यहां है लेडीज रूल का दबदबा
लेडीज रूल का जोर कुछ इस कदर है कि पुरुषों को उनका हर हुक्म मानना होता है। जानकर हैरानी हो सकती है, लेकिन इस खबर में पूरा दम है।
आज जब महिलाओं के खिलाफ सारी दुनिया में अपराध बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में आपको जानकर आश्चर्य होगा कि एक ऐसा देश है, जहां महिलाएं सबसे ऊपर हैं और पुरुष उनके लिए गुलाम से बढ़कर कुछ भी नहीं।
पुरुषों की स्थिति जानवरों जैसी?
चेक रिपब्लिक से 1996 में अलग होकर बने इस देश को अन्य राष्ट्रों ने देश का दर्जा नहीं दिया है, लेकिन इनकी खुद की करेंसी, पासपोर्ट, झंडा और पुलिस दल है।
इस देश में बाहर से आने वाले पुरुषों को रानी के लिए सौफा या कुर्सी बनना पड़ता है। इतना ही नहीं, उन्हें मारा-पीटा भी जाता है। पुरुषों को यहां पालतू जानवर के समान समझा जाता है।
नागरिकता चाहिए, तो पुरुष गुलाम चाहिए
इसीलिए यहां लगभग सभी महिलाओं के पास एक पुरुष गुलाम के तौर पर है। इन गुलामों को कोई भी अधिकार नहीं है। इनके साथ वे जब चाहें, जैसा चाहें, वैसा व्यवहार करने के लिए स्वतंत्र हैं।
इस देश का लक्ष्य ही यही है कि रानी के अधिकार में ज्यादा से ज्यादा पुरुषों को गुलाम बनाया जाए। जिसके लिए हर संभव प्रयास किया जाता है।
सिर्फ चंद पुरुषों को है कुछ सीमित अधिकार
दूसरे स्तर पर वे पुरुष होते हैं, जिन्हें रानी चुनती है। ये रानी को टैक्स चुकाते हैं। इन्हें घूमने, काम करने, शादी करने व प्रॉपर्टी खरीदने जैसे अधिकार रानी से प्राप्त होते हैं। सबसे निचले स्तर पर होते हैं, गुलाम वर्ग।
इन गुलाम पुरुषों को सभी अधिकारों से वंचित रखा जाता है और इनकी मालकिन इन्हें जैसा चाहें, वैसे उपयोग करती हैं। SABHAR :http://www.amarujala.com/