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जुलाई, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दुनिया के पहले बिजली से चलने वाले विमान

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लंदन: विश्व के पहले पूरी तरह से बिजली चालित विमान ने आकाश में सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस विमान को बनाने वाली कंपनी एयरबस ने बताया है कि यह विमान हवाई यात्रा की लागत में एक तिहाई से अधिक तक की कमी ला सकता है। ‘ई फैन’ के नाम वाले प्रयोग के तौर पर उड़ाए गये इस छोटे विमान ने दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में बौर्डिओक्स के निकट एक हवाई-अड्डे से उड़ान भरी और यह हरित, शांतिपूर्ण और सस्ती हवाई यात्रा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। एयरबस द्वारा निर्मित ई फैन की लंबाई 19 फुट से कुछ अधिक है और इससे एक हेयर ड्रायर से थोड़ा ही अधिक शोर होता है। 120 लिथियम आयन बहुलक बैटरी से युक्त इस विमान ने पिछले महीने 10 मिनट से अधिक समय तक उड़ान भरी और बिना रीचार्ज के यह विमान लगभग एक घंटे तक आसमान में उड़ान भर सकता है। एक वेबसाइट के मुताबिक एयरबस ने बताया है कि ई फैन की एक घंटे की व्यावसायिक उड़ान में केवल 16 अमेरिकी डॉलर की लागत आएगी जबकि इसी आकार के पेट्रोल से चलने वाले विमान पर 55 अमेरिकी डॉलर की लागत आती है। (एजेंसी) sabhar : http://zeenews.india.com/

स्मार्टफ़ोन पहचानेगा कैंसर का रोग

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इसराइल में शोधकर्ता एक ऐसा स्मार्टफ़ोन विकसित कर रहे हैं जो शरीर में कैंसर के रोगों की पहचान कर सकेगा. चार सौ डॉलर (क़रीब 24,000 रुपये) की क़ीमत का यह स्मार्टफ़ोन उपकरण संभावित कैंसर की पहचान और उसका विश्लेषण करने में सक्षम होगा. स्मार्टफ़ोन से ली गईं तस्वीरें उपयोगकर्ता द्वारा जांची जाती हैं और इसके बाद एक पेशेवर द्वारा पुनरीक्षण के लिए इन्हें अपलोड किया जाता है. इस उपकरण से हरे रंग का प्रकाश निकलता है, जो कैंसर की कोशिकाओं को अलग रंग में दिखाता है. इसमें लगा बड़ा लेंस त्वचा पर संभावित कैंसर और रक्त आपूर्ति की जगहों की तस्वीर लेता है. पेशेवर विश्लेषणकर्ताओं द्वारा इन त्रिआयामी तस्वीरों का विश्लेषण किया जाता है. मोबाइल ओसीटी के सीईओ एरियल बेरी के अनुसार, ''हम चाहते हैं कि इस उपकरण से दुनिया के किसी भी कोने में स्थित कोई भी व्यक्ति इन तस्वीरों को ले सके और उनका विश्लेषण किया जा सके.'' एरियल बेरी का कहना है कि ''हमारा मकसद है कि लोग अपनी जिंदगी को सुरक्षित रख सकें.''sabhar :http://www.bbc.co.uk/

