फिक्शन नहीं बल्कि सच्ची कहानी है. राजनीति, महामारी या जलवायु परिवर्तन की तरह एआई भी अब कहानियों में एक अहम मुद्दा बन गया है और बड़ी संख्या में उपन्यासकार और कहानीकार अब उसे अपनी कहानियों में शामिल कर रहे हैं.


संस्कृतियूरोप

आयी कहानियों में एआई, लेखक डरे हुए हैं और मंत्रमुग्ध भी

14.08.2023१४ अगस्त २०२३

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग करने वाले ही नहीं, कहानियां लिखने वाले भी डरे हुए हैं. बहुत से लेखकों को लगता है कि एआई उनकी आजीविका के लिए खतरा हो सकता 


हाल ही में अमेरिका के ऑथर्स गिल्ड ने एक खुला खत लिखा, जिसका दस हजार से ज्यादा लेखकों ने समर्थन किया. इस पत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों से आग्रह किया गया कि वे कॉपीराइट के तहत सुरक्षित सामग्री का बिना इजाजत और भुगतान इस्तेमाल ना करे.


हालांकि एआई अपने आप में एक कहानी है, और यह अब सिर्फ साइंस फिक्शन नहीं बल्कि सच्ची कहानी है. राजनीति, महामारी या जलवायु परिवर्तन की तरह एआई भी अब कहानियों में एक अहम मुद्दा बन गया है और बड़ी संख्या में उपन्यासकार और कहानीकार अब उसे अपनी कहानियों में शामिल कर रहे हैं.









हेलेन फिलिप्स एक उपन्यासकार हैं. उनकी नयी किताब का नाम है ‘हम'. इस किताब में वह एक ऐसी मां-बेटी की कहानी सुनाती हैं जिनकी नौकरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से चली गयी है. फिलिप्स कहती हैं, "मैं एआई से डरी हुई हूं और मंत्रमुग्ध भी हूं. (ब्रह्मांड के) पूरे ज्ञान को जमा करने के लिए एक उम्मीद है लेकिन साथ ही यह डर भी है कि एक ऐसी इंटेलिजेंस हमारी जगह ले सकती है, जो इंसानी नहीं है.”


कहानियों में एआई

सिलाडोन बुक्स के उपाध्यक्ष और संपादकीय निदेशक रायन डोहर्टी कहते हैं, "हमारे पास ऐसी किताबों के बहुत प्रस्ताव आ रहे हैं जो एआई के बारे में हैं.” सिलाडोन ने हाल ही में फ्रेड लुंत्सकर के उपन्यास साइक के लिए एग्रीमेंट साइन किया है. यह किताब एक एआई मनोवैज्ञानिक के बारे में है.


डोहर्टी कहते हैं, "यह आज की युगचेतना है. और सांस्कृतिक युगचेतना हमेशा कहानियों में पहुंच जाती है.”


आने वाले दो साल में ऐसे कई उपन्यास आने वाले हैं जिनमें एआई के बारे में बात होगी. इनमें शॉन माइकल का "डू यू रिमेंबर बीइंग बॉर्न?', ब्रायन वैन डाइक का ‘इन आवर लाइकलीनेस' और एई ओसवर्थ का ‘अवेकंड' शामिल हैं. ‘अवेकंड' एक समलैंगिक चुड़ैल और एआई के साथ उसकी जंग के बारे में है जबकि ‘इन आवर लाइकलीनेस' में एक नौकरशाह है जो एक ऐसे फैक्ट-चेकिंग प्रोग्राम का इस्तेमाल करता है जिसमें तथ्यों को बदलने की क्षमता है.


संस्कृतियूरोप

आयी कहानियों में एआई, लेखक डरे हुए हैं और मंत्रमुग्ध भी

14.08.2023१४ अगस्त २०२३

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग करने वाले ही नहीं, कहानियां लिखने वाले भी डरे हुए हैं. बहुत से लेखकों को लगता है कि एआई उनकी आजीविका के लिए खतरा 


हाल ही में अमेरिका के ऑथर्स गिल्ड ने एक खुला खत लिखा, जिसका दस हजार से ज्यादा लेखकों ने समर्थन किया. इस पत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों से आग्रह किया गया कि वे कॉपीराइट के तहत सुरक्षित सामग्री का बिना इजाजत और भुगतान इस्तेमाल ना करे.


हालांकि एआई अपने आप में एक कहानी है, और यह अब सिर्फ साइंस फिक्शन नहीं बल्कि सच्ची कहानी है. राजनीति, महामारी या जलवायु परिवर्तन की तरह एआई भी अब कहानियों में एक अहम मुद्दा बन गया है और बड़ी संख्या में उपन्यासकार और कहानीकार अब उसे अपनी कहानियों में शामिल कर रहे हैं.










हेलेन फिलिप्स एक उपन्यासकार हैं. उनकी नयी किताब का नाम है ‘हम'. इस किताब में वह एक ऐसी मां-बेटी की कहानी सुनाती हैं जिनकी नौकरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से चली गयी है. फिलिप्स कहती हैं, "मैं एआई से डरी हुई हूं और मंत्रमुग्ध भी हूं. (ब्रह्मांड के) पूरे ज्ञान को जमा करने के लिए एक उम्मीद है लेकिन साथ ही यह डर भी है कि एक ऐसी इंटेलिजेंस हमारी जगह ले सकती है, जो इंसानी नहीं है.”


कहानियों में एआई

सिलाडोन बुक्स के उपाध्यक्ष और संपादकीय निदेशक रायन डोहर्टी कहते हैं, "हमारे पास ऐसी किताबों के बहुत प्रस्ताव आ रहे हैं जो एआई के बारे में हैं.” सिलाडोन ने हाल ही में फ्रेड लुंत्सकर के उपन्यास साइक के लिए एग्रीमेंट साइन किया है. यह किताब एक एआई मनोवैज्ञानिक के बारे में है.


डोहर्टी कहते हैं, "यह आज की युगचेतना है. और सांस्कृतिक युगचेतना हमेशा कहानियों में पहुंच जाती है.”


आने वाले दो साल में ऐसे कई उपन्यास आने वाले हैं जिनमें एआई के बारे में बात होगी. इनमें शॉन माइकल का "डू यू रिमेंबर बीइंग बॉर्न?', ब्रायन वैन डाइक का ‘इन आवर लाइकलीनेस' और एई ओसवर्थ का ‘अवेकंड' शामिल हैं. ‘अवेकंड' एक समलैंगिक चुड़ैल और एआई के साथ उसकी जंग के बारे में है जबकि ‘इन आवर लाइकलीनेस' में एक नौकरशाह है जो एक ऐसे फैक्ट-चेकिंग प्रोग्राम का इस्तेमाल करता है जिसमें तथ्यों को बदलने की क्षमता है.


