भोपाल मेरे सपनों का शहर...
वर्ष, 2012 में इंदौर ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के लिए मुझे और मेरे मित्र किरण गोपाल को लाया गया। किरण अभी बालाघाट में कलेक्टर है। तब मैं यहां उद्योग विभाग में डिप्टी सेक्रेट्री था। इस मीट से हमें सीखने को मिला कि, अपने प्रदेश को विकास की ओर ले जाने की दिशा में कौन-कौन से उपाय सार्थक साबित हो सकते हैं। उसके बाद मुझे जनवरी 2013 में नगर निगम कमिश्नर की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।
मुश्किलें और चुनौतियां हर जगह पोस्टिंग के दौरान रहीं, लेकिन बीएमसी का कमिश्नर होना इसलिए भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यह सरकारी संस्थान एक पालक की भूमिका निभाता है। सारे शहर की समस्याएं चाहे वो पानी हो, सड़क हो, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक, साफ-सफाई या इन्फ्रास्ट्रक्चर; सभी को सबकी आवश्यकताओं के अनुसार तैयार करना, व्यवस्थित करना, साकार करना नगर निगम का ही दायित्व है। यहां जरा-सी लापरवाही, गलतियां या चूक एकदम छवि खराब कर देती है।
दो अचीवमेंट हमारी टीम के खाते में हैं, लेकिन करना अभी बहुत कुछ बाकी है। जब मैंने बीएमसी कमिश्नर का दायित्व संभाला, तो सबसे पहले मेरे सामने बीआरटीएस को बगैर किसी रुकावट और त्रुटियों के साकार करना था।
बीआरटीएस का जिक्र यहां इसलिए भी कर रहा हूं क्योंकि, इसने भोपाल को एक नई गति दी है, दिशा दी है। देश में कई जगह बीआरटी कॉरिडोर में बसें दौड़ रही हैं, सबकी अपनी-अपनी तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतें हैं। भोपाल भी इससे अछूता नहीं हो सकता, बावजूद हमें संतुष्टि है, गर्व है कि भोपाल का बीआरटीएस अहमदाबाद से श्रेष्ठ साबित हुआ है। ऐसा मैं नहीं कहता, तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है। सिर्फ हमारा बीआरटी कॉरिडोर ऐसा है, जिसमें हमने जगह और जरूरतों के हिसाब से एडिशनल फीचर जोड़े हैं। यानी हमारे कॉरिडोर में छोटी-बड़ीं, हर तरह की बस आसानी से संचालित हो सकती है।
भोपाल में 225 बसें संचालित हो रही हैं। इनमें 68 एसी और नॉन एसी बसें बीआरटी कॉरिडोर में चल रही हैं। बैरागढ़ से मिसरोद तक करीब 24 किलोमीटर बीआरटी कॉरिडोर को बनाना अत्यंत टेड़ी खीर रहा। कहीं विरोध हुआ, तो कहीं व्यावहारिक दिक्कतें आईं, लेकिन एक दृढ़ निश्चय था कि इसे करना है बस। मैं खुद सड़कों पर घूमा ताकि, इस योजना से जुड़ा हर व्यक्ति, चाहे वो छोटा कर्मचारी हो या अन्य कोई अफसर; हर रुकावट को पार करते हुए भोपाल को एक सौगात सौंपे।
बीआरटीएस को भोपालवासियों ने सराहा। अब मेरा प्रयास इसे इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोडऩा है। बोर्ड आफिस बस डिपो पर हमने इसका डेमो किया था, जिसके अच्छे परिणाम निकले। इसके लिए ताइवान से मशीनों के रूप में तकनीकी सहायता ली जा रही है। इस सिस्टम से सारी बसें ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ जाएंगी। यानी बस में कितनी सवारी हैं, कितना फेयर कलेक्ट हुआ(रियल टाइम फंड ट्रांसफर), बस की मौजूदा स्थिति आदि सबकी जानकारी मिनटों में सर्वर कम्प्यूटर तक पहुंच जाएगी।
इसके अलावा वेंडिंग मशीनें भी लगने जा रही हैं। बसों में स्लाइडिंग गेट, सीसीटीवी कैमरे भी प्रस्तावित हैं। इन सबके बाद भोपाल बीआरटीएस निश्चय ही अर्बन डेवलपमेंट के मामले में इस शहर को एक नई पहचान देगा।
बीएमसी के 100 प्रतिशत कम्प्यूटराइजेशन का जिक्र करना भी चाहूंगा। मैं कम्प्यूटर साइंस ग्रेजुएट हूं, इसलिए बीएमसी को ऑनलाइन करने में बहुत ज्यादा दिक्कतें नहीं आईं। इससे हमें दो तरफा फायदा हुआ। पहला अंदरुनी समस्याओं और गड़बडिय़ों पर अंकुश लगा। दूसरा; बीएमसी के सारे टैक्स की रसीदें कम्प्यूटराइज्ड मिलने से लोगों को सहूलियत हुई। हमने 7 सुविधा केंद्र खोले, जहां जाकर भी लोग बीएमसी की सेवाएं ले सकते हैं। बिल्डिंग परमिशन, नक्शे ऑनलाइन मिलने से पब्लिक को दफ्तर के चक्कर काटने से छुटकारा मिला।
बीएमसी के कम्प्यूटराइजेशन से और भी कई फायदे हुए। करप्शन रुका और हमारा राजस्व 33.8 प्रतिशत बढ़ गया। अब हम मोबाइल एप लाने जा रहे हैं। यानी घर बैठे बीएमसी आपको सेवाएं देगा। हमारा प्रयास बीएमसी को पेपरलेस करना है। इससे पर्यावरण भी बचेगा और कागजों पर होने वाला बेवजह खर्चा भी। हालांकि कुछ दिक्कतें हैं, जैसे विशेषज्ञों की कमी आदि। फिर भी जो होगा, बेहतर होगा।
लोग कहें, वाकई यह नवाबी शहर है...
झीलों के इस शहर को खूबसूरत और व्यवस्थित बनाना अकेले किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है। यह तो एक सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है। बीएमसी ने बोट क्लब संवारा, पार्क संवारे, ट्रैफिक व्यवस्थाएं बेहतर कीं, बैरागढ़, न्यूमार्केट और एमपी नगर में मल्टीलेवल पार्किंग पर कार्य शुरू हो गया है। अब इन्हें और बेहतर बनाने या दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है।
बीएमसी ने 26 जनवरी, 2013 से घरों से कचरा उठाने की योजना शुरू की। 15 अगस्त, 2013 से सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट के तहत अलग-अलग तरह का कचरा उठाने का इंतजाम किया। भानपुर खंती की शिफ्टिंग चल रही है। नई जगह वेस्ट एनर्जी प्लांट लगने जा रहा है। यह सब हमारी टीम के लिए उपलब्धि हैं। मेरी ख्वाहिश है कि हमारा गौरव भोपाल शहर और बेहतर बने।
व्यक्तिगत जीवनशैली...
निश्चय ही लोगों को लगता होगा कि अफसरों की जीवनशैली शान-ओ-शौकत से भरी होती होगी, लेकिन यह अधूरा सच है। नगर निगम में आकर मेरी रातों की नींद उड़ गई है। न कोई छुट्टी और न कोई तीज-त्यौहार। दिन की फाइलें उसी रात निपटाना कोशिश होती है, ताकि अगले दिन नई चर्चा, नई शुरुआत हो सके। वर्ष, 2011 में मेरी शादी रशिम से हुई। वो बैंक मैनेजर है। दोनों व्यस्त। लेकिन दोनों को इसका कोई मलाल नहीं। क्योंकि हम दोनों ही अपनी नैतिक, पारिवारिक, सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां समझते हैं।
वो जो खिला देती है, बगैर ना-नुकूर खा लेता हूं। मुझे सबकुछ पसंद है। हां, उसके हाथ के छोला-पुलाव की कुछ बात अलग है। शुद्ध शाकाहारी हूं, इसलिए हरी सब्जियां अधिक लेता हूं। घर का खाना पसंद करता हूं। आपको ताज्जुब होगा, शादी या अन्य समारोह में भी घर से खाना खाकर जाता हूं। वहां थोड़ा-बहुत ले लेता हूं। जैसे आइसक्रीम आदि (हंसते हुए)। मैं किसी का दिल नहीं दु:खा सकता, इसलिए आमंत्रण अस्वीकार नहीं करता।
शादी से पहले फिल्में देखता था, लेकिन अब आमतौर पर संभव नहीं हो पाता। शादी के पहले अकेले टॉकीज चला जाता था, लेकिन अब उसके पास समय नहीं है और अब अकेले जा नहीं सकते(हंसते हुए)। वैसे परिणीता चोपड़ा की फिल्म हंसी तो फंसी देखी। शाहरुख का अभिनय अच्छा लगता है। sabhar :http://www.bhaskar.com/