कुंडलिनी जागरण से जुड़ा यह रहस्य चौंका देगा आपको

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बहुत से लोग कहते सुने जाते हैं कि मेरी कुंडलिनी जाग्रत है, या जाग रही है। स्वात्माराम योगी के अनुसार योग साधना में लगे दस में से आठ लोगों को लगता है कि उनकी कुंडलिनी जाग रही है। लेकिन क्या यह सच है? इस विषय में की गई खोज जो यह बताती है कि ज्यादातर दावे खोखले ही हैं। लेकिन वे गलत भी नहीं है। योगविद्या केंद्र अनुराधापुर (महाराष्ट्र) में शोध प्रयोग और अनुसंधान कर रहे योगी का कहना है कि जिन्हें कुंडलिनी जागरण का अनुभव होता है, वह सही इस मायने में है कि साधना के दौरान सचमुच ऐसा लगता है। कुछ लोग साधना करने का अभिनय करते या आधे अधूरे मन से इस मार्ग पर चलते हैं। वे भी इस तरह के अनुभवों का दावा करने लगते हैं। लेकिन कई साधकों को अनुभूति होती है, पर वह प्रतीती मायावी ही होती है। योग के पुराने ग्रंथ हठयोगप्रदीपिका के मार्ग पर चलते रहने का आदेश देते हुए गुरु से उस ग्रंथ के लेखक का ही नाम दिए जाने के बाद 1968 में इसी काम में लग गए योगी का कहना है कि जिसकी भी कुंडलिनी जाग्रत हो जाती है, और जब भी होती है तो वह असाधारण घटना होती है। एक दायरे में साधना कर रहे योगियों को पता चल जाता है कि किसी

फेसबुक की Internet.org सर्विस जाम्बिया में शुरू, मुफ्त मिलेगा इंटरनेट

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न्यूयॉर्क।  इंटरनेट को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने की मुहिम में  फेसबुक  एक कदम आगे बढ़ गया है। फेसबुक के Internet.org प्रोजेक्ट को जाम्बिया में लॉन्च कर दिया गया है।    Internet.org सर्विस ऐप के जरिए जाम्बिया की एयरटेल यूजर्स को मुफ्त इंटरनेट सुविधा दी जाएगी। इस सर्विस के जरिए इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को कोई डाटा चार्ज नहीं देना होगा। यह उन इलाकों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, जहां आज भी इंटरनेट उपलब्ध नहीं है।  फेसबुक, दुनियाभर के कई मोबाइल ऑपरेटर्स के साथ मिलकर इस सर्विस को शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है।    इसके जरिए एक्युवैदर,  गूगल  सर्च, विकीपीडिया, जॉब सर्च और हेल्थ इन्फोर्मेशन जैसी सर्विसेज का इस्तेमाल किया जा सकेगा। फेसबुक ऐप व इसकी मैसेंजर सर्विस भी इसमें शामिल है। यह ऐप एंड्राइड फोन्स के अलावा सामान्य मोबाइल्स में भी इंस्टॉल की जा सकेगी, जिनका इस्तेमाल ज्यादातर जाम्बिया निवासी करते हैं।    13 मुफ्त सर्विसेज के अलावा अगर यूजर्स किसी अन्य लिंक पर क्लिक करता है तो उसकी स्क्रीन पर 'डाटा चार्ज' का मैसेज दिखाई देगा। sabhar :http://w

साल में एक बार खुलता है नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर, नागदेव के होते हैं दर्शन!

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इंदौर/उज्जैन. हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है। हिंदू परंपरा में नागों को भगवान का आभूषण भी माना गया है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का। इसकी खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नागदेव स्वयं मंदिर में मौजूद रहते हैं। नागपंचमी 1 अगस्त को है। ऐसे में 31 जुलाई की रात 12 बजे नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पट खुलेंगे तथा 1 अगस्त की रात 12 बजे तक दर्शन होंगे। नागचंद्रेश्वर के दर्शन को आने वाले आम श्रद्धालु रात 10.30 बजे तक ही दर्शन की लाइन में लग सकेंगे। डेढ़ से दो घंटे में दर्शन :  नागपंचमी पर ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में प्राचीन श्री नागचंद्रेश्वर महादेव के सामान्य एवं वीआईपी मार्ग से श्रद्धालु के लिए प्रशासन ऐसी व्यवस्था कर रहा है कि डेढ़ से दो घंटे में दर्शन हो जाएं। वर्ष में एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के लिए इस बार भी प्रशासन को देशभर से करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालु के उमडने की संभावना

