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इंटेल ने भारत में लॉन्च किया हथेली के साइज का NuPc Windows 8.1 कीमत 18,999 रुपये

WPG दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक डिस्ट्रिब्यूटर्स में से एक है, इंटेल और माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिलकर भारत में अल्ट्रा कॉम्पैक्ट PC लॉन्च किया है। इस PC की सबसे खास बात ये है कि इस PC का साइज एक हथेली के बराबर है। 117*112*35mm साइज का ये पीसी बिजनेस यूजर्स के लिए है। इंटेल के इस नए पीसी में Intel Core i3 प्रोसेसर लगा हुआ है. यह पीसी सिर्फ 35मिमी चौड़ा है, वहीं 4X4 इंच जगह में यह आ सकता है. वैसे यह  Intel NUC पर बेस्‍ड है जो बिजनेस मैन और होम कंज्‍यूमर्स को टारगेट करेगा. हालांकि इसे इंडिया में एसेंबल किया जा सकेगा. यह पीसी दो वर्जन में उपलब्‍ध है. पहला 2जीबी रैम वाला जिसमें 500जीबी स्‍टोरेज पॉवर है. sabhar :http://palpalindia.com/
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भारत का रहस्यमय मंदिर, अंग्रेज इंजीनियर भी नहीं सुलझा सका इसकी गुत्थी

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अनंतपुर (आंध्रप्रदेश) , भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के एक छोटे से ऐतिहासिक गांव लेपाक्षी में 16 वीं शताब्दी का वीरभद्र मंदिर है। इसे लेपाक्षी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह रहस्यमयी मंदिर है, जिसकी गुत्थी दुनिया का कोई भी इंजीनियर आज तक सुलझा नहीं पाया।   ब्रिटेन के एक इंजीनियर ने भी इसे सुलझाने की काफी कोशिश की थी, लेकिन वह भी नाकाम रहा। मंदिर का रहस्य इसके 72 पिलरों में एक पिलर है, जो जमीन को नहीं छूता। यह जमीन से थोड़ा ऊपर उठा हुआ है और लोग इसके नीचे से कपड़े को एक तरफ से दूसरे तरफ निकाल देते हैं।   मंदिर का निर्माण विजयनगर शैली में किया गया है। इसमें देवी, देवताओं, नर्तकियों, संगीतकारों को चित्रित किया गया है। दीवारों पर कई पेंटिंग हैं। खंभों और छत पर महाभारत और रामायण की कहानियां चित्रित की गई हैं।   मंदिर में 24 बाय 14 फीट की वीरभद्र की एक वाल पेंटिंग भी है। यह मंदिर की छत पर बनाई गई भारत की सबसे बड़ी वाल पेंटिंग है। पौराणिक कथाओं के अनुसार वीरभद्र को भगवान शिव ने पैदा किया था। मंदिर के सामने विशाल नंदी की मूर्ति है। यह एक ही पत्थर पर ब

मानव मल से बनेगा सोना और खाद

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न्यूयॉर्क। भले ही यह सुनने में अजीब लगे, लेकिन सच है, क्योंकि अमेरिकी शोधकर्ता इंसान के मल से सोना और कई दूसरी कीमती धातुओं को निकालने में लगे हुए हैं। शोधदल ने अमेरिका के मैला निष्पादन संयत्रों में इतना सोना निकालने में कामयाबी हासिल की है जितना किसी खान में न्यूनतम स्तर पर पाया जाता है। एक अंग्रेजी वेबसाइट पर छपी खबर के मुताबिक डेनवर में अमेरिकन केमिकल सोसायटी की 249वीं राष्ट्रीय बैठक में मल से सोना निकालने के बारे में विस्तार से बताया गया है यूएस जिओलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के सह-लेखक डॉक्टर कैथलीन स्मिथ के मुताबिक हमने खनन के दौरान न्यूनतम स्तर पर पाई जाने वाली मात्रा के बराबर सोना कचरे में पाया है। उन्होंने बताया कि इंसानी मल में सोना, चांदी, तांबा के अलावा पैलाडियम और वैनेडियम जैसी दुर्लभ धातु भी होती है।शोधदल का मानना है कि अमेरिका में हर साल गंदे पानी से 70 लाख टन ठोस कचरा निकलता है। इस कचरे का आधा हिस्सा खेत और जंगल में खाद के रूप में उपयोग मे लिया जाता है बचे हुए आधो हिस्से को जला दिया जाता है या फिर जमीन भरने के काम में ले लिया जाता है। धातु निकालने के लिए औद्योगिक खनन प्रक्र

