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शनिवार, 23 सितंबर 2023

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य

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महान सम्राट विक्रमादित्य का इतिहास 

भारत में चक्रवर्ती सम्राट उसे कहा जाता है जिसका की संपूर्ण भारत में राज रहा है। ऋषभदेव के पुत्र राजा भरत पहले चक्रवर्ती सम्राट थे, जिनके नाम पर ही इस अजनाभखंड का नाम भारत पड़ा। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य भी चक्रवर्ती सम्राट थे। विक्रमादित्य का नाम विक्रम सेन था। विक्रम वेताल और सिंहासन बत्तीसी की कहानियां महान सम्राट विक्रमादित्य से ही जुड़ी हुई है।

 

 

विक्रमादित्य का परिचय : विक्रम संवत अनुसार विक्रमादित्य आज से 2288 वर्ष पूर्व हुए थे। नाबोवाहन के पुत्र राजा गंधर्वसेन भी चक्रवर्ती सम्राट थे। राजा गंधर्व सेन का एक मंदिर मध्यप्रदेश के सोनकच्छ के आगे गंधर्वपुरी में बना हुआ है। यह गांव बहुत ही रहस्यमयी गांव है। उनके पिता को महेंद्रादित्य भी कहते थे। उनके और भी नाम थे जैसे गर्द भिल्ल, गदर्भवेष। गंधर्वसेन के पुत्र विक्रमादित्य और भर्तृहरी थे। विक्रम की माता का नाम सौम्यदर्शना था जिन्हें वीरमती और मदनरेखा भी कहते थे। उनकी एक बहन थी जिसे मैनावती कहते थे। उनके भाई भर्तृहरि के अलाका शंख और अन्य भी थे।

 

 

उनकी पांच पत्नियां थी, मलयावती, मदनलेखा, पद्मिनी, चेल्ल और चिल्लमहादेवी। उनकी दो पुत्र विक्रमचरित और विनयपाल और दो पुत्रियां प्रियंगुमंजरी (विद्योत्तमा) और वसुंधरा थीं। गोपीचंद नाम का उनका एक भानजा था। प्रमुख मित्रों में भट्टमात्र का नाम आता है। राज पुरोहित त्रिविक्रम और वसुमित्र थे। मंत्री भट्टि और बहसिंधु थे। सेनापति विक्रमशक्ति और चंद्र थे।

 

कलि काल के 3000 वर्ष बीत जाने पर 101 ईसा पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का जन्म हुआ। उन्होंने 100 वर्ष तक राज किया। -(गीता प्रेस, गोरखपुर भविष्यपुराण, पृष्ठ 245)। विक्रमादित्य भारत की प्राचीन नगरी उज्जयिनी के राजसिंहासन पर बैठे। विक्रमादित्य अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे जिनके दरबार में नवरत्न रहते थे। कहा जाता है कि विक्रमादित्य बड़े पराक्रमी थे और उन्होंने शकों को परास्त किया था।

 

 

सम्राट विक्रमादित्य अपने राज्य की जनता के कष्टों और उनके हालचाल जानने के लिए छद्मवेष धारण कर नगर भ्रमण करते थे। राजा विक्रमादित्य अपने राज्य में न्याय व्यवस्था कायम रखने के लिए हर संभव कार्य करते थे। इतिहास में वे सबसे लोकप्रिय और न्यायप्रीय राजाओं में से एक माने गए हैं। 


 

कहा जाता है कि मालवा में विक्रमादित्य के भाई भर्तृहरि का शासन था। भर्तृहरित के शासन काल में शको का आक्रमण बढ़ गया था। भर्तृहरि ने वैराग्य धारण कर जब राज्य त्याग दिया तो विक्रम सेना ने शासन संभाला और उन्होंने ईसा पूर्व 57-58 में सबसे पहले शको को अपने शासन क्षेत्र से बहार खदेड़ दिया। इसी की याद में उन्होंने विक्रम संवत की शुरुआत कर अपने राज्य के विस्तार का आरंभ किया। विक्रमादित्य ने भारत की भूमि को विदेशी शासकों से मुक्ति कराने के लिए एक वृहत्तर अभियान चलानाय। कहते हैं कि उन्होंने अपनी सेना की फिर से गठन किया। उनकी सेना विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना बई गई थी, जिसने भारत की सभी दिशाओं में एक अभियान चलाकर भारत को विदेशियों और अत्याचारी राजाओं से मुक्ति कर एक छत्र शासन को कायम किया।

 

 

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ऐतिहासिक व्यक्ति : कल्हण की 'राजतरंगिणी' के अनुसार 14 ई. के आसपास कश्मीर में अंध्र युधिष्ठिर वंश के राजा हिरण्य के नि:संतान मर जाने पर अराजकता फैल गई थी। जिसको देखकर वहां के मंत्रियों की सलाह से उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने मातृगुप्त को कश्मीर का राज्य संभालने के लिए भेजा था। नेपाली राजवंशावली अनुसार नेपाल के राजा अंशुवर्मन के समय (ईसापूर्व पहली शताब्दी) में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के नेपाल आने का उल्लेख मिलता है।

 

 

राजा विक्रम का भारत की संस्कृत, प्राकृत, अर्द्धमागधी, हिन्दी, गुजराती, मराठी, बंगला आदि भाषाओं के ग्रंथों में विवरण मिलता है। उनकी वीरता, उदारता, दया, क्षमा आदि गुणों की अनेक गाथाएं भारतीय साहित्य में भरी पड़ी हैं।

 

विक्रमादित्य के नवरत्नों के नाम: नवरत्नों को रखने की परंपरा महान सम्राट विक्रमादित्य से ही शुरू हुई है जिसे तुर्क बादशाह अकबर ने भी अपनाया था। सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों के नाम धन्वंतरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, बेताल भट्ट, घटखर्पर, कालिदास, वराहमिहिर और वररुचि कहे जाते हैं। इन नवरत्नों में उच्च कोटि के विद्वान, श्रेष्ठ कवि, गणित के प्रकांड विद्वान और विज्ञान के विशेषज्ञ आदि सम्मिलित थे।

 


 

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विक्रम संवत के प्रवर्तक : देश में अनेक विद्वान ऐसे हुए हैं, जो विक्रम संवत को उज्जैन के राजा विक्रमादित्य द्वारा ही प्रवर्तित मानते हैं। इस संवत के प्रवर्तन की पुष्टि ज्योतिर्विदाभरण ग्रंथ से होती है, जो कि 3068 कलि अर्थात 34 ईसा पूर्व में लिखा गया था। इसके अनुसार विक्रमादित्य ने 3044 कलि अर्थात 57 ईसा पूर्व विक्रम संवत चलाया।

