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रविवार, 21 अक्टूबर 2012

शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटर

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प्लेब्वॉय मैगज़ीन के लिए हाल ही में न्यूड होकर तहलका मचाने के बाद शर्लिन चोपड़ा लगातार ऐसा कुछ कर रही हैं जिससे वह चर्चा में बनी रहें.
वह आए दिन ट्विटर पर अपने बोल्ड कमेन्ट पोस्ट करने के साथ साथ न्यूड और सेमी न्यूड तस्वीरें भी अपलोड कर रही हैं.

हाल ही में शर्लिन ने ट्विटर पर अपनी सेमी न्यूड तस्वीरें अपलोड कर तहलका मचा दिया था.
अब इस बार उन्होंने कुछ हॉट और टॉपलेस तस्वीरें अपलोड कर सनसनी फैला दी है


sabhar : bhaskar.com
.PICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटर
PICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटर
PICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटरPICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटरPICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटरPICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटरPICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटरPICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटर

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कैंसर, डायबिटीज, दिल की बीमारियों का इलाज आसान होगा

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बेकार, बंजर, बिना काम का डार्क मैटर। वर्ष 2000 में जब पहली बार मनुष्य के जीन समूह (जीनोम) को सिलसिलेवार तरीके से जमाया गया तब वैज्ञानिकों ने उसके ज्यादातर हिस्से का इस तरह वर्णन किया था। तीन अरब मूल जोड़ों से बने हमारे डीएनए को केवल 22000 जीन्स में बांटा गया। यह मानवीय जीनोम का केवल दो प्रतिशत है। वैज्ञानिकों का कहना था, बाकी बहुत ज्यादा काम का नहीं है।
 
 
 
हमारे आनुवंशिक गौरव के लिए सौभाग्य की बात है कि यह निष्कर्ष गलत निकले हैं। अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) की अगुवाई में हो रही खोज से पता लगा है, 98 प्रतिशत जीनोम का अधिकतर हिस्सा बायो केमिकल हलचल की जीवंत दुनिया है। इनसाइक्लोपीडिया ऑफ डीएनए एलिमेंट्स (एनकोड) प्रोजेक्ट ने कुछ लाइलाज बीमारियों के उपचार की संभावनाएं पेश की हैं। एनआईएच के राष्ट्रीय मानव जीनोम रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ एरिक ग्रीन ने पत्रकारों को बताया, जीवन ने कैसे आकार लिया- इस बुनियादी सवाल का हल खोजने के लिए यह एक शक्तिशाली संसाधन है। इससे हमें मनुष्य की बीमारियों के जीनोमिक आधार को समझने में मदद मिलेगी।
 
 
 
डीएनए का वह हिस्सा जो जीन नहीं बनाता, निठल्ला नहीं बैठा है। वह जीन्स को बताता है, कब काम करना है और किस वक्त आराम से बैठना है। वह यह भी निर्देश देता है, विभिन्न कोशिकाओं (सेल्स) में जीवन के किस बिंदु पर कितनी प्रोटीन का निर्माण करना है। उदाहरण के लिए उस 80 प्रतिशत डीएनए में किसी जगह से किसी कोशिका को दिमाग का न्यूरॉन बनाने या पैनक्रियास को इंसुलिन बनाने या चमड़ी की कोशिका को बूढ़ी कोशिका का स्थान लेने का निर्देश दिया जाता है।
 
 
 
एनकोड ने बेकार समझे जाने वाले 98 प्रतिशत जीनोम की रिसर्च को नई दिशा दी है। अगर कोई बीमारी जेनेटिक ऑन-ऑफ स्विच में गड़बड़ी से हुई है तो शोधकर्ता या डॉक्टर उसका पता लगाकर इलाज कर सकेंगे।  यह खोज दिल के रोगों, डायबिटीज, अल्जीमर्स और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज को आसान बनाएगी। सबसे अधिक फायदा कैंसर मरीजों को होने की संभावना है। यह बीमारी कई टिश्यूज में अनेक तरह से होती है।
 
 
 
कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि कैंसर का मुख्य कारण है। इधर, कैंसर रोधी नई दवाएं ट्यूमर निर्माण की प्रक्रिया को निशाना बनाती हैं। अब एनकोड ने कैंसर की कोशिकाओं को जीवित रखने वाले समूचे सर्किट का पता लगा लिया है। इससे मौजूदा दवाओं का नए तरीके से उपयोग हो सकेगा। उदाहरण के लिए स्तन और फेफड़े के ट्यूमर एक ही सर्किट में हैं तो किसी मरीज के इलाज में इस्तेमाल की गई दवा का उपयोग दूसरे के लिए भी हो सकेगा।
 
 
 
 
सेंट लुई में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कच्चे डीएनए को आरएनए में बदलने वाले दो दर्जन ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर की पहचान की है। फिर इनसे 17 किस्म के कैंसर में पाए जाने वाले प्रोटीन की पहचान की गई। इन फैक्टर के अधिक सक्रिय होने से ट्यूमर बढ़ सकते हैं। अगर इन पर काबू पाने का तरीका खोज लिया जाता है तो एक उपचार से 17 कैसरों को ठीक किया जा सकेगा। एनकोड से मानव शरीर की सेहत से संबंधित कई गुत्थियां सुलझेंगी। जीन के समूह का ब्योरा मौजूद होने से डॉक्टर आपको होने वाली बीमारियों के खतरे के प्रति सचेत रहेंगे। sabhar :bhaskar.com

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टेबलेट लें या गैलेक्सी नोट?

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सैमसंग का गैलेक्सी नोट भारतीय और विदेशी बाजार में तेजी से पॉपुलर हुआ है। मगर इसके फीचर्स के बारे में लोगों के मन में काफी दुविधा भी है। क्या यह एक एडवांस मोबाइल है? जिसमें टेबलेट की खूबियां भी समाहित हैं। या फिर यह टेबलेट का छोटा रूप है? बेहतर होगा कि हम गैलेक्सी नोट्स के फीचर्स पर एक निगाह डालते हैं, जिससे आप इसके बारे में बेहतर फैसला कर सकें।

टेबलेट की खूबियां
यह तो तय है कि गैलेक्सी नोट एक अलग किस्म की मोबाइल डिवाइस है, जिसमें टेबलेट की खूबियां और मोबाइल फोन की सहूलियत का सुंदर तालमेल है। सबसे पहली खूबी है इसका बड़े साइज का स्क्रीन। करीब 5.3 इंच का इसका एचडी सुपर एमोलेड स्क्रीन दुनिया में अपनी तरह का पहला है। इस स्क्रीन की मदद से आप न सिर्फ वेबपेज का ज्यादा बेहतर डिस्प्ले पाते हैं बल्कि वीडियो और इ-बुक्स की भी बेहतर प्रस्तुति मिलती है और उन्हें स्क्रोल या जूम-इन करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

स्मार्ट पेन
इसकी दूसरी खूबी है- स्मार्ट पेन। इसे स्टेट-आफ-द-आर्ट-इनपुट टेक्नोलाजी के नाम से भी जाना जाता है। इसकी मदद से आप न सिर्फ स्क्रीन पर कुछ लिख सकते हैं बल्कि ड्रा कर सकते हैं या उनमें रंग भी भर सकते हैं। यह डिवाइस आपको काफी रचनात्मक आजादी देती है। इस लिहाज से गैलेक्सी नोट उन लोगों के मिजाज से ज्यादा मेल खाता है जो रचनात्मक कार्यों से जुड़े हैं। यह एक ऐसा फीचर है जिसकी मदद से आप कभी भी, कहीं भी अपनी अभिव्यक्ति को रिकार्ड कर सकते हैं। चाहे तस्वीर उतारनी हो, फटाफट कुछ लिखना हो (टाइप नहीं- क्योंकि वह झंझट भरा होता है और जब तक मेल न करनी हो आप उससे परहेज करते हैं) या फिर कुछ रेखांकन करना हो।

