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रविवार, 3 जुलाई 2022

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शनिवार, 2 जुलाई 2022

मन पर चोट पहुंचना जरूरी ओशो

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  आध्यात्मिक वैज्ञानिक ओशो आचार्य रजनीश के नाम से भी जानते हैं ओशो में चेतनाके संबंध में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपनी बात रखी है ईश्वर क्या है हम कैसे खुश रह सकते हैं किस तरह से पराकाष्ठा को प्राप्त कर सकते हैं किस तरह की योग विधियां है की मन की परिकल्पना क्या है किस तरह से ऊर्जा का ट्रांस फॉर्म हो सकता है आदि विषयों पर काफी चर्चा किया है मौजूदा वीडियो मन को नियंत्रित करने केे लिए मन पर चोट पहुंचाने का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण व्यक्त्त किया है इस प्रकाार ओशो मनो वैज्ञानिक आध्यात्मिक वैज्ञानिक थे  मन विज्ञान का भारतीय अध्यात्म सामंजस्य था इसका विस्तृत चर्चा किया आज वैज्ञानिक भी अपने विज्ञान से प्रयोगोंं सिद्ध कर रहे हैं

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गुरुवार, 30 जून 2022

जीएसटी लगने से पेट्रोल डीजल सस्ता हो सकता है

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केंद्र सरकार की योजना है अगर जीएसटी के दायरे में डीजल पेट्रोल लाया जाए ₹30 सस्ता हो सकता है पेट्रोल डीजल की महंगाई से परिवहन पर असर पड़ता है जिससे से महंगाई दर में काफी वृद्धि हो जाती है महंगाई बढ़ने पर गरीबों के जेब का भी खाली हो जाती है मध्यमवर्ग असर डालता है इस वीडियो में जीएसटी लगाने से पेट्रोल-डीजल के दामों पर पर कितना असर पड़ेगा विस्तृत से बताया गया है

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बुधवार, 29 जून 2022

आर्मीनिया का एक ऐसा गांव बालिक स्त्री पुरुष को संभोग करने की पूरी छूट है

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https://youtu.be/Y3L0ZnlKiZk 

पूर्व सोवियत संघ के आर्मीनिया देश में एक ऐसा गांव है जहां अट्ठारह वर्ष ऊपर से स्त्री पुरुष आपसी सहमति से संबंध बनाने की छूट है यह छूट गांव बड़े बुजुर्गों ने युद्ध से खत्म हुए जनसंख्या के कारण उठाई थी बुजुर्गों नया छूट  दे दी थी कोई भी स्त्री पुरुष अपनी सहमति से संबंध बना सकता है करते वह 18 साल से ऊपर का हो यह प्रथा उस समय मजबूरी में दी गई थी परंतु आज के लोग इस  प्रथा को छोड़ना नहीं चाहते

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मंगलवार, 28 जून 2022

For loss weight

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सोमवार, 27 जून 2022

ऐतिहासिक झांसी का किला उत्तर प्रदेश में

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 झांसी का किला उत्तर प्रदेश में झांसी जिले में  बड़ी पहाड़ी पर स्थित है झांसी रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर दूर है निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर है इसका निर्माण राजा वीर  सिंह जूदेव 1606 से 27 मैं ओरछा के बलवंत नगर शहर बंगरा नामक चट्टानी पहाड़ी पर किया था जिसे वर्तमान में झांसी कहा जाता है इस किले के लिए 10 दरवाजे झांसी किले का निर्माण बुंदेला राजपूतों के प्रमुख ओरछा साम्राज्य के शासक वीर सिंह जूदेव बुंदेला ने 1613 में किया था मोहम्मद खान बंगश ने 1728 ने महाराजा छत्रसाल पर हमला किया पेशवा बाजीराव द्वारा उनकी जीत में मदद की गई समर्थन के लिए कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में छत्रसाल झांसी सहित अपने राज्य का एक हिस्सा पेशवा को दिया 1742 मैं नरोशंकर झांसी के सूबेदार बने अपने 15 वर्षों के शासन के दौरान उन्होंने झांसी के किले का विस्तार किया पेशवा ने 1957 में वापस बुलाया और माधव गोविंद और उनके बाद बाबूलाल कन्हाई झांसी के सूबेदार बने बाद में विश्वास राव लक्ष्मण ने 1766 से 1769  तक यह पद ग्रहण किया रघुनाथ राव दुतीय के बाद शिव राव रघुनाथ राव तृतीय के बाद बाल गंगाधर राव कोई  पुत्र नहीं था इनका विवाह मणिकर्णिका से हुआ था जो रानी लक्ष्मी बाई के नाम से प्रसिद्ध उन्होंने दामोदर राव को गोद लिया था बाद में अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुई थी

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शुक्रवार, 24 जून 2022

कृषि के महत्व पर चर्चा

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गुरुवार, 23 जून 2022

विश्व की आने वाली मंदी पर गिरजेश वशिष्ट की समीक्षा

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विश्व में मंदी आने वाली है वरिष्ठ पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ ने एक समीक्षा की है मेरे अनुसार उनका कथन सत्य है आने वाला समय मंदी का है जिस प्रकार अमेरिका अपने ब्याज दर बढ़ा रहा है भारत के शेयर मार्केट से पैसे अमेरिकी निवेशक ने निकालनी शुरू कर दिए हैं उसके परिणाम स्वरूप देश है देश भारत पर भी इसका असर पड़ेगा कृषि और मेडिकल क्षेत्र ही एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर मंदी का असर कम पड़ेगा अतः आप कोई प्लानिंग कर रहे हैं लोन वगैरह लेने की उस दिन तक रुक जाएhttps://youtu.be/P-aiiP0UIUAhttps://youtu.be/P-aiiP0UIUA

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पति को कैसे बनाया जाए 'जोरू का गुलाम'?

