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तँत्र क्यो महत्वपूर्ण है

तंत्र कहता है ”जब तक तुम स्वयं प्रकाश से नहीं भर जाते तुम दूसरों को प्रकाशित होने में कैसे सहायक होओगे?” स्वार्थी हो जाओ–तभी, केवल तभी परार्थी हो सकोगे; नहीं तो परार्थ, परोपकार की धारणा मूर्खतापूर्ण है। आनंदित होओ–तभी तुम दूसरों को आनंदित होने में सहायता दे सकोगे। अगर तुम उदास हो दुखी हो, कड़वाहट से भरे हो, तुम निश्चित ही दूसरे के प्रति हिंसक हो जाओगे और दूसरों के लिए दुख पैदा करोगे।” स्वयं को प्रसन्न रखने में क्या बुराई है? सुखी होने में क्या बुराई है? अगर कुछ बुराई है तो वह तुम्हारे दुखी होने में है क्योंकि दुखी व्यक्ति अपने चारों ओर दुख की तरंगें निर्मित कर लेता है।  तंत्र कामुकता नहीं सिखाता। वह तो केवल यही कहता है कि काम सुख का स्रोत हो सकता है। एक बार जब तुम्हें उस सुख का पता चल जाता है तो तुम आगे बढ़ सकते हो, क्योंकि अब तुम सत्य की भूमि पर खड़े हो। व्यक्ति को सदा काम में नहीं अटके रहना है। बल्कि काम का तालाब में कूदने के लिए जंपिंग बोर्ड की तरह उपयोग किया जा सकता है। तंत्र का यही अभिप्राय है: ”तुम इसे जंपिंग बोर्ड समझो।”  और जब एक बार तुम्हें काम-सुख का अनुभव हो जाए तुम समझ सकोगे क

पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90* *दिनों में कर देगी* *जड़ से खत्म, *आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे

 *पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90* *दिनों में कर देगी* *जड़ से खत्म, *आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे वैद्य जी अनंत शिखर अयोध्या*  🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 पपीते के पत्ते 3rd और 4th स्टेज के कैंसर को सिर्फ 35 से 90 दिन में सही कर सकते हैं।  अभी तक हम लोगों ने सिर्फ पपीते के पत्तों को बहुत ही सीमित तरीके से उपयोग किया होगा, बहरहाल प्लेटलेट्स के कम हो जाने पर या त्वचा सम्बन्धी या कोई और छोटा मोटा प्रयोग, मगर आज जो हम आपको बताने जा रहें हैं, ये वाकई आपको चौंका देगा, आप सिर्फ 5 हफ्तों में कैंसर जैसी भयंकर रोग को जड़ से ख़त्म कर सकते हैं। आपके लिए नित नवीन जानकारी कई प्रकार के वैज्ञानिक शोधों से पता लगा है कि पपीता के सभी भागों जैसे फल, तना, बीज, पत्तिया, जड़ सभी के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसके वृद्धि को रोकने की क्षमता पाई जाती है।  विशेषकर पपीता की पत्तियों के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसकी वृद्धि को रोकने का गुण अत्याधिक पाया जाता है। तो आइये जानते हैं उन्ही से।  University of florida ( 2010) और International doctors and researchers from US and japan