फेसट्यूनिंग: एक खतरनाक जुनून


अपराध-कथा लिखने वाले जेफरी डिगर ग्रीस के बारे में लिखे गये अपने थ्रिलर उपन्यासों के लिए मशहूर हैं. वह एक नया उपन्यास लिख रहे हैं जो एआई और मेटावर्स के बारे में है. वह कहते हैं कि वह हमेशा ऐसे मुद्दों की तलाश में रहते हैं जो सामाजिक बदलाव के मुहाने पर नजर आ रहे हों.


लेखन में तकनीक

ये सभी लेखक अपनी कहानियों में एआई के जरिये मानवीय सवालों को उठाने की कोशिश कर रहे हैं. सिएरा ग्रीअर का उपन्यास ‘एनी बॉट' एक एआई दोस्त के बारे में है जो एक पुरुष के लिए तैयार किया जाता है. ग्रीअर कहती हैं कि वह अपने किरदार के जरिये खुशी की जरूरत को समझने की कोशिश कर रही हैं और उन्होंने "चाह, सम्मान और तड़प” जैसी भावनाओं को गहराई से समझने के लिए एक रोबोट गर्लफ्रेंड का किरदार गढ़ा है.


बहुत से लेखक एआई का इस्तेमाल लिखने के लिए भी कर रहे हैं. ऑसवर्थ ने एक नया प्रोग्राम तैयार किया है जो मैकियाविली और अन्य मशहूर लेखकों के स्टाइल का इस्तेमाल करता है. वह कहते हैं, "चैटजीपीटी एक फेरारी है, जबकि मैंने जो बनाया है वो एक स्केटबोर्ड है जिस पर एक चौकोर पहिया लगा है. लेकिन मैं चौकोर पहिये वाले स्केटबोर्ड की ओर ज्यादा आकर्षित था.”


इसी तरह ‘डू यू रिमेंबर बीइंग बॉर्न?' के लिए शॉन माइकल ने ऐसा प्रोग्राम इस्तेमाल किया है जो कविता और गद्य दोनों लिख सकता है. वह अपने उपन्यास में अलग-अलग तरह से लिख रहे हैं ताकि लोगों को पता चल सके कि कौन सा हिस्सा एआई ने लिखा है और कौन सा उन्होंने.


वीके/एए (रॉयटर्स) sabhar Dw.de 

Read more

बुधवार, 16 अगस्त 2023

चांद तक रेस में भारत का चंद्रयान-3 आगे रहेगा या रूस का लूना-25

0

चांद तक रेस में भारत का चंद्रयान-3 आगे रहेगा या रूस का लूना-25 

बीते महीने भारत ने एक बार फिर चांद के लिए अपना मिशन भेजा है. वहीं, क़रीब पांच दशक के लंबे अंतराल के बाद चांद तक पहुंचने की रेस में रूस भी कूद पड़ा है.


यानी एक रूसी और एक भारतीय स्पेसक्राफ्ट चांद पर उतरने के इरादे से आगे बढ़ रहे हैं.


भारत का चंद्रयान-3 और रूस का लूना-25 अपने साथ एक-एक लैंडर लेकर अंतरिक्ष में गए हैं, ताकि चांद के दक्षिणी ध्रुव में यानी अंधेरे वाले हिस्से में उतर कर इतिहास रच सकें.


ये चांद का वो इलाक़ा है जहां अब तक कोई लैंडर सफलतापूर्वक उतर नहीं पाया है.

रूस ने 11 अगस्त 2023 (मॉस्को समय के अनुसार) को लूना-25 लॉन्च किया है, वहीं भारत ने 14 जुलाई को चंद्रयान-3 चांद के लिए रवाना किया है. जानकार कहते हैं कि ये दोनों ही मिशन लगभग समान वक्त चांद पर अपना-अपना लैंडर उतारेंगे.


ऐसे में दुनिया भर में लोग ये देखने का इंतज़ार कर रहे हैं कि भारत या रूस में से कौन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपना लैंडर सबसे पहले और सफलतापूर्व उतारेगा?

1960 के दशक में शुरू हुई रेस

हालांकि चांद तक की ये रेस आज नहीं बल्कि 1960 के दशक में शुरू हुई थी. उस वक्त अमेरिका और सोवियत संघ के बीच ये होड़ थी कि चांद पर सबसे पहले इंसान को कौन उतार सकता है.


पृथ्वी की कक्षा में पहला सैटलाइट स्थापित करने, अंतरिक्ष में पहली बार इंसान को भेजने और मानवरहित मिशन को चांद पर उतारने के मामले में रूस बाज़ी मार ले गया. लेकिन अपोलो मिशन के ज़रिए अमेरिका ने चांद की सतह पर पहली बार इंसान को उतारा और ये बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली.


अमेरिका की इस उपलब्धि को दुनियाभर के लाखों लोगों ने टेलीविज़न पर देखा. इसके बाद अमेरिका ने और भी कई मानव मिशन चांद के लिए भेजे.


अमेरिका का अपोलो कार्यक्रम 1972 में ख़त्म हुआ. इसके पांच दशक बाद भी आज तक अमेरिका के अलावा कोई और देश चांद पर इंसान को उतार नहीं पाया है.

 जुलाई 2023 को भारत के चंद्रयान ने पृथ्वी से उड़ान भरी. चांद की सतह से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने के लिए इसमें वैज्ञानिक उपकरणों के साथ-साथ छह चक्कों वाला एक रोवर भी है.


उम्मीद की जा रही है कि चांद की कक्षा में कई बार चक्कर लगाते हुए ये पहले चांद पर उतरने की तैयारी करेगा और फिर लैंडर 23 अगस्त को चांद की सतह पर उतरेगा.


वहीं रूस का लैंडर लूना-25, 11 अगस्त को चांद के लिए रवाना हुआ है. ये सीधे रास्ते से और चंद्रयान की अपेक्षा बेहद तेज़ गति से चांद की तरफ जा रहा है और उम्मीद की जा रही है कि ये लॉन्च होने के 10 दिनों के भीतर ही चांद तक पहुंच जाएगा.


रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने भी अपनी इस महत्वाकांक्षा को खुल कर सामने रखा है कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने के मामले में रूस दुनिया का पहला देश बनना चाहता हैं.


लेकिन माना जा रहा है कि लूना-25 की यात्रा थोड़ी धीमी हो सकती है और हो सकता है कि वो चांद तक पहुंचने में थोड़ा अधिक वक्त ले. ऐसे में ये बिल्कुल संभव है कि चंद्रयान-3 का लैंडर पहले चांद की सतह पर लैंड करे.


बात रूस की हो या भारत की, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि चांद तक पहुंचने की होड़ में अब एक बार फिर कई देशों की दिलचस्पी बढ़ रही है.


हाल के दिनों में चांद पर पानी के होने के संकेत पाए गए हैं जिसके बाद वैज्ञानिकों में उत्साह है. उनका मानना है कि भविष्य में चांद पर बेस बनाना हो तो इस जमे हुए पानी के हाइड्रोजन से ईंधन तैयार किया जा सकता है. एक वजह ये भी है कि हो सकता है कि इस पानी को भविष्य में पीने लायक बनाया जा सकेगा.

लूना-25 बनाम चंद्रयान-3

रूस के लूना-25 और भारत के चंद्रयान-3 के बीच की रेस निस्संदेह चांद की सतह के अन्वेषण के एक नए दौर की शुरूआत कर दी है.


इसमें भारत और रूस के अलावा अमेरिका, चीन, इसराइल, जापान के अलावा निजी कंपनियां भी चांद के लिए मानवरहित और इंसान को लेकर जाने वाले कार्यक्रम की योजना बना रही हैं.


कुछ मुल्कों के लिए ये दोस्ताना प्रतिस्पर्धा है, लेकिन ये बात सच है कि अन्वेषण का हर कार्यक्रम चांद के बारे में जानकारी की किताब का एक नया चैप्टर साबित होगा. चांद पर लैंडर उतारने का हर मुल्क का छोटा कदम सौर मंडल के सदस्यों को समझने में मानव की मदद ही करेगा.


लेकिन कुछ जानकार मानते हैं कि कौन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहले उतरेगा ये बात बेहद महत्वपूर्ण है.


यूएस एयर और स्पेस फोर्ट की एयर यूनिवर्सिटी में रणनीति और सुरक्षा मामलों की प्रोफ़ेसर वेंडी व्हिटमैन कॉब कहती हैं, "ऐसा लग रहा है कि ये मात्र संयोग है कि दोनों मून लैंडर एक ही वक्त चांद पर उतर सकते हैं. लेकिन ये बेहद दिलचस्प है."


वो बताती हैं कि रूस 2021 में लूना-25 का लॉन्च करना चाहता था लेकिन किन्हीं कारणों से इसके लॉन्च में देरी होती गई और ये इस साल प्रक्षेपित किया जा सका.


वो कहती हैं कि इस मामले में भारत रूस से एक कदम आगे है क्योंकि उसका स्पेसक्राफ्ट पहले ही चांद की कक्षा में है.


वो कहती हैं, "हो सकता है कि इस कारण रूस पर चांद तक पहले पहुंचने का कुछ दवाब भी हो, क्योंकि उन्होंने इसके लिए सीधा रास्ता चुना है."

लूना-25 के मुक़ाबले चंद्रयान-3 दोगुने वज़न का है और रूसी स्पेसक्राफ्ट के मुक़ाबले उसे कम क्षमतावाले रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया है. इसका मतलब ये है कि चंद्रयान-3 पृथ्वी के चारों तरफ कक्षा में दीर्घ वृत्ताकार चक्कर काटेगा और फिर उसके बाद खुद को चांद की तरफ उछाल लेगा.


दोनों के कार्यक्रमों में सबसे अधिक दबाव ऑपरेटरों पर रहेगा जिन्हें चांद पर लैंडर उतारने से पहले उसका सटीक आकलन करना होगा ताकि टचडाउन की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो.


आख़िरी वक्त पर हुई मामूली-सी तकनीकी गड़बड़ी से पूरे अभियान के नाकाम होने का ख़तरा है और दोनों ही अभियानों को तब तक सफल नहीं माना जाएगा जब तक वो अपने लैंडर को चांद की सतह पर सही तरीके से नहीं उतारते.


हालांकि ये भी सच है कि दोनों देशों के लिए ये मामला राष्ट्रीय गौरव से भी जुड़ा है. यूक्रेन के ख़िलाफ़ 'विशेष सैन्य अभियान' छेड़ने के बाद रूस कई स्तर पर पाबंदियों का सामना कर रहा है. ऐसे में वो ये साबित करना चाहता है कि स्पेस के क्षेत्र में उसकी क्षमता किसी भी कारण से प्रभावित नहीं हुई है.


व्हिटमैन कॉब कहती हैं, "इन पाबंदियों का रूस के स्पेस कार्यक्रम पर बुरा असर पड़ा है."

यूके की क्वीन मार्गरेट युनिवर्सिटी में स्पेस इंडस्ट्री की पढ़ाई कर रही स्टीफ़ानिया पालादिनी कहती हैं कि जब रूस अस्तित्व में नहीं था, उस वक्त 50 साल पहले सोवियत संघ चांद पर लैंडर और रोवर उतारने में सक्षम रहा था, ये पूरी रेस दरअसल चांद तक पहुंचने की नहीं है.


देखा जाए तो रूस ये रेस पहले ही जीत चुका है, लेकिन फिर 1976 में लूना-24 के बाद रूस ने इस मिशन पर अधिक ध्यान नहीं दिया. लूना-25 सालों बाद रूस के चांद मिशन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश है.


माना जाता है कि रूस का लूना-1 चांद तक पहुंचने वाला पहला रोवर था. जानकार कहते हैं कि इसका डिज़ाइन कुछ ऐसा था कि ये चांद तक पहुंच कर वहां उतरे लेकिन जब 1959 में ये चांद के पास पहुंचा तो ये उसकी सतह से 3,725 मील (5,995 किलोमीटर) दूर से होता हुआ गुज़र गया.


स्टीफ़ानिया पालादिनी कहती हैं, "ऐसे में अगर भारत का चंद्रयान-3 योजना के अनुसार चांद पर उतरता है तो भारत के लिए ये सॉफ्ट लैंडिग पहली बड़ी उपलब्धि होगी."