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Google के डेटा के मुताबिक, शादीशुदा महिलाएं सबसे ज्यादा सर्च करती हैं कि कैसे पता करें कि पति को क्या पसंद है! उनकी चॉइस क्या है और उन्हें क्या पसंद और नापसंद है! यह सवाल उनकी तरफ से काफी आम हैं! गूगल पर ये सवाल भी काफी बार पूछा जाता है कि शादीशुदा महिलाएं अपने पति का दिल कैसे जीतें, उन्हें किस तरह खुश करें! लेकिन एक सर्च हैरान करने वाला है, जानकर आप भी चौंक जाएंगे! पति को कैसे बनाया जाए 'जोरू का गुलाम'? शादीशुदा महिलाएं गूगल से पूछती हैं कि अपने पति को अपनी मुट्ठी में करके कैसे रखें, उन्हें 'जोरू का गुलाम' कैसे बनाएं! पत्नियां जानना चाहती हैं कि उन्हें अपने परिवार को बढ़ाने का फैसला कब लेना चाहिए और बच्चा पैदा करने का सही समय क्या हो सकता है! शादीशुदा महिलाएं ये सवाल भी पूछती हैं * महिलाएं जानना चाहती हैं कि शादी के बाद उन्हें अपने नए परिवार में किस तरह पेश आना चाहिए, वो उस परिवार, अपने ससुराल का हिस्सा कैसे बन सकती हैं! * अपने परिवार की जिम्मेदारी किस तरह उठाई जाएगी! * अपना खुद का बिजनेस शादी के बाद कैसे चलाना चाहिए और परिवार को बिजनेस के साथ कैसे हैंडल करना चाहिए!  Tags:     google Search History Married Woman Google Search how To See Google Search History  sabhar Govt Vacancy: शादीशुदा महिलाएं Google पर करती है ऐसी चीजें सर्च जिसकी कोई पति कभी उम्मीद भी नही कर सकता, आपको भी जानकर....sabhar https://govtvacancyjobs.com/viral-story/married-women-search-the-most-on-google-how-to-keep-husband-in-your-fist-google-search-result-283634

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बुधवार, 22 जून 2022

दुनिया में आ सकती है मंदी का दौर

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कोरोना महामारी और फिर रूस यूक्रेन युद्ध से बढ़ी महंगाई का असर केवल भारत पर ही नहीं बल्कि दुनिया का एकमात्र महाशक्ति कहा जाने वाला अमेरिका भी इस समस्या से जूझ रहा है वहां पर महंगाई का असर 40 सालों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है अमेरिकी प्रशासन में ब्याज दर बढ़ाने का कदम उठाया है विश्व के लगभग 137 देश आर्थिक मंदी के चपेट में आ रहे हैं खाने पीने की वस्तुओं का व्यापक कमी हो रही है मुद्रास्फीति चरम पर है इन सब चीजों से भारत होता है भारत का कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था कम खर्च शिक्षा सनातन संस्कृति पर आधारित होने के कारण भारत एक आर्थिक महाशक्ति बनने के तरफ अग्रसर है जहां आज विदेशों में अमेरिका जैसा मजबूत अर्थ शक्ति वाला देश मंदी की चपेट में आने को को तैयार है और दिवालिया होने की राह पर खड़ा है इससे भारतीय संस्कृति की झलक मिलती है हमें प्रकृति के नजदीक रहना चाहिए प्रकृति के सहयोग से कार्य करना चाहिए ना किअनाधिकृत रूप से प्रकृति का शोषण करें

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शनिवार, 18 जून 2022

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए देश का अग्रणी संस्थान है सीजीसी लांडरां

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इंजीनियरिंग की सबसे पुरानी शाखाओं में से एक है मैकेनिकल इंजीनियरिंग। आधुनिक समय में भी इसकी महत्ता बरकरार है, बल्कि समय के साथ इसकी डिमांड और बढ़ रही है। स्टीम इंजन के जमाने से लेकर आज की आधुनिक ऑटोमेशन-समर्थित मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की मांग कायम है और बढ़ रही है। यही वजह है कि इंजीनियरिंग फील्ड में जाने वाले छात्रों के लिए मैकेनिकल इंजीनियरिंग एक पसंदीदा विषय रहा है।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए देश का सर्वश्रेष्ठ संस्थान चुनने की बात आती है तो निर्विवाद रूप से चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज लांडरां सबसे अग्रणी है। सीजीसी लांडरा (पंजाब), न केवल स्टूडेंट्स को अभिनव आइडिया के साथ उद्योग और मार्केट की जरूरतों और डिमांड के अनुरूप तैयार करता है बल्कि दुनिया भर में प्रमुख मैकेनिकल इंजीनियरिंग कंपनियों में प्लेसमेंट के हिसाब से नवीनतम तकनीकी और व्यवहारिक अनुभव भी प्रदान करता है। इसकी वजह से स्टूडेंट्स मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी जनरेशन, ट्रांसपोर्टेशन, वेस्ट मैनेजमेंट, हेल्थ और एनवायरमेंट जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान देने में समर्थ होते हैं। सीजीसी लांडरां की यही विशेषताएं उसे देश के टॉप मैकेनिकल इंजीनियरिंग कॉलेजों में शुमार करती हैं। sabhar https://www.bhaskar.com/career/news/cgc-landran-is-the-countrys-leading-institute-for-the-study-of-mechanical-engineering-129946954.htm

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क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट करने वालों को अब हर रोज नया झटका लग रहा है

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क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट करने वालों को अब हर रोज नया झटका लग रहा है. वजह, कभी इन्वेस्टमेंट पर रिटर्न के मामले में बुलंदियों को छू रही मशहूर क्रिप्ट... https://www.aajtak.in/business/utility/story/cryptocurrency-investors-making-loss-bitcoin-down-20k-dollar-mark-ethereum-decline-too-tutk-1484140-2022-06-18

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गुरुवार, 9 जून 2022

संगीत चिकित्सा का साधन"..

