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गुरुवार, 6 मार्च 2014

इंसानों जैसे रोबोट, गाना-बजाना, हंसना-रोना और पढ़ना भी आता है इन्हें!

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अभी तक मशीनी कामकाज करने वाले रोबोटों के बारे में ही सुना जाता था लेकिन अब ऐसा रोबोट भी आ गया है जो न केवल चलेगा, बातें करेगा, गाना गाएगा, किताब और समाचार पत्र पढ़ेगा, मौसम का हाल बताएगा, इंटरनेट शॉपिंग करेगा बल्कि इंसानों की भावनाओं को भी पढ़ सकेगा. ये है चार्ल्स या चार्ली जो दुनिया का सर्वाधिक आधुनिक रोबोट है और जिसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलोजी के पूर्व छात्र और ऑस्ट्रेलिया के ला त्रोब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर राजीव खोसला ने तैयार किया है. चार्ली ऊपर बतायी गयी सारी विशेषताओं से लैस है. मात्र 20 सेंटीमीटर का चार्ली ‘पार्टनर पर्सनल रोबोट’ है जिसे ऐसे बच्चों और बुजुर्गों की मदद के लिए डिजाइन किया गया है जो डिमेंशिया, ऑटिज्म, सेरेबर्ल पाल्सी, दिमाग में चोट और ऐसी अन्य बीमारियों के शिकार हैं. दिल्ली में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग द्वारा आयोजित एक समारोह में खोसला ने इस रोबोट का प्रदर्शन करते हुए बताया, ‘‘डिमेंशिया से पीड़ित बच्चे अक्सर बाथरूम में हाथ धोना भूल जाते हैं. यह रोबोट लगातार बच्चे पर नजर रखेगा और उसे याद दिलाएगा कि उसने हाथ नहीं धोए हैं और उसे हाथ धोने की जरूरत है.’6.5 किलोग्राम वजनी इस रोबोट को खोसला ने जापानी इलैक्ट्रोनिक कंपनी एनईसी कोर के साथ मिलकर बनाया है और यह माता-पिता को बच्चे की देखभाल तक में मदद कर सकता है.इन रोबोट को एक-दूसरे से बातचीत के लिए बनाया गया है लेकिन अगर अचानक इसके सामने कई चेहरे आ जाते हैं तो यह अपने डाटाबेस में उन सब का अलग अलग प्रोफाइल तैयार कर लेता है और उन सभी की पसंद नापसंद के आधार पर उनके साथ बर्ताव करता चार्ली और अन्य रोबोट मेटिल्डा, जेक, लूसी और सोफी के साथ ऑस्ट्रेलिया में 20 से अधिक परीक्षण किए गए हैं. रोबोट के साथ परीक्षण किए तरीके से किया जाता है जिनमें उन्हें बोलकर निर्देश देना, छूकर समझाना और चेहरे के भावों से समझाना भी शामिल है. ये रोबोट पता लगाते हैं कि कोई व्यक्ति किस प्रकार महसूस करता है और उसके अनुसार वे अपनी सेवाओं को आकार देते हैं.



6.5 किलोग्राम वजनी इस रोबोट को खोसला ने जापानी इलैक्ट्रोनिक कंपनी एनईसी कोर के साथ मिलकर बनाया है और यह माता-पिता को बच्चे की देखभाल तक में मदद कर सकता है. sabhar :http://www.samaylive.com/

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बूढ़ी दिखना चाहती है जवान दिखने वाली दादी

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सैंतालीस वर्षीय एन बोल्टन का सबसे बड़ा दु:ख यह है कि वे 47 वर्ष की हो चुकी हैं लेकिन अपनी उम्र से आधी की दिखती हैं। वे अपने चेहरे को बूढ़ा दिखाने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी भी कराना चाहती हैं। उनकी अपनी उम्र से कम दिखने की हालत के चलते उनके दोस्तों और बॉयफ्रेंड्‍स ने उन्हें छोड़ दिया है। उनका कहना है कि कभी-कभी तो लोग गलती से उन्हें उनके बेटे की गर्लफ्रेंड समझ लेते हैं। 

ब्रिटेन में लाखों लोग खुद को जवान दिखने के लिए करोड़ों खर्च करते हैं लेकिन एक नानी एन बोल्टन का कहना है कि वे कॉस्मेटिक सर्जरी करा कर अपनी उम्र को अधिक बड़ा दिखाना चाहती हैं। चार बच्चों की मां एन को लोग समझ लेते हैं कि उनकी उम्र तीस से तीस वर्ष के बीच में है। पर वे इस स्थिति को सुखद नहीं वरन् अपने लिए अभिशाप समझती हैं। 

उनका कहना है कि उनके कम उम्र दिखने के बाद एक विवाह टूट गया है और दो लम्बे समय से चले आ रहे रिश्ते खत्म हो गए क्योंकि उनसे हमेशा ही कम उम्र के युवा बातचीत करने में दिलचस्पी दिखाते हैं। 

उनके ईष्यालु साथियों ने उन्हें छोड़ दिया क्योंकि बोल्टन के साथ होने पर वे लोगों को अधिक उम्र के दिखते हैं। उनका सबसे बड़ा लड़का अभी पिता बना है, उसे भी अपनी मां के साथ दिखने से नफरत है क्योंकि लोग उसकी मां को उसकी गर्लफ्रेंड समझते हैं। वे कहती है कि अपने चेहरे पर झ‍ुर्रियां लाने के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूं।

ब्रिस्टल में एक मार्केट स्टाल पर काम करने वाली एन का विवाह संगीत निर्देशक क्रिस्टोफर बोल्टन से हुआ था। उस समय दोनों की ही उम्र 24 की थी। कुछेक वर्षों बाद दोनों में दिखने को लेकर झगड़ा होने लगा। उस समय वे करीब तीस वर्ष की थी लेकिन उनके पति ने देखा कि युवा लोग उनमें ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। कई वर्षों के बाद बोल्टन युवा ही दिखती रहीं जबकि उसके पति अधिक उम्र के दिखने लगे। इससे दोनों के बीच झगड़े और बढ़ने लगे। 

