बुधवार, 15 नवंबर 2023
बड़ी खबर: सहारा श्री सुब्रत रॉय का निधन, मुंबई के अस्पताल में ली अंतिम सांस
0बुधवार, 8 नवंबर 2023
क्या है डंकी रूट, जिसकी मदद से लाखों लोग पहुंच रहे अमेरिका और यूरोप, क्यों माना जाता है बेहद खतरनाक?
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क्या है डंकी रूट, जिसकी मदद से लाखों लोग पहुंच रहे अमेरिका और यूरोप, क्यों माना जाता है बेहद खतरनाक?
इजरायल और आतंकी गुट हमास के बीच लड़ाई में बार-बार ये बात आ रही है कि दुनिया का कोई भी देश गाजावासियों को शरण देने को तैयार नहीं. इन हालातों में बहुत संभव है कि गाजा पट्टी के लोग चुपके से दूसरे देशों तक पहुंचने लगे. ऐसा होता भी रहा है.
सीरिया, पाकिस्तान या अफ्रीकी देशों से लोग अवैध तरीके से अमीर देशों के बॉर्डर पार करते रहे. बीते दिनों ब्रिटेन जा रहे बहुत से लोगों की एक नाव डूबने से मौत हो गई. वे सभी अवैध ढंग से सीमा पार करने की फिराक में थे. इसके कई मैथड होते हैं. डंकी रूट इनमें से एक है.
क्या होता है ये?
ये विदेश तक पहुंचने का बैकडोर मैथड है. इसमें भागने वाले एक या दो देशों नहीं, बल्कि कई देशों से होते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं. इसके लिए केवल एक देश का वीजा लिया जाता है. वहां तक पहुंचने के बाद आदमी गायब हो जाता है, यानी कई देशों से होते-रुकते हुए चुपचाप डेस्टिनेशन तक पहुंचता है.
क्योंकि ये तरीका अवैध है, इसलिए इसमें ट्रांसपोर्ट भी गलत-सलत होता है. जैसे लोगों को कार की डिक्की या माल ढोने वाले जहाजों में छिपा दिया जाता है और उन्हें तभी बाहर आने मिलता है, जब वे सही जगह तक पहुंच जाएं. Sabhar aajtak.in
क्या है शराब और सेक्स का रिश्ता?
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क्या है शराब और सेक्स का रिश्ता?
क्या शराब पीने से पुरुषों की सेक्स-लाइफ बेहतर हो जाती है? शराब के आदी इस सवाल का जवाब हां में दे सकते हैं। वे कहेंगे, 'बिल्कुल, शराब पीने के बाद हमें सेक्स में ज़्यादा आनंद आता है, उत्तेजना ज़्यादा समय रहती है... वगैरह-वगैरह।' लेकिन, यह बात पूरी तरह सही नहीं। डॉक्टर कहते हैं कि शराब पीने से किसी को फौरी तौर पर इसके फायदे दिख सकते हैं, लेकिन इसकी लत नामर्द भी बना सकती है। घरेलू हिंसा और अपने पार्टनर पर शक करने के मामले भी शराब के चलते ही बढ़ रहे हैं।
शराब और सेक्स का शुरुआती रिश्ता किसी भी मर्द को अपना दीवाना बना सकता है। शुरुआत में शराब के एक-दो पैग बढ़िया काम करते हैं। डॉक्टर चमन वनवानी कहते हैं, 'शराब एक तरह से वेसोडायलेटर का काम करती है। वेसोडायलेशन मतलब शरीर में खून का संचार करने वाली नसों का चौड़ा हो जाना। जब शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, तो कोई भी मर्द काफी हल्का महसूस करता है। खून शरीर में वहां तक भी पहुंच जाता है, जहां ऑक्सीजन की कमी होती है। इससे स्वाभाविक तौर पर किसी पुरुष में उत्तेजना भी बढ़ेगी। सेक्स के दौरान डिस्चार्ज का समय भी प्रभावित हो सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो शराब पीने के बाद मन में सेक्स के प्रति बैठा संकोच पूरी तरह ख़त्म हो जाता है।'
08 नवंबर 2023 आज की ताजा खबरें और ब्रेकिंग समाचार हिंदी: जनसंख्या नियंत्रण को लेकर दिए बयान पर घिरने के बाद CM नीतीश ने मांगी माफी
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जनसंख्या नियंत्रण को लेकर दिए बयान पर घिरने के बाद CM नीतीश ने मांगी माफी
में अपने बयान को लेकर सीएम नीतीश ने मांगी माफी
जनसंख्या नियंत्रण पर दिए गए बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद नीतीश कुमार ने मांगी माफी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, 'मेरे बयान से किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं माफी मांगता हूं। जनसंख्या नियंत्रण के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है। मेरा मकसद सिर्फ शिक्षा के बाद जनसंख्या वृद्धि में आ रहे परिवर्तन को बताना था। बिहार विधानसभा में मंगलवार को सीएम ने जनसंख्या नियंत्रण पर बयान दिया था। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसी बातें कहीं जिसे लेकर वह घिर गए।
मंगलवार, 7 नवंबर 2023
नीतीश कुमार का आरक्षण वाला दांव कितना टिकेगा? सुप्रीम कोर्ट के फैसले से समझिए
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नीतीश कुमार का आरक्षण वाला दांव कितना टिकेगा? सुप्रीम कोर्ट के फैसले से समझिए
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले आरक्षण का मुद्दा गरम होता जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे लेकर बड़ा दांव चला है। उन्होंने ओबीसी, एससी और एसटी के लिए कोटा बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। उन्होंने सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में इसे बढ़ाकर 65 फीसदी करने को कहा है।
नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ओबीसी, एससी और एसटी के लिए आरक्षण बढ़ाने की जरूरत बताई है। उन्होंने सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण बढ़ाकर 65 फीसदी करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए केंद्र के 10 फीसदी आरक्षण को शामिल नहीं किया गया है। इस तरह कुल रिजर्वेशन 75 फीसदी हो जाएगा। जातीय जनगणना को लेकर जारी शोर-शराबे के बीच नीतीश कुमार ने यह ऐलान किया है। लोकसभा चुनाव से पहले इसे नीतीश की ओर से चले गए राजनीतिक दांव के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, नीतीश कुमार के प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बड़ा अड़ंगा है। सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में इस बारे में फैसला दिया था। यह फैसला राज्य कोटे को 50 फीसदी की सीमा पर रोकने की बात करता है। नीतीश जो ऐलान कर रहे हैं वह रिजर्वेशन को निर्धारित 50 फीसदी की सीमा से आगे ले जाएगा।
बिहार कास्ट सर्वे के अनुसार, राज्य के 13.1 करोड़ लोगों में से 36 फीसदी ईबीसी से हैं। इनमें 27.1 फीसदी पिछड़े वर्ग से हैं और 19.7 फीसदी अनुसूचित जाति से। एससी 1.7 फीसदी हैं। वहीं, सामान्य वर्ग 15.5 फीसदी। इसका मतलब यह है कि बिहार के 60 फीसदी से ज्यादा लोग पिछड़े या अति पिछड़े वर्ग से आते हैं। वर्तमान ईबीसी के लिए 18 फीसदी और पिछड़े वर्गों के लिए 12 फीसदी आरक्षण है। वहीं, अनुसूचित जाति के लिए यह 16 फीसदी और अनुसूचित जनजाति के लिए एक फीसदी है। नीतीश ने जो प्रस्ताव किया है, उसमें संशोधित कोटा के तहत एससी कैंडिडेट को 20 फीसदी जबकि ओबीसी और ईबीसी को 43 फीसदी कोटा मिलने की बात कही गई है। यह पहले के मुकाबले कोटे में 30 फीसदी की बढ़ोतरी है। एसटी के लिए दो फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव किया गया है।