वो कहती हैं कि 2019 में चंद्रयान-2 के साथ भी भारत ने यही कोशिश थी कि वो चांद की सतह पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिग करा सके. लेकिन ये लैंडर चांद की सतह के साथ टकरा गया जिस कारण ये मिशन नाकाम हो गया.


हालांकि चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने की कोशिश भारत ने इससे पहले ही की है. भारत ने अक्तूबर 2008 में चंद्रयान-1 चांद की कक्षा में स्थापित किया था, इसने मून इम्पैक्ट प्रोब भेजा था जो शैकलटन क्रेटर के पास जा कर क्रैश कर गया था. हालांकि इस प्रोब को कभी भी सॉफ्ट लैंडिंग के लिए तैयार नहीं किया गया था.

 इस बार क्या अलग है?

लेकिन इस बार का रूस और भारत का मिशन पहले से अलग है क्योंकि दोनों की इस बार की कोशिश है कि वो चांद के दक्षिणी ध्रुव में लैंडिंग की सही जगह खोज पाएं.


अब तक चांद के लिए जो भी मिशन भेजे गए हैं वो चांद के उत्तर में या फिर मध्य में लैंड करने के लिए भेजे गए हैं. यहां पर लैंडिंग के लिए जगह समतल है और सूरज की सही रोशनी भी आती है. लेकिन दक्षिणी ध्रुव चांद का वो इलाक़ा है जहां रोशनी नहीं पहुंचती. साथ ही इस जगह पर चांद की सतह पथरीली, ऊबड़-खाबड़ और गड्ढों से भरी है.


यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोलोराडो बोल्डर में एस्ट्रोफ़िज़िक्स और प्लेनटरी साइंस के प्रोफ़ेसर जैक बर्न्स कहते हैं, "यहां पहुंचने वाली सूरज की किरणें टेढ़ी होती हैं. चांद का अधिकतर हिस्सा अपेक्षाकृत समतल है, लेकिन दक्षिणी हिस्से में सूरज की रोशनी के कारण गड्ढों की परछाईं बहुत लंबी होती है. इस कारण यहां गड्ढों और ऊबड़-खाबड़ ज़मीन की पहचान कर पाना बेहद मुश्किल है."


आर्टेमिस-3 के साथ साल 2025 में अमेरिका चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ इंसान को भेजना चाहता है. ऐसे में भारत और रूस के लैंडर से जो जानकारी मिलेगी वो बेहद महत्वपूर्ण होगी.


हालांकि ह्विटमैन कॉब कहती हैं कि इंसान को भेजना, मानवरहित स्पेसक्राफ्ट भेजने से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है. वो कहती हैं, "मुझे नहीं लगता कि ये दोनों किसी तरह से एक जैसी योजनाएं हैं

असल रेस वक्त की....

यूनिवर्सिटी ऑफ़ एरिज़ोना में प्लैनेटरी साइंस के प्रोफ़ेसर विष्णु रेड्डी कहते हैं कि आने वाले वक्त में ये महत्वपूर्ण नहीं रहेगा कि कौन पहले गया और कौन बाद में.


वो कहते हैं, "आने वाले वक्त में हम ये देखेंगे कि कौन वहां अधिक देर तक मौजूदगी बना सका है. आज के वक्त में निजी कंपनियों और सरकारों के बीच की होड़ की जो चर्चा हो रही है वो बेतुकी है. प्रतियोगिता केवल आपको एक जगह तक पहुंचा सकती है, लेकिन ये वहां लंबे वक्त तक आपकी मौजूदगी सुनिश्चित नहीं कर सकेगी."


वो कहते हैं कि भारत और रूस दोनों के लैंडर लगभग एक जैसे हैं. उन्हें उम्मीद है कि इन दोनों से वैज्ञानिकों को चांद पर मौजूद पानी, खनिज, वहां के वातावरण और दूसरी चाज़ों के बारे में और जानकारी मिल सकेगी.


वो कहते हैं कि अगर दक्षिणी ध्रुव से चांद की एक साफ तस्वीर मिल सकी तो ये भी बड़ी उपलब्धि होगी क्योंकि मूल संघर्ष लैंडर को सफलतापूर्वक उस हिस्से में उतारने की है. Sabhar BBC.COM 

Read more

शनिवार, 12 अगस्त 2023

दुनिया का नया 'बादशाह' बनना चाहता है सऊदी अरब!, जानिए क्यों यूक्रेन शांति वार्ता में दिखाई दिलचस्पी

0

बदलती दुनिया में जब इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, सऊदी अरब अब अपने देश को पूरी तरह से बदलना चाहता है। जानिए इसके लिए वह क्या क्या उपाय कर रहा है? किस तरह वह दुनिया के घटनाक्रमों में अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है? जानिए आखिर इन सबके क्या हैं मायने?Saudi Arab: रूस और यूक्रेन की जंग का हल निकालने के लिए सऊदी अरब के जेद्दा में यूक्रेन शांति शिखर सम्मेलन का आयोजन 5 और 6 अगस्त को किया गया। भारत ने भी इसमें हिस्सा लिया। सऊदी अरब में हुए इस शांति सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी हिस्सा लिया और 10 सूत्रीय शांति फॉर्मूला रखा, जिस पर विचार विमर्श हुआ। सवाल यह है कि आखिर दुनिया के बड़े मसलों पर सऊदी अरब अचानक क्यों इतनी दिलचस्पी लेने लगा? सुन्नी देश सऊदी अरब क्यों वैश्विक घटनाक्रमों में अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है? क्यों रूस और चीन जैसे देशों के साथ उसके ताल्लुकात इतने गहरे होते जा रहे हैं? अमेरिका का करीबी रहा सऊदी अरब अब क्यों और किस वजह से अमेरिका से दूर दूसरी 'लॉबी' में अपनी सक्रियता दिखा रहा है। सऊदी अरब के मुखिया मोहम्मद बिन सलमान क्यों दुनिया के नए 'बादशाह' बनना चाहते हैं? यहां जानिए ऐसे ही सभी सवालों के जवाब। सऊदी अरब ने दो दिन की यूक्रेन शांति वार्ता आयोजित कर दुनिया को यह संकेत दिया कि वह अब सिर्फ 'तेल' बेचने वाला कारोबारी ही नहीं है, बल्कि वैश्विक घटनाक्रमों में सक्रियता बढ़ाकर अपने 'नए इरादे' दुनिया को दिखा रहा है। सऊदी अरब पर हाल ही में यूक्रेन और रूस की जंग के कारण विपरीत असर पड़ा है। उससे तेल खरीदने वाले परंपरागत ग्राहक अब रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं। इन सबके बीच अब बदलती दुनिया में जब इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, सऊदी अरब अब अपने देश को पूरी तरह से बदला चाहता है। एक तेल उत्पादक देश होने के साथ ही वह अपने देश का इंफ्रास्ट्रक्चर बदल रहा है। ऐसा करके वह यह जताना चाहता है कि अब वह टूरिज्म इंडस्ट्री में तेजी से अपने आपको 'शिफ्ट' कर रहा है। ताकि दूसरे माध्यमों से भी अरब को तगड़ी आया भविष्य में हो सके। वह तेजी से इस दिशा में वह काम कर रहा है। इसके लिए उसे नए दोस्तों की जरूरत है, जो उसके इस सपने को साकार करने में अपना सहयोग दे सकें।