स्पेशल फीचर्स
कलात्मकता के साथ इसके कई फिचर एक कामकाजी व्यक्ति या उसके बिजनेस मोबाइल की जरूरतों को भी पूरा करते हैं। S-प्लानर में आप को अपने डे-प्लान के लिए कई एडवांस फीचर मिलते हैं। इसके अलावा S-चॉयस के जरिए आप कई ऐसे एप्लीकेशन डाउनलोड कर सकते हैं- जो कि खास गैलेक्सी नोट्स को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। सैमसंग चैट-ऑन फीचर आपको न सिर्फ रीयल टाइम चैट की सुविधा देता है बल्कि इसकी मदद से टेक्स्ट, हाथ से लिखे नोट्स, तस्वीरें और वीडियो अपने मित्रों के साथ आसानी से शेयर कर सकते हैं।

मनोरंजन भी
जहां तक मनोरंजन की बात है तो इसके 1.4 गीगा हर्ट्ज ड्यूएल कोर प्रोसेसर की मदद से आप बखूबी रीयल टाइम वीडियो देख सकते हैं या फिर वीडियो गेम का आनंद उठा सकते हैं। गेम के शौकीन लोगों के लिए सैमसंग का गेम हब मदद कर सकता है। और अंत में यह फोन आसानी से आपकी जेब में समा जाता है sabhar : amarujala.com

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फेसबुक पर अपना दूध बेच रही हैं मम्मियां

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अपने फिगर को संतुलित रखने की चाह में मॉडर्न महिलाएं एक ओर जहां अपने बच्चों को अपना दूध नहीं पिलाना चाहतीं वहीं ब्रिटेन व अमेरिका की मम्मियां जल्दी पैसा बनाने के लिए फेसबुक समेत कई सामुदायिक मंचों से अपना दूध बेच रही हैं। हालांकि दूध खरीदने वाले माता-पिताओं का मानना है कि उनके शिशुओं को इससे फायदा हो रहा है। लेकिन विशेषज्ञों ने इस दूध के सुरक्षित होने पर आंशका जताई है। उनका कहना है कि दानदाता महिला के पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की कोई निश्चितता नहीं होती। 

एक अध्ययन के अनुसार एस्सेक्स से न्यूकैसल तक की महिलाएं ताजा या फ्रीज किया हुआ दूध बेच रही हैं। इसकी कीमत एक पाउंड प्रति इकाई है जबकि अमेरिका में इसकी कीमत दो अमेरिकी डॉलर है। डेली मेल को एक वेबसाइट ने बताया कि हमारी इस व्यवस्था में साफ सुथरा दूध निजता पूर्ण तरीके से खरीदा जा सकता है। दानदाता माताएं अपने शिशु की उम्र के साथ अपने दूध को सूचीबद्ध कराती हैं। लेकिन जर्मनी के डॉक्टरों ने नए अभिभावकों को फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्कों के जरिए निजी रूप से बच्चे के लिए दूध लेने के खिलाफ चेतावनी दी है।

साथ ही शिशु रोग विशेषज्ञों की संस्था के अध्यक्ष वूल्फरैम हार्टमैन ने कहा कि हो सकता है कि दानदाता महिलाएं कोई दवाई या नशीला पदार्थ ले रही हों, या उन्हें एड्स या हिपेटाइटिस जैसा कोई संक्रमित रोग हो। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सप्ताह के बच्चे और कुछ महीने के बच्चे की पोषण की जरूरतों भी अलग-अलग होती हैं।

सामुदायिक मंचों के अतिरिक्त मातृ दुग्ध दान करने या प्राप्त करने के लिए कानूनी तरीके भी मौजूद हैं। कुछ केंद्र स्तनपान न करवा सकने वाली माताओं के बच्चों के लिए दूसरी महिलाओं का दूध लेकर संरक्षित करते हैं। ये बैंक पूर्व निगरानी से गुजरीं उन माताओं से दूध इकट्ठा करते हैं जिनके पास पर्याप्त दूध आपूर्ति हो और जिनका बच्चा छह माह से कम उम्र का हो। इसके बाद इसे पाश्च्युरीकृत किया जाता है और फिर नजदीकी अस्पतालों को दे दिया जाता है। sabhar: amarujala.com

