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शनिवार, 22 जुलाई 2023

रिकॉर्डतोड़ पारा और गर्म होता समंदर: वैज्ञानिकों की चेतावनी-अनदेखी परिस्थिति से जूझ रही है धरती

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 तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, समुद्र की सतह के गर्म होने और अंटार्कटिक सागर में बर्फ पिघलने की एक के बाद एक घटनाओं को लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है. वैज्ञानिक कहते हैं कि इस तरह की घटनाओं में देखी जा रही तेज़ी और उनके होने का वक्त "अभूतपूर्व" है.


संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पूरे यूरोप में चल रही भयंकर लू 'जानलेवा प्राकृतिक आपदा है' जो अभी और रिकॉर्ड तोड़ सकती है.


पाकिस्तान अभी बीते साल आई भीषण बाढ़ की तबाही से पूरी तरह उबर भी नहीं सका है और इस साल वो एक बार फिर मॉनसून की भारी बारिश का सामना कर रहा है.


बीते साल आई बाढ़ में पाकिस्तान में 1,500 से अधिक लोगों की जान गई थी जबकि हज़ारों हेक्टेयर खेती पानी में डूब गई थी. वहीं इस साल अब तक लाहौर में दो दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है.

भारत का एक बड़ा हिस्सा इस साल ज़रूरत से अधिक बारिश की मार से जूझ रहा है. जहां देश का 40 फीसदी हिस्सा अधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति की मार झेल रहा है देश का बड़ा हिस्सा अभी भी बारिश को तरस रहा है.


भारत में राजधानी दिल्ली समेत कई इलाक़ों में इस साल मॉनसून की बारिश ने बीते दशकों के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.


जलवायु परिवर्तन पर शहर प्रशासन के ड्राफ्ट एक्शन प्लान के अनुसार मौसम में बदलाव के कारण साल 2050 तक दिल्ली 2.75 लाख करोड़ का नुक़सान हो सकता है.


इस रिपोर्ट के अनुसार आने वाले सालों में शहर के सामने गर्म हवाओं, अधिक तापमान और हवा में नमी के कम होने जैसी चुनौतियों का सामना कर सकती है. इस रिपोर्ट को अभी सरकार की मंज़ूरी का इंतज़ार है.

बदलते मौसम की वजह

जानकारों की मानें तो मौसम और समंदर में हो रही इन घटनाओं को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से जोड़ कर देखना मुश्किल है, क्योंकि ये सभी बातें बेहद जटिल हैं.


इसे लेकर कई अध्ययन किए जा रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें डर है कि कई खौफनाक मंज़र दुनिया के सामने आने लगे हैं.


लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में पर्यावरण जियोग्राफ़र डॉक्टर थोमस स्मिथ कहते हैं, "मुझे ऐसे किसी और दौर की जानकारी नहीं है जब जलवायु सिस्टम के सभी हिस्से रिकॉर्ड स्तर पर किसी न किसी आपदा से न जूझ रहे हों."


वहीं इंपीरियल कॉलेज लंदन में जलवायु विज्ञान पढ़ा रहे डॉक्टर पाओलो सेप्पी कहते हैं कि जीवाश्म से मिलने वाले ईंधन के कारण हो रही ग्लोबल वार्मिंग और एल नीनो (2018 से मौसम में हो रहे परिवर्तन की प्राकृतिक प्रक्रिया) के कारण ऐसा लगता है कि पृथ्वी "अब किसी अनजान क्षेत्र में आ गई है."


इस साल गर्मियों के दिनों में अब तक मौसम के चार रिकॉर्ड टूट चुके हैं - इस साल जुलाई में अब तक का सबसे अधिक गर्म दिन रहा, वैश्विक स्तर पर जून का महीना सबसे अधिक गर्म महीना रहा, समंदर में बेहद अधिक गर्म लू और अंटार्कटिक सागर में जम बर्फ में रिकॉर्ड कमी आई.


लेकिन मौसम में आ रहे इन बदलावों का हमारे लिए क्या संकेत हैं, धरती और मानव भविष्य को ये किस हद तक प्रभावित कर सकते हैं?

बदलते मौसम की वजह

जानकारों की मानें तो मौसम और समंदर में हो रही इन घटनाओं को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से जोड़ कर देखना मुश्किल है, क्योंकि ये सभी बातें बेहद जटिल हैं.

इसे लेकर कई अध्ययन किए जा रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें डर है कि कई खौफनाक मंज़र दुनिया के सामने आने लगे हैं.

लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में पर्यावरण जियोग्राफ़र डॉक्टर थोमस स्मिथ कहते हैं, "मुझे ऐसे किसी और दौर की जानकारी नहीं है जब जलवायु सिस्टम के सभी हिस्से रिकॉर्ड स्तर पर किसी न किसी आपदा से न जूझ रहे हों."

वहीं इंपीरियल कॉलेज लंदन में जलवायु विज्ञान पढ़ा रहे डॉक्टर पाओलो सेप्पी कहते हैं कि जीवाश्म से मिलने वाले ईंधन के कारण हो रही ग्लोबल वार्मिंग और एल नीनो (2018 से मौसम में हो रहे परिवर्तन की प्राकृतिक प्रक्रिया) के कारण ऐसा लगता है कि पृथ्वी "अब किसी अनजान क्षेत्र में आ गई है."

इस साल गर्मियों के दिनों में अब तक मौसम के चार रिकॉर्ड टूट चुके हैं - इस साल जुलाई में अब तक का सबसे अधिक गर्म दिन रहा, वैश्विक स्तर पर जून का महीना सबसे अधिक गर्म महीना रहा, समंदर में बेहद अधिक गर्म लू और अंटार्कटिक सागर में जम बर्फ में रिकॉर्ड कमी आई.

लेकिन मौसम में आ रहे इन बदलावों का हमारे लिए क्या संकेत हैं, धरती और मानव भविष्य को ये किस हद तक प्रभावित कर सकते हैं?

रिकॉर्डतोड़ गर्मी

इस बार पूरी दुनिया में जुलाई महीने में अब तक का सबसे अधिक गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया. इसने वैश्विक औसत तापमान का 2016 में बना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया.

जलवायु पर निगरानी रखने वाली यूरोपीय संघ की एजेंसी कोपर्निकस के अनुसार इस साल 6 जुलाई को वैश्विक औसत तापमान 17.08 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा.

धरती के गर्म होने के कारणों के पीछे जीवाश्म से मिलने वाले तेल, कोयला और गैस जैसे ईंधन के जलाने से पैदा होने वाला उत्सर्जन शामिल है.

इंपीरियल कॉलेज लंदन में जलवायु वैज्ञानिक डॉक्टर फ्रेडरिक ओटो कहती हैं कि ग्रीनहाउस गैसों के कारण गर्म होने वाली धरती के बारे में इस तरह का पूर्वानुमान पहले ही लगाया गया था.

डॉक्टर फ्रेडरिक कहती हैं, "इस ट्रेंड के बढ़ने के पीछे सौ फीसदी इंसान का ही हाथ है."

डॉक्टर थोमस स्मिथ कहते हैं "अगर मुझे किसी बात पर आश्चर्य है तो वो हम देख रहे हैं कि रिकॉर्ड जून के महीने में ही टूट गया है. अब तो साल भी पूरा नहीं हुआ. आम तौर पर वौश्विक स्तर पर एल-नीनो की प्रक्रिया का असर इसके शुरू होने के पांच छह महीनों तक दिखाई नहीं देता."

एल-नीनो जलवायु में उतार-चढ़ाव की प्राकृतिक तौर पर होने वाली दुनिया की सबसे ताकतवर प्रक्रिया है. उष्णकटिबंधीय प्रशांत में ये प्रक्रिया समुद्र की सतह पर मौजूद पानी को गर्म कर देती है, जिससे वायुमंडल में गर्म हवाएं चलने लगती हैं. आम तौर पर ये प्रक्रिया वैश्विक स्तर पर वातावरण का तापमान बढ़ा देती है.

औद्योगिकरण से पहले के दौर में जून के महीने के तापमान की तुलना में इस साल जून के महीने में औसत वैश्विक तापमान 1.47 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा. औद्योगिकरण क़रीब 1800 के आसपास शुरू हुआ जिसके बाद से इंसान लगातार बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें वायुमंडल में छोड़ता रहा है.


क्या 2023 की गर्मियों में जो कुछ हुआ उसके बारे में दशक भर पहले पूर्वानुमान लगाया गया था?


इस सवाल के उत्तर में डॉक्टर स्मिथ कहते हैं कि जलवायु को लेकर पूर्वानुमान लगाने के लिए जो मॉडल हैं वो लंबे वक्त में ट्रेंड का आकलन करने में कारगर हैं लेकिन 10 साल में होने वाले बदलावों का पुख्ता तौर पर आकलन नहीं कर सकते.


वो कहते हैं, "1990 के मॉडल के अनुसार हम काफी हद तक वहीं हैं जहां पर आज हैं. लेकिन अगले 10 सालों में स्थिति वास्तव में कैसी होगी इसका सही-सही आकलन लगा पाना बेहद मुश्किल है."


वो कहते हैं, "बढ़ रहा तापमान कम होने लगेगा, ऐसा नहीं लगता.

गर्म होता समुद्र

समंदर के औसत वैश्विक तापमान ने मई, जून और जुलाई के महीनों में सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. साल 2016 में समुद्र की सतह पर सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया था, इसके बाद इस साल तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाला है.

लेकिन उत्तर अटलांटिक सागर में अत्यधिक गर्मी के कारण बढ़ रहा समुद्र का तापमान वैज्ञानिकों के लिए ख़ास चिंता का विषय बना हुआ है.

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में पृथ्वी विज्ञान की प्रोफ़ेसर डेनिला श्मिड कहती हैं, "हमने पहले कभी अटलांटिक के इस हिस्से में गर्म लहरें नहीं देखी थीं. मैं इसकी उम्मीद नहीं कर रही थी."

जून के महीने में आयरलैंड के पश्चिमी तट पर तापमान औसत से 4 और 5 डिग्री सेल्सियस अधिक तक पहुंच गया. नेशनल ओशनिक और एटमॉसफ़ेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे कैटगरी 5 की गर्म लू यानी "अत्यधिक से भी अधिक" गर्म हवाएं कहा.

हालांकि प्रोफ़ेसर डेनिला श्मिड कहती हैं कि बढ़ रहे तापमान की इस घटना को जलवायु परिवर्तन ने जोड़ना जटिल है लेकिन आप कह सकते हैं कि ये हो रहा है.

वो समझाती हैं कि ये स्पष्ट है कि धरती गर्म हो रही है और वायुमंडल मे मौजूद गर्म हवा को समंदर सोख रहा है.

वो कहती हैं, "जलवायु परिवर्तन के हमारे मॉडल्स में प्राकृतिक परिवर्तनशीलता है और ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जिनके बरे में पहले पूर्वानुमान नहीं लगाया गया था, कम से कम उनके अभी घटने का तो नहीं."

दुनिया की ज़रूरत का 50 फीसदी ऑक्सीजन समुद्र से ही मिलता है.

समुद्री इकोसिस्टम पर मौसम में आ रहे बदलाव के असर के बारे में कहती हैं, "जब हम गर्म लू की बात करते हैं तो लोग अक्सर सूख रहे पेड़ और पीली पड़ती घास के बारे में सोचते हैं."

"अटलांटिक सागर का तापमान जितना होना चाहि उससे 5 डिग्री सेल्सियस अधिक है. इसका मतलब है कि जीवों को अपना काम सामान्य रूप से करने के लिए अब 50 फीसदी अधिक खाद्य की ज़रूरत है."

अंटार्कटिक में जमी बर्फ में रिकॉर्ड कमी

जुलाई के महीने में अंटार्कटिक सागर में मौजूद बर्फ की चादर में रिकॉर्ड कमी आई है. 1981 से लेकर 2010 के औसत की तुलना में देखें तो अंटार्कटिक से यूके के आकार से 10 गुना बड़े हिस्से जितनी बर्फ अब तक पिघल चुकी है.

वैज्ञानिकों के अनुसार ये चेतावनी की घंटी है और जलवायु परिवर्तन से इसके सही लिंक के बारे में जानकारी जुटाने की वो कोशिश कर रहे हैं.

ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे की डॉक्टर कैरोलीन होम्स का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण अंटार्कटिक सागर की बर्फ पिघल सकती है, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखें तो इलाक़े में मौसम में हो रहे बदलाव के कारण भी हो सकता है या फिर समुद्र की लहरों के कारण भी हो सकता है.

वो कहती हैं कि ये केवल एक रिकॉर्ड टूटने का मामला नहीं हैं बल्कि ये रिकॉर्ड लंबे वक्त के लिए टूट गया है.रिकॉर्डतोड़ पारा और गर्म होता समंदर: वैज्ञानिकों की चेतावनी-अनदेखी परिस्थिति से जूझ रही है धरती

वो कहती हैं, "ये ऐसा कुछ है जो हमने इस जुलाई से पहले नहीं देखा था. पहले भी बर्फ कम हुई थी लेकिन ये उससे भी 10 फीसदी तक कम हुई है, ये अपने आप में बड़ी बात है. ये इस बात का संकेत है कि हम असल में नहीं समझ रहे कि परिवर्तन कितनी तेज़ गति से हो रहा है."

वैज्ञानिकों का मानना था कि ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा असर कभी न कभी अंटार्कटिक में जमी बर्फ पर पड़ेगा. लेकिन डॉक्टर होम्स कहती हैं कि 2015 तक इसने दूसरे महासागरों में वैश्विक ट्रेंड को पीछे छेड़ दिया.

वो कहती हैं, "आप कह सकते हैं कि हम पहाड़ की चोटी से नीचे गिर रहे हैं, लेकिन हमें ये भी नहीं पता कि खाई असल में कितनी गहरी है."

"मुझे लगता है कि ये जिस तेज़ गति से हो रहा है वो हमारे लिए आश्चर्य की बात है. इसे किसी सूरत में बेहतर स्थिति नहीं कहा जा सकता लेकिन इस पर हम नज़र रख रहे हैं और हम कह सकते हैं कि ये सबसे बुरी स्थिति के क़रीब है."

वैज्ञानिक कहते हैं कि इस साल के आने वाले महीनों में और 2024 के शुरूआती वक्त में हम इस तरह की अधिक घटनाएं देख सकते हैं.

हालांकि डॉक्टर फ्रेडरिक ओटो कहती हैं कि जो कुछ हो रहा है उसे "जलवायु का पतन" या फिर "अनियंत्रित वॉर्मिंग" कह सकते हैं.

वो कहती हैं, "हम एक नए दौर में हैं लेकिन हम अभी भी कइयों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं."

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Poverty In India: भारत में गरीबी तेजी से घट रही है, तो क्या सब अमीर हो रहे हैं? आंकड़े देख लीजिए

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Poverty In India: भारत में गरीबी तेजी से घट रही है, तो क्या सब अमीर हो रहे हैं? आंकड़े देख लीजिए
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की रिपोर्ट बताती है कि भारत में गरीबी घटने की रफ्तार उत्साहजनक है। हालांकि, कुछ वर्षों में यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। कोविड भी एक इसका बड़ा कारण हो सकता है। इस मोर्च पर हम अपने पड़ोसी देशों में चीन और श्रीलंका के बाद तीसरे स्थान पर हैं।
दिल्ली: गरीब सिर्फ वह नहीं होता जिसकी आमदनी बहुत कम होती है बल्कि इसका संबंध रोटी, कपड़ा और मकान के साथ-साथ शिक्षा की उपलब्धता से भी है। भारत में वर्ष 2005-06 और 2015-16 के बीच गरीब आबादी को ये सभी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने में बेशक प्रगति की, लेकिन उसके बाद से इस तरह बढ़ रहे कदम की रफ्तार धीमी हो गई। इसके पीछे कई वजहे हैं। हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया (ToI) के अतुल ठाकुर बता रहे हैं देश में गरीबी और नौकरी का हाल...

भारत में बहुआयामी गरीबी
देश अपने यहां गरीबों की गिनती लोगों की आय के आधार पर करता है। वो यह तय करते हैं कि बेसिक कैलरी लेवल का खाना जुटाने के लिए औसतन कितनी आमदनी की जरूरत होती है। उसी के आधार पर गरीबी रेखा का निर्धारण कर दिया जाता है। इस स्तर से कम कमाने वाला हर व्यक्ति गरीब है। गरीबी रेखा निर्धारण के इस पैमाने में एक खामी है। वो यह कि वह गरीबी के अन्य आयामों को नजरअंदाज कर देता है। उदाहरण के लिए, एक तरफ बेघर व्यक्ति और दूसरी तरफ वो जिसके पास बिजली कनेक्शन वाला हवादार मकान हो, दोनों ही आमदनी के आधार पर गरीबी रेखा से नीचे हो सकते हैं, लेकिन सच्चाई में बेघर व्यक्ति की हालत मकान वाले के मुकाबले बदतर है।

यूएनडीपी का वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index या MPI) आय के अलावा गरीबी के अन्य पहलुओं पर भी गौर करता है। इसके सबसे हालिया संस्करण में भारत के बारे में चिंताजनक नतीजे दिए हैं। इसमें कहा गया है कि भले ही वर्ष 2005-06 से 2015-16 के बीच बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty यानी MDP) 2.7 प्रतिशत अंक (पर्सेंटेज पॉइंट या पीपी) प्रति वर्ष की औसत दर से गिरी, लेकिन वर्ष 2015-16 से 2019-21 के बीच आंकड़ा 2.3 प्रतिशत अंक रह गया। आंकड़े में यह गिरावट इसलिए संभव है कि बाकी गरीब परिवार दूरदराज या सबसे गरीब इलाकों में स्थित हैं। साथ ही, 2019-21 की अवधि में वैश्विक महामारी कोविड का भी असर रहा है।

यूं तो नीति आयोग और यूएनडीपी, दोनों अपनी रिपोर्ट में बहुआयामी गरीबी की गणना करने के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों का उपयोग करते हैं, लेकिन दोनों के गणना का सिस्टम अलग है। यही वजह है कि दोनों की रिपोर्ट में गरीबी को लेकर अलग-अलग आंकड़े हैं। नीति आयोग का अनुमान है कि 2015-16 और 2019-21 के बीच 13.5 करोड़ लोग एमडीपी से बच गए जबकि यूएनडीपी ने इसे 14 करोड़ बताया है।

कुल मिलाकर, 15 वर्षों में तेजी से कमी
2005-06 में 55% से थोड़ा अधिक भारतीयों को बहुआयामी रूप से गरीब माना गया था। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यह अनुपात 2015-16 में घटकर 27.7 प्रतिशत और 2019-21 में 16.4 प्रतिशत रह गया।

* 2015-16 और 2019-21 के बीच गिरावट की धीमी दर के बावजूद जनसंख्या वृद्धि के कारण 2005-06 और 2015-16 के बीच के वर्षों की तुलना में इस अवधि के दौरान सालाना अधिक लोग बहुआयामी गरीबी (एमडीपी) से बच गए।

गरीबी के आयाम : स्वास्थ्य
इस आयाम में पोषण और बाल मृत्यु दर शामिल हैं। इस पैमाने में यदि किसी परिवार में अविकसित (उम्र के लिहाज से कम शारीरिक आकार का) या कम वजन वाला बच्चा, या फिर कम बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाला वयस्क है तो उस परिवार को गरीब माना जाता है। इसी तरह, जिस परिवार में सर्वे से पहले पांच वर्षों के भीतर किसी बच्चे की मृत्यु हो गई है, उसे भी गरीब ही माना जाता है।

आंकड़ों के मुताबिक, 2005-06 में 44.3% भारतीय परिवार उचित पोषण से वंचित थे। 2015-16 में कुपोषण की दर 21.1 प्रतिशत थी जो 2019-21 में 11.8 प्रतिशत तक गिर गई। 2005-06 और 2015-16 के बीच गिरावट की औसत दर 2.3 पीपी प्रति वर्ष और अगले पांच वर्षों में 1.9 पीपी थी। बाल मृत्यु दर 2005-06 में 4.5% से गिरकर 2015-16 में 2.2% और 2019-21 में 1.5% हो गई।


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वृक्षारोपण जन अभियान-2023, मुख्यमंत्री योगी की अपील, इस दिन लगा

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 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता से ‘वृक्षारोपण जन अभियान-2023’ के तहत कम से कम एक पौधा लगाने की अपील की है। इस अभियान के तहत प्रदेश भर में 35 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री योगी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा कि ‘हमारे लिए पर्यावरण की रक्षा आस्था का विषय है। हमारे पास प्राकृतिक संसाधन हैं, क्योंकि हमारी पिछली पीढ़ियों ने इन संसाधनों की रक्षा की। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ऐसा करना चाहिए।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन विचारों को आत्मसात करते हुए आज ‘पेड़ लगाओ-पेड़ बचाओ’ थीम पर प्रारंभ हो रहे ‘वृक्षारोपण जन अभियान-2023’ के अंतर्गत प्रदेश में 35 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है।  


वृक्षारोपण जन अभियान-2023, मुख्यमंत्री योगी की अपील, इस दिन लगा

यह लक्ष्य सहजीवन-सहअस्तिव का संदेश देती अपनी सनातन संस्कृति के जीवनदायक मूल्यों से हमारे जुड़ाव को बढ़ाने का एक महा-अनुष्ठान भी है।

अतः पर्यावरण संरक्षण व पारिस्थितिकी संतुलन को सुनिश्चित करते इस ईश्वरीय कार्य में आप सभी की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

आप सभी से अपील है कि आज कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और इस लोक-कल्याणकारी मुहिम को सफल बनाएं।

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कटा सिर लेकर घूमता रहा भाई, ‘मैं चांदबाबू से सच्चा प्यार करता हूं, रात भर समझाया, नहीं माना तो काट दिया’

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 बाराबंकी के फतेहपुर में अपनी बहन के कुछ समय पहले प्रेमी संग भाग जाने से नाराज एक युवक ने शुक्रवार सुबह उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। उसका सिर धड़ से अलग करने के बाद वह एक हाथ में बांका और एक हाथ में कटा सिर लेकर सहसी से फतेहपुर की तरफ जाने वाली सड़क पर घूमता रहा। इससे पूरे गांव में दहशत फैल गई।


ऑनर किलिंग की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने गांव से करीब एक किलोमीटर दूर फतेहपुर की तरफ जाने वाली सड़क पर उसे गिरफ्तार कर लिया। पिता की तहरीर पर युवक के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी युवक रियाज ने अपनी बहन को घर के पास अहाते में कपड़े धोने भेजा।



फिर वहीं पहुंचकर उस पर ताबड़तोड़ वार करने लगा और आखिर में सिर ही धड़ से अलग कर दिया। रियाज की बहन गत 25 मई को गांव के ही निवासी चांदबाबू के साथ घर छोड़कर चली गई थी। 29 मई को पिता की तहरीर पर चांदबाबू समेत पांच लोगों पर अपहरण का केस दर्ज किया गया।


पिता ने बेटी की उम्र 17 वर्ष बताई थी। पुलिस ने दोनों को खोज निकाला और युवक को जेल भेज दिया, जबकि किशोरी को उसके परिजनों को सौंप दिया। 24 वर्षीय रियाज तभी से अपनी बहन के चाल-चलन को लेकर नाराज था। एसएचओ डीके सिंह ने बताया कि आरोपी मानसिक रूप से स्वस्थ लग रहा है।


बहन को पूरी रात समझाया, फिर लिया हत्या का फैसला

फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र में भाई की ओर से बहन की हत्या के पीछे की वजह जानकर आप दंग रह जाएंगे। जेल से छूटे प्रेमी के साथ ही रहने के लिए वह तय कर चुकी थी। उसने मां, बहन व भाई से साफ कह दिया था कि वह सच्चा प्यार करती है। भाई रियाज पूरी रात बहन को समझाता रहा कि दूसरी जगह शादी करेंगे। युवती ने बात मानने से इंकार किया तो भाई ने बहन की हत्या कर दी।


कटा सिर लेकर घूमता रहा भाई, ‘मैं चांदबाबू से सच्चा प्यार करता हूं, रात भर समझाया, नहीं माना तो काट दिया

कोतवाली में गिरफ्तार कर लाए गए युवक ने पुलिस को यह सच्चाई बताई। उसने कहा कि वह भाग नहीं रहा था, बल्कि स्वयं कोतवाली आ रहा था। युवक हम लोगों की जाति से मिलता नहीं था। बहन की शादी कैसे कर सकते थे। परिजनों ने भी पुलिस को यही सच्चाई बताई। फतेहपुर के एसएचओ ने बताया कि युवती का प्रेमी बीरी सात जुलाई को छूट गया था। लेकिन गांव नहीं आया था। हत्या से पहले भी रियाज उसे मनाने व समझाने की कोशिश करने की बात कह रहा है।


बदहवास हुआ पिता, बिलख पड़ीं बहनें

मृतका का पिता साइकिल से फेरी लगाकर सब्जी बेचता है। युवती तीन बड़े भाइयों व चार बहनों में पांचवें नंबर पर थी। इनमें एक भाई व एक बहन की शादी हो चुकी है। युवती दो साल पहले तक मदरसे में पढ़ती थी। इन दिनों वह घर पर ही रहती थी। शुक्रवार सुबह पिता अपने काम के सिलसिले में घर से निकल गया था। सूचना पाकर जब पिता घर पहुंचा तो बदहवास हो गया। बहनें भी बिलख रही थीं। एएसपी उत्तरी आशुतोष मिश्र ने बताया कि बहन के चाल-चलन से क्षुब्ध होकर युवक ने घटना को अंजाम दिया है।


अहाते से सड़क तक बिखरा खून, गांव में सनसनी

हत्या के बाद युवक जब सिर लेकर अहाते से निकला तो टपकता खून सड़क तक फैल गया। इससे गांव में सनसनी फैल गई। महिलाएं दहशत से घरों में दुबक गईं।

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पोलैंड से भारत आईं बारबरा, सोशल मीडिया पर हुई थी शादाब से मुलाक़ात

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 बारबरा पोलाक अपने प्रेमी शादाब आलम से मिलने जुलाई के दूसरे हफ़्ते में हज़ारीबाग आई हैं.

वे जून में भारत आई थीं. 26 जून को वे अपनी सात साल की बेटी आनिया पोलाक के साथ पोलैंड से नई दिल्ली पहुंची थीं. तब वे शादाब के साथ दिल्ली के पर्यटन स्थलों पर घूमने गई थीं.


शादाब बताते हैं, "जब हम दिल्ली में घूम रहे थे तो लोग बारबरा और आनिया के साथ फ़ोटो खिंचवाना चाहते थे, मानो जैसे वो सेलिब्रिटी हों."

क्या कहती हैं बारबरा?

बारबरा से जब हम पहली बार मिले तो उन्होंने सबसे पहले हमें सलाम किया.


जब हमने उनसे पूछा कि ये कहां सीखा तो वो बोलीं गांव आकर. उन्होंने कहा, "जब शुरू-शुरू में गांव के लोग मिलने आए तो शादाब को अभिवादन के तौर पर सलाम करते सुना, तब से मैं भी मिलने आने वाले सभी लोगों से सलाम करती हूं."


हालांकि बारबरा से बाकी बातचीत अंग्रेज़ी में हुई. उन्होंने कुछ सवालों के जवाब अंग्रेज़ी में तो कुछ के पोलिश में दिए, जिसे शादाब ट्रांसलेट कर बताते रहे.


भारत की तारीफ़ करते हुए बारबरा बोलीं, "यह अतिथि देवो भवः वाला एक खूबसूरत देश है. यहां लोग बहुत मिलन-सार हैं. यहां के फल बहुत मीठे हैं. यहां का खाना मुझे पसंद है."


अपनी बेटी के विषय में वो बताती हैं, "बेटी भी यहां मेरे साथ छुट्टियां बिताकर बहुत खुश है. वह शादाब से बहुत घुल मिल गई है. वह उसे अभी से डैडी कहती है. दोनों साथ मिलकर खूब खेलते हैं."


विज़िटिंग वीज़ा पर आईं बारबरा कहती हैं कि ये पहला अवसर है जब मैं किसी गांव आई हूं.


वे कहती हैं, "इस खुटरा गांव का कल्चर मुझे बहुत अच्छा लगा. लेकिन यहां के घर बहुत छोटे हैं. पोलैंड में घर बड़े होते हैं. फिर भी शादाब के साथ यहां रह कर मैं बहुत खुश हूं."

कैसे हुई बारबरा की शादाब से मुलाक़ात?

महाराष्ट्र कॉलेज से स्नातक करने वाले शादाब बताते हैं कि वह अच्छे डांसर हैं.


शादाब बोले, "डांस का वीडियो बनाकर मैं टिकटॉक पर पोस्ट करता था. उसे देख कर बारबरा मुझे फॉलो करने लगीं. बारबरा ने कई बार डीएम मैसेज किए लेकिन मैं उनकी एकाउंट डीपी में विदेशी महिला का चेहरा देख कर डर गया कि ये कहीं कोई फ्रॉड एकाउंट तो नहीं. लिहाजा मैंने कोई जवाब नहीं दिया. फिर भी वह लगातार संपर्क की कोशिश करती रहीं."


वे कहते हैं, "टिकटॉक बंद होने के बाद मैं इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने लगा. वहां भी बारबरा मुझे फॉलो करती थीं. एक दिन मैं लाइव था तो पाया कि बारबरा भी मौजूद हैं. उन्होंने मुझसे संपर्क करने की इच्छा जताई, और मैंने उनको अपना नम्बर शेयर किया. फिर व्हाट्सएप के ज़रिए उनसे बातचीत शुरू हुई. वो लॉकडाउन से पहले का समय था."


शादाब बताते हैं, "बारबरा अक्सर रेड रोज़ भेजती थीं जिसे देख कर मुझे प्यार का एहसास होने लगा. फिर एक दिन बारबरा ने ख़ुद ही प्यार का इज़हार कर दिया, जिसे मैंने क़ुबूल कर लिया."पोलैंड से भारत आईं बारबरा, सोशल मीडिया पर हुई थी शादाब से मुलाक़ात

Sabhar: 

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शुक्रवार, 21 जुलाई 2023

Rajasthan Politics: सीएम अशोक गहलोत ने राजेंद्र गुढ़ा को मंत्री पद से किया बर्खास्त

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 Rajendra Gudha News: सीएम अशोक गहलोत ने राजेंद्र गुढ़ा को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया है. पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है

Manipur Violence: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्री राजेंद्र गुढ़ा को पद से बर्खास्त कर दिया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है. दरअसल राजस्थान सरकार में मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने विधानसभा में अपने ही सरकार को घेरा है. उन्होंने विधानसभा में मणिपुर मामले को लेकर बयान देते हुए अपने ही सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. मंत्री के बयान पर नेता प्रतिपक्षा राजेंद्र राठौर ने सरकार पर तंज कसा है.

विधानसभा में क्या कहा है राजेंद्र गुढ़ा?



मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने अपनी ही सरकार को निशाने पर लेते कहा कि मणिपुर के बजाय हमें अपने गिरेबां में झांकना चाहिए. विधानसभा में मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने अपने ही सरकार को घेरते हुए कहा कि हमें ये बात स्वीकार करना चाहिए कि हम महिलाओं की सुरक्षा में असफल हो गए. राजस्थान में जिस तरह से महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं मणिपुर के बजाय हमें अपने गिरेबां में झांकना चाहिए.

मंत्री राजेंद्र गुढ़ा द्वारा अपनी ही सरकार पर निशाना साधने से जुड़े बयान पर बीजेपी ने तंज कसते हुए एक वीडियो शेयर किया है. नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए लिखा- 'राजस्थान में बहन-बेटियों के ऊपर हो रहे अत्याचारों व दुष्कर्म की असलियत स्वयं सरकार के मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा बता रहे हैं. संविधान के आर्टिकल 164(2) के अनुसार मंत्रिमंडल सामूहिक उत्तरदायित्व के आधार पर काम करता है और एक मंत्री का बयान पूरे मंत्रिमंडल यानी सरकार का माना जाता है. मुख्यमंत्री @ashokgehlot51 जी, हमारी नहीं तो कम से कम अपने मंत्री के बयान पर तो संज्ञान लो. गृहमंत्री के रूप में लचर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी तो संभाल लो.' 



बहरहाल अपनी ही सरकार के खिलाफ मंत्री राजेंद्र गुढ़ा द्वारा निशाना साधने के मामले से राजस्थान की सियासत गरमा गई है. राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने बड़ा फैसला लेते हुए राजेंद्र गुढ़ा को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया है. 

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डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों कहा- मुझे गिरफ़्तार किया जा सकता है

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 अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें 2020 के चुनावों के नतीजों के बाद कैपिटल हिल पर हुई हिंसा की जांच के दौरान गिरफ़्तार किया जा सकता है.


पूर्व राष्ट्रपति ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है कि उन्हें स्पेशल काउंसल जैक स्मिथ ने रविवार रात बताया है कि वो एक जांच के केंद्र में हैं.


अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी अमेरिका की राजधानी में हुई हिंसा की जांच कर रही है.


ट्रंप ने कहा है कि उनसे ग्रैंड जूरी के सामने पेश होने के लिए कहा गया है और ‘जिसका हमेशा यही मतलब होता है कि या तो गिरफ़्तारी होगी या अभियोग चलाया जाएगा.’

इस तरह का अभियोग कथित आपराधिक कृत्यों के लिए ट्रंप के ख़िलाफ़ तीसरा अभियोग होगा.


इनमें उन पर ‘गुप्त दस्तावेज़ों’ को ग़लत तरीक़े से संभालने के 37 आरोप भी शामिल हैं. जून में पूर्व राष्ट्रपति पर स्पेशल काउंसिल जैक स्मिथ की टीम ने ये आरोप लगाये थे.


ट्रंप पर न्यूयॉर्क सिटी में भी कारोबारी दस्तावेज़ों में झूठ बोलने के आरोप में मुक़दमा चल रहा है.


ये साल 2016 में वयस्क फ़िल्मों की अभिनेत्री स्टॉर्मी डेनियल्स को किए गए कथित भुगतान के संबंध में हैं.


इस मामले में अगले साल मार्च में उन्हें सुनवाई का सामना करना है. वहीं गुप्त दस्तावेज़ों के मामलों में तारीख़ को लेकर ट्रंप के वकीलों ने चुनौती दी है.


आयोवा प्रांत के सेडार रैपिड्स में बोलते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने ताज़ा घटनाक्रम पर खीज ज़ाहिर की है.


उन्होंने कहा, “मैं व्यवहारिक रूप से नहीं जानता था कि कि ये ग्रैंड जूरी या हाज़िरी आदेश या ये सब जो चल रहा है क्या है. अब मैं इनका विशेषज्ञ बन रहा हूं, मेरे पास कोई और विकल्प भी नहीं है. ये शर्मनाक़ है.”

इस तरह का अभियोग कथित आपराधिक कृत्यों के लिए ट्रंप के ख़िलाफ़ तीसरा अभियोग होगा.


इनमें उन पर ‘गुप्त दस्तावेज़ों’ को ग़लत तरीक़े से संभालने के 37 आरोप भी शामिल हैं. जून में पूर्व राष्ट्रपति पर स्पेशल काउंसिल जैक स्मिथ की टीम ने ये आरोप लगाये थे.


ट्रंप पर न्यूयॉर्क सिटी में भी कारोबारी दस्तावेज़ों में झूठ बोलने के आरोप में मुक़दमा चल रहा है.


ये साल 2016 में वयस्क फ़िल्मों की अभिनेत्री स्टॉर्मी डेनियल्स को किए गए कथित भुगतान के संबंध में हैं.


इस मामले में अगले साल मार्च में उन्हें सुनवाई का सामना करना है. वहीं गुप्त दस्तावेज़ों के मामलों में तारीख़ को लेकर ट्रंप के वकीलों ने चुनौती दी है.


आयोवा प्रांत के सेडार रैपिड्स में बोलते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने ताज़ा घटनाक्रम पर खीज ज़ाहिर की है.


उन्होंने कहा, “मैं व्यवहारिक रूप से नहीं जानता था कि कि ये ग्रैंड जूरी या हाज़िरी आदेश या ये सब जो चल रहा है क्या है. अब मैं इनका विशेषज्ञ बन रहा हूं, मेरे पास कोई और विकल्प भी नहीं है. ये शर्मनाक़ है.”

6 जनवरी 2021 को अमेरिकी राजधानी में हिंसा हुई थी


इससे पहले अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया था कि उन्हें एक पत्र मिला है.


ट्रंप ने बताया, “छह जनवरी की घटना पर ग्रैंड जूरी की जांच में मैं भी एक टार्गेट हूं और मुझे ग्रैंड जूरी के सामने पेश होने के लिए सिर्फ़ चार दिन का समय दिया गया है, जिसका हमेशा और हरसंभव मतलब गिरफ़्तारी या अभियोग ही होता है.”


पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले साल आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए दावेदारी का ऐलान करने के कुछ समय बाद ही अमेरिका के महाधिवक्ता जनरल मेरिक गारलैंड ने जैक स्मिथ को स्पेशल काउंसल नियुक्त किया था.


उनकी टीम को पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस से जाने के बाद ‘गुप्त दस्तावेज़ों’ को किस तरह संभाला था इसकी जांच करने का काम दिया गया था.


इसके अलावा उन्हें अमेरिकी राजधानी पर हुए हमले और ‘ट्रंप और उनके सलाहकारों के 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद सत्ता के हस्तांतरण में दख़ल देने के प्रयासों’ की व्यापक संघीय जांच की कमान संभालने के लिए भी कहा गया था.


स्पेशल काउंसल के दफ़्तर ने ये नहीं बताया है कि वो किस तरह के आपराधिक उल्लंघन पर विचार कर रहे हैं. अभी ये भी पता नहीं है कि क्या और लोगों को ये बताया गया है कि वो जांच के दायरे में है.


पिछले साल दिसंबर में, 6 जनवरी की घटनाओं की जांच कर रही एक संसदीय समिति ने पूर्व राष्ट्रपति और उनके सहयोगियों के ख़िलाफ़ चार अलग-अलग आपराधिक आरोप तय किए थे.


ये हैंडोनाल्ड ट्रंप ने क्यों कहा- मुझे गिरफ़्तार किया जा सकता है


विद्रोह भड़काना, सहायता करना और मदद करना

सरकारी कार्यवाही में बाधा डालना

संयुक्त राज्य अमेरिका को धोखा देने की साजिश रचना

झूठा बयान देने की साजिश रचना.

डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाली इस समिति में रिपब्लिकन पार्टी के भी दो सदस्य हैं. हालांकि अभियोजक समिति की सिफ़ारिशें मानने के लिए बाध्य नहीं हैं. Sabhar BBC.COM 

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Manipur Violence: 'मणिपुर में गैंगरेप की फेक न्यूज ने भीड़ को उकसाया', महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने वाले वीडियो पर बोली पुलिस

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 Manipur Video: पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली गैंगरेप की फोटो मणिपुर की बताकर सोशल मीडिया पर वायरल की गई. मणिपुर में वीडियो वायरल होने के बाद भीड़ ने महिलाओं के साथ दरिंदगी की घटना को अंजाम दिया.

Manipur Violence: मणिपुर में दो महिलाओं को नग्न घुमाए जाने वाले शर्मनाक वीडियो के वायरल होने के बाद विवाद गहराता जा रहा है. वीडियो मणिपुर के कंगपोकपी जिले का बताया जा रहा है जहां 4 मई को भीड़ ने महिलाओं को नग्न करके घुमाया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिख रहा है कि भीड़ दो महिलाओं को पकड़कर खेत के पास से लेकर जाती है. मामले में दर्ज एफआईआर में एक महिला के साथ गैंगरेप का आरोप भी लगाया गया है. असल में इस पूरी वारदात को सोशल मीडिया पर एक फेक न्यूज वायरल होने के बाद अंजाम दिया गया.

पुलिस के मुताबिक, दिल्ली में रेप की खबर सोशल मीडिया पर गलत तरीके से 'मणिपुर में रेप की वारदात' बातकर फैलाई गई. गैंगरेप की फेक न्यूज ने भीड़ को उकसाया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के गैंगरेप की फोटो वायरल होने के बाद ही मणिपुर में भीड़ ने महिलाओं के साथ दरिंदगी की. सोशल मीडिया पर प्लास्टिक शीट में लिपटी एक महिला की फोटो वायरल हो रही थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह मणिपुर की महिला है और उसके साथ रेप किया गया है. हालांकि बाद में जांच के दौरान पता चला कि ये फोटो मणिपुर का नहीं बल्कि दिल्ली का है.


क्या है पूरा मामला
मालूम हो कि मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना का वीडियो बुधवार (19 जुलाई) को सोशल मीडिया पर उस दौरान सामने आया, जब मणिपुर में पुरुषों के एक समूह की ओर से दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया जा रहा है. वीडियो में दिखाई दे रहा है कि पुरुष महिलाओं के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहे हैं. इतना ही नहीं महिलाएं मदद के लिए भीख मांग रही हैं और रो रही हैं. महिलाएं उनसे मिन्नतें कर रही हैं कि उन्हें छोड़ दीजिए. 


शिकायत के आधार पर पुलिस ने 18 मई को सैकुल पुलिस थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की थी. सैकुल पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ रेप और हत्या समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं. पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, घटना 4 मई की दोपहर को हुई थी. Manipur Violence: 'मणिपुर में गैंगरेप की फेक न्यूज ने भीड़ को उकसाया', महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने वाले वीडियो पर बोली पुलिस

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वैश्विक मुद्रा का रूप ले रहा रुपया, दुनिया के 35 देशों ने जताई रुपए में द्विपक्षीय कारोबार की इच्छा

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 राज एक्सप्रेस। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस और अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से द्विपक्षीय लेनदेन में रुपए का रुतबा बढ़ने लगा है। यूक्रेन में पिछले एक साल से चल रहे संघर्ष का ही नतीजा है कि रूस पर अमेरिकी और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने रूस, चीन और भारत को अमेरिकी डॉलर की तुलना में वैकल्पिक मुद्रा में लेनदेन के लिए मजबूर कर दिया है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने भारत और चीन को भारी डिस्काउंट पर तेल बेचने का ऑफर दिया, जिसे दोनों ही पड़ोसी देशों ने दोनों हाथों से भुनाया। लिहाजा, रूस के ऑफर ने भारतीय रुपये को डॉलर की तरह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बनने का एक बड़ा मौका दे दिया और भारत सरकार ने भी इस मौके को भुनाने की कोशिश शुरू कर दी है। अब रुपया वैश्विक मुद्दा का आकार ले रहा है।

60 के दशक में भी किए गए थे रुपए में लेन-देन के प्रयास :


उल्लेखीय है कि यह पहली बार नहीं है, कि भारतीय रुपया वैश्विक हो रहा है। 60 के दशक में भी, मलेशिया, कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों ने भारतीय मुद्रा का इस्तेमाल आपसी लेनदेन में किया था और उस समय भारतीय रुपये को 'खाड़ी रुपया' तक कहा जाने लगा था। समय के साथ इन देशों ने भारतीय रुपये की जगह अपनी मुद्राओं में व्यापार शुरू कर दिया और इस तरह भारतीय रुपया खाड़ी में अपना वर्चस्व खो बैठा। हालांकि, यूक्रेन संकट से पहले मालदीव, श्रीलंका और कभी-कभी बांग्लादेश ने भारतीय रुपये में व्यापार करने या एक आम 'दक्षिण एशियाई मुद्रा' चलाने की जरूरत पर बात शुरू की लेकिन यह कभी व्यावहारिक धरातल पर नहीं उतर पाया। हालांकि। आज द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से, भारतीय रुपया पड़ोसी देश नेपाल और भूटान में एक स्वीकृत मुद्रा है, लेकिन ये देश इसे किसी तीसरे देश के साथ व्यापार करने के लिए उपयोग नहीं करते हैं।


सभी पक्षों के लिए लाभदायक होगा रुपए में लेनदेन :


पड़ोसी दशो के आपसी व्यापार में अगर भारतीय रुपये का उपयोग होने लगे तो श्रीलंका, बांग्लादेश और मालवीद जैसे देशों को काफी फायदा होगा। इससे डालर पर निर्भरता घटेगी। इन देशों पर वैसे भई डॉलर की मजबूती का कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि ये देश बहुत हद तक आयात और निर्यात के लिए भारत पर निर्भर रहे हैं।


लिहाजा पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद (मालदीव) और महिंदा राजपक्षे (श्रीलंका) भारतीय रुपये में कारोबार के विचार के प्रबल समर्थक रहे हैं और उन्होंने सार्क शिखर सम्मेलन और भारतीय नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता में कई बार रुपये में कारोबार की संभावना जताई। हालांकि, उन्हें भारत की तरफ से ही सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। यहां तक कि, जब ईरान के ऊपर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया, फिर भी श्रीलंका और मालदीव ईरान से तेल खरीदने के लिए भारतीय रुपये में भुगतान करना चाहते थे, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया।


मलेशिया रुपए में व्यापार करने वाला पहला देश :


अब जबकि भारत अपने रुपए को लेनदेन की मुद्रा बनाने का प्रयास कर रहा है तो यह देखना होगा कि भारत के पड़ोसी देश किस तरह का रिस्पांस करते हैं। भारत ने अब जब अपने रुपये को ग्लोबल मार्केट में उतार दिया है, तो श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों ने इसे एक मौके की तरह भुनाया जरूर है, लेकिन अब इन देशों ने पहले की तरह व्यापार में रुपये के जरिए कारोबार करने की मंशा जताना बंद कर दिया है। हालांकि, भारत ने रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार में भारतीय रुपये के जरिए कारोबार की संभावना तलाश ली है, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब जैसे अन्य तेल बेचने वाले देशों सहित 35 देशों ने कम से कम द्विपक्षीय स्तर पर भारतीय रुपये में कारोबार करने को लेकर इच्छा जता दी है। वहीं, मलेशिया भारतीय रुपये में द्विपक्षीय व्यापार की शुरूआत करने वाला पहला देश बन गया है।


रुपए में लेनदेन फायदेमंद, सभी पक्षों को मिलेगा लाभ :


भारतीय रुपये में व्यापार करने से भारत और इसके व्यापारिक भागीदारों, दोनों को काफी लाभ होगा। डॉलर से व्यापार करने पर, व्यापार में शामिल दोनों ही देशों को डॉलर में एक्सचेंज करने के लिए दोनों ही सिरों पर एक्सचेंज रेट का भुगतान करना पड़ता है, जिसकी वजह से सामानों की कीमत बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, अगर भारत और सऊदी अरब तेल के लिए डॉलर में व्यापार करते हैं, तो भारत को डॉलर खरीदने के लिए एक्सचेंज रेट का भुगतान करना होता है, फिर भारत सऊदी अरब को डॉलर देता है और फिर सऊदी अरब को उस डॉलर को एक्सचेंज कर, अपनी मुद्रा खरीदनी होती है। यानि, दो सिरों पर एक्सचेंज रेट लगता है, जिसका असर सामानों की कीमत पर पड़ता है।


पड़ोसी देशों के लिए फायदेमंद होगा रुपए में कारोबार :


भारतीय मुद्रा में व्यापार के लिए, किसी भी देश को भारत के अधिकृत बैंक में एक वोस्त्रो अकाउंट खोलना होगा और उसके बाद वो भारतीय रुपये में कारोबार कर सकता है। भारत के पड़ोसी देशों की आर्थिक स्थिति पिछले काफी वक्त से खराब रही है, जिनमें श्रीलंका, म्यामांर और बांग्लादेश भी शामिल है। लिहाजा, इन देशों के लिए भारतीय रुपये में कारोबार करना वरदान साबित होगा। वहीं, अगर भारत के साथ संबंध अच्छे होते, तो आज की तारीख में पाकिस्तान इसका जबरदस्त फायदा उठा सकता था। अगर पाकिस्तान भारतीय रुपये में कारोबार करता, तो वह सिर्फ एक महीने में महंगाई को काफी कम कर सकता था। हालांकि, पाकिस्तान के ऐसा करने की संभावना नगन्य है। हालांकि, इनके बाद भी भारतीय रुपये को एक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में स्वीकार करने के लिए, इसे अज्ञात क्षेत्र के माध्यम से लंबी दूरी की यात्रा करनी होगी। 

वैश्विक मुद्रा का रूप ले रहा रुपया, दुनिया के 35 देशों ने जताई रुपए में द्विपक्षीय कारोबार की इच्छा

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गुरुवार, 20 जुलाई 2023

शादीशुदा युवाओं की ज़िंदगी से क्या ग़ायब हो रहा है सेक्स?

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 अगर समय पर सही काउंसलिंग नहीं मिलती तो शायद हमारी शादी टूट गई होती.”


गुरुग्राम में रहने वाले इंजीनियर मनीष (बदला हुआ नाम) की शादी 2013 में हुई थी लेकिन सात साल के अंदर ही यानी साल 2020 तक पत्नी के साथ उनके रिश्ते बहुत ख़राब हो गए थे.


वह बताते हैं, “सबकुछ ठीक होते हुए भी हमारे बीच शारीरिक संबंध बनना बहुत कम हो गया था. क़रीब पांच साल तक ऐसा ही चला और फिर इसका असर रिश्ते पर दिखने लगा. आख़िर में हमें मैरिज़ काउंसलर की मदद लेनी पड़ी.”


मनीष और उनकी पत्नी, दोनों नौकरी करते हैं. उनके साथ जो हुआ, वह कोई असामान्य बात नहीं है.

दुनिया भर में यह देखा जा रहा है कि कम उम्र के जोड़ों, ख़ासकर शादीशुदा मिलेनियल्स या युवाओं में सेक्स के प्रति अरुचि बढ़ रही है

सेक्स में घटती दिलचस्पी

इंडियाना यूनिवर्सिटी के किन्ज़ी इंस्टीट्यूट और सेक्स टॉय बेचने वाली कंपनी ‘लव हनी’ ने साल 2021 में 18 से 45 साल की उम्र के अमेरिकी युवाओं के बीच एक सर्वे किया था.


इस सर्वे के मुताबिक़ पिछले साल विवाहित जोड़ों में सेक्स की चाहत घटने की समस्या सबसे ज़्यादा मिलेनियल्स में देखी गई.

 युवाओं की ज़िंदगी से क्या ग़ायब हो रहा है सेक्स?

इसके मुताबिक़, शादीशुदा मिलेनियल्स में 25.8% को सेक्स में दिलचस्पी कम हो गई थी जबकि उनके बाद की पीढ़ी (जेनरेशन Z) में 10.5% और पहले की पीढ़ी (जेनरेशन X) में 21.2% को ही यह शिकायत थी.


1965 से 1980 के बीच जन्मे लोगों को जेनरेशन X और 1990 के दशक के आख़िर से 2010 के दशक की शुरुआत के बीच जन्मे लोगों को जेनरेशन Z माना जाता है.


मनोवैज्ञानिक शिवानी मिस्री साधु दिल्ली में कपल थेरेपिस्ट यानी दंपतियों की काउंसलिंग का काम करती हैं. Sabhar BBC.COM 

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मणिपुर के मुख्यमंत्री बने रहेंगे, हटाने की मांग के बीच सूत्रों ने कहा

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मणिपुर: विपरीत खबरों के बीच सरकार के सूत्रों ने कहा, "मुख्यमंत्री (एन बीरेन सिंह) को बदलने पर कोई चर्चा नहीं है, बल्कि प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कानून और व्यवस्था नियंत्रण में रहे।"





नयी दिल्ली:मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन बने रहेंगे, सूत्रों ने गुरुवार को कहा कि हिंसा प्रभावित राज्य में दो महिलाओं को नग्न घुमाए जाने के वीडियो से देश सदमे और गुस्से में है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस समेत कई लोगों ने शासन में भारी विफलता का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को हटाने की मांग की है।
विपरीत खबरों के बीच सरकार के सूत्रों ने कहा, "मुख्यमंत्री बदलने पर कोई चर्चा नहीं है, बल्कि प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कानून व्यवस्था नियंत्रण में रहे।" सूत्रों ने कहा, "मणिपुर में स्थिति नियंत्रण में है। गृह मंत्री ने आज सुबह कुकी समूहों से बात की। उन्हें त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया... केंद्र राज्य के साथ लगातार संपर्क में है।"  


4 मई का वीडियो, जो बुधवार को सामने आया और वायरल हो गया, उसमें पुरुषों के एक समूह द्वारा महिलाओं को नग्न घुमाया जा रहा था और उनके साथ छेड़छाड़ की जा रही थी। उन्हें धान के खेत की ओर ले जाया गया, जहां उनमें से एक के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया। 70 दिन से अधिक समय तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई. बुधवार को हुए आक्रोश के बाद से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।  

वीडियो ने राज्य सरकार की कथित निष्क्रियता पर भय और आक्रोश पैदा कर दिया था और सोशल मीडिया राज्य की भाजपा सरकार की आलोचना करने वाले संदेशों से भर गया था। गुरुवार सुबह मणिपुर में एक विशाल विरोध रैली निकाली गई. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर उसने कार्रवाई नहीं की तो अदालत जरूर कार्रवाई करेगी।  
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, "कल वितरित किए गए वीडियो को लेकर हम बहुत परेशान हैं। हम अपनी गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि सरकार कदम उठाए और कार्रवाई करे। यह अस्वीकार्य है।"

भाजपा में कुछ लोगों ने शुरू में महिलाओं पर अत्याचार की निंदा की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मणिपुर की घटना किसी भी सभ्य राष्ट्र के लिए शर्मनाक है, पूरा देश शर्मसार हुआ है।  
उन्होंने संसद में अपने उद्घाटन भाषण में कहा, "मैं देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। मणिपुर की बेटियों के साथ जो हुआ उसे कभी माफ नहीं किया जा सकता।"

लेकिन कांग्रेस, जो मांग कर रही है कि प्रधान मंत्री संसद के दोनों सदनों में एक बयान दें - जिसने कल अपना मानसून सत्र शुरू किया - शांत नहीं हुई।
कांग्रेस के जयराम रमेश, जो पार्टी के संचार प्रभारी भी हैं, ने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री का बयान "बहुत छोटा, बहुत देर से आया" था।

"1,800 घंटे से अधिक की समझ से परे और अक्षम्य चुप्पी के बाद, प्रधान मंत्री ने अंततः मणिपुर पर कुल 30 सेकंड के लिए बात की... उन्होंने शांति के लिए कोई अपील नहीं की, न ही मणिपुर के मुख्यमंत्री से पद छोड़ने के लिए कहा।" श्री रमेश ने ट्वीट किया।
Sabhar https://www.ndtv.com/india-news/

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