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Indo Russian relation in 2020 - addressed by Ambassador D.B.Venkatesh in...

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Presence of Russia in Global Encyclopedia of The Ramayan by Hon Chief mi...

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वैराग्य का अर्थ

वैराग्य का अर्थ है, अब मुझे कुछ भी आकर्षित नहीं करता। वैराग्य का अर्थ है, अब ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसके लिए मैं कल जीना चाहूं। वैराग्य का अर्थ है, ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसके लिए मैं कल जीना चाहूं। ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे पाए बिना मेरा जीवन व्यर्थ है। वैराग्य का अर्थ है, वस्तुओं के लिए नहीं, पर के लिए नहीं, दूसरे के लिए नहीं, अब मेरा आकर्षण अगर है, तो स्वयं के लिए है। अब मैं उसे जान लेना चाहता हूं, जो सुख पाना चाहता है। क्योंकि जिन-जिन से सुख पाना चाहा, उनसे तो दुख ही मिला। अब एक दिशा और बाकी रह गई कि मैं उसको ही खोज लूं, जो सुख पाना चाहता है। पता नहीं, वहां शायद सुख मिल जाए। मैंने बहुत खोजा, कहीं नहीं मिला; अब मैं उसे खोज लूं, जो खोजता था। उसे और पहचान लूं, उसे और देख लूं। वैराग्य का अर्थ है, विषय से मुक्ति और स्वयं की तरफ यात्रा। ओशो

ऑर्गेनिक शक्ति.

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#..... आने वाला वक्त किसानी और किसानों का ही है। MS धौनी के इजा फार्म का रांची में खुला पहला आउटलेट, ग्राहकों की उमड़ी भीड़.... MS Dhoni EEJA Farms Opened in Ranchi क्रिकेट के बाद धौनी के किसानी अवतार को भी लोगों को बड़ा प्यार मिल रहा है। महेंद्र सिंह धौनी के प्रशंसकों की दिवानगी आउटलेट में देखने को मिली। उद्घाटन के साथ ही लोगों की भाड़ी भीड़ वहां खरीदारी के लिए जुटी।  इस आउटलेट का उद्घाटन रांची के मेन रोड में सुजाता चौक के पास हुआ है। इस आउटलेट का उद्घाटन धौनी के सबसे करीबी दोस्‍त परमजीत सिंह ने किया। इस मौके पर उनके कई अन्य दोस्त भी मौजूद थे। धौनी के फार्म की सब्जियों की बाजार में भारी डिमांड है। अभी तक धौनी की जो आर्गेनिक सब्जियां केवल विदेश जा रहीं थी, अब रांची के लोगों के लिए उपलब्ध होंगी। पहले दिन उद्घाटन के बाद चार घंटे में ही आउटलेट में लाई गई आधे से ज्यादा उत्पाद की बिक्री हो गई। हालांकि इससे पहले लालपुर में एक आउटलेट से इजा फार्म के दूध की होम डिलिवरी की जा रही थी। महेंद्र सिंह धौनी के प्रशंसकों की दिवानगी आउटलेट में देखने को मिली। इजा फार्म आउटलेट के उद्घाटन के स

इलायची_की_खेती

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#। वैसे तो पूरे भारत भर में इसकी खेती संभव है बहुत सारे लोग इसे अपनी दैनिक जरूरतों के लिए अपने बागवानी में भी लगाया करते हैं लेकिन कर्नाटक, केरल और तमिलनाडू इसकी खेती के लिए प्रसिद्ध और अनुकूल है। दक्षिण भारत के केरल में मालाबार की पहाड़ियों में उत्कृष्ट गुणवत्ता की इलायची की खेती की जाती है जो पूरी दुनिया में मशहूर है।  इलाइची की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु तापमान 10 डिग्री से 35 डिग्री सेल्सियस और 1500 मिमी से 4000 मिमी की वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रो में इसकी खेती की जाती है जो की समुद्री स्तर से 600 मीटर से 1500 मीटर की ऊचाई पर हो| खेती कैसे तैयार करें सबसे पहले आप अपने खेती के स्थान की जांच करा लें|इलायची की खेती के लिए मिट्टी का PH मान 4.5 से 7.0 तक ऐसी काली गहरी अम्लीय दोमट मिट्टी को इलायची की खेतो के लिए उपयुक्त माना जाता है| रेतीली भूमि में इलायची की खेती करना संभव नहीं है इसलिए आप भी इसे करने से बचें| इसकी खेती के लिए खाद के रूप में आप नीम की खली का प्रयोग कर सकते हैं|मुर्गी के द्वारा उत्पन्न खाद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है| खाद को अगर तेज़ गर्मी के दिनों में खेत म