आखिरकार दोनों अलग हो गए जबकि उनके आर्थर (25) और केल्विन (19) दो बेटे थे। बोल्टन का कहना है कि हम दोनों ही एक ही उम्र के थे लेकिन क्रिस्टोफर को इस बात से नफरत थी कि लोग सोचें कि उन्होंने एक युवा महिला से शादी की है इसलिए मैं कोशिश करती थी कि ऐसी ड्रेस पहनूं कि अधिक बूढ़ी दिखूं। तब बोल्टन 32 वर्ष की थीं और एक टीवी एक्सट्रा के तौर पर भी काम करती थी। 

चार वर्ष बाद उन्होंने रॉयल मेल के लिए काम करने वाले ब्रायन ग्राहम से संबंध बनाया। ब्रायन उनसे मात्र दो वर्ष अधिक बड़ा था और तब एन भी 36 की थी लेकिन लगती 25-26 क‍ी थी। दोनों के दो बेटे, जोशुआ (13) और जैकब (7), हुए। 

हालांकि वह चार वच्चों की मां थी लेकिन इसके बाद भी उसकी उम्र पर इसका कोई असर नहीं दिखा। ग्राहम जब 42 का था, तब बोल्टन 22 की दिखती थी। लोगों को विश्वास नहीं होता था कि मैं चार बच्चों की मां हूं। 

अब ब्रायन को लोगों द्वारा यह बात पूछने से चिढ़ पैदा होती थी कि ग्राहम उनका भाई या पिता था। उनकी भी समझ में आने लगा कि चीजें किस दिशा में आगे जा रही थीं। बोल्टन का कहना है कि अगर इन बातों में कोई बदलाव संभव होता तो मैं कर सकती थी लेकिन अधिक उम्र की दिखना उसके लिए संभव नहीं था। पांच वर्ष बाद दोनों अलग हो गए। 

बोल्टन कहती हैं कि उनसे ज्यादातर नौजवान लड़के बात करते थे। शुरू में यह अच्छा लगा लेकिन बाद में मैं इससे बोर हो गई। आखिरकार 42 वर्ष की उम्र में बोल्टन को एक 32 वर्षीय इलेक्ट्रीशियन पॉल स्मिथ मिला। पॉल काफी परिपक्व था और बोल्टन को लगा कि उसके जवान दिखने से उसे किसी प्रकार की ईर्ष्या नहीं होगी। लेकिन कुछ समय के बाद पुरानी समस्याएं फिर सिर उठाने लगीं। 

जब दोनों साथ निकलते तो लोग हमें घूरने लगते और वे पॉल को डर्टी ओल्डमैन कहते। 'कोई भी इस बात पर विश्वास नहीं करता कि मैं पॉल की तुलना में 10 वर्ष अधिक बड़ी हूं। और जब वे पॉल के साथ भी होतीं तब भी लोग सोचते थे कि मैं पॉल की साथी नहीं हो सकती। मुझ पर लोग यह आरोप भी लगाने लगे कि मैंने पैसा कमाने के लिए 
बूढे मर्दों से शादी करती हूं।' इस वर्ष की शुरुआत में पांच वर्ष साथ बिताने के बाद दोनों अलग हो गए। 

बोल्टन का कहना है कि एक बार मैं फिर अकेली हूं और वह भी इस कारण से क्योंकि मैं जवान दिखती हूं। इसके बाद से उन्होंने अपनी उम्र के लोगों से विवाह की बात करनी चाही लेकिन उन्हें ऐसे लोगों से प्रस्ताव मिले जोकि उनसे बीस साल तक छोटे हैं। लोग सोचते होंगे कि यह बहुत अच्छी बात है लेकिन उन्हें यह बात भी पता होना चाहिए कि मैं चार बच्चों की मां हूं और अब किसी बच्चे के साथ डेट पर नहीं जाना चाहती हूं। 

न केवल उनकी लव लाइफ वरन उनका पारिवारिक जीवन भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वे अपने सबसे बड़े बेटे आर्थर के साथ शॉपिंग पर जाना पसंद करती थीं लेकिन वह इस स्थिति से आजिज आ गया कि लोग मुझे उसकी गर्लफ्रेंड समझने लगते। 

लोग यह मानते कि उसने मुझे फांस लिया है। लोगों को यह समझाना मुश्किल होता कि मैं उसकी मां हूं। मैं इस बात पर विश्वास नहीं कर सकी कि मेरे युवा दिखने से यह बात पैदा हो गई कि मैं और मेरा बेटा किसी से भी मिल नहीं सकता था। 

अब उसका एक बच्चा भी हो गया है ‍और जब वे आर्थर के बच्चे को खिलाने के लिए बाहर जाती हैं तो लोग सोचने लगते हैं कि मैं और मेरा बेटा बच्चे के माता-पिता हैं। जब मैं लोगों से कहती हूं कि मैं एक बच्चे की दादी हूं। उनके लिए मित्रता करना मुश्किल हो गया है। 

मेरी उम्र की औरतें जब मेरे पास खड़ी होती हैं तो ईर्ष्यालु होने लगती हैं। वे मुझे ऊपर से नीचे तक देखती हैं और वे मुझे बिच (कुतिया) तक कह देती हैं, इसलिए मजबूरी में मुझे उन औरतों के साथ घूमना फिरना पड़ता है जोकि मेरे बेटे से भी कम उम्र की होती हैं लेकिन इस मामले में मैं क्या कर सकती हूं? sabhar :http://hindi.webdunia.com/

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हर तरफ मातम, उठकर बैठा मुर्दा बोला मै जिंदा हूं

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जब मुर्दा अचानक बोल पड़ा

जब मुर्दा अचानक बोल पड़ा

कहते हैं शरीर से एक बार आत्मा निकल जाए तो वापस उस शरीर में लौटकर नहीं आती। आत्मा के शरीर छोड़ते ही यह माना लिया जाता है कि व्यक्ति अब जिंदा नहीं है।