ट्यूमर से लड़ने में सक्षम नैनो पार्टिकल तैयार

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न्यूयॉर्क। प्राण घातक रोग कैंसर से लड़ने के प्रयास में शोधकर्ताओं ने अतिसूक्ष्म कण (नैनोपार्टिकल) तैयार किया है जिसमें कई तरह के एजेंट्स को समाहित किया जा सकता है। ये एजेंट्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय और मजबूत कर ट्यूमर पर हमला बोलते हैं। अमेरिका स्थित डर्टमाउथ कॉलेज के प्रोफेसर स्टीव फीरिंग ने कहा, अब तक के सभी शोध से अलग हमने प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने के लिए नैनोपार्टिकल का इस्तेमाल किया है। नैनोपार्टिकल की सबसे रोमांचक बात यह है कि छोटा होने के बावजूद इसमें कई एजेंट्स को शामिल किया जा सकता है। ट्यूमर प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला कर यह अपनी वृद्धि करता है। कैंसरीकृत कोशिकाओं के टूटने और फैलने पर भी प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य रहती है। यह शोध जर्नल नैनोमेडिसिन और नैनोबायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। sabhar :http://www.jagran.com/

खुशकिस्मत हैं हम कि ज़िंदा हैं, दो साल पहले सोलर फ्लेयर से बची धरती, नासा का खुलासा

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वाशिंगटन.  राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन ( नासा) ने एक सनसनीखेज रहस्योद्धाटन करते हुए कहा है कि 23 जुलाई 2012 को सूर्य पर आई एक शक्तिशाली सौर आंधी के दौरान विशाल सोलर फ्लेयर (सौर ऊर्जा की बहुत बड़ी मात्रा) या कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) की टक्कर से पृथ्वी बच गई. पिछले 150 सालों के दौरान यह सबसे बड़ी सौर आंधी मानी जा रही है. अमेरिका के कोलराडो विश्वविद्यालय के डैनियल बेकर ने कहा, यदि ऐसा हुआ होता, तो हम अबतक टुकड़े चुन रहे होते. उत्क्षेपण (इजेक्शन) इतना शक्तिशाली था कि हम फिर से आदिम युग में पहुंच गए होते. एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसी आपदा से बचने में हम भाग्यशाली रहे, जो बिल्कुल हमारे सिर पर थी. सूर्य का रुख पृथ्वी से थोड़ा सा हटने के कारण ही ऐसा संभव हो पाया. अगर ऐसा एक सप्ताह पहले हुआ होता, तो परिणाम कुछ और ही होता. बेकर कहते हैं, पृथ्वी और इसके निवासी इस बात के लिए खुशकिस्मत हैं कि 2012 का उत्क्षेपण एक सप्ताह पहले नहीं हुआ. वैज्ञानिकों ने कहा कि प्रत्यक्ष सीएमई में इतनी ताकत होती है कि वह संचार के तमाम नेटवर्क, जीपीएस और विद्युत ग्रिड खत्म कर सकता है, ज

जिनके एक इशारे से इंद्र देव बादल लेकर आ जाते

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सावन आ चुका है लेकिन आसमान से सूर्य देव आग उगल रहे हैं। प्यासी धरती पानी-पानी चिल्ला रही है लेकिन इन्द्र देव हैं की पानी नहीं बरसाने की कसम खाए बैठे हैं। ऐसे में उस संत की याद आती है जिनके एक इशारे से इंद्र देव बादल लेकर आ जाते और झमाझम बरसात होने लगती थी। इस महान संत का वास्तविक नाम 'शिवरत्न पंडित' था। इनका जन्म गोरखपुर के दीपगढ़ गांव में हुआ था। 15 वर्ष की उम्र में ही इन्होंने गृह त्याग कर दिया और काशी में आकर रहने लगे। यहीं तप साधना द्वारा इन्होंने ऐसी सिद्घियां हासिल कर ली कि इनके एक संकेत मात्र से खिली हुई धूप में भी बरसात होने लगती थी। यह महान संत काशी में कच्चा बाबा के नाम से प्रसिद्घ हुए। कच्चा बाबा के नाम से मिली प्रसिद्घि का कारण यह था कि इन्हें जो भी चावल, दाल, आटा मिलता उसे बिना पकाए कच्चा ही खा जाते थे। इस महान संत ने 84 साल की उम्र में 1914 ईश्वी में देहत्याग किया। अगर यह संत आज होते तो जिस तरह से पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है वह हाल नहीं होता। sabhar : http://www.amarujala.com/