 

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अरब तक फैला था विक्रमादित्य का शासन : 

महाराजा विक्रमादित्य का सविस्तार वर्णन भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। विक्रमादित्य के बारे में प्राचीन अरब साहित्य में वर्णन मिलता है। उस वक्त उनका शासन अरब तक फैला था। दरअसल, विक्रमादित्य का शासन अरब और मिस्र तक फैला था और संपूर्ण धरती के लोग उनके नाम से परिचित थे।

 

इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य का राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा ईरान, इराक और अरब में भी था। विक्रमादित्य की अरब विजय का वर्णन अरबी कवि जरहाम किनतोई ने अपनी पुस्तक 'सायर-उल-ओकुल' में किया है। पुराणों और अन्य इतिहास ग्रंथों के अनुसार यह पता चलता है कि अरब और मिस्र भी विक्रमादित्य के अधीन थे।

 

 

तुर्की के इस्ताम्बुल शहर की प्रसिद्ध लायब्रेरी मकतब-ए-सुल्तानिया में एक ऐतिहासिक ग्रंथ है 'सायर-उल-ओकुल'। उसमें राजा विक्रमादित्य से संबंधित एक शिलालेख का उल्लेख है जिसमें कहा गया है कि '…वे लोग भाग्यशाली हैं, जो उस समय जन्मे और राजा विक्रम के राज्य में जीवन व्यतीत किया। वह बहुत ही दयालु, उदार और कर्तव्यनिष्ठ शासक था, जो हरेक व्यक्ति के कल्याण के बारे में सोचता था। ...उसने अपने पवित्र धर्म को हमारे बीच फैलाया, अपने देश के सूर्य से भी तेज विद्वानों को इस देश में भेजा ताकि शिक्षा का उजाला फैल सके। इन विद्वानों और ज्ञाताओं ने हमें भगवान की उपस्थिति और सत्य के सही मार्ग के बारे में बताकर एक परोपकार किया है। ये तमाम विद्वान राजा विक्रमादित्य के निर्देश पर अपने धर्म की शिक्षा देने यहां आए…।'

 


 

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अन्य सम्राट जिनके नाम के आगे विक्रमादित्य लगा है:- यथा श्रीहर्ष, शूद्रक, हल, चंद्रगुप्त द्वितीय, शिलादित्य, यशोवर्धन आदि। दरअसल, आदित्य शब्द देवताओं से प्रयुक्त है। बाद में विक्रमादित्य की प्रसिद्धि के बाद राजाओं को 'विक्रमादित्य उपाधि' दी जाने लगी।

 

विक्रमादित्य के पहले और बाद में और भी विक्रमादित्य हुए हैं जिसके चलते भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के बाद 300 ईस्वी में समुद्रगुप्त के पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय अथवा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य हुए।

 

 

एक विक्रमादित्य द्वितीय 7वीं सदी में हुए, जो विजयादित्य (विक्रमादित्य प्रथम) के पुत्र थे। विक्रमादित्य द्वितीय ने भी अपने समय में चालुक्य साम्राज्य की शक्ति को अक्षुण्ण बनाए रखा। विक्रमादित्य द्वितीय के काल में ही लाट देश (दक्षिणी गुजरात) पर अरबों ने आक्रमण किया। विक्रमादित्य द्वितीय के शौर्य के कारण अरबों को अपने प्रयत्न में सफलता नहीं मिली और यह प्रतापी चालुक्य राजा अरब आक्रमण से अपने साम्राज्य की रक्षा करने में समर्थ रहा।

 

 

पल्‍लव राजा ने पुलकेसन को परास्‍त कर मार डाला। उसका पुत्र विक्रमादित्‍य, जो कि अपने पिता के समान महान शासक था, गद्दी पर बैठा। उसने दक्षिण के अपने शत्रुओं के विरुद्ध पुन: संघर्ष प्रारंभ किया। उसने चालुक्‍यों के पुराने वैभव को काफी हद तक पुन: प्राप्‍त किया। यहां तक कि उसका परपोता विक्रमादित्‍य द्वितीय भी महान योद्धा था। 753 ईस्वी में विक्रमादित्‍य व उसके पुत्र का दंती दुर्गा नाम के एक सरदार ने तख्‍ता पलट दिया। उसने महाराष्‍ट्र व कर्नाटक में एक और महान साम्राज्‍य की स्‍थापना की, जो राष्‍ट्र कूट कहलाया।

 

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शुक्रवार, 22 सितंबर 2023

महिला आरक्षण बिल संसद से पास, किसने क्या कहा

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महिला आरक्षण बिल संसद से पास, किसने क्या कहा 

महिला आरक्षण बिल लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा में भी पारित हो गया है.


इस विधेयक में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है. महिला आरक्षण के लिए पेश किया गया विधेयक 128वां संविधान संशोधन विधेयक है.


इस बिल को लागू करने की राह में कई रोड़े हैं, जिसके चलते लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.


बिल में कहा गया है कि जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसके प्रावधान लागू हो सकेंगे.

परिसीमन में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर सीमाएं तय की जाती हैं.

पिछला देशव्यापी परिसीमन 2002 में हुआ था. इसे 2008 में लागू किया गया था.


परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के भंग होने के बाद महिला आरक्षण प्रभावी हो सकता है.


पक्ष में कितने वोट

केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया था.


संसद की नई इमारत में 19 सितंबर को कार्यवाही शुरू हुई. पहले ही दिन क़ानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक पेश किया.


20 सितंबर को लोकसभा में करीब सात घंटे की चर्चा के बाद यह बिल पास हुआ. इसके पक्ष में 454 मत पड़े, जबकि दो सांसदों ने इसके विरोध में वोट दिया.


21 सितंबर, गुरुवार को 'नारी शक्ति वंदन विधेयक' राज्यसभा से पारित हुआ, जहां 215 सांसदों ने इसके समर्थन में वोट डाले. यहां एक वोट भी इसके विरोध में नहीं पड़ा.


राज्यसभा में बिल के पास होते ही संसद का विशेष सत्र भी खत्म हो गया. सत्र के आखिरी यानी चौथे दिन महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाई.

विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.


इसका मतलब यह हुआ कि लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.


लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सीटें आरक्षित हैं. इन आरक्षित सीटों में से एक तिहाई सीटें अब महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.