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शनिवार, 20 अक्टूबर 2012

17 साल की लड़की से 13 बार सेक्स नहीं: बर्लुस्कोनी

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इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने कम उम्र की नाइट क्लब डांसर के साथ सेक्स के लिए पैसा देने के आरोप से इनकार किया है. उन पर मिलान में मुकदमा चल रहा है जहाँ बर्लुस्कोनी ने कहा कि उनके घर पर कभी भी ' सेक्स से जुड़े' कोई आयोजन नहीं हुए. वह इस मुक़दमेकी सुनवाई में अचानक पहुँचे. बर्लुस्कोनी ने माना कि उनकी एक पार्टी में करीमा अल-महरूग नाम की वो लड़की आई थी. मगर साथ ही उन्होंने बताया कि जब उस लड़की से उसकी उम्र पूछी गई थी तो उसने अपनी उम्र 24 साल बताई थी और उसकी ये बात मान ली गई. अल-महरूग इस बात से इनकार करती रही हैं कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनीके साथ महज़ 17 साल की उम्र में सेक्स किया था, या वह एक वेश्या हैं. जबकि अभियोक्ताओं का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने अल-महरूग के साथ 13 बार सेक्स किया था. इटली में 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाने के लिए धन नहीं दिया जा सकता.




बर्लुस्कोनी 70 के

 
बर्लुस्कोनी पर आरोपहै कि उन्होंने रूबी नाम से जानी जाने वाली अल-महरूग के साथ तब सेक्स किया जब वह 17 साल की थीं और उसके लिए उन्हें पैसा भी दिया था. उस समय बर्लुस्कोनी ख़ुद 70 साल के थे. उन पर ये भी आरोप है कि उन्होंने बतौर प्रधानमंत्री अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके उस लड़की को पुलिस की हिरासत से छुड़वाने में मदद की थी. मगर बर्लुस्कोनी ने कहा कि उन्होंने कभी भी मिलान पुलिस पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला. मोरक्को से आई अल-महरूग चोरी के एक आरोप में गिरफ़्तार हुई थीं. सेक्स पार्टियों से जुड़े मामले में बर्लुस्कोनी ने जिन 78 लोगों को गवाह बनाने के लिए सूची पेश की है उनमें रियाल मैड्रिड के फ़ुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो और हॉलीवुड स्टार जॉर्ज क्लूनी भी शामिल हैं. ये सभी बर्लुस्कोनी की एक पार्टी में मेहमान रह चुके हैं. वह कहते रहे हैं कि उन्होंने सभी के लिए डिनर का आयोजन किया था जिसमें सभी ने साथ में खाना खाया.

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अपनी काया से प्यार करें : ऑग्विलेरा

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गायिका क्रिस्टीना ऑग्विलेरा अपनी वर्तमान काया के लिए खासी लोकप्रियता हासिल कर चुकी हैं। वह कहती हैं कि वह खुद की काया के साथ सहज महसूस करती हैं और उम्मीद करती हैं कि उनका संघर्ष अन्य महिलाओं को भी सशक्त बनाएगा।
वेबसाइट ‘द सन डॉट को डॉट यूके’ के मुताबिक ऑग्विलेरा कहती हैं कि मैं हमेशा ऐसे व्यक्ति का समर्थन करती हूं, जिसमें इच्छाशक्ति हो और जो अपनी काया को लेकर सहज रहता हो।
उसके ये गुण उसे गले लगा लेने के लिए पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा कि अपनी काया से प्यार करना बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर एक महिला होने पर यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
महिलाओं की शारीरिक काया की काफी समीक्षा की जाती है। 31 वर्षीया ऑग्विलेरा कहती हैं कि उम्र बढ़ने के साथ यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि आप अपनी काया से प्यार करें।sabhar :bhaskar.com

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ये है सस्ता लेकिन इन बीमारियों का सबसे पक्का इलाज

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आयुर्वेद में अदरक बहुत उपयोगी माना गया है। अदरक पाचनतंत्र के लिए लाभकारी होता है। कब्ज और डायरिया जैसी बीमारियों से भी बचाव करता है। इसीलिए भोजन में अदरक का प्रयोग किया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं अदरक  के कुछ घरेलू प्रयोग जिनसे आप कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स का इलाज कर सकते हैं...