एलियंस ने परमाणु युद्ध से हमें बचाया

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वाशिंगटन। अमेरिका के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री ने दावा किया है कि अमेरिका और रूस के बीच परमाणु युद्ध रोकने और शांति स्थापित करने के लिए एलियन पृथ्वी पर आए थे। डॉ. एडगर मिचेल नामक यह सज्जन चांद पर पहुंचने वाले छठे व्यक्ति थे। वह 1971 में "अपोलो 14" मिशन से वहां गए थे। 84 वर्षीय मिचेल के अनुसार 16 जुलाई 1945 को न्यू मेक्सिको राज्य के वाइट सैंड्स में परमाणु परीक्षण के दौरान वहां यूएफओ (अज्ञात अंतरिक्ष यान) दिखाई दी थीं। उनके अनुसार एलियन हमारे परमाणु परीक्षणों के स्थानों में गहरी रुचि रखते थे और उन्होंने उस समय दोनों महाशक्तियों- रूस और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध के खतरे को समाप्त किया था। वह कहते हैं कि उस समय वहां मौजूद अमेरिकी सेना के कर्मचारियों के दर्ज बयान उनके दावों को सच्चा साबित करते हैं। इससे पहले भी मिचेल एलियंस से जुड़े कई रोचक बयान दे चुके हैं। उनके अनुसार हमारी तकनीक उनके जैसी विकसित नहीं है, लेकिन यदि वह उग्र होते तो पृथ्वी पर मानवजाति का नामोनिशान ही नहीं बचता। इसके अलावा, वह पहले यह भी अंदाजा लगा चुके हैं कि शायद एलियन देखने में बहुत-कुछ फिल्मी ईट

उड़ने वाला रोबोट

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जर्मनी में वैज्ञानिकों ने ऐसा मशीनी परिंदा बनाया है जो हूबहू पक्षियों की तरह उड़ान भरता है. बहुत ही हल्के इस रोबोट को स्मार्टबर्ड का  नाम दिया गया है. sabhar ; http://www.dw.com/

हल्दी और एंटीबायोटिक्स का मिश्रण कई गुना उपयोगी

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भारत के हैदराबाद विश्वविद्यालय और रूस के नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एक अंतर्राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत ऐसी दवाइयां तैयार करने के काम में जुटे हुए हैं जिनके लिए हल्दी सहित अन्य पारंपरिक भारतीय मसालों का उपयोग किया जा सकता है। नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई एक सूचना के अनुसार, "प्रोफेसर अश्विनी नानिया के नेतृत्व में हैदराबाद विश्वविद्यालय के भारतीय वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि अगर हल्दी और एंटीबायोटिक्स को मिलाकर क्रिस्टल बनाए जाएं और आगे इन क्रिस्टलों को पीसकर दवाइयां बनाई जाएं तो ऐसी दवाइयों का असर कई गुना बढ़ जाएगा।" इस परियोजना में शामिल रूसी वैज्ञानिकों का नेतृत्व नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय के ठोस रसायनिक विज्ञान विभाग की प्रमुख और इस विश्वविद्यालय की एक वरिष्ठ शोधकर्ता, प्रोफेसर ऐलेना बोल्दरेवा कर रही हैं। sabhar http://hindi.sputniknews.com/   और पढ़ें:  http://hindi.sputniknews.com/hindi.ruvr.ru/news/2015_01_16/282153412/

टेलीफोन और मोबाइल के बिना कहीं भी किसी से बात करने की कला

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क्या आप अपनी बातों को बिना मोबाईल, टेलीफोन या दूसरे भौतिक क्रियाओं और साधनों के दूसरों तक पहुंचा सकते हैं। एक बारगी आप कहेंगे ऐसा संभव नहीं है, लेकिन यह संभव है। आप बिना किसी साधन के दूसरों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं यह संभव है दूरानुभूति से, एफडब्ल्यूएच मायर्स ने इस इस बात का उल्लेख किया है इसे टेलीपैथी भी कहते हैं। इसमें ज्ञानवाहन के ज्ञात माध्यमों से स्वतंत्र एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क में किसी प्रकार का भाव या विचार पहुंचता है। आधुनिक मनोवैज्ञानिक दूसरे व्यक्ति की मानसिक क्रियाओं के बारे में अतींद्रिय ज्ञान को ही दूरानुभूति की संज्ञा देते हैं। परामनोविज्ञान में एक और बातों का प्रयोग होता है। वह है स्पष्ट दृष्टि। इसका प्रयोग देखने वाले से दूर या परोक्ष में घटित होने वाली घटनाओं या दृश्यों को देखने की शक्ति के लिए किया जाता है, जब देखने वाला और दृश्य के बीच कोई भौतिक या ऐंद्रिक संबंध नहीं स्थापित हो पाता। वस्तुओं या वस्तुनिष्ठ घटनाओं की अतींद्रिय अनुभूति होती है यह प्रत्यक्ष टेलीपैथी कहलाती है।टेलीपैथी के जरिए किसी को किसी व्यक्ति को कोई काम करने के लिए मजबूर भी किया जा सकता ह

टाइप करने का झंझट खत्म, जो बोलोगे वो फटाफट टाइप कर देगा ये एप

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नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट ने स्मार्टफोन यूजर्स के लिए नया और शानदार एप  माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर  लॉन्च किया है। फिलहाल इस एप को एंड्रॉयड और आईओएस दोनों के लिए उपलब्ध कराया गया है। यह एप स्मार्टफोन के साथ-साथ स्मार्टवॉच (एप्पल वॉच) पर भी काम करता है। इसके अलावा यह भाषा ट्रांसलेशन का काम भी करता है। इस मामले में यह एप  गूगल ट्रांसलेट  एप पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। 50 भाषाओं को करता है सपोर्ट माइक्रोसॉफ्ट का यह एप 50 तरह की भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसके अलावा इस एप में वॉयस को सुनकर टेक्स्ट टाइप करने का फीचर भी दिया गया है। यानी यूजर्स जो बालेंगे वह यह एप चंद सेकेंड में ही टाइप कर देगा। गूगल ट्रांसलेट पर भारी भाषा ट्रांसलेशन के मामले ये माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर एप गूगल ट्रांसलेट पर भारी पड़ सकता है। क्योंकि गूगल ट्रांसलेट सिर्फ 27 भाषाओं को सपोर्ट करता है, जबकि यह एप 50 भाषाओं को सपोर्ट करता है। पॉपुलर हुआ माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर को अब तक हजारों लोग लाइक कर चुके हैं। यूजर्स द्वारा इएप को गूगल प्ले स्टोर पर 4.5 रेटिंग दी गई है। इस एप का कुल साइज 5.3 एम