इस समय लोकसभा की 131 सीटें एससी-एसटी के लिए आरक्षित हैं. महिला आरक्षण विधेयक के क़ानून बन जाने के बाद इनमें से 43 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.


इन 43 सीटों को सदन में महिलाओं के लिए आरक्षित कुल सीटों के एक हिस्से के रूप में गिना जाएगा.


इसका मतलब यह हुआ कि महिलाओं के लिए आरक्षित 181 सीटों में से 138 ऐसी होंगी जिन पर किसी भी जाति की महिला को उम्मीदवार बनाया जा सकेगा यानी इन सीटों पर उम्मीदवार पुरुष नहीं हो सकते. Sabhar BBC.COM 

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मंगलवार, 19 सितंबर 2023

अश्लील वीडियो को इंटरनेशनल रेसलर ने साजिश बताया:अंशु मलिक बोलीं- लड़की हिमाचल, लड़का रोहतक का, बिना सच जाने मुझे दोषी करार दिया

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अश्लील वीडियो को इंटरनेशनल रेसलर ने साजिश बताया:अंशु मलिक बोलीं- लड़की हिमाचल, लड़का रोहतक का, बिना सच जाने मुझे दोषी करार दिया 

हरियाणा की इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए अश्लील वीडियो का खंडन किया है।

अंशु मलिक ने कहा- मेरा इस वीडियो से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद मुझ पर गंदे कमेंट्स किए जा रहे हैं। मैं किसी बड़ी साजिश का शिकार हुई हूं। मैं और मेरा परिवार मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहे हैं।


वीडियो में दिख रहा लड़का रोहतक और लड़की हिमाचल प्रदेश की है। वे दोनों रिलेशनशिप में हैं। अंशु ने लोगों से बिना सच्चाई जाने किसी भी नतीजे पर न पहुंचने की विनती की है।


अंशु ने लिखा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। आखिर में सत्य की जीत और झूठ की हार हुई।


अश्लील वीडियो को इंटरनेशनल रेसलर ने साजिश बताया:अंशु मलिक बोलीं- लड़की हिमाचल, लड़का रोहतक का, बिना सच जाने मुझे दोषी करार दिया


पानीपत3 घंटे पहले

इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने कहा कि उनके बारे में फैलाए गए झूठ की वजह से परिवार को मेंटल ट्रॉमा से गुजरना पड़ा। - Dainik Bhaskar

इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने कहा कि उनके बारे में फैलाए गए झूठ की वजह से परिवार को मेंटल ट्रॉमा से गुजरना पड़ा।

हरियाणा की इंटरनेशनल रेसलर अंशु मलिक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए अश्लील वीडियो का खंडन किया है।



अंशु मलिक ने कहा- मेरा इस वीडियो से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद मुझ पर गंदे कमेंट्स किए जा रहे हैं। मैं किसी बड़ी साजिश का शिकार हुई हूं। मैं और मेरा परिवार मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहे हैं।


वीडियो में दिख रहा लड़का रोहतक और लड़की हिमाचल प्रदेश की है। वे दोनों रिलेशनशिप में हैं। अंशु ने लोगों से बिना सच्चाई जाने किसी भी नतीजे पर न पहुंचने की विनती की है।


अंशु ने लिखा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। आखिर में सत्य की जीत और झूठ की हार हुई।


पुलिस ने सोमवार को इस वीडियो को अंशु मलिक का बता वायरल करने वाले आरोपी अमित उर्फ रावण को गिरफ्तार कर लिया। वह हिसार के बरवाला का रहने वाला है और DN कॉलेज में BSC का स्टूडेंट है।

पुलिस ने सोमवार को इस वीडियो को अंशु मलिक का बता वायरल करने वाले आरोपी अमित उर्फ रावण को गिरफ्तार कर लिया। वह हिसार के बरवाला का रहने वाला है और DN कॉलेज में BSC का स्टूडेंट है।

रेसलर अंशु मलिक के वीडियो की 5 अहम बातें...


1. मुझे बदनाम करने की बहुत बड़ी साजिश हुई

मैं अंशु मालिक आप सब से एक बेहद जरूरी बात शेयर करना चाहती हूं। पिछले कुछ दिनों से मेरे नाम से एक फेक वीडियो वायरल किया जा रहा था। मैं आप सबको बता दूं कि मैं उसे वीडियो में नहीं हूं। मुझे सरासर बदनाम करने की कोशिश की गई है। यह एक बहुत बड़ी साजिश रची गई है।


2. वीडियो में दिख रहे लड़का-लड़की रिलेशन में

इसमें दिख रहे लड़का-लड़की आज भी रिलेशनशिप में है। दोनों ने अपने बयान पुलिस को दे दिए हैं। पुलिस ने उन बयानों को सोशल मीडिया पर अपलोड भी किया है। जिस लड़के ने उन दोनों के वीडियो के साथ मेरा नाम जोड़कर वायरल किया था, उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसने अपना जुर्म पुलिस के सामने कबूल किया है। पुलिस ने उन बयानों को भी सोशल मीडिया पर अपलोड किया है।


3. मैं और मेरा परिवार मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहा

मैंने अपनी बेगुनाही के सारे सबूत दे दिए हैं। जो वीडियो मेरा नहीं है, उसे मेरा बता कर लोग बहुत गंदे कमेंट कर कर रहे हैं। क्या उन लोगों ने एक बार भी नहीं सोचा कि मुझ पर और मेरे परिवार पर क्या बीत रही होगी। मैं और मेरा परिवार किस मेंटल ट्रॉमा से गुजरा होगा। जिन्होंने बिना सच जान मुझे समाज के सामने दोषी करार कर दिया। उस लड़की को दोषी साबित कर दिया, जिसका इस पूरे प्रकरण से कोई लेना-देना भी नहीं है। sabhar Bhaskar.com

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सोमवार, 18 सितंबर 2023

वायरल वीडियो पर रेसलर अंशु मलिक ने बताई सच्चाई, मां ने कहा- दोषियों को मिले सख्त सजा

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वायरल वीडियो पर रेसलर अंशु मलिक ने बताई सच्चाई, मां ने कहा- दोषियों को मिले सख्त 

 देश की जानी-मानी पहलवान अंशु मलिक का कथित तौर एमएमएस वायरल होने को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. इस बीच अंशु मलिक और उनकी मां ने  करते हुए सच्चाई बताई.