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Copied... #संगीत_चिकित्सा का साधन".. क्योंकि #संगीत भी #चिकित्सा का साधन है.. इसी बात को ध्यान में रखते हुए.. मैं सोच रहा था कि.. क्यों न ग्रुप में.. थोड़ा सा स्थान.. *संगीत चिकित्सा* के लिए भी रखा जाये... इसके लिए मैंने सोचा है कि.. रोज रात्रि में सोने से पहले.. एक मधुर गीत ग्रुप में पेश किया जाये... ताकि उसे सुनकर दिनभर की थकान, दौड़धूप और चिक चिक की वजह से होने वाली मानसिक थकान और टेंशन आदि उड़न छू हो जाये.. और मधुर संगीत को सुनकर.. आप सबको थोड़ा सकून सा भी मिले.. मनुष्य... कामकाज की वजह से शारीरिक रूप से उतना नही थकता.. जितना कि वह मानसिक रूप से थक जाता है... आजकल की जीवन शैली ने हमे शारीरिक रूप से अनेक रोगों का शिकार बना ही दिया है.. लेकिन अगर ध्यान से देखा जाये तो हम शारीरिक रूप से बाद में बीमार हैं.. पहले हम मानसिक रोग का शिकार हैं.. और.. इस तरफ किसी का ध्यान भी नही जा रहा है.. बीमारियों की असली वजह यह है कि हमारा मस्तिष्क ही हमारे पूरे शरीर के कार्यों और अंगों पर नियंत्रण रखता है.. और यही सबसे ज्यादा हताश और निराश रहता है.. यही हमारे शरीर मे रक्तचाप और हार्मोन्स आदि पर भी नियंत्रण रखता है... मस्तिष्क के रिलैक्स न रहने की वजह से ही अन्य शारीरिक रोग पनपते जा रहे हैं.. इसलिए...हमे अपने मस्तिष्क को रिलैक्स करने के लिए योग, प्राणायाम, सात्विक भोजन आदि के साथ - साथ.. *मधुर संगीत* सुनने पर भी ध्यान देना चाहिये... *लेकिन ध्यान रहे...कर्कश ध्वनि या संगीत से भी हमे कोसो दूर रहना चाहिये... क्योंकि कर्कश संगीत भी मानसिक अशांति का ही कारण होता है...* 👉🏻संगीत, मधुर ध्वनि के माध्यम से एक योग प्रणाली की तरह है, जो मानव जीवन के साथ साथ प्रकृति पर भी कार्य करता है.. तथा आत्मज्ञान की हद के लिए उनके उचित कार्यों को जागृत तथा विकसित करती हैं, जोकि हिंदू दर्शन और धर्म का अंतिम लक्ष्य है। मधुर लय भारतीय संगीत का प्रधान तत्व है... *राग* का आधार मधुर लय है... विभिन्न *राग* केन्द्रीय तंत्रिका प्रणाली से संबंधित अनेक रोगों के उपचार में प्रभावी पाये गये हैं.. भारतीय संगीत की प्रमुख विशिष्‍टता *रागदारी संगीत* है.. राग भारतीय संगीत की आधारशिला है.. इसका अर्न्‍तनिहित.. स्‍वर-लय, रस-भाव अपने विशिष्‍ट प्रभाव से व्‍यक्‍ति के मन-मस्‍तिष्‍क को प्रभावित करता है.. जिस प्रकार हर रोग का संबंध किसी ना किसी ग्रह विशेष से होता हैं.. उसी प्रकार संगीत के हर सुर व राग का संबंध भी किसी ना किसी ग्रह से अवश्य होता हैं.. यदि किसी इंसान को किसी ग्रह विशेष से संबन्धित रोग हो और उसे उस ग्रह से संबन्धित राग,सुर अथवा गीत सुनाये जायें तो रोगी बहुत जल्दी ही स्वस्थ हो जाता हैं.. स्‍वर तथा लय की भिन्‍न-भिन्न प्रक्रिया उसकी शारीरिक क्रियाओं, रक्‍त संचार, मान्‍सपेशियों, कंठ ध्‍वनियों आदि में स्‍फूर्ति व उर्जा उत्‍पन्‍न करते हैं तथा व्‍याधियों को दूर करते हैं.. 👉🏻 *संगीत-मकरंद* ग्रंथ में नारद द्वारा रागों की जातियों के आधार पर रोगी के मन और शरीर पर प्रभाव पड़ने का उल्‍लेख किया गया है.. नारद जी ने *संगीताध्‍याय..* के प्रकरण में विभिन्‍न दशाओं में रागों के गायन-वादन का निर्धारण किया है.. *आयुधर्मयशोवृद्धिः धनधान्‍य फलम्‌ लभेत्‌ ।* *रागाभिवृद्धि सन्‍तानं पूर्णभगाः प्रगीयते ॥* *अर्थात्‌...* आयु, धर्म, यश वृद्धि, सन्‍तान की अभिवृद्धि, धनधान्‍य, फल-लाभ इत्‍यादि के लिये पूर्ण रागों का गायन करना चाहिये.. 👉🏻वेदों में संगीत को मोक्ष प्राप्‍ति का सर्वोत्‍कृष्‍ट साधन माना गया है... *ऋग्‍वेद* में... *गाथपति* नामक चिकित्‍सक का उल्‍लेख है.. जिसका तात्‍पर्य संगीत चिकित्‍सक से है.. *सामवेद..* में.. जिसे भारतीय संगीत का वेद माना जाता है.. रोग-निवारण के लिये राग-गायन का विधान मिलता है.. *अथर्ववेद* में.. ऋक, यजुष और साम के ऐसे मंत्र थे, जो जीवन से व्‍यवहार से और स्‍वास्‍थ्‍य से सम्‍बन्‍धित थे... *ब्रह्‍मा जी..* रत्‍न विशेषज्ञ, संगीतज्ञ एवं वैद्य आदि सभी के गुणों को धारण करते थे.. यज्ञों के माध्‍यम से अपने आपको.. शारीरिक, मानसिक व व्‍यवहारिक रूप से संतुलित रखने का प्रावधान था.. *मंत्र-मणि* एवं *औषधि..* तीनों द्वारा अथर्ववेद में उपचार बताया गया है.. मंत्र-संगीत (साम) रत्‍न-मणी, तथा औषधि ने आगे चलकर *आयुर्वेद* का रूप धारण किया.. *आयुर्वेद..* में देह धारण की तीन धातुयें बताई गई हैं... *वात, पित्त और कफ..* अतः इन तीनों धातुओं का सन्‍तुलन बनाये रखने के लिये.. शब्‍द शक्‍ति, मंत्र शक्‍ति और गीत शक्‍ति का भी प्रयोग होता रहा है.. ऋषि-मुनियों द्वारा संगीत व मंत्र साधना ओऽम्‌ द्वारा अनेक प्रकार की सिद्धियों व चमत्‍कारों पर अधिकार प्राप्‍त करना संगीत के प्रभाव का बोध कराता है.. संगीतार्षि.. *तुम्‍बरू* को प्रथम संगीत चिकित्‍सक माना जाता है.. उन्‍होंने अपनी पुस्‍तक.. *संगीत-स्‍वरामृत..