नासा की खींची हुई फोटो में दिखा एलियन का अंतरिक्ष यान

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वाशिंगटन। एलियन वास्तव में है या नहीं अभी तक यह रहस्य ही है, लेकिन नासा के एक अंतरिक्ष यान द्वारा साल 1960 में ली गई एक तस्वीर में एलियन का यान दिखने की बात कही जा रही है। नासा के इस अंतरिक्ष या न द्वारा ली गई�तस्वीर�में एक अस्पष्ट वस्तु दिखाई गई है जिसे एक वैज्ञानिक ने एलियन का यान होना बताया है। प्रोजेक्ट मर्करी के दौरान भेजी गई थी तस्वीर - यह तस्वीर  प्रोजेक्ट मर्करी  के दौरान भेजी गई थी। स्कॉट सी-वेरिंग का कहना है कि नासा के अंतरिक्ष यान द्वारा 1960 में ली गई इस तस्वीर में दिख रही एक अस्पष्ट वस्तु  एलियन का अंतरिक्षयान  हो सकती है। वेरिंग का कहना है कि शुरू आत से ही अंतरिक्ष एलियन के प्रेक्षक मनुष्यों के मिशन पूरी निगाह रख रहे हैं। अंतरिक्ष यान मर्करी-रेडस्टोन वन ए द्वारा 19 दिसंबर, 1960 में ली गई इस तस्वीर में तस्वीर में उन्होंने यह विसंगति देखी थी। ब्लॉग के जरिए दी जानकारी - वेरिंग ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि मर्करी मिशन की कुछ तस्वीरों में उन्होंने एक तस्तरीनुमा वस्तु पाई है। यह मिशन मर्करी था जो दिसंबर 1960 में शुरू हुआ था। उनका कहना है कि हो सकता है मानव इतिहास

बाइक जो चलती है पानी से, 1 लीटर में 500 किमी.

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पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों से हर व्यक्ति परेशान है। काश! कुछ ऐसा हो कि पानी से ही सब वाहन चलने लगे। तो खुश हो जाइये क्योंकि ऐसा हो चुका है, ब्राजील के साओ पोलो में रहने वाले एक व्यक्ति ने यह कारनामा कर दिखाया है। साओ पोलो में रहने वाले रिकार्डो एजवेडोइस नाम के व्यक्ति ने एक ऐसी बाइक का निर्माण किया है जो एक लीटर पानी में 500 किमी. तक की दूरी तय कर सकती है। इसका एक वीडियो भी यूट्यूब पर अपलोड किया गया है। रिकार्डो ने अपनी इस बाइक का नाम टी पॉवर एच2ओ रखा है। इस बाइक में एक बैटरी लगी है। पानी डालने पर इस बैटरी के जरिए हाइड्रोजन बनती है। इसी हाइड्रोजन से बाइक चलती है। बाइक के इंजन में इस हाइड्रोजन को ईधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। रिकार्डो अपनी बाइक की टेस्टिंग के लिए तैयार हैं। -sabhar : http://www.jagran.com/

फ़ोन हाथ में लेते ही हैक करने वाला शख़्स

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रोज इवेलेथ बीबीसी फ़्यूचर 20 जून 2015 यदि आप सेथ व्हाल के हाथ में अपना मोबाइल दें, तो वो क्षण भर में अपकी तस्वीरें, फ़ोटो, पासवर्ड चोरी कर लेते हैं. लेकिन ये कैसे संभव है? सेथ व्हाल उन लोगों में से हैं जिनके शरीर में चिप लगा हुआ. व्हाल अमरीकी नेवी के पूर्व अधिकारी हैं. लेकिन अब वे एपीए वायरलेस कंपनी के साथ इंजीनियर हैं और उनका काम बायो-हैंकिंग है. व्हाल की बात आगे बढ़ाने से पहले एक सवाल. क्या आपको पिछले दिनों आई फ़िल्म पीके याद है? इसमें एलियन का रोल कर रहे आमिर किसी लड़की का हाथ पकड़कर उसके मन की सारी बातें, भाषा-बोली, दिमाग में मौजूद हर बात जान लेते हैं ! ये भी कुछ ऐसा ही है. व्हाल अब साइबर सिक्योरिटी पर काम कर रहे हैं. वो अपने साथी रॉड सोटो के साथ दिखाते हैं कि केवल टच करते ही वे फ़ोन को हैक कर सकते हैं. ये दोनों अपने चिप का इस्तेमाल किसी आपराधिक काम के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता फैलाने के लिए कर रहे हैं. उनका मक़सद ये बताया है कि किस तरह से आने वाले दिनों में हमारे फोन और कंप्यूटर की जानकारी आसानी से हैक होगी और हमें इसका एहसास तक नहीं होगा. हैकमियामी में प्रद

दिमाग़ का बैक-अप और अमर होने की चाह..