पहलवान अंशु मलिक ने बताया, 'वायरल हो रही ये वीडियो उनकी नहीं है. यह वीडियो कई महीने पहले भी वायरल हो चुकी थी. इसमें जो नजर आ रहे हैं वो पति-पत्नी हैं. इसमें नजर आ रही लड़की हिमाचल प्रदेश की है. इस वीडियो से मेरा कोई लेना-देना नहीं है. किसी ने मुझे बदनाम करने के लिए मेरे इंस्टाग्राम से एक फोटो उठाया और उस वीडियो के साथ अटैच कर दिया.

अंशु मलिक ने कहा कि जिसने यह वीडियो वायरल किया है, पुलिस उसे गिरफ्तार कर चुकी है. इसके अलावा उस वीडियो में जो लड़का और लड़की हैं, वो भी पुलिस स्टेशन में हैं. अंशु मलिक के अनुसार उन्हें इस वीडियो के बारे में 16 सितंबर (शनिवार) को पता चला. घुटने की चोट के इलाज के लिए अपनी अंशु मलिक अभी चेन्नई में हैं.

अंशु मलिक ने बताया कि जब उन्हें इस वीडियो के बारे में पता चला तो उनके परिवार ने सबसे पहले एफआईआर दर्ज करवाई. उन्होंने कहा, 'इस लड़का और लड़की को मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा. समाज के लोग बिना कुछ सोचे समझे मुझे गंदी लड़की कहने लगे. लोग गंदे-गंदे कमेंट और मैसेज कर रहे हैं. जब हम सुरक्षित नहीं है तो जो लड़कियां छोटी हैं और जो खेलना चाहती हैं वो सब कुछ कैसे करेंगी.'



अंशु मलिक की मां ने क्या कहा?


इस घटना को लेकर अंशु मलिक की मां ने कहा कि जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. उन्होंने कहा, 'मैं अपनी बेटी के साथ परछाई की तरह रहती हूं. हमारी किसी से दूर-दूर तक कोई दुश्मनी नहीं है.' पहलवान अंशु मलिक की मां ने आरोपियों को कड़ी सजा देने की बात करते हुए कहा, 'पुलिस प्रशासन इस मामले की जांच में हमारा पूरा साथ दे रही है. पुलिस ने 24 घंटे के अंदर सभी आरोपियों के पकड़ लिया. जिसने भी हमारे साथ ऐसा किया है उसको सख्त से सख्त सजा दी जाए. ताकि और कोई भी किसी बेटी के साथ ऐसा करने की हिम्मत न करे.'



अंशु की मां के मुताबिक इस घटना की वजह से उनके परिवार को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा. अंशु की मां ने सीएम और पीएम मोदी से आरोपियों को सख्त सजा दिलवाने की मांग की. उन्होने कहा, 'सीएम और देश के पीएम से मेरी रिक्वेस्ट है कि जो भी सख्त प्रावधान हो उससे भी सख्त सजा मिले. ताकि जिसने देश का नाम रोशन किया उसके साथ कोई ऐसा करने की हिम्मत भी न करे. सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों को भी दायरे में रहना चाहिए. अगर किसी की भी इस तरह की वीडियो सोशल मीडिया पर आती है तो उसे तुरंत डिलीट कर देनी चाहिए.' Sabhar https:www.abplive.com

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शुक्रवार, 1 सितंबर 2023

1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला है एक बरगद का पेड़, उम्र 250 साल

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 जंगल नहीं यह एक पेड़ है :

1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला है एक बरगद का पेड़, उम्र 250 साल



दुनिया का सबसे चौड़ा बरगद का पेड़ 14500 वर्ग मीटर में फैला है। कोलकाता के पास आचार्य जगदीश चंद्र बोस बॉटनिकल गार्डन ( The Acharya Jagadish Chandra Bose Botanical Garden) में लगा ये पेड़ 250 साल से अधिक समय में इतना विशाल हो पाया है। दूर से देखने में ये पेड़ एक जंगल की तरह नज़र आता है। दरअसल,बरगद के पेड़ की शाखाओ से जटाए पानी की तलाश में निचे जमीन की और बढती है। वे बाद में जड़ के रूप में पेड़ को पानी और सहारा देने लगती है। ये सिलसिला चलता जाता है।


फ़िलहाल इस बरगद की 2800 से अधिक जटाए जड़ का रूप ले चुकी है। 19वीं शताब्दी में यहाँ आये 2 चक्रवाती तुफानो ने इसकी मूल जड़ को उखाड़ दिया था जो बाद में फंगस लगने के कारण खराब हो गई। 1925 में इस जड़ को काटकर अलग कर दिया गया पर तब तक कई दूसरी जटाए जड़ का रूप ले चुकी थी। इस कारण ये पेड़ आज भी बढता जा रहा है।

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शनिवार, 26 अगस्त 2023

नौकरियों का सोर्स हो सकता है AI, लेकिन ह्यूमन कंट्रोल जरूरी: माइक्रोसॉफ्ट प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ

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माइक्रोसॉफ्ट के वॉयस चेयरमैन और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ ने कहा, "निश्चित तौर पर AI और ChatGPT दुनिया में क्रांति लाएंगे, लेकिन इसके लिए व्यापक कानूनी और नियामकीय ढांचा (legal and regulatory framework) बनाने की जरूरत है, ताकि AI ह्यूमन कंट्रोल में रहे." 

दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence-AI) दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है. अब ज्यादातर कामों में AI का इस्तेमाल किया जा रहा है. बिजनेस बढ़ाने के लिए कंपनियां इसका इस्तेमाल कर रही हैं. ऐसे में नौकरियों पर खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है. हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयरमैन और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ (Microsoft President Brad Smith) ऐसा नहीं मानते. उनके मुताबिक, AI चुनौती नहीं, बल्कि मौका है. NDTV से खास बातचीत में ब्रैड स्मिथ ने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विकास का एक सोर्स हो सकता है. यह भविष्य के लिए उतना ही महत्वपूर्ण होगा, जितना महत्वपूर्व प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार था." ब्रैड स्मिथ अगले महीने होने वाले जी-20 समिट के लिए भारत आए हैं. इस समिट से पहले ग्लोबल बिजनेस लीडर्स ने दिल्ली में मुलाकात की.

ब्रैड स्मिथ ने इस दौरान AI के संभावित खतरों और ChatGPT जैसे जेनरेटर टूल के भविष्य पर भी बात की. NDTV से बातचीत में उन्होंने कहा, "निश्चित तौर पर AI और ChatGPT दुनिया में क्रांति लाएंगे, लेकिन इसके लिए व्यापक कानूनी और नियामकीय ढांचा (legal and regulatory framework) बनाने की जरूरत है, ताकि AI ह्यूमन कंट्रोल में रहे."


