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बुधवार, 18 जून 2014

एक जादुई हेलमेट, जो दिमाग पढकर तैयार करेगा रूटमैप

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वाशिंगटन। दिमाग पढने वाला हेलमेट! सुनने में भले ही अटपटा लगे, लेकिन ये सच है। ब्रुकलिन के स्टार्टअप ड्यूकॉर्प ने इस जादुई हेलमेट को तैयार किया है। यह हेलमेट बाइक से सफर करने के दौरान आपके दिमाग का नक्शा तैयार करेगा।
यह हेलमेट आपके दिमाग के सहारे तैयार इस रूटमैप पर हरे रंग में स्वीटस्पॉट्स और लाल रंग में हॉटस्पॉट्स भी दिखाएगा। स्वीटस्पॉट वह जगह होगी जहां आपको सबसे ज्यादा रिलेक्स महसूस हुआ होगा, वहीं हॉटस्पॉट वह जगह होगी, जहां आपको सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत पडी होगी। हेलमेट को सबसे पहले कंपनी की प्रमुख खोजकर्ता अरलीन डुकाओ ने उस वक्त तैयार किया था, जब वे मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मीडिया लैब की छात्रा थीं।
कैसे करेगा काम :
इस हेलमेट में माथे पर लगने वाला सेंसर है, जिसमें ईईजी के प्रयोग से चालक के दिमाग की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है। इसके साथ एक ऐप के जरिए ब्लूटूथ से जु़डे स्मार्टफोन पर हेलमेट के ब्रेन कम्प्यूटर का डेटा भेजकर जीपीएस के माध्यम से नक्शा तैयार होता है। चालक चाहें तो हॉटस्पॉट की संख्या को कम करते हुए दूसरा नक्शा भी तैयार कर सकते हैं। या फिर इसके प्रयोग से सफर में पडने वाले हॉटस्पॉट की जानकारी लेकर उनसे निपटने की बेहतर तैयारी कर सकते हैं। sabhar :http://www.jagran.com/

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रविवार, 15 जून 2014

जब कम्प्यूटर से होगा इश्क

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love-with-computer

लिजी डियरडेन

2029 में आपका बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड न हो तो आप अपने ही कम्प्यूटर से इश्क लड़ा सकेंगे। आज से 15 साल बाद, कम्प्यूटर से फ्लर्ट करना यहां तक कि इश्क हो जाना भी संभव होगा। यह दावा है एक फ्यूचरिस्ट का। 'Her' नाम की एक अंग्रेजी फिल्म में एक आदमी एक इंटेलिजेंट कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ रिश्ते कायम करता है। गूगल के इंजिनियरिंग डायरेक्टर रे कुर्जवील का कहना है कि आने वाले कुछ सालों में ऐसी असली कहानियां भी बनेंगी। 

एनबीसी न्यूज की खबर के मुताबिक, पिछले हफ्ते न्यू यॉर्क की एक्सपोनेंशल फाइनैंस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि कुछ साल बाद इंसान टेक्नॉलजी से भावनात्मक संबंध बनाने में भी कामयाब हो सकेगा। उन्होंने कहा, 'मुझे जहां तक लगता है कम्प्यूटर्स ह्यूमन लेवल तक आ जाएंगे। 2029 तक तो वे इतने करीब होंगे कि हम उनके साथ रिश्ते भी बना सकेंगे।' 

'Her' की तारीफ करते हुए कुर्जवील ने दावा किया कि यह आने वाले कल की सटीक तस्वीर है। उन्होंने कहा, 'ह्यूमन लेवल से मेरा मतलब इमोशनल इंटेलिजेंस से है। मसलन, जोक सुनाना, मजेदार बातें करना, रोमांटिक होना, प्यार औऱ केयर करना, सेक्सी होना, ये सब ह्यूमन इंटेलिजेंस की निशानियां हैं। यह सब होगा।' 

कुर्जवील ने इससे पहले भी चेतावनी दी थी कि 2029 में कम्प्यूटर इन्सान से भी आगे निकल जाएंगे। टेक्नॉलजी कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, इसे साबित करने के लिए उन्होंने वॉइस रेकग्निशन सॉफ्टवेयर और गूगल की सेल्फ-ड्राइविंग कारों का उदाहरण दिया था। 

एक्सपोनेंशल फाइनैंस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक और संभावना जताई। उनके मुताबिक 'प्रोग्रामिंग' जीन आने वाले वक्त में कैंसर, दूसरी बीमारियों और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोक सकेंगे। कपड़ों पर पर्सनलाइज्ड 3डी प्रिंटिंग की भी भविष्यवाणी उन्होंने की। 

66 वर्षीय कुर्जवील ने 1990 में भविष्यवाणी की थी कि 1998 तक एक कम्प्यूटर चेस गेम में इंसान को हराने के काबिल हो जाएगा। 1997 में आईबीएम के डीप ब्लू ने गैरी कैस्परोव को हराकर इसे साबित कर दिखाया। 

हालांकि, हाल ही में ट्यूरिंग टेस्ट पास करने वाले रूसी प्रोग्राम यूजीन गूस्टमन के बारे में उनका मानना है कि वह काफी 'सीमित' क्षमताओं वाला प्रोग्राम है।sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

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8 सबसे विचित्र मानसिक बीमारियां, इंसान खुद को मानने लगता है राक्षस

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8 सबसे विचित्र मानसिक बीमारियां, इंसान खुद को मानने लगता है राक्षस

मानसिक बीमारियों से इंसान की जिंदगी  बुरी तरह प्रभावित होती है। कई मामलों में यह बर्बाद हो जाती है। कुछ मेंटल इलनेस इतनी विचित्र होती हैं कि इन्हें समझना मुश्किल होता है। तेजी से बढ़ती मानसिक बीमारियांं पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कोई  Mentle Illness कभी भी भयावह हो सकती है। इनके डरावने लक्षणों से प्रेरित होकर हॉलीवुड और बॉलीवुड में कई फिल्में तक बनाई जा चुकी हैं। एक मानसिक बीमारी ऐसी है कि व्यक्ति खुद को राक्षस मानने लगता है। 
 
 
भारत में हर पांच व्यक्ति में से एक व्यक्ति मानसिक बीमारी से ग्रसित है। देश में ऐसी बीमारियों के इलाज के लिए केवल 5,000 मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत के बजट में मेंटल हेल्थ के लिए महज 1 फीसदी राशि की व्यवस्था है, जबकि दूसरे देशों में 10%, 12% और 18 फीसदी तक है। एक अनुमान के अनुसार, पूरे विश्व में 450 मिलियन लोग मानसिक बीमारियों से पीड़ित हैं। ये बीमारियां बेहद अजीब होती है और व्यक्ति का व्यवहार विचित्र हो जाता है। आप यहां कुछ ऐसी मानसिक बीमारियों के बारे में जान सकते हैं।
1- वेंडिगो साइकोसिस (Wendigo Psychosis): वेंडिगो नाम की मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को मानव-मांस खाने इच्छा होती है। यह बीमारी अधिकतर उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी इंडियंस में पाई जाती है। इस पर कई फिल्में बनाई जा चुकी हैं। कुछ लोगों का दावा है कि यह बीमारी कल्चर पर आधारित होती है। इसका मतलब यह है कि एक निश्चित संस्कृति में जन्में लोग वेंडिगो सिंड्रोम से पीड़ित होते हैं। हालांकि, यह बीमारी बहुत कम लोगों को होती है।
2- एलिस इन वंडरलैंड सिंड्रोम (Alice In Wonderland Syndrome): मरीज को भयंकर माइग्रेन होता है और उसके मन में दुनिया को लेकर कई तरह की भ्रांतियां पैदा हो जाती हैं। एलिस इन वंडरलैंड सिंड्रोम से ग्रसित इंसान को आवाजें धीमी या तेज सुनाई देती हैं। चीजों का वास्तविक आकार भी छोटा या बड़ा दिखाई देता है। इसके बहुत से लक्षण एलएसडी के नशे की स्थिति से मिलते-जुलते हैं। इस बीमारी का प्रभाव केवल 20 साल की उम्र के युवकों पर ही दिखाई देता है।
3- एलियन हैंड सिंड्रोम (Alien Hand Syndrome): इससे पीड़ित व्यक्ति को लगता है कि उसकी श्वांस रुक गई है, कपड़े फट गए हैं और वह रक्तरंजित हो गया है। जब कोई व्यक्ति AHS से ग्रसित होता है, तो उसे लगता है कि घुटनों पर कोई नियंत्रण नहीं रहा। उसे लगता है कि वह अपने आप ही चल रहा है। यदि उसकी बॉडी फ्री कर दी जाए, तो वह कुछ भी कर सकता है। एलियन हैंड सिंड्रोम की मेडिकल रिपोर्ट् बहुत कम सामने आती हैं। दुर्भाग्य से यदि यह बीमारी हो गई, तो इसका कोई इलाज नहीं है, सिर्फ हाथों को व्यस्त रखना ही उपाय है।

4- क्लुवेर- बुसी सिंड्रोम(Kluver-Bucy Syndrome): मानसिक बीमारियों में से एक क्लुवेर- बुसी सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति के व्यवहार में कुछ बेहद बुरे बदलाव देखने को मिलते हैं। पीड़ित व्यक्ति याददाश्त खो बैठता है। वह गैर खाद्य वस्तुएं खाने लगता है उसका तीव्र झुकाव और सेक्स की ओर होता है। वह किसी अमानवीय वस्तु के साथ ऐसी हरकत करने लगता है। इन तीन लक्षणों से बीमारी की पहचान की जाती है। शुरुआती इलाज से इस पर नियंत्रण संभव है, लेकिन स्थिति खराब होने पर कोई इलाज कारगर नहीं है

5- कोटार्ड डिलूशन (Cotard Delusion) : इस बीमारी को “Walking Corpse Syndrome” कहा जाता है। पीड़ित व्यक्ति को लगता है कि वह मर चुका है, लेकिन धरती पर लगातार चल रहा है। कोटार्ड समझना काफी कठिन रहा है। अभी हाल ही में मेडिकल विशेषज्ञों ने इस बीमारी की समस्या को सही ठहराया है। इसके बारे में 1880 में पहली बार बताया गया था, लेकिन इस बीमारी को औपचारिक मान्यता 2007 में दी गई। कोटार्ड से पीड़ित व्यक्ति अपने भ्रम की सच्चाई जानने के लिए कई बार आत्महत्या की कोशिश करता है।
6-फ्रेगोली डिलूशन: इस मानसिक बीमारी का नाम इटली के एक्टर लियापोल्डो फ्रेगोली पर रखा गया है, क्योंकि वह अपना कॉस्ट्यूम तेजी से बदल लेता था। दरअसल, फ्रेगोली सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति कई लोगों को देखकर भ्रमित होता है। उसे लगता है एक ही व्यक्ति ने अपने कपड़े कई बार बदल लिए हैं। फ्रेगोली से पीड़ित व्यक्ति की याददाश्त पर स्थान और घटनाओं के बदलने का बहुत असर पड़ता है। उसके लिए जीवन बिलकुल बदला हुआ नजर आता है। वह किसी भी चीज को तनावपूर्ण मुद्दा बना देता है।
7- कैपग्रास डिलूशन Capgras Delusion : आप ऐसे जीवन की कल्पना कीजिए, जहां आपको पता नहीं होता कि किस पर भरोसा करना है। कुछ ऐसी ही स्थिति कैपग्रास डिलूशन सिंड्रोम से ग्रसित व्यक्ति की होती है। उसे लगता है कि राक्षस, रोबोट या अन्य किसी खतरे ने उसे अपने दायरे में ले लिया है। वह जान का खतरा महसूस करता है। भ्रम की स्थिति आमतौर पर अन्य मानसिक बीमारियों जैसे- सिजोफ्रेनिया से बनती है, लेकिन यह सिर में चोट लगने से भी हो सकती है।
8 सबसे विचित्र मानसिक बीमारियां, इंसान खुद को मानने लगता है राक्षस

8- स्टॉकहोम सिंड्रोम(Stockholm Syndrome): यह तस्वीर करीब 40 साल पहले जान एरिक की है। इसमें ओस्लो में बैंक डकैती और बंधक की स्थिति सामने आई थी। स्टॉकहोम सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति को अपने बंधक बनाने वाले से सहानुभूति होती है। यह तब होता है, जब पीड़ित अपनी इच्छा के विरुद्ध स्थिति का सामना करता है। 

1974 में इस सिंड्रोम के कारण एक बेहद चर्चित घटना सामने आई थी। हार्ट्स मीडिया फैमिली की महिला पैटी हार्ट्स का अपहरण सिम्बोनीज लिबरेशन आर्मी ने कर लिया था। महिला ने घोषणा कर दी कि वह इस ग्रुप में शामिल हो गई है। बाद में पैटी ने कहा कि उसकी ब्रेनवाशिंग की गई और यौन उत्पीड़न किया गया था। sabhar : bhaskar.com


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शनिवार, 14 जून 2014

इस तरह परलोक गई आत्माओं से बात कर सकते हैं आप?

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और होने लगती हैं अनहोनी घटनाएं

और होने लगती हैं अनहोनी घटनाएं


आत्मा एक उर्जा की तरह होती है जो कभी नहीं नष्ट होती है। यह जिस शरीर में जाती है उस रूप रंग में ढल जाती है। जब तक यह शरीर से बाहर है एक उर्जा के रुप में ब्रह्माण्ड में कहीं मौजूद रहती है।

लेकिन शरीरधारी जीव और अशरीरी आत्मा के बीच संपर्क बनाना कठिन होता है क्योंकि दोनों का अपना अलग अस्तित्व और अपनी सीमाएं हैं। अगर आत्माएं जीवित लोगों की दुनिया में आ जाती हैं या जीवित व्यक्ति आत्माओं की दुनिया में झांकने का प्रयास करते हैं तो यह दोनों के लिए प्रकृति के नियम के विपरीत है।

लेकिन कभी कभी ऐसी स्थिति बन जाती है कि आत्माएं अपनी दुनिया से निकलकर जीवित लोगों की दुनिया में आ जाती है और अनहोनी घटनाएं होने लगती है।

आत्माओं से बात करने का तरीका

आत्माओं से बात करने का तरीका

ऐसे दावे किए जाते हैं कि इंसानों ने कुछ ऐसे माध्यम और तरीके खोज निकाले हैं जिनसे आत्माओं की दुनिया से संपर्क किया जा सकता है और आत्माओं से बात की जा सकती है।

यहां ऐसे ही कुछ माध्यमों की चर्चा की जा रही है जिनके विषय में कहा जाता है कि इससे मनुष्य आत्माओं से संपर्क बनाने में सफल होता हैं।

तीन पैर के टेबल से भूत बुलाने की विधि

इस विधि में एक तिपाए टेबल का इस्तेमाल किया जाता है तो हल्का और गोल होता है। एक पाए के नीचे लकड़ी का एक गुटका रखा जाता है। इसके बाद टेबल को चारों तरफ से घेर कर लोग बैठ जाते हैं। इसके बाद जिस व्यक्ति की आत्मा को बुलाना होता है उनका सभी मिलकर ध्यान करते हैं।

माना जाता है कि जब अपने आप टेबल के पाए खटखटाने लगे तो इसका मतलब है कि आत्मा का आगमन हो चुका है। इसके बाद उनसे प्रश्न किया जाता है और संकेतिक तौर पर टेबल की खटखट से हर प्रश्न मिलने लगता है।
प्लेनचिट से होती है भूतों से बातें

प्लेनचिट से होती है भूतों से बातें

भूतों से बात करने का एक जरिया है प्लेनचिट। यह एक दिल के आकार का दिखने वाला लकड़ी का टुकड़ा होता है। इसमें पीछे की ओर सभी ओर घूमने वाले पहिये लगे होते हैं। इसकी नोक की तरफ एक छेद होता है जिसमें एक पेंसिल लगा दी जाती है।

मेज पर एक सादा कागज रखकर उसके ऊपर इस यंत्र को रखा जाता है। इसके बाद जिस आत्मा को बुलाना होता है उसका एकाग्रता पूर्वक ध्यान किया जाता है।

जैसे ही आत्मा आ जाती है यंत्र अपने आप चलने लगता है। आमतौर पर इस यंत्र से अतृप्त आत्माओं को बुलाया जाता है। यंत्र में लगे पेंसिल से आत्मा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देती है।

आत्मा शरीर में प्रवेश करके बात करती है

आत्माओं से संपर्क करने का एक माध्यम यह भी है कि इसमें किसी व्यक्ति को माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें आत्मा का आवाहन किया जाता है और आत्मा माध्यम के शरीर में प्रवेश करके संवाद करती है।

इसके अलावा एक और विधि है जिसमें प्रयोगकर्ता खुद माध्यम बन जाता है। आवाहन करने पर आत्मा आती है और प्रयोगकर्ता के हाथ में रखी पेंसिल खुद ही कागज पर चलनी शुरु होती है और प्रश्नों के उत्तर देती है।

भूतों को बुलाने से पहले यह जरुर जान लें

भूतों को बलाने के जितने भी माध्यम हैं। उनके विषय में यह माना जाता है कि इनसे भूत तो जाते हैं लेकिन जाने में कई बार आनाकानी करने लगते हैं।

इसलिए भूतों को बुलाने से पहले इसके जोखिम का भी ध्यान रखें। दूसरी बात यह ध्यान रखें कि अपने पूरे प्रयोग के दौरान अपने अंदर साहस और आत्मविश्वास बनाए रखें। घबराने या डर जाने पर प्रयोगकर्ता का व्यक्तिगत नुकसान हो सकता है। sabhar :http://www.amarujala.com/


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शुक्रवार, 13 जून 2014

ग़रीबी के चलते यहां बुढ़ापे में जिस्म बेचती हैं औरतें

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उत्सुकता

ऐसा क्यों होता है यहां


किम यून-जो सियोल के जोंगनो-3 सबवे स्टेशन की सीढ़ियों पर बैठी हैं। उनकी उम्र 71 साल है और वो चमकीली लिपस्टिक लगाए हैं और चमकीला लाल कोट पहने हुए हैं।

उनके बड़े बैग से कांच की बोतलों के आपस में टकराने की आवाज़ आ रही है।

किम दक्षिण कोरिया की "बैकस लेडीज़" में एक हैं यानी ऐसी वृद्ध महिला जो पुरुष ग्राहकों को लोकप्रिय बैकस (एक तरह की शराब) एनर्जी ड्रिंक बेचकर अपनी ज़िंदगी चलाती है।

लेकिन अकसर वो सिर्फ़ इन बोतलों को ही नहीं बेचती हैं। एक ऐसी उम्र में जब कोरियाई दादियों को कुल माता के रूप में सम्मानित किया जाना चाहिए, उनमें से कुछ को अपना जिस्म बेचना पड़ रहा है।

उसने मुझसे कहा, "आप वहां खड़ी बैकस महिलाओं को देख रहे हैं? ये महिलाएं बैकस के अलावा भी कुछ बेचती हैं। वो कभी-कभी दादा की उम्र के लोगों के साथ जाती हैं और उनसे पैसे कमाती हैं। लेकिन मैं उस तरह नहीं रहती।"

उन्होंने बताया, "जब मैं गली में खड़ी रहती हूं तो पुरुष प्रस्ताव देते हैं, लेकिन मैं हमेशा कहती हूं, 'नहीं'।"

उत्सुकता

किम कहती हैं कि वो ड्रिंक बेचकर हर दिन क़रीब 5000 वॉन या क़रीब 300 रुपए कमा लेती हैं। वो कहती हैं, "पुलिस हमेशा मुझ पर नज़र रखती है। वो अंतर नहीं कर पाते हैं।"

इस छिपे हुए सेक्स कारोबार का केंद्र राजधानी सियोल के बीचोंबीच स्थित एक पार्क है। जोंगमयो पार्क ही वो जगह है जहां जीवन के ढलान पर पहुंच चुकी ये महिलाएं आती हैं।

पार्क के किनारों पर खड़ी 50 वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक की ये महिलाएं पुरुषों को ड्रिंक की पेशकश कर रही हैं। ये उनका पहला क़दम है जो आख़िरकार उन्हें पास के एक सस्ते मोटल तक ले जाएगा।

पार्क में मौजूद पुरुष इन महिलाओं के मुक़ाबले मुझसे बात करने के अधिक इच्छुक हैं।

दादा की उम्र के लोगों का एक दल कोरियाई शतरंज के खेल को ध्यान से देख रहा है। उन्होंने बताया कि क़रीब आधे पुरुष बैकस महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं।

साठ साल के किम बताते हैं, "हम पुरुष हैं, इसलिए महिलाओं के प्रति हमें उत्सुकता है।"

वो बताते हैं, "हम एक ड्रिंक लेते हैं और थोड़ा धन उनके हाथों में रख देते हैं, और काम हो जाता है। पुरुष महिलाओं का साथ पसंद करते हैं- चाहें वो बूढ़ी हों या नहीं, यौन रूप से सक्रिय हों या नहीं। ये सीधा सा पुरुष मनोविज्ञान है।"

बुज़ुर्ग गर्लफ्रैंड

एक अन्य 81 वर्षीय पुरुष ने बताया कि "वहां खड़ी महिलाओं में हम गर्लफ़्रेंड तलाश सकते हैं। वो हमसे अपने साथ खेलने के लिए कहेंगी। वो कहेंगी, "ओह! मेरे पास पैसा नहीं है। और फिर वो हमारे साथ चिपक जाएंगी।

उनके साथ सेक्स करने का ख़र्च क़रीब 20000 से 30000 वॉन (क़रीब 1,100 से 1,700 रुपए) तक होता है, लेकिन अगर वो आपको जानती हैं तो कभी-कभी वो आपको छूट भी दे सकती हैं।"

दक्षिण कोरिया के ये बुज़ुर्ग देश की आर्थिक सफलता के शिकार हैं।

उन्होंने अपनी बचत को अगली पीढ़ी में निवेश कर दिया। एक कन्फ्यूशियस समाज में सफल बच्चों को भी पेंशन का सबसे बढ़िया रूप माना जाता है।

लेकिन यहां इस रुख़ में तेज़ी से बदलाव आया है और अब कई युवा लोग कहते हैं कि वो अपना ही ख़र्च नहीं उठा पा रहे हैं।

ऐसे में जोंगमयो पार्क में इन पुरुषों और महिलाओं के पास कोई बचत नहीं है, वास्तविक पेंशन नहीं है और परिवार नहीं है। वो अपने ही शहर में विदेशियों की तरह हैं।

किम कहते हैं, "जो अपने बच्चों पर निर्भर हैं वो मूर्ख हैं। हमारी पीढ़ी अपने माता-पिता के प्रति विनम्र थी। हम उनका सम्मान करते थे। आज की पीढ़ी अधिक शिक्षित और अनुभवी है, इसलिए वो हमारी नहीं सुनते हैं।"
मजबूरी

मजबूरी

बैकस महिलाओं पर शोध करने वाली डॉक्टर ली हो-सुन के मुताबिक़ ज़्यादातर बैकस महिलाओं ने वृद्धावस्था में ग़रीबी के चलते सेक्स का कारोबार शुरू किया।

वो बताती हैं कि एक महिला ने तो 68 साल की उम्र में वेश्यावृत्ति शुरू की। वो बताती हैं, "एक बैकस महिला ने मुझसे कहा कि मैं भूखी हूं, मुझे सम्मान की ज़रूरत नहीं है, मैं सिर्फ़ दिन में तीन वक़्त का खाना चाहती हूं।"

पुलिस यहां गश्त तो करती है, लेकिन कोई गिरफ़्तारी नहीं होती लेकिन समस्या सिर्फ़ क़ानून को लागू करने की नहीं है।

बैकस महिलाएं अपने बैग में छिपी हुई बीमारी को लेकर भी चल रही है। इन महिलाओं के पास यौन उत्तेजना के लिए विशेष इंजेक्शन होता है और 10 से लेकर 20 बार एक ही इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में कई तरह की बीमारियां भी फैल रही हैं।

इस तरह दक्षिण कोरिया के हाई-टेक समाज में बुज़ुर्गों के लिए खाना महंगा है, सेक्स सस्ता है और आत्मीयता तो उन्हें किसी भी क़ीमत पर मुश्किल से ही उपलब्ध है। sabhar :http://www.amarujala.com/

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धरती पर होगा मशीनों का राज, यहां कंप्यूटर ने खुद को साबित कर दिया इंसान!

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A compuer that convinced humans that it was a 13 year old boy


मास्को। वो समय जल्द ही आने वाला है जब धरती पर मशीनों का राज होगा और इंसान उनके गुलाम! इसी कड़ी में रूस के एक कम्प्यूटर ने अपने आपको इंसान साबित कर दिखाया जो इस वक्त पूरी दुनिया में चौंकाने वाला विषय बना हुआ है।

दरअसल रूस की एक कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग टीम ने एक ऎसा प्रोग्राम तैयार किया है जिसने इंसानों को यकीन दिला दिया कि वह कोई कम्प्यूटर प्रोग्राम नहीं, बल्कि 13 साल का लड़का है। इस प्रोग्राम ने इंसानों और कम्प्यूटर्स में फर्क करने वाले ट्यूरिंग टेस्ट दिखाया। इससें पहले ऎसा आज तक कोई और कम्प्यूटर नहीं कर सका था।

इसें बनाने वालों के मुताबिक इंसानों और कम्प्यूटर्स बीच का फर्क पहचानने के लिए किए जाने वाले टेस्ट को लैंडमार्क माना जाता है। लेकिन इस तकनीक को इस नए कम्प्यूटर प्रोग्राम फेल कर दिया। दूसरी और बुद्धिजीवियों को डर है कि अब इस तकनीक का इस्तेमाल साइबर की दुनिया में इस्तेमाल न होने लगे। 

हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक, कम्प्यूटिंग की दुनिया के बड़े जानकार माने जाने वाले ऎलन ट्यूरिंग का कहना है कि अगर कोई भी कम्प्यूटर इस टेस्ट को पास कर लेता है तो माना जा सकता है कि वह खुद की सोच रखता है। इसके लिए 5 मिनट की टेक्स्ट कन्वर्जेशन होती है जिसमें कोई कम्प्यूटर 30 फीसदी सवाल पूछने वाले इंसानों मात दे दे।

रूस की इस कम्प्यूटिंग टीम द्वारा बनाए गए इस यह कम्प्यूटर प्रोग्राम ने यूजीन गूस्टमन लंदन की रॉयल सोसायटी में यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के शिक्षाविदों द्वारा लिए गए टेस्ट में पास होकर दिखा दिया। इस प्रोग्राम ने 33 फीसदी जजों को यकीन दिला दिया कि यह कम्प्यूटर नहीं बल्कि इंसान है।

इसी के साथ ही माना जा रहा है कि यह दुनिया का पहला ऎसा कम्प्यूटर है जिसने यह टेस्ट पास किया है। यह कम्प्यूटर प्रोग्राम अपने आप को ओडेस्सा का एक 13 वर्षीय लड़का बताता है। इस प्रोग्राम को बनाने वाले ब्लादिमिर वेसेलोव कार क हना है कि "हमारी टीम का मानना था कि यह प्रोग्राम यह दावा करे कि यह सबकुछ जानता है, लेकिन इसकी उम्र ऎसी रखी गई है जिससे इस बात को भी बराबर वजन मिले कि इसे सबकुछ तो नहीं ही आता होगा। जिसके हमने एक ऎसा कै रेक्टर इजाद किया जिसके व्यक्तित्व पर यकीन हो सके।"

sabhar :patrika.com


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गुरुवार, 12 जून 2014

नाइजेला के साथ वक्त बिता रहे हैं सलमान रश्दी

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नाइजेला के साथ वक्त बिता रहे हैं सलमान रश्दी


लंदन( ब्रिटेन निवासी भारतीय लेखक सलमान रश्दी इस समय ब्रिटिश जर्नलिस्ट और फूड राइटर नाइजेला लॉसन के साथ वक्त बिता रहे हैं। हाल ही में दोनों सेंट्रल लंदन स्थित एक रेस्त्रां में देखे गए। दोनों ने करीब दो घंटे का समय साथ बिताया। 
 
रेस्टॉरेंट में मौजूद एक ग्राहक ने बताया कि लंबे समय बाद रश्दी को इस तरह नाइजेला के साथ देखकर सभी की निगाहें उन पर ठहर गईं। दोनों सेलेब्रिटी खुद को लोगों से छिपाने की कोशिश कर रहे थे। 66 वर्ष के रश्दी और 54 वर्ष की नाइजेला रेस्टॉरेंट में बेहद खुश और खूबसूरत नजर आ रहे थे।
 
दोनों की दोस्ती 20 साल पुरानी है। नाइजेला ने पिछले साल अपने 71 वर्षीय पति चार्लेस साची से तलाक होने के बाद रश्दी से अपनी नजदीकियां बढ़ा ली थीं। रश्दी का भी मॉडल पद्मा लक्ष्मी से 2008 में तलाक हो गया था।
नाइजेला के साथ वक्त बिता रहे हैं सलमान रश्दी

नाइजेला के साथ वक्त बिता रहे हैं सलमान रश्दी

नाइजेला के साथ वक्त बिता रहे हैं सलमान रश्दी

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मां बनने की नहीं होती कोई उम्र

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एक चीनी महिला ने 60 साल की उम्र में दोबारा मां बनकर दुनिया की सबसे वृद्ध मांओं की सूची में जगह बना ली है और दिखा दिया है कि मां बनने के लिए ममता की जरूरत होती, इसका उम्र से कोई लेना देना नहीं.



शेंग हाइलिन अपनी एकलौती बेटी को खोने के बाद फिर से मां बनना चाहती थीं. उनकी बेटी करीब 30 साल की होने वाली थी. तभी 2009 में जहरीली गैस की वजह से हुई एक दुर्घटना में उसने अपनी जान गवां दी. 60 साल की उम्र में इस अरमान को पूरा करने के लिए शेंग को आईवीएफ तकनीक की मदद लेनी पड़ी.
वह बताती हैं, "जीने के लिए और अपने अकेलेपन से छुटकारा पाने के लिए मैंने इस उम्र में एक और बच्चा पैदा करने की ठान ली." चीन के पूर्वी शहर हेफेई के एक सैनिक अस्पताल में 2010 में शेंग ने दो जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया.
एक बच्चे की नीति में बदलाव
शेंग का मामला एक और वजह से असाधारण है. चीन में लम्बे समय से एक बच्चे का नियम लागू है. चीन में परिवार नियोजन का यह कानून करीब 30 सालों से है. इस कानून को कई बार माता पिता की इच्छा के विरूद्ध भी बहुत सख्ती से मनवाया जाता है. गांव के किसी परिवार में अगर पहली संतान एक लड़की हो, अल्पसंख्यक समुदायवासी या फिर अगर माता पिता दोनों ही अपने अपने परिवारों की एकलौती संतान हों, तो उन्हें इस कानून में अपवाद बन कर एक से ज्यादा बच्चों की आज्ञा है.
भारत की रज्जो देवी बनीं थीं 69 साल की उम्र में मां
एक अनुमान के मुताबिक 1979 में चीन में इस कानून के आने के बाद से करीब दस लाख लोग अपने वंशज खो चुके हैं और अगले 20 से 30 सालों में इस फेहरिस्त में करीब 40 से 70 लाख लोग और शामिल हो जाएंगे. ऐसे परिवारों में बुजुर्गों की देखभाल और उनकी तबीयत खराब होने पर इलाज का खर्च उठाने के लिए भी कोई नहीं होता. साथ ही वे जीवन में अकेलेपन की समस्या से भी जूझते रहते हैं.
इन सब समस्याओं को ध्यान में रखते हुए चीन की प्रमुख कानूनी समिति 'एक बच्चे की नीति' वाले कानून में कुछ और अपवादों को मान्यता देने जा रही है. इस नए कानून के अंतर्गत वे दंपत्ति भी दो बच्चे पैदा कर सकेंगे जिनमें से कोई एक अपने माता पिता की एकलौती संतान हो.sabhar :http://www.dw.de/

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सोमवार, 9 जून 2014

सिर्फ 16 साल और सूख जाएगी पवित्र गंगा नदी?

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फिर कहां से आएगा गंगा में जल

फिर कहां से आएगा गंगा में जल


करीब ढाई हजार किलोमीटर लंबी गंगा नदी के बारे में संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पर भरोसा करें तो इसे सदानीरा बनाए रखने वाला हिमनद सिर्फ सोलह साल और किसी न किसी तरह जिंदा रहेगा।

उसके बाद यह पूरी तरह लुप्त हो जाएगा। आशय यह है कि गंगोत्री ही सूख जाएगी तो गंगा में वह पानी कहां से आएगा जिसे बड़े आदर के साथ नीर और जल कहा जाता है।

गंगा जल में अब वह बात नहीं

सीलिसबर्ग स्थित महर्षि वैदिक इंस्टीट्यूट की चिंता दूसरी तरह की है। इंस्टीट्यूट के कराए अध्ययन के मुताबिक गंगा नदी और उसके स्रोत गंगा ग्लेशियर को किसी तरह फिर भी बचा लिया जाए, और गंगा नदी बहती रहे। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि उसकी तीर्थवत्ता बनी रहे।

गंगा के पवित्र होने की बात शुरु से प्रचलित है। इसका वैज्ञानिक आधार सिद्ध हुए वर्षों बीत गए। उसके अनुसार नदी के जल में मौजूद बैक्टीरियोफेज नामक जीवाणु गंगाजल में मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते।

गंगाजल में प्राणवायु की प्रचुरता बनाए रखने की अदभुत क्षमता है। इस कारण पानी से हैजा और पेचिश जैसी बीमारियों का खतरा बहुत ही कम हो जाता है। लेकिन अब वह बात नहीं रही।

गंगा आखिर कैसे बन गई गंदाजल

गंगा में 2 करोड़ 90 लाख लीटर प्रदूषित कचरा प्रतिदिन गिर रहा है। गंगा-जल न पीने के योग्य रहा, न स्नान के योग्य। महर्षि इंस्टीट्यूट के निदेशक डा. अर्जुन गोड़दिया के अनुसार इस संकट का निवारण थोड़ी सी जागरूकता और इंतजामों से हो सकता है।

लेकिन जो विशेषताएं गंगा स्नान कर या उसके किनारे रह चुके लोगों को या वहां के वातावरण को जिस ऊर्जा से भर देती हैं, उन्हें लौटा लाने को कोई उपाय नहीं है।
गंगा किनारे तीर्थ और स्नान के नियम

गंगा किनारे तीर्थ और स्नान के नियम

कम से कम कुछेक वर्षों में तो कतई संभव नहीं है। उनके अनुसार किसी समय ढाई हजार किलोमीटर क्षेत्र में फैली गंगा के किनारे छोटे बड़े आठ सौ तीर्थ हुआ करते थे। इन तीर्थों में रहने, जाने और स्नान आदि करने का अनुशासन था।

अंपायर आफ द मुगल पुस्तक के प्रसिद्ध लेखक अलक्स रदरफोर्ड ने लिखा है कि करीब छह सौ साल के सल्तनत और मुगल काल के शासन में भी इन तीर्थों की आंतरिक संरचना और व्यवस्था में कोई खास छेड़छाड़ नहीं की गई।

लेकिन पिछले साठ वर्ष में बाजारवाद और आधुनिकता अभिमानी तंत्र ने तीर्थों की उस व्यवस्था को तहस नहस कर दिया। अब उस व्यवस्था का न जानकार हैं और न ही उसे ढूंढा व खोज सकने वाला तंत्र। ऐसे में उस व्यवस्थित करने वाली ऊर्जा और ज्ञान का भी अंनुसंधान किया जाना sabhar :http://www.amarujala.com/


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शनिवार, 7 जून 2014

अरे ये क्या! टीचर बनी नाबालिग स्टूडेंट के बच्चे की मां

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अपने ही छात्र से संबंध बनाकर बनी मां

अपने ही छात्र से संबंध बनाकर बनी मां


एक स्कूल टीचर ने अपने ही नाबालिग स्टूडेंट के साथ शारीरिक संबंध बनाकर बच्चे को जन्म ‌दिया है।

42 वर्षीय इस महिला के पहले भी दो बच्चे हैं और वह अपने पति को छोड़ चुकी है।

इस पूरे मामले में इंग्लैंड की टीचर हेलेन कार्टराइट को कोर्ट केस का सामना करना पड़ रहा है।

वहां के स्‍थानीय कोर्ट का कहना है कि यह संबंध सरासर गलत है। इसके लिए अदालत ले टीचर को ही जिम्‍मेदार ठहराया है। 

नाबालिग होने की थी जानकारी

मामला ऑस्ट्रेलिया के वूलमर हेमटन शहर का है। वहां पुलिस के समक्ष हेलेन कार्टराइट ने कबूल किया है जब कुछ समय पूर्व स्टू्डेंट के साथ उसने संबंध बनाए तो उसे यह जानकारी थी कि वह नाबालिग है।

डेली मेल के मुताबिक बावजूद इसके उसने शारीरिक संबंध बनाए और बच्चे की मां भी बनी। पता चला है कि दोनों के बीच काफी समय से आपसी संबंध बनाए जाते रहे थे।

इसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन सहित अन्य छात्रों को भी थी। मगर यह सच्चाई उस समय सामने आई जब हेलेन बच्चे की मां बनी। 

पांच माह का हो गया बच्चा

15 वर्षीय स्टूडेंट और टीचर हेलेन कार्टराइट का बच्चा अब पांच माह का हो चुका है और पूरी तरह से स्वस्‍थ है।

इस मामले में अदालत ने टीचर का फटकार लगाते हुए 10 वर्ष तक सैक्स ऑफेंडर की लिस्ट में डाल दिया है।

इसके साथ ही पुलिस द्वारा दो सालों तक उसके ऊपर नजर भी रखी जाएगी ताकि इस बात का पता रहे कि कहीं वह भविष्य में भी इस तरह के कृत्यों को अंजाम तो नहीं दे रही है।� sabhar :http://www.amarujala.com/

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चमत्कार! ये औरत अचानक ही बोलने लगी तीन अनजान भाषाएं

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हुआ था माइग्रेन

हुआ था माइग्रेन


49 साल की जूली माथहियास की कहानी किसी को भी हैरत में डाल देने के लिए काफी है। हम सभी जानते हैं कि एक भाषा सीखने में ही सालों लग जाते हैं।

डेली मेल 
के मुताबिक मिलिए इस महिला से जो पेशे से एक हेयर ड्रेसर है। उसे कई सालों से सिर में भयंकर दर्द की शिकायत रहती थी। जांच में पता चला कि उसे माइग्रेन है।

साल 2011 में उसे माइग्रेन का इतना भयानक अटैक आया कि उसे हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा। फिर तभी...
अरे ये क्या हो गया?
हॉस्पिटल में माइग्रेन का भयंकर अटैक आने पर जब पहली बार उसने डॉक्टर से बात करना शुरू किया तो वो पता नहीं किस लहेजे में बोलने लगी।

जूली इंग्लैंड के चैथम की रहने वाली थी और बचपन से ही सिर्फ शैव भाषा बोलना जानती थी। 

लेकिन डॉक्टर से बात करने पर वो बोल तो शैव ही रही थी लेकिन बोलने का अंदाज यानी के एक्सेंट किसी विदेशी भाषा जैसा आ रहा था। थोड़ी देर में उसने देखा कि अब वो अपनी भाषा शैव बोल ही नहीं पा रही थी। 

वो तो कुछ ऐसा बोलने लगी कि सुनने वालों को लगता कि वो कभी चाइनीज बोल रही है, कभी इटैलियन और कभी फ्रेंच।

हो गई दुर्लभ बीमारी

इसका इलाल करावाने पर पता चला कि उसे फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम हो गया है। इस बीमारी से दुनिया भर में बस 60 लोग ही पीड़ित पाए गए हैं।

ज्यादातर ये बीमारी होने की वजह कोई जानलेवा स्ट्रोक या फिर भयानक सिरदर्द होता है। जूली के साथ भी ऐसा ही हुआ।

उनकी ऐसी भाषा होने पर कई लोग उन्हें चिढ़ाते हैं। हांलाकि जूली ने अपना पेशा जारी रखा है लेकिन वो ये बताना नहीं भूलती हैं कि उन्हें बहुत जिल्लतों का सामना करना पड़ता है और इसमें उनका कोई दोष नहीं है।� sabhar :
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