50 फीसदी सीलिंंग खत्म करने की मांग ने पकड़ा जोर
बिहार में जातिगत सर्वे के बाद से ही आरक्षण की 50 फीसदी की सीलिंग को खत्म करने की मांग ने जोर पकड़ा है। देश में रिजर्वेशन का मुद्दा बेहद संवेदनशील रहा है। इसका असर अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी देखने को मिल सकता है। ज्यादातर जानकार नीतीश के इस कदम को राजनीतिक चश्मे से ही देख रहे हैं। विपक्ष के I.N.D.I.A गठबंधन को बनाने और खड़ा करने में वह शुरू से काफी सक्रिय रहे हैं।
हालांकि, नीतीश के दांव को सुप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले के सामने टिकना होगा। देश की सबसे बड़ी अदालत ने तब इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार मामले में आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था। अपने फैसले में कोर्ट ने आरक्षण को लेकर 50 फीसदी की सीमा तय की थी। इसमें तमिलनाडु इकलौता अपवाद है। उसे छोड़कर सभी राज्यों में इसका पालन करना होता है। कई राज्यों में अलग-अलग समुदायों को रिजर्वेशन देने की नीति के तहत इस सीलिंग को समाप्त करने की मांग उठती रही है। इनमें महाराष्ट्र और झारखंड शामिल हैं। यहां तक महाराष्ट्र और कर्नाटक में तो रिजर्वेशन के प्रस्ताव भी पारित कर दिए गए। हालांकि, कोर्ट ने उन प्रस्तावों पर अमल करने से रोक लगा दी। इस मामले में 10 फीसदी ईडब्लूएस (आर्थिक रूप से कमजोर) कोटा अपवाद रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 27% ओबीसी आरक्षण को रखा था कामय
1992 में 9 जजों की संवैधानिक पीठ ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया था। उसने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को कामय रखा था। सिर्फ अपवादों को छोड़ उसने आरक्षण की 50 फीसदी सीमा तय करने का फैसला सुनाया था। बाद में 1994 में 76वां संशोधन हुआ था। इसके तहत तमिलनाडु में रिजर्वेशन की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा कर दी गई थी। यह संशोधन संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किया गया है।
पिछले कुछ सालों में बीजेपी की सफलता की एक बड़ी वजह तमाम जातियों का उसके साथ जुड़ना रहा है। उसका फोकस जाति के बजाय हिंदुओं को एक करने पर पर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी के बड़े दिग्गज नेता तक जातिवाद और क्षेत्रवाद पर निशाना साधते रहे हैं। हाल में पीएम ने जातिवाद और क्षेत्रवाद को समाज की बड़ी बुराई बताया था। उन्होंने इनके सहारे देश को विभाजित करने वाली ताकतों को उखाड़ फेंकने की अपील की थी।sabhar:navbharattimes.indiatimes.com
भारत के पहले दलित सूचना आयुक्त बने हीरालाल सामरिया, राजस्थान से है नाता हीरालाल सामरिया ने भारत के सूचना आयुक्त के रूप में शपथ ले ली है। राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में एक समारोह के दौरान सामरिया को पद की शपथ दिलाई। वह राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले हैं।
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नई दिल्ली: IAS अधिकारी हीरालाल सामरिया भारत के सूचना आयुक्त बनाए गए हैं। वह देश के पहले दलित सूचना आयुक्त हैं। हीरालाल 1985 बैच के IAS अधिकारी हैं और मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया को सोमवार को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के प्रमुख के रूप में शपथ दिलाई। वाई.के.सिन्हा का कार्यकाल तीन अक्टूबर को खत्म हो जाने के बाद यह पद रिक्त हो गया था।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में एक समारोह के दौरान सामरिया को पद की शपथ दिलाई। सामरिया की मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति के बाद सूचना आयुक्त के आठ पद रिक्त हैं। आयोग में इस समय दो सूचना आयुक्त हैं।
कितने आयुक्त हो सकते हैं?
आरटीआई मामलों के सर्वोच्च अपीलीय प्राधिकरण केंद्रीय सूचना आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 सूचना आयुक्त हो सकते हैं। उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) और राज्य सूचना आयोगों (एसआईसी) में रिक्त पदों को भरने के लिए कदम उठाने का केंद्र एवं राज्य सरकारों को निर्देश देते हुए 30 अक्टूबर को कहा था कि ऐसा नहीं होने पर सूचना का अधिकार कानून ‘निष्प्रभावी’ हो जाएगा।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को राज्य सूचना आयोगों में मंजूर पदों, रिक्तियों और वहां लंबित मामलों की कुल संख्या सहित कई पहलुओं पर सभी राज्यों से सूचना एकत्र करने को कहा था। (इनपुट: भाषा से भी)
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अयोध्या में होगा सबकुछ राममय, अब गुलामी की निशानी तोड़कर कैंट रेलवे स्टेशन को दिया जाएगा राममंदिर का रूप
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Rejuvenation of Cantt Railway Station: अब अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन का भी कायाकल्प होने जा रहा है. इस स्टेशन को भी राम मंदिर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. अंग्रेजों के जमाने की बिल्डिंग को तोड़कर नई बिल्डिंग बनाई जाएगी. इतना ही नहीं मल्टीस्टोरी रेजिडेंशियल बिल्डिंग के अलावा यहां पार्किंग की सुविधा भी होगी.
सर्वेश श्रीवास्तव/अयोध्या. अयोध्या की भव्यता लौट रही है. धार्मिकता के साथ-साथ भगवान राम की नगरी पर्यटन की दृष्टि से भी सज रही है. एक तरफ भव्य मंदिर का निर्माण तीव्र गति के साथ चल रहा है तो दूसरी तरफ हजारों करोड़ों रुपए की परियोजनाएं रामनगरी में इन दिनों परवान चढ़ रही हैं. यहां राममंदिर जैसा रूप देकर अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा चुका है, अब अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन का भी कायाकल्प होने जा रहा है. इस स्टेशन को भी राम मंदिर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. अंग्रेजों के जमाने की बिल्डिंग को तोड़कर नई बिल्डिंग बनाई जाएगी. इतना ही नहीं मल्टीस्टोरी रेजिडेंशियल बिल्डिंग के अलावा यहां पार्किंग की सुविधा भी होगी.