आइंस्टीन की गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने की नई तकनीक

न्यूयॉर्क। वैज्ञानिकों ने ऐसी नई तकनीक ईजाद की है जिसके जरिए गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाना संभव होगा। गुरुत्वीय तरंगें ऐसी अदृश्य तरंगें हैं, जिनका जिक्र अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने सापेक्षता के सिद्धांत में किया था। न्यूयॉर्क में अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नैचुरल हिस्ट्री के भौतिकविद् बैरी मैक करनन ने कहा, ‘गुरुत्वीय तरंगें त्वरित द्रव्यों से निकलती हैं।’ इन गुरुत्वीय तरंगों को सीधे तौर पर पहचानने का कोई माध्यम नहीं है। मैक करनन और उनके सहयोगियों का कहना है कि गुरुत्वीय तरंगों का पदार्थ पर उससे ज्यादा प्रभाव पड़ता है, जितना पहले माना जाता था। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे तारे जो अपने करीब से गुजरने वाली गुरुत्वीय तरंगों के समान आवृत्ति पर कंपन करते हैं वे इन हलचलों से बड़ी मात्रा में ऊर्जा ग्रहण कर सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि चुनौती इस बात का पता लगाने की है कि चिह्नित किए गए तारे की चमक गुरुत्वीय तरंगों के कारण है या इसका कोई अन्य कारण है। क्या है उम्मीद उन्होंने कहा, ‘जब ब्लैक होल्स करीब आएंगे तो उनके द्वारा उत्पन्न होने वाली गुरुत्वीय तरंगों की आवृत्ति बढ़ेगी। ऐसे में हम छोटे ता

मानव - मस्तिष्क

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मानव - मस्तिष्क इतनी विलक्षणताओं का केंद्र है जिसके आगे वर्तमान में अविष्कृत हुए समस्त मानवकृत उपकरण एवं यंत्रों का एकत्रीकरण भी हल्का पड़ेगा. अभी तक मस्तिष्क के 1/10 भाग की ही जानकारी मिल सकी है, 9 /10 भाग अभी तक शरीर शास्त्रियों और वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना हुआ है. मस्तिष्क के इस 9/10 भाग में असीमित क्षमताएं भरी पड़ी हैं. मस्तिष्क में अगणित चुम्बकीय केंद्र हैं जो विविध-विधि रिसीवरों और ट्रांसफ़ॉर्मरों का कार्य सम्पादित करती हैं. मानव मस्तिष्क में असीमित रहस्यात्मक असीम शक्ति हैं जिसके विषय में हमें हलकी-फुलकी सतहीय सत्तर की जानकारी हैं. योग साधना का एक उदेश्य इस चेतना विद्युत -शक्ति का अभिवर्धन करना भी है. इसे मनोबल, प्राणशक्ति और आत्मबल भी कहते हैं. संकल्प शक्ति और इच्छा शक्ति के रूप में इसके चमत्कार देखे जा सके हैं. मनोविज्ञान के समूचे खजाने में दो चीजें भरी हैं सूत्र [ Formula ] और तकनीक [Technique ] . सूत्रों में स्थिति का विवेचन होने के साथ तकनीकों के संकेत भी हैं.तकनीकों द्वारा स्थिति को ठीक करने के प्रयास किये जातें हैं. संकल्प शक्ति संकल्प शक्ति मस्तिष्क के वे हाई moment

