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शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

ह्यूमन लंग्स लैब में

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लैब में ह्यूमन लंग्स तैयार, लेकिन करना होगा सालों इंतजार

वैज्ञानिकों ने पहली बार लैब में ह्यूमन लंग्स बनाने में सफलता हासिल की है। मानव शरीर के अंगों के तैयार करने की दिशा में यह एक उत्साहजनक कदम है। हालांकि, इसे इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित करने में कई साल का वक्त लगेगा। अनुमान है कि इसमें 12 साल तक का वक्त और लग सकता है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मेडिकल के क्षेत्र में यह बड़ी कामयाबी हासिल की है।
लैब में ह्यूमन लंग्स तैयार, लेकिन करना होगा सालों इंतजार
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास मेडिकल ब्रांच की जोआन निकोलस ने कहा कि यह अभी तक एक साइंस फिक्शन रहा है, लेकिन वे इसे वैज्ञानिक तथ्य बनाने की ओर आगे बढ़ रहें हैं। यदि लंग्स काम करने लगें, तो यह बड़ी उपलब्धि होगी। इससे लंग्स ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे 1,600 अमेरिकियों को बहुत मदद मिलेगी। लैब में तैयार किया गया नया मानव अंग फेफड़ा भी है। इससे पहले श्वांस नली और लीवर तैयार किए जा चुके हैं।
लैब में ह्यमून लंग्स ऐसे तैयार:
डॉक्टर निकोलस ने बताया कि दो बच्चे जो कार एक्सीडेंट में मारे गए थे। उनके लंग्स भी क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन इनमें कुछ स्वस्थ ट्श्यिू भी थे। इनका उपयोग ट्रांसप्लांट किया जाना था। उन्होंने बताया कि लंग्स से सारी सेल्स अलग की और उसके ढांचे को अलग कर दिया। अब इसमें कोई भी सेल्स नहीं बची थी। इसके बाद उन्होंने दूसरी बॉडी के फेफड़ों से कुछ सेल्स लेकर इस ढांचे से जोड़ दी।
तकनीक से मिली मदद :
इन लंग्स के तैयार होने में कई महीने का वक्त लग सकता था, लेकिन यूटीएमबी मेडिकल के छात्र डॉक्टर माइकल रिडल ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया, जिससे लंग्स के तैयार होने की प्रक्रिया तेज हो गई। मेडिकल टीम ने बताया कि सेल्स को लंग्स के ढांचे में विकसित करने में चार माह तक का समय लगता, लेकिन सिर्फ तीन दिन में इस प्रक्रिया में परिणाम आ गए।
डॉक्टर जोआन निकोलस ने बताया कि उन्हें दुनिया को इस बारे में बताने में एक साल का समय लगा कि वास्तव में एक अच्छा काम किया है।
डॉक्टर निकोलस ने बताया कि लैब में तैयार किए गए फेफड़ों को सबसे पहले सूअर को प्रत्यारोपित किया जाएगा। इस पर कम से कम दो साल तक काम किया जाएगा।

यूनिवसिर्टी ऑफ पिट्सबर्ग के मैकगोवेन इंस्टिट्यूट फॉर रिजनरेटिव मेडिसिन के निदेशक डॉक्टर स्टीफन बैडलाक ने कहा कि यह संपूर्ण अंग की इंजीनियरिंग अंग दानदाता की कमी को दूर करने का काम कर रही है। sabhar : bhaskar.com

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