अप्रैल 07, 2014 in इंसान ने किया इस ग्रेट साइंस का इस्तेमाल, जानवरों को भी मिली नई जिंदगी
प्रोस्थेटिक प्राचीन ग्रीक भाषा का शब्द होता है। मेडिकल साइंस के मुताबिक, यह आर्टिफीशियल डिवाइस होते हैं। जन्मजात, बीमारी और हादसे में अंग खो देने के बाद यह आर्टिफीशियल डिवाइस उस अंग की जगह काम करते हैं। यह प्राचीन विज्ञान है। इसने दुनियाभर के करोड़ों लोगों को नया जीवन दिया है। होपा चार साल का एक मिक्सड ब्रीड डॉगी है। जिसके जन्म से ही दो पैर नहीं थे। 28 फरवरी 2010 को इजरायल के तेल अवीव में प्रोस्थेटिक डिवाइस की मदद से वह पहली बार चल पाया। इस डिवाइस को होपा के लिए खास तौर पर एनिमल लविंग आर्ट के छात्रों ने बनाया था।
प्रोस्थेटिक पैर पाने वाली पहली बिल्ली
यह है ऑस्कर, पहली बिल्ली जो प्रोस्थेटिक की मदद से चल पाई। एक हादसे में अपने दौ पैर खो चुकी ऑस्कर को स्पेशल इम्प्लांट आईटीएपी दिया गया था। इसमें इम्प्लांट के ऊपर स्किन ग्रो कर सकती है। प्रोस्थेटिक पर लगा अंब्रेला जैसा पार्ट इसे संक्रमण से बचाता है। यह ऑपरेशन इंसानों के लिए भी क्रांतिकारी रहा है।

पहली डॉल्फिन जिसे मिला प्रोस्थेटिक फिन
जापान के ओकीनावा में एक कीपर एक बॉटलनोज डॉल्फिन फ्यूजी की आर्टिफिशियल टेल को पकड़े हुए है। 2002 में एक बीमारी की वजह से फ्यूजी ने अपने फिन का 75 फीसदी हिस्सा गंवा दिया था। अब प्रोस्थेटिक टेल की मदद से यह फिश तैर पा रही है। यह पहली बार था, जब किसी डॉल्फिन पर आर्टिफिशियल फिन का इस्तेमाल हुआ है। इसे जापान की टायर मेकर कंपनी ग्रिजस्टोन ने बनाया था।
कछुए ने पैर खोए, पहियों से मिली मदद
इजरायल में रहने वाले इस खूबसूरत कछुए पर लॉन मोअर चलने की वजह से उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। वह अपने दो पैर चलाने में अक्षम हो गया था। अब जेविका के दो पैरों की जगह दो पहियों ने ले ली है। अब जिससे वह पहले की तरह चलने लगा है।
48 वर्षीय हथिनी को मिल गया पैर
48 वर्षीय मादा हाथी मोटाला को अब अपने नए परमानेंट प्रोस्थेटिक पैर मिल गए हैं, जो उसके वजन को संभाल सकते हैं। अब वह चल सकती है। मोटाला का आगे का एक पैर 10 साल पहले म्यांमार-थाई सीमा में बिछी लैंडमाइन पर पैर रखने से टूट गया था। sabhar :http://www.bhaskar.com/
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