सोमवार, 6 जनवरी 2014
रोजलिन,Sex Scandal में फंसाई जा रही थीं
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मुंबई की गोरेगांव पुलिस ने 5 जनवरी (रविवार) को एक 21 साल की लड़की को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर बॉलीवुड मॉडल रोजलिन खान के नाम की आड़ में एक एस्कॉर्ट सर्विस चला रही थी। इस लड़की ने rozlynkhanescort.com नाम की एक वेबसाइट बना रखी थी और उसी के जरिए अपना काम कर रही थी।
वेबसाइट के लॉन्च होने के बाद से रोजलिन के पास कई ऐसे मैसेजेस आने लगे जिसमें लोग उनसे सेक्स करने और अपनी एक रात की कीमत पूछ रहे थे। जब रोजलिन को पूरी बात पता चली तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। रोजलिन खान की शिकायत पर गोरेगांव पुलिस ने मामला दर्ज करके आरोपी लड़की को गिरफ्तार कर लिया।
रोजलिन ने एडिशनल पुलिस कमिश्नर (नॉर्थ) सुनील पराश्कर से लगभग 15 दिन पहले इस बारे में बात की थी और 5 जनवरी को इस लड़की को गिरफ्तार कर लिया गया।
रोजलिन के नाम से हुई इस छेड़छाड़ का मामला तब सामने आया जब लोग फेसबुक, ट्विटर और उनके फोन पर मैसेज करने लगे और उनसे सेक्स की इच्छा जताने लगे। साथ ही लोगों ने रोजलिन से उनकी एक रात की कीमत भी पूछी। पहले तो रोजलिन को कुछ समझ में नहीं आया कि आखिर ये क्यों हो रहा है, लेकिन बाद में उनके दोस्तों ने उन्हें बताया कि उनके नाम से एक वेबसाइट चल रही है जो एस्कॉर्ट सर्विस उपलब्ध करवा रही है
इसके बाद जब रोजलिन ने खुद वेबसाइट देखी तो वो हैरान रह गईं। उस वेबसाइट पर एस्कॉर्ट्स की तस्वीरों की जगह रोजलिन खान की मॉडलिंग वाली तस्वीरें लगी हुई थीं। साथ ही वेबसाइट में रोजलिन खान के नाम का भी इस्तेमाल किया गया था।इसके बाद रोजलिन खान ने एडिशनल पुलिस कमिश्नर (नॉर्थ) सुनील पराश्कर से बात की और उन्हें इस बारे में बताया। ये बात तकरीबन 15 दिन पुरानी है। इसके बाद रोजलिन खान ने खुद इस मामले में फुर्ती दिखाई और वो पुलिस की उस टीम के साथ ही रहीं, जो इस मामले की जांच के लिए बनाई गई थी। इसके बाद पुलिस टीम ने एक प्लान बनाया और आरोपी लड़की को गिरफ्तार कर लिया।
वैसे अगर सूत्रों की मानें तो इस आरोपी लड़की की शक्ल काफी हद तक रोजलिन खान से मिलती-जुलती है। यही वजह रही कि उस लड़की ने rozlynkhanescort.com नाम की एक फर्जी वेबसाइट बना डाली। वेबसाइट पर खुद रोजलिन को भी एक एस्कॉर्ट मॉडल के रूप में दिखाया गया था।
रोजलिन की हालत ऐसी हो गई थी कि वेबसाइट ब्लॉक होने के बाद भी उनके पास लोगों के मैसेज आ रहे थे और लोग उनसे 'वन नाइट स्टैंड' के लिए पूछ रहे थे। इस मामले के लिए पुलिस ने एक टीम बनाई और एक कस्टमर के तौर पर इस वेबसाइट से संपर्क किया। जब वेबसाइट की मालिक लड़की से एस्कॉर्ट उपलब्ध कराने के लिए बात की गई तो उसने पुलिस वालों ने गोरेगांव के एक होटल में मिलने को कहा।जैसे ही वो लड़की होटल में आई, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। वैसे ये देखकर पुलिस वाले भी काफी हैरान थे क्योंकि वो लड़की काफी हद तक रोजलिन खान के जैसी ही लग रही थी। गोरेगांव पुलिस स्टेशन के एक अफसर ने बताया, 'हम एक कस्टमर की तरह व्यवहार कर रहे थे। जो नंबर वेबसाइट पर दिया गया था, उस पर बात करने पर कुछ देर के लिए 50,000 रुपए में डील की गई थी।'
हमने गोरेगांव होटल में एक जाल बिछाया और उस लड़की को गिरफ्तार कर लिया। हांलाकि उस लड़की की शक्ल रोजलिन जैसी ही थी।' वैसे जब इस बारे में रोजलिन से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने साफ मना कर दिया। रोजलिन के मुताबिक जब तक ये केस हल नहीं हो जाता है, वो मीडिया से इस बारे में कोई बात नहीं करेंगी।
sabhar : bhaskar.com
कम उम्र में भी काले खूबसूरत बाल सफेद रंग के कैसे हो जाते हैं?