लोग मुर्दे को जलाने या दफनाने की तैयारी में लग जाते हैं। लेकिन कई बार कुदरत ऐसे चमत्कार भी कर देती है कि आंखों पर यकीन नहीं होता। ऐसे ही चमत्कारों में शामिल है मुर्दे का अचानक बोल पड़ना या अचानक मुर्दे की सांस चलने लगना।

हो रही थी अंतिम संस्कार की तैयारी उठकर बैठ गया वह

यह घटना अमरीका के मिसीसिपी का है। 78 वर्षीय विलियम्स को लेक्जिंगटन में उनके घर में ही नब्ज़ नहीं चलने पर मृत घोषित किया गया।

होम्स काउंटी के शव जांच विशेषज्ञ डेक्सटर हावर्ड ने बताया कि उन्होंने सामान्य तरीके से ही विलियम्स की जांच की थी। उन्हें विलियम्स जीवित होने का कोई संकेत नहीं मिला।

वॉल्टर विलियम्स नामक शख्स के शव को जब अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। विलियम्स को पॉर्टर ऐंड संस फ्यूनरल होम ले जाया गया। जब उनके शरीर पर लेप लगाने की तैयारी हो रही थी ठीक उसी वक्त उनके शरीर में हरकत होने लगी।

विलियम्स उठकर बैठ गए। यह अब कब तक जीवित रहेंग और इनके मृत्यु के समय के अनुभव कैसे थे। यह तो विलियम्स ने नहीं कहा है लेकिन इनके पुनर्जीवित होने से परिवार के लोग खुश हैं।
मरने के 6 दिन बाद वह ताबूत पर जिंदा मिली

मरने के 6 दिन बाद वह ताबूत पर जिंदा मिली

मामला चीन का है। यहां गुआंक्सी प्रांत में 95 वर्षीय एक महीला जिसका नाम ली जियूफैंग था। एक दिन अचानक ही इसकी सांस रुक गयी। शरीर में कोई हरकत भी नहीं रही।

ली के पोते ने दादी को मरा हुआ जानकर ताबूत में डाल दिया। लोगों के अंतिम दर्शन के लिए ताबूत को दफनाया नहीं गया था। छह दिनों बाद लोगों ने देखा कि ली अपने ताबूत पर बैठी हुई है।

पहले तो लोग ली की भूत समझकर डर गए लेकिन, बाद में पता चला वह भूत नहीं बल्कि जिंदा ली जियूफैंग थी।

मरकर जिंदा हुआ, फिर दो दिनों बाद हुई यह घटना

यह घटना 2009 की है, विलकिंसन नाम के एक व्यक्ति को रॉयल प्रेस्टन अस्पताल के डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

लेकिन 30 मिनट के बाद ही डॉक्टरों ने ये महसूस किया कि उसकी नब्ज चल रही है। विलकिंसन उठकर बैठ गया। सभी लोग इसके जीवित होने से खुश हो गए।

लेकिन महज दो दिनों बाद विलकिंसन शराब पीकर अचानक गिर पड़ा और फिर हमेशा के लिए सो गया। डॉक्टरों ने जांच में इस बात से इंकार किया कि इसकी मौत शराब पीने से हुई है। सभी जांच सामान्य थे, इसलिए सामान्य मृत्यु घोषित कर दिया गया। sabhar :http://www.amarujala.com/

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नहीं खाया अन्न का एक भी दाना

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इनसे मिलिए, ये हैं सुभाष, जिन्होंने 11 सालों से नहीं खाया अन्न का एक भी दाना

सिरसा. गाय को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करवाने व अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की मांग को लेकर एक साधु ने 11 साल से अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया। साधु का प्रण है कि जब तक सरकार उसकी दोनों मांगों को पूरा नहीं करती वह अन्न ग्रहण नहीं करेगा।
 
इसी मांग को लेकर हिसार जिले के टोक्स गांव के दादा केसराराम धाम में रहने वाले सुभाष मुनि ने सोमवार को सिरसा में धरना दिया। उन्होंने गाय को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करने की मांग का लेकर डीसी को ज्ञापन भी दिया। मुनि का कहना है कि देश में गाय की हालत बहुत बुरी है। बुचडख़ानों में गो वध हो रहा है। गाय भूखी प्यासी व बेसहारा भटक रही है। गाय को हिंदू धर्म में तो इसको माता का दर्जा दिया गया है।
 
केवल हरी सब्जी खा रहे हैं...
 
65 वर्षीय सुभाष मुनि ने बताया कि वे पिछले 11 साल से अन्न ग्रहण नहीं कर रहे हैं। वे केवल हरी सब्जी पर सेंधा नमक मिलाकर खाते हैं। उनका प्रण है कि जब तक दोनों प्रमुख मांगों में से उनकी एक भी मांग पूरी हो गई तो वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। सुभाष मुनि भारत भ्रमण कर चुके हैं।
 
उन्होंने जगह जगह जाकर यह मांग जोर शोर से उठाई है। वे अब तक 38 बार धरना दे चुके हैं। जिनमें दिल्ली के इंडिया गेट, संसदीय भवन व जंतर मंतर पर भी धरना शामिल है। इसके अलावा जहां भी गोरक्षा से जुड़ा मामला हो मुनि तुरंत वहां पहुंच जाते हैं। इसके अलावा अयोध्या में राममंदिर निमार्ण को लेकर भी वे अग्रणी भूमिका निभाते नजर आते हैं।
 
वैसे हम आपको बता दें कि ये अपनी तरह का कोई इकलौता मामला नहीं है। इससे पहले भी देश-विदेश में इस तरह के कई मामले आ चुके हैं, जिसमें लोग या तो खाना खाते ही नहीं है और अगर खाते भी हैं, तो कोई निश्चित चीज। हरियाणा की ही एक लड़की ने पिछले 25 सालों से अन्न नहीं खाया है। इतनी उम्र तक वो सिर्फ दूध पी कर जिंदा है।
इनसे मिलिए, ये हैं सुभाष, जिन्होंने 11 सालों से नहीं खाया अन्न का एक भी दाना

