Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Item Post Navigation Display

Home Recent Posts Display

Related Posts Display

मंगलवार, 22 जुलाई 2014

रूसी भौतिकविदों ने टेलीपोर्टेशन को यथार्थ में बदला

0

रूसी भौतिकविदों ने टेलीपोर्टेशन को यथार्थ में बदला

मास्को भौतिकी और प्रौद्योगिकी संस्थान (MPTI) के वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया है कि टेलीपोर्टेशन कोई कल्पना या कथा नहीं है|

निकट भविष्य में शारीरिक बल का उपयोग किये बिना लंबी दूरी की यात्रा और दो ​​स्थानों पर एक साथ होना संभव होगा| उदाहरण के लिए, बीजिंग या मास्को में और साइबेरिया और न्यूजीलैंड के द्वीपों में| टेलीपोर्टेशन द्वारा अंतरिक्ष की खोज की भी संभावनाएं हैं| "क्वांटम उलझाव" के रूप में एक भौतिक प्रभाव के कारण यह सब सच हो सकता है| यह क्वांटम वस्तुओं की अविभाज्य रहते हुए अलग अलग स्थान पर रहने की क्षमता है|
पारंपरिक भौतिकी में ऐसा कोई प्रभाव नहीं है| रूसी वैज्ञानिकों को काफी दूरी तक सूचना प्रसारण में "क्वांटम उलझाव" संरक्षित करने के लिए एक रास्ता मिल गया है| यह अनिवार्य रूप से टेलीपोर्टेशन ही है| MPTI के वैज्ञानिकों में से एक शोधकर्ता सेर्गेई फिलिप्पोव ने "रेडियो रूस" को बताया:
“यदि धागे के गोले में एक गांठ पड़ जाये तो हम हताश हो जाते हैं, लेकिन ऐसी जटिल स्थिति भौतिकी में वैज्ञानिकों को बहुत खुश करती है क्योंकि इन स्थितियों में एक संबंध है। तार के एक सिरे पर जो कुछ हो रहा है वह दूसरे सिरे के साथ जुड़ा हुआ है। इस प्रकार के सहसंबंध को कहीं भी भेजा जा सकता है| इस प्रकार एक महान दूरी पर रहने वाले लोग एक दूसरे से सहसंबद्धित हो जाएंगे और उनका व्यवहार एक दूसरे से स्वतंत्र नहीं होगा|
भौतिकविदों का मूल अनुसंधान एक फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क पर संकेत संचरण के अध्ययन के साथ जुड़ा हुआ है| वैज्ञानिक फिलिप्पोव के अनुसार यह तथाकथित "गुप्त क्वांटम संचार" है| मास्को भौतिकी और प्रौद्योगिकी संस्थान में विकसित एक एल्गोरिथ्म इस रिश्ते को और भी अधिक रहस्यमय बनाने की अनुमति देता है| जहाँ तक टेलीपोर्टेशन का सवाल है, यह अनुसन्धान के एक "अतिरिक्त" प्रभाव की तरह बन गया है| वैज्ञानिक ने बताया कि वस्तुओं या लोगों को स्थानांतरित करने के लिए कैसे इस प्रभाव का उपयोग किया जाएगा|
मान लीजिए कि आप एक व्यक्ति का टेलीपोर्टेशन करना चाहते हैं| ऐसा करने के लिए आपको सभी परमाणुओं को आगे भेजने की आवश्यकता नहीं है| आपको पता है कि व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन 20 किलो, कार्बन 10 किलो, कुछ मात्रा में हाइड्रोजन है, और आप दूसरे छोर पर उतनी ही राशि ले सकते हैं और फिर उनके आपसी सम्बन्ध के बारे में परमाणुओं में जो जानकारी दर्ज की गई है वह भेज सकते हैं| और दूसरे छोर पर आपके द्वारा भेजी गयी जानकारी की सहायता से एक वैसे ही इंसान का "गठन" कर लिया जाता है|
एक अर्थ में, यह "गठन" एक लेजर के साथ दर्ज की गई और फिर बाद में होलोग्राफ़ी द्वारा असली रूप में पुनर्निर्मित वस्तुओं की इसी तरह की तीन आयामी छवि की याद दिलाता है| फर्क केवल यह है कि एक विशेष प्रकार की फोटोग्राफी के बदले "गठन" सभी विशिष्ट लक्षणों, योग्यताओं और उमंगों के साथ, "मांस और खून" से बने, बातचीत करने में समर्थ व्यक्ति के टेलीपोर्टेशन की बात है| इतनी ऊंचाई तक विज्ञान अभी तक निश्चित रूप से नहीं पहुंचा है| वैज्ञानिकों को केवल फोटॉनों को टेलिपोर्ट करने में सफ़लता मिली है| वे आम तौर पर भेजी गई जानकारी के वाहक हैं| लाइन के दूसरे छोर पर विशेषज्ञ एक सूक्ष्म वस्तु का उसी स्थिति में पुनर्निर्माण कर सकते हैं जैसा कि दूसरे सिरे से भेजा गया था| अब हम इस सिद्धांत को और अधिक जटिल प्रणालियों में लागू करने के लिए प्रयास कर रहे हैं| यह एक बहुत मुश्किल काम है: जब आकार बढ़ता है तो टेलीपोर्टेशन प्रणाली में नाटकीय रूप से जटिलता बढ़ती है| अध्ययन के लेखक ने बताया: "दो परमाणुओं का टेलिपोर्ट एक परमाणु के प्रसारण से दुगना कठिन है और तीन परमाणुओं का प्रसारण आठ गुना कठिन है| यदि हम मानव टेलीपोर्टेशन की जटिलता की डिग्री का आकलन करना चाहते हैं, तो इस बात पर विचार करना चाहिए: मानव शरीर की रचना में 10²4  परमाणुओं का समावेश होता है...SABHAR :http://hindi.ruvr.ru/
और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/2014_07_19/274827391/

Read more

सोमवार, 21 जुलाई 2014

ब्लड ग्रुप के मुताबिक चुनें अपना भोजन

0



ग्रुप ए
ब्लड ग्रुप ए के लोगों के लिए हरी सब्जियां, अनाज, बींस अंकुरित भोजन, फल, ड्राई फ्रूट्स और ब्रेड, नूडल्स, चाइनीज फूड्स, डिनर रोल, बर्गर जैसे फूड्स को प्राथमिकता देनी चाहिए। वजन घटाने के लिए मीट, दूध से बने उत्पाद, गेहूं को अवॉइड करें।


ग्रुप बी
ब्लड ग्रुप बी वाले लोग विभिन्न तरह का भोजन ले सकते हैं। इनमें अनेक प्रकार का मांस, सब्जियां, अनाज शामिल हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्लड ग्रुप बी के लोगों को अनेक प्रकार का भोजन सूट करता है। लेकिन संयमित रूप से लें। अगर दिन में मीट लिया है तो शाम में वेजीटेबल आदि खाएं। हालांकि पैकेट बंद खाद्य पदार्थ, गोभी मक्का, मूंगफली, मसूर, तिल आदि को नजरअंदाज करें।
- ग्रुप एबी
इस ब्लड ग्रुप के लोगों को मांस-मछली, सब्जियां, कार्बोहाइड्रेट्स, दूध, दही व दूध से बने पदार्थ और अनाज सूट करते हैं। यानी अधिक से अधिक प्रोटीन लेना चाहिए। इस तरह का भोजन खाने से वे ज्यादा हेल्थी रह सकते हैं। इस ग्रुप के लोग मिश्रित आहर ले सकते हैं लेकिन फिर भी रेड मीट, मक्का आदि को नजरअंदाज करना चाहिए।
-ग्रुप ओ
सबसे पुराना ग्रुप होने के कारण ब्लड ग्रुप ओ के लोगों को उच्च प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ और मांस अधिक लेना चाहिए, लेकिन दूध के उत्पाद को नजरअंदाज करना चाहिए।
sabhar :http://www.onlymyhealth.com/

Read more

अमेरिका तक सुरंग के जरिए दौड़ेगी चीन की बुलेट ट्रेन

0



पेइचिंग. चीन अमेरिका तक रेल लाइन बिछाने और बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने की योजना बना रहा है. इसके लिए चीन ने प्रशांत महासागर के नीचे सुरंग बनाकर अमेरिका तक 13 हजार किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन चलाने के लिए रेल लाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है. यह रेलवे लाइन अलास्का और कनाडा होते हुए अमेरिका तक पहुंचेगी.
प्रस्तावित रेल लाइन उत्तर-पूर्वी चीन से शुरू होकर रूस के पूर्वी साइबेरिया, बेरिंग स्ट्रैट, अलास्का, कनाडा होते हुए अमेरिका तक बिछाई जाएगी. चीन की इंजिनियरिंग अकादमी के अधिकारी एवं रेलवे के जानकार वांग मेंगशु ने पत्रकारों को यह जानकारी दी.
इस रेलवे लाइन पर बुलेट ट्रेन 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगी. इससे उत्तर पूर्वी चीन के यात्री मात्र दो दिनों में अमेरिका पहुंच जाएंगे. उन्होंने बताया कि चीन की ही तरह रूस भी रेल नेटवर्क पर बहुत अधिक निर्भर है और उसने भी इस योजना में रूचि दिखाई है.
इस प्रोजेक्ट का नाम रखा गया है-चीन-रूस प्लस अमेरिका रेल लाइन. यह कुल 13,000 किलोमीटर की होगी. दूसरी ओर चीन ट्रांस एशियन रेल लाइन पर अगले महीने से काम शुरू कर रहा है. इसके तहत चीन से रेल लाइन वियतनाम, मलेशिया, सिंगापुर होते हुए थाईलैंड तक जाएगी.


पेइचिंग टाइम्स समाचार पत्र ने वांग के हवाले से लिखा है कि रूस के मध्य बेरिंग स्ट्रैट और अलास्का से जाने वाली रेलवे लाइन के लिए 200 किमी की भूमिगत सुरंग बनायी जाएगी.
sabhar :http://www.palpalindia.com/

Read more

शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

दिल के अंदर ही बन जाएगा पेसमेकर

0

जैविक पेसमेकर, सेडार्स सिनाई

अपने ही शरीर में खुद का पेसमेकर तैयार करने की कल्पना जल्द ही हक़ीक़त में बदल सकती है. वैज्ञानिकों ने सुअरों में इसके कामयाब प्रयोग किए हैं.
वैज्ञानिकों ने हृदय की कोशिकाओं में एक जीन डालकर उन्हें पेसमेकर कोशिका में बदल दिया.

क्लिक करें
लॉस एंजेलिस के सिडार्स-सिनाई हार्ट इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के अनुसार 'जैविक पेसमेकर एक बीमारी का प्रभावी ढंग इलाज करने में' कामयाब रहा है.
ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के अनुसार क्लिक करेंसाइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन में प्रकाशित शोध को प्रयोग में आने में 'अभी बहुत समय लगेगा.'
शोधकर्ताओं ने ऐसे सुअरों में एक जीन को डाला जिन्हें हृदयगति धीमी रहने की बीमारी थी.
इस जीन थैरेपी ने करोड़ों की संख्या में मौजूद दिल की मांसपेशियों में से कुछ को बहुत दुर्लभ उन विशेष कोशिकाओं में बदल दिया जो दिल की धड़कन को एक समान रखती हैं.

पारंपरिक पेसमेकर

जैविक पेसमेकर कोशिकाओं की तस्वीर
(जैविक पेसमेकर कोशिकाओं की तस्वीर)
शोध दल का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर एडुआर्डो मार्बन ने कहा, "पहली बार हम एक जैविक पेसमेकर तैयार करने में कामयाब हुए हैं जिसमें कम से कम बाहरी दखल दिया गया है. इससे यह भी पता चला है कि जैविक पेसमेकर रोज़मर्रा की ज़िंदगी का बोझ उठा सकता है."

पारंपरिक पेसमेकर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जिसे छाती के अंदर लगाया जाता है और ये अनियमित हृदयगति को नियंत्रित करता है.sabhar :http://www.bbc.co.uk/

Read more

गुरुवार, 17 जुलाई 2014

सावधान! नहीं तो आपको भी हो सकता है ब्रेन स्ट्रोक

0




शरीर में रक्त प्रवाह में किसी तरह की बाधा आपको भारी नुकसान पहुंचा सकती है। आपकी जान भी जा सकती है। खासकर उस स्थिति में जब मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति बाधित होती हो। इसे हम ब्रेन स्ट्रोक भी कहते हैं। ब्रेन स्ट्रोक किसी बाधा के कारण इश्चेमिया (रक्त संचार में कमी) या फिर हेमरेज (रक्तस्त्राव) के कारण होता है।
हलांकि एक आम इंसान को ब्रेन स्ट्रोक के बारे में पता नहीं होता। इसके क्या प्रभाव होते हैं, इसके होने पर तुरन्त क्या करना चाहिए, क्या इसका इलाज संभव है आदि बातों से वह पूरी तरह से अंजान रहता है। वैसे एक आम इंसान के सामने सबसे जरूरी सवाल तो यही होता है कि ब्रेन स्ट्रोक के सामान्य लक्षण क्या हैं?
तनाव, मधुमेह, धूम्रपान, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर और हृदय रोग ब्रेन स्ट्रोक के लिए प्रमुख खतरे हो सकते हैं। अगर आप भी इस तरह के खतरों से पीड़ित हैं तो हो जाइए सावधान!
ब्रेन स्ट्रोक के सामान्य लक्षण
1. बांह में कमजोरी :
स्ट्रोक के मरीज को एक या दोनों बांहों में सुन्न होने या कमजोरी का एहसास हो तो जरूर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। याद रहे सुन्न होने की स्थिति में मरीज का हाथ उपर नहीं उठता।
2. चेहरे का झुकना :
अगर मरीज का चेहरा एक तरफ झुक जाए या फिर चेहरा सुन्न हो जाए तो समझ लीजिए मामला गंभीर है। इस दौरान आप उसे हंसने के लिए कहें, यदि वह ऐसा न कर सके तो तुरन्त अस्पताल ले जाएं।
3. बोलने में परेशानी :
स्ट्रोक के दौरान यदि मरीज को बोलने में परेशानी होती है, साधारण से सवाल का वह जवाब नहीं दे पाता, तो समझिए की उसे डॉक्टर की जरूरत है।
4. सन्तुलन खोना
शरीर को सन्तुलित करने में परेशानी, सीधे खड़ा नहीं हो पाना या चलने में परेशानी आदि ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण हैं।
5. सिर में दर्द
बिना किसी कारण सिर में भयंकर दर्द हो तो यह सामान्यत: हेमरेज (रक्तस्त्राव) के कारण स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
6. यदि सामान्य अवस्था में थोड़े समय के लिए यादाश्य भी चली जाती है तो समझे यह बीमारी होने वाली है।
7. कई बार आंखों के सामने अंधेरा छा जाना और चक्कर आना भी ब्रेन स्ट्रोक की वजह हो सकती है।sabhar :http://www.jagran.com/

Read more

स्टीफन हॉकिंग ने लांच किया सुपर कंप्यूटर

0




लंदन। प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने सुपर कंप्यूटर लांच किया है। हॉंिकंग का मानना है कि एसजीआइ कंपनी द्वारा निर्मित कॉसमॉस सुपरकंप्यूटर अपनी तरह का पहला कंप्यूटर है जो संभावनाओं के नए द्वार खोल सकेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के सेंटर फॉर मैथेमेटिकल साइंसेज में न्यूमेरिकल कॉस्मोलॉजी कार्यशाला में सुपरकंप्यूटर के लांच के मौके पर हॉकिंग ने कहा कि हमने हाल ही में पार्टिकल फिजिक्स और कॉस्मोलॉजी
[ब्रह्मांड विज्ञान] के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। कॉस्मोलॉजी अब एक वास्तविक विज्ञान है। इसलिए हमें वास्तविक ब्रह्मांड तक पहुंच और उसके बारे में अनुसंधान करने के लिए कॉस्मॉस की जरूरत है। कार्यशाला का आयोजन इनटेल की मदद से किया गया था। इसमें कंप्यूटेशनल कॉस्मोलॉजी से जुड़े प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया। हॉंिकंग ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि जल्द ही ऐसी परिकल्पना मिल जाएगी जिससे सैद्धांतिक तौर पर ब्रह्मांड में होने वाली प्रत्येक घटना की भविष्यवाणी की जा सकेगी।' कॉस्मॉस संघ का वर्तमान शोध कार्यक्रम ब्रह्मांड की उत्पत्तिऔर संरचना को लेकर समझ बढ़ाने से संबंधित है। sabhar :http://www.jagran.com/

Read more

शोधकर्ताओं ने ढूंढा स्टीफन हाकिंग की बीमारी का इलाज

0



लंदन। शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के मशहूर भौतिक शास्त्री स्टीफन हॉकिंग की तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारी मोटर न्यूरोन का उपचार खोज निकालने की उम्मीद जताई है। नई तकनीक का अगले साल तक चिकित्सकीय परीक्षण किया जा सकता है।
शेफील्ड इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल न्यूरोसाइंस के मुताबिक, इस तकनीक से मोटर न्यूरोन बीमारी के उपचार का मार्ग प्रशस्त होगा। इसकी मदद से ऐसे लोगों की पहचान की जा सकेगी, जिसके परिवार में तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारी रही हो। इससे जीन संबंधी गड़बड़ी को पहले ही सुधारा जा सकेगा।
जीन थेरेपी के प्रोफेसर मिमोन अजोज के मुताबिक, मोटर न्यूरोन बीमारी का कोई इलाज नहीं है। इससे पीड़ित व्यक्ति के जिंदा बचने की संभावना बहुत कम होती है। व्यक्ति अपनी मांसपेशियों पर नियंत्रण खो बैठता है। इसके कुछ मामले अनुवांशिक होते हैं जिनमें एसओडी1 जीन की गड़बड़ी पाई जाती है। हम इस जीन की गड़बड़ी को सही करने के प्रयास कर रहे हैं। ताकि बीमारी के लक्षण उभरने से पहले ही जीन का उपचार किया जा सके।
प्रोफेसर अजोज ने कहा, मौजूदा समय में रिलुजोल नाम की दवा से मरीज के जीवनकाल को तीन से छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। लेकिन इसका प्रभाव सभी मरीजों पर एक जैसा नहीं होता।
दुनिया भर में सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब 'ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' के लेखक और कैम्ब्रिज सेंटर फॉर थ्योरेटिकल कॉस्मोलॉजी में शोध निदेशक स्टीफन हाकिंग बोलने के लिए कंप्यूटर तकनीक की मदद लेते हैं, जिससे उनके जबड़े की मांसपेशियों से संचालित होती हैं। यह पहेली शोधकर्ताओं की समझ से अभी तक बाहर है कि वह मोटर न्यूरोन जैसी खतरनाक बीमारी के साथ 40 साल से कैसे जीवित हैं
sabhar : http://www.jagran.com/

Read more

मस्तिष्क चिप लगाई, लकवाग्रस्त हाथ में हुई हलचल

1


नई दिल्ली। आए दिन तकनीक के ऐसे कारनामे सामने आते हैं, जिन्हें देखकर हर कोई वाह-वाह कर उठता है। अमेरिका के ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर और धर्मार्थ ट्रस्ट बैटेले मेमोरियल इंस्टीट्यूट के संयुक्त प्रयासों से शोधकर्ताओं ने चार सालों से लकवाग्रस्त व्यक्ति के हाथों में हलचल पैदा कर दी, वह भी उसके मस्तिष्क के पूर्ण नियंत्रण के साथ।
23 वर्षीय इयान बर्कहार्ट का शरीर चार साल पहले लकवाग्रस्त हो गया था। इसके बाद से ही वह अपने हाथों का इस्तेमाल करने में अक्षम हो गया था। शोधकर्ताओं ने एक बेहद छोटे चिप न्यूरोब्रिज को इयान के मस्तिष्क में लगाकर इस कारनामे को अंजाम दिया। यह न्यूरोब्रिज प्रभावित क्षेत्र को पार करते हुए मस्तिष्क के संकेतों को सीधे इयान की मांसपेशियों तक पहुंचा देता है। न्यूरोब्रिज को तैयार करने में वैज्ञानिकों को दस साल का वक्त लगा। इयान के हाथ को इस इलाज के लिए तैयार करने में भी लंबा वक्त लगा और फिर तीन घंटे के ऑपरेशन के जरिए चिप को उसके दिमाग में लगा दिया गया। इयान ने कहा, 'यह एक स्वप्निल सा अनुभव है। मैं यह स्वीकार कर चुका था कि अब मैं कभी अपने हाथ का इस्तेमाल नहीं कर सकूंगा।'
तकनीक का भविष्य :
संभव है कि आने वाली सदी में मनुष्य मस्तिष्क में चिप लगाकर अपनी मेमोरी कैपेसिटी ब़़ढा सके। कहीं ज्यादा तेजी से गणनाएं कर सके। ऐसे चिप या साधन मनुष्य को स्मार्ट रोबोट या कंप्यूटर से कहीं ज्यादा स्मार्ट बना देंगे। तमाम चिप्स की मदद से हमारा अपना शरीर सीधे इंटरनेट, संचार के साधनों या मशीनों से जुड़़कर उनसे व्यवहार करने और कमांड के आदान--प्रदान में सक्षम हो सकेगा।
भविष्य के रोबोटिक अंग
बायोनिक आंख :
एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से जन्म से अंधा व्यक्ति भी देखने में सक्षम हो पायेगा।
हड्डी उगाने की तकनीक :
यूसीबी--1 नामक प्रोटीन के जरिए अब नई हड्डी के ब़़ढाव को अपने तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।
पोर्टेबल पेंट्रियाट :
ये किसी व्यक्ति के ब्लड शुगर और इंसुलिन को शरीर की जरूरतों के हिसाब से एडजस्ट करने में सक्षम होगा।
इलेक्ट्रॉनिक जीभ :
इसकी मदद से ये पता चल सकेगा कि जो खाद्य पदार्थ है, उसका स्वाद कैसा होगा और इसमें कौन से तत्व, विटामिन, वसा और प्रोटीन की मात्रा कितनी है।
नए कृत्रिम अंग :
नैनो और बायोटेक्नोलॉजी के विकास के साथ कोशिकीय और कृत्रिम अंग विकसित किए जा सकेंगे, जो हमारे शरीर के संवेदी प्रणाली के साथ असरदार ढंग से जु़़डकर काम करेंगे। sabhar :http://www.jagran.com/

Read more

पूर्वजन्म का बदला लेने के लिए स्त्री बनकर लिया दूसरा जन्म

0

story of bhakt sadan prebirth story

यह कहानी उस स्त्री की है जो पूर्वजन्म में एक गाय थी। इस गाय का मालिक कसाई था। एक दिन यह गाय अपना बंधन तोड़कर भाग चली। कसाई गाय का पीछा करता दौर रहा था।

रास्ते में एक व्यक्ति ने उसे पकड़ लिया और गाय को कसाई के हवाले कर दिया। समय बीता और गाय ने दूसरा जन्म लिया।गाय एक स्त्री बनी और कसाई उसका पति। गाय को पकड़ने वाले का भी पुनर्जन्म हुआ और वह कसाई बना। इस कसाई का नाम था सदन।

सदन कसाई होने पर भी पूर्वजन्म के कर्मों के कारण ईश्वर में बड़ी आस्था रखता था। एक बार यह तीर्थयात्रा पर निकला।रास्ते में इसने एक घर में आश्रय मांगा। उस घर में सिर्फ पति-पत्नी रहते थे। सदन ने देखकर वह स्त्री मोहित हो गई। रात में जब उसका पति सो गया तब वह सदन के पास आई और प्रेम की प्रार्थना करने लगी।

लेकिन सदन ने उसकी बात नहीं मानी। स्त्री को लगा कि सदन उसके पति के भय से उसके प्रेम को स्वीकार नहीं कर रहा है। स्त्री घर के अंदर गई और तेज हथियार से अपने पति की हत्या कर दी।इसके बाद वह स्त्री वापस सदन के पास आई और बोली तुम्हें मेरे पति से डरने की जरूरत नहीं है मैंने उसका वध कर दिया है। इसके बाद भी सदन ने उस स्त्री के प्रेम को अस्वीकार कर दिया। अब तो स्त्री को क्रोध आ गया और उसने शोर मचाना शुरू कर दिया। स्त्री ने अपने पति की हत्या का आरोप सदन के ऊपर लगा दिया।

राजा ने दंड स्वरूप सदन के दोनों हाथ कटवा दिए। सदन अपने कटे हुए हाथों के साथ जगन्नाथ पुरी पहुंचा। यहां पहुंचने पर एक रात उसे सपने में आकर जगन्नाथ जी ने बताया कि तुमने पूर्वजन्म में गाय को पकड़कर कसाई को सौंप दिया था।

गाय ने तुम्हें माफ नहीं किया और स्त्री के रूप में जन्म लेकर तुम्हें यह दंड दिया है। कहते हैं इसके बाद जगन्नाथ जी ने एक चमत्कार किया और सदन के दोनों हाथ वापस लौट आए। इस कथा का उल्लेख गोरखपुर से प्रकाशित कल्याण पत्रिका के भक्तमाल अंक में किया किया गया है। sabhar :http://www.amarujala.com/

Read more

इस जीवन के ज्ञान और अनुभव के साथ होता है दूसरा जन्म

0

experience memory of last birth

अगर आप यह सोचते हैं कि इस जीवन में जो कुछ किया वह इसी जन्म तक आपके साथ रहेगा, ऐसा नहीं है। आप इस जन्म में जो भी ज्ञान और अनुभव प्राप्त करते हैं वह अगले जन्म में भी आपके साथ होता है और इसका लाभ आपको अगले जन्म में भी मिलता है। इसलिए इस जन्म में ही कर लें दूसरे जीवन को कामयाब बनाने की तैयारी।भगवान श्री कृष्ण ने गीता में इस तथ्य को स्पष्ट किया है कि जब मनुष्य एक शरीर का त्याग करने लगता है तब शरीर द्वारा अर्जित ज्ञान और अनुभव सिमट कर आत्मा के केन्द्र में स्थित हो जाते हैं।

इसके बाद जब आत्मा दूसरे शरीर में प्रवेश करती है तब उन ज्ञान और अनुभव को उस नए शरीर में भी पहुंचा देती है। इसलिए श्री कृष्ण कहते हैं- लभते पौर्वदेहिकम्।

श्री कृष्ण ने खुद बचपन में मिट्टी खाकर इस बात को प्रमाणित किया है क्योंकि इससे पूर्व श्री कृष्ण ने वराह अवतार लिया था। वराह मिट्टी कुरेदता है और खाता है। कहते हैं श्री कृष्ण के मिट्टी खाने की घटना के बाद से ही छोटे बच्चों में मिट्टी खाने लगे।अपने सुना या देखा होगा कि कुछ बालक ऐसे होते हैं जो अल्पायु में ही अपने ज्ञान और कार्यकलाप से बड़े-बड़े कारनामे करने लगते हैं। दरअसल यह पूर्वजन्मों के संचित ज्ञान और अनुभव का परिणाम होता है।

स्वामी रामसुखदासजी का कहना है कि पूर्वजन्म की साधन सामग्री मिलना ठीक उसी प्रकार है, जैसे किसी को रास्ते पर चलते-चलते नींद आने लगे और वह वहीं किनारे पर सो जाए। जब वह सोकर उठेगा, तो उतना रास्ता तो उसका तय किया हुआ रहेगी ही- बस वह आगे की यात्रा आरंभ कर देगा।
experience memory of last birth4

र्वजन्म की साधना वस्तुतः जीवात्मा पर संस्कारों की छाप छोड़ देती है। जितने अच्छे संस्कार पड़ चुके हैं, वे सभी इस नए जन्म में जागृत हो जाते हैं।

मनोवैज्ञानिक चिकित्सक डॉ० ब्रायन वायस ने अपनी पुस्तक मेनीलाइव्स मेनीमास्टर्स एवं मेसेजेस फ्राम मास्टर्स में लिखा है कि मनुष्य पूर्वजन्म की यादों को- बुद्धि को संग्रहीत करता चलता है।

इन्होंने इसके माध्यम से कई रोगियों को पूर्वजन्म की यादों में ले जाकर चिकित्सा करने की कोशिश की है और उन्हें इस काम में नब्बे प्रतिशत सफलता मिली है।
sabhar :http://www.amarujala.com/

Read more

बुधवार, 16 जुलाई 2014

सेब और कामुकता का रिश्ता

0

पुरानी कहावत है कि रोज एक सेब खाइए और डॉक्टर को दूर रखिए. ताजा शोध से पता चला है कि सेब इससे भी अधिक काम करता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि रोजाना सेब खाने से महिलाओं का यौनजीवन बेहतर होता है.
ऐसे सबूत हैं कि फल या सब्जी से मिलने वाले एस्ट्रोजन, पोलीफेनोल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स के नियमित सेवन और महिलाओं के यौन स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है. लेकिन रोजाना सेब खाने और महिलाओं के यौनजीवन के संबंधों पर पहले कोई शोध नहीं हुआ था. अमेरिका की नेशनल सेंटर ऑफ बायोटेक्नॉलॉजी इंफॉर्मेशन के अनुसार शोधकर्ताओं ने रोजाना सेब खाने और महिलाओं की यौन सक्रियता के बीच संबंधों पर शोध किया है.
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 731 यौन सक्रिय इताल्वी महिलाओं का विश्लेषण किया. ये महिलाएं 18 से 43 वर्ष के बीच की थीं और उनका यौन विकार का कोई इतिहास नहीं था. शोध में अवसाद की शिकार और दवा का इस्तेमाल कर रही महिलाओं को शामिल नहीं किया गया. शोध के नतीजे आर्काइव्स ऑफ गाइनोकॉलोजी एंड आब्सटेट्रिक्स में छपे हैं. इस शोध के लिए महिलाओं को दो अलग अलग ग्रुप में बांटा गया. एक ग्रुप में वे महिलाएं थीं जो प्रतिदिन नियमित रूप से एक से दो सेब खा रही थीं. दूसरे ग्रुप में वे महिलाएं थीं जो सेब का (0-0.5 प्रतिदिन) सेवन नहीं कर रही थीं.
इन महिलाओं ने स्त्री यौन कार्य सूचकांक (एफएसएफआई) वाली प्रश्नावली का जवाब दिया. जिसमें 19 सवाल शामिल थे. महिलाओं से सेक्सुअल फंक्शन, यौन आवृति, चरम आनंद, उपस्नेहन और कुल मिलाकर यौन संतुष्टि के बारे में पूछा गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि, "सेब का रोजाना सेवन यौन सक्रिय महिलाओं में उच्च एफएसएफआई स्कोर से जुड़ा है. इस प्रकार से उनमें उपस्नेहन और समग्र यौन संतुष्टि बढ़ी."
शोधकर्ताओं का कहना है कि सेब का यौन संतुष्टि पर इसलिए बेहतर असर होता है क्योंकि रेडवाइन और चॉकलेट की तरह उनमें पॉलोफेनोल्स होते हैं और एंटीऑक्सिडेंट्स जननांग और योनि तक रक्त प्रवाह को प्रोत्साहित करने में मदद करते हैं, जिस कारण उत्तेजना में मदद मिलती है. सेब में फ्लोरीजिन भी पाए जाते हैं. फल और सब्जियों में पाया जाने वाला यह आम एस्ट्रोजन है और जो संरचनात्मक दृष्टि से एस्ट्राडियोल के समान है. यह महिला हार्मोन है और महिला कामुकता में बड़ी भूमिका निभाता है. बेशक अध्ययन की एक सीमा है. साथ ही शोध में अपेक्षाकृत छोटा सैंपल लिया गया था. हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि नतीजे दिलचस्प है.
रिपोर्ट: ए अंसारी (एनसीबीआई)
संपादन: महेश झा sabhar ;http://www.dw.de/

Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv