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सोमवार, 18 सितंबर 2023

वायरल वीडियो पर रेसलर अंशु मलिक ने बताई सच्चाई, मां ने कहा- दोषियों को मिले सख्त सजा

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वायरल वीडियो पर रेसलर अंशु मलिक ने बताई सच्चाई, मां ने कहा- दोषियों को मिले सख्त 

 देश की जानी-मानी पहलवान अंशु मलिक का कथित तौर एमएमएस वायरल होने को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. इस बीच अंशु मलिक और उनकी मां ने  करते हुए सच्चाई बताई.

पहलवान अंशु मलिक ने बताया, 'वायरल हो रही ये वीडियो उनकी नहीं है. यह वीडियो कई महीने पहले भी वायरल हो चुकी थी. इसमें जो नजर आ रहे हैं वो पति-पत्नी हैं. इसमें नजर आ रही लड़की हिमाचल प्रदेश की है. इस वीडियो से मेरा कोई लेना-देना नहीं है. किसी ने मुझे बदनाम करने के लिए मेरे इंस्टाग्राम से एक फोटो उठाया और उस वीडियो के साथ अटैच कर दिया.

अंशु मलिक ने कहा कि जिसने यह वीडियो वायरल किया है, पुलिस उसे गिरफ्तार कर चुकी है. इसके अलावा उस वीडियो में जो लड़का और लड़की हैं, वो भी पुलिस स्टेशन में हैं. अंशु मलिक के अनुसार उन्हें इस वीडियो के बारे में 16 सितंबर (शनिवार) को पता चला. घुटने की चोट के इलाज के लिए अपनी अंशु मलिक अभी चेन्नई में हैं.

अंशु मलिक ने बताया कि जब उन्हें इस वीडियो के बारे में पता चला तो उनके परिवार ने सबसे पहले एफआईआर दर्ज करवाई. उन्होंने कहा, 'इस लड़का और लड़की को मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा. समाज के लोग बिना कुछ सोचे समझे मुझे गंदी लड़की कहने लगे. लोग गंदे-गंदे कमेंट और मैसेज कर रहे हैं. जब हम सुरक्षित नहीं है तो जो लड़कियां छोटी हैं और जो खेलना चाहती हैं वो सब कुछ कैसे करेंगी.'



अंशु मलिक की मां ने क्या कहा?


इस घटना को लेकर अंशु मलिक की मां ने कहा कि जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. उन्होंने कहा, 'मैं अपनी बेटी के साथ परछाई की तरह रहती हूं. हमारी किसी से दूर-दूर तक कोई दुश्मनी नहीं है.' पहलवान अंशु मलिक की मां ने आरोपियों को कड़ी सजा देने की बात करते हुए कहा, 'पुलिस प्रशासन इस मामले की जांच में हमारा पूरा साथ दे रही है. पुलिस ने 24 घंटे के अंदर सभी आरोपियों के पकड़ लिया. जिसने भी हमारे साथ ऐसा किया है उसको सख्त से सख्त सजा दी जाए. ताकि और कोई भी किसी बेटी के साथ ऐसा करने की हिम्मत न करे.'



अंशु की मां के मुताबिक इस घटना की वजह से उनके परिवार को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा. अंशु की मां ने सीएम और पीएम मोदी से आरोपियों को सख्त सजा दिलवाने की मांग की. उन्होने कहा, 'सीएम और देश के पीएम से मेरी रिक्वेस्ट है कि जो भी सख्त प्रावधान हो उससे भी सख्त सजा मिले. ताकि जिसने देश का नाम रोशन किया उसके साथ कोई ऐसा करने की हिम्मत भी न करे. सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों को भी दायरे में रहना चाहिए. अगर किसी की भी इस तरह की वीडियो सोशल मीडिया पर आती है तो उसे तुरंत डिलीट कर देनी चाहिए.' Sabhar https:www.abplive.com

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शुक्रवार, 1 सितंबर 2023

1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला है एक बरगद का पेड़, उम्र 250 साल

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 जंगल नहीं यह एक पेड़ है :

1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला है एक बरगद का पेड़, उम्र 250 साल



दुनिया का सबसे चौड़ा बरगद का पेड़ 14500 वर्ग मीटर में फैला है। कोलकाता के पास आचार्य जगदीश चंद्र बोस बॉटनिकल गार्डन ( The Acharya Jagadish Chandra Bose Botanical Garden) में लगा ये पेड़ 250 साल से अधिक समय में इतना विशाल हो पाया है। दूर से देखने में ये पेड़ एक जंगल की तरह नज़र आता है। दरअसल,बरगद के पेड़ की शाखाओ से जटाए पानी की तलाश में निचे जमीन की और बढती है। वे बाद में जड़ के रूप में पेड़ को पानी और सहारा देने लगती है। ये सिलसिला चलता जाता है।


फ़िलहाल इस बरगद की 2800 से अधिक जटाए जड़ का रूप ले चुकी है। 19वीं शताब्दी में यहाँ आये 2 चक्रवाती तुफानो ने इसकी मूल जड़ को उखाड़ दिया था जो बाद में फंगस लगने के कारण खराब हो गई। 1925 में इस जड़ को काटकर अलग कर दिया गया पर तब तक कई दूसरी जटाए जड़ का रूप ले चुकी थी। इस कारण ये पेड़ आज भी बढता जा रहा है।

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शनिवार, 26 अगस्त 2023

नौकरियों का सोर्स हो सकता है AI, लेकिन ह्यूमन कंट्रोल जरूरी: माइक्रोसॉफ्ट प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ

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माइक्रोसॉफ्ट के वॉयस चेयरमैन और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ ने कहा, "निश्चित तौर पर AI और ChatGPT दुनिया में क्रांति लाएंगे, लेकिन इसके लिए व्यापक कानूनी और नियामकीय ढांचा (legal and regulatory framework) बनाने की जरूरत है, ताकि AI ह्यूमन कंट्रोल में रहे." 

दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence-AI) दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है. अब ज्यादातर कामों में AI का इस्तेमाल किया जा रहा है. बिजनेस बढ़ाने के लिए कंपनियां इसका इस्तेमाल कर रही हैं. ऐसे में नौकरियों पर खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है. हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयरमैन और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ (Microsoft President Brad Smith) ऐसा नहीं मानते. उनके मुताबिक, AI चुनौती नहीं, बल्कि मौका है. NDTV से खास बातचीत में ब्रैड स्मिथ ने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विकास का एक सोर्स हो सकता है. यह भविष्य के लिए उतना ही महत्वपूर्ण होगा, जितना महत्वपूर्व प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार था." ब्रैड स्मिथ अगले महीने होने वाले जी-20 समिट के लिए भारत आए हैं. इस समिट से पहले ग्लोबल बिजनेस लीडर्स ने दिल्ली में मुलाकात की.

ब्रैड स्मिथ ने इस दौरान AI के संभावित खतरों और ChatGPT जैसे जेनरेटर टूल के भविष्य पर भी बात की. NDTV से बातचीत में उन्होंने कहा, "निश्चित तौर पर AI और ChatGPT दुनिया में क्रांति लाएंगे, लेकिन इसके लिए व्यापक कानूनी और नियामकीय ढांचा (legal and regulatory framework) बनाने की जरूरत है, ताकि AI ह्यूमन कंट्रोल में रहे."


माइक्रोसॉफ्ट  के वॉयस चेयरमैन ब्रैड स्मिथ ने कहा, "मुझे लगता है कि AI एक डिवाइस है, जो लोगों को बेहतर ढंग से सोचने और अधिक तेज़ी से जवाब ढूंढने में मदद कर सकता है, लेकिन हमें खुद सोचना बंद नहीं करना चाहिए. AI हमें ज्यादा प्रोडक्टिव और ज्यादा कामयाब बना सकता है. यह हमें एक भाषा से दूसरी भाषा में ट्रांसलेट करने में मदद कर सकता है. मुझे लगता है कि यह ज्यादा विकास और ज्यादा नौकरियों के मौके बनाने में हमारी मदद कर सकता है.'' 

ChatGPT जैसे जेनेरिक टूल के भविष्य पर स्मिथ ने कहा, "...हम जिसे जेनेरिक AI कहते हैं, उसका भविष्य कुछ मायनों में अभी शुरू हो रहा है. यह डॉक्टरों को बीमारियों का इलाज करने में अधिक प्रभावी बना सकता है. मरीजों को ठीक करने के लिए नई दवाएं खोजने में भी मदद कर सकता है." बता दें कि Open AI कंपनी ने ChatGPT को 30 नवंबर 2022 को इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में लॉन्च किया था. आप ChatGpt से जो भी सवाल पूछेंगे, उनका सीधा जवाब आपको लिखित रूप (Text Format) में मिल जाएगा.

स्मिथ ने आगे कहा, "हम ChatGPT को छात्रों के लिए ट्यूटर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं." माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ने जोर देकर कहा कि AI या ऐसी टेक्नोलॉजी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ये कभी भी खतरा पैदा न करे.

उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि AI हमेशा ह्यूमन कंट्रोल में रहे. कंपनियों को जिम्मेदार तरीके से AI विकसित करने की जरूरत है. इसके लिए नए कानूनों और विनियमों पर फोकस होना चाहिए. भारत इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है."


ब्रैड स्मिथ ने आगे कहा, "AI कोई जादू नहीं है... यह नॉलेज का एक इंडिपेंडेंट सोर्स नहीं है. यह संवेदनशील नहीं है. यह एक मैथ है... मुझे लगता है कि जब यह अलग होगा, तो दूर का भविष्य हो सकता है. लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी टेक्नोलॉजी मानवता की सेवा करती है और मानव नियंत्रण में रहती है."

स्मिथ ने इस दौरान विभिन्न स्तरों पर डिजिटल पेमेंट सिस्टम और डिजिटलाइजेशन पर भी बात की. उन्होंने कहा, "मैंने भारत जैसा देश नहीं देखा, जो इतना एडवांस है और चीजों को इतनी जल्दी से ग्रैब करता है. माइक्रोसॉफ्ट में हमारे दृष्टिकोण से हम ये नहीं देखते हैं कि डिजिटल सिस्टम भारत में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए क्या कर रहे हैं, बल्कि यह दुनिया के लिए क्या कर सकते हैं... हम इसे ऐसे देखते हैं." Sabhar https://ndtv.in/india/ai-can-be-source-of-jobs-must-be-in-human-control-says-microsoft-president-brad-smith-to-ndtv-4329071/amp/1

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Mann Ki Baat Live Updates: 'संकल्प के सूरज चांद पर भी उगते हैं', पीएम मोदी बोले- भारत संभावनाओं का देश

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Mann Ki Baat Live 104th Episode, PM Modi News in Hindi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 'मन की बात' कार्यक्रम के जरिये देशवासियों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने चंद्रयान मिशन की तारीफ की और कहा कि इस उपलब्धि के बारे में जितनी बात की जाए कम है। 

लाइव अपडेट

11:50 AM, 27-AUG-2023

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। इसे कई आधुनिक भाषाओं की जननी भी कहा जाता है। संस्कृत अपनी प्राचीनता के साथ-साथ अपनी वैज्ञानिकता और व्याकरण के लिए भी जानी जाती है। भारत का प्राचीन ज्ञान हजारों वर्षों तक संस्कृत भाषा में ही संरक्षित किया गया है। आज देश में संस्कृत को लेकर जागरुकता और गर्व बढ़ा है। साल 2020 में तीन संस्कृत डीम्ड यूनिवर्सिटीज को सेंट्रल यूनिवर्सिटीज बनाया गया। अलग-अलग शहरों में संस्कृत विश्वविद्यालयों के कई कॉलेज और संस्थान भी चल रहे हैं। आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में भी संस्कृत केंद्र प्रसिद्ध हो रहे हैं।'


11:36 AM, 27-AUG-2023

'इस बार 15 अगस्त के दौरान देश ने सबका प्रयास का सामर्थ्य देखा। सभी देशवासियों के प्रयास से हर घर तिरंगा अभियान को हर मन तिरंगा अभियान बना दिया। इस दौरान कई रिकॉर्ड बने। देशवासियों ने करोड़ों की संख्या में तिरंगे खरीदे। डेढ़ लाख पोस्ट ऑफिस के जरिए करीब डेढ़ करोड़ तिरंगे बेचे गए। इससे हमारे कामगारों, बुनकरों और खासकर महिलाओं की सैकड़ों करोड़ रुपये की आय हुई। तिरंगे के साथ सेल्फी पोस्ट करने में भी इस बार नया रिकॉर्ड बना। पिछले साल करीब 5 करोड़ देशवासियों ने तिरंगे के साथ सेल्फी पोस्ट की थी, इस बार यह आंकड़ा 10 करोड़ को भी पार कर गया।' 

11:30 AM, 27-AUG-2023

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'कुछ ही दिनों पहले चीन में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स हुए थे। इन खेलों में भारत का प्रदर्शन अभी तक का सबसे बेहतर रहा। हमारे खिलाड़ियों ने कुल 26 पदक जीते, जिनमें से 11 गोल्ड मेडल थे। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि 1959 से लेकर अब तक जितने भी वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स हुए हैं, उनमें जीते सभी मेडल्स को जोड़ भी दें तो ये संख्या 18 तक ही पहुंचती है।'


11:24 AM, 27-AUG-2023

'जनभागीदारी की हमारी इस कोशिश में एक ही नहीं बल्कि दो-दो विश्व रिकॉर्ड बन गए हैं। वाराणसी में हुई जी20 क्विज में 800 स्कूलों के सवा लाख छात्रों की भागीदारी एक नया विश्व रिकॉर्ड बन गया। वहीं लंबानी कारीगरों ने भी कमाल कर दिया। 450 कारीगरों ने करीब 1800 यूनिक पैचेज का आश्चर्यजनक कलेक्शन करके अपने हुनर और क्राफ्टसमैनशिप का परिचय दिया है।'


Sabhar amarujala.com

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ये पेट्री डिश क्या है? क्या भविष्य में बच्चे इन्हीं में पैदा होंगे

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ये पेट्री डिश क्या है? क्या भविष्य में बच्चे इन्हीं में पैदा होंगेहाल ही में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में डेवलेपमेंटल बॉयोलॉजिस्ट जर्निका गेट्ज और उनकी टीम ने एक ऐसी चीज खोजी है जिसमें सिंथेटिक मानव भ्रूण का शानदार विकास हुआ है. 

तकनीक इतनी तेजी से विकास कर रहा है कि आने वाले समय में इंसान मां की गर्भ से नहीं बल्कि मशीनों से बन कर निकलेंगे. हालांकि, इसके लिए अभी बहुत वक्त है. लेकिन आज हम जिस चीज की बात कर रहे हैं वो है पेट्री डिश. इसे लेकर कहा जा रहा है कि भविष्य में बच्चे इन्हीं में पैदा होंगे. चलिए आज आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि आखिर ये चीज है क्या और इससे इंसानों के जीवन पर कितना प्रभाव पड़ेगा.


पेट्री डिश क्या होती है?


पेट्री डिश दरअसल, वो ट्रे या प्लेट है जिसमें वैज्ञानिक कोशिकाओं को तैयार करते हैं. इसका उपयोग ज्यादातर जीव विज्ञानी ही करते हैं. सरल भाषा में कहें तो सबसे पहले इस डिश में कुछ बैक्टीरिया और कवक की छोटी छोटी कोशिकाएं डाली जाती हैं और फिर उनके डिजाइन और संवर्धन पर काम किया जाता है. पेट्री डिश शब्द का पहली बार इस्तेमाल जूलियस रिचर्ड पेट्री ने 1852 से 1921 के बीच किया था.  अब कहा जा रहा है कि इसी डिश में भविष्य में बच्चों को भी तैयार किया जाएगा.


क्या है ये चीज?


दरअसल, हाल ही में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में डेवलेपमेंटल बॉयोलॉजिस्ट जर्निका गेट्ज और उनकी टीम ने एक ऐसी चीज खोजी है जिसमें सिंथेटिक मानव भ्रूण का शानदार विकास हुआ है. वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने पहले ही अटेंप्ट में ह्यूमन स्टेम सेल के सबसे एडवांस स्तर का भ्रूण तैयार कर लिया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में वो इस खोज के जरिए इंसानों की ज्यादा मदद कर पाएंगी.


खासतौर से ब्लैक बॉक्स पीरियड के बारे में इससे काफी ज्यादा जानकारी मिलेगी. ब्लैक बॉक्स यानि भ्रूण के विकास का सबसे पहला स्टेज. अगर इंसान इसमें कामयाब हो गया तो ये बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा भगवान करते हैं. यानि इस चीज की जानकारी मिल जाएगी की गर्भ में किसी बच्चे का निर्माण होता कैसे है.


अपने हिसाब के बच्चे बना पाएगा इंसान?


अगर ये तकनीक सही में सौ फीसदी कामयाब हो गई तो इसकी मदद से इंसान जैसा चाहेगा उस तरह के इंसान का निर्माण कर लेगा. इसे लेकर एक तरफ जहां कुछ वैज्ञानिकों में खुशी है तो वहीं कई वैज्ञानिक ऐसे भी हैं जो ये मानते हैं कि इसका उपयोग गलत काम के लिए भी हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो ये मानवता को खत्म करने के बराबर होगा. Sabhar https://www.google.com/amp/s/www.abplive.com/gk/what-is-this-petri-dish-will-children-be-born-in-these-in-the-future-2464112/amp

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Study: इस वजह से खतरनाक होता जा रहा है डेंगू, भविष्य में गंभीर रोग-मृत्यु का जोखिम भी अधिक

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Study: इस वजह से खतरनाक होता जा रहा है डेंगू, भविष्य में गंभीर रोग-मृत्यु का जोखिम भी अधिक 

डेंगू के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। राजधानी दिल्ली में भी इन दिनों डेंगू के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि यहां डेंगू के टाइप-2 स्ट्रेन के मामले रिपोर्ट किए गए हैं जिसके कारण गंभीर रोग विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक हालिया अध्ययन में चेताया है कि समय के साथ डेंगू और भी खतरनाक होता जा रहा है, इसके कारण भविष्य में गंभीर रोगों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।


अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तापमान के कारण डेंगू वायरस अधिक खतरनाक होता जा रहा है। यानी कि अभी की तुलना में आने वाले वर्षों में डेंगू के कारण गंभीर रोग विकसित होने के मामले अधिक देखे जा सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पर्यावरण में हो रहा बदलाव कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने वाला माना जा रहा है, डेंगू का जोखिम भी उनमें से एक है।

उच्च तापमान और डेंगू का खतरा 


केरल स्थित राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (आरजीसीबी) के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। वैज्ञानिकों की टीम ने पशु मॉडल अध्ययन में पाया कि डेंगू अधिक गंभीर और जोखिम कारक हो सकता है। वातावरण में बढ़ता तापमान इसके खतरों को और भी बढ़ाता जा रहा है, इसके जोखिमों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।


एफएएसईबी जर्नल में हाल ही में प्रकाशित इस शोध में डेंगू की गंभीरता और इसके जोखिमों से बचाव के लिए प्रयासों पर जोर दिया गया है।

गंभीर हो सकते हैं डेंगू के मामले


आंकड़ों को मुताबिक हर साल 390 मिलियन (39 करोड़) से अधिक लोग डेंगू के शिकार हो रहे हैं। तापमान वृद्धि की स्थिति वायरस की विषाक्तता को प्रभावित करती हुई देखी जा रही है। यह पहला अध्ययन है जिसमें तापमान और डेंगू की गंभीरता को लेकर लोगों को सावधान किया गया है।


शोधकर्ताओं ने कहा, पर्यावरणीय तापमान में वृद्धि के मौसम में, रुक-रुक कर होने वाली बारिश से मच्छरों के प्रजनन में वृद्धि रिपोर्ट की जाती रही है। हमारा अध्ययन ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते दुष्प्रभावों और संक्रामक रोगों की गतिशीलता और इसके संभावित जोखिमों पर जोर देता है।


क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?


पहले के अध्ययनों में यह देखा गया था कि अपेक्षाकृत उच्च पर्यावरणीय तापमान मच्छरों में वायरस के इनक्यूबेशन पीरियड को कम कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप मानव संचरण में तेजी से वृद्धि हो सकती है। आरजीसीबी के निदेशक प्रोफेसर चंद्रभास नारायण बताया कि इस बार शोधकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि डेंगू कभी-कभी गंभीर क्यों हो जाता है?


दशकों के शोध के बाद भी, बार-बार होने वाली इस बीमारी को नियंत्रित करने या रोकने के लिए अभी भी कोई प्रभावी टीके या एंटीवायरल नहीं है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। sabhar Amar Ujala.com

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शिव शक्ति' और 'तिरंगा' से पहले चांद पर मौजूद है 'जवाहर पॉइंट', जानिए पूरी कहानी

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शिव शक्ति' और 'तिरंगा' से पहले चांद पर मौजूद है 'जवाहर पॉइंट', जानिए पूरी कहानी 

Chandrayaan Mission Site Name: यह एक वैज्ञानिक परंपरा है कि जिस जगह लैंडर उतरता है उसका नामकरण किया जाता है. चंद्रयान-3 की इम्पैक्ट साइट को 'शिव शक्ति' और चंद्रयान-2 की साइट को 'तिरंगा' नाम दिया गया है. इससे पहले मनमोहन सरकार में चंद्रयान-1 की इम्पैक्ट साइट को 'जवाहर पॉइंट' नाम दिया गया था, जिसे लेकर अब खूब चर्चा हो रही है.

चंद्रयान-3 के 'विक्रम लैंडर' ने चांद पर जिस जगह कदम रखा है उस पॉइंट को 'शिव शक्ति' नाम दिया गया है. इसके अलावा पीएम मोदी ने उस पॉइंट को 'तिरंगा' नाम दिया है जहां चंद्रयान-2 लैंडर क्रैश हुआ था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क मिशन कंट्रोल कॉम्प्लेक्स में वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए चांद पर दोनों पॉइंट के नाम की घोषणा की. इसके साथ ही पीएम मोदी ने हर साल 23 अगस्त को नेशनल स्पेस डे मनाने की घोषणा की है.

यह एक वैज्ञानिक परंपरा है कि जिस जगह लैंडर उतरता है उसका नामकरण किया जाता है. लेकिन चांद पर शिव शक्ति पॉइंट और तिरंगा पॉइंट से पचंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद से 'जवाहर पॉइंट' सोशल मीडिया पर ट्रैंड कर रहा है. बीजेपी के कई नेताओं और 'X' (पहले ट्विटर) यूजर्स चंद्रयान-1 मिशन की लैंडिंग साइट के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी. हले एक और पॉइंट है जिसका नाम 'जवाहर पॉइंट' है. 
चंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद से 'जवाहर पॉइंट' सोशल मीडिया पर ट्रैंड कर रहा है. बीजेपी के कई नेताओं और 'X' (पहले ट्विटर) यूजर्स चंद्रयान-1 मिशन की लैंडिंग साइट के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी. Sabhar aajtak.in

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क्‍या वाकई अजर, अमर, अविनाशी होती है आत्‍मा? क्‍या कहता है विज्ञान

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क्‍या वाकई अजर, अमर, अविनाशी होती है आत्‍मा? क्‍या कहता है विज्ञान 

Is human soul really immortal - धर्म कहता है कि आत्‍मा अजर, अमर, अविनाशी है. अलग-अलग धर्मों में इसे अलग तरीके से कहा गया है. विज्ञान व तकनीक की दुनिया में इस धारणा को बार-बार तर्कों की कसौटी पर भी परखा गया है. क्‍या विज्ञान इस धारणा को स्‍वीकार करता है? क्‍या वाकई इस धारणा में कोई दम है?

Is human soul really immortal - धर्म कहता है कि आत्‍मा अजर, अमर, अविनाशी है. अलग-अलग धर्मों में इसे अलग तरीके से कहा गया है. विज्ञान व तकनीक की दुनिया में इस धारणा को बार-बार तर्कों की कसौटी पर भी परखा गया है. क्‍या विज्ञान इस धारणा को स्‍वीकार करता है? क्‍या वाकई इस धारणा में कोई दम है?



दर्शन, धर्म और विज्ञान के लिए हमेशा से ये सवाल परेशान करता रहा है कि क्‍या आत्‍मा वाकई अमर होती है. 

दर्शन, धर्म और विज्ञान के लिए हमेशा से ये सवाल परेशान करता रहा है कि क्‍या आत्‍मा वाकई अमर होती है.

Human Soul and Science: दुनिया में सबसे ज्‍यादा पूछा जाने वाला सवाल है कि क्‍या मनुष्‍य के भौतिक शरीर के मरने के बाद भी आत्मा जीवित रहती है? दर्शन, विज्ञान और धर्म ने अलग-अलग तरह से इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की है. दुनियाभर में माने जाने वाले धर्मों ने इस सवाल का जवाब अपने-अपने तरीके से दिया है. किसी धर्म में कहा जाता है कि आत्‍मा शरीर को कपड़ों की तरह बदलती है. एक शरीर के मरने के बाद आत्‍मा नए शरीर के साथ फिर जन्‍म लेती है. किसी धर्म के मुताबिक, शरीर के मरने के बाद आत्‍मा परम सत्‍ता में विलीन हो जाती है और फिर जन्‍म नहीं लेती है. हम विज्ञान के अलग-अलग सिद्धांतों और अध्‍ययनों के आधार पर जानने की कोशिश करेंगे कि क्‍या वाकई आत्‍मा अमर है?

सबसे पहले यह समझते हैं कि आत्मा का मतलब क्या है? आत्मा शब्द लैटिन एनिमा से आया है, जो ग्रीक एनीमोस से जुड़ा हुआ है, जिसका अर्थ सांस या हवा है. वहीं, सनातन परंपरा में हजारों साल पुराने वेदों, उपनिषदों और पुराणों में भी आत्‍मा का जिक्र किया गया है. भारतीय दर्शन में माना जाता है कि आत्‍मा अजर, अमर, अविनाशी है. कई आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं में आत्मा व्यक्तित्व का सार, आत्मा या मैं है. हालांकि, हाल के दिनों में आत्मा को मन या चेतना की तरह सोच-विचार का हिस्सा माना जाता है, जो विज्ञान की अलग-अलग शाखाओं के सबसे महान रहस्यों में एक है.

क्‍या है ऑर्केस्ट्रेटेड ऑब्जेक्टिव रिडक्शन

कुछ साल पहले एक भौतिक विज्ञानी के सहयोग से एक नया सिद्धांत विकसित किया गया, जिसमें शरीर के मरने के बाद आत्‍मा के अस्तित्‍व पर रोशनी डाली गई. इस सिद्धांत को ऑर्केस्ट्रेटेड ऑब्जेक्टिव रिडक्शन (ऑर्क-ओआर) कहा गया है. इसे 1990 के दशक में भौतिकविद रोजर पेनरोज और स्टुअर्ट हैमरॉफ ने विकसित किया था. शोध के मुताबिक, चेतना न्यूरॉन्स के बीच कम्‍युनिकेशन के बजाय उनके भीतर पैदा होती है. बता दें कि रोजर पेनरोज प्रतिष्ठित गणितज्ञ, भौतिक विज्ञानी और ब्रह्मांड विज्ञानी हैं. उन्‍हें भौतिकी में 2020 का नोबेल पुरस्कार दिया गया था. पेनरोज को ब्लैक होल पर उनके काम के लिए विज्ञान के सर्वोच्च सम्मानों में एक मिला है. उन्‍होंने खोज की थी कि ब्लैक होल का निर्माण आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत का नतीजा है.

आर्क-ओआर पर चल रहीं परियोजनाएं

रोजर पेनरोज ने कैंब्रिज में एक अन्य महान भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग के साथ लंबे समय तक काम किया था. पेनरोज ने हॉकिंग के साथ ब्लैक होल और गुरुत्वाकर्षण विलक्षणता के बारे में कुछ सिद्धांत विकसित किए थे. वैज्ञानिक स्‍टुअर्ट हैमरॉफ स्टुटिन एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और अमेरिका में एरिजोना यूनिवर्सिटी में लेक्‍चरर हैं. वह इस सिद्धंत के लेखकों में एक हैं कि आत्‍मा क्‍या है और क्‍या ये अमर है? बता दें कि ‘ऑर्क-ओआर’ अभी केवल एक सिद्धांत है. लेकिन, माना गया कि इस सिद्धांत पर परीक्षण किया जा सकता है. लिहाजा, इसके परीक्षण और सत्यापन के लिए परियोजनाएं चल रही हैं.

एल्‍गोरिदम से काबू नहीं हो सकता दिमाग

पेनरोज और हैमरॉफ के ‘ऑर्क-ओआर’ सिद्धांत के पीछे का विचार है कि मस्तिष्क को एल्गोरिदम से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है. इसका मतलब है कि मस्तिष्क के भौतिक गुण पारंपरिक गणितीय औपचारिकताओं से निर्धारित नहीं होते हैं, बल्कि क्‍वांटम मेकेनिक्‍स के दिलचस्प सिद्धांतों ये इनकी व्‍याख्‍या की जा सकती है. सिद्धांत के दोनों लेखकों में हैमरॉफ ने चेतना के जैविक घटक का अध्ययन किया है. उनके मुताबिक, चेतना की मुख्य संरचना मस्तिष्क में माइक्रोट्यूबल सेल्‍स हैं. वहीं, भौतिक विज्ञानी पेनरोज ने आत्‍मा के अमर होने के सवाल का जवाब तलाशने के लिए क्‍वांटम अप्रोच को अपनाया है.

चेतना कहां पैदा करती है कंपन

‘ऑर्क-ओआर’ सिद्धांत के मुताबिक, चेतना सब-एटॉमिक पार्टिकल्‍स के यूनिवर्स में कंपन करने वाली एक तरंग है. वहीं, दिमाग की माइक्रोट्यूबल सेल्‍स वास्तविक क्‍वांटम कंप्यूटर के तौर पर काम करती हैं, जो इन कंपनों को इस्‍तेमाल किए जाने लायक जानकारी में तब्‍दील करती हैं. बता दें कि क्‍वांटम कंप्यूटर सामान्य कंप्यूटर से अलग तरीके से काम करता है. सामान्‍य कंप्यूटर जानकारी को बिट्स यानी ज़ीरो या वन के रूप में प्रॉसेस करता है, जबकि क्‍वांटम कंप्यूटर क्यूबिट्स को प्रॉसेस करता है, जो एक ही समय में शून्य और एक दोनों हो सकता है. इससे क्‍वांटम सुपरपोजिशन बनती है, जो हमारे क्‍लासिकल मेकेनिकल माइंड्स के लिए समझने में दिक्‍कतें पैदा करता है.

क्‍या है कई दुनिया का सिद्धांत

सैद्धांतिक भौतिकविद एवरेट के कई दुनियाओं के सिद्धांत के मुताबिक, जब कोई सेब या नाशपाती में से एक चीज खाने का फैसला करता है, तो सेब खाने का फैसला नाशपाती को अलग कर देता है. लेकिन, इसी फैसले के साथ नाशपाती दूसरी दुनिया में अलग से अस्तित्व में रहती है. दूसरी ओर, ‘ऑर्क-ओआर’ सिद्धांत कहता है कि नाशपाती खाने के विकल्प को चुना ही नहीं गया है. लिहाजा, नाशपाती अलग हो जाती है. लेकिन, यह एक अस्थिर स्थिति है. इसलिए कुछ समय बाद इसमें बदलाव आ जाता है.

कई दुनिया, लेकिन सिर्फ एक में चेतना

एवरेट के सिद्धांत के समर्थकों के मुता‍बिक, कई दूसरी दुनिया हैं, लेकिन केवल एक में चेतना है. वहीं, पेनरोज और हैमरॉफ के मुताबिक, हम ही एकमात्र वास्तविकता हैं, क्योंकि वैकल्पिक वास्तविकताओं का अस्तित्‍व अस्थिर होने के कारण खत्‍म हो जाता है. इस क्‍वांटम सोच को फिर मस्तिष्क में स्थानांतरित कर दिया जाता है, जहां चेतना को पहले सामान्य कंप्यूटर की तरह काम करने वाले न्यूरॉन्स के बीच कनेक्शन की एक श्रृंखला के रूप में माना जाता था. हैमरॉफ के मुताबिक, जब आप मस्तिष्क कोशिकाओं न्‍यूरॉन के बारे में सोचते हैं तो यह सोचना न्यूरॉन का अपमान है कि ये बंद या चालू हो जाते हैं.  Sabhar News18 India

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शुक्रवार, 25 अगस्त 2023

VIDEO: विक्रम लैंडर ने ली पहली सेल्फी, कुछ ऐसे चांद की सतह पर उतरा था प्रज्ञान रोवर

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VIDEO: विक्रम लैंडर ने ली पहली सेल्फी, कुछ ऐसे चांद की सतह पर उतरा था प्रज्ञान रोवर 

Chandrayaan-3 Updates: चंद्रयान-3 ने बुधवार शाम 6.04 बजे चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की, जिसके बाद भारत चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने वाला चौथा देश बन गया

.खास बातें

लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रेवर की चंद्रमा की सतह से पहली सेल्फी

चंद्रयान-3 ने बुधवार शाम 6.04 बजे चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की

भारत चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने वाला चौथा देश बना

नई दिल्ली: आखिरकार वह पल आ ही गया जिसका इंतजार एक अरब भारतीय बेसब्री से कर रहे थे. दरअसल, इसरो (ISRO) ने लैंडर विक्रम (Lander Vikram) से प्रज्ञान रोवर (Pragyan Rover) के चांद की सतह पर उतरने का वीडियो जारी किया . जिसमें देखा जा सकता है कि रोवर रैंप के सहारे चांद पर गया. लैंडर और रोवर बिल्कुल ठीक हालत में हैं.

लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रेवर की चंद्रमा की सतह से पहली सेल्फी जारी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) ने भारत के लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रेवर की चंद्रमा की सतह से पहली सेल्फी शेयर की है. जब प्रज्ञान रोवर अपनी कछुआ की गति से चल रहा था, तब विक्रम लैंडर ने इसके रैंप की फोटो और एक वीडियो लिया है. इसरो ने एक ट्वीट में वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "... यहां बताया गया है कि चंद्रयान-3 रोवर लैंडर से चंद्रमा की सतह तक कैसे पहुंचा."

https://twitter.com/i/status/1694713817916473530

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सोमवार, 21 अगस्त 2023

चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर लैंडिंग कल:32000 सालों से कालगणना का पहला साधन है चंद्रमा, चीन-अरब ने भारत से सीखा लूनर कैलेंडर

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 चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर लैंडिंग कल:32000 सालों से कालगणना का पहला साधन है चंद्रमा, चीन-अरब ने भारत से सीखा लूनर कैलेंडर

23 अगस्त की शाम चंद्रयान-3 चांद पर उतरेगा। चंद्रमा हजारों सालों से दुनिया भर के कल्चर्स में जिंदगी का अहम हिस्सा रहा है। इंसान जब आदिमानव से सामाजिक प्राणी होने की राह पर था, तभी से चांद उसके लिए समय की गणना करने का साधन रहा है। ऋग्वेद और शतपथ ब्राह्मण ये दो ग्रंथ बताते हैं कि हजारों साल से चांद इंसानों के लिए कालगणना का साधन रहा है।

जब समय पता करने का कोई साधन नहीं था, तब चंद्रमा के घटने और बढ़ने की स्थितियों से ही दिन और महीनों का अनुमान लगाया जाता था। 15 दिन अमावस्या और 15 पूर्णिमा के ऐसे दो पक्षों को मिलाकर महीने का कैलकुलेशन किया गया जिसे चांद्रमास यानी चंद्रमा का महीना कहा जाता है।


आज भी भारतीय ज्योतिष में हिंदू कैलेंडर चांद्रमास से ही बनाया जाता है। सारे तीज-त्योहार इसी से तय होते हैं। नासा की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाषाण युग में फ्रांस और जर्मनी की गुफाओं में रहने वाले आदिमानवों ने 32000 साल पहले चंद्रमा की गति का अध्ययन करके पहला कैलेंडर बनाया था। भारत में इसका सबसे सटीक गणित है। चीन और अरब देशों ने भी चांद से कैलेंडर बनाना भारत से सीखा है।


सूर्य से गणना मुश्किल थी तो चांद को साधन बनाया


जर्मन स्कॉलर प्रो. मैक्समूलर ने अपनी किताब “इंडिया व्हाट कैन इट टीच अस” में लिखा है- भारत ज्योतिष, आकाश मंडल और नक्षत्रों के बारे में जानने के लिए किसी दूसरे देश का ऋणी नहीं है, ये उसने खुद ईजाद किया है।


उन्होंने लिखा है कि चंद्रमा ही कालगणना का पहला साधन था। सूर्योदय के बाद नक्षत्रों और तारों को देख पाना या उनके बारे में अनुमान लगा पाना मुश्किल था। भारतीय विद्वानों ने चंद्रमा के आधार पर ही दिन, पक्ष, मास और साल की गणना की। चंद्रमा की विभिन्न कलाओं को देखते हुए आकाश को 27 नक्षत्रों में बांटा। मूल ज्योतिष का तत्व भारत से ही हजारों साल पहले उपजा है।


भारत से ही कालगणना चीन और अरब पहुंची


भारत के अलावा चीन और अरब देशों में भी कालगणना का पहला साधन चंद्रमा ही था। हिजरी संवत कैलेंडर में भी चांद से ही महीनों की गणना हुई है। अमूमन अरब देशों में सैकड़ों साल पहले दिन की बजाय चांद रातों की संख्या से ही समय तय किया जाता था। मुगल काल में भी कई कामों के लिए चांद रातों का जिक्र मिलता है। ये चंद्रमा और नक्षत्रों की गणना भारत से ही चीन और अरब देशों में पहुंची।


प्रो. कोलब्रुक और बेवर ने अपनी किताब ‘लेटर्स ऑन इंडिया’ में लिखा है कि भारत को ही सबसे पहले चंद्रमा और नक्षत्रों का ज्ञान था। चीन और अरब देशों के ज्योतिष का विकास भारत की ही देन है। उनकी कालगणना की चांद्र विधि भारत से ही प्रेरित है।

वेद और पुराणों में चंद्रमा


वैदिक काल से अब तक चंद्रमा की पूजा ग्रह और देवता, दोनों रूप में हो रही है। वहीं, ज्योतिर्विज्ञान में चंद्रमा को उपग्रह नहीं बल्कि ग्रह कहा गया है। धरती के काफी नजदीक होने से सूर्य के बाद चंद्रमा दूसरा ग्रह है, जो पृथ्वी पर रहने वाले हर इंसान को प्रभावित करता है। चंद्रमा के कारण ही धरती पर पानी और औषधियां हैं। जिससे इंसान लंबी उम्र जी पाता है। वेदों से लेकर पुराणों और ज्योतिष ग्रंथों में भी चंद्रमा को खास बताया गया है।


वेदों में चंद्रमा की गति, चमक और उसकी परिक्रमा के रास्ते के बारे में जानकारी दी गई है। वहीं, पुराणों में बताया गया है कि चंद्रमा की उत्पत्ति कैसे हुई।


चंद्रमा से कालचक्र का निर्धारण


ऋग्वेद के पहले मंडल के 84वें सूक्त मंत्र में बताया गया है कि चंद्रमा स्वत: प्रकाशमान नहीं है इस सिद्धांत की पुष्टि मंत्र में है। इसी के 105वें सूक्त में कहा है कि चंद्रमा आकाश में गतिशील है और नित्य गति करता रहता है।


एतरेय ब्राह्मण ग्रंथ के मुताबिक वैदिक काल में तिथियां चंद्रमा के उदय और अस्त होने से तय होती थी। चंद्रमा ही तिथियों के साथ महीने को शुक्ल और कृष्ण पक्ष में बांटता है। इस बारे में तैत्तरीय ब्राह्मण में बताया गया है कि चंद्रमा का एक नाम पंचदश भी है। जो 15 दिनों में क्षीण हो जाता है और 15 दिनों में पूर्ण हो जाता है।


इसके बाद ऋतुओं की बात करें तो अथर्ववेद के 14वें कांड के पहले सूक्त में कहा गया है कि चंद्रमा से ही ऋतुएं बनती हैं। वेदों में बताया गया है कि चंद्रमा के कारण ही ऋतुएं बदलती हैं। वहीं चंद्रमा के प्रभाव से ही 13 महीने हो जाते हैं, जिसे अधिकमास कहते हैं। इस बात का जिक्र वाजस्नेयी संहिता में किया गया है।


शतपथ ब्राह्मण में कहा गया है कि पृथ्वी पर उगने वाली औषधियों और वनस्पतियों में रस चंद्रमा से ही आता है। जो सोम रस देवता पीते हैं, उस बारे में ऋग्वेद में कहा गया है कि सोम नाम की लता चंद्रमा से ही रस बनाती है। चंद्र मंडल से देवताओं तक सोम का भाग पहुंचता है। चंद्रमा से ही देवगण सोमपान करते हैं।

चंद्रमा का रथ, गति और रूप


लिंग पुराण में चंद्रमा के रथ के बारे में कहा गया है कि चंद्रमा अपने रास्ते में मौजूद नक्षत्रों की परिक्रमा करता है। उसका रथ तीन पहियों का है। रथ के दोनों ओर सफेद रंग के सुन्दर और ताकतवर मन के समान तेजी से दौड़ने वाले दस घोडे़ जुते हुए हैं। चंद्रमा पितरों और देवताओं के साथ यात्रा कर रहा है।


मत्स्य पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने ऋषियों के कहने पर चंद्रमा को उत्तर दिशा का लोकपाल बना दिया है। चंद्रमा देवताओं में गंधर्वों का, मनुष्यों में ब्राह्मणों का, पशुओं में शश, औषधियों में लताओं और धर्म में तप-यज्ञ का अधिष्ठाता है।


एक्सपर्ट्स और रेफरेंस


डॉ. गणेश मिश्रा, ज्योतिषाचार्य, पुरी (उड़ीसा)

भारतीय ज्योतिष, नेमीचंद शास्त्री sabhar bhaskar.com 


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रविवार, 20 अगस्त 2023

Chandrayaan-3: चांद से महज 25 किलोमीटर दूर लैंडर विक्रम, जानें लैंडिंग के लिए किस बात का है इंतजार

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 चंद्रयान 3 मिशन ने सफलतापूर्वक अंतिम डीबूस्टिंग चरण पूरा कर लिया है। जिसके बाद चंद्रयान-3 की चांद की सतह से दूरी महज 25 किलोमीटर रह गई है। इसरो ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। इसरो ने बताया कि अब लैंडर मॉड्यूल की आंतरिक जांच की जाएगी और चांद पर उतरने की तय साइट पर अब बस सूरज के निकलने का इंतजार किया जा रहा है। इसरो ने बताया कि लैंडर मॉड्यूल 23 अगस्त 2023 को शाम करीब 5.45 बजे चांद की सतह पर उतर सकता है। सूरज निकलने का क्यों हो रहा इंतजार

चांद पर एक दिन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है। अभी चांद पर रात है और 23 अगस्त को सूरज निकलेगा। यही वजह है कि दिन की रोशनी में ही लैंडर चांद की सतह पर उतरने की कोशिश करेगा ताकि रोवर बेहतर तरीके से वहां रिसर्च कर सके और बेहतर तस्वीरें भेज सके। भारत का चंद्रयान-3 मिशन चांद की सतह पर पानी की खोज करेगा, साथ ही चांद पर रसायनिक विश्लेषण भी करेगा। 
रूसी मिशन से है मुकाबला
चांद की सतह पर चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग के साथ ही इसरो इतिहास रच देगा। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा। चंद्रयान-3 के साथ ही रूस का लूना-25 स्पेसक्राफ्ट भी चांद की सतह पर उतरने की कोशिश करेगा। लूना-25 को 21 अगस्त को चांद की सतह पर लैंडिंग करनी है लेकिन फिलहाल रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने बताया है कि लूना-25 में कुछ तकनीकी खराबी आ गई है। ऐसे में लूना-25 को चांद की सतह पर उतरने में परेशानी हो सकती है। 

बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन का बजट करीब 615 करोड़ रुपये का है। इसरो चेयरमैन ने बताया कि चंद्रयान के लैंडर मॉड्यूल को चांद पर लैंड कराने में सबसे बड़ी चुनौती उसे लैंडिंग से पहले मोड़ना है। उन्होंने बताया कि जब लैंडर चांद की सतह पर लैंड करने के लिए उतरेगा तो वह क्षैतिज अवस्था में होगा लेकिन उसे लैंडिंग से पहले 90 डिग्री सेल्सियस पर मोड़कर लंबवत करना होगा। अगर यह सफलतापूर्वक हो गया लैंडर की चांद पर सफल लैंडिंग के चांस बढ़ जाएंगे। Chandrayaan-3 LIVE: चांद से महज 25 किलोमीटर दूर लैंडर विक्रम, बस सूरज निकलने का है इंतजार

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