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रविवार, 1 सितंबर 2013

जानिए, आसाराम के आश्रम में किस-किस तरह की होती हैं तांत्रिक क्रियाएं...

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जानिए, आसाराम के आश्रम में किस-किस तरह की होती हैं तांत्रिक क्रियाएं...

अहमदाबाद। एकांतवास की आड़ में नाबालिग छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में फंसे आसाराम बापू अब पुलिस की जांच में बुरी तरह घिरते नजर आ रहे हैं।
 
पुलिस ने आसाराम और पीड़िता की जोधपुर और फार्म हाउस में मौजूदगी के तो साक्ष्य जुटा ही लिए थे, अब यह भी सामने आ गया कि पीड़िता आसाराम की उस कुटिया में मौजूद थी, जिसमें फार्म हाउस के मालिक तक को भी प्रवेश की अनुमति नहीं थी। 
 
हालांकि आसाराम हमेशा किसी न किसी बात पर विवाद में रहते हैं। इससे पहले भी अनेकों बार मीडिया की सुर्खियों में रहे हैं। इसी तरह उन पर अहमदाबाद स्थित मोटेरा आश्रम में जुलाई 2008 में दीपेश और अभिषेक नाम के दो बच्चों की संदिग्ध मौत का मामला भी चल रहा है। इस मामले में मृतक बच्चों के परिजनों ने आसाराम पर आरोप लगाया था कि उनके आश्रम में तांत्रिक क्रियाएं होती हैं। हालांकि आश्रम इन आरोपों के हमेशा नकारता रहा है। 
 
आइए जानते हैं, किस तरह होती है आश्रम में तांत्रिक क्रियाएं..

जानिए, आसाराम के आश्रम में किस-किस तरह की होती हैं तांत्रिक क्रियाएं...
आसाराम बापू के साधकों को अपने अनुष्ठान के दौरान कई क्रियाएं करनी पड़ती हैं। इनमें सबसे प्रमुख है ‘त्राटक’ जिसके लिए वे बापू की तस्वीर को अपनी आंखों के एंगल पर रखते हैं। त्राटक के दौरान साधक को उनकी आंखों की ओर तब तक एकटक देखना पड़ता है जब तक कि पलक झपकना जरूरी न हो जाए। यह प्रक्रिया बार-बार दोहराए जाने पर त्राटक की अवधि बढ़ती जाती है। 
जानिए, आसाराम के आश्रम में किस-किस तरह की होती हैं तांत्रिक क्रियाएं...

साधना के दौरान उन्हें एक बंद कमरे में, जिसे मौन मंदिर कहा जाता है, रहना पड़ता है। इसी कमरे में उनके नहाने सहित अन्य नित्यकर्म की व्यवस्था होती है। कमरे में दो छोटी छोटी खिड़कियां भी होती हैं। 
किसी वस्तु की जरूरत होने पर साधक एक पर्ची पर उसके बारे में लिख कर इन खिड़कियों पर रख देता है। कमरे के बाहर घूमने वाले सेवादार इस पर्ची को पढ़कर वहां इच्छित वस्तु रख देते हैं। इस कमरे में ही पिरामिड के आकार का एक छोटा कमरा होता है जिसमें साधना की जाती है।

साधक को मंत्रजाप, प्रार्थना व प्राणायाम भी करना पड़ता है:
अनुष्ठान के दौरान साधक को त्रिकाल संध्या (सुबह,दोपहर व शाम को किया जाने वाला संध्या वंदन) अनिवार्य रूप से करनी होती है। इसके साथ ही माला फेरते हुए हरिओम का गुंजन, प्रार्थना, प्राणायाम व गुरु के बताए मंत्र (गुरुमंत्र) का जाप करना होता है। इसके साथ ही उसे आसा रामायण का पाठ करना होता है जो बापू की जीवनी पर आधारित है। 
साधक के पास गुरु गीता पुस्तक– नाम की पुस्तक भी रहती है। तीन समय होने वाली इस संपूर्ण प्रक्रिया में तीन-तीन घंटे का समय लगता है। आम तौर पर ऐसा अनुष्ठान 5, 7 अथवा 14 दिनों का होता है। साधक चाहे तो 40 दिन का अनुष्ठान भी सकता है।
साहित्य के कम, अन्य वस्तुओं के खरीदार ज्यादा: 
 
पाल रोड स्थित बापू के आश्रम से सटी बापू के साहित्य की एक दुकान भी है। यहां आने वाले साधक और उनके परिजन आध्यात्मिकता से संबंधित बापू की पुस्तकें तो कम ही खरीदते हैं जबकि बापू के मुख्य आश्रम में बनने वाली दैनिक कार्य की वस्तुएं ज्यादा खरीदी जाती हैं।

बड़ों व बच्चों के लिए अलग अलग संस्थाए:
 
आसाराम बापू के अनुयायियों में बड़ों के साथ ही बच्चे भी शामिल हैं। जोधपुर में योग वेदांत सेवा समिति, युवा सेवा संघ, बाल संस्कार केंद्र एवं महिला संगठन बने हुए हैं। इनसे दो से ढाई हजार परिवार जुड़े हुए 
सात साल में आधी हो गई भीड़:
 
बापू की संस्थाओं से जुड़े लोगों की मानें तो यहां उनकी लोकप्रियता खासी घटी है। जब वे 2006 में जोधपुर आए तब रावण का चबूतरा मैदान में उनके प्रवचन सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े थे। उसकी तुलना में 10 व11 अगस्त को गांधी मैदान में हुए उनके कार्यक्रम में यह संख्या आधी ही रह गई।

बीमार होने पर पहले आश्रम में बुलावा:
 
आसाराम बापू की विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों के अनुसार उनसे दीक्षा लेने वाले परिवार, आश्रम में रहने वालों तथा गुरुकुल में रहने वाले छात्र छात्राओं तथा उनके परिजनों को स्पष्ट हिदायत दी हुई है कि उनके परिवार में कोई सदस्य बीमार हो जाए तो उसे हॉस्पिटल नहीं ले जाएं,  पहले आश्रम में संपर्क करें। यहां से जो दिशा निर्देश मिले उसके अनुसार ही बीमार को वहां भिजवाया जाए।

अहमदाबाद स्थित आश्रम का हाल..
 
अहमदाबाद त्न आसाराम बापू के मोटेरा स्थित मुख्य आश्रम पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। यहां 150 जवानों को तैनात किया गया। है। अपने ही आश्रम की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपों से घिरे आसाराम बापू शुक्रवार को आश्रम पहुंचे। गुजरात पुलिस का जवान उनसे कुछ इस अंदाज में मिला। sabhar : bhaskar.com





1 टिप्पणियाँ:

Unknown ने कहा…

सत्य के लिए जगह की आवश्यकता नही, जगह के लिए सत्य की आवश्यकता होती है, परन्तु हमारे देश को साधुवाद यवं ब्राह्मणवाद खा गया, उसने इन्शान को इतना खोखला कार दिया की वह चाहते हुए भी इश जंजाल से निकल नही पा रहा है, उनके साथ वही घटना हो रही :-चलती चाकी देख के दिया कबीरा रोय, दो पाटन के बीच मैं, जिन्दा बचा न कोय:, कील पकड़ के जो रहा, नकटा वूंचा होय, समझदार वे ही जानियो उतक बाहीरे होय::,

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