तीर्थों में अद्भुत शक्ति आखिर कहां से और कैसे आती है

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ज्योतिर्मय पृथ्वी पर कुछ स्थान ऐसे हैं जो व्यक्ति की ऊर्जा को ऊपर की ओर खींचते हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो नीचे की ओर ले जाते है। चेतना को अनायास ही ऊपर ले जाने वाले स्थान तीर्थ कहे जाते हैं। योग को विज्ञान की कसौटी पर कसने वाले विज्ञानियों का मानना है कि पृथ्वी पर कुछ स्थान तो स्वयंसिद्ध हैं। कुछ प्रयोगों और व्यवस्थाओं के जरिए संस्कारित किए जाते हैं। प्रसिद्ध थियोसोफिस्ट बेंजामिन जूइस के अनुसार भारत में इस तरह की जागृत जगहों की भरमार है। हिमालय को इस तरह के स्थानों का ध्रुव प्रदेश बताते हुए उन्होंने दावा किया कि हजार साल बाद मैडम ब्लैवटस्की, लेडबीटर, एनीबिसेंट आदि सिद्ध आत्माओं ने हिमालय के इन सिद्धकेंद्रों की खोज की। वहां से आध्यात्मिक ऊर्जा की तरंगे भी फैलाई। कोयंबटूर के ईशा योग फाउंडेशन के अऩुसंधान कर्ताओं का कहना है कि पृथ्वी पर उस तरह के नैसर्गिक केंद्रों की भरमार है। अगर आप ऐसे स्वयंसिद्ध केंद्र पर हों तो ऊर्जा अपने आप ऊपर की तरफ जाएगी। और इस केंद्र या स्थान से दूर जाने पर चेतना के उत्थान की विशेषता कम होती जाती है। ईशा फाउंडेशन के अनुसार भूमध्य रेखा के उत्तर और दक्षिण में 33 ड

आत्महत्या के लिए बदनाम है मेट्रो स्टेशन पर है भूतों का साया

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भूत कभी भी और कहीं भी हो सकते हैं। चाहे वह विराना हो या भीड़ भार वाला मेट्रो स्टेशन। यहां हम जिस मेट्रो स्टेशन की बात कर रहे हैं वह किसी दूसरे देश का नहीं बल्कि भारत का ही एक मेट्रो स्टेशन है। इस स्टेशन पर भूतों का ऐसा साया है कि कई लोग ट्रैक पर कूद कर जान दे चुके हैं। यह मेट्रो स्टेशन कोलकाता में स्थित है। इस स्टेशन का नाम है रवीन्द्र सरोवर। इस मेट्रो स्टेशन के बारे में कहा जाता है कि यहां पर भूतों का साया है। रात 10:30 बजे यहां से आखिर मेट्रो गुजरती है। उस समय कई मुसाफिर और मेट्रो के ड्राइवरों ने भी इस चीज का अनुभव किया है कि मेट्रो ट्रैक के बीच अचानक कोई धुंधला साया प्रकट होता है और पल में ही गायब हो जाता है। कोलकाता का यह मेट्रो स्टेशन यहां का सुसाइड प्वांट माना जाता है। कारण यह है कि यहां पर कई लोगों ने ट्रैक पर कूद कर आत्माहत्या की है। वैसे भूत प्रेतों में विश्वास नहीं करने वाले लोग यह मानते हैं कि यह मेट्रो स्टेशन टॉलीगंज टर्मिनल के बाद पड़ता है जहां अधिकांश मुसाफिर उतर जाते हैं। इसलिए यहां अधिक भीड़ नहीं रहती है। यही कारण हो सकता है कि इस मेट्रो को सुसाइड प्वांट और भूतहा