Read more

भारत का चंद्रयान-3, चांद की सतह पर जहां उतरेगा, वो इतनी ख़ास क्यों है?

0

भारत का चंद्रयान-3, चांद की सतह पर जहां उतरेगा, वो इतनी ख़ास क्यों है? 

इंसान के लिए धरती से पूरा चांद देखना मुमकिन नहीं है. धरती से चंद्रमा का सिर्फ़ एक हिस्सा दिखता है और जो हिस्सा नज़र नहीं आता, उसे कहते हैं ‘डार्क साइड ऑफ द मून’ या ‘फ़ार साइड ऑफ द मून.’ भारत के चंद्रयान 3 का लक्ष्य यही है कि वो चांद के डार्क साइड में सॉफ्ट लैंडिंग कर सके, तो आइए समझते हैं चांद के इस छिपे हुए डार्क साइड के रहस्य को.

Read more

गुरुवार, 10 अगस्त 2023

Brain Computer Interface: आपके सोचने से काम करेगा स्मार्टफोन, आ रही है यह नई टेक्नोलॉजी

0



What Is The Brain Computer Interface: तकनीक के क्षेत्र में जिस तेजी से विकास हो रहा है। ऐसे में वह दिन दूर नहीं जबसाइंस फिक्शन में दिखने वाली हाईटेक चीजें यथार्थ रूप ले लेंगीआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी जगत में नित नए अविष्कार हो रहे हैं। ऐसे में रोज हमें कई हैरतअंगेज करने वाली तकनीकें देखने को मिल रही हैं। वहीं क्या कभी आपने किसी ऐसे स्मार्टफोन के बारे में सोचा, जिसका इस्तेमाल करने के लिए आपको उसे टच करने की भी जरूरत नहीं होगी। आप अपने मन से स्मार्टफोन को चला सकेंगे। 
ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस एक खास तरह की तकनीक है, जिसकी मदद से दिमागी इलेक्ट्रिकल गतिविधियों को बाहरी डिवाइस के साथ जोड़ा जाता है। इस तकनीक के अंतर्गत व्यक्ति के मस्तिष्क में स्टेंट्रोड नाम की एक चिप लगाई जाएगी। 


 

Read more

भ्रूणों की जीन एडिटिंग का क्यों हो रहा विरोध?

0

आज दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिनके जीन को सीआरआईएसपीआर-केस9 जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल करके संशोधित किया गया है. तकनीक सही है या गलत, इस पर चर्चा होती रहेगी, लेकिन जीन थेरेपी काम कैसे करती हैं और उनकी सीमाएं क्या हैं? 


आज दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिनके जीन को सीआरआईएसपीआर-केस9 जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल करके संशोधित किया गया है. तकनीक सही है या गलत, इस पर चर्चा होती रहेगी, लेकिन जीन थेरेपी काम कैसे करती हैं और उनकी सीमाएं क्या 

 2018 में वैज्ञानिक हे जिआन्की ने संशोधित जीनोम वाली दो बच्चियों के जन्म की घोषणा कर दुनिया को चौंका दिया. उन्होंने दावा किया था कि वह सीआरआईएसपीआर-केस9 जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर दो जुड़वां लड़कियों के जीन को संशोधित करने में कामयाब रहे हैं, ताकि उन्हें भविष्य में एड्स वायरस के संक्रमण से बचाया जा सके.


हे जिआन्की चीन के शेनजेन प्रांत में सदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर कार्यरत थे. जिआन्की ने जुड़वा भ्रूणों पर सीआरआईएसपीआर-केस9 नामक जीन एडिटिंग टूल का इस्तेमाल किया, ताकि उन भ्रूण के सीसीआर5 जीन को संशोधित किया जा सके और उनके अंदर एचआईवी के लिए प्रतिरोध पैदा हो सके.


इन दोनों बच्चियों के अलावा, एक साल बाद तीसरा ऐसा बच्चा पैदा हुआ जिसके जीन में संशोधन किया गया था. ये तीनों दुनिया के पहले जीन संशोधित बच्चों का प्रतिनिधित्व करते हैं. पांच साल बाद भी तीनों कथित तौर पर स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं.


इस घटना से वैज्ञानिकों के साथ-साथ सामान्य लोगों का एक बड़ा तबका आक्रोशित हुआ. जिआन्की के शोध और कार्य की नैतिकता को लेकर दुनिया के कई हिस्सों में काफी तेज और व्यापक आलोचना हुई. नतीजा यह हुआ कि ‘गैर-कानूनी तरीके से डॉक्टरी उपचार' के आरोप मेंजिआन्की को चीन में तीन साल कैद की सजा सुनाई गई.


ये तीनों बच्चे भ्रूण के दौरान जीनोम संशोधन के पहले मामलों के उदाहरण हो सकते हैं, लेकिन वे संशोधित जीनोम वाले एकमात्र इंसान नहीं हैं. सिकल सेल रोग के इलाज के लिए सीआरआईएसपीआर-केस9 का इस्तेमाल करके, क्लिनिकल ट्रायल में 200 से अधिक वयस्कों का इलाज किया गया है.


Read more

क्या भविष्य में बच्चे पेट्री डिश में पैदा होंगे?

0

.वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल के उपयोग से प्रयोगशाला में ऐसे भ्रूण का निर्माण कर लिया है जो मानव भ्रूण के बेहद करीब है. वैज्ञानिक दृष्टि से तो यह एक मील का पत्थर है लेकिन नैतिक दृष्टि से यह कई सवालों को जन्म 

मैग्डालेना जर्निका गेट्ज का एक रिसर्च इसी साल जून में नेचर जरनल में प्रकाशित हुआ था. शोध के नतीजे प्रकाशित होने पर गेट्ज का कहना था, "हमारा लक्ष्य जीवन निर्माण करना नहीं है.”