-अपनी गर्म तासीर की वजह से अदरक हमेशा से सर्दी-जुकाम की बेहतरीन दवाई मानी गई है। अगर आपको सर्दी या जुकाम की प्रॉब्लम है, तो आप इसे चाय में उबालकर या फि र सीधे शहद के साथ ले सकते हैं। साथ ही, इससे हार्ट बर्न की परेशानी भी दूर करता है।

- रोज सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ अदरक का एक टुकड़ा खाएं। इससे खूबसूरती बढ़ती है।

- अदरक का एक छोटा टुकड़ा छीले बिना (छिलकेसहित) आग में गर्म करके छिलका उतार दें। इसे मुंह में रख कर आहिस्ता-आहिस्ता चबाते चूसते रहने से अन्दर जमा और रुका हुआ बलगम निकल जाता है और सर्दी-खांसी ठीक हो जाती है।

-बहुत कम लोग जानते हैं कि अदरक एक नेचरल पेन किलर है, इसलिए इसे आर्थराइटिस और दूसरी बीमारियों में उपचार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

-अदरक कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करता है। दरअसल, यह कोलेस्ट्रॉल को बॉडी में एब्जॉर्व होने से रोकता है।

-कैंसर में भी अदरक बेहतरीन दवाई मानी गई है। खासतौर पर ओवेरियन कैंसर में यह काफी असरदार है।

-यह हमारे पाचन तंत्र को फिट रखता है और अपच दूर करता है।

-अदरक के इस्तेमाल से ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है।

-अदरक खाने से मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया भी मर जाते हैं
sabhar : bhaskar.com
 
 

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मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा

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PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा
PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा

PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा
लंदन। उल्का पिंडों की वर्षा में पृथ्वी पर गिरे मंगल गह के एक छोटे से पत्थर के टुकड़े की अमेरिका में 1,60,000 पाउंड में नीलामी होगी। महज 3.5 इंच लंबा और 326 ग्राम वजनी यह टुकड़ा मंगल की सतह का हिस्सा है और लाखों साल पहले एक एस्ट्रॉयड (क्षुद्रग्रह) के प्रभाव के चलते वहां से छिटक गया। 
अंतरिक्ष में घूमते हुए यह टुकड़ा पिछले साल मोरक्को के रेगिस्तान में उल्का पिंडों की वर्षा के साथ जमीन पर गिरा। डेली मेल की खबर के अनुसार टिसिंट गांव में गिरे इस एस्ट्रॉयड को उल्का पिंडों को एकत्रित करने वाली एक अमेरिकी कंपनी ने इसे खरीद लिया और इस साल की शुरूआत में लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम को बेचे।
ऐसे अनेक टुकड़ों में इसे भी बेच दिया गया। संग्रहालय ने मंगल से गिरे टुकड़े को अपने पास रखा और अब इसे नीलामी के लिए रखा गया है। यह पत्थर आग्नेय चट्टान का हिस्सा है, जो ठोस रूप में बदले लावा से बना है।
गल की सतह पर बीते 6 अगस्त से मौजूद रोवर क्यूरियॉसिटी ने बहुत पनासा ने कहा कि इन चट्टानों के आकार और आकतियां इस धारा की गति और गहराई का अंदाजा देती हैं। क्यूरियॉसिटी विज्ञान के सह जांचकर्ता रेबेका विलियम्स ने कहा कि इनकी आकृतियां बताती हैं कि इन्हें यहां लाया गया है और इनका आकार बताता है कि इन्हें हवा यहां लेकर नहीं आई। ये यहां तक पानी के बहाव के साथ आए हैं। 

PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा



पहले तेजी से बहने वाली जलधारा के साथ बहकर वहां तक आई बजरी को खोज निकाला है। इससे पहले वैज्ञानिकों ने लाल ग्रह पर कभी मौजूद रहे पानी का सबूत ढूंढ़ा था, लेकिन पहली बार उन्होंने धारा के साथ बहकर बनी बजरी की पूरी सतह खोजी है।
अभियान के वैज्ञानिक जॉन ग्रोतजिंगर ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि सतह से निकाला गया चट्टानी अंश ऐसा दिखता है, मानो किसी ने फुटपाथ की एक पट्टी पर हथौड़े मार-मारकर उसे बनाया हो। लेकिन यह वाकई किसी पुरानी धारा की बजरी की सतह का एक अंश है। क्यूरियॉसिटी की भेजी गई तस्वीरों में एक दूसरे से जुड़े हुए पत्थर चट्टानों की सतह के बीच मिले हैं। यह तस्वीर गेल नामक गड्ढे के उत्तरी भाग और शार्प नामक पर्वत के आधार के बीच मिला है। क्यूरियॉसिटी इसी दिशा में बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का आकलन है कि पानी तीन फीट प्रति सेकेंड की रफ्तार से बह रहा था और उसकी गहराई टखने से कमर के बीच रही होगी। क्यूरियॉसिटी नामक यह रोवर मंगल की सतह पर जीवन की संभावना की तलाश के लिए 2 वर्षीय अभियान पर है। इसे यह भी पता लगाना है कि क्या कभी पूर्व में भी मंगल पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियां थीं।बिल्कुल पृथ्वी जैसी है चट्टान : क्यूरियॉसिटी से ली गई तस्वीर की तुलना पृथ्वी पर पानी के बहाव से बजरी बनी चट्टान से की गई है। दोनों में गोल बजरी दिखाई दे रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इतने भारी पत्थर के टुकड़े हवा से उड़कर एक से दूसरे स्थान तक नहीं पहुंच सकते। ऐसी स्थिति तभी बनती है जब पानी के दबाव से चट्टानों का निर्माण होता है। इन्हें सेडिमेंटरी रॉक कहते हैं। इसमें बजरी के कई स्तर होते हैं।नासा ने रद्द किया मलबा हटाने का मिशन : ह्यूस्टन त्न नासा ने कहा कि एक भारतीय रॉकेट और रूसी उपग्रह के अवशेष से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) को कोई खतरा नहीं है। अंतरिक्ष एजेंसी ने ट्विटर के जरिए कहा कि आईएसएस के प्रबंधकों ने फैसला किया है कि इन मलबों से आईएसएस को कोई खतरा नहीं है और अब मिशन की कोई जरूरत नहीं है। इससे पहले नासा ने कहा था कि वह अंतरिक्ष में मलबे पर नजर बनाए हुए है, जो आईएसएस से टकरा सकते हैं।क्‍यूरियोसिटी रोवर को मंगल पर कई जगहों (इस तस्‍वीर सहित) पर बहते पुराने झरनों के सबूत भी मिले हैं। नासा के वैज्ञानिकों की टीम ने इस तस्‍वीर में दिख रहे चट्टान का नाम 'Hottah' रखा है। कनाडा के उत्‍तर पश्चिम में इस नाम से एक झील है।
 PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा
साभार :भास्कर .कॉम
PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा
















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PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा

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भारत में इस साल कम रह सकता है खाद्यान्न उत्पादन: पवार÷

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केंद्रीय कृषि मंत्री ने चालू वर्ष में देश में खाद्यान्न उत्पादन कम रहने के संकेत दिए हैं। कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि भारत का खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 2012.13 में पिछले वर्ष के 25 करोड़ 74.4 लाख टन के रिकार्ड उत्पादन से कम रहेगा लेकिन अनाज की उपलब्धता घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी।

आर्थिक संपादकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में अनुमानित गिरावट को चालू रबी सत्र के उत्पादन से पाटने की कोशिश करेगी। पवार ने कहा कि इस वर्ष उत्पादन निश्चित तौर पर पिछले वर्ष से कम रहेगा। पिछला वर्ष एक खास वर्ष था, हमारे यहां रिकार्ड उत्पादन हुआ। पवार से पूछा गया था कि फसल वर्ष 2012-13 (जुलाई से जून) में कुल खाद्यान्न उत्पादन कितना होगा। हालांकि मंत्री ने कहा कि इस वर्ष देश के कुछ भागों में असमान और देर से आए मानसून के कारण उन्हें खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है।

पिछले महीने कृषि मंत्रालय ने कमजोर बरसात तथा कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के 360 से भी अधिक तालुकों में सूखे की स्थिति के कारण खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 10 प्रतिशत घटकर 11 करोड़ 71.8 लाख टन रहने का अनुमान व्यक्त किया था। sabhar : bhaskar.com

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