जब आपका कपड़ा हर सेकेंड बदलेगा अपना रंग

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वाशिंगटन : कल्पना कीजिए कि रंग बदलने वाले आपके कपड़े आपको गिरगिट की तरह रंग बदलने जैसा बना दें तो आपको कैसा लगेगा। बुडापेस्ट के एक कपड़ा डिजायनर ने एक ऐसा कपड़ा बनाने का दावा किया है जो सेकेंडों में रंग बदल सकता है। ज्यूडिट एस्टर कारपैटी की अध्यक्षता वाली इस परियोजना के तहत, कपड़े में आवाज और सेंसर लगाया गया है। ‘गिजमोडो’ ने खबर दी कि इस परियोजना में 12 वोल्ट आपूर्ति के साथ एक आर्डूइनो और चार इंडस्ट्रीयल 24 वोल्ट डीसी बिजली आपूर्ति नियंत्रित करने वाले 20 कस्टम पिंट्रिड सर्किट बोर्ड शामिल हैं जो निक्रोम तार वाले दो टेक्सटाइल वूवन को गर्म करे। कारपैटी ने कहा, मेरा इरादा यह खोजने का था कि मैं डिजिटल मीडिया की दुनिया को वस्त्र कला में कैसे लेकर आउं। (एजेंसी) sabhar :http://zeenews.india.com/

एक स्थूल शरीर का उपयोग एक से अधिक आत्माएँ कर सकती है

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एक स्थूल शरीर का उपयोग एक से अधिक आत्माएँ कर सकती है. पूर्व जन्म याद आने को जाति स्मरण कहा जाता है. शरीरों को परिभाषित करने का अपना-अपना ढंग हैं. जैन आगम के अनुसार संसारिक जीव के पाँच शरीर हो सकते हैं, ये शरीर हैं: 1. औदारिक़ 2. वैक्रियक 3. आहरक 4. तैजस और 5. कार्मणा . औदारिक़ को छोड़कर शेष सभी चार शरीर संपूर्ण ब्रह्मांड मे बे रोक-टोक गमन कर सकते हैं. वैदिक धर्मानुसार शरीर दो हैं, एक सूक्षम शरीर और दूसरा स्थूल शरीर. जैन धर्म द्वारा परिभाषित औदरिक शरीर तो स्थूल शरीर हुआ, और शेष चार शरीर सूक्ष्म शरीर के भेद हैं. इस प्रकार दोनों धर्मों में लगभग समानता कहीं जा सकती है. प्रत्येक संसारिक के कम से कम दो शरीर तैजस और कार्मणा अवश्य होते हैं और अधिक से अधिक चार शरीर एक साथ हो सकते हैं. जो हमे दिखाई देता है वह औदारिक़ शरीर है. चौथा शरीर वैक्रियक और आहरक में से हो सकता है. औदरिक शरीर ही स्थूल शरीर है. किसी भी वस्तु को हम पहिले पॉलिथीन की पन्नि में रखते हैं और फिर डब्बे में. जिस शरीर को लिए हम आम लोगो को नज़र आते हैं वह स्थूल शरीर ही तो है. सामान्यत: हम स्थूल शरीर को ही देख सकते हैं, शेष शर