हो सकता है आपको ऐसा लगे कि ये लड़की कोई साध्वी या पुजारिन है, लेकिन हम आपको बता दें कि ऐसा कुछ नहीं है और ये एक बिल्कुल सामान्य लड़की है। साथ ही इस लड़की का केस किसी तरह के अंधविश्वास पर भी आधारित नहीं है। हरियाणा के सोनीपत में रहने वाली 25 वर्षीया मंजू ने अपनी पूरी जिंदगी में कुछ भी नहीं खाया है।
 
दरअसल, ये मामला मेडिकल साइंस से जुड़ा हुआ है। मंजू को एकालासिया नाम की एक बीमारी है, जिसके चलते ये दूध या इससे बनी चीजों के अलावा कुछ नहीं खा सकती है। अगर मंजू अन्न या कुछ और खाती है, तो इसे तुरंत उल्टी होने लगती है। इसी वजह से उसने अपनी पूरी जिंदगी में दूध, बटर मिल्क, चाय और पानी ही पिया है। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन मंजू की खातिर एक भैंस रखनी पड़ती है।
 
मंजू दिन में 4 से 5 लीटर दूध पी जाती है। उसकी मां का कहना है कि अगर वो कुछ भी ठोस खाती है, तो उसकी तबीयत बिगड़ जाती है। हालांकि, मंजू को देखकर उसकी इस बीमारी के बारे में पता नहीं चलता है। वो पूरी तरह स्वस्थ दिखती है। वैसे इस बीमारी के बारे में हम आपको बता दें कि इसका इलाज संभव है। वैसे मंजू सिलाई वगैरह काम भी करती है और अपने भविष्य के लिए पैसे एकत्र कर रही है।
 
डेली मेल के मुताबिक, इस बीमारी में भोजन नली अपना काम करना बंद कर देती है। ऐसे में खाना नहीं खाया जा सकता। खाना पेट तक पहुंचेगा ही नहीं और आहार नाल में ही फंसा रहेगा। ऐसे में पीड़ित को उल्टी हो जाती है।
इनसे मिलिए, ये हैं सुभाष, जिन्होंने 11 सालों से नहीं खाया अन्न का एक भी दाना


सिर्फ हमारे देश में ही नहीं, विदेशों में भी ऐसे उदाहरण देखने को मिल जाते हैं। ये कोई बार्बी डॉल नहीं, बल्कि जीती-जागती एक लड़की है। वैसे कोई भी इसकी फोटो देखकर यही सोचता है कि ये कोई बार्बी डॉल है। ये लड़की अपने जीरो फिगर के कारण इन दिनों सनसनी बनी हुई है।
 
हू-ब-हू बार्बी डॉल जैसी दिखने वाली यह लड़की यूक्रेन की वालेरिया लूक्यानोवा है, जिसे देखने वाला हर शख्स एक बार तो दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाता है। 23 वर्षीय ल्यूकानोवा की खूबसूरत का रहस्य दुनिया के सामने आ चुका है।
 
आज तक नहीं खाया खाना
 
बेहद खूबसूरत बॉडी और बार्बी डॉल जैसे फिगर वाली ल्यूकानोवा का कहना है कि उसने अभी तक खाना नहीं खाया। वह हवा, पानी और रोशनी पर जिंदा है। ल्यूकानोवा कहती है कि वह आध्यात्मिक गुरु है जो हर समय यात्रा करती है। उनका कहना है वह दुनिया में बढ़ रही नकारात्मकता को कम करने के लिए ही आईं है।

इनसे मिलिए, ये हैं सुभाष, जिन्होंने 11 सालों से नहीं खाया अन्न का एक भी दाना

इसके अलावा गुजरात के प्रहलाद जानी का किस्सा भी खूब चर्चित है। अहमदाबाद के प्रहलाद जानी 84 वर्ष के हो चुके हैं, लेकिन पिछले 70 सालों से उन्होंने ना कुछ खाया है और ना ही कुछ पिया है। उन्हें ना भूख लगती है और ना ही प्यास। मेडिकल साइंस के लिए प्रहलाद एक बहुत बड़ी चुनौती हैं।
 
जाहिर सी बात है कि कोई इंसान बिना खाए-पिए 10 दिन से ज्यादा नहीं रह सकता, लेकिन प्रहलाद जानी का दावा है कि पिछले 70 सालों से उन्होंने कुछ नहीं खाया है। उनके इस दावे का परीक्षण करने के लिए 300 डॉक्टरों की एक टीम ने उन पर रिसर्च भी किया, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। डीआरडीओ के डॉक्टरों ने प्रहलाद को एक कमरे में लगातार 15 दिनों तक सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में रखा गया।
 
इन 15 दिनों में उन्होंने कुछ भी खाया-पिया नहीं, फिर भी वो बिल्कुल सामान्य थे। पेट के अल्ट्रासाउंड में भी किसी तरह का बदलाव देखने को नहीं मिला। रोचक बात ये है कि प्रहलाद मल-मूत्र भी नहीं त्यागते हैं। प्रहलाद के बारे में जानकर सिर्फ भारतीय मीडिया ही नहीं, बल्कि विदेशी मीडिया भी हैरान थी। कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने भी प्रहलाद भाई के बारे में खबर छापी थी और सभी उनकी इस क्षमता से हैरान दिखे।
 
हां, अगर उनके शरीर में कुछ अलग है, तो वो है कीटोन। मानव शरीर में पाया जाने वाला ये घटक जहां एक आम इन्सान में 3mg/डेसीलीटर होती है, जबकि प्रहलाद के शरीर में ये 40mg/डेसीलीटर है। कीटोन एक ऑर्गेनिक कंपाउंड होता है। जब शरीर में चर्बी टूट कर ऊर्जा बनती है, तो कीटोन भी बनते हैं। वैसे जो भी हो, प्रहलाद वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं। sabhar : bhaskar.com


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बुधवार, 5 मार्च 2014

जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर

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जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर



कीव। ये कोई बार्बी डॉल नहीं, बल्कि जीती-जागती एक लड़की है। वैसे कोई भी इसकी फोटो देखकर यही सोचता है कि ये कोई बार्बी डॉल है। ये लड़की अपने जीरो फिगर के कारण इन दिनों सनसनी बनी हुई है।
 