कुण्डलिनी - दी सर्पेंट पॉवर

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ब्रह्माण्ड में दो प्रकार की शक्तियां कार्य करती हैं, एक फिजिकल जो पदार्थों में गतिशीलता और हलचल पैदा करती हैं दूसरी मेटाफिजिकल जो चेतना के रूप में प्राण धारीओं में इच्छाओं और अनुभूतियों का संचार करती हैं. अक्सर हम लोग केवल प्रत्यक्ष शक्तियों का प्रमाण आधुनिक उपकरणों के माध्यम से प्राप्त कर लेतें हैं और सजहता से उनकी सत्ता भी स्वीकार कर लेते हैं. इसमें  हीट ,  लाइट ,  मग्नेटिक ,  इलेक्ट्रिसिटी ,  साउंड   और  मकैनिकल इनर्जी आती हैं. मानव शरीर एक जीता-जागता बिजलीघर हैं ऊर्जा के सहारे यंत्र चलते हैं, मानव शरीर भी एक प्रकार का यंत्र हैं इसके संचालन  में जिस ऊर्जा का प्रयोग होता हैं उसे  जीव  - विद्युत  कहा जाता हैं. ऋण या  negative   तथा धन या  positive   धाराओं के मिलाने से बिजली उत्पन्न होती हैं और उससे यंत्र चलते हैं.                                      मेरुदंड या  spinal  chord   शरीर की आधारशिला हैं. मेरुदंड के अन्दर पोले भाग में विद्युत प्रवाह के लिए अनेक नाड़ियाँ  हैं जिनमें इडा, पिंगला और सुषुम्ना  मुख्य हैं.इडा बाई नासिका से सम्बंधित  negative   या चन

इन कारणों से छोटी होती है जिंदगी

टीवी ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स एंड मेडिसिन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार टीवी का हर एक घंटा आपके जीवन से 22 मिनट कम कर रहा है. यानि अगर आप औसतन हर रोज छह घंटे टीवी देखते हैं, तो आपके जीवन से पांच साल कम हो सकते हैं. सेक्स ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि जो पुरुष महीने में कम से कम एक बार भी सेक्स नहीं करते, उनके मरने का खतरा उन पुरुषों की तुलना में दोगुना होता है जो हफ्ते में एक बार सेक्स करते हैं. नींद सोना शरीर के लिए जरूरी है लेकिन बहुत ज्यादा सोने से आपकी उम्र कम हो सकती है. आठ घंटे से ज्यादा बिस्तर पर पड़े रहने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है. इसलिए नियमित रूप से सोएं, लेकिन आठ घंटे से ज्यादा नहीं. बैठे रहना क्या आपको दफ्तर में कई घंटे बैठना पड़ता है? जामा इंटरनल मेडिसिन की रिसर्च बताती है कि दिन में ग्यारह घंटे बैठने से मौत का खतरा 40 फीसदी बढ़ जाता है. इसलिए काम के बीच में ब्रेक लें और हो सके तो कुछ देर खड़े रह कर काम करें. अकेलापन इंसान के लिए किसी का साथ, किसी से बातचीत करना जरूरी है. कुछ लोग तनाव से दूर रहने के लिए अकेले रहना पसंद करते हैं. ल

दुनिया में पहली बार जापान में रोबोट्स की शादी

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दुनिया में पहली बार कोई रोबोट जोड़ा शादी के बंधन में बंध गया है। यह शादी जापान की राजधानी तोक्यो में हुई। रोबोट दूल्हे का नाम फ्रायोस और दुल्हन का नाम युक्रिन था। दोनों ने पारंपरिक परिधान पहन रखे थे। यह आयोजन मावा डेंकी नामक कंपनी ने करवाया था। इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज बनाने वाली इस कंपनी ने फ्रायोस को डिजाइन किया है। युक्रिन की शक्ल काफी कुछ जापान की पॉप स्टार युकी काशीवागी से मिलती है लेकिन कार्यक्रम में उसे रोबोरिन के नाम से ही संबोधित किया गया। जानकारों के अनुसार, ऐसा कॉपीराइट की कानूनी अड़चनों से बचने के लिए किया गया। शादी के कार्ड शादी में शामिल हुए लोगों के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए शादी के कार्ड भी छपवाए गए थे। इसमें एक दिल में दोनों रोबोट की फोटो एक साथ छापी गई थी। तोक्यो में हुए इस फंक्शन में दूल्हे फ्रायोस और दुल्हन युक्र... परंपरागत पहनावे तोक्यो में हुए इस फंक्शन में दूल्हे फ्रायोस और दुल्हन युक्रिन ने पारंपरिक परिधान पहन रखे थे। फंक्शन में कुल 100 अलग-अलग तरह के रोबोट्स दोनों ओर से शामिल हुए थे। इनमें से ज्यादातर को परंपरागत परिधान पहनाए गए थे। इनमें