जेनेटिक मैपिंग से इलाज

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वैज्ञानिकों ने इंसानी डीएनए में ऐसे 100 जगह ढूंढ निकाले हैं जिनके कारण व्यक्ति में शिजोफ्रेनिया जैसी बीमारी पैदा हो सकती है. इससे बीमारी के कारणों से पर्दा उठा. इस तरह की जेनेटिक मैपिंग से नए इलाज की संभावनाएं पैदा होती हैं. हालांकि उनमें भी अभी कई साल लग जाएंगे. लेकिन नए नतीजों से ठोस आनुवंशिक सबूत मिले हैं जो इस थ्योरी को पक्का करते हैं कि प्रतिरोधक प्रणाली और इस बीमारी के बीच कैसा जुड़ाव है. शिजोफ्रेनिककी जेनेटिक मैपिंग में दुनिया भर से 100 वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया. इस सबसे बड़े शोध से पहले वैज्ञानिकों को सिर्फ कुछ हिस्से पता थे, जो जेनेटिक कारणों की ओर इशारा करते थे. जेनेटिक मैपिंग से मदद की उम्मीद शोध में डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के आनुवंशिक कोड देखे गए और इनमें से 37,000 को ये बीमारी होने की आशंका थी. शोधकर्ताओं ने डीएनए में 180 मार्कर ढूंढ निकाले, जिनमें से 83 ताजा शोध में पता लगे हैं. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि और मार्कर पता चल सकते हैं. शोध के सह लेखक स्टीव मैककैरल हार्वर्ड और एमआईटी में जेनेटिक संस्थान के निदेशक हैं, "यह आनुवंशिक पर्दाफाश है, शिजोफ्रेनिया ए

ALIENS के अस्तित्व को लेकर वैज्ञानिक कर रहे माथापच्ची

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एलियन यानी ऐसे जीव जो पृथ्वी के बाहर किसी दूसरे ग्रह पर रहते हों। पर एलियन होते भी हैं या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है। एलियंस की मौजूदगी पर दशकों से रिसर्च होती रही हैं, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एलियंस हैं भी या नहीं। यदि हैं तो वे कहां रहते हैं? वे तकनीकी रूप से कितने सक्षम हैं? ऐसे सवालों के जवाब पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए चुनौती है। किसी दूसरे ग्रह पर जीवन की तलाश पिछले छह दशकों से तो बेहद तेज हो गई है। इस बारे में कई ठोस सबूत तो मिले हैं, लेकिन अब तक कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया है।  कई जगह है मौजूदगी की उम्मीद केवल मंगल ग्रह ही ऐसा नहीं है, जहां एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल लाइफ (यानी दूसरे ग्रह पर जीवन) की संभावना हो। हमारे सौरमंडल में कई ऐसे स्थल हैं, जो रहने योग्य हो सकते हैं। इनमें जूपिटर और शनि के बर्फीले चंद्रमा, यूरोपा आदि शामिल हैं, जहां पर जीवन का समर्थन करने में सक्षम सर्फेस ओशियन्स मौजूद हो सकते हैं। वैसे वैज्ञानिकों के अनुसार हमारे सौरमंडल में शनि ग्रह का चंद्रमा टाइटन और सोलर सिस्टम से बाहर का ग्रह ‘ग्लीज 581जी’ में जीवन होने की सबसे अधिक संभावना

सड़कों पर तेज दौड़ने वाली यह है भविष्य की ट्राम, देखिए तस्वीरें

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इंटरनेशनल डेस्क।  रूस का ये नया ट्राम किसी साइंस फिक्शन मूवी से कम नहीं है। इस अति आकर्षक ट्राम को रूसी कंपनी यूवीजेड ने डिजाइन किया है। एलेक्सी मास्लोव Alexei Maslov इसके डिजाइनर हैं। इसे रशिया वन या आर1 नाम दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यूवीजेड ने इस खूबसूरत ट्राम को अगले 20-50 साल को ध्यान में रख कर डिजाइन किया है।    एडवांस तकनीक और कम्पोजिट मैटीरियल के इस्तेमाल के चलते आर 1 के हर पैनल बड़ी आसानी से बदला जा सकेगा। वहीं, ट्राम की नुकीली नाक ड्राइवर को बेहतर व्यू देगी, जिससे पदयात्रियों से भिड़ने की संभावना न के बराबर रहेगी।   बैटमोबाइल (कॉमिक सुपरहीरो बैटमैन द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला कार) सरीखा दिखने वाला ये ट्राम जितना एडवांस्ड बाहर से दिखता है, उतना ही हाईटेक अंदर से भी है। वाई-फाई, जीपीएस और कमाल की एलईडी लाइटिंग इसके इंटीरियर को ​चार-चांद लगाती हैं। एलईडी लाइटिंग की खासियत है कि ये मौसम के हिसाब से रोशनी देती है।   ये भी खास डायनैमिक एलईडी लाइटिंग के अलावा एयर कंडीशन, एंटी बैक्टीरियल हैंड रेलिंग के अलावा मोबाइल चार्ज करने के लिए यूएसबी 3.0 पोर्ट

