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सोमवार, 10 अगस्त 2015

टेलीफोन और मोबाइल के बिना कहीं भी किसी से बात करने की कला

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क्या आप अपनी बातों को बिना मोबाईल, टेलीफोन या दूसरे भौतिक क्रियाओं और साधनों के दूसरों तक पहुंचा सकते हैं। एक बारगी आप कहेंगे ऐसा संभव नहीं है, लेकिन यह संभव है। आप बिना किसी साधन के दूसरों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं यह संभव है दूरानुभूति से, एफडब्ल्यूएच मायर्स ने इस इस बात का उल्लेख किया है इसे टेलीपैथी भी कहते हैं। इसमें ज्ञानवाहन के ज्ञात माध्यमों से स्वतंत्र एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क में किसी प्रकार का भाव या विचार पहुंचता है। आधुनिक मनोवैज्ञानिक दूसरे व्यक्ति की मानसिक क्रियाओं के बारे में अतींद्रिय ज्ञान को ही दूरानुभूति की संज्ञा देते हैं। परामनोविज्ञान में एक और बातों का प्रयोग होता है। वह है स्पष्ट दृष्टि। इसका प्रयोग देखने वाले से दूर या परोक्ष में घटित होने वाली घटनाओं या दृश्यों को देखने की शक्ति के लिए किया जाता है, जब देखने वाला और दृश्य के बीच कोई भौतिक या ऐंद्रिक संबंध नहीं स्थापित हो पाता। वस्तुओं या वस्तुनिष्ठ घटनाओं की अतींद्रिय अनुभूति होती है यह प्रत्यक्ष टेलीपैथी कहलाती है।टेलीपैथी के जरिए किसी को किसी व्यक्ति को कोई काम करने के लिए मजबूर भी किया जा सकता है। ऐसा ही एक मामला तुर्की में आया है। यहां कुछ लोगों को टेलीपैथी के जरिए इतना विवश कर दिया गया कि उन्होंने आत्म हत्या कर लिया sabhar amarujala.com

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