रविवार, 29 सितंबर 2013
भारतवंशी वैज्ञानिक ने तैयार किया रोबोट का 'दिमाग', हवा में ही रिपेयर कर देगा हवाई जहाज
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वॉशिंगटन. क्या रोबोट इंसान की तरह सोच सकते हैं, क्या बिना किसी की निगरानी के इनका प्रयोग संभव है? क्या रोबोट के भीतर इंसान के जैसी चेतना भरी जा सकती है? पिछले कई सालों से ये सवाल खड़े थे, लेकिन अब एक नई राह दिखी है और यह कारनामा किया है कि भारतीय मूल के ही एक वैज्ञानिक ने। इसकी मदद से रोबोट हवा में ही हवाई जहाज ठीक कर देंगे और जरूरत पड़ी तो पलक झपकते ही इमरजेंसी लैंडिंग भी करा देंगे। अमेरिका की मिसुरी यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलोजी से जुड़े भारतीय मूल के डा. जगन्नाथन सारंगपाणि ने रोबोट का 'दिमाग' तैयार किया है।
वैज्ञानिक भाषा में इसे 'फीडबैक सिस्टम' कहते हैं, इसके माध्यम से रोबोट और ज्यादा भरोसेमंद हो जाएंगे और इनकी निगरानी रखने की जरूरत बेहद कम हो जाएगी। नए 'फीडबैक सिस्टम' की मदद से रोबोट इतना सक्षम हो जाएगा कि उसे अपनी जिम्मेदारी का खुद-ब-खुद एहसास रहेगा और बिना किसी परेशानी के वह अपना काम कर सकेगा। इतना ही नहीं, नई खोज से भविष्य में रोबोट अपने लिए खुद सोच सकता है, सीख सकता है और बहुत सी बातें ग्रहण भी कर सकेगा यानी रोबोट के भीतर अब चेतना भरने की तैयारी हो चुकी है। भारतीय मूल के वैज्ञानिक की यह नई प्रणाली रोबोटिक क्रांति को अगले स्तर पर ले जाएगी।
इंसान की तरह सोचेगा रोबोट
भारतीय मूल के डॉक्टर जगन्नाथन सारंगपाणि के इस नए 'फीडबैक सिस्टम' की मदद से रोबोट सौंपे गए कार्य को दक्षता से पूरा करेगा। इस नए 'फीडबैक सिस्टम' से यह संभव होगा कि यदि लीडर रोबोट का सिस्टम या मशीन ठप हो जाती है, तो उसके पीछे आ रहा रोबोट उस लीडर रोबोट की भूमिका किसी इंसान की तरह खुद ही ग्रहण कर लेगा। इसमें यदि लीडर रोबोट में कोई समस्या आ जाती है तो 'फीडबैक सिस्टम' अपने आप सक्रिय हो जाएगा।
भारतवंशी वैज्ञानिक ने अपने डिजाइन की खासियत
इस नए डिजाइन को तैयार करने वाले भारतवंशी वैज्ञानिक सारंगपाणि ने कहा, ‘कल्पना कीजिए कि दूर-दूर कार्यरत 10 बुल्डोजरों को नियंत्रित करने के लिए कार्यालय में आपके पास सिर्फ आपरेटर है। इस प्रक्रिया में यदि एक बुलडोजर में तकनीकी खराबी आ जाती है तो हार्डवेयर यह सुनिश्चित करेगा कि काम जारी रहे।’ इस नए शोध को रोबोटिक सुरक्षा प्रणाली, खनन और यहां तक कि हवाई निगरानी में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सारंगपाणि का मानना है कि यह शोध सबसे अधिक हवाई वाहनों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि उड़ान के दौरान कोई हेलिकाप्टर किसी तकनीकी समस्या का शिकार हो जाता है तो समस्या का तुरंत पता लगाकर उसे ठीक करना संभव होगा। इसका मतलब यह है कि बड़ी तकनीकी समस्या के कारण किसी भयंकर हवाई हादसे के बजाय, यह नया सिस्टम हवाई जहाज को आपातस्थिति में उतारने में सक्षम बनाएगा। sabhar : bhaskar.com
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