* में उल्‍लेख किया है कि ऊँची और असमान ध्‍वनि का *वात्‌* पर.. गम्‍भीर व स्‍थिर ध्‍वनि का *पित्त* पर.. तथा कोमल व मृदु ध्‍वनियों का *कफ़* के गुणों पर प्रभाव पड़ता है... यदि सांगीतिक ध्‍वनियों द्वारा इन तीनों को संतुलित कर लिया जाये तो बीमारियों की सम्‍भावनायें ही खत्‍म हो जायेगी.. 👉🏻योग के सिद्धान्‍त के अनुसार.. श्‍वासों से जुड़ना अर्न्‍तमन से जुड़ना है और व्‍यक्‍ति जब अन्‍तर्मन से जुड़ जाता है तो ऋणात्‍मक संवेग कम हो जाता है और धनात्‍मक संवेग स्‍थायी होने लगते हैं.. ये धनात्‍मक संवेग मनोविकारों से व्‍यक्‍ति को दूर रखते हैं.. 👉🏻किंवदन्‍ती है कि समुद्र गुप्‍त जब वीणा वादन करता था तो उसके उपवन में बसंत ऋतु का आभास होता था.. संगीत द्वारा पेड़ पौधों को रोग-ग्रस्‍त होने से बचाया जा सकता है.. बहेलियों के बीन बजाने पर मृग व सर्प मोहित हो जाते हैं.. आजकल कनाडा में मधुर संगीत सुनाकर गायों से अधिक दूध प्राप्‍त किया जाता है.. 👉🏻विभिन्‍न रोगों के लिये संगीतज्ञों एवं संगीत चिकित्‍सकों तथा मनोवैज्ञानिकों ने कुछ राग निश्‍चित किये हैं, जो उन रोगों को दूर करने में सहायक सिद्ध हुये हैं.. लेकिन उनका वर्णन करने से लेख का विस्तार हो जायेगा... इसलिए इस विषय मे फिर कभी लिखूँगा... फिलहाल तो इतना सब लिखने का मेरा उद्देश्य इतना सा है कि आप सब सोने से पहले मधुर संगीत का आनंद अवश्य लें.. ताकि हर प्रकार के मानसिक व शारीरिक रोगों से बचाव होता रहे.. और अगर कोई मानसिक रोग हो भी तो वह भी धीरे धीरे समाप्त हो जाये.. मेरे अनुसार मधुर संगीत महिलाओं में होने वाले.. हार्मोनल असंतुलन, हिस्टीरिया, डिप्रेशन तथा अन्य बहुत सी मानसिक बीमारियों का सर्वोत्तम उपचार है... ✍🏻... *कौनसा राग किस रोग में लाभदायक है...!* 🌿🍋🥕🍊🥣🍅🌽🍓🍐🍇 विभिन्‍न रोगों के लिये संगीतज्ञों एवं संगीत चिकित्‍सकों तथा मनोवैज्ञानिकों ने कुछ राग निश्‍चित किये हैं, जो उन रोगों को दूर करने में सहायक सिद्ध हुये हैं.. लेकिन उनका वर्णन करने से लेख का विस्तार हो जायेगा... इसलिए इस विषय मे फिर कभी लिखूँगा... फिलहाल आप यह जानिये की कौनसा राग किस रोग के उपचार हेतु प्रयोग में लाया जाता है.. प्रस्तुत है कुछ उदाहरण... 👉🏻 *रक्तचाप...* ऊंचे रक्तचाप मे धीमी गति.. और.. निम्न रक्तचाप मे तीव्र गति का गीत संगीत लाभ देता है.. शास्त्रीय रागों मे.. *राग भूपाली..* को विलंबित व तीव्र गति से सुना या गाया जा सकता है.. *ऊंचे रक्तचाप मे...* 👇🏻 *चल उडजा रे पंछी कि अब ये देश..* (भाभी), *ज्योति कलश छलके..*(भाभी की चूड़ियाँ ), *चलो दिलदार चलो..*(पाकीजा ), *नीले गगन के तले..*(हमराज़) जैसे गीत.. व.. *निम्न रक्तचाप मे..* 👇🏻 *ओ नींद ना मुझको आये..*(पोस्ट बॉक्स न॰ 909), *बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना..* (जिस देश मे गंगा बहती हैं ), *जहां डाल डाल पर..*(सिकंदरे आजम ), *पंख होते तो उड़ आती रे..* (सेहरा) 👉🏻 *हृदय रोग...* इस रोग मे.. *राग दरबारी व राग सारंग..* से संबन्धित संगीत सुनना लाभदायक है.. *इनसे संबन्धित फिल्मी गीत निम्न हैं..* 👇🏻 *तोरा मन दर्पण कहलाये..*(काजल), *राधिके तूने बंसरी चुराई..*(बेटी बेटे), *झनक झनक तोरी बाजे पायलिया..* (मेरे हुज़ूर), *बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम..* (साजन), *जादूगर सइयां छोडो मोरी.* (फाल्गुन), *ओ दुनिया के रखवाले..*(बैजू बावरा), *मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोये..* (मुगले आजम) 👉🏻 *मनोरोग अथवा डिप्रेसन...* इस रोग मे.. *राग बिहाग व राग मधुवंती...* सुनना लाभदायक होता है.. *इन रागों के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं..* 👇🏻 *तुझे देने को मेरे पास कुछ नहीं..* (कुदरत नई), *तेरे प्यार मे दिलदार..*(मेरे महबूब), *पिया बावरी...*(खूबसूरत पुरानी), *दिल जो ना कह सका...* (भीगी रात), *तुम तो प्यार हो...*(सेहरा), *मेरे सुर और तेरे गीत..* (गूंज उठी शहनाई), *मतवारी नार ठुमक ठुमक चली जाये...*(आम्रपाली), *सखी रे मेरा तन उलझे मन डोले..* (चित्रलेखा) 👉🏻 *याददाश्त..* जिन लोगों की याददाश्त कम हो या कम हो रही हो, उन्हे.. *राग शिवरंजनी..* सुनने से बहुत लाभ मिलता है... *इस राग के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं...* 👇🏻 *ना किसी की आँख का नूर हूँ...* (लालकिला), *मेरे नैना...*(महबूबा), *दिल के झरोखे मे तुझको..*(ब्रह्मचारी), *ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम...*(संगम ) *जीता था जिसके..* (दिलवाले), *जाने कहाँ गए वो दिन..*(मेरा नाम जोकर) 👉🏻 *अनिद्रा...* यह रोग हमारे जीवन मे होने वाले सबसे साधारण रोगों में से एक है.. इस रोग के होने पर.. *राग भैरवी व राग सोहनी..* सुनना लाभकारी होता है.. *इसके प्रमुख गीत निम्न प्रकार से हैं..* 👇🏻 *रात भर उनकी याद आती रही..*(गमन), *नाचे मन मोरा..* (कोहिनूर), *मीठे बोल बोले बोले पायलिया..* (सितारा), *तू गंगा की मौज मैं यमुना..* (बैजू बावरा), *ऋतु बसंत आई पवन..