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शनिवार, 30 अगस्त 2014
चीन का सबसे अमीर गांव, जहां हर आदमी कमाता है 80 लाख रुपए सालाना
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जियांगयिन। आलीशान बंगला, महंगी कार, अच्छी शिक्षा, हर तरह की सुख-सुविधाएं और वो भी मुफ्त में। ये एक सपना हो सकता है, लेकिन चीन के हुआझी गांव में रहने वाले लोगों के लिए ये कोई सपना नहीं, बल्कि हकीकत है। ये गांव चीन के जियांगयिन शहर के पास है और इसे पूरे देश में सबसे अमीर कृषि गांव कहा जाता है। इस गांव में रहने वाले सभी 2000 रजिस्टर्ड लोगों की सालाना आमदनी एक लाख यूरो (करीब 80 लाख रुपए) है।
हुआझी गांव आज एक सफल समाजवादी गांव का मॉडल पेश कर रहा है। हालांकि, शुरुआती दौर में गांव की तस्वीर ऐसी नहीं थी। 1961 में स्थापना के बाद यहां कृषि की हालत बहुत खराब थी, लेकिन गांव की कम्युनिस्ट पार्टी कमिटी के पूर्व अध्यक्ष रहे वू रेनवाओ ने इस गांव की सूरत ही बदल दी।
वू ने कैसे बदली गांव की सूरत
वू ने औद्योगिक विकास की योजना के लिए पहले गांव का निरीक्षण किया और फिर एक मल्टी सेक्टर इंडस्ट्री कंपनी बनाई। उन्होंने सामूहिक खेती की प्रणाली का नियम बनाया। इसके साथ ही, 1990 में कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराया। गांव के लोगों को कंपनी में शेयरधारक बनाया गया।
मुफ्त में मिलती हैं सुविधाएं
गांव की स्टील, सिल्क और ट्रैवल इंडस्ट्री खास तौर पर विकसित है और इसने 2012 में मुख्य रूप से 9.6 अरब डॉलर का फायदा कमाया। गांव के लोगों के लाभ का हिस्सा कंपनी में शेयर होल्डर निवासियों के बीच बांटा जाता है। एक वेबसाइट के मुताबिक, उनके सकल वार्षिक आय का एक बड़ा हिस्सा यानी 80 फीसदी टैक्स में कट जाता है, लेकिन इसके बदले में रजिस्टर्ड नागरिकों को बंगला, कार, मुफ्त स्वास्थ्य सुरक्षा, मुफ्त शिक्षा, शहर के हेलिकॉप्टर के मुफ्त इस्तेमाल के साथ ही होटलों में मुफ्त खाने की सुविधा भी मिलती है।
50 साल के ज्यादा उम्र की महिलाओं और 55 साल से ज्यादा उम्र के पुरुषों को हर महीने की पेंशन के साथ ही चावल और सब्जियां भी दी जाती हैं। रजिस्टर्ड लोगों में गांव के वे लोग शामिल हैं, जो इसकी स्थापना के वक्त से ही यहां रह रहे हैं और कंपनी का हिस्सा हैं। इनके पास कंपनी में शेयरधारक होने के सर्टिफिकेट भी हैं। हालांकि, इनके अलावा यहां 20 हजार से ज्यादा शरणार्थी मजदूर भी हैं, जो पड़ोसी गांवों से आकर यहां रह रहे हैं।
हुआझी गांव सिर्फ समृद्ध ही नहीं है, यह देखने में भी बहुत आकर्षक है। देशी-विदेशी तकरीबन 5 हजार लोग रोज इस गांव में घूमने और इसे देखने आते हैं। इन्हें गांव में प्रवेश के लिए एंट्री फीस भी चुकानी पड़ती है। हालांकि, इसके बाद गांव में किसी भी जगह पर घूमने की कोई फीस नहीं है।
हाईटेक शहर से कम नहीं
ये गांव हाईटेक शहर से कम नहीं है। यहां 2011 में बनकर तैयार हुआ 74 माले का लॉन्ग्झी इंटरनेशनल होटल यहां की शान को और बढ़ा देता है। इस होटल को बनाने के लिए कोई कर्ज नहीं लिया गया है, बल्कि ये गांव के लोगों के सहयोग से ही तैयार हुआ है। इसके अलावा भी यहां सभी तरह की सुख-सुविधाएं मौजूद हैं।
sabhar :
http://www.bhaskar.com/
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