दरअसल, अयोध्या में तेज गति के साथ भगवान राम का भव्य मंदिर बन रहा है. मंदिरनुमा अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन बनाया जा रहा है तो वहीं भगवान राम के मंदिरनुमा अयोध्या का इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण भी युद्धस्तर पर हो रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि जब श्रद्धालु सड़क, रेल या फिर हवाई जहाज से धर्मनगरी अयोध्या पहुंचे तो उनको इस बात का आभास हो कि वे धर्मनगरी अयोध्या में हैं. शायद यही वजह है कि अब अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन को भी भगवान राम के मंदिरनुमा बनाया जाएगा. इसके लिए डीपीआर तैयार की जा रही है. उम्मीद है कि इसी माह के अंत तक अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन का कायाकल्प होना शुरू हो जाएगा.sabhar :hindi.news18.com
आटा क्यों बेच रही है भारत सरकार चारु कार्तिकेय 3 घंटे पहले3 घंटे पहले भारत सरकार ने सस्ता आटा बेचने की योजना फिर से शुरू की है. सरकार का कहना है कि ऐसा आवश्यक चीजों के दामों को स्थिर करने के लिए किया जा रहा है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं.
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अर्थव्यवस्थाभारत
आटा क्यों बेच रही है भारत सरकार
चारु कार्तिकेय
3 घंटे पहले3 घंटे पहले
भारत सरकार ने सस्ता आटा बेचने की योजना फिर से शुरू की है. सरकार का कहना है कि ऐसा आवश्यक चीजों के दामों को स्थिर करने के लिए किया जा रहा है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं.
https://p.dw.com/p/4YW3X
आटा
आटातस्वीर: PIUS UTOMI EKPEI/AFP via Getty Images
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केंद्र सरकार ने नाफेड के जरिए कम दाम पर आटा बेचने की शुरुआत कुछ महीने पहले की थी. जानकारों का कहना है कि उस समय 'भारत आटा' नाम की योजना के पायलट की शुरुआत की गई थी और अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू कर दिया गया है.
यह आटा केंद्रीय भंडार, नाफेड और एनसीसीएफ के केंद्रों और मोबाइल वैनों में मिलेगा. धीरे धीरे इसे सहकारी केंद्रों और खुदरा दुकानों तक भी पहुंचाने की योजना है. पायलट के समय इसका दाम 29.50 रुपये प्रति किलो था और अब दाम दो रुपये और कम कर दिया गया है.
महंगाई की चिंता
सरकार इसे 27.50 रुपये प्रति किलो की दर पर बेचेगी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस समय खुले बाजार में आटा औसत 35.99 प्रति किलो के दाम पर बिक रहा है. यानी अगर सरकार अपने आटे की अच्छी उपलब्धता सुनिश्चित कर सके तो इससे आम लोगों को काफी राहत मिल सकती है.
अर्थव्यवस्थाभारत
आटा क्यों बेच रही है भारत सरकार
चारु कार्तिकेय
3 घंटे पहले3 घंटे पहले
भारत सरकार ने सस्ता आटा बेचने की योजना फिर से शुरू की है. सरकार का कहना है कि ऐसा आवश्यक चीजों के दामों को स्थिर करने के लिए किया जा रहा है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं.
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आटा
आटातस्वीर: PIUS UTOMI EKPEI/AFP via Getty Images
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केंद्र सरकार ने नाफेड के जरिए कम दाम पर आटा बेचने की शुरुआत कुछ महीने पहले की थी. जानकारों का कहना है कि उस समय 'भारत आटा' नाम की योजना के पायलट की शुरुआत की गई थी और अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू कर दिया गया है.
यह आटा केंद्रीय भंडार, नाफेड और एनसीसीएफ के केंद्रों और मोबाइल वैनों में मिलेगा. धीरे धीरे इसे सहकारी केंद्रों और खुदरा दुकानों तक भी पहुंचाने की योजना है. पायलट के समय इसका दाम 29.50 रुपये प्रति किलो था और अब दाम दो रुपये और कम कर दिया गया है.
महंगाई की चिंता
सरकार इसे 27.50 रुपये प्रति किलो की दर पर बेचेगी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस समय खुले बाजार में आटा औसत 35.99 प्रति किलो के दाम पर बिक रहा है. यानी अगर सरकार अपने आटे की अच्छी उपलब्धता सुनिश्चित कर सके तो इससे आम लोगों को काफी राहत मिल सकती है.
इसके लिए सरकार ने एफसीआई के गोदामों में पड़े गेहूं में से ढाई लाख मेट्रिक टन गेहूं को अलग कर दिया है. उसी को आटा बना कर कम दाम पर बेचा जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि इससे महंगाई दर पर थोड़ा नियंत्रण होगा.
हालांकि सरकार ने पायलट के नतीजे साझा नहीं किये हैं जिससे यह पता चलता कि योजना को आम लोगों के बीच कैसी प्रतिक्रिया मिली थी. अब देखना यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर योजना कितनी असरदार साबित हो पाती है.
चुनावों पर नजर
भारत में खाने पीने की चीजों के दाम कई महीनों से बढ़े हुए हैं. सितंबर में कुल मिलाकर खुदरा मुद्रास्फीति 5.02 प्रतिशत थी. आरबीआई का लक्ष्य होता है इसे चार से छह प्रतिशत के बीच रखना. खाद्य मुद्रास्फीति की दर 6.56 रही. Sabhar Dw.de
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की कार का एक्सीडेंट, एक की मौत
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केन्द्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर से बीजेपी उम्मीदवार प्रहलाद पटेल सड़क दुर्घटना में घायल हो गए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि मंगलवार की शाम मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को ले जा रही कार और एक मोटर साइकिल की टक्कर हुई.
सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) सुधीर जैन ने समाचार एजेंसी को बताया कि दुर्घटना, अमरवाड़ा इलाके में सिंगोड़ी के पास हुई है.
बीजेपी उम्मीदवार बंटी साहू के लिए चुनावी प्रचार करने के बाद प्रहलाद पटेल वापस नरसिंहपुर जा रहे थे.
बंटी साहू, विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ के खिलाफ खड़े हैं. Sabhar BBC.COM
Rashmika Mandanna deepfake video: रश्मिका मंदाना परेशान, कहा-'मुझे बहुत हर्ट...', IT मिनिस्टर ने किया रिएक्ट Rashmika Mandanna reacts on viral deepfake video: डीपफेक वीडियो के सामने आने के बाद रश्मिका मंदाना ने इस पर आपत्ति दर्ज की है. 'एनिमल' एक्ट्रेस ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर लंबा चौड़ा पोस्ट शेयर किया है. उनसे पहले अमिताभ बच्चन भी इसे लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं.
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मुंबई. Rashmika Mandanna reacts on viral deepfake video: रश्मिका मंदाना का फेक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो को लेकर सेलेब्स आपत्ति दर्ज कर रहे हैं. रश्मिका के ‘गुडबाय’ को स्टार अमिताभ बच्चन ने भी इस वीडियो को लेकर नाराजगी जाहिर की थी. अब खुद रश्मिका ने इसे लेकर चुप्पी तोड़ी है. ‘एनिमल’ एक्ट्रेस ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट शेयर किया है, जिसकी पहली लाइन में उन्होंने लिखा है कि यह बहुत हर्ट करने वाला है. रश्मिका की इस पोस्ट के बाद आईटी मिनिस्टर राजीव चंद्रशेखर ने भी इसे लेकर अफसोस जताया है.