*(झनक झनक पायल बाजे), *सावरे सावरे..*(अंनुराधा), *चिंगारी कोई भड़के...*(अमर प्रेम), *छम छम बजे रे पायलिया..*(घूँघट).. *झूमती चली हवा..*(संगीत सम्राट तानसेन), *कुहूु कुहू बोले कोयलिया..*(सुवर्ण सुंदरी ) 👉🏻 *एसिडिटी...* इस रोग के होने पर.. *राग खमाज..* सुनने से लाभ मिलता है... *इस राग के प्रमुख गीत निम्न प्रकार से हैं...* 👇🏻 *ओ रब्बा कोई तो बताये प्यार..* (संगीत), *आयो कहाँ से घनश्याम..*(बुड्ढा मिल गया), *छूकर मेरे मन को..*(याराना), *कैसे बीते दिन कैसे बीती रतिया...* (ठुमरी-अनुराधा), *तकदीर का फसाना गाकर किसे सुनाये..*(सेहरा), *रहते थे कभी जिनके दिल मे..* (ममता), *हमने तुमसे प्यार किया हैं इतना..* (दूल्हा दुल्हन), *तुम कमसिन हो नादां हो..*(आई मिलन की बेला) 👉🏻 *कमजोरी...* यह रोग शारीरिक शक्तिहीनता से संबन्धित है.. इस रोग से पीड़ित व्यक्ति कुछ भी काम कर पाने मे खुद को असमर्थ महसूस करता है... इस रोग के होने पर राग.. *जय जयवंती..* सुनना या गाना लाभदायक होता है.. *इस राग के प्रमुख गीत निम्न हैं..* 👇🏻 *मनमोहना बड़े झूठे..*(सीमा), *बैरन नींद ना आये..*(चाचा ज़िंदाबाद), *मोहब्बत की राहों मे चलना संभलके..* (उड़न खटोला), *साज हो तुम आवाज़ हूँ मैं..* (चन्द्रगुप्त), *ज़िंदगी आज मेरे नाम से शर्माती हैं..* (दिल दिया दर्द लिया), *तुम्हें जो भी देख लेगा किसी का ना..* (बीस साल बाद) 👉🏻 *खून की कमी...* इस रोग से पीड़ित होने पर व्यक्ति का चेहरा निस्तेज व सूखा सा रहता है.. स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन होता है.. ऐसे में.. *राग पीलू..* से संबन्धित गीत सुनने से लाभ पाया जा सकता हैं.. *इस राग के प्रमुख गीत निम्न हैं..* 👇🏻 *आज सोचा तो आँसू भर आये...* (हँसते जख्म), *नदिया किनारे...*(अभिमान), *खाली हाथ शाम आई है...*(इजाजत), *तेरे बिन सूने नयन हमारे..*(लता रफी), *मैंने रंग ली आज चुनरिया..*(दुल्हन एक रात की), *मोरे सैयाजी उतरेंगे पार..*(उड़न खटोला), 👉🏻 *अस्थमा...* इस रोग मे आस्था-भक्ति पर आधारित गीत संगीत सुनने व गाने से लाभ होता है.. *राग मालकोस व राग ललित..* से संबन्धित गीत इस रोग मे सुने जा सकते हैं.. *जिनमें प्रमुख गीत निम्न हैं...* 👇🏻 *तू छुपी हैं कहाँ..*(नवरंग), *तू है मेरा प्रेम देवता..*(कल्पना), *एक शहँशाह ने बनवा के हंसी ताजमहल..*(लीडर), *मन तड़पत हरी दर्शन को आज..* (बैजू बावरा ), *आधा है चंद्रमा..*(नवरंग) 👉🏻 *सिरदर्द...* इस रोग के होने पर.. *राग भैरव...* सुनना लाभदायक होता है.. *इस राग के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं...* 👇🏻 *मोहे भूल गए सावरियाँ..* (बैजू बावरा), *राम तेरी गंगा मैली..*(शीर्षक), *पूंछों ना कैसे मैंने रैन बिताई...*(तेरी सूरत मेरी आँखें), *सोलह बरस की बाली उमर को सलाम...*(एक दूजे के लिए) 👉🏻 *नोट:-* रागों के संबंध में मुझे समुचित जानकारी नही है.. इस लेख को लिखने में.. *All India Radio, Delhi* के मेरे मित्र *ज्वाला प्रसाद* और उनके पुत्र.. *माधव..* ने सहायता की है.. इसके लिए ये दोनों विशेष रूप से धन्यवाद के पात्र हैं.. ज्वाला प्रसाद जी *All India Radio..* में.. मुख्य संगीतकए है. भारतीय शास्त्रीय संगीत के विविध राग और उन्हें सुनने से फायदे : 1. राग दुर्गा – आत्मविश्वास बढानेवाला. 2. राग यमन – कार्यशक्ति बढानेवाला. 3. राग देसकार – उत्थान व संतुलन साधनेवाला 4. राग बिलावल – अध्यात्मिक उन्नति व संतुलन साधनेवाला. 5. राग हंसध्वनि – सत्य असत्य को परिभाषित करनेवाला राग. 6. राग शाम कल्याण – मुलाधार उत्तेजित करनेवाला और आत्मविश्वास बढानेवाला. 7. राग हमीर – आक्रामकता बढानेवाला, यश देनेवाला, शक्ति और उर्जा निर्माण करनेवाला. 8. राग केदार – स्वकर्तृत्व पर पूर्ण विश्वास, भरपूर उर्जा निर्माण करनेवाला और मुलाधार उत्तेजित करनेवाला. 9. राग भूप – शांति निर्माण, संतुलन साधकर अहंकार मिटाता है. 10. राग अहिर भैरव – शुद्ध इच्छा, प्रेम एवं भक्ति भाव निर्माण करता है व आध्यात्मिक उन्नति, पोषक वातावरण निर्मित कारक. 11. राग भैरवी – भावना प्रधान राग, सर्व सदिच्छा पूर्ण कर प्रेम सशक्त और वृद्धि करता है. 12. राग मालकौस – अतिशय शांत एवं मधुर राग. प्रेमभाव निर्माण करता है व संसारिक सुख में वृद्धि करेगा. 13. राग भैरव – शांत वृत्ति व शुध्द इच्छा निर्माण करता है. आध्यात्मिक प्रगति के लिये पोषक एवं शिवत्व जागृत करनेवाला राग. 14. राग जयजयवंती – सुख समृद्धि और यश देने वाला राग. समस्या दूर करनेकी क्षमता. 15. राग भीम पलासी - संसार सुख व प्रेम देता है. 16. राग सारंग – अति मधुर राग. कल्पना शक्ति व कार्यकुशलता बढाकर नवनिर्मित ज्ञान प्रदान करता है, आत्मविश्वास बढाकर परिस्थिति का ज्ञान देता है. 17. राग गौरी – गुण वर्घक राग - शुद्ध ईच्छा, मर्यादाशीलता, प्रेम, उत्थान ,समाधान कारक. विविध प्रकार के मकरन्दों (पुष्परस) से आसव, मद्य आदि की ज्ञान कराया जाता था। साभार 🙏🏼 soniya singh Facebook wall