रीढ़ की हड्डी में होता है छोटा दिमाग

वॉशिंगटन अमेरिकी शोधकर्ताओं ने मनुष्यों की रीढ़ की हड्डी में एक छोटे मस्तिष्क का पता लगाया है। यह हमें भीड़ के बीच से गुजरते वक्त या सर्दियों में बर्फीली सतह से गुजरते वक्त संतुलन बनाने में मदद करती है और फिसलने या गिरने से बचाती है। इस तरह के कार्य अचेतन अवस्था में होते हैं। हमारी रीढ़ की हड्डी में मौजूद तंत्रिका कोशिकाओं के समूह संवेदी सूचनाओं को इकट्ठा कर मांसपेशियों के आवश्यक समायोजन में मदद करते हैं। कैलिफोर्निया स्थित एक स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान 'साल्क' के जीवविज्ञानी मार्टिन गोल्डिंग के मुताबिक 'हमारे खड़े होने या चलने के दौरान पैर के तलवों के संवेदी अंग इस छोटे दिमाग को दबाव और गति से जुड़ी सूचनाएं भेजते हैं।' गोल्डिंग ने कहा, 'इस अध्ययन के जरिए हमें हमारे शरीर में मौजूद 'ब्लैक बॉक्स' के बारे में पता चला। हमें आज तक नहीं पता था कि ये संकेत किस तरह से हमारी रीढ़ की हड्डी में इनकोड और संचालित होते हैं।' प्रत्येक मिलिसेकंड पर सूचनाओं की विभिन्न धाराएं मस्तिष्क में प्रवाहित होती रहती हैं, इसमें शोधकर्ताओं द्वारा खोजे गए संकेतक भी शामिल है

क्या थम सकती है हमारी उम्र?

लंदन हमेशा जवान बने रहने की ख्वाहिश आखिर किसे नहीं होती! लेकिन चेहरे की झुर्रियां और ढीली होती हमारी मांसपेशियां इस ख्वाहिश पर जबर्दस्त आघात सी लगती हैं। लेकिन हो सकता है, कि आने वाले कुछ समय में ये तमन्ना हकीकत में तब्दील हो जाए। उम्र को रोक कर रखने वाली एक नई दवा पांच साल के भीतर आ सकती है । ये कहना है उन वैज्ञानिकों का जिन्होंने एक ऐसे एन्जाइम का पता लगाया है, जो हमारी उम्र संबंधी परेशानियों को बढ़ाने और मसल्स को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार होता है। बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के इन शोधकर्ताओं के अनुसार यदि इस एन्जाइम के प्रभाव को एक समय के बाद रोक दिया जाए, तो उम्र पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना बंद हो जाएगा। इस एन्जाइम का नाम '11 बीटा-एचएसडी 1' है। यह शरीर की मसल्स को समय के साथ-साथ ढीला और कमजोर करने का काम करता है। हाल ही में किए गए शोध में इसी एन्जाइम की भूमिका को पूरी तरह से समझा गया है। शोध में पाया गया कि '11 बीटा-एचएसडी 1' एन्जाइम का उत्सर्जन 20 से 40 साल की महिलाओं की तुलना में 60 साल से ऊपर की महिलाओं में 2.72 गुना ज्यादा हो जाता है। जैसे-जैसे एन्जाइम शरीर