मृत्यु कैसे होगी कष्ट या आराम से
इस पर भी पदार्थवादियों की अलग राय हो सकती है पर किसकी मृत्यु कैसे होगी या कैसे कष्ट या आराम के साथ कोई मरेगा इस बारे में विज्ञान भी गहराई से छानबीन कर रहा है।
ऐसे लोगों की मृत्यु कम कष्टकारी हुई
पाया कि अंतकाल में उन्हें वही बातें याद आ रही थी, जिन्हें वे कार्यकारी जीवन के दौरान जेहन में बसाए हुए थे। न केवल बसाए हुए थे बल्कि वैसे काम ही कर रहे थे। कुछ व्यक्ति ऐसे भी थे जो पिछले जीवन में जैसे भी रहे हों, आयु के संध्याकाल में अच्छे काम कर जिंदगी को संवराना चाहते थे।
उन्होंने अपने जीवन की दिशाधारा तो बदल ली पर मृत्यु के समय पिछले कर्मों की यादों का दंश उन्हें परेशान करता रहा था। यद्यपि उन्हें बाद के जीवन में कर लिए सुधारों का फायदा भी मिला। उनकी अंतिम विदाई कम कष्टकारी रही।
वह मृत्यु के समय बहुत ही कष्ट उठाते हैं
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जो लोग द्वेष और स्वार्थ का जीवन जीते हैं, लोभ की भावना फैलाते हैं, वे मृत्यु के समय बहुत ही कष्ट उठाते हैं।
इस तरह मृत्यु के बाद की यात्रा शुरु होती है
स्वामीजी के अनुसार शोझ अध्ययन में लगे विद्वानों और विद्यार्थियों ने भगवद्गीता का कभी नाम भी नहीं सुना था पर उन्होंने पाया कि उस ग्रंथे में लिखे उपदेश मृत्यु के समय होने वाले अनुभवों से पूरी तरह मेल खाते हैं।
लिखा है कि अंतकाल में� वही भाव चित्त में घनीभूत होता है जो पूरे जीवन मन में छाया हुआ था। और उसी भाव के अनुसार आगे की यात्रा शुरु होती है।
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