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शनिवार, 21 मई 2022

ध्यान की ताकत

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  *ध्यान की ताकत* 


जब 100 लोग एक साथ साधना करते हैं तो उत्पन्न लहरें 5 कि.मी. तक फैलती हैं और नकारात्मकता नष्ट कर सकारात्मकता का निर्माण करती हैं।

आइंस्टाईन नें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कहा था कि एक अणु के विघटन से लाखों अणुओं का विघटन होता है, इसीको हम अणु विस्फोट कहते है। यही सूत्र हमारे ऋषि, मुनियों ने हमें हजारो साल पहले दिया था।

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आज पृथ्वी पर केवल 4% लोग ही ध्यान करते है लेकिन बचे 96% लोगों को इसका पॉजिटिव इफेक्ट होता है।

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अगर हम लगातार 90 दिनों तक ध्यान करे तो इसका सकारात्मक प्रभाव हमारे और हमारे परिवार पर दिखाई देगा।

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अगर पृथ्वी पर 10% लोग ध्यान करने लगें तो पृथ्वी पर विद्यमान लगभग सभी समस्याओं को नष्ट करने की ताकत ध्यान में है।

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उदाहरण के लिए हम बात करें तो महर्षि महेश योगी जी ने सन् 1993 में वैज्ञानिकों के समक्ष यह सिद्ध किया था।।

हुआ यूं कि उन्होने वॉशिंगटन डी सी में 4000 अध्यापको को बुलाकर एक साथ ध्यान (मेडिटेशन) करने को कहा और चमत्कारिक परिणाम यह था कि शहर का क्राईम रिपोर्ट 50% तक कम हुआ पाया गया।

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वैज्ञानिकों को कारण समझ नहीं आया और उन्होनें इसे`महर्षि इफेक्ट" नाम दिया।

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यह ताकत है ध्यान में 🕉🧘‍♂️🧘‍♀️🕉


*If interested in shaktipat diksha Or Kundalini awakening please msg me on my whatsApp no. +919450220221( only serious seekers)*


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शिव जी भस्म क्यों लगाते हैं

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 शिव जी भस्म क्यों लगाते हैं 

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महादेव जी को एक बार बिना कारण के किसी को प्रणाम करते देखकर पार्वती जी ने पूछा आप किसको प्रणाम करते रहते हैं? 

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शिव जी ने अपनी धर्मपत्नी पार्वती जी से कहते हैं की, हे देवी! जो व्यक्ति एक बार ‘राम’ कहता है उसे मैं तीन बार प्रणाम करता हूं। 

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पार्वती जी ने एक बार शिव जी से पूछा आप श्मशान में क्यूं जाते हैं और ये चिता की भस्म शरीर पे क्यूं लगते हैं? 

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उसी समय शिवजी पार्वती जी को श्मशान ले गए। वहां एक शव अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। लोग ‘राम’ नाम सत्य है कहते हुए शव को ला रहे थे। 

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शिव जी ने कहा की देखो पार्वती इस श्मशान की ओर जब लोग आते हैं तो ‘राम’ नाम का स्मरण करते हुए आते हैं। 

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और इस शव के निमित्त से कई लोगों के मुख से मेरा अतिप्रिय दिव्य ‘राम’ नाम निकलता है उसी को सुनने मैं श्मशान में आता हूँ...

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और इतने लोगो के मुख से ‘राम’ नाम का जप करवाने में निमित्त बनने वाले इस शव का मैं सम्मान करता हूँ, प्रणाम करता हूँ, और अग्नि में जलने के बाद उसकी भस्म को अपने शरीर पर लगा लेता हूँ। 

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‘राम’ नाम बुलवाने वाले के प्रति मुझे इतना प्रेम है। 

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एक बार शिवजी कैलाश पर पहुंचे और पार्वती जी से भोजन मांगा। पार्वती जी विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर रहीं थी। 

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पार्वती जी ने कहा अभी पाठ पूरा नही हुआ, कृपया थोड़ी देर प्रतीक्षा कीजिए। 

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शिव जी ने कहा की इसमें तो समय और श्रम दोनों लगेंगे। 

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संत लोग जिस तरह से सहस्र नाम को छोटा कर लेते हैं और नित्य जपते हैं वैसा उपाय कर लो। 

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पार्वती जी ने पूछा वो उपाय कैसे करते हैं? मैं सुनना चाहती हूँ। 

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शिव जी ने बताया, केवल एक बार ‘राम’ कह लो तुम्हे सहस्र नाम, भगवान के एक हजार नाम लेने का फल मिल जाएगा। 

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एक ‘राम’ नाम हजार दिव्य नामों के समान है। पार्वती जी ने वैसा ही किया।