जैविक खाद से ज्यादा उत्पादन

आप जानते है फसलों के उत्पादन में जैव उर्वरक की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन अभी भी किसान, फसलों में रासायनिक उर्वरक का उपयोग कर रहे हैं। जिससे फसलों की लागत तो बढ़ रही है लेकिन किसानों के अपेक्षानुसार उपज नहीं बढ़ रही है। किसानों को इस नई उपज और जैविक खाद के माध्यम से इसकी उपज बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दरअसल जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञानी ने गेहूं की ऐसी फसल (सीड) तैयार की है, जो रासायनिक उर्वरक की बजाए जैविक उर्वरक के उपयोग से अधिक उपज देती है। विवि के कृषि विज्ञान केंद्र जबलपुर एवं नेशनल फर्टीलाइजर्स लिमिटेड द्वारा इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को इस नई उपज और जैविक खाद के माध्यम से इसकी उपज बढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जैविक खाद से ज्यादा उत्पादन : शहपुरा के अंतर्गत आने वाले पिपरिया कला में गेहूं के दो प्रयोग का किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण देते हुए मृदा विज्ञानी डॉ.एके सिंह ने बताया कि खेतों पर पीएसबी एवं जेडएसबी जैविक उर्वरक एक तरह उर्वरक एवं बेंटोनाइट सल्फर के उपचार के साथ प्रयोग किए गए, जिनके अच्छे परिणाम सामने आए। जैव उर्

भारत की पहली लिथियम रिफाइनरी

 गुजरात में भारत की पहली लिटियम रिफाइनरी स्थापित की जाएगी इस रिफाइनरी को स्थापित करने के लिए देश की सबसे बड़ी नवीकरण ऊर्जा कंपनियों में से एक मणिकरण पावर लिमिटेड लगभग ₹1000 का निवेश करेगी इस रिफाइनरी के लिए लिथियम आयन को ऑस्ट्रेलिया से आयात किया जाएगा क्योंकि लिथियम एक दुर्लभ तत्व है जो आमतौर पर भारत में नहीं पाया जाता वर्तमान में भारत सबसे बड़े इलेक्ट्रिक कार बाजार के रूप में उभर रहा है ऐसे में देश को बैटरी का उत्पादन करने के लिए कच्चे माल के रूप में लिथियम की आवश्यकता है भारत अपनी लिथियम संबंधित आवश्यकता ओं का अधिकांश हिस्सा आयात करता है भारत में बोलीबीआई लिथियम भंडार भंडार तक पहुंच प्राप्त की है भारत ने साल 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहन संख्या को 36 परसेंट तक बढ़ाने का एक महत्वकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है

यूपी में खुलेगा देश का पहला वर्चुअल माल

उत्तर प्रदेश में सरकार देश का पहला वर्चुअल एग्जीबिशन माल की योजना पर काम कर रही है यह माल ऑनलाइन कारोबार का एक ऐसा फोरम होगा जहां पर क्रेता विक्रेता अपनी सुविधा के मुताबिक किसी भी समय उत्पादों की खरीद बिक्री कर सकेंगे इस माल में एक बार में 500 स्टाल लगेंगे क्रेता विक्रेता ऑनलाइन संवाद भी स्थापित कर सकेंगे में स्टालों के आवंटन में चक्रीय व्यवस्था लागू की जाएगी

कोविड-19 और भारत की वैक्सीन कूटनीति

हाल ही में भारत ने कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण शुरू करने के कुछ दिनों बाद अपने अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसियों और प्रमुख साझेदार देशों को स्वदेशी रूप से निर्मित कोविड-19 वैक्सीन की लाखों पूरा भेजना शुरू कर दिया है कोविड-19 महामारी से लड़ने में मदद करने के लिए परीक्षण किट व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण वेंटिलेटर और अन्य देशों को दवाओं की खेत भेजे जाने के बाद भारत अब वैक्सीन कूटनीति के साथ उन तक पहुंच बढ़ा रहा है इसी परिपेक्ष में भारत में अपने पड़ोसी और प्रमुख साझेदार देशों को कोविड-19 वैक्सीन प्रदान करने का निर्णय लिया है नेबरहुड फर्स्ट पहल को ध्यान में रखते हुए भारत द्वारा वैक्सीन को अपने निकटतम पड़ोसी बांग्लादेश भूटान मालदीव म्यानमार नेपाल और श्रीलंका तथा मारीशस और से सेल्स जैसे महत्वपूर्ण हिंद महासागरीय भागीदार देशो ko विशेष विमान द्वारा भेजा गया है भारत में सार्क देशों को भी वैक्सीन प्रदान करने का निर्णय लिया भारत की वैक्सीन मैत्री पहल कोविड-19 टीका को विकासशील देशों के लिए अधिक सुलभ बनाकर दुनिया में टीका असमानता को कम करने में मदद मिलेगी भारतीय टीका ने कम दुष्प्रभाव दिखाए हैं तथा यह कम लागत