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सोमवार, 22 मार्च 2021

इलायची_की_खेती

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वैसे तो पूरे भारत भर में इसकी खेती संभव है बहुत सारे लोग इसे अपनी दैनिक जरूरतों के लिए अपने बागवानी में भी लगाया करते हैं लेकिन कर्नाटक, केरल और तमिलनाडू इसकी खेती के लिए प्रसिद्ध और अनुकूल है।

दक्षिण भारत के केरल में मालाबार की पहाड़ियों में उत्कृष्ट गुणवत्ता की इलायची की खेती की जाती है जो पूरी दुनिया में मशहूर है। 

इलाइची की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु
तापमान 10 डिग्री से 35 डिग्री सेल्सियस और 1500 मिमी से 4000 मिमी की वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रो में इसकी खेती की जाती है जो की समुद्री स्तर से 600 मीटर से 1500 मीटर की ऊचाई पर हो|

खेती कैसे तैयार करें
सबसे पहले आप अपने खेती के स्थान की जांच करा लें|इलायची की खेती के लिए मिट्टी का PH मान 4.5 से 7.0 तक ऐसी काली गहरी अम्लीय दोमट मिट्टी को इलायची की खेतो के लिए उपयुक्त माना जाता है|

रेतीली भूमि में इलायची की खेती करना संभव नहीं है इसलिए आप भी इसे करने से बचें|

इसकी खेती के लिए खाद के रूप में आप नीम की खली का प्रयोग कर सकते हैं|मुर्गी के द्वारा उत्पन्न खाद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है|

खाद को अगर तेज़ गर्मी के दिनों में खेत में मिलाएं तो यह बहुत अछि प्रक्रिया हो सकती है|इसलिए कोशिश करें की मई जून के समय खाद को खेत में मिलाएं |

बीज कहाँ से खरीदें
खेती के लिए सबसे उपयुक्त बीज का ही चुनाव करें इसको खरीदने के लिए आप सरकारी संस्थान से संपर्क कर सकते हैं| आप इसके लिए अपने नजदीकी राज्य बीज भंडारण से भी संपर्क कर सकते हैं|

बुवाई की विधि
बुवाई के लिए जमीन तैयार करते समय मैला क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में मिट्टी और जल संरक्षण के उपाय जरूरी हैं।कम वर्षा वाले क्षेत्रों,विकर्ण रोपण में ढलानों भर में खाइयों में रोपण और मिट्टी और जल संरक्षण में मदद मिलेगी |

सिंचाई की विधि
सिंचाई के लिए सबसे ध्यानपूर्वक तरीके से आप किसी को नियुक्त भी कर सकते हैं | इसकी सिंचाई के लिए आप मौसम के अनुकूल जा सकते हैं यदि गर्मी अधिक है तो उस स्थिति में आप दिन में 3 से 4 बार तक सिंचाई दे सकते हैं परन्तु आपको ख़याल रखना है की इसकी खेती के लिए तापमान सामान्य होना चाहिए|बरसात में आपको कुछ नहीं करने की जरुरत नहीं है|

 
फसल की तुड़ाई
फसल की तुड़ाई के बाद उसको एक्त्रिकरन कर लिया जाये उसके बाद हौसले कैप्सूल से उसकी सफाई की जानी चाहिए| इस कैप्सूल का प्रयोग लोग इसकी रंग व सफाई के लिए करते हैं|तुड़ाई के बाद सबसे अहम् होता है इसको सुखाना जिसके लिए दो तरीके हो सकते हैं|

इलाइची सुखाने की विधि
धुप में सुखाना –बेहतर होगा की आप पैदावार होने के बाद इसको प्राक्रतिक रूप से सुखने दें|लगभग 3 से 4 दिनों में आप इसको सुखा सकते हैं|
भट्टी बनाकर – आप चाहें तो इसको सुखाने के लिए किसी एक कमरे का चुनाव करें बाद में उसमें तापमान को बढाकर कमरे को बंद करके रखे भट्टी में कोयला या लकड़ी को जलाकर रखें इस विधि को अपनाकर भी आप चाहें तो इसको सुखा सकते हैं|
माल कहा बेच सकते हैं
इलाइची की फसल को बेचना बहुत ही आसन होता है क्यों की ये एक अत्यधिक मांग वाली फसल है जिसे आप आसानी से कहीं भी बेच सकते हैं–आप सीधे तौर पे इसे मंडी में जाकर भी बेच सकते हैं जिसके लिए आप या तो अपने राज्यों की मसाला मंडी से संपर्क करना पड़ेगा या फिर सीधे तौर पे आप इसको खुद भी पैक करके बेच सकते हैं रिटेल में या फिर आप इससे ऑनलाइन के माध्यम से भी बेच सकते हैं।
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