हालांकि कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में डेवलेपमेंटल बॉयोलॉजिस्ट जर्निका गेट्ज और उनकी टीम ने सही मायनों में कुछ ऐसा खोजा है जो आगे चलकर एक दिन इंसानों के बहुत करीब पहुंच सकता है. जिस दिन गेट्ज ने बॉस्टन कॉन्फ्रेंस में अपनी रिसर्च के नतीजे पेश किए, उसके अगले दिन गॉर्डियन अखबार ने इसे रिपोर्ट करते हुए लिखा था कि सिंथेटिक मानव भ्रूण का अभूतपूर्व विकास हुआ है. गॉर्डियन की इस हेडलाइन ने मीडिया में खलबली मचा दी. केंब्रिज में ये स्टडी लगभग उसी समय प्रकाशित हुई थी, जब इस्राएल में एक प्रतिद्वंदी रिसर्च टीम ने अपने अध्ययन में भी ऐसा ही कुछ पाया था.

 रिसर्च के बाद अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इससे जुड़े नैतिक मुद्दों को उठाना शुरू किया, वैसे ही मानो इसने फ्रैंकस्टीन के दैत्यों की छवियों को उभार दिया. रिसर्चरों की दोनों ही टीमों ने पहले किए गए प्रयासों की तुलना में ह्यूमन स्टेम सेल से बहुत एडवांस स्तर का भ्रूण जैसा एक स्ट्रक्चर तैयार कर लिया था. ये भ्रूण 14 दिनों के प्राकृतिक भ्रूण के बराबर था, जो प्राकृतिक निषेचन यानी फर्टिलाइज़ेशन के बाद विकसित होता है.

भ्रूण अनुसंधान का नैतिक पक्ष

हमने इंसानों को चांद पर पहुंचा दिया है, इंसानों ने समुद्रों की अनंत गहराइयों को नाप दिया है लेकिन सही मायनों में हम शुरुआती जीवन के बारे में बहुत कम जानते हैं. किसी इंसानी जीवन को खतरे में डाले बिना रिसर्चर शुरुआती जीवन के विकास के बारे में कुछ भी पता नहीं लगा सकते हैं, इसीलिए उन्हें अपनी रिसर्च को किसी जानवर के भ्रूण या मानव के मॉडल भ्रूण तक सीमित करना पड़ा था. ये खोज रिसर्चरों को गर्भपात, आनुवंशिक स्थितियों और जन्मजात अंगों में होने वाले दोषों के कारणों को जानने में मददगार हो सकती हैं

Read more

मंगलवार, 8 अगस्त 2023

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से बदलती न्यूज़ की दुनिया

0

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से बदलती न्यूज़ की दुनिया

 

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस आने वाले वक़्त में कई चीज़ों को पूरी तरह बदलने की ताक़त रखता है.


कई एआई जेनेरेटड कैरेक्टर्स इसके उदाहरण हैं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर आए दिन सामने आते रहते हैं.


भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी एआई तकनीक इस्तेमाल हो रही है, जहां एक टीवी चैनल ने इसका इस्तेमाल करते हुए एक टीवी प्रेज़ेंटर तैयार किया है.

Read more

Work Force Age: दुनिया में चलेगा अपना सिक्का, US-जापान-कनाडा अब हो गए बूढ़े, भारत सबसे जवान

0

भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के तौर पर उभरा है. विश्व बैंक (World Bank) से लेकर आईएमएफ (IMF) तक ने इंडियन
साल 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका (US) के एक तिहाई (37.3 फीसदी) से भी अधिक वर्कफोर्स 50 वर्ष और उससे अधिक आयु का है, ऐसे में कर्मचारियों का ये आंकड़ा लगभग 16.1 मिलियन होता है. वहीं लगभग 15 फीसदी वर्कफोर्स या 6.4 मिलियन कर्मचारी 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं
वर्ल्ड बैंक के अनुसार आने वाले समय में जहां अमेरिका, जापान, कनाडा एवं अन्य यूरोपीय देश परेशान दिखेंगे वहीं भारत के लिए यह समय बहुत ही बेहतरीन रहने वाला है। ऐसे समय में जहां दुनिया के कुछ देश फाइनेंशियल तौर पर संघर्ष करते नजर आएंगे वहीं भारत सहित कुछ देश फाइनेंशियल तौर पर और भी मजबूत नजर आएंगे। यह सब वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ की रिपोर्ट कह रही है। आइये आपको बताते हैं कि कैसे आने वाले समय में भारत सोने की चिड़िया कहलाएगा यानि कैसे भारत का समय सुनहरी होगा। Indian Economy
यूरोपीय देश हो रहे बूढ़े | Work Force Age दुनिया के फिलहाल जो हालात हैं, उन हालातों में दो ऐसे फैक्टर हैं, जो आने वाले समय में अमेरिका, कनाड़ा, जापान और अन्य यूरोपीय देशों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाले हैं या यूं कहें कि बड़ी मुसीबत बनने वाले हैं। दूसरी तरफ भारत, वियतनाम और चीन जैसे देशों के लिए फायदेमंद रहेंगे। एक्सपर्ट्स की मानें तो पश्चिमी देश बूढ़े होते जा रहे हैं। कनाडा, अमेरिका और यूरोप में कर्मठ, मेहनती युवाओं की कमी होती जा रही है, अन्य कामकाजी लोग बूढ़े होते जा रहे हैं। इस मामले में भारत ऐसा देश होगा जिसे ऐसे हालातों से राहत मिलेगी।

एशियाई देश इनमें शामिल होंगे। भारत और वियतनाम की बात करें तो इन देशों में कार्य करने वाले अधिकतर लोग युवा हैं और युवा देश के कर्णधार होते हैं। अगर आंकड़ों की बात की जाए तो अमेरिका सहित अन्य यूरोपीय देशों में काम करने वाले कर्मचारियों की उम्र के आंकड़े ये साफ करते हैं कि आने वाले समय में हालात कैसे होंगे। 2020 के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के एक तिहाई से भी अधिक वर्कफोर्स 50 साल और उससे ज्यादा उम्र की है। इस प्रकार ऐसे कर्मचारियों का यह आंकड़ा करीब 16.1 मिलियन होता है। दूसरी तरफ 15 प्रतिशत के करीब वर्कफोर्स या 6.4 साल या उससे ज्यादा आयु के हैं।

