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रविवार, 5 जनवरी 2014

वस्तुओं को हवा में स्थानांतरित करने के लिए ध्वनि का प्रयोग :क्या भारतीय योग विद्या को मान रही है

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जापानी वैज्ञानिकों द्वारा वस्तुओं को हवा में स्थानांतरित करने के लिए ध्वनि का प्रयोग


भारतीय योग विद्या की वैज्ञानिक पुष्टि हो रही है और मंत्रा शक्ति की भी ताकत भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित  प्रतीत होती है 
टोक्यो विश्वविद्यालय और नागोया प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने ध्वनिक उत्तोलन की एक जटिल प्रणाली के माध्यम से छोटी वस्तुओं को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया। ध्वनि तरंगों ने छोटी-छोटी चीज़ों को त्रिआयामी वायुमण्डल में एक जगह से दूसरी जगह पहुँचा दिया।
वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस प्रयोग में 20 किलोहार्ट्स से ऊँची ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें मानव के कान सुन नहीं सकते हैं। ये ध्वनि तरंगे चारों तरफ़ से आकर एक सीमित स्थान के भीतर एक दूसरे को काटती हैं, इस तरह नन्ही चीज़ें इन ध्वनि-तरंगों में फँस जाती हैं और वायुमण्डल में लटक-सी जाती हैं। इन ध्वनि तरंगों की दिशा बदलने पर वे उस नन्हीं चीज़ को भी अपने साथ घुमाती हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ध्वनिक-उत्तोलन - गुरुत्वाकर्षण को काबू में कर लेता है। इसलिए नासा जैसे संगठन इस समय भी ध्वनिक उत्तोलक उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। तो क्या भारत के योग ऋषि इसी विधि का प्रयोग करते थे  मंत्रो के द्वारा हवा मे जमीन से उठ जाया करते थे हवा मे तैरने लगते थे | sabhar :http://hindi.ruvr.ru

और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/news/2014_01_03/258032466/

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