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एक तस्वीर ने बदली जिंदगी / 4 साल पहले सड़क पर भीख मांगने वाली रीता आज हैं सेलिब्रिटी, इंस्टाग्राम पर हैं एक लाख से अधिक फॉलोवर

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2016 में लुकबान के एक फेस्टिवल में शामिल होने पहुंचे फोटोग्राफर टोफर क्वींटो रीता की खूबसूरती से प्रभावित हुए टोफर ने तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर डाली, तस्वीर वायरल हुई जिसने रीता की जिंदगी बदल दी​​​​​​ दैनिक भास्करApr 09, 2020, 10:16 AM IST मनीला. इंसान की तकदीर बदलने के लिए एक तस्वीर ही काफी है। 13 की रीता गैवियोला इसकी उदाहरण हैं। 4 साल पहले रीता फिलीपींस की सड़कों पर भीख मांगती नजर आती थीं लेकिन आज फैशन मॉडल और ऑनलाइन सेलेब्रिटी हैं। इंस्टाग्राम पर एक लाख से अधिक फॉलोवर हैं। कहानी 2016 में शुरू हुई जब फिलीपींस के लुकबान शहर में फोटोग्राफर टोफर क्वींटो पहुंचे। टोफर रीता की नेचुरल ब्यूटी से प्रभावित हुए और तस्वीर ली। उन्होंने तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, यह वायरल हो गई और रीता की जिंदगी बदल गई। रीता के 5 भाई-बहन हैं। मां घरों में काम करती हैं और पिता कबाड़ इकट्‌ठा करते हैं। मॉडलिंग के साथ एक्टिंग में भी बनाया करियर 4 साल पहले जब फोटोग्राफर टोफर क्वींटो ने रीता तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया तो उसे कई ब्यूटी क्वींन ने पसंद किया और आर्थिक रूप से मदद भी की। तस्वीर वाय

कोरोनावायरस / महामारी से लड़ने में रोबोट्स की मदद लेगा भारत, यह संक्रमितों तक खाना-दवा पहुंचाएंगे, टेम्परेचर और सैंपल लेने का काम भी करेंगे

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दैनिक भास्कर Apr 06, 2020, 02:05 PM IST नई दिल्ली..  कोरोना से लड़ने के लिए चीन समेत दुनियाभर के कई देश रोबोट्स की मदद ले रहे हैं। यह न सिर्फ हॉस्पिटल्स को सैनेटाइज का काम कर रहे हैं बल्कि पीड़ितों तक खाना और दवा भी पहुंचा रहे हैं। भारत में कोरोना के अबतक 4 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 130 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में भारत भी कोरोना को हराने में इन रोबोट्स की मदद लेने की तैयारी कर रहा है, ताकि जल्द से जल्द इस महामारी पर काबू पाया जा सके। दुनियाभर के हेल्थ वर्कर, शोधकर्ता और सरकारें इस महामारी पर काबू पाने की कोशिश में लगी हैं। कोरोना अबतक 200 से ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। अबतक 12 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 69 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग रखने की सलाह दे चुका है। इंसानों के लिए घरों तक जरूरी सामान पहुंचाना और हाई रिस्क एरिया में पीड़ितों का इलाज करना एक बड़ी चुनौती बन गई है, ऐसे में यह रोबोट्स संक्रमितों का बेहतर तरीके से ट्रीटमेंट करने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं

क्या है क्लोरोक्विन जिसमें कोरोना वायरस का इलाज खोजा जा रहा है?

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फ्रांस और चीन में शुरूआती अध्ययनों में कोविड-19 के खिलाफ इन दवाओं से काफी उम्मीद बंधी है, जिसकी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इसी हफ्ते इन्हें भगवान की तरफ से एक तोहफा बताया. क्या एक दशक पुरानी सस्ती दवाओं की जोड़ी नई कोरोना वायरस महामारी का इलाज हो सकती है? दुनिया भर के देशों के शोधकर्ता हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन (ऐछसीक्यू) और क्लोरोक्विन (सीक्यू) तक पहुंच बढ़ा रहे हैं. ये दोनों सम्बंधित कंपाउंड हैं और क्विनीन के सिंथेटिक रूप हैं. क्विनीन सिनकोना पेड़ों से आने वाला एक पदार्थ है जिसका सैकड़ों सालों से मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल होता आया है. ऐछसीक्यू दोनों में से कम जहरीला है और इसका इस्तेमाल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा के रूप में गठिया और ल्यूपस के इलाज के लिए भी किया जाता है. फ्रांस और चीन में शुरूआती अध्ययनों में कोविड-19 के खिलाफ इन दवाओं से काफी उम्मीद बंधी है, जिसकी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इसी हफ्ते इन्हें भगवान की तरफ से एक तोहफा बताया. हालांकि विशेषज्ञ तब तक सावधानी बरतने को कह रहे हैं जब तक ट्रायल में इनकी प्रभावकारिता की पुष्टि नहीं हो जाती. चीन ने