माइक्रोसॉफ्ट  के वॉयस चेयरमैन ब्रैड स्मिथ ने कहा, "मुझे लगता है कि AI एक डिवाइस है, जो लोगों को बेहतर ढंग से सोचने और अधिक तेज़ी से जवाब ढूंढने में मदद कर सकता है, लेकिन हमें खुद सोचना बंद नहीं करना चाहिए. AI हमें ज्यादा प्रोडक्टिव और ज्यादा कामयाब बना सकता है. यह हमें एक भाषा से दूसरी भाषा में ट्रांसलेट करने में मदद कर सकता है. मुझे लगता है कि यह ज्यादा विकास और ज्यादा नौकरियों के मौके बनाने में हमारी मदद कर सकता है.'' 

ChatGPT जैसे जेनेरिक टूल के भविष्य पर स्मिथ ने कहा, "...हम जिसे जेनेरिक AI कहते हैं, उसका भविष्य कुछ मायनों में अभी शुरू हो रहा है. यह डॉक्टरों को बीमारियों का इलाज करने में अधिक प्रभावी बना सकता है. मरीजों को ठीक करने के लिए नई दवाएं खोजने में भी मदद कर सकता है." बता दें कि Open AI कंपनी ने ChatGPT को 30 नवंबर 2022 को इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में लॉन्च किया था. आप ChatGpt से जो भी सवाल पूछेंगे, उनका सीधा जवाब आपको लिखित रूप (Text Format) में मिल जाएगा.

स्मिथ ने आगे कहा, "हम ChatGPT को छात्रों के लिए ट्यूटर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं." माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ने जोर देकर कहा कि AI या ऐसी टेक्नोलॉजी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ये कभी भी खतरा पैदा न करे.

उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि AI हमेशा ह्यूमन कंट्रोल में रहे. कंपनियों को जिम्मेदार तरीके से AI विकसित करने की जरूरत है. इसके लिए नए कानूनों और विनियमों पर फोकस होना चाहिए. भारत इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है."


ब्रैड स्मिथ ने आगे कहा, "AI कोई जादू नहीं है... यह नॉलेज का एक इंडिपेंडेंट सोर्स नहीं है. यह संवेदनशील नहीं है. यह एक मैथ है... मुझे लगता है कि जब यह अलग होगा, तो दूर का भविष्य हो सकता है. लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी टेक्नोलॉजी मानवता की सेवा करती है और मानव नियंत्रण में रहती है."

स्मिथ ने इस दौरान विभिन्न स्तरों पर डिजिटल पेमेंट सिस्टम और डिजिटलाइजेशन पर भी बात की. उन्होंने कहा, "मैंने भारत जैसा देश नहीं देखा, जो इतना एडवांस है और चीजों को इतनी जल्दी से ग्रैब करता है. माइक्रोसॉफ्ट में हमारे दृष्टिकोण से हम ये नहीं देखते हैं कि डिजिटल सिस्टम भारत में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए क्या कर रहे हैं, बल्कि यह दुनिया के लिए क्या कर सकते हैं... हम इसे ऐसे देखते हैं." Sabhar https://ndtv.in/india/ai-can-be-source-of-jobs-must-be-in-human-control-says-microsoft-president-brad-smith-to-ndtv-4329071/amp/1

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Mann Ki Baat Live Updates: 'संकल्प के सूरज चांद पर भी उगते हैं', पीएम मोदी बोले- भारत संभावनाओं का देश

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Mann Ki Baat Live 104th Episode, PM Modi News in Hindi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 'मन की बात' कार्यक्रम के जरिये देशवासियों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने चंद्रयान मिशन की तारीफ की और कहा कि इस उपलब्धि के बारे में जितनी बात की जाए कम है। 

लाइव अपडेट

11:50 AM, 27-AUG-2023

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। इसे कई आधुनिक भाषाओं की जननी भी कहा जाता है। संस्कृत अपनी प्राचीनता के साथ-साथ अपनी वैज्ञानिकता और व्याकरण के लिए भी जानी जाती है। भारत का प्राचीन ज्ञान हजारों वर्षों तक संस्कृत भाषा में ही संरक्षित किया गया है। आज देश में संस्कृत को लेकर जागरुकता और गर्व बढ़ा है। साल 2020 में तीन संस्कृत डीम्ड यूनिवर्सिटीज को सेंट्रल यूनिवर्सिटीज बनाया गया। अलग-अलग शहरों में संस्कृत विश्वविद्यालयों के कई कॉलेज और संस्थान भी चल रहे हैं। आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में भी संस्कृत केंद्र प्रसिद्ध हो रहे हैं।'


11:36 AM, 27-AUG-2023

'इस बार 15 अगस्त के दौरान देश ने सबका प्रयास का सामर्थ्य देखा। सभी देशवासियों के प्रयास से हर घर तिरंगा अभियान को हर मन तिरंगा अभियान बना दिया। इस दौरान कई रिकॉर्ड बने। देशवासियों ने करोड़ों की संख्या में तिरंगे खरीदे। डेढ़ लाख पोस्ट ऑफिस के जरिए करीब डेढ़ करोड़ तिरंगे बेचे गए। इससे हमारे कामगारों, बुनकरों और खासकर महिलाओं की सैकड़ों करोड़ रुपये की आय हुई। तिरंगे के साथ सेल्फी पोस्ट करने में भी इस बार नया रिकॉर्ड बना। पिछले साल करीब 5 करोड़ देशवासियों ने तिरंगे के साथ सेल्फी पोस्ट की थी, इस बार यह आंकड़ा 10 करोड़ को भी पार कर गया।' 

11:30 AM, 27-AUG-2023

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'कुछ ही दिनों पहले चीन में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स हुए थे। इन खेलों में भारत का प्रदर्शन अभी तक का सबसे बेहतर रहा। हमारे खिलाड़ियों ने कुल 26 पदक जीते, जिनमें से 11 गोल्ड मेडल थे। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि 1959 से लेकर अब तक जितने भी वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स हुए हैं, उनमें जीते सभी मेडल्स को जोड़ भी दें तो ये संख्या 18 तक ही पहुंचती है।'


11:24 AM, 27-AUG-2023

'जनभागीदारी की हमारी इस कोशिश में एक ही नहीं बल्कि दो-दो विश्व रिकॉर्ड बन गए हैं। वाराणसी में हुई जी20 क्विज में 800 स्कूलों के सवा लाख छात्रों की भागीदारी एक नया विश्व रिकॉर्ड बन गया। वहीं लंबानी कारीगरों ने भी कमाल कर दिया। 450 कारीगरों ने करीब 1800 यूनिक पैचेज का आश्चर्यजनक कलेक्शन करके अपने हुनर और क्राफ्टसमैनशिप का परिचय दिया है।'


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ये पेट्री डिश क्या है? क्या भविष्य में बच्चे इन्हीं में पैदा होंगे

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ये पेट्री डिश क्या है? क्या भविष्य में बच्चे इन्हीं में पैदा होंगेहाल ही में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में डेवलेपमेंटल बॉयोलॉजिस्ट जर्निका गेट्ज और उनकी टीम ने एक ऐसी चीज खोजी है जिसमें सिंथेटिक मानव भ्रूण का शानदार विकास हुआ है. 

