क्या इस ब्रह्मांड में हमारे सिवा भी कोई और है

गुजरे वर्ष में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया तथा कार्नेजी इंस्टिट्यूट ऑफ़ वाशिंगटन से संबंध का गोल विद के एक दल को एक जीवन अनुकूल ग्रह की खोज करने में सफलता मिली जिसे ग्लास 510 नाम दिया गया है हालांकि अब तक सौरमंडल के बाहर सैकड़ों ग्रहों की को खोजा जा चुका है लेकिन इस नए खोजे गए ग्रह के बारे में यह कहा जा रहा है कि जीवन के पनपने योग्य तमाम परिस्थितियों की दृष्टि से यह सर्वाधिक अनुकूल है ग्लास 581 ग्रह का मूल तारा है लाइफ 581 जो एक लाल बोना तारा है यह ग्रह 37 दिन में अपने मूल तारीख की एक प्रतिमा पूरी करता है गौर मतलब है कि लाइफ 581 की ग्रह मालिका प्लेनेटरी सिस्टम में भी और भी ग्रह पाए गए हैं लेकिन ग्लास 581 जी को ही जीवन के अनुकूल पाया गया है हवाई स्थित टेलीस्कोप की मदद से लगातार 11 वर्षों के परीक्षण के बाद लाइफ 58 15 मालिका में आईसीटी ग्रह की खोज करने में सफलता मिली पृथ्वी से 20 प्रकाश वर्ष की दूरी पर तुला तारामंडल में स्थित यह ग्रह पृथ्वी से 3 गुना बड़ा है लेकिन इसका ग्रुप टेबल पृथ्वी के मुकाबले कहीं कम है अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसंधानकर्ताओं को बीते वर्ष में कैलीफोर्निया की एक झील में  arsanik पर पलटने वाले जीवाणुओं यानी बैटरी या की एक प्रजाति की खोज करने में सफलता मिली सौरमंडल से बाहर जीवन अनुकूल ग्रह की खोज के साथ बैक्टीरिया की इस नई प्रजाति की खोज में फिर से इस तथ्य को रेखांकित किया है कि दुर्गम से दुर्गम और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जीवन पनप सकता है तो क्या इस ब्रह्मांड में हम अकेले नहीं यानी हमारे सिवा भी कोई और है

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पूर्वजन्म की घटना

वर्ष 1930 में एक संपन्न और भले परिवार में शांति देवी का जन्म हुआ था। लेकिन जब वे महज 4 साल की थीं तभी उन्होंने अपने माता-पिता को पहचानने से इनकार कर दिया और यह कहने लगीं कि ये उनके असली अभिभावक नहीं हैं। उनका कहना था कि उनका नाम लुग्दी देवी है और बच्चे को जन्म देते समय उनकी मौत हो गई थी। इतना ही नहीं वह अपने पति और परिवार से संबंधित कई और जानकारियां भी देने लगीं।जब उन्हें, उनके कहे हुए स्थान पर ले जाया गया तो उनकी कही गई हर बात सच निकलने लगी। उन्होंने अपने पति को पहचान लिया और अपने पुत्र को देखकर उसे प्यार करने लगीं। कई समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में भी शांति देवी की कहानी प्रकाशित हुई। यहां तक कि महात्मा गांधी भी शांति देवी से मिले। शांति देवी को ना सिर्फ अपना पूर्वजन्म याद था बल्कि उन्हें यह भी याद था कि मृत्यु के बाद और जन्म से पहले भगवान कृष्ण के साथ बिताया गया उनका समय कैसा था। उनका कहना था कि वह कृष्ण से मिली थीं और कृष्ण चाहते थे कि वह अपने पूर्वजन्म की घटना सबको बताएं इसलिए शांति देवी को हर घटना याद है। बहुत से लोगों ने प्रयास किया लेकिन कोई भी शांति देवी को झूठा साबित नहीं कर प