रश्मिका मंदाना का मॉर्फ्ड वीडियो हाल ही सामने आया, जिसे देखकर एक बारगी उनके फैंस चौंक गए हैं. इस अनवैरीफाइड वीडियो में ‘पुष्पा’ एक्ट्रेस जैसी एक लड़की दिख रही है, वह जैसे ही लिफ्ट में एंटर करती है उसके चेहरा रश्मिका की तरह दिखने लगता है. यह वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर सामने आया तो आग की तरह फैल गया. अमिताभ बच्चन के सामने जब यह वीडियो आया तो उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की और इस पर कानूनी कार्रवाई की मांग की.
रश्मिका बोलीं, ‘यह बहुत डरावना है’
रश्मिका ने एक पोस्ट शेयर कर अपने दिल की बात रखी है. उन्होंने लिखा, ‘मैं इस डीपफेक वीडियो को लेकर बहुत आहत हूं, जो इंटरनेट पर फैला हुआ है. यह सच में बहुत डरावना है. ना सिर्फ मेरे लिए बल्कि हम सभी के लिए क्योंकि यहां तकनीक का किस तरह से गलत उपयोग हो रहा है. एक महिला और एक एक्टर होने के नाते मैं अपने परिवार, दोस्तों और अपनों की शुक्रगुजार हूं, जो मेरा सपोर्ट सिस्टम हैं. लेकिन अगर यह मेरे साथ तब होता जब मैं स्कूल या कॉलेज में होती तो मैं कल्पना भी नहीं कर सकती की मैं इस से कैसे डील करती. हमें तुरंत प्रभाव से इसे लेकर प्रतिक्रिया देनी होगी ताकि और लोग इस तरह के आइडेंटिटी थेफ्ट से परेशान ना हों.’ रश्मिका की यह पोस्ट अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. मृणाल ठाकुर ने भी रश्मिका को इस मामले में सपोर्ट किया है
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बिहार में सीएम नीतीश का बड़ा ऐलान, आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 75% करने का प्रस्ताव
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बिहार में सीएम नीतीश का बड़ा ऐलान, आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 75% करने का प्रस्ताव
सोमवार, 6 नवंबर 2023
एआई समिट में ईलॉन मस्क:जादुई जीनी है एआई जो हर इच्छा पूरी करेगा
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मस्क ने कहा, जादुई जीनी है एआई जो हर इच्छा पूरी करेगा
ब्रिटेन में हुई पहली एआई समिट के बाद ईलॉन मस्क ने कुछ भविष्यवाणियां की हैं कि एआई के युग में दुनिया कैसी होगी.
सोशल मीडिया साइट एक्स (ट्विटर) के मालिक और उद्योगपति ईलॉन मस्क ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण भविष्य "प्रचुरता का युग” होगा जहां सबके पास अत्यधिक आय होगी. लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इंसानों जैसे रोबोट जिन्हें ह्यूम्नोएड कहा जाता है, वे इंसान को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनाक और ईलॉन मस्क ने ब्रिटेन के ब्लेचली पार्क में हुई दुनिया की पहली एआई समिट के बाद एक चर्चा की. इस चर्चा के दौरान स्पेस एक्स और टेस्ला जैसी कंपनियों के मालिक मस्क ने कहा कि एक ऐसा दौर आएगा जब किसी नौकरी की जरूरत नहीं रह जाएगी.
उन्होंने कहा कि एआई एक जादूई जीनी है जो आपकी हर इच्छा पूरी कर सकता है. हालांकि उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसी परिकथाओं का अंतर सुखद नहीं होता. मस्क ने कहा, "जीवन का अर्थ खोजना भविष्य की चुनौतियों में से एक होगा.”
जादुई जीनी है एआई
मस्क ने कहा कि एआई इतिहास की सबसे विध्वंसकारी ताकत है, जिसके बाद कोई काम करने की जरूरत नहीं रह जाएगी. उन्होंने कहा, "पता नहीं लोग इससे राहत महसूस करेंगे या परेशान होंगे. यह अच्छा भी है और बुरा भी. अगर आपको ऐसा जादुई जीनी मिल जाए जो आपकी सारी इच्छाएं पूरी कर दे तो हम जीवन का अर्थ कैसे खोजेंगे? यह भविष्य की चुनौतियों में से एक होगी sabhar dw.de
नेपाल में फिर तेज भूकंप, दिल्ली NCR समेत पूरा उत्तर भारत कांपा, 1 महीने में 5वीं बार डोली धरती
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नई दिल्ली. दिल्ली और आसपास के शहरों सहित उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में सोमवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र उत्तर प्रदेश के अयोध्या से 233 किलोमीटर उत्तर में था. दिल्ली के साथ ही नोएडा और गाजियाबाद में भी भूकंप का अनुभव किया गया. भूकंप का केंद्र नेपाल में है और रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.6 मापी गई है.
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) ने यह जानकारी दी. एनसीएस के मुताबिक, भूकंप का केंद्र नेपाल में 10 किलोमीटर की गहराई में था और यह भारतीय समय के मुताबिक शाम 4 बजकर 16 मिनट पर आया. यह तीन दिनों में तीसरी बार, जबकि बीते एक महीने में यह पांचवीं बार है, जब नेपाल में भूकंप के तेज झटके आए हैं. Sabhar hindi.news18.com
गुरुवार, 5 अक्टूबर 2023
पुरानी पेंशन: रामलीला मैदान की दो रैलियों ने बदला माहौल, OPS पर डैमेज कंट्रोल की तैयारी में सरकार!
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पुरानी पेंशन: रामलीला मैदान की दो रैलियों ने बदला माहौल, OPS पर डैमेज कंट्रोल की तैयारी में सरकार!
Old Pension Scheme: एनपीएस स्कीम में शामिल कर्मी, 18 साल बाद रिटायर हो रहे हैं, उन्हें क्या मिला है। एक कर्मी को एनपीएस में 2417 रुपये मासिक पेंशन मिली है, दूसरे को 2506 रुपये और तीसरे कर्मी को 4900 रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिली है। अगर यही कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था के दायरे में होते तो उन्हें प्रतिमाह क्रमश: 15250 रुपये, 17150 रुपये और 28450 रुपये मिलते...
केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठन, 'पुरानी पेंशन' पर अब निर्णायक लड़ाई की ओर बढ़ रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार को स्पष्ट तौर से बता दिया है कि उन्हें बिना गारंटी वाली 'एनपीएस' योजना को खत्म करने और परिभाषित एवं गारंटी वाली 'पुरानी पेंशन योजना' की बहाली से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। नई दिल्ली के रामलीला मैदान में दस अगस्त को कर्मियों की रैली हुई थी। उसके बाद एक अक्तूबर की रैली में सरकारी कर्मियों की इतनी अधिक भीड़ जुटी, जिसने केंद्र सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया। केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि पुरानी पेंशन को लेकर रामलीला मैदान की दो रैलियों ने माहौल बदल दिया है। अब पुरानी पेंशन पर भाजपा को सियासी चोट का डर नजर आने लगा है। विपक्षी दलों ने इन रैलियों को सियासत की पिच पर लपक लिया। अब इसके राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए केंद्र सरकार डैमेज कंट्रोल की तैयारी में है।
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पुरानी पेंशन: रामलीला मैदान की दो रैलियों ने बदला माहौल, OPS पर डैमेज कंट्रोल की तैयारी में सरकार!
