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शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

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इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

आज हमे कई आधुनिक चीजें काफी आसानी से मिल जाती हैं और ये काफी एडवांस भी हैं। लेकिन  कुछ लोगों को ऐसी चीजों को इजाद करने या रिसर्च में हासिल करने में अपनी जान तक गंवानी पड़ी हैं।
ये प्रयोग बेहद कठिन और जानलेवा थे,लेकिन प्रयोगकर्ताओं ने अपनी जान दांव पर लगा कर इन्हें अंजाम तक पहुंचाने की भरपूर कोशिश की थी।
हम आपको यहां कुछ प्रयोगकर्ताओं और उनके ऐसे प्रयोगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

लिक्विड से संचालित रॉकेट कार (1930),  वैज्ञानिक मैक्स वेलियर  :  एक ऑस्टे्रलियन अनुसंधानकर्ता मैक्स वेलियर की 17 मई 1930 को तब मौत हो गई, जब वह बर्लिन में एक एल्कोहल से भरा रॉकेट टेस्ट बेंच में फट गया। 1928-29 में वेलियर ने फ्रित्ज वोन ओपेल के साथ रॉकेट पावर्ड कारों और एयरक्राफ्ट पर काम किया था। इसके बाद वेलियर लिक्विड से भरे रॉकेट्स पर काम कर रहे थे। उन्होंने ने 19 अप्रैल 1930 को राकेट कार की टेस्ट ड्राइव की थी। यह कार लिक्विड से संचालित थी। एक माह बार इस कार के टेस्ट में विस्फोट हो गया।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

-पैराशूट शूट (1912), खोजकर्ता- फ्रांज रिचेल्ट : ऑस्ट्रेलियन में जन्में फ्रैंच टेलर, शोधकर्ता और पैराशूटिंग में अग्रणी फ्रांज रिचेल्ट ने 4 फरवरी 1912 को एफिल टॉवर से छलांग लगाई। वह स्वयं का डिजाइन किया हुआ पैराशूट को टेस्ट करना चाहता था। हालांकि उसके दोस्तों और दर्शकों ने उसे काफी रोकने की कोशिश की, लेकिन वह टॉवर की पहले प्लेटफार्म से कूदा। दुर्भाग्य से उसका पैराशूट काम नहीं कर सका और वह चीन बर्फीली जमीन पर गिरा और उसकी जान चली गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान
शॉक ऑब्जर्वर (1985), प्रयोगकर्ता करेल सॉसेक : करेल सॉसेक एक प्रोफेशल स्टंटमैन था । वह कैप्शूल की खोज और नियाग्रा फॉल्स में इसकी सवारी करके विख्यात हुआ था। ऐसा करने में वह घायल हो गया और उसे कुछ चोटें भी आईं।
करेल सॉसेक ने 19 जनवरी1985 को एक कंपनी को टेक्सास स्थित ह्यूस्टन एस्ट्रोडोम से बैरल ड्राप करने का खर्च उठाने के लिए तैयार कर लिया था। 180 फीट ऊंचे स्ट्रक्चर से एक विशेष वॉटरफाल तैयार किया गय और एक टैंक भी खोदा गया था। लेकिन बैरल का रिम टैंक के पानी में गिरने की बजाय इसकी रिम से टकरा गया। इससे कैप्सूल फट गया। इससे सॉसेक को गंभीर चोंटे आई और दूसरे दिन उसकी मौत हो गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

 ऑक्सीजन रीब्रीदर (1876), प्रयोगकर्ता - हेनरी फ्लेस : ब्रिटिश वैज्ञानिक हेनरी फ्लेस ने 1876 में एक क्लोज सर्किट ऑक्सीजन रीब्रीदर की खोज की थी। इस शूट का प्रयोग कंप्रेस्ड हवा के बजाय कंप्रेस्ड ऑक्सीजन के लिए किया जाता था। उनकी इस खोज का मूल रूप ये यह इरादा था कि इसका प्रयोग भरे हुए जहाज के चेंबर में लगे लोहे के दरवाजों को रिपेयर करने में किया जा सके। फ्लेस ने अपने प्रयोग को पानी के 30 फीट अंदर आजमाना तय किया। दुर्भाग्य से उनकी ऑक्सीजन के प्रेशर से मौत हो गई। ऑक्सीजन अंडर प्रेशर होने पर इंसान के लिए नुकसानदायक होती है।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान
- रोटरी प्रिंटिंग प्रेस (1867), विलियम बुलोक : विलियम बुलोक एक अमेरिकी अनुसंधानकर्ता थे। उन्होंने 1863 में एक वेब रोटरी प्रिंटिंग प्रेस का अविष्कार किया था। बुलोक के इस अविष्कार ने प्रिटिंग इंडस्ट्री में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। एक बार जब वह अपनी इस नई प्रिटिंग मशीन को चला रहे थे तो उसी दौरान उन्होंने इसकी ड्राइविंग बेल्ट को किक मार मार दी। पुल्ली में पैर लगा और वह मशीन में बुरी तरह फंस गए। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। ऑपरेशन के दौरान पेनसेल्वानिया में 12 अप्रैल 1867 को मौत हो गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

- रीब्रीदिंग डिवाइस : (1772),  सिएर फ्रेमिनेट(वैज्ञानिक):
- 1772 में फ्रांसीसी सिएर फ्रेमिनेट ने स्कूबा डाइवर्स के लिए रीब्रीदिंग डिवाइस का अविष्कार करने की कोशिश में जान चली गई थी। यह डिवाइस बैरल से निकली हवा को रीसाइकिल करती है। दुर्भाग्य से इसके प्रयोग के दौरान ऑक्सीजन की कमी होने पर फ्रेमिनेट की मौत हो गई। यह डिवाइस डाइवर्स को पानी के अंदर 20 मिनट तक रखना खतरनाक साबित हुई। sabhar : bhaskar.com



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