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जनवरी 06, 2014 in बाल सफेद रंग के कैसे हो जाते हैं?

कम उम्र में बाल अगर एक बार सफेद होने लगे तो उन्हें रोकना थोड़ा मुश्किल होता है। जब कम उम्र में बाल सफेद होने लगते हैं तो मन में ये प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आखिर इतनी कम उम्र में बाल सफेद क्यों हो रहे हैं अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो हम आपको आज आपके इसी सवाल का जवाब देने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं आज इसी कारण के बारे में कि कभी-कभी कम उम्र में भी काले खूबसूरत बाल सफेद रंग के कैसे हो जाते हैं?

कम उम्र में बाल अगर एक बार सफेद होने लगे तो उन्हें रोकना थोड़ा मुश्किल होता है। जब कम उम्र में बाल सफेद होने लगते हैं तो मन में ये प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आखिर इतनी कम उम्र में बाल सफेद क्यों हो रहे हैं अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो हम आपको आज आपके इसी सवाल का जवाब देने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं आज इसी कारण के बारे में कि कभी-कभी कम उम्र में भी काले खूबसूरत बाल सफेद रंग के कैसे हो जाते हैं?
- खाने में प्रोटीन व आयरन की कमी के कारण बाल सफेद होते हैं।भय, प्रदूषण, सोच व तनाव भी बालों की सफेदी का कारण है।
- अनियमित खान-पान व दिनचर्या में अनियमितता के कारण भी कई बार उम्र से पहले बाल सफेद होने लगते है।
- बाल सफेद होने का सबसे मुख्य कारण शरीर में उपस्थित सफेद जीन पर निर्भर करता है। अगर ये जीन अधिक प्रभावी होता है तो बाल जल्दी सफेद हो जाते हैं।
- इसके अलावा एनिमिया, एड्स या थायरॉयड के कारण भी बाल जल्दी सफेद हो जाते हैं। कई बार संतुलित भोजन ना मिलने पर या दवाइयों के रिएक्शन्स से भी बाल सफेद हो जाते हैं।-
- इसके अलावा एनिमिया, एड्स या थायरॉयड के कारण भी बाल जल्दी सफेद हो जाते हैं। कई बार संतुलित भोजन ना मिलने पर या दवाइयों के रिएक्शन्स से भी बाल सफेद हो जाते हैं।-
हमारे बालों का काला, भूरा या लाल रंग शरीर में उपस्थित मेलेनिन नामक वर्णक के कारण होता है। लेकिन बालों की सफेदी का कारण अधिकांशत: आनुवंशिक होता है।
- भरपूर नींद न लेने से व कमजोरी के कारण भी कुछ लोगों के बाल कम उम्र में सफेद होने लगते हैं। sabhar : bhaskar.comकिसी शख्स के दो जननांग कैसे हो सकते हैं?
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जनवरी 06, 2014 in किसी शख्स के दो जननांग कैसे हो सकते हैं?