हू-ब-हू बार्बी डॉल जैसी दिखने वाली यह लड़की यूक्रेन की वालेरिया लूक्यानोवा है, जिसे देखने वाला हर शख्स एक बार तो दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाता है। 23 वर्षीय ल्यूकानोवा की खूबसूरत का रहस्य दुनिया के सामने आ चुका है। जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर
 
आज तक नहीं खाया खााना
 
बेहद खूबसूरत बॉडी और बार्बी डॉल जैसे फिगर वाली ल्यूकानोवा का कहना है कि उसने अभी तक खाना नहीं खाया। वह हवा, पानी और रोशनी पर जिंदा है। ल्यूकानोवा कहती है कि वह आध्यात्मिक गुरु है जो हर समय यात्रा करती है। उनका कहना है वह दुनिया में बढ़ रही नकारात्मकता को कम करने के लिए ही आईं है। 
जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर

जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर
जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर


जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर

जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर
जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर

जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर


जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर

जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर

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देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत

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कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत, देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से


आधुनिकता की ओर तेज़ी से भागते समाज के लिए इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है कि आखिर कोई इंसान साधुत्व की ओर क्यों चला जाता है। सभी सांसारिक मोह छोड़कर इंसान समाज से बाहर जिंदगी क्यों जीने लगता है। ऐसे ही सवालों का जवाब तलाशने के लिए न्यूयॉर्क के ब्रूकलिन नगर के फोटोग्राफर ज्वॉय एल पुट्स ने दुनिया के तमाम देशों का दौरा किया और उन्होंने ऐसे साधु-संतों से मुलाकात की, जिन्होंने अपनी जिंदगी आध्यात्मिक मुक्ति की तलाश में लगा दी। 
 
भिक्षुओं और आध्यात्मवादियों की तलाश में निकले ज्वॉय ने  उत्तरी इथियोपिया से यात्रा की शुरुआत की। इस दौरान तमाम देशों की यात्रा करते हुए वो हाल ही में भारत पहुंचे, जहां वाराणसी में उन्होंने साधु-संतों और आध्यात्मवादियों से मुलाकात की। पूरी दुनिया में धर्म को लेकर साधु-संतों की अपनी अलग राय है, लेकिन भारत में हिंदू धर्म में विश्वास करने वाले साधु-संत को उनके आत्मत्याग के लिए जाना जाता है। साधु-संत अकेले एक हाथ पर तपस्या कर महीनों और बरसों बिता देते हैं।
 
फोटोग्राफर ज्वॉय ने वाराणसी में ऐसे ही कुछ साधु-संतों से ना सिर्फ मुलाकात की, बल्कि साधना के दौरान की उनकी तरह-तरह की तस्वीरें भी खींची। ज्यादातर तस्वीरें अघोड़ी बाबाओं की हैं, जो शव के अंतिम संस्कार के बाद निकली राख को अपने शरीर पर लपेटे रहते हैं, शव पर तपस्या करते हैं और मानव कंकाल की हड्डियों को अपने शरीर पर पहनते हैं। 
 
ज्वॉय ने बताया कि अघोड़ी बाबाओं का मौत के साथ गहरा संबंध होता है। उनके लिए मौत कोई डरावनी अवधारणा नहीं, बल्कि आत्मा का भ्रम की दुनिया से बाहर निकल जाना है। फोटोग्राफर ज्वॉय के साथ यात्रा पर निकले फिल्म मेकर केल ग्लेंडिंग ने साधु-संतों को लेकर 'बिऑन्ड' नाम की एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है। 

कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत, देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से

(तस्वीर में बाएं) हाथों में मानव खोपड़ी लिए एक अघोड़ी, जिसके लिए मौत भ्रम की दुनिया से बाहर जाना है।
 
तस्वीर में दाएं) ये बिहार के सीवान के लाल बाबा हैं, जो अपने भविष्य की अनिश्चितता के चलते अपनी शादी छोड़कर भाग आए थे। 
कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत, देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से

शव के अंतिम संस्कार से निकली राख अपने शरीर पर लपेटे हुए अघोड़ी बाबा ।

कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत, देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से

लाल बाबा अपनी कई मीटर लंबी जटाओ को खोले हुए। ये जटाएं चालीस साल में इतनी लंबी हुई हैं। 

कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत, देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से

पवित्र गंगा नदी में सुबह की साधना करते साधु विजय नंद ।

कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत, देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से
अघोड़ी पूजा करते हुए बाबा मौनी ।

कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत, देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से

(तस्वीर में दाएं) मघेश ने आईटी क्षेत्र में अच्छी खासी नौकरी छोड़कर साधुत्व ग्रहण कर लिया। पुरानी जिंदगी में लौटने की उनकी कभी कोई इच्छा नहीं हुई। 

कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत, देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से

घाट पर नाव के किनारे खड़े राम दास


कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत, देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से

(तस्वीर में दाएं) 101 वर्ष से ज्यादा का सफर तय कर चुके साधु 

कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत, देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से

गंगा नदी में नाव चलाते बाबा विजय नंद sabhar : bhaskar.com


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(गीतकार समीर)- दिल को छू लेने वाले गीतों के जादूगर

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बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार समीर गीत लेखन के साथ उन्हें मर्मस्पर्शी बनाने की दक्षता भी रखते हैं। समीर ने एक से बढकर एक गीत लिखकर श्रोताओं को आज तक मंत्रमुंग्ध कर रखा है। समीर ने अपने तीन दशक के अपने कैरियर में लगभग 500 हिंदी फिल्मों के लिये गीत लिखे।