Jitendra Bhardwajजितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 02 Oct 2023 05:20 PM IST
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Old Pension Scheme: एनपीएस स्कीम में शामिल कर्मी, 18 साल बाद रिटायर हो रहे हैं, उन्हें क्या मिला है। एक कर्मी को एनपीएस में 2417 रुपये मासिक पेंशन मिली है, दूसरे को 2506 रुपये और तीसरे कर्मी को 4900 रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिली है। अगर यही कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था के दायरे में होते तो उन्हें प्रतिमाह क्रमश: 15250 रुपये, 17150 रुपये और 28450 रुपये मिलते...
Old pension: Two Ramlila Maidan rally changed the atmosphere, government preparing for damage control on OPS
Old Pension Scheme - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
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केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठन, 'पुरानी पेंशन' पर अब निर्णायक लड़ाई की ओर बढ़ रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार को स्पष्ट तौर से बता दिया है कि उन्हें बिना गारंटी वाली 'एनपीएस' योजना को खत्म करने और परिभाषित एवं गारंटी वाली 'पुरानी पेंशन योजना' की बहाली से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। नई दिल्ली के रामलीला मैदान में दस अगस्त को कर्मियों की रैली हुई थी। उसके बाद एक अक्तूबर की रैली में सरकारी कर्मियों की इतनी अधिक भीड़ जुटी, जिसने केंद्र सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया। केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि पुरानी पेंशन को लेकर रामलीला मैदान की दो रैलियों ने माहौल बदल दिया है। अब पुरानी पेंशन पर भाजपा को सियासी चोट का डर नजर आने लगा है। विपक्षी दलों ने इन रैलियों को सियासत की पिच पर लपक लिया। अब इसके राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए केंद्र सरकार डैमेज कंट्रोल की तैयारी में है।
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इन विकल्पों पर हो रहा विचार
केंद्र सरकार के सूत्र बताते हैं कि ओपीएस पर लगातार चर्चा हो रही है। यह गुणा भाग लगाया जा रहा है कि पुरानी पेंशन को अगर पहले वाले स्वरूप में लागू करते हैं, तो सरकारी खजाने पर कितना भार पड़ेगा। रिटायरमेंट के समय बेसिक सेलरी का पचास फ़ीसदी हिस्सा पेंशन के तौर पर देते हैं तो कितनी राशि खर्च होगी। अगर इसमें बेसिक सेलरी का तीस से चालीस फीसदी हिस्सा, पेंशन के तौर पर देते हैं तो कितना आर्थिक भार पड़ेगा। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि एक तय पेंशन दे दी जाए, लेकिन उसमें किसी तरह की बढ़ोतरी का प्रावधान हो। यानी महंगाई राहत व दूसरे भत्ते, पेंशन में शामिल नहीं होंगे। सूत्रों का कहना कि सरकार फिलहाल ओपीएस देने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन पुरानी पेंशन से मिलते-जुलते फायदे एनपीएस में ही दे सकती है। सरकार ने वित्त मंत्रालय की जो कमेटी गठित की है, उसमें ओपीएस का ज़िक्र ही नहीं है। उसमें एनपीएस में सुधार की बात कही गई है। कांग्रेस पार्टी शासित प्रदेशों में ओपीएस लागू की जा रही है। रामलीला मैदान में रविवार को ओपीएस की मांग को लेकर हुई रैली के बाद कांग्रेस के कई मुख्यमंत्रियों ने इसके समर्थन में ट्वीट किए। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कर्मियों का पक्ष लिया। कांग्रेस सांसदों ने भी कर्मियों की मांग को उचित ठहराया। आप सांसद संजय सिंह भी रामलीला मैदान में पहुंच गए थे।
सियासत के मोर्चे पर करेंगे चोट
नई दिल्ली में 20 सितंबर को हुई राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) स्टाफ साइड की बैठक के एजेंडे में 'ओपीएस' का मुद्दा टॉप पर रहा था। कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हुए अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने कहा था, हमने सरकार के समक्ष एक बार फिर अपनी मांग दोहराई है। एनपीएस को खत्म किया जाए और पुरानी पेंशन योजना को जल्द से जल्द बहाल करें। अगर सरकार नहीं मानती है तो देश में कलम छोड़ हड़ताल होगी, रेल के पहिये रोक दिए जाएंगे। दूसरे चरण में सरकार को सियासत के मोर्चे पर चोट की जाएगी। केंद्र एवं राज्यों के सरकारी कर्मियों और उनके परिजनों व रिश्तेदारों को मिलाकर वह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में जब यही संख्या वोट में बदलेगी तो केंद्र सरकार को कर्मियों की ताकत का अहसास होगा।
भारत बंद जैसे कई कठोर कदम
श्रीकुमार के मुताबिक, जेसीएम की बैठक में बताया गया है कि केंद्र सरकार में 20 लाख से ज्यादा कर्मचारी एनपीएस में हैं। 10 अगस्त को नई दिल्ली के रामलीला मैदान एक विशाल रैली आयोजित की गई थी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के लाखों कर्मियों ने हिस्सा लिया था। कर्मचारियों ने बिना गारंटी वाली एनपीएस योजना को खत्म करने की मांग की थी। इसके बाद कर्मचारी पक्ष ने जेसीएम की बैठक में अब एक बार फिर अपनी मांग दोहराई है। केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि पुरानी पेंशन योजना को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए। सरकार, पुरानी पेंशन लागू नहीं करती है, तो 'भारत बंद' जैसे कई कठोर कदम उठाए जाएंगे। पुरानी पेंशन के लिए कर्मचारी संगठन, राष्ट्रव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल कर सकते हैं। इसके लिए 20 और 21 नवंबर को देशभर में स्ट्राइक बैलेट होगा। कर्मचारियों की राय ली जाएगी। अगर बहुमत हड़ताल के पक्ष में होता है, तो केंद्र एवं राज्यों में सरकारी कर्मचारी, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। उस अवस्था में रेल थम जाएंगी तो वहीं केंद्र एवं राज्यों के कर्मचारी 'कलम' छोड़ देंगे।
अनिश्चितकालीन हड़ताल एक मात्र विकल्प
सी. श्रीकुमार के मुताबिक, पुरानी पेंशन बहाली के लिए केंद्र एवं राज्यों के कर्मचारी एक साथ आ गए हैं। लगभग देश के सभी कर्मचारी संगठन इस मुद्दे पर एकमत हैं। केंद्र और राज्यों के विभिन्न निगमों और स्वायत्तता प्राप्त संगठनों ने भी ओपीएस की लड़ाई में शामिल होने की बात कही है। कर्मचारियों ने हर तरीके से सरकार के समक्ष पुरानी पेंशन बहाली की गुहार लगाई है, लेकिन उनकी बात सुनी नहीं गई। अब उनके पास अनिश्चितकालीन हड़ताल ही एक मात्र विकल्प बचता है। दस अगस्त और एक अक्तूबर की रैली में देशभर से आए लाखों कर्मियों ने 'ओपीएस' को लेकर हुंकार भरी थी। कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कहा था कि वे हर सूरत में पुरानी पेंशन बहाल कराकर ही दम लेंगे। सरकार को अपनी जिद्द छोड़नी पड़ेगी। कर्मचारियों ने कहा था कि वे सरकार को वह फार्मला बताने को तैयार हैं, जिसमें सरकार को ओपीएस लागू करने से कोई नुकसान नहीं होगा। अगर इसके बाद भी सरकार, पुरानी पेंशन लागू नहीं करती है तो 'भारत बंद' जैसे कई कठोर कदम उठाए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने कही थी ये बात
भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश बीडी चंद्रचूड, जस्टिस बीडी तुलजापुरकर, जस्टिस ओ. चिन्नप्पा रेड्डी एवं जस्टिस बहारुल इस्लाम शामिल थे, के द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत रिट पिटीशन संख्या 5939 से 5941, जिसको डीएस नाकरा एवं अन्य बनाम भारत गणराज्य के नाम से जाना जाता है, में दिनांक 17 दिसंबर 1981 को दिए गए प्रसिद्ध निर्णय का उल्लेख करना आवश्यक है। इसके पैरा 31 में कहा गया है, चर्चा से तीन बातें सामने आती हैं। एक, पेंशन न तो एक इनाम है और न ही अनुग्रह की बात है जो कि नियोक्ता की इच्छा पर निर्भर हो। यह 1972 के नियमों के अधीन, एक निहित अधिकार है जो प्रकृति में वैधानिक है, क्योंकि उन्हें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के खंड '50' का प्रयोग करते हुए अधिनियमित किया गया है। पेंशन, अनुग्रह राशि का भुगतान नहीं है, बल्कि यह पूर्व सेवा के लिए भुगतान है। यह उन लोगों के लिए सामाजिक, आर्थिक न्याय प्रदान करने वाला एक सामाजिक कल्याणकारी उपाय है, जिन्होंने अपने जीवन के सुनहरे दिनों में, नियोक्ता के इस आश्वासन पर लगातार कड़ी मेहनत की है कि उनके बुढ़ापे में उन्हें ठोकरें खाने के लिए नहीं छोड़ दिया जाएगा। sabhar Amar Ujala.com
रविवार, 1 अक्टूबर 2023
हाथों में तिरंगे, खचाखच भीड़... ओल्ड पेंशन बहाली को लेकर रामलीला मैदान में हल्लाबोल करते सरकारी कर्मचारियों का जोश हाई
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हाथों में तिरंगे, खचाखच भीड़... ओल्ड पेंशन बहाली को लेकर रामलीला मैदान में हल्लाबोल करते सरकारी कर्मचारियों का जोश हाई
का जोश हाई
Old Pension Scheme Protest Ramlila Maidan: नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के तहत में कर्मचारियों ने केंद्र के समक्ष अपनी मांग उठाने के लिए दिल्ली के रामलीला मैैदान में एक महारैली का आयोजन किया। इस महारैली का उद्देश्य मौजूदा राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के बजाय पुरानी पेंशन योजना को लागू करना है।
शनिवार, 23 सितंबर 2023
उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य
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महान सम्राट विक्रमादित्य का इतिहास
भारत में चक्रवर्ती सम्राट उसे कहा जाता है जिसका की संपूर्ण भारत में राज रहा है। ऋषभदेव के पुत्र राजा भरत पहले चक्रवर्ती सम्राट थे, जिनके नाम पर ही इस अजनाभखंड का नाम भारत पड़ा। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य भी चक्रवर्ती सम्राट थे। विक्रमादित्य का नाम विक्रम सेन था। विक्रम वेताल और सिंहासन बत्तीसी की कहानियां महान सम्राट विक्रमादित्य से ही जुड़ी हुई है।
विक्रमादित्य का परिचय : विक्रम संवत अनुसार विक्रमादित्य आज से 2288 वर्ष पूर्व हुए थे। नाबोवाहन के पुत्र राजा गंधर्वसेन भी चक्रवर्ती सम्राट थे। राजा गंधर्व सेन का एक मंदिर मध्यप्रदेश के सोनकच्छ के आगे गंधर्वपुरी में बना हुआ है। यह गांव बहुत ही रहस्यमयी गांव है। उनके पिता को महेंद्रादित्य भी कहते थे। उनके और भी नाम थे जैसे गर्द भिल्ल, गदर्भवेष। गंधर्वसेन के पुत्र विक्रमादित्य और भर्तृहरी थे। विक्रम की माता का नाम सौम्यदर्शना था जिन्हें वीरमती और मदनरेखा भी कहते थे। उनकी एक बहन थी जिसे मैनावती कहते थे। उनके भाई भर्तृहरि के अलाका शंख और अन्य भी थे।
उनकी पांच पत्नियां थी, मलयावती, मदनलेखा, पद्मिनी, चेल्ल और चिल्लमहादेवी। उनकी दो पुत्र विक्रमचरित और विनयपाल और दो पुत्रियां प्रियंगुमंजरी (विद्योत्तमा) और वसुंधरा थीं। गोपीचंद नाम का उनका एक भानजा था। प्रमुख मित्रों में भट्टमात्र का नाम आता है। राज पुरोहित त्रिविक्रम और वसुमित्र थे। मंत्री भट्टि और बहसिंधु थे। सेनापति विक्रमशक्ति और चंद्र थे।
कलि काल के 3000 वर्ष बीत जाने पर 101 ईसा पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का जन्म हुआ। उन्होंने 100 वर्ष तक राज किया। -(गीता प्रेस, गोरखपुर भविष्यपुराण, पृष्ठ 245)। विक्रमादित्य भारत की प्राचीन नगरी उज्जयिनी के राजसिंहासन पर बैठे। विक्रमादित्य अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे जिनके दरबार में नवरत्न रहते थे। कहा जाता है कि विक्रमादित्य बड़े पराक्रमी थे और उन्होंने शकों को परास्त किया था।
सम्राट विक्रमादित्य अपने राज्य की जनता के कष्टों और उनके हालचाल जानने के लिए छद्मवेष धारण कर नगर भ्रमण करते थे। राजा विक्रमादित्य अपने राज्य में न्याय व्यवस्था कायम रखने के लिए हर संभव कार्य करते थे। इतिहास में वे सबसे लोकप्रिय और न्यायप्रीय राजाओं में से एक माने गए हैं।
कहा जाता है कि मालवा में विक्रमादित्य के भाई भर्तृहरि का शासन था। भर्तृहरित के शासन काल में शको का आक्रमण बढ़ गया था। भर्तृहरि ने वैराग्य धारण कर जब राज्य त्याग दिया तो विक्रम सेना ने शासन संभाला और उन्होंने ईसा पूर्व 57-58 में सबसे पहले शको को अपने शासन क्षेत्र से बहार खदेड़ दिया। इसी की याद में उन्होंने विक्रम संवत की शुरुआत कर अपने राज्य के विस्तार का आरंभ किया। विक्रमादित्य ने भारत की भूमि को विदेशी शासकों से मुक्ति कराने के लिए एक वृहत्तर अभियान चलानाय। कहते हैं कि उन्होंने अपनी सेना की फिर से गठन किया। उनकी सेना विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना बई गई थी, जिसने भारत की सभी दिशाओं में एक अभियान चलाकर भारत को विदेशियों और अत्याचारी राजाओं से मुक्ति कर एक छत्र शासन को कायम किया।
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ऐतिहासिक व्यक्ति : कल्हण की 'राजतरंगिणी' के अनुसार 14 ई. के आसपास कश्मीर में अंध्र युधिष्ठिर वंश के राजा हिरण्य के नि:संतान मर जाने पर अराजकता फैल गई थी। जिसको देखकर वहां के मंत्रियों की सलाह से उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने मातृगुप्त को कश्मीर का राज्य संभालने के लिए भेजा था। नेपाली राजवंशावली अनुसार नेपाल के राजा अंशुवर्मन के समय (ईसापूर्व पहली शताब्दी) में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के नेपाल आने का उल्लेख मिलता है।
राजा विक्रम का भारत की संस्कृत, प्राकृत, अर्द्धमागधी, हिन्दी, गुजराती, मराठी, बंगला आदि भाषाओं के ग्रंथों में विवरण मिलता है। उनकी वीरता, उदारता, दया, क्षमा आदि गुणों की अनेक गाथाएं भारतीय साहित्य में भरी पड़ी हैं।
विक्रमादित्य के नवरत्नों के नाम: नवरत्नों को रखने की परंपरा महान सम्राट विक्रमादित्य से ही शुरू हुई है जिसे तुर्क बादशाह अकबर ने भी अपनाया था। सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों के नाम धन्वंतरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, बेताल भट्ट, घटखर्पर, कालिदास, वराहमिहिर और वररुचि कहे जाते हैं। इन नवरत्नों में उच्च कोटि के विद्वान, श्रेष्ठ कवि, गणित के प्रकांड विद्वान और विज्ञान के विशेषज्ञ आदि सम्मिलित थे।
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विक्रम संवत के प्रवर्तक : देश में अनेक विद्वान ऐसे हुए हैं, जो विक्रम संवत को उज्जैन के राजा विक्रमादित्य द्वारा ही प्रवर्तित मानते हैं। इस संवत के प्रवर्तन की पुष्टि ज्योतिर्विदाभरण ग्रंथ से होती है, जो कि 3068 कलि अर्थात 34 ईसा पूर्व में लिखा गया था। इसके अनुसार विक्रमादित्य ने 3044 कलि अर्थात 57 ईसा पूर्व विक्रम संवत चलाया।
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अरब तक फैला था विक्रमादित्य का शासन :
महाराजा विक्रमादित्य का सविस्तार वर्णन भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। विक्रमादित्य के बारे में प्राचीन अरब साहित्य में वर्णन मिलता है। उस वक्त उनका शासन अरब तक फैला था। दरअसल, विक्रमादित्य का शासन अरब और मिस्र तक फैला था और संपूर्ण धरती के लोग उनके नाम से परिचित थे।
इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य का राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा ईरान, इराक और अरब में भी था। विक्रमादित्य की अरब विजय का वर्णन अरबी कवि जरहाम किनतोई ने अपनी पुस्तक 'सायर-उल-ओकुल' में किया है। पुराणों और अन्य इतिहास ग्रंथों के अनुसार यह पता चलता है कि अरब और मिस्र भी विक्रमादित्य के अधीन थे।
तुर्की के इस्ताम्बुल शहर की प्रसिद्ध लायब्रेरी मकतब-ए-सुल्तानिया में एक ऐतिहासिक ग्रंथ है 'सायर-उल-ओकुल'। उसमें राजा विक्रमादित्य से संबंधित एक शिलालेख का उल्लेख है जिसमें कहा गया है कि '…वे लोग भाग्यशाली हैं, जो उस समय जन्मे और राजा विक्रम के राज्य में जीवन व्यतीत किया। वह बहुत ही दयालु, उदार और कर्तव्यनिष्ठ शासक था, जो हरेक व्यक्ति के कल्याण के बारे में सोचता था। ...उसने अपने पवित्र धर्म को हमारे बीच फैलाया, अपने देश के सूर्य से भी तेज विद्वानों को इस देश में भेजा ताकि शिक्षा का उजाला फैल सके। इन विद्वानों और ज्ञाताओं ने हमें भगवान की उपस्थिति और सत्य के सही मार्ग के बारे में बताकर एक परोपकार किया है। ये तमाम विद्वान राजा विक्रमादित्य के निर्देश पर अपने धर्म की शिक्षा देने यहां आए…।'
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अन्य सम्राट जिनके नाम के आगे विक्रमादित्य लगा है:- यथा श्रीहर्ष, शूद्रक, हल, चंद्रगुप्त द्वितीय, शिलादित्य, यशोवर्धन आदि। दरअसल, आदित्य शब्द देवताओं से प्रयुक्त है। बाद में विक्रमादित्य की प्रसिद्धि के बाद राजाओं को 'विक्रमादित्य उपाधि' दी जाने लगी।
विक्रमादित्य के पहले और बाद में और भी विक्रमादित्य हुए हैं जिसके चलते भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के बाद 300 ईस्वी में समुद्रगुप्त के पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय अथवा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य हुए।
एक विक्रमादित्य द्वितीय 7वीं सदी में हुए, जो विजयादित्य (विक्रमादित्य प्रथम) के पुत्र थे। विक्रमादित्य द्वितीय ने भी अपने समय में चालुक्य साम्राज्य की शक्ति को अक्षुण्ण बनाए रखा। विक्रमादित्य द्वितीय के काल में ही लाट देश (दक्षिणी गुजरात) पर अरबों ने आक्रमण किया। विक्रमादित्य द्वितीय के शौर्य के कारण अरबों को अपने प्रयत्न में सफलता नहीं मिली और यह प्रतापी चालुक्य राजा अरब आक्रमण से अपने साम्राज्य की रक्षा करने में समर्थ रहा।
पल्लव राजा ने पुलकेसन को परास्त कर मार डाला। उसका पुत्र विक्रमादित्य, जो कि अपने पिता के समान महान शासक था, गद्दी पर बैठा। उसने दक्षिण के अपने शत्रुओं के विरुद्ध पुन: संघर्ष प्रारंभ किया। उसने चालुक्यों के पुराने वैभव को काफी हद तक पुन: प्राप्त किया। यहां तक कि उसका परपोता विक्रमादित्य द्वितीय भी महान योद्धा था। 753 ईस्वी में विक्रमादित्य व उसके पुत्र का दंती दुर्गा नाम के एक सरदार ने तख्ता पलट दिया। उसने महाराष्ट्र व कर्नाटक में एक और महान साम्राज्य की स्थापना की, जो राष्ट्र कूट कहलाया।
शुक्रवार, 22 सितंबर 2023
महिला आरक्षण बिल संसद से पास, किसने क्या कहा
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महिला आरक्षण बिल संसद से पास, किसने क्या कहा
महिला आरक्षण बिल लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा में भी पारित हो गया है.
इस विधेयक में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है. महिला आरक्षण के लिए पेश किया गया विधेयक 128वां संविधान संशोधन विधेयक है.
इस बिल को लागू करने की राह में कई रोड़े हैं, जिसके चलते लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
बिल में कहा गया है कि जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसके प्रावधान लागू हो सकेंगे.
परिसीमन में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर सीमाएं तय की जाती हैं.
पिछला देशव्यापी परिसीमन 2002 में हुआ था. इसे 2008 में लागू किया गया था.
परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के भंग होने के बाद महिला आरक्षण प्रभावी हो सकता है.
पक्ष में कितने वोट
केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया था.
संसद की नई इमारत में 19 सितंबर को कार्यवाही शुरू हुई. पहले ही दिन क़ानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक पेश किया.
20 सितंबर को लोकसभा में करीब सात घंटे की चर्चा के बाद यह बिल पास हुआ. इसके पक्ष में 454 मत पड़े, जबकि दो सांसदों ने इसके विरोध में वोट दिया.
21 सितंबर, गुरुवार को 'नारी शक्ति वंदन विधेयक' राज्यसभा से पारित हुआ, जहां 215 सांसदों ने इसके समर्थन में वोट डाले. यहां एक वोट भी इसके विरोध में नहीं पड़ा.
राज्यसभा में बिल के पास होते ही संसद का विशेष सत्र भी खत्म हो गया. सत्र के आखिरी यानी चौथे दिन महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाई.
विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.
इसका मतलब यह हुआ कि लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.
लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सीटें आरक्षित हैं. इन आरक्षित सीटों में से एक तिहाई सीटें अब महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.
इस समय लोकसभा की 131 सीटें एससी-एसटी के लिए आरक्षित हैं. महिला आरक्षण विधेयक के क़ानून बन जाने के बाद इनमें से 43 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.
इन 43 सीटों को सदन में महिलाओं के लिए आरक्षित कुल सीटों के एक हिस्से के रूप में गिना जाएगा.
इसका मतलब यह हुआ कि महिलाओं के लिए आरक्षित 181 सीटों में से 138 ऐसी होंगी जिन पर किसी भी जाति की महिला को उम्मीदवार बनाया जा सकेगा यानी इन सीटों पर उम्मीदवार पुरुष नहीं हो सकते. Sabhar BBC.COM
मंगलवार, 19 सितंबर 2023
अश्लील वीडियो को इंटरनेशनल रेसलर ने साजिश बताया:अंशु मलिक बोलीं- लड़की हिमाचल, लड़का रोहतक का, बिना सच जाने मुझे दोषी करार दिया
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हरियाणा की इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए अश्लील वीडियो का खंडन किया है।
अंशु मलिक ने कहा- मेरा इस वीडियो से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद मुझ पर गंदे कमेंट्स किए जा रहे हैं। मैं किसी बड़ी साजिश का शिकार हुई हूं। मैं और मेरा परिवार मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहे हैं।
वीडियो में दिख रहा लड़का रोहतक और लड़की हिमाचल प्रदेश की है। वे दोनों रिलेशनशिप में हैं। अंशु ने लोगों से बिना सच्चाई जाने किसी भी नतीजे पर न पहुंचने की विनती की है।
अंशु ने लिखा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। आखिर में सत्य की जीत और झूठ की हार हुई।
अश्लील वीडियो को इंटरनेशनल रेसलर ने साजिश बताया:अंशु मलिक बोलीं- लड़की हिमाचल, लड़का रोहतक का, बिना सच जाने मुझे दोषी करार दिया
पानीपत3 घंटे पहले
इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने कहा कि उनके बारे में फैलाए गए झूठ की वजह से परिवार को मेंटल ट्रॉमा से गुजरना पड़ा। - Dainik Bhaskar
इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने कहा कि उनके बारे में फैलाए गए झूठ की वजह से परिवार को मेंटल ट्रॉमा से गुजरना पड़ा।
हरियाणा की इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए अश्लील वीडियो का खंडन किया है।
अंशु मलिक ने कहा- मेरा इस वीडियो से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद मुझ पर गंदे कमेंट्स किए जा रहे हैं। मैं किसी बड़ी साजिश का शिकार हुई हूं। मैं और मेरा परिवार मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहे हैं।
वीडियो में दिख रहा लड़का रोहतक और लड़की हिमाचल प्रदेश की है। वे दोनों रिलेशनशिप में हैं। अंशु ने लोगों से बिना सच्चाई जाने किसी भी नतीजे पर न पहुंचने की विनती की है।
अंशु ने लिखा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। आखिर में सत्य की जीत और झूठ की हार हुई।
पुलिस ने सोमवार को इस वीडियो को अंशु मलिक का बता वायरल करने वाले आरोपी अमित उर्फ रावण को गिरफ्तार कर लिया। वह हिसार के बरवाला का रहने वाला है और DN कॉलेज में BSC का स्टूडेंट है।
पुलिस ने सोमवार को इस वीडियो को अंशु मलिक का बता वायरल करने वाले आरोपी अमित उर्फ रावण को गिरफ्तार कर लिया। वह हिसार के बरवाला का रहने वाला है और DN कॉलेज में BSC का स्टूडेंट है।
रेसलर अंशु मलिक के वीडियो की 5 अहम बातें...
1. मुझे बदनाम करने की बहुत बड़ी साजिश हुई
मैं अंशु मालिक आप सब से एक बेहद जरूरी बात शेयर करना चाहती हूं। पिछले कुछ दिनों से मेरे नाम से एक फेक वीडियो वायरल किया जा रहा था। मैं आप सबको बता दूं कि मैं उसे वीडियो में नहीं हूं। मुझे सरासर बदनाम करने की कोशिश की गई है। यह एक बहुत बड़ी साजिश रची गई है।
2. वीडियो में दिख रहे लड़का-लड़की रिलेशन में
इसमें दिख रहे लड़का-लड़की आज भी रिलेशनशिप में है। दोनों ने अपने बयान पुलिस को दे दिए हैं। पुलिस ने उन बयानों को सोशल मीडिया पर अपलोड भी किया है। जिस लड़के ने उन दोनों के वीडियो के साथ मेरा नाम जोड़कर वायरल किया था, उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसने अपना जुर्म पुलिस के सामने कबूल किया है। पुलिस ने उन बयानों को भी सोशल मीडिया पर अपलोड किया है।
3. मैं और मेरा परिवार मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहा
मैंने अपनी बेगुनाही के सारे सबूत दे दिए हैं। जो वीडियो मेरा नहीं है, उसे मेरा बता कर लोग बहुत गंदे कमेंट कर कर रहे हैं। क्या उन लोगों ने एक बार भी नहीं सोचा कि मुझ पर और मेरे परिवार पर क्या बीत रही होगी। मैं और मेरा परिवार किस मेंटल ट्रॉमा से गुजरा होगा। जिन्होंने बिना सच जान मुझे समाज के सामने दोषी करार कर दिया। उस लड़की को दोषी साबित कर दिया, जिसका इस पूरे प्रकरण से कोई लेना-देना भी नहीं है। sabhar Bhaskar.com
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