भगवान श्रीकृष्ण ने क्यों कहा है कि 'हर वस्तु में होता है आश्चर्य'

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स्वामी सुखबोधानंद 'भारतीय दर्शन कहता है कि सफलता ही सब कुछ नहीं है बल्कि व्यक्ति को संतुष्टि भी चाहिए। सफलता के बावजूद जीवन में असफलता का एहसास बना रहेगा क्योंकि जीवन में संतुष्टि से ही आनंद आता है।' हम जो भी करते हैं वह क्रिया होना चाहिए, उसमें किसी काम को करने की इच्छा झलकनी चाहिए। अगर हम कोई काम प्रतिक्रिया स्वरूप करते हैं तो जीवन को नरक बना लेते हैं। छोटा सा उदाहरण देखिए, हम गुड इवनिंग क्यों कहते हैं? इसलिए कि आते-जाते हम मिलते हैं तो एकदूसरे का अभिवादन करते हैं। तो क्या यह औपचारिक है? शायद नहीं, क्योंकि इसका मतलब होता है। मतलब है कि यह शाम सुंदर है और अगर सुंदर नहीं है तो हम इसे सुंदर बना सकते हैं। लेकिन अगर हम शब्दों के बारे में सोचते नहीं हैं और उन्हें बस यंत्रवत उच्चारते जाते हैं तो जीवन में आश्चर्य और आनंद नहीं रहता। हम बस गुड इवनिंग, गुड मार्निंग कहते हैं लेकिन हमारा आशय सुबह-शाम को सुंदर बनाने का नहीं होता। तब हम सुबह-शाम को महसूस नहीं कर रहे हैं। हम प्रतिक्रिया स्वरूप गुड मार्निंग कह रहे हैं लेकिन गुड मार्निंग का अर्थ हमें

बलात्कारी को जलाने वाली ब्रा

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भारत के कुछ युवा इंजीनियरों ने मिलकर ऐसी इलेक्ट्रिक ब्रा तैयार की है जो बलात्कार जैसी घटनाओं में सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी. ब्रा को सोसाइटी हार्नेसिंग एक्विप्मेंट 'शी' नाम दिया गया है. दिसंबर 2012 में दिल्ली में एक छात्रा के साथ हुए बलात्कार कांड ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा. महिलाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत हजारों लोगों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया. इस हादसे के बाद ही बलात्कार के मामलों में कानूनों को सख्त किया गया. लेकिन इस तरह की घटनाएं थमी नहीं हैं. इस पूरे दौर ने 22 साल की इंजीनियरिंग की छात्रा मनीषा मोहन को भी प्रभावित किया जिन्होंने इलेक्ट्रिक ब्रा तैयार करने का फैसला किया. मनीषा और उनके दो साथियों ने इस बारे में सर्वे किया और इलेक्ट्रिक शॉक देने वाली शी ब्रा तैयार करने से पहले कई और मॉडल बनाने कोशिश की. उन्होंने डॉयचे वेले को बताया कि उनके इस काम के लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रोत्साहन मिल रहा है. जला सकती है 'शी' ब्रा में दबाव के खिलाफ सेंसर लगे हैं. ये इलेक्ट्रिक सर्किट से जुड़े हुए हैं जो 3,800 किलो वॉट तक का इलेक