बुधवार, 23 जुलाई 2014
यौनकर्म को कानूनी दर्जे से घटेगा एड्स
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मेलबर्न में 20वीं अंतरराष्ट्रीय एड्स कांफ्रेंस में कहा गया है कि यौनकर्म पर कानूनी पाबंदी हटा देने से एड्स की रोकथाम में मदद मिलेगी. रिसर्चरों ने कई देशों से जमा आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट पेश की.
एचआईवी के संक्रमण में सबसे बड़ा हाथ महिला यौनकर्मियों का माना जाता है. नीति निर्माताओं का कहना है कि अगर इन्हें कानूनी दर्जा दिया जाता है तो एचआईवी/एड्स के प्रति जागरुकता फैलाने में आसानी होगी. एड्स के फैलाव, कॉन्डोम, और एचआईवी की दवा के बारे में खुलकर बात हो सकेगी और प्रचार बढ़ेगा.
रिसर्चरों के मुताबिक अपने काम को जब यौनकर्मी कानून के दायरे में रह कर करेंगे तो वे सेक्स सुरक्षा संबंधी मामलों पर सलाह लेने में झिझकेंगे नहीं. कॉन्डोम के इस्तेमाल और दवाओं तक उनकी पहुंच भी आसान हो सकेगी. वे अपने ग्राहक से बिना डरे कह सकेंगे कि वे सुरक्षित सेक्स चाहते हैं. असुरक्षित सेक्स एचआईवी वायरस संक्रमण का सबसे बड़ा कारण है.
साइंस पत्रिका लैंसेंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक अगले एक दशक में 33 से 46 फीसदी तक एड्स के फैलाव को कम किया जा सकता है. हालांकि रिसर्चरों ने माना कि कई इलाकों में दूसरे तरीके ज्यादा मददगार साबित हो सकते हैं. केन्या में अगर एचआईवी संक्रमित यौनकर्मियों को वायरस दबाने वाली दवा दी जाए तो अगले दस सालों में एचआईवी के मामलों में एक तिहाई कमी आ सकती है.
इस मॉडल को तैयार करने के लिए रिसर्चरों ने प्रमुख साइंस पत्रिकाओं के 204 शोधों का अध्ययन किया. 2012 में 20 गरीब और पिछड़े देशों में हुई एक जांच के मुताबिक 12 फीसदी यौनकर्मियों को एचआईवी संक्रमित पाया गया. दक्षिणी सहारा देशों में 50 फीसदी तक यौनकर्मी एचआईवी संक्रमित हैं. एक ताजा रिसर्च के मुताबिक दुनिया भर में एड्स के कारण मरने वाली 92 फीसदी यौनकर्मी अफ्रीकी देशों के हैं.
एसएफ/एमजी (एएफपी) sabhar :http://www.dw.de/
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