हैरतअंगेज! इस शख्स को है अजीबोगरीब बीमारी, हैं दो लिंग
ये सुनने में ही काफी अजीब लगता है कि किसी शख्स के दो जननांग कैसे हो सकते हैं? पर ये सच है कि धरती पर एक ऐसा शख्स है, जिसके दो लिंग हैं।
पिछले दिनों दो लिंग वाले इस शख्स ने रेडिट एएमए पर अपने जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में बात की। इस शख्स का असल नाम क्या रहा होगा ये तो किसी को नहीं पता लेकिन लोग उन्हें 'डबलडिकडूड' नाम से जानते हैं।
पिछले दिनों दो लिंग वाले इस शख्स ने रेडिट एएमए पर अपने जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में बात की। इस शख्स का असल नाम क्या रहा होगा ये तो किसी को नहीं पता लेकिन लोग उन्हें 'डबलडिकडूड' नाम से जानते हैं।
अकेले नहीं हैं 'डबलडिकडूड'
अगर आपको ये लगता है कि अपनी इस विचित्र स्थिति के चलते इस शख्स की कोई गर्लफ्रेंड नहीं होगी तो आपको बता दें कि 'डबलडिकडूड' बाइसेक्सुअल हैं। उनकी एक गर्लफ्रेंड है और एक ब्वॉयफ्रेंड भी। उनका कहना है कि उनकी गर्लफ्रेंड और उनके ब्वॉयफ्रेंड को इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती है और वो इस संबंध से काफी खुश हैं।
दोनों लिंग हैं सक्रिय
दिनचर्या के कामों के लिए 'डबलडिकडूड' दोनों लिंगों का इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है उनके इस असाधारण स्थिति की वजह से उन्हें पोर्न इंडस्ट्री से कई प्रस्ताव आ चुके हैं। लेकिन उन्होंने अभी तक इस पर कोई विचार नहीं किया है। sabhar : http://www.amarujala.com
दिनचर्या के कामों के लिए 'डबलडिकडूड' दोनों लिंगों का इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है उनके इस असाधारण स्थिति की वजह से उन्हें पोर्न इंडस्ट्री से कई प्रस्ताव आ चुके हैं। लेकिन उन्होंने अभी तक इस पर कोई विचार नहीं किया है। sabhar : http://www.amarujala.com
दो वैजाइना के कारण इस महिला को पोर्न इंडस्ट्री ने दिया करोड़ो का ऑफर
ब्रिटेन में इन दिनों हेजल जोन्सा नामक महिला लगातार चर्चा में है। एक 'खास' शारीरिक दोष ने इस महिला को रातों रात पोर्न इंडस्ट्री का स्टार बना दिया है।
ब्रिटेन के टैब्लॉइड 'द सन' के मुताबिक हेज़ल जोन्स नाम की इस महिला में शारीरिक दोष के कारण पूरी तरह विकसित दो वैजाइना हैं। उनकी इस खासियत के कारण पॉर्न फिल्म इंडस्ट्री की उन पर नजर है। पोर्न इंडस्ट्री इस महिला को 5 करोड़ रूपए का ऑफर दिया है।
हेजल ने बताया कि उन्हें अपने इस शारीरिक दोष के बारे में किशोरवस्था में पता चला। हेज़ल अपनी इस खास शारीरिक बनावट पर कतई शर्मिंदा नहीं हैं। हेज़ल के पति रिकी का कहना है कि 'हेज़ल के शरीर की यही बनावट उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। उन्हें अपनी पत्नी पर गर्व है। रिकी के मुताबिक, 'हेज़ल का शरीर उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।
विविड एंटरटेनमेंट के हेट स्टीव हाइरस ने अपनी पॉर्न फिल्म के लिए उन्हें 1 लाख मिलियन डॉलर की रकम का ऑफर दिया है। लेकिन जोन्स् ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई हैं। वह अपने मैरिज लाइफ से खुश हैं।
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एक दो सिर और छह पैर वाली छिपकली
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जनवरी 06, 2014 in एक दो सिर और छह पैर वाली छिपकली

घर की दीवारों पर छिपकली को चलते देखकर आपने कई बार चीखें निकाली होंगी लेकिन ऐसी छिपकली आपने आज तक नहीं देखी होगी। क्योंकि ये छिपकली कोई आम छिपकली नहीं है।
अफ्रीका न्यूज पोस्ट की खबर के अनुसार, थाइलैंड में एक दो सिर और छह पैर वाली छिपकली मिली है। इस अपार्टमेंट में तीन पुरुष ही रहते हैं।इन तीनों ने बताया कि उन्होंने इस छिपकली को अंडे के अंदर ही देख लिया था। उस वक्त तक उसका एक सिर बाहर और एक अंदर था। ये आकार में काफी छोटी है।
प्रिंस ऑफ सोंगखला यूनिवर्सिटी में जीव-विज्ञान के प्रोफेसर डॉक्टर वांगकुलांगकुल की खबर के अनुसार, इस छिपकली का मिलना बेहद खास है। ये काफी दुर्लभ है।उनका कहना है कि ये छिपकली आमतौर पर तो एक साल तक जिंदा रहती है लेकिन इस बेहद दुर्लभ दो सिर और छह पैर वाली छिपकली के जीवन के बारे में कहना काफी मुश्किल है।इसे जिंदा रखने की पूरी कोशिश की जा रही है और उसे काली चीटियों का खाना दिया जा रहा है। sabhar http://www.amarujala.com
घर की दीवारों पर छिपकली को चलते देखकर आपने कई बार चीखें निकाली होंगी लेकिन ऐसी छिपकली आपने आज तक नहीं देखी होगी। क्योंकि ये छिपकली कोई आम छिपकली नहीं है।
अफ्रीका न्यूज पोस्ट की खबर के अनुसार, थाइलैंड में एक दो सिर और छह पैर वाली छिपकली मिली है। इस अपार्टमेंट में तीन पुरुष ही रहते हैं।इन तीनों ने बताया कि उन्होंने इस छिपकली को अंडे के अंदर ही देख लिया था। उस वक्त तक उसका एक सिर बाहर और एक अंदर था। ये आकार में काफी छोटी है।
प्रिंस ऑफ सोंगखला यूनिवर्सिटी में जीव-विज्ञान के प्रोफेसर डॉक्टर वांगकुलांगकुल की खबर के अनुसार, इस छिपकली का मिलना बेहद खास है। ये काफी दुर्लभ है।उनका कहना है कि ये छिपकली आमतौर पर तो एक साल तक जिंदा रहती है लेकिन इस बेहद दुर्लभ दो सिर और छह पैर वाली छिपकली के जीवन के बारे में कहना काफी मुश्किल है।इसे जिंदा रखने की पूरी कोशिश की जा रही है और उसे काली चीटियों का खाना दिया जा रहा है। sabhar http://www.amarujala.com
एक बछड़ा पैदा हुआ है, जिसके दो मुंह हैं और यह दोनों से ही खाना खाता है
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जनवरी 06, 2014 in जिसके दो मुंह हैं

दो मुंह वाला बछड़ा, यह सुनकर काफी विचित्र लगता है। जी हां, ऐसा ही एक बछड़ा पैदा हुआ है, जिसके दो मुंह हैं और यह दोनों से ही खाना खाता है।यह मोरक्को की सिटी ऑफ फेस से 20 किमी दूर सेफ्रोउ नाम के एक गांव में पैदा हुआ है।
गांव के आसपास के लोग बड़ी संख्या में इसे देखने के लिए आ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस बछड़े का नाम साना सैइदा रखा है।इसका जन्म 30 दिसंबर 2013 को हुआ है।लोग इसे न्यू ईयर के गिफ्ट की तरह मान रहे हैं।
इस बछड़े के दो मुंह होने के पीछे सेफैलिक डिसआर्डर है। यह पॉलीसेफैली कंडीशन की तरह है, जिसमें एक से अधिक मुंह होता है। सांप और कछुओं में यह स्थिति आमतौर पर पाई जाती है।
2011 में दो मुंह वाली एक शार्क फ्लोरिडा समुद्री तट पर मिली थी। इसके दो मुंह थे। इसे देखकर मरीन बायोलॉजी से जुड़े वैज्ञानिक भी आश्चर्य चकित रह गए थे।
2011 में जब फ्लोरिडा में दो मुंह वाली शार्क मिली थी, तब ठीक उसी समय घाना में दो मुंह वाला मेमना पैदा हुआ था।
चीन में दिसंबर 2013 में जियांगसी प्रांत की राजधानी नानचांगएक विचित्र सुअर का बच्चा पैदा हुआ। इस सुअर के दो मुंह हैं और मुंह से एक जुड़ा हुआ दूसरा मुंह है। इसके दो नाक, दो मुंह और तीन आंखें हैं। किसान जेनशेंग ने कहा कि यह नवजात सुअर जब दूध पीने की कोशिश करता है तो वह हिचकिचाता है कि कौन सा मुंह दूध पीने के लिए उपयोग करे।जब भी एक मुंह निप्पल को चूसता है तो दूसरा मुंह भी निप्पल्स को चूसने की कोशिश करता है, लेकिन दोनों विफल रहते हैं। पशु विशेषज्ञों का कहना कि यह सुअर जिंदा रहेगा। उसके दो मुंह होने को पशुविज्ञान में पॉलिसेफाली कहते हैं।
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मौत से जुड़े ये सबसे गहरे राज
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जनवरी 06, 2014 in मौत से जुड़े ये सबसे गहरे राज

जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु तय है, फिर वह अपना हो या पराया। यह सत्य हर कोई जानता है कि काल की घड़ी में राजा हो या रंक, छोटा हो या बड़ा सभी बराबर हो जाते हैं, जो अक्सर नजर भी आता है। किंतु जीवन में कई तरह की वासनाएं इंसान को इस सच से अनजान बनाती है और वह एक-दूसरे के लिए ऊंच-नीच के कई दोष व क्लेशों में जकड़ा रहता है।
यह भी वजह है जब भी मृत्यु से जुड़ा कोई भी विषय या घटना इंसान के सामने आती है तो वह उसे जानने के लिए आतुर हो जाता है। मृत्यु से जुड़े किसी भी विषय को लेकर उसकी यह जिज्ञासा आजीवन बनी रहती है। असल में, मृत्यु क्या है और खासतौर पर मृत्यु के बाद क्या होता है? यह जान लेना किसी भी आम इंसान के लिए मुश्किल है या यूं कहें कि मुमकिन नहीं है।
प्राचीन हिन्दू धर्मशास्त्रों में मृत्यