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40 दिनों तक 0.06 ग्राम हींग का करें सेवन, फिर देखें कमाल

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नई दिल्ली:  अगर आप अपनी सेक्स क्षमता में कमी से परेशान हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। इसका इलाज आपके घर में ही है। सेक्स क्षमता यानी सेक्स पावर बढ़ाने में हींग बहुत ही फायदेमंद है। हींग का इस्तेमाल सदियों से पुरुषों के नपुसंकता की समस्या का समाधान घरेलू नुस्खे के रूप में किया जाता रहा है। हींग कामोत्तेजक के रूप में काम करती है। इसलिए जिन पुरुषों को समय पूर्व स्खलन की समस्या होती है उनके इस समस्या को हींग नैचुरल तरीके से ठीक करने में बहुत मदद करती है। हर्ब दैट हील: नैचुरल रेमिडी फॉर गुड हेल्थ पुस्तक के अनुसार 40 दिनों तक 6 सेंटीग्राम (0.06 ग्राम) हींग का सेवन करने से आप सेक्स ड्राइव को बेहतर बना सकते हैं। मिक्सचर के रूप में लगभग 0.06 ग्राम हींग को घी में फ्राई करें और उसमें शहद और बरगद के पेड़ का लैटेक्स मिलाकर इस मिश्रण को बना लें। नपुसंकता को ठीक करने के लिए सुबह सूर्य निकलने के पहले इस मिश्रण का सेवन खाली पेट 40 दिनों तक करें। इरेक्टाइल डिसफंक्शन और समय पूर्व स्खलन की समस्या को अगर आप नैचुरल तरीके से ठीक करना चाहते हैं तो हींग एक अच्छा विकल्प बन सकता है। एक गिलास गुनगुना ग

अब सिर्फ आवाज के दम पर इधर से उधर जाएगा सामान

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लंदन :  वैज्ञानिकों ने एक अनूठा सोनिक ट्रैक्टर बीम विकसित किया है जो ध्वनि तरंगों का उपयोग कर वस्तुओं को उठाने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में सक्षम होगा। इस खोज में भारतीय मूल का एक वैज्ञानिक भी शामिल है। यह ट्रैक्टर बीम एक ध्वनिक होलोग्राम उत्पन्न करने के लिए उच्च क्षमता के ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल करता है जो छोटी वस्तुओं को उठाने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में सक्षम होता है। ट्रैक्टर बीम ऐसा उपकरण है जो शारीरिक संपर्क के बगैर किसी भी वस्तु को खींच लेता है। विज्ञान कथा लेखकों की रचनाओं और स्टार ट्रेक जैसे प्रोगामों में सामान को पकड़ने, उठाने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए ट्रैक्टर बीम की अवधारणा का उपयोग किया गया है, जिससे वैज्ञानिक और इंजीनियर बहुत हद तक प्रभावित हुए। अल्ट्राहैप्टिक्स के सहयोग से ब्रिस्टल और ससेक्स विश्वविद्यालयों के अनुसंधानकर्ताओं ने इस तकनीक का विकास किया। आने वाले समय में व्यापक तौर पर इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। इस अध्ययन का प्रकाशन नेचर कम्युनिकेशन्स नामक जर्नल में हुआ है। sabhar :http://zeenews.india.com/

भविष्य में 3डी प्रिंटर से ही बनेगी कार?

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क्या एक दिन आप 3डी प्रिंटर पर बनी कार चलाएँगे? कार टेकनोलॉजी से जुड़े ताज़ा शोध इस पूरे उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रहे हैं और ये बिलकुल संभव है कि आप आने वाले समय में 3डी प्रिंटर पर बनी कार ही चलाएँ. अमरीकी ऊर्जा विभाग की  प्रयोगशाला ओक रिज नेशनल लेबोरेटरी  ने 3डी प्रिंटर पर न केवल स्पोर्ट्स कार बनाई बल्कि 2015 के डीट्रॉयट ऑटो शो में इसे प्रदर्शित भी किया है. पहली नजर में तैयार की गई शेलबी कोबरा कार आम स्पोर्ट्स कार जैसी ही लगती है, चाहे ये प्लास्टिक से बनी है. हालांकि ये स्टील से भी बनाई जा सकती है. इसमें कहीं भी स्टील के पैनल का इस्तेमाल नहीं हुआ है. ये कार 85 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलाई जा सकती है. थ्री-डायमेंशनल तरीके से कार प्रिंटिंग? थ्री डायमेंशनल प्रिटिंग वो नई तकनीक है जिसके इस्तेमाल में पहले कंप्यूटर में डिज़ाइन बनाया जाता है. फिर उक्त कमांड के ज़रिए 3डी प्रिंटर, या ये कहें कि इंडस्ट्रियल रोबोट उस डिज़ाइन को, सही पदार्थ (मेटीरियल) का इस्तेमाल करते हुए परत दर परत प्रिंट करता है या बनाता है. इस प्रयोग में पिघले हुए प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हुए

हाइड्रोजन से चलने वाली कार

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जापान की कार निर्माता कंपनी टोयोटा की योजना हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली कार का निर्माण बढ़ाना है. इसलिए अब टोयोटा इससे जुड़े अपने हज़ारों पेटेंट्स को दूसरी कार निर्माता कंपनियों के साथ साझा करने जा रही है. टोयोटा ने इसी साल जापान के अलावा अपनी मिराई कार का निर्यात ब्रिटेन, अमरीका, जर्मनी और डेनमार्क को किया है. यह कार हाइड्रोजन से चलती है. टोयोटा की इस कार की क़ीमत ब्रिटेन में 66 हज़ार पाउंड यानी लगभग 66 लाख रूपए है. अमरीका के कैलिफ़ोर्निया में इस कार पर 25 फ़ीसदी सब्सिडी है जबकि जापान में 40 फ़ीसदी से ज़्यादा सब्सिडी दी जा रही है. ब्रिटेन में इस पर कोई सब्सिडी नहीं है. कंपनी को उम्मीद है कि पेटेंट साझा करने से दूसरी कंपनियां भी हाइड्रोजन ईंधन की सस्ती कार बनाएगी. Image copyright Toyota Motor Sales टोयोटा के एक अधिकारी स्कॉट ब्राउनली का कहना है, "हमने अपनी कार को काफ़ी सुरक्षित बनाया है. हाइड्रोजन ज्वलनशील होती है इसलिए हमने आग से बचाव की व्यवस्था की है. इसके अलावा इस कार के ईंधन की टंकी पर 150 टन का दबाव भी है और उस लिहाज़ से भी हमारी कार सुरक्षित है." इस कार क

OLX और क्विकर की तरह फेसबुक पर बेचिए अपना सामान

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नई दिल्ली.  सोशल नैटवर्किंग साइट फेसबुक अपने यूजर्रस के लिए एक नया फीचर लांच करने वाली है इस फीचर की मदद से यूजर ई-कॉमर्स साइट की तरह फेसबुक को यूज कर सकेंगे. फिलहाल फेसबुक इस फीचर पर काम कर रही है.  रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक 'लोकल मार्किट' नाम से एक फीचर पर काम कर रहा है. टेस्टिंग पर चल रह ये फेसबुक का नया फीचर सामान खरीदने वाला प्लेटफार्म बन जाएगा. न्यूज के मुताबिक, फेसबुक के कई यूजर ने यह जानकारी दी है कि उनके आईफोन के फेसबुक एप्प में मेसेंजर बटन की जगह पर बेहद कम समय के लिए नया फचर दिखाई दिया.  फेसबुक के इस फीचर की मदद से यूजर जिस सामान को बेचना चाहते है वो इस प्लेटफार्म पर पोस्ट कर सकेंगे.  'लोकल मार्किट' नाम के इस फीचर में सामान बेचने के साथ-साथ खरीदने का भी ऑप्शन है. OLX और क्विकर जैसे फेसबुक के इस फीचर में सामान की कीमत और फोटो भी दिखाई देगी sabhar :http://palpalindia.com/

छठी इंद्रिय या अतींद्रीय ज्ञान की शक्ति

स्वामी ओमानंद तीर्थ के अनुसार छठी इंद्रिय या अतींद्रीय ज्ञान की शक्ति जगाने के लिए योग में अनेक उपाय बताए गए हैं। इसे परामनोविज्ञान का विषय भी माना जाता है। असल में यह संवेदी बोध का मामला योगीजनों का मानना है कि इस का केंद्र ब्रह्मरंध्र है। जो दोनों आंखो के बीच भ्रूमध्य स्थान से कुछ ऊपर कपाल के ठीक बीच में है। मनुष्य के शरीर में जिन सूक्ष्म नाड़ियों का जाल फैला हुआ है उनमें तीन प्रमुख है इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना।� सुषुम्ना मध्य में स्थित है और जब नासिका के दोनों स्वर चलते हैं तो माना जाता है कि उसके सक्रिय होने के लिए उपयुक्त स्थिति जाती है। इस सक्रियता से अतींद्रिय ज्ञान जाग्रत होता है। इन तीन नाड़ियों के अलावा पूरे शरीर में हजारों नाड़ियां होती हैं। प्राणायाम और आसनों से इनकी शुद्धि होती है और शुद्धि के बाद अतींद्रिय ज्ञान जगाने का अभ्यास किया जाता है। अभ्यास के लिए सर्वप्रथम जरूरी है साफ और स्वच्छ वातावरण, जहां फेफड़ों में ताजी हवा भरी जा सके।स्वच्छ वातावरण में किए गए प्राणायाम का अभ्यास किया जा सकता है। फिर ध्यान का अभ्यास शुरु होता है। भृकुटी पर ध्यान लगाकर निरंतर मध्य स्थित अं

फ्यूचर ह्यूमन - मशीन और इंसान का मेल

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कभी स्वास्थ्य कारणों से तो कभी सेना में जरूरत के लिए रोबोटिक कंकालों पर शोध होता है. बीते दशक में इंसान के शरीर की ही तरह हरकतें करने में सक्षम रोबोटिक हाथ, पैर और कई तरह के बाहरी कंकाल विकसित किए जा चुके हैं. पूरी तरह रोबोटिक आइला नाम की यह मादा रोबोट दिखाती है कि एक्सो-स्केलेटन यानि बाहरी कंकाल को कैसे काम करना चाहिए. जब किसी व्यक्ति ने इसे पहना होता है तो आइला उसे दूर से ही नियंत्रित कर सकती है. आइला को केवल उद्योग-धंधों में ही नहीं अंतरिक्ष में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. हाथों से शुरु जर्मनी में एक्सो-स्केलेटन पर काम करने वाला डीएफकेआई नाम का आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस रिसर्च सेंटर 2007 में शुरू हुआ. शुरुआत में यहां वैज्ञानिक रोबोटिक हाथ और उसका रिमोट कंट्रोल सिस्टम बनाने की ओर काम कर रहे थे. तस्वीर में है उसका पहला आधुनिक प्रोटोटाइप. बेहद सटीक डीएफकेआई ने 2011 से दो हाथों वाले एक्सो-स्केलेटन पर काम शुरू किया. दो साल तक चले इस प्रोजेक्ट में रिसर्चरों ने इंसानी शरीर के ऊपरी हिस्से की कई बारीक हरकतों की अच्छी नकल कर पाने में कामयाबी पाई और इसे एक्सो-स्केलेटन में भी डाल सके.

रोटी बनाने वाला रोबोट

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भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जहां आज भी तीनों वक्त का खाना गर्म खाया जाता है और जहां रोटी भी ताजा ही बनाई जाती है. मां के हाथ ही रोटी का स्वाद तो सबको पसंद होता है लेकिन आज कल की भाग दौड़ की जिंदगी में उस स्वाद के लिए कई बार लोग तरस जाते हैं. खास कर अगर महिला और पुरुष दोनों ही कामकाजी हों, तो खाना पकाने का वक्त कम ही मिल पाता है. इस समस्या से निपटने के लिए भारत में लोग रसोइये रख लेते हैं. लेकिन जो भारतीय विदेशों में रहते हैं, उनके पास यह विकल्प भी नहीं है. उन्हीं को ध्यान में रखते हुए यह रोटी बनाने वाला रोबोट तैयार किया गया है. इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि उनकी मशीन आटा गूंथने से ले कर, पेड़े बनाने, बेलने और रोटी को सेंकने तक का सारा काम खुद ही कुछ मिनटों में कर लेती है. हालांकि इसके दाम को देख कर लगता नहीं है कि बहुत लोग इसे खरीदेंगे. एक रोटी मेकर के लिए एक हजार डॉलर यानि 65 हजार रुपये तक खर्च करने होंगे. sabhar http://www.dw.com/

गंजे सिर पर आएंगे बाल, अमेरिकी रिसर्चर्स ने खोजी गंजेपन की नई दवा

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न्यूयॉर्क।  अगर आपके सिर के बाल पूरी तरह से झड़ गए हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। अमेरिका के कुछ रिसर्चर्स ने ऐसी दवा खोजने का दावा किया है जो गंजे लोगों के सिर पर बाल उगाने में मददगार हो सकेगी। अभी इस दवा का यूज कैंसर के इलाज के लिए किया जा रहा है।  यह दावा अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर में किए गए एक एक्सपेरिमेंट के बाद किया गया है। रिसर्चर्स एन्जेला क्रिस्टियानो और सहयोगियों द्वारा किए गए इस एक्सपेरिमेंट में कैंसर के इलाज के काम आ रही रुक्सोलिटाइनिब और टोफासिटाइनिब नामक दवाएं गंजेपन के इलाज में भी यूजफुल पाई गई है। रिसचर्च ने चूहों पर यह सफल एक्सपेरिमेंट किया है। जिन चूहों पर यह एक्सपेरिमेंट किया गया, उनके शरीर के सारे बाल गिर चुके थे। रिसर्चर्स का कहना है कि बाल झड़ने की समस्या वाले इन चूहों की स्किन पर इन दवाओं का पांच दिनों तक लेप किया गया और दस दिनों के भीतर ही बालों की जड़ें फूटनें लगीं। लगभग तीन हफ्ते में ही काफी घने बाल आ गए। रिसर्चर्स ने एलोपेशिया एरिटा नामक बीमारी के इलाज के लिए चूहों पर यह एक्सपेरिमेंट किया था। मेल पैटर्न बाल्डनैस के लिए ज़िम्मेदार ए

पौरुष बचाना चाहते हैं तो तुरंत छोड़ दीजिए ये 10 गंदी आदतें

क्या आप जानते हैं अपनी उन आदतों के बारे में जो आपके पौरुष को घटा रही हैं? जाने आनजाने आप ऐसे कई काम करते होंगे जो आपके स्पर्म काउंट के लिए घातक हैं। हो सकता है इसमें से कुछ आप अभी भी कर रहे हों। देखिए क्या हैं वह आदतें और संभल जाइए।गर्म पानी से नहाने में शरीर को तो आराम मिलता है लेकिन यह मर्दानगी के लिए घातक है क्योंकि टेस्टिकल्स का तापमान बढ़ जाता है इसलिए यह स्पर्म काउंट भी घटाता है और उनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।बहुत कसे अंतरवस्त्र पहनने से टेस्टिकल्स में गर्मी बढ़ती है और स्पर्म काउंट घटता है। ब्रीफ के बजाए बॉक्सर पहने तो अच्छा है।सोया से बनीं कोई भी चीज आपके लिए सही नहीं है। इसमें ईसोफ्लेवोन्स होते हैं जो स्पर्म की गुणवत्ता भी खराब करते हैं।स्पर्म काउंट सही रखने के लिए यह भी जरूरी है कि नियमित रूप से सेक्स करते रहें। बहुत समय तक ऐसा न करने से स्पर्म अपना आकार बदल लेते हैं और पुराने होने लगते हैं। मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाले रेडिएशन का भी स्पर्म काउंट पर बुरा असर पड़ता है। खास तौर से लैपटॉप को गोद में रख कर काम करने पर। शराब पीने से भी टेस्टॉसटेरॉन की मात्रा कम होती है। इस

व‌िज्ञान आत्मा और भूत-प्रेतों की दुन‌िया

लिंग परिवर्तन अजय’ बन गया ‘आकृति’

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वडोदरा।  शहर के रावपुरा इलाके में रहने वाले अजय की इच्छा आखिरकार पूरी हो ही गई। वह पिछले 6 सालों से लिंग परिवर्तन करवाकर ‘युवती’ बनना चाहता था और वडोदरा के सयाजी हॉस्पिटल के चक्कर लगा रहा था। जबकि सेवासदन और खुद केंद्र सरकार ने तीन साल पहले ही अजय को ‘आकृति पटेल’ नामक ‘युवती’ का दर्जा दे दिया था। इसके बाद भी उसका लिंग परिवर्तन नहीं हो सका था। वह लगातार हॉस्पिटल के चक्कर लगाता रहा। अजय ने कोशिश जारी रखते हुए अपनी आवाज मीडिया के जरिए दुनिया तक पहुंचाई और उसकी मेहनत रंग ले आई। शुक्रवार को उसकी सफल सर्जरी हो गई और इस तरह वह पूर्ण रूप से स्त्री बन गया। इस सर्जरी को डॉ. गौतम अमीन (मनोचिकित्सक), डॉ. उमेश शाह (कॉस्मेटिक-प्लास्टिक सर्जन), डॉ. संजीव शाह (सर्जन) और डॉ. कमलेश परीख (किडनी स्पेशलिस्ट) की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। आकृति के बताए अनुसार गत 12 फरवरी 2009 में उसने लिंग परिवर्तन के लिए सयाजी हॉस्पिटल में संपर्क किया था। शुरुआत में अस्पताल के डॉक्टर्स ने यह कहकर उसे चलता कर दिया था कि अस्पताल में इस तरह का ऑपरेशन नहीं होता। इसके बाद 2005 में एक युवक ने सयाजी हॉस्पिटल मे

जहां लोग दिन में न चाहते हुए भी सो जाते हैं

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कजाकिस्तान में एक गांव ऐसा है, जहां लोग दिन में न चाहते हुए भी सो जाते हैं। इस बीमारी के कारण आधा गांव खाली हो गया है। अब तक इसका कोई ठोस कारण समझ नहीं आया है। दुनियाभर में कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें रात में भी नींद नहीं आती। इससे वे काफी परेशान भी रहते हैं। लेकिन कजाकिस्तान में एक गांव ऐसा है, जिसके रहवासी दिन में ही अपने आप सोने लगते हैं। इनके जागने का हिसाब-किताब भी अजीब है। कभी दो घंटे में ही जाग जाते हैं तो कभी दो दिन भी लग जाते हैं। कजाकिस्तान के इस गांव का नाम कलाची है। यहां के लोग जब दिन में सोने के बाद जागते हैं तो इन्हें कुछ भी याद नहीं रहता। कहा जाता है कि कई लोग जागने के बाद या तो भविष्य की बातें करने लगते हैं या फिर अपने अतीत की। उन्हें कभी परियां दिखाई देती हैं तो कभी दीवारों पर चलते हुए मेंढक। दिन होते ही किसी भी समय लोग सो जाते हैं। इन्हें जगाने की चाहे कितनी भी कोशिश करो, सब व्यर्थ है। यहां तक कि स्कूल जाने वाले अधिकतर बच्चे भी दिन के समय सो जाते हैं। यह सिलसिला मार्च, 2013 से चल रहा है। शुरुआत में गांव की आबादी 810 थी और करीब 140 लोग इससे पीड़ित थे। लेकिन इस अजीबो

जमीन के नीचे मिली थी ये 'देवताओं की बस्ती', 1400 साल पुराने मंदिर भी मिले

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ग्वालियर.  ग्वालियर से 30 किलोमीटर दूर पढ़ावली स्थित पहाड़ी पर ये है देवताओं की बस्ती। करीब 1400 साल से अधिक पुराने इन सैकड़ों मंदिरों में देवी-देवताओं के अलावा ऋषि मुनि के स्थान हैं। एक हजार साल पहले ये मंदिर भूकंप की भैंट चढ़ गायब था। 2005 में खुदाई के दौरान इसका पता चला। अब तक यहां 95 मंदिर खोजे जा चुके हैं और 110 होना बाकी हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में हजारों मंदिर और दबे हुए हैं। sabhar : http://www.bhaskar.com/

सुपर कंडक्टिव - ग्रैफीन कंडोम

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कंडोम के क्षेत्र में नई नई खोजें हो रही हैं. 2004 में जिस अति प्रवाहकीय, अति मजबूत पदार्थ ग्रैफीन की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था, अब उसका एक महत्वपूर्ण इस्तेमाल सामने आया है. इससे बेहतर कंडोम बनाने की कोशिश हो रही है. sabhar :http://www.dw.com/

जब वो धरती पर थे... )

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होमो फ्लोरेसिएन्सिस (हॉबिट गंभीर दिखने वाला ये इंसान 2003 में इंडोनेशियाई द्वीप पर मिला. यह सिर्फ एक मीटर लंबा था और जेआरआर टल्कियेन की लॉर्ड ऑफ द रिंग्स कहानी में हॉबिट जैसा दिखता था. इसलिए इसे हॉबिट कहा जाता है. शायद यह आधुनिक मनुष्य से अलग प्रजाति का था. धरती पर दोनों ही रहते थे. करीब 15,000 साल पहले हॉबिट प्रजाति ने दुनिया को अलविदा कह दिया. ब्रैकियोसॉरस ये प्राणी धरती से 15 करोड़ साल पहले विलुप्त हो गया था. शाकाहारी ब्रैकियोसॉरस धरती पर रहने वाली सबसे बड़ी प्रजातियों में से एक था. पूरे आकार का डायनोसोर बनने में इसे 10 से 15 साल लगते थे. खूब भूख और बढ़िया मैटाबोलिज्म वाला ये प्राणी 13 मीटर ऊंचा और इससे दुगना बड़ा होता था. क्वागा घोड़े और जेबरा का मिक्स दिखने वाला ये जानवर असल में एक जेबरा है. दक्षिण अफ्रीकी जेबरा की ये एक उप प्रजाति है. लोग इसका शिकार करते और खाने में इसकी टक्कर थी पालतू जानवरों से. क्वागा 1883 में धरती से खत्म हो गया. वुली मैमथ   आइस एज में जिंदा रहने के लिए वुली मैमथ की खाल बहुत ऊनी होती थी. ये हाथी भी आज के हाथी जितने ही बड़े होते थे. ह

अगले महाविनाश में इंसान का सफाया!

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कभी डायनासोर सबसे ज्यादा शक्तिशाली जीव थे जो पूरी तरह खत्म हो गए. आज इंसान सबसे ज्यादा शक्तिशाली है, लेकिन उसके सफाये की आशंका भी उतनी ही प्रबल है. पृथ्वी पर जीवन बीते 50 करोड़ साल से है. अब तक पांच बार ऐसे मौके आए हैं जब सबसे ज्यादा फैली और प्रभावी प्रजातियां पूरी तरह विलुप्त हुई हैं. भविष्य में सर्वनाश का छठा चरण आएगा और इंसान के लिए यह बुरी खबर है, क्योंकि इस वक्त धरती पर सबसे ज्यादा प्रबल प्रजाति उसी की है. इंग्लैंड की लीड्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने सर्वनाश और क्रमिक विकास पर शोध किया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक आखिरी सर्वनाश की घटना 6.6 करोड़ साल पहले घटी. तब एक बड़ा धूमकेतु पृथ्वी से टकराया और 15 करोड़ साल तक धरती पर विचरण करने वाले डायनासोर एक झटके में खत्म हो गए. डायनासोरों की तुलना में इंसान ने पृथ्वी पर बहुत कम समय गुजारा है, करीब 15 लाख साल. वैज्ञानिकों के मुताबिक बीती घटनाओं के दौरान, एक समान दिखने वाली या बहुत ही कम अंतर वाली प्रजातियों का 50 से 95 फीसदी तक सफाया हुआ. शोध टीम के प्रमुख प्रोफेसर एलेक्जेंडर डनहिल कहते हैं, "जीवाश्मों के आधार पर बीते दौर

सिरकटा मुर्गा, जो 18 महीने तक ज़िंदा रहा!

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क्रिस स्टोकल वॉकर बीबीसी मैग्ज़ीन संवाददाता 12 सितंबर 2015 साझा कीजिए Image copyright BBC World Service अमरीका में 70 साल पहले एक किसान ने एक मुर्गे का सिर काट दिया, लेकिन वह मरा नहीं बल्कि 18 महीने तक जिंदा रहा. चकित करने वाली इस घटना के बाद यह मुर्गा 'मिरैकल माइक' नाम से मशहूर हुआ. ये सिरकटा मुर्गा इतने दिनों तक ज़िंदा कैसे रहा? पढ़ें विस्तार से 10 सितंबर 1945 को कोलाराडो में फ़्रूटा के अपने फ़ार्म पर लॉयल ओल्सेन और उनकी पत्नी क्लारा मुर्गे-मुर्गियों को काट रहे थे. लेकिन उस दिन 40 या 50 मुर्गे-मुर्गियों में से एक सिर कट जाने के बाद भी मरा नहीं. ओल्सेन और क्लारा के प्रपौत्र ट्रॉय वाटर्स बताते हैं, “जब अपना काम ख़त्म कर वे मांस उठाने लगे तो उनमें से एक जिंदा मिला जो बिना सिर के भी दौड़े चला जा रहा था.” दम्पति ने उसे सेब के एक बक्से में बंद कर दिया, लेकिन जब दूसरी सुबह लॉयल ओल्सेन ये देखने गए कि क्या हुआ तो उसे ज़िंदा पाकर उन्हें बहुत हैरानी हुई. बचपन में वाटर्स ने अपने परदादा से ये कहानी सुनी थी. Image copyright BBC World Service Image caption अमरीक

सम्राट अशोक की 9 रहस्यमय लोगों की सोसाइटी

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प्रतीकात्मक फोटो। इतिहास की रहस्यमय चीजों में सम्राट अशोक की 9 लोगों की एक सोसायटी का जिक्र सामने आता है। इसे The nine unknown के नाम से भी जाना जाता है। सम्राट अशोक ने 273 ई.पू. में इस कथित शक्तिशाली लोगों की सोसाइटी की नींव रखी थी। इस सोसाइटी का निर्माण कलिंग के युद्ध में 1 लाख से अधिक लोगों की मौत के बाद हुआ था। कहा जाता है कि इन 9 लोगों के पास ऐसी सूचनाएं थीं, जो गलत हाथों में जाने पर खतरनाक हो सकती थी। इनमें प्रोपेगंडा सहित माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित किताबें थी। कुछ किताबों के बारे में कहा जाता है कि इनमें एंटी ग्रेविटी और टाइम ट्रैवल के गुप्त सिद्धांत दर्ज थे। ये 9 लोग विश्व के कई स्थानों में फैले थे। सबसे आश्चर्य की बात है कि इनमें से कई विदेशी भी थे। sabhar : bhaskar.com

खास है एप्पल टीवी का सीरी फीचर और रिमोट कंट्रोल

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गैजेट डेस्क। एप्पल कंपनी ने 9 सितंबर के इवेंट में आईफोन के दो मॉडल्स के साथ कुल 5 प्रोडक्ट्स लॉन्च किए लेकिन जिस प्रोडक्ट ने अपनी तरफ लोगों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा वो है एप्पल टीवी। * क्या है एप्पल टीवी- एप्पल टीवी एक तरह का डिजिटल मीडिया प्लेयर या सेट टॉप बॉक्स है। ये दिखने में बहुत छोटा है। इंटरनेट से कनेक्ट होने पर यह डिवाइस टीवी स्क्रीन पर इंटरनेट से वीडियो स्ट्रीम कर सकता है। आसान शब्दों में कहें तो इसकी मदद से इंटरनेट के लाइव टीवी चैनल्स और मूवी वेबसाइट्स, जैसे नेटफ्लिक्स और HBO की फिल्मों के अलावा ऑनलाइन टीवी शो और वीडियो टीवी पर देखे जा सकते हैं। एप्पल टीवी के जरिए स्ट्रीम किए गए कंटेंट की क्वालिटी बहुत अच्छी होती है। TECH GUIDE: प्रचलित टेक टर्म्स और उनके मतलब * क्या हैं फीचर्स- कंपनी की ये एप्पल टीवी ऐप के जरिए काम करेगी। ये टच सरफेस रिमोट कंट्रोल के साथ आएगी। इस रिमोट पर ग्लास टच सरफेस के जरिए यूजर को म्यूट बटन, डिस्प्ले बटन, सिरी बटन, प्ले/पॉज, वॉल्यूम जैसे फीचर्स मिलेंगे। इस टीवी को एप्पल की दूसरी डिवाइस जैसे आईफोन, आईपैड यहां तक की एप्पल पेंसिल के जरिए भी ऑपरेट

रोबोट से भी सेक्स करेगा इंसान?

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ज़ी मीडिया ब्यूरो नई दिल्ली: एक मशहूर वैज्ञानिक के किए गए दावों के मुताबिक अगले 50 साल में इंसान न सिर्फ रोबोट से प्रेम करने लगेगा बल्कि उससे यौन संबंध बनाना भी बेहद आम बात हो जाएगी। डॉ. हेलेन ड्रिसकॉल के मुताबिक जिस तेजी से तकनीक का विकस हो रहा है उससे यह मुमकिन है कि वर्ष 2070 तक दो मानवों के बीच बनने वाले शारीरिक संबंधों को पिछड़ेपन की निशानी माना जाने लगे। गौर हो कि कई देशों में लोग इंसानों की तरह दिखने वाले पुतलों को या सेक्स डॉल्स को अपने सेक्स पार्टनर के तौर पर खरीद रहे हैं। आने वाले वक्त में ऐसे सेक्स रोबोट बनाए जा सकते हैं जो न सिर्फ इंसानों की तरह दिखेंगे बल्कि आपसे बात कर सकेंगे और आपकी हरकतों को भांप कर उसी मुताबिक व्यवहार भी कर करेंगे। डॉ ड्रिस्कॉल के मुताबिक यह उन लोगों के लिए बहुत काम का साबित होगा जिनके साथी की मौत हो चुकी है या जो अकेले रहते हैं क्योंकि कोई भी साथी न होने से तो बेहतर रोबोट साथी होना ही है। यहां तक कि लोग इनसे सच में प्यार भी कर बैठेंगे। रोबोट के बारे में यह बात हमेशा से चर्चा का विषय रही है कि रोबोट इंसान की तरह ही सबकुछ कर सकते है। इ