बात अगर जापान की करें तो जापान भी अपनी बूढ़ी होती आबादी को लेकर चिंतित है। उसके सामने यह बड़ी समस्या बनकर खड़ी है। इसको लेकर सरकार काफी परेशान नजर आ रही है। बता दें कि जापान के जन्मदर में हो रही लगातार गिरावट तथा बच्चों की हो रही निरंतर कमी के कारण जापान का भविष्य संकट में आ सकता है। वर्ष 2022 के आंकड़ों में पहली बार जापान में बच्चों वाले परिवार एक करोड़ से भी कम हो गए हैं।

इससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर जरूर देखने को मिल सकता है। अगर जन्मदर में कमी आएगी तो जाहिर सी बात है कि वर्कफोर्स भी कम होगा, जिससे बूढ़े लोगों की आबादी बढ़ेगी। इसी गिरती जन्मदर के कारण कामकाजी युवाओं की कमी हो जाएगी जिसका सीधा असर उद्योगों, कारोबार पर पड़ता दिख सकता है। क्योंकि अगर बुजुर्ग कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी तो उत्पादन क्षमता अपने आप ही कम होती चली जाएगी और देश की ग्रोथ कम हो जाएगी, आर्थिक तौर पर वो देश कमजोर हो जाएगा।

आज के दौर में, आज के समय में सभी देशों की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए ऐसे देशों को खोज रही हैं जहां पर प्रोडक्शन फैक्ट्री लगाना आसान और फायदेमंद हो और जहां काम करने वाले लोग भी कम सेलरी में मिल जाएं। ऐसे में भारत देश ही एक ऐसा दिखता है जहां ऐसे लोगों की भरमार है। इस मामले में भारत वियतनाम और चीन जैसे देश को भी पीछे छोड़ सकता है। आज बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने उद्योगों को लगाने के लिए भारत पर अपनी नजर गढाए हुए हैं। ऐपल से लेकर टेस्ला जैसी कंपनियों के हाल ही में उठाए गए कुछ कदम ताजा उदाहरण हैं। भविष्य में भी भारत में कई बड़ी कंपनियां अपना कारोबार यहां जमा सकती हैं, जिसका सीधा फायदा देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और इकोनॉमी और भी रफ्तार पकडेÞगी।

ऐसी कंपनियों के लिए भारत, वियतनाम और चीन जैसे देश बड़े अहमियत रखते हैं जो कंपनियां सस्ती मैनपावर और किफायती प्रोडक्शन सेट करने के लिए दूसरे देशों का रूख कर रही हैं। ऐसी कंपनियों को टेक फ्रेंडली देश ज्यादा भा रहे हैं। भारत टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी पैठ जमा रहा है और भारत की सरकार भी टैक्नोलॉजी में बेहतरीन कदम उठा रही है।



Read more

सोमवार, 7 अगस्त 2023

क्या दवाइयां मोटापे से निजात दिला सकती हैं?- दुनिया जहान

0

जून 2023 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने देश में मोटापे की समस्या सुलझाने के लिए एक शुरुआती योजना यानी पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा की. इस योजना पर 4 करोड़ पाउंड खर्च होंगे. उन्होंने कहा कि देश के लोगों में ओबेसिटी यानी मोटापा घटाने के लिए नवीनतम दवाओं के इस्तेमाल से बड़ी सफलता मिल सकती है. इसमें से एक दवा की मांग तो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अभी से आसमान छू रही है. सोशल मीडिया पर भी अटकलों का बाज़ार गर्म है कि हॉलीवुड के कौन से सितारे इस दवा के इस्तेमाल से मोटापा घटा रहे हैं? मगर यह सबके लिए नहीं है. इस सप्ताह दुनिया जहान में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या दवाओं के इस्तेमाल से मोटापे की समस्या हल हो सकती है?

Read more

Atiq Ahmed Case: माफिया अतीक अहमद की फरार पत्नी शाइस्ता परवीन भगोड़ा घोषित, पुलिस ने घर की कुर्की भी की

0

 

Atiq Ahmed Case: माफिया अतीक अहमद की फरार पत्नी शाइस्ता परवीन भगोड़ा घोषित, पुलिस ने घर की कुर्की भी की

UP News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में माफिया अतीक अहमद (Atiq Ahmed) की फरार पत्नी शाइस्ता परवीन (Shaista Parveen) को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है. 50 हजार रुपये की इनामी शाइस्ता परवीन को प्रयागराज पुलिस ने भगोड़ा घोषित किया है. भगोड़ा घोषित करने के बाद पुलिस ने शाइस्ता परवीन के घर की कुर्की भी की. हालांकि, यह मकान दूसरे के नाम पर है और उमेश पाल हत्याकांड के बाद इसे बुलडोजर के जरिए धवस्त किया जा चुका है.
प्रयागराज के धूमनगंज थाने की पुलिस ने शाम करीब 6:30 बजे कुर्की का नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई की. चकिया इलाके में स्थित मकान की कुर्की की प्रक्रिया का नोटिस चस्पा किया गया. इस दौरान डुगडुगी बजाकर मुनादी भी कराई गई. पुलिस ने जिस तोड़े गए मकान को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की, वहां इसका नोटिस भी चस्पा किया गया. कोर्ट के आदेश पर

प्रयागराज के धूमनगंज थाने की पुलिस ने शाम करीब 6:30 बजे कुर्की का नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई की. चकिया इलाके में स्थित मकान की कुर्की की प्रक्रिया का नोटिस चस्पा किया गया. इस दौरान डुगडुगी बजाकर मुनादी भी कराई गई. पुलिस ने जिस तोड़े गए मकान को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की, वहां इसका नोटिस भी चस्पा किया गया. कोर्ट के आदेश पर मकान को कुर्क किए जाने की कार्रवाई शुरू की गई. कुर्की नोटिस की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी.


पुलिस को लगातार चकमा दे रही शाइस्ता परवीन


चर्चित उमेश पाल और दो सरकारी गनर की हत्या में माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन नामजद आरोपी है. 24 फरवरी को धूमनगंज इलाके में फिल्मी अंदाज में उमेश पाल और दो सरकारी गनर की हत्या की गई थी. इस मामले में अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित है. शाइस्ता परवीन वारदात के बाद से लगातार पुलिस को चकमा दे रही है. पति और बेटे की मौत के बाद भी वह सामने नहीं आई.


