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शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013
बढ़ती उम्र में भी बरकरार रहे आकर्षण
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बढ़ती उम्र की दहलीज पर कदम रखने के बाद भी जिंदगी का आकर्षण और जोश खत्म नहीं हो जाता। यदि आप अपनी सोच व जीवनशैली में सकारात्मक बदलावों को तरजीह देती हैं तो यह तय मानें कि बढ़ती उम्र में भी आप युवावस्था की तरह स्मार्ट और चुस्त-दुरुस्त बनी रहेंगी। साथ ही जिंदगी की नई पारी में सक्रियता से उपलब्धियों रूपी बेहतर बल्लेबाजी कर सकती हैं।
उम्र बाधक नहीं
उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक परिवर्तन होना तय है, इन्हें रोका तो नहीं जा सकता, पर इस परिवर्तन से होने वाले नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम जरूर किया जा सकता है। इस संदर्भ में नई दिल्ली की 45 वर्षीया दीपा सेठी अपनी जिंदगी की गतिशीलता को अपनी मां नीलम भाटिया को प्रेरणास्रोत मानती हैं। बकौल दीपा, मेरी मां एक कुशल गृहिणी हैं। गृहस्थी संभालने में उनका कोई सानी नहीं। उन्होंने अपनी चार संतानों की परवरिश पर बेहद गंभीरता से ध्यान दिया है। मैं जब स्कूली शिक्षा पूरी करके कालेज में पढ़ रही थी, तब उन्होंने अपनी प्रौढ़ावस्था में घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए फूड प्रिजर्वेशन व प्रोसेसिंग पाठ्यक्रम में दाखिला लिया। उन्होंने जैम, जेली, अचार, मुरब्बा आदि के निर्माण और रखरखाव की नवीनतम जानकारी ली। मुझे ताज्जुब होता है कि कम उम्र में शादी होने और उच्च शिक्षा से वंचित होने के बावजूद मां में कुछ नया सीखने की जिज्ञासा और ललक थी। कोर्स पूरा करने के बाद उन्होंने घर पर ही डिब्बाबंद खाद्य पदार्र्थो का निर्माण शुरू किया। कुछ समय बाद उन्होंने डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ बनाने वाली एक बड़ी कंपनी से करार किया और उसके लिए प्रोडक्ट बनवाने लगीं। सच कहूं तो उनके इस कारोबार ने हमारे घर में खुशहाली की बारिश कर दी। कहने का आशय यह है कि बढ़ती उम्र जिंदगी में कुछ कर गुजरने में बाधक नहीं है।
आशावादी सोच रखें
बढ़ती उम्र में अपने स्वास्थ्य को चुस्त-दुरुस्त रखने में जिंदगी के प्रति आशावादी व यथार्थवादी सोच का अपना एक विशिष्ट महत्व है। चाहे कैसी भी परिस्थितियां आएं अपनी सोच को सकारात्मक रखकर आप तनाव और टेंशन से बच सकती हैं। शहरों में रहने वाली एक बड़ी आबादी में तनाव से संबंधित तमाम समस्याएं नकारात्मक सोच के कारण ही उपजी हैं। इसलिए इनसे बचें।
शौक पालना जरूरी है
बढ़ती उम्र में स्वस्थ व सक्रिय रहने के लिए किसी न किसी प्रकार के रचनात्मक शौक में मशगूल होना बेहद आवश्यक है। इससे आप व्यस्त रहने के साथ-साथ कुछ नए अनुभव भी सीखती हैं। अगर आपके पास समय है तो सामाजिक कार्र्यो में भी बढ़-चढ़कर भाग ले सकती हैं। इससे आप अपने समय का बेहतर उपयोग कर सकती हैं। इससे सामाजिक दायरा बढ़ेगा। साथ ही नए-नए लोगों से संपर्क भी। एकरसता या बोरियत दूर करने के लिए आप पर्यटन स्थलों की भी सैर कर सकती हैं। इससे पूरे शरीर को ताजगी मिलती है। इसी प्रकार अपने मन की शांति के लिए कविता लिखना, कहानी लिखना, पेंटिंग करना आदि समय का बेहतर उपयोग है।
जब जागो तब सबेरा
अच्छी शुरुआत के लिए जरूरी नहीं कि कोई समय तय किया जाए। यह किसी भी समय की जा सकती है। सब कुछ आपकी संकल्प शक्ति या इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है। आप अपनी जिंदगी की दूसरी पारी के बारे में किस तरह का नजरिया रखती हैं। इसी सवाल के जवाब में आपकी प्रसन्नता का राज छिपा है sabhar : jagaran.com
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