Sameer: Who writes songs from his heart

Sameer: Who writes songs from his heart

बैंक अधिकारी के रुप में अपने कैरियर की शुरूआत करने के बाद बालीवुड में अपने गीतों से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध करने वाले गीतकार समीर लगभग चार दशक से सिनेप्रेमियों के दिलों पर राज कर रहे है। समीर ने लगभग 6,000 फिल्मी और गैर फिल्मी गाने लिखे है। उन्होंने हिन्दी के अलावा भोजपुरी, मराठी फिल्मों के लिये भी गीत लिखे है।80 के दशक में गीतकार बनने का सपना लिये समीर ने मुंबई की ओर रूख कर लिया। लगभग 3 साल तक मुंबई में रहने के बाद वह गीतकार बनने के लिये संघर्ष करने लगे। काफी मेहनत करने के बाद 1983 में उन्हें बतौर गीतकार ''बेखबर'' फिल्म के लिये गीत लिखने का मौका मिला।इस बीच समीर को इंसाफ कौन करेगा, जवाब हम देगे, दो कैदी, रखवाला, महासंग्राम, बीबी हो तो ऐसी, बाप नंबरी बेटा दस नंबरी जैसी कई बड़े बजट की फिल्मों में काम करने का अवसर मिला लेकिन इन फिल्मों की असफलता के कारण वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में नाकामयाब रहे।लगभग 10 वर्ष तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद वर्ष 1990 में आमिर खान-माधुरी दीक्षित अभिनीत फिल्म ''दिल'' में अपने गीत 'मुझे नींद ना आये' की सफलता के बाद समीर गीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये।वर्ष 1990 में ही उन्हें महेश भट्ट की फिल्म आशिकी में भी गीत लिखने का अवसर मिला। फिल्म 'आशिकी' में 'सांसों की जरूरत है जैसे', 'मैं दुनिया भूला दूंगा' और 'नजर के सामने जिगर के पास' गीतों की सफलता के बाद 'समीर' को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गये।जिनमें बेटा, बोल राधा बोल, साथी, और 'फूल और कांटे' जैसी बडे बजट की फिल्में शामिल थी। इन फिल्मों की सफलता के बाद उन्होंने सफलता की नयी बुलंदियों को छुआ और एक से बढकर एक गीत लिखकर श्रोताओं को मंत्रमुंग्ध कर दिया
Sameer: Who writes songs from his heart
वर्ष 1997 में अपने पिता अंजान की मौत और अपने मार्गदर्शक गुलशन कुमार की हत्या के बाद समीर को गहरा सदमा पहुंचा। इस हत्याकांड में संगीतकार नदीम का नाम आने पर उन्होंने कुछ समय तक फिल्म इंडस्ट्री से किनारा कर लिया और वापस बनारस चले गये।
Suchitra Singh


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मंगलवार, 4 मार्च 2014

प्‍लेब्‍वॉय’ के कवर पर दिखेंगी पद्मा लक्ष्‍मी

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भारतीय मूल की मशहूर अमेरिकी मॉडल पद्मा लक्ष्‍मी 'प्‍लेब्‍वॉय' पत्रिका के कवर पेज पर जल्‍द ही दिखाई देंगी.बॉलीवुड अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा के बाद पद्मा लक्ष्‍मी ऐसी दूसरी भारतीय हैं जो प्‍लेब्‍वॉय पत्रिका के कवर पेज पर नजर आएंगे.शर्लिन जहां इस पत्रिका के कवर पेज पर न्‍यूड नजर आएंगी, वहीं पद्मा लक्ष्‍मी सफेद लॉन्‍जरी में दिखाई देने वाली है.ऐसा नहीं कहा जा सकता पद्मा लक्ष्‍मी का फोटोशूट हॉट नहीं है क्‍योंकि इन तस्‍वीरों में भी वह काफी सेक्‍सी नजर आ रही है.भले ही पद्मा ने प्‍लेब्‍वॉय न्‍यूड पोज नहीं दिया हो लेकिन वह इससे पहले कई पत्रिका के लिए ऐसी तस्‍वीरें खींचा चुकी है.अपने गर्भ को 'चिकित्सकीय चमत्कार' करार देने वाली पद्मा लक्ष्मी ने 20 फरवरी को एक बच्ची को जन्म दिया था.वर्ष 2007 में मशहूर लेखक सलमान रुश्दी से तलाक लेने वाली पद्मा लक्ष्मी ने अपनी बच्ची के पिता का नाम बताने से इंकार कर दिया.पद्मा लक्ष्‍मी इससे पहले कई पत्रिका के लिए ऐसी तस्‍वीरें खींचा चुकी है.


















पद्मा लक्ष्‍मी





पद्मा लक्ष्‍मी



पद्मा लक्ष्‍मी
पद्मा लक्ष्‍मी

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पद्मा लक्ष्‍मी

पद्मा लक्ष्‍मी

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यूट्यूब से मिला नाम, पैसा और शोहरत

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शाहरुख़ ख़ान, यूट्यूब फ़ेस्ट


फ़ेसबुक और ट्विटर के अलावा इंटरनेट पर यूट्यूब एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जो रोज़ाना इस्तेमाल किया जाता है. यूट्यूब पर अलग-अलग विषयों पर कई करोड़ वीडियो हैं. आप मनोरंजन से लेकर न्यूज़ और संगीत से लेकर टीवी प्रोग्राम सब यूट्यूब पर देख सकते हैं.
लेकिन अब यूट्यूब का इस्तेमाल अपना हुनर दिखाने के लिए भी किया जा रहा है. भारत और विदेश में कई ऐसे लोग हैं जो अपना पेट अपने हुनर से पालते हैं. इन लोगों को आम बोल चाल की भाषा में यूट्यूबर्स कहा जाता है.
ये वो लोग हैं जो सिर्फ़ यूट्यूब के लिए ओरिजिनल वीडियो बनाते हैं और उसे यूट्यूब पर अपलोड कर शोहरत और हिट्स पाते हैं.
बीबीसी ने मुंबई में ऐसे ही कुछ यूट्यूबर्स से मुलाक़ात की जिन्होंने यूट्यूब के ज़रिए पैसा, नाम और शोहरत कमाया.

यूट्यूब पर देख एआर रहमान ने दिया मौक़ा: जोनिता

यूट्यूब के चैनल '88 कीज़ टू यूफ़ोरिया' को डेढ़ करोड़ से भी ज़्यादा बार देखा जा चुका है. इस चैनल के संचालक आकाश गांधी हैं, जो भारतीय मूल के अमरीकी हैं.
आकाश अपने इस यूट्यूब चैनल पर बॉलीवुड की धुनें पियानो पर बजाकर गानों को एक नया रूप देते हैं. इस चैनल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं जोनिता गांधी. जोनिता और आकाश का कोई रिश्ता नहीं है. जोनिता कनाडा में पली बड़ी गायिका हैं और उन्हें बॉलीवुड गीत गाना पसंद है. जोनिता ने आकाश के यूट्यूब चैनल के लिए कई गाने गए है.
यूट्यूब, आकाश और जोनिता गांधी
जोनिता की आवाज़ यूट्यूब के ज़रिए संगीतकार एआर रहमान के कानों में पड़ी. थोड़े समय बाद एआर रहमान फ़िल्म हाइवे के लिए आवाज़ ढूंढ रहे थे, जोनिता की आवाज़ उन्हें पसंद आई और उन्होंने जोनिता को तुरंत चेन्नई रिकॉर्डिंग के लिए बुलाया.
जोनिता ने बीबीसी को बताया, "यूट्यूब से रहमान तक पहुंच जाऊंगी, ऐसा सोचा भी नहीं था. मैं रिकॉर्डिंग के समय कांप रही थी. मेरे गानों को बॉलीवुड के कई दिग्गजों ने यूट्यूब पर देखा और पसंद भी किया है. अमिताभ बच्चन ने भी मेरे गानों के लिंक ट्वीट किए हैं."
एआर रहमान के लिए गाने के बाद जोनिता की झोली में अब बॉलीवुड के कई प्रोजेक्ट हैं. जोनिता और आकाश यूट्यूब पर गाने बनाने के अलावा प्राइवेट संगीत कार्यक्रम भी करते हैं.

रिएलिटी शो ने निकाला, यूट्यूब ने स्टार बनाया: श्रद्धा शर्मा

श्रद्धा शर्मा, यूट्यूब, सिंगर
देहरादून के एक मध्यवर्गीय परिवार में पली-बढ़ी श्रद्धा शर्मा एक यूट्यूब स्टार हैं.
18 साल की श्रद्धा को गाने का शौक़ बचपन से ही था. इस शौक़ की वजह से उन्होंने कई टीवी रियलिटी शो में हिस्सा लिया. कभी पहले राउंड से तो कभी दूसरे राउंड से बाहर निकलने के बाद भी श्रद्धा ने कभी हार नहीं मानी.
अपने घर में एक वीडियो रिकॉर्डर पर गाने गाकर श्रद्धा ने यूट्यूब पर अपलोड करना शुरू किया. अब श्रद्धा के यूट्यूब चैनल पर एक करोड़ से ज़्यादा हिट्स हैं और हाथ में यूनिवर्सल म्यूज़िक का कॉन्ट्रैक्ट.
श्रद्धा बताती हैं, "मैंने यूट्यूब पर बस मज़े-मज़े में वीडियो डालने शुरू किए, वो कैसे रातोंरात इतने लोकप्रिय हुए मुझे नहीं पता. बेशक मुझे रिएलिटी शो में हिस्सा लेने का मौक़ा न मिला हो लेकिन असलियत यही है कि मैंने अपने गायिका बनने के ख़्वाब को जी लिया है."
संगीतकार लेज़्ली लेविस ने अपने संगीत से श्रद्धा शर्मा की एल्बम ‘रस्ते’ को सजाया है.

लिल्ली सिंह उर्फ़ सुपरवूमन

लिल्ली सिंह, सुपरवूमैन
लिल्ली सिंह के वीडियो यूट्यूब पर काफ़ी पसंद किए जाते हैं.
कनाडा में जन्मी भारतीय पंजाबी लिल्ली सिंह यानी सुपरवुमन की यूट्यूब पर बहुत बड़ी फ़ैन फॉलोविंग है. लिल्ली के यूट्यूब चैनल पर क़रीब 20 करोड़ हिट हैं. लिल्ली अपने चैनल पर रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर व्यंग्यात्मक वीडियो डालती हैं.
शाहरुख़ ख़ान और बॉलीवुड की फ़ैन लिल्ली को हाल ही में माधुरी दीक्षित के साथ फ़िल्म 'गुलाब गंग' का प्रमोशन करने का अवसर मिला. इसके अलावा लिल्ली पंजाबी और अंग्रेज़ी में रैप भी करती हैं.
उन्हें पंजाबी गायक जस्सी सिद्धू के गीत 'हिपशेकर' में रैप करने का मौक़ा भी यूट्यूब पर बढ़ती लोकप्रियता की वजह से मिला. भारत में सुपरवूमन के कई करोड़ फ़ैन हैं, ख़़ास तौर पर 11 से 20 साल के लड़के-लड़की.

स्ट्रगल करने की ज़रूरत नहीं, यूट्यूब है ना: शाहरुख़

बीते शनिवार को मुंबई में भारत और विदेश से आए कई यूट्यूबर्स को एक मंच पर अपने प्रशंसकों से मिलने का मौक़ा मिला. ये समारोह था यूट्यूब द्वारा आयोजित भारत का पहला यूट्यूब फ़ैन फ़ेस्ट.

इस फ़ेस्ट में शाहरुख़ ख़ान भी अपने बच्चों के साथ पहुंचे. शाहरुख़ ने कहा, "यूट्यूब एक बेहतरीन प्लेटफ़ॉर्म है, अब आपको स्ट्रगल करने की ज़रूरत नहीं है. आप अपने कमरे से ही सुपरस्टार बन सकते हैं.
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रहस्यमय इस पहाड़ के पत्थरों से निकला है अनोखा संगीत

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रहस्यमय इस पहाड़ के पत्थरों से निकला है अनोखा संगीत

किसी पहाड़ से टकराने पर कोई आवाज आए, ऐसा आपने शायद ही कभी सुना होगा, मगर पेनसिल्वेनिया में ऐसे पत्थर हैं, जो बजते हैं और इनसे संगीत निकलता है। 128 एकड़ में फैले इस पहाड़ को 'रिंगिंग रॉक्स' कहा जाता है।

ये बड़े-बड़े पत्थर एक खास मैटलिक ध्वनि निकालते हैं। यहां के स्थानीय अमेरिकी इन्हें सालों से जानते हैं। इन्हें हथोड़े और पत्थरों से बजाते भी रहे हैं।
इन पत्थरों से निकलने वाली आवाज किसी को भी भ्रम में डाल सकती है। कोई भी सोच में पड़ सकता है कि क्या ये पत्थर के बने हुए ही पहाड़ हैं। वैज्ञानिकों और जिओलॉजिस्ट वर्षों से इन पर शोध कर रहे हैं। कई शोध के बाद भी यह पता नहीं चल पाया कि आखिर ये पहाड़ क्यों बजते हैं।
पेनसिल्वेनिया के जिओलॉजिस्ट रिचर्ड फास का कहना है, उन्होंने लैब में कई पत्थरों पर टेस्ट किया। उन्होंने पाया कि इन्हें मारने पर हर पत्थर एक लो फ्रीक्वेंसी साउंड पैदा करता है। जो हम सुन सकते हैं। हर पत्थर की ध्वनि के आपस में टकराने से जो सामूहिक ध्वनि पैदा होती है, वह हमारे कानों को सुनाई देती है।
 रहस्यमय इस पहाड़ के पत्थरों से निकला है अनोखा संगीत
यह ध्वनि कैसे पैदा होती है यह तो डॉब्फास ने पता कर लिया, मगर यह पहाड़ इतने खास क्यों हैं, यह पता नहीं कर पाए। यह पहाड़ वॉल्केनिक सबस्टेन्स डायाबेस से बने हैं। इनमें भी अन्य पत्थरों की तरह लोहा और अन्य मिनरल मौजूद हैं। मगर इनमें कुछ ऐसा भी है जो इनकी कंपोजिशन को अलग बनाता है। कुछ वैज्ञानिक पत्थरों में मौजूद तनाव को इनके बजने की वजह बनाते हैं।सिर्फ इनसे निकलने वाली आवाज ही इन पत्थरों को अलग नहीं बनाती है। यह पत्थरों की फील्ड पहाड़ के शीर्ष पर है। यानी यह कैसे बनी यह भी साफ नहीं है। साथ ही पत्थरों की इस फील्ड के आसपास कोई वनस्पति या पेड़-पौधे भी नहीं हैं। हर साल यहां हजारों पर्यटक इन्हें देखने और बजाने आते  हैं। कई लोग इन्हें इंस्ट्रूमेंट्स की तरह बजाते हैं।

रहस्यमय इस पहाड़ के पत्थरों से निकला है अनोखा संगीत
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सोमवार, 3 मार्च 2014

अब आभूषण की तरह कान पर पहन सकेंगे कंप्यूटर

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अब आभूषण की तरह कान पर पहन सकेंगे कंप्यूटर


जापान के तकनीकी वैज्ञानिक कान पर पहना जा सकने वाला एक छोटा कंप्यूटर [पीसी] विकसित कर रहे हैं।

इसे पलकें झपकाकर, चेहरे की विभिन्न भावभंगिमाओं या जीभ की हरकतों से नियंत्रित किया जा सकेगा।
महज 17 ग्राम वजनी यह वायरलैस उपकरण ब्लूटूथ, ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम [जीपीआरएस], कंपास [दिशा सूचक यंत्र], बैटरी, बैरोमीटर, स्पीकर और माइक्रोफोन से लैस है। हिरोशिमा सिटी यूनिवर्सिटी के इंजीनियर कजाउहिरो तानीगुची ने कहा, यह पीसी तकनीक के क्षेत्र में गूगल ग्लास की तरह मील का पत्थर साबित हो सकता है। फिलहाल हमने इसे 'इयरक्लिप टाइप वियरेबल पीसी' नाम दिया है। इसमें माइक्रोचिप और डाटा स्टोरेज भी है जिसमें यूजर्स अपने सॉफ्टवेयर सुरक्षित रख सकते हैं।' यह वियरेबल पीसी अगले साल क्रिसमस के बाद बाजार में उपलब्ध हो सकता है। इसे आइपॉड या किसी भी दूसरे गैजेट के साथ जोड़ा जा सकता है। यह पीसी इंफ्रारेड सेंसर के इस्तेमाल से कार के अंदर होने वाली हरकतों पर नजर रख सकता है। इस पीसी को नियंत्रित करने के लिए हाथों की नहीं बल्कि आंखों और चेहरे की विभिन्न भाव भंगिमाएं ही काफी हैं।
संक्रमण से बचाने वाले एंजाइम का रहस्य खुला :
वाशिंगटन। शरीर में संक्रमण के खिलाफ लड़ने वाले एक एंजाइम के पीछे के रहस्य को शोधकर्ताओं ने सुलझा लिया है। शोध के नतीजों से संक्रमणकारी तत्वों के खिलाफ रणनीति तैयार करने, प्रोस्टेट कैंसर व मोटापे से लड़ने में मदद मिल सकेगी। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आरनेस एल नाम के इस एंजाइम की थ्रीडी संरचना तैयार की है। इससे किसी भी वायरस के अनुवांशिक तत्वों के बारे में जानकारी हासिल करने और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद मिलेगी। मनुष्य के शरीर में मौजूद यह एंजाइम प्रतिरक्षा प्रणाली के प्रति सबसे पहले प्रतिक्रिया करता है। सबसे अधिक लोकप्रिय होने के बावजूद भी इसके बारे में अभी तक पूरी जानकारी हासिल नहीं हो पाई थी।
यूनिवर्सिटी में मॉलीक्युलर बायोलॉजी के सहायक प्रोफेसर एलेक्सी कोरेनेक ने कहा, अब हमारे पास आरनेस एल का पूरी संरचना मौजूद है जिससे हमें वंशानुगत प्रोस्टेट कैंसर और मोटापे के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने में मदद मिलेगी। यह शोध जर्नल साइंस में प्रकाशित हुआ है। sabhar ;http://hindi.ruvr.ru/

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