जफर अहमद के नाम पर था मकान


पुश्तैनी घर पर बुलडोजर चलने के बाद माफिया अतीक अहमद का परिवार चकिया के इसी 297/205 एफ मकान में रहता था. यह मकान जफर अहमद के नाम पर था. 7 जनवरी 2021 को जफर अहमद के नाम इसकी रजिस्ट्री हुई थी. माफिया अतीक अहमद का पुश्तैनी मकान तोड़े जाने के बाद उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन और उनके बेटे इसी मकान में रहते थे.


कौन है जफर अहमद?


24 फरवरी को उमेश पाल और दो सरकारी गनर की हत्या के बाद पीडीए ने एक मार्च को इस मकान पर बुलडोजर चला दिया था. एक मार्च 2023 को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में मकान को ध्वस्त कर दिया गया था. उस समय यह जानकारी आई थी कि मकान के बिजली का कनेक्शन शाइस्ता परवीन के नाम पर ही था. जफर अहमद माफिया अतीक अहमद के वकील खान सौलत हनीफ का साला है. जफर अहमद बांदा का रहने वाला है और एक न्यूज एजेंसी में पत्रकार भी था. इसी मकान को पुलिस अब कुर्क करने की कार्रवाई कर रही है.


Read more

राहुल गांधी लोकसभा सदस्यता बहाल होने के बाद पहुंचे संसद, गांधी की प्रतिमा को किया नमन

0

 राहुल गांधी लोकसभा सदस्यता बहाल होने के बाद पहुंचे संसद, गांधी की प्रतिमा को किया नमन

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता लगभग चार महीने बाद बहाल हो गई है. इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है. राहुल गांधी की सदस्‍यता ऐसे समय में बहाल हुई है, जब संसद में कुछ दिनों बाद ही अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर बहस होने वाली है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी लोकसभा की सदस्यता बहाल होने के बाद सोमवार को संसद पहुंचे. राहुल गांधी जैसे ही संसद भवन के परिसर में अपनी गाड़ी से नीचे उतरे, वैसे ही वहां मौजूद उनकी पार्टी और कुछ अन्य सहयोगी दलों के सांसदों ने उनका स्वागत किया तथा उनके समर्थन में नारेबाजी की. राहुल गांधी की लोकसभा सदस्‍यता लगभग चार महीने बाद बहाल हुई है. 

संसद भवन पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने सबसे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा को नमन किया और फिर लोकसभा की कार्यवाही में शामिल हुए. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, राज्यसभा में पार्टी के उप नेता प्रमोद तिवारी, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एनके प्रेमचंद्रन और कई अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद भवन के प्रवेश द्वार पर राहुल गांधी का स्वागत किया.

Read more

मणिपुर हिंसाः सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाई कमेटी, हाईकोर्ट की तीन पूर्व जजों को किया शामिल

0

 

मणिपुर हिंसाः सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाई कमेटी, हाईकोर्ट की तीन पूर्व जजों को किया शामिल

सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा मामले से जुड़े मुद्दों की पड़ताल के लिए हाईकोर्ट के तीन पूर्व जजों की कमेटी बनाई है. जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पद से रिटायर जस्टिस गीता मित्तल, जस्टिस आशा मेनन और जस्टिस शालिनी पनसाकर जोशी की तीन सदस्यीय न्यायिक जांच कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने बनाई है.

मणिपुर हिंसा मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा मामले से जुड़े मुद्दों की पड़ताल और मानवीय सुविधाओं के लिए हाईकोर्ट के तीन पूर्व जजों की कमेटी बनाई है. ये कमेटी सीबीआई और पुलिस जांच से अलग मामलों को देखेगी. ये समिति महिलाओं से जुड़े अपराधों और अन्य मानवीय मामलों व सुविधा की निगरानी करेंगी. 

तीन सदस्यीय कमेटी में ये होंगी शामिल
जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पद से रिटायर जस्टिस गीता मित्तल, जस्टिस आशा मेनन और जस्टिस शालिनी पनसाकर जोशी की तीन सदस्यीय न्यायिक जांच कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने बनाई.

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि, 'हम जमीनी स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं. हम सभी शांति की बहाली चाहते हैं. कोई भी छोटी चूक बहुत गहरा असर डाल सकती है. वृंदा ग्रोवर ने कहा कि इन मामलों के अलावा अब तक जिन मामलों में अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया उनमें भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. 

Read more

सांसद ने पूछा, क्या 'गौमाता' को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाएगा, सरकार ने दिया यह जवाब

0

 ससंद में पूछा गया कि क्या सरकार भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग गौमाता को राष्ट्रीय पशु के रूप में मान्यता देने का इरादा रखती है? इस पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर कानून बनाने की शक्ति राज्य सरकार के पास है। गाय सहित पशुओं की सुरक्षा के लिए भारतीय पशु कल्याण बोर्ड की भी स्थापना की है।

नई दिल्ली, पीटीआई। भाजपा के लोकसभा सदस्य ने संसद में सरकार से सवाल किया कि क्या वह गौमाता (गाय) को राष्ट्रीय पशु घोषित करेगी। अजमेर के सांसद भागीरथ चौधरी द्वारा सोमवार को लोकसभा में पूछे गए इस प्रश्न का केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने सीधा जवाब नहीं दिया। सांसद ने पूछा, क्या सरकार संसद में कानून बनाकर भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग गौमाता को राष्ट्रीय पशु के रूप में मान्यता देने पर विचार कर रही है। sabhar Jagran.com

Read more

रविवार, 6 अगस्त 2023

देखें: चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान द्वारा ली गई चंद्रमा की पहली तस्वीरें

0


एनडीटीवीएनडीटीवी
ट्रेंडिंग कहानियां

देखें: चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान द्वारा ली गई चंद्रमा की पहली तस्वीरें

शनिवार को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के बाद चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की गड्ढायुक्त सतह पर कब्जा कर लिया।

विज्ञापन
इंडिया न्यूज़ सुमना नंदी द्वारा संपादित
प्रचारित
नवीनतम गाने सुनें , केवल JIOSAAVN.COM पर

खोज

ट्रेंडिंग न्यूज़

ट्रेंडिंग टैग




 

Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv