ऐसी बात नहीं कि पोर्न कोई आज सामने आया है। इसका अस्तित्व लंबे समय से समाज में है। प्रिंटिंग प्रेस की इजाद के बाद अश्लील कहानियां पूरी दुनिया में छापी जाने लगीं। इनका एक बड़ा बाज़ार सामने आया। कलर फोटोग्राफी और कलर प्रिंटिंग की शुरुआत के बाद तो पोर्न मैगज़ीनों की बाढ़-सी आ गई। दुनिया के सभी देशों में ऐसी मैगज़ीन्स का प्रकाशन शुरू हो गया। साथ ही, पोर्न फ़िल्मों का भी बड़े पैमाने पर कारोबार शुरू हुआ। ऐसी फिल्में और लिटरेचर ज्यादातर देशों में प्रतिबंधित है, पर चोरी-छुपे इनका प्रसार बड़े पैमाने पर जारी है।पोर्न में प्राय: सबकी रुचि होती है। पुरुष हो या महिलाएं, किशोर हों या जवान, अधेड़ हों या बूढ़े, सभी पोर्न देखते हैं। कहा जाता है कि इंटरनेट पर सबसे ज्यादा पोर्न साइट्स सर्च की जाती है। हालत तो ये है कि अब बच्चे भी इंटरनेट पर पोर्न देखने लगे हैं। पिछले दिनों ख़बर आई थी कि ब्रिटेन के लेंडयूडनो में एक 10 साल के बच्चे ने पोर्न फिल्में देखने के बाद 7 साल की एक लड़की का रेप कर दिया था। यह कोई पहली घटना नहीं है। पोर्न देखने के बाद काफी लोग सेक्शुअल क्राइम करते पकड़े गए हैं। पूरी दुनिया में पोर्न एडिक्शन एक समस्या बनती जा रही है।इंटरनेट के आने के बाद तो इस क्षेत्र में तहलका ही मच गया है। आज ये कंटेंट मुफ्त में ऑनलाइन उपलब्ध है। इसके दुष्प्रभावों को लेकर मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्री और चिकित्सक गंभीर चर्चाओं में लगे हैं। पोर्न एडिक्शन की समस्या कई देशों में इतनी गंभीर हो चुकी है कि इससे मुक्ति के लिए कई देशों में रिहैब तक चलाए जा रहे हैं। यहां यह जानना जरूरी है कि लोग आख़िर पोर्न क्यों देखते हैं।यह जानने के पहले कि लोग पोर्न क्यों देखते हैं, यह जानना जरूरी होगा कि पोर्न है क्या। इसकी परिभाषा के संबंध में विद्वानों में एक राय नहीं है। उनका मानना है कि इरॉटिका और पोर्नोग्राफी में फ़र्क किया जाना चाहिए। वहीं, कुछ किताबें सेक्स और यौन संबंधों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी देती हैं, जैसे महान प्राचीन भारतीय ग्रंथ कामसूत्र। इसे किसी भी रूप में पोर्न की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।पोर्नोग्राफी का शाब्दिक अर्थ है - वेश्या के संबंध में लेखन। लेकिन समय के साथ इसका अर्थ बदल गया। वेबस्टर डिक्शनरी के अनुसार पोर्नोग्राफी का मतलब है, "यौन व्यवहार का ऐसा चित्रण जो उत्तेजना पैदा करे।" 'कामसूत्र' में यौन व्यवहार के बारे में विस्तार से लिखा गया है, पर मुख्यत: इसका प्रयोग शिक्षा संबंधी उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा। वहीं, पोम्पेई के वेश्यालयों की दीवारों पर विविध मुद्राओं में मैथुनरत जोड़ों की पेंटिंग लगाई जाती थी, ताकि शर्मीले ग्राहकों को उत्तेजित किया जा सके। प्राचीन यूनान में सेक्शुअल इंटरकोर्स की छवि बच्चों के खाने की प्लेटों के तल पर चित्रित की जाती थी। यही नहीं, वहां गलियों के नुक्कड़ों पर फैलिक मूर्तियां लगाई जाती थीं, जहां औरतों घुटनों के बल बैठकर गर्भधारण के लिए प्रार्थनाएं करती थीं। इसे धार्मिक मान्यता प्राप्त थी।यह माना जाता है कि पोर्न का इस्तेमाल मुख्य तौर पर पुरुष करते हैं। यह सच है। कई शोधों में पाया गया है कि औरतों की तुलना में पुरुष सेक्स में अधिक रुचि रखते हैं। पुरुष महिलाओं के मुकाबले अधिक हस्तमैथुन करते हैं और पोर्न जैसी 'प्लेज़र टेक्नोलॉजी' को काफी पसंद करते हैं। पर बहुत से मनोवैज्ञानिक इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। विकासवादी मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों को जन्म देने और उनके लालन-पालन में लगे होने के कारण औरतों को वक़्त कम मिलता है, लेकिन अगर उन्हें पोर्न देखने का समय मिले तो वो भी इसमें पर्याप्त रुचि लेती हैं।