जय श्री राम🙏🙏

हर हर महादेव 🙏🙏

#by_शर्मा_जी_कहियो https://www.facebook.com/profile.php?id=100048692481109

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रविवार, 23 जनवरी 2022

तँत्र क्यो महत्वपूर्ण है

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तंत्र कहता है ”जब तक तुम स्वयं प्रकाश से नहीं भर जाते तुम दूसरों को प्रकाशित होने में कैसे सहायक होओगे?” स्वार्थी हो जाओ–तभी, केवल तभी परार्थी हो सकोगे; नहीं तो परार्थ, परोपकार की धारणा मूर्खतापूर्ण है।


आनंदित होओ–तभी तुम दूसरों को आनंदित होने में सहायता दे सकोगे। अगर तुम उदास हो दुखी हो, कड़वाहट से भरे हो, तुम निश्चित ही दूसरे के प्रति हिंसक हो जाओगे और दूसरों के लिए दुख पैदा करोगे।”


स्वयं को प्रसन्न रखने में क्या बुराई है? सुखी होने में क्या बुराई है? अगर कुछ बुराई है तो वह तुम्हारे दुखी होने में है क्योंकि दुखी व्यक्ति अपने चारों ओर दुख की तरंगें निर्मित कर लेता है। 


तंत्र कामुकता नहीं सिखाता। वह तो केवल यही कहता है कि काम सुख का स्रोत हो सकता है। एक बार जब तुम्हें उस सुख का पता चल जाता है तो तुम आगे बढ़ सकते हो, क्योंकि अब तुम सत्य की भूमि पर खड़े हो।


व्यक्ति को सदा काम में नहीं अटके रहना है। बल्कि काम का तालाब में कूदने के लिए जंपिंग बोर्ड की तरह उपयोग किया जा सकता है। तंत्र का यही अभिप्राय है: ”तुम इसे जंपिंग बोर्ड समझो।” 


और जब एक बार तुम्हें काम-सुख का अनुभव हो जाए तुम समझ सकोगे कि रहस्यदर्शी  किस की बात करते रहे हैं–एक परम, एक ब्रह्मांडीय  काम-कृत्य की। मीरा नाच रही है। तुम उसे समझ न पाओगे। 


तुम उसके गीतों को भी समझ न पाओगे। वे कामुकता पूर्ण हैं। ऐसा होगा ही, क्योंकि आदमी के जीवन में काम-कृत्य ही एक ऐसा कृत्य है जिसमें अद्वैत की प्रतीति होती जिसमें तुम एक गहन अनुभव करते हो।


जिसमें अतीत मिट जाता है और भविष्य खो जाता है और बचता केवल वर्तमान–केवल सत्य वास्तविक क्षण।उन सभी रहस्यदर्शियों ने जिन्हें परमात्मा के साथ संपूर्ण अस्तित्व के साथ एक हो जाने की अनुभूति हुई है।


उन्होंने अपनी अनुभूति को अभिव्यक्त करने के लिए काम प्रतीकों का उपयोग किया है। और कोई भी प्रतीक इतने निकट नहीं हैं। काम केवल प्रारंभ है अंत नहीं। लेकिन अगर तुम प्रारंभ को ही चूक गए ।


तो अंत को भी चूक जाओगे। और तुम अंत तक पहुंचने के लिए आरंभ से बच नहीं सकते। तंत्र कहता है ”जीवन को उसके प्राकृतिक रूप में, सत्य रूप में ग्रहण करो। अप्राकृतिक झूठ मत होओ। 


काम-वासना एक गहनतम संभावना है, उसका उपयोग करो। वास्तव में, सभी नैतिकताएं प्रसन्नता-विरोधी हैं। कोई व्यक्ति प्रसन्न है तो तुम्हें लगता है कि जरूर कहीं कुछ गलत है। जब कोई उदास है तब सब ठीक है।


हम एक स्नायु-रोग-ग्रस्त समाज में जीते है जहां हर व्यक्ति उदास है। जब तुम उदास हो ,दुखी हो, तब सब प्रसन्न है; क्योंकि अब सबको तुमसे सहानुभूति प्रकट करने का अवसर मिलेगा। 


जब तुम प्रसन्न हो तो उनको समझ नहीं आएगा कि वे क्या करें? जब कोई तुमसे सहानुभूति प्रकट करता है तब उसका चेहरा देखना। एक सूक्ष्म चमक चेहरे पर आ जाती है। वह सहानुभूति दिखाते समय प्रसन्न है। 


अगर तुम खुश हो, तब कोई संभावना नहीं।तुम्हारी प्रसन्नता दूसरों को उदास कर देती है। यह स्नायुरोग न्यूरोसिस है। इसका आधार ही पागलपन है। तंत्र कहता है ”तुम जो हो, प्रामाणिक रूप से वही हो जाओ। 


तुम्हारी प्रसन्नता बुरी नहीं अच्छी है। वह पाप नहीं। केवल उदासी पाप है केवल दुखी होना पाप है। प्रसन्न होना पुण्य है क्योंकि एक प्रसन्न और प्रफुल्लित व्यक्ति ही दूसरों के लिए दुख पैदा नहीं करेगा। 


केवल प्रफुल्लित और प्रसन्न व्यक्ति ही दूसरों की प्रसन्नता के लिए भूमि तैयार कर सकता है।” तंत्र विज्ञान है। तंत्र कहता है ”पहले जानो कि यथार्थ क्या है वास्तविकता क्या है आदमी क्या है? 


और पहले से मूल्य निर्धारित मत करो और आदर्श मत स्थापित करो पहले उसे जानो जो है। जो होना चाहिए उसके संबंध में मत सोचो, जो है केवल उसके संबंध में सोचो।” 


और जब एक बार उसे जान लिया जाता है जो है तब तुम उसे रूपांतरित भी कर सकते हो। अब तुम रहस्य समझ गए। तंत्र कहता है ”काम के विरुद्ध जाने की चेष्टा मत करो 


अगर तुम काम के विरुद्ध जाकर ब्रह्मचर्य को, साधने की कोशिश करते हो तो यह असंभव है। यह मात्र जादू की भांति है। बिना यह जाने कि काम-ऊर्जा क्या है बिना यह जाने कि काम-वासना की उत्पत्ति किस प्रकार होती है। sabhar tantra shadana kundalni sakti Facebook wall


बिना उसकी प्रकृति की गहराई में गए बिना उसके रहस्य को जाने। तुम ब्रह्मचर्य का एक आदर्श अवश्य स्थापित कर सकते हो लेकिन तुम क्या करोगे?” तुम केवल दमन करोगे। 


और जो व्यक्ति इसका दमन करता है वह उस व्यक्ति से अधिक कामुक है जो इसका भोग करता है। क्योंकि भोग से ऊर्जा शांत हो जाती है क्योंकि दमन से वह तुम्हारे शरीर-तंत्र में निरंतर संचार करती रहती है।


                                                            

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गुरुवार, 20 जनवरी 2022

पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90* *दिनों में कर देगी* *जड़ से खत्म, *आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे

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 *पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90* *दिनों में कर देगी* *जड़ से खत्म, *आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे वैद्य जी अनंत शिखर अयोध्या* 

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पपीते के पत्ते 3rd और 4th स्टेज के कैंसर को सिर्फ 35 से 90 दिन में सही कर सकते हैं। 

अभी तक हम लोगों ने सिर्फ पपीते के पत्तों को बहुत ही सीमित तरीके से उपयोग किया होगा, बहरहाल प्लेटलेट्स के कम हो जाने पर या त्वचा सम्बन्धी या कोई और छोटा मोटा प्रयोग, मगर आज जो हम आपको बताने जा रहें हैं, ये वाकई आपको चौंका देगा, आप सिर्फ 5 हफ्तों में कैंसर जैसी भयंकर रोग को जड़ से ख़त्म कर सकते हैं।

आपके लिए नित नवीन जानकारी कई प्रकार के वैज्ञानिक शोधों से पता लगा है कि पपीता के सभी भागों जैसे फल, तना, बीज, पत्तिया, जड़ सभी के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसके वृद्धि को रोकने की क्षमता पाई जाती है। 

विशेषकर पपीता की पत्तियों के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसकी वृद्धि को रोकने का गुण अत्याधिक पाया जाता है। तो आइये जानते हैं उन्ही से। 

University of florida ( 2010) और International doctors and researchers from US and japan में हुए शोधो से पता चला है की पपीता के पत्तो में कैंसर कोशिका को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है। 

 एक शोधकर्ता  के अनुसार पपीता की पत्तियां डायरेक्ट कैंसर को खत्म कर सकती है, उनके अनुसार पपीता कि पत्तिया लगभग 10 प्रकार के कैंसर को खत्म कर सकती है जिनमे मुख्य है।

breast cancer, lung cancer, liver cancer, pancreatic cancer, cervix cancer, इसमें जितनी ज्यादा मात्रा पपीता के पत्तियों की बढ़ाई गयी है, उतना ही अच्छा परिणाम मिला है, अगर पपीता की पत्तिया कैंसर को खत्म नहीं कर सकती है लेकिन कैंसर की प्रोग्रेस को जरुर रोक देती है।। 

तो आइये जाने पपीता की पत्तिया कैंसर को कैसे खत्म करती है?

1. पपीता कैंसर रोधी अणु Th1 cytokines की उत्पादन को ब़ढाता है जो की इम्यून system को शक्ति प्रदान करता है जिससे कैंसर कोशिका को खत्म किया जाता है।

2. पपीता की पत्तियों में papain नमक एक प्रोटीन को तोड़ने (proteolytic) वाला एंजाइम पाया जाता है जो कैंसर कोशिका पर मौजूद प्रोटीन के आवरण को तोड़ देता है जिससे कैंसर कोशिका शरीर में बचा रहना मुश्किल हो जाता है। 

Papain blood में जाकर macrophages को उतेजित करता है जो immune system को उतेजित करके कैंसर कोशिका को नष्ट करना शुरू करती है, chemotheraphy / radiotheraphy और पपीता की पत्तियों के द्वारा ट्रीटमेंट में ये फर्क है कि chemotheraphy में immune system को दबाया जाता है जबकि पपीता immune system को उतेजित करता है, chemotheraphy और radiotheraphy में नार्मल कोशिका भी प्रभावित होती है पपीता सिर्फ कैंसर कोशिका को नष्ट करता है।

सबसे बड़ी बात के कैंसर के इलाज में पपीता का कोई side effect भी नहीं है।।

कैंसर में पपीते के सेवन की विधि :

कैंसर में सबसे बढ़िया है पपीते की चाय। दिन में 3 से 4 बार पपीते की चाय बनायें, ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होने वाली है। अब आइये जाने लेते हैं पपीते की चाय बनाने की विधि।

         5 से 7 पपीता के पत्तो को पहले धूप में अच्छी तरह सुखा ले फिर उसको छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ लो आप 500 ml पानी में कुछ पपीता के सूखे हुए पत्ते डाल कर अच्छी तरह उबालें।

इतना उबाले के ये आधा रह जाए। इसको आप 125 ml करके दिन में दो बार पिए। और अगर ज्यादा बनाया है तो इसको आप दिन में 3 से 4 बार पियें। बाकी बचे हुए लिक्विड को फ्रीज में स्टोर का दे जरुरत पड़ने पर इस्तेमाल कर ले। *और ध्यान रहे के इसको दोबारा गर्म मत करें।*

       पपीते के 7 ताज़े पत्ते लें इनको अच्छे से हाथ से मसल लें। अभी इसको 1 Liter पानी में डालकर उबालें, जब यह 250 ml। रह जाए तो इसको छान कर 125 ml. करके दो बार में अर्थात सुबह और शाम को पी लें। यही प्रयोग आप दिन में 3 से 4 बार भी कर सकते हैं।

पपीते के पत्तों का जितना अधिक प्रयोग आप करेंगे उतना ही जल्दी आपको असर मिलेगा। और ये *चाय पीने के आधे से एक घंटे तक आपको कुछ भी खाना पीना नहीं है।

कब तक करें ये प्रयोग वैसे तो ये प्रयोग आपको 5 हफ़्तों में अपना रिजल्ट दिखा देगा, फिर भी हम आपको इसे 3 महीने तक इस्तेमाल करने का निर्देश देंगे। और ये जिन लोगों का अनुभूत किया है उन लोगों ने उन लोगों को भी सही किया है, जिनकी कैंसर में तीसरी और चौथी स्टेज थी।

*_आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे अनंत शिखर सद्गुरु औषधालय साकेत पुरी कॉलोनी देवकाली बाईपास अयोध्या मिलने का समय प्रातः 8:00 से1 2:00 तक शाम 5:00 से_ 8:00 बृहस्पतिवार 10:00 से 2:00*9455831300,9670108000*

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