तकनीक इतनी तेजी से विकास कर रहा है कि आने वाले समय में इंसान मां की गर्भ से नहीं बल्कि मशीनों से बन कर निकलेंगे. हालांकि, इसके लिए अभी बहुत वक्त है. लेकिन आज हम जिस चीज की बात कर रहे हैं वो है पेट्री डिश. इसे लेकर कहा जा रहा है कि भविष्य में बच्चे इन्हीं में पैदा होंगे. चलिए आज आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि आखिर ये चीज है क्या और इससे इंसानों के जीवन पर कितना प्रभाव पड़ेगा.


पेट्री डिश क्या होती है?


पेट्री डिश दरअसल, वो ट्रे या प्लेट है जिसमें वैज्ञानिक कोशिकाओं को तैयार करते हैं. इसका उपयोग ज्यादातर जीव विज्ञानी ही करते हैं. सरल भाषा में कहें तो सबसे पहले इस डिश में कुछ बैक्टीरिया और कवक की छोटी छोटी कोशिकाएं डाली जाती हैं और फिर उनके डिजाइन और संवर्धन पर काम किया जाता है. पेट्री डिश शब्द का पहली बार इस्तेमाल जूलियस रिचर्ड पेट्री ने 1852 से 1921 के बीच किया था.  अब कहा जा रहा है कि इसी डिश में भविष्य में बच्चों को भी तैयार किया जाएगा.


क्या है ये चीज?


दरअसल, हाल ही में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में डेवलेपमेंटल बॉयोलॉजिस्ट जर्निका गेट्ज और उनकी टीम ने एक ऐसी चीज खोजी है जिसमें सिंथेटिक मानव भ्रूण का शानदार विकास हुआ है. वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने पहले ही अटेंप्ट में ह्यूमन स्टेम सेल के सबसे एडवांस स्तर का भ्रूण तैयार कर लिया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में वो इस खोज के जरिए इंसानों की ज्यादा मदद कर पाएंगी.


खासतौर से ब्लैक बॉक्स पीरियड के बारे में इससे काफी ज्यादा जानकारी मिलेगी. ब्लैक बॉक्स यानि भ्रूण के विकास का सबसे पहला स्टेज. अगर इंसान इसमें कामयाब हो गया तो ये बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा भगवान करते हैं. यानि इस चीज की जानकारी मिल जाएगी की गर्भ में किसी बच्चे का निर्माण होता कैसे है.


अपने हिसाब के बच्चे बना पाएगा इंसान?


अगर ये तकनीक सही में सौ फीसदी कामयाब हो गई तो इसकी मदद से इंसान जैसा चाहेगा उस तरह के इंसान का निर्माण कर लेगा. इसे लेकर एक तरफ जहां कुछ वैज्ञानिकों में खुशी है तो वहीं कई वैज्ञानिक ऐसे भी हैं जो ये मानते हैं कि इसका उपयोग गलत काम के लिए भी हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो ये मानवता को खत्म करने के बराबर होगा. Sabhar https://www.google.com/amp/s/www.abplive.com/gk/what-is-this-petri-dish-will-children-be-born-in-these-in-the-future-2464112/amp

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Study: इस वजह से खतरनाक होता जा रहा है डेंगू, भविष्य में गंभीर रोग-मृत्यु का जोखिम भी अधिक

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Study: इस वजह से खतरनाक होता जा रहा है डेंगू, भविष्य में गंभीर रोग-मृत्यु का जोखिम भी अधिक 

डेंगू के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। राजधानी दिल्ली में भी इन दिनों डेंगू के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि यहां डेंगू के टाइप-2 स्ट्रेन के मामले रिपोर्ट किए गए हैं जिसके कारण गंभीर रोग विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक हालिया अध्ययन में चेताया है कि समय के साथ डेंगू और भी खतरनाक होता जा रहा है, इसके कारण भविष्य में गंभीर रोगों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।


अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तापमान के कारण डेंगू वायरस अधिक खतरनाक होता जा रहा है। यानी कि अभी की तुलना में आने वाले वर्षों में डेंगू के कारण गंभीर रोग विकसित होने के मामले अधिक देखे जा सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पर्यावरण में हो रहा बदलाव कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने वाला माना जा रहा है, डेंगू का जोखिम भी उनमें से एक है।

उच्च तापमान और डेंगू का खतरा 


केरल स्थित राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (आरजीसीबी) के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। वैज्ञानिकों की टीम ने पशु मॉडल अध्ययन में पाया कि डेंगू अधिक गंभीर और जोखिम कारक हो सकता है। वातावरण में बढ़ता तापमान इसके खतरों को और भी बढ़ाता जा रहा है, इसके जोखिमों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।


एफएएसईबी जर्नल में हाल ही में प्रकाशित इस शोध में डेंगू की गंभीरता और इसके जोखिमों से बचाव के लिए प्रयासों पर जोर दिया गया है।

गंभीर हो सकते हैं डेंगू के मामले


आंकड़ों को मुताबिक हर साल 390 मिलियन (39 करोड़) से अधिक लोग डेंगू के शिकार हो रहे हैं। तापमान वृद्धि की स्थिति वायरस की विषाक्तता को प्रभावित करती हुई देखी जा रही है। यह पहला अध्ययन है जिसमें तापमान और डेंगू की गंभीरता को लेकर लोगों को सावधान किया गया है।


शोधकर्ताओं ने कहा, पर्यावरणीय तापमान में वृद्धि के मौसम में, रुक-रुक कर होने वाली बारिश से मच्छरों के प्रजनन में वृद्धि रिपोर्ट की जाती रही है। हमारा अध्ययन ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते दुष्प्रभावों और संक्रामक रोगों की गतिशीलता और इसके संभावित जोखिमों पर जोर देता है।


क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?


पहले के अध्ययनों में यह देखा गया था कि अपेक्षाकृत उच्च पर्यावरणीय तापमान मच्छरों में वायरस के इनक्यूबेशन पीरियड को कम कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप मानव संचरण में तेजी से वृद्धि हो सकती है। आरजीसीबी के निदेशक प्रोफेसर चंद्रभास नारायण बताया कि इस बार शोधकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि डेंगू कभी-कभी गंभीर क्यों हो जाता है?


दशकों के शोध के बाद भी, बार-बार होने वाली इस बीमारी को नियंत्रित करने या रोकने के लिए अभी भी कोई प्रभावी टीके या एंटीवायरल नहीं है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। sabhar Amar Ujala.com

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शिव शक्ति' और 'तिरंगा' से पहले चांद पर मौजूद है 'जवाहर पॉइंट', जानिए पूरी कहानी

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शिव शक्ति' और 'तिरंगा' से पहले चांद पर मौजूद है 'जवाहर पॉइंट', जानिए पूरी कहानी 

Chandrayaan Mission Site Name: यह एक वैज्ञानिक परंपरा है कि जिस जगह लैंडर उतरता है उसका नामकरण किया जाता है. चंद्रयान-3 की इम्पैक्ट साइट को 'शिव शक्ति' और चंद्रयान-2 की साइट को 'तिरंगा' नाम दिया गया है. इससे पहले मनमोहन सरकार में चंद्रयान-1 की इम्पैक्ट साइट को 'जवाहर पॉइंट' नाम दिया गया था, जिसे लेकर अब खूब चर्चा हो रही है.

चंद्रयान-3 के 'विक्रम लैंडर' ने चांद पर जिस जगह कदम रखा है उस पॉइंट को 'शिव शक्ति' नाम दिया गया है. इसके अलावा पीएम मोदी ने उस पॉइंट को 'तिरंगा' नाम दिया है जहां चंद्रयान-2 लैंडर क्रैश हुआ था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क मिशन कंट्रोल कॉम्प्लेक्स में वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए चांद पर दोनों पॉइंट के नाम की घोषणा की. इसके साथ ही पीएम मोदी ने हर साल 23 अगस्त को नेशनल स्पेस डे मनाने की घोषणा की है.

यह एक वैज्ञानिक परंपरा है कि जिस जगह लैंडर उतरता है उसका नामकरण किया जाता है. लेकिन चांद पर शिव शक्ति पॉइंट और तिरंगा पॉइंट से पचंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद से 'जवाहर पॉइंट' सोशल मीडिया पर ट्रैंड कर रहा है. बीजेपी के कई नेताओं और 'X' (पहले ट्विटर) यूजर्स चंद्रयान-1 मिशन की लैंडिंग साइट के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी. हले एक और पॉइंट है जिसका नाम 'जवाहर पॉइंट' है. 
चंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद से 'जवाहर पॉइंट' सोशल मीडिया पर ट्रैंड कर रहा है. बीजेपी के कई नेताओं और 'X' (पहले ट्विटर) यूजर्स चंद्रयान-1 मिशन की लैंडिंग साइट के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी. Sabhar aajtak.in

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क्‍या वाकई अजर, अमर, अविनाशी होती है आत्‍मा? क्‍या कहता है विज्ञान

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क्‍या वाकई अजर, अमर, अविनाशी होती है आत्‍मा? क्‍या कहता है विज्ञान 

Is human soul really immortal - धर्म कहता है कि आत्‍मा अजर, अमर, अविनाशी है. अलग-अलग धर्मों में इसे अलग तरीके से कहा गया है. विज्ञान व तकनीक की दुनिया में इस धारणा को बार-बार तर्कों की कसौटी पर भी परखा गया है. क्‍या विज्ञान इस धारणा को स्‍वीकार करता है? क्‍या वाकई इस धारणा में कोई दम है?

Is human soul really immortal - धर्म कहता है कि आत्‍मा अजर, अमर, अविनाशी है. अलग-अलग धर्मों में इसे अलग तरीके से कहा गया है. विज्ञान व तकनीक की दुनिया में इस धारणा को बार-बार तर्कों की कसौटी पर भी परखा गया है. क्‍या विज्ञान इस धारणा को स्‍वीकार करता है? क्‍या वाकई इस धारणा में कोई दम है?



दर्शन, धर्म और विज्ञान के लिए हमेशा से ये सवाल परेशान करता रहा है कि क्‍या आत्‍मा वाकई अमर होती है. 

दर्शन, धर्म और विज्ञान के लिए हमेशा से ये सवाल परेशान करता रहा है कि क्‍या आत्‍मा वाकई अमर होती है.

Human Soul and Science: दुनिया में सबसे ज्‍यादा पूछा जाने वाला सवाल है कि क्‍या मनुष्‍य के भौतिक शरीर के मरने के बाद भी आत्मा जीवित रहती है? दर्शन, विज्ञान और धर्म ने अलग-अलग तरह से इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की है. दुनियाभर में माने जाने वाले धर्मों ने इस सवाल का जवाब अपने-अपने तरीके से दिया है. किसी धर्म में कहा जाता है कि आत्‍मा शरीर को कपड़ों की तरह बदलती है. एक शरीर के मरने के बाद आत्‍मा नए शरीर के साथ फिर जन्‍म लेती है. किसी धर्म के मुताबिक, शरीर के मरने के बाद आत्‍मा परम सत्‍ता में विलीन हो जाती है और फिर जन्‍म नहीं लेती है. हम विज्ञान के अलग-अलग सिद्धांतों और अध्‍ययनों के आधार पर जानने की कोशिश करेंगे कि क्‍या वाकई आत्‍मा अमर है?

सबसे पहले यह समझते हैं कि आत्मा का मतलब क्या है? आत्मा शब्द लैटिन एनिमा से आया है, जो ग्रीक एनीमोस से जुड़ा हुआ है, जिसका अर्थ सांस या हवा है. वहीं, सनातन परंपरा में हजारों साल पुराने वेदों, उपनिषदों और पुराणों में भी आत्‍मा का जिक्र किया गया है. भारतीय दर्शन में माना जाता है कि आत्‍मा अजर, अमर, अविनाशी है. कई आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं में आत्मा व्यक्तित्व का सार, आत्मा या मैं है. हालांकि, हाल के दिनों में आत्मा को मन या चेतना की तरह सोच-विचार का हिस्सा माना जाता है, जो विज्ञान की अलग-अलग शाखाओं के सबसे महान रहस्यों में एक है.

क्‍या है ऑर्केस्ट्रेटेड ऑब्जेक्टिव रिडक्शन

कुछ साल पहले एक भौतिक विज्ञानी के सहयोग से एक नया सिद्धांत विकसित किया गया, जिसमें शरीर के मरने के बाद आत्‍मा के अस्तित्‍व पर रोशनी डाली गई. इस सिद्धांत को ऑर्केस्ट्रेटेड ऑब्जेक्टिव रिडक्शन (ऑर्क-ओआर) कहा गया है. इसे 1990 के दशक में भौतिकविद रोजर पेनरोज और स्टुअर्ट हैमरॉफ ने विकसित किया था. शोध के मुताबिक, चेतना न्यूरॉन्स के बीच कम्‍युनिकेशन के बजाय उनके भीतर पैदा होती है. बता दें कि रोजर पेनरोज प्रतिष्ठित गणितज्ञ, भौतिक विज्ञानी और ब्रह्मांड विज्ञानी हैं. उन्‍हें भौतिकी में 2020 का नोबेल पुरस्कार दिया गया था. पेनरोज को ब्लैक होल पर उनके काम के लिए विज्ञान के सर्वोच्च सम्मानों में एक मिला है. उन्‍होंने खोज की थी कि ब्लैक होल का निर्माण आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत का नतीजा है.

आर्क-ओआर पर चल रहीं परियोजनाएं

रोजर पेनरोज ने कैंब्रिज में एक अन्य महान भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग के साथ लंबे समय तक काम किया था. पेनरोज ने हॉकिंग के साथ ब्लैक होल और गुरुत्वाकर्षण विलक्षणता के बारे में कुछ सिद्धांत विकसित किए थे. वैज्ञानिक स्‍टुअर्ट हैमरॉफ स्टुटिन एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और अमेरिका में एरिजोना यूनिवर्सिटी में लेक्‍चरर हैं. वह इस सिद्धंत के लेखकों में एक हैं कि आत्‍मा क्‍या है और क्‍या ये अमर है? बता दें कि ‘ऑर्क-ओआर’ अभी केवल एक सिद्धांत है. लेकिन, माना गया कि इस सिद्धांत पर परीक्षण किया जा सकता है. लिहाजा, इसके परीक्षण और सत्यापन के लिए परियोजनाएं चल रही हैं.

एल्‍गोरिदम से काबू नहीं हो सकता दिमाग

पेनरोज और हैमरॉफ के ‘ऑर्क-ओआर’ सिद्धांत के पीछे का विचार है कि मस्तिष्क को एल्गोरिदम से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है. इसका मतलब है कि मस्तिष्क के भौतिक गुण पारंपरिक गणितीय औपचारिकताओं से निर्धारित नहीं होते हैं, बल्कि क्‍वांटम मेकेनिक्‍स के दिलचस्प सिद्धांतों ये इनकी व्‍याख्‍या की जा सकती है. सिद्धांत के दोनों लेखकों में हैमरॉफ ने चेतना के जैविक घटक का अध्ययन किया है. उनके मुताबिक, चेतना की मुख्य संरचना मस्तिष्क में माइक्रोट्यूबल सेल्‍स हैं. वहीं, भौतिक विज्ञानी पेनरोज ने आत्‍मा के अमर होने के सवाल का जवाब तलाशने के लिए क्‍वांटम अप्रोच को अपनाया है.

चेतना कहां पैदा करती है कंपन

‘ऑर्क-ओआर’ सिद्धांत के मुताबिक, चेतना सब-एटॉमिक पार्टिकल्‍स के यूनिवर्स में कंपन करने वाली एक तरंग है. वहीं, दिमाग की माइक्रोट्यूबल सेल्‍स वास्तविक क्‍वांटम कंप्यूटर के तौर पर काम करती हैं, जो इन कंपनों को इस्‍तेमाल किए जाने लायक जानकारी में तब्‍दील करती हैं. बता दें कि क्‍वांटम कंप्यूटर सामान्य कंप्यूटर से अलग तरीके से काम करता है. सामान्‍य कंप्यूटर जानकारी को बिट्स यानी ज़ीरो या वन के रूप में प्रॉसेस करता है, जबकि क्‍वांटम कंप्यूटर क्यूबिट्स को प्रॉसेस करता है, जो एक ही समय में शून्य और एक दोनों हो सकता है. इससे क्‍वांटम सुपरपोजिशन बनती है, जो हमारे क्‍लासिकल मेकेनिकल माइंड्स के लिए समझने में दिक्‍कतें पैदा करता है.

क्‍या है कई दुनिया का सिद्धांत

सैद्धांतिक भौतिकविद एवरेट के कई दुनियाओं के सिद्धांत के मुताबिक, जब कोई सेब या नाशपाती में से एक चीज खाने का फैसला करता है, तो सेब खाने का फैसला नाशपाती को अलग कर देता है. लेकिन, इसी फैसले के साथ नाशपाती दूसरी दुनिया में अलग से अस्तित्व में रहती है. दूसरी ओर, ‘ऑर्क-ओआर’ सिद्धांत कहता है कि नाशपाती खाने के विकल्प को चुना ही नहीं गया है. लिहाजा, नाशपाती अलग हो जाती है. लेकिन, यह एक अस्थिर स्थिति है. इसलिए कुछ समय बाद इसमें बदलाव आ जाता है.

कई दुनिया, लेकिन सिर्फ एक में चेतना

एवरेट के सिद्धांत के समर्थकों के मुता‍बिक, कई दूसरी दुनिया हैं, लेकिन केवल एक में चेतना है. वहीं, पेनरोज और हैमरॉफ के मुताबिक, हम ही एकमात्र वास्तविकता हैं, क्योंकि वैकल्पिक वास्तविकताओं का अस्तित्‍व अस्थिर होने के कारण खत्‍म हो जाता है. इस क्‍वांटम सोच को फिर मस्तिष्क में स्थानांतरित कर दिया जाता है, जहां चेतना को पहले सामान्य कंप्यूटर की तरह काम करने वाले न्यूरॉन्स के बीच कनेक्शन की एक श्रृंखला के रूप में माना जाता था. हैमरॉफ के मुताबिक, जब आप मस्तिष्क कोशिकाओं न्‍यूरॉन के बारे में सोचते हैं तो यह सोचना न्यूरॉन का अपमान है कि ये बंद या चालू हो जाते हैं.  Sabhar News18 India

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