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शनिवार, 1 मार्च 2014

इंसानों के साथ भी शारीरिक रिश्ते बना सकेंगे रोबॉट, पैदा करेंगे बच्चे!

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लंदन
आपने रजनीकांत की रोबॉट फिल्म तो देखी होगी। इसमें रोबॉट बने रजनीकांत का उसके साथी मजाक बनाते हैं कि वह सेक्स नहीं कर सकता, इसलिए वह इंसानों जैसा नहीं है। लेकिन जरा सोचिए क्या हो, अगर रोबॉट भी सेक्स करने लगें और बच्चे पैदा करने लगें। हालांकि इंजीनियर और नोवेलिस्ट जॉर्ज जैरकैडाकिस का मानना है कि अगले 20-30 साल में ऐसा संभव है। जॉर्ज के मुताबिक, भविष्य में रोबॉट न सिर्फ दूसरे रोबॉट के साथ सेक्स कर सकेंगे, बल्कि इंसानों के साथ भी शारीरिक रिश्ते बना सकेंगे।

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस इंजीनियर जॉर्ज का मानना है कि ऐसा करने से बेहतर रोबॉट पैदा होंगे। उनके मुताबिक, रोबॉट के इंसानों के साथ संबंध बनाने से हाइब्रिड प्रजाति विकसित होगी। रोबॉट और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञों के अनुसार, यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि वर्तमान में ही ऐसे रिसर्च और तकनीक उपलब्ध हैं, जिससे ऐसा संभव हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों को भी इसके बुरे प्रभाव को लेकर चिंता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर रोबॉट इंसानों से ज्यादा पैदा होने लगे, तो वह समय बुरे सपने से कम नहीं होगा।

बच्चे पैदा नहीं, प्रिंट होंगे: रोबॉट के विकास से जुड़े वैज्ञानिकों की अगर मानें तो यह रोबॉट बच्चे पैदा नहीं प्रिंट करेंगे। शेफील्ड यूनिवर्सिटी के आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और रोबॉटिक्स के प्रफेसर नोएल शार्की के अनुसार, रोबॉट 3-डी तकनीक का इस्तेमाल कर बच्चों को जन्म दे सकते हैं। नोएल के अनुसार, रोबॉट अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव लाकर सेक्स के दौरान अपनी खूबियों को बढ़ा या एक्सचेंज कर सकते हैं। उनके बच्चों में इन खूबियों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। इन रोबॉट के पास कार्बन और सिलिकन से बना डिजिटल दिमाग होगा।


वायरस से भी होगी सुरक्षा: विशेषज्ञों का तो यहां तक मानना है कि रोबॉट द्वारा सेक्स करने से उनके सॉफ्टवेयर वायरस से भी बचे रहेंगे। ठीक उसी तरह जैसे सेक्स करने से मनुष्यों को कई संक्रमित बीमारियां नहीं होतीं।

बुढ़ापे का इलाज: वैज्ञानिकों के अनुसार इन रोबॉट-इंसानों के हाइब्रिड की दिशा में हो रही रिसर्च से बुढ़ापे के बारे में भी और जानकारी मिल सकती है। यह रिसर्च इंसानी शरीर को जानने की दिशा में लाभदायक होगी और यह जाना जा सकेगा कि बुढ़ापे के लिए जिम्मेदार अल्टशाइमर्त्स बीमारी का असर इंसानी दिमाग पर किस तरह और कितना होता है। प्रफेसर वार्विक ने कहा कि रोबॉट का एक दूसरे से सेक्स करना और रोबॉट पैदा करना सामाजिक स्वीकार्यता पर भी निर्भर करेगा। 20 साल के बाद जब यह पूरी तरह से संभव हो जाएगा तब इस तकनीक को स्वीकार करने मे नैतिक दिक्कते आएंगी। वैसे वैज्ञानिकों की इस रिसर्च से काफी उम्मीदें हैं। वैज्ञानिका जॉर्ज डायसन का मानना है कि ऐसे रोबॉट शनि के चांद एनक्लेडस से मंगल ग्रह पर बर्फ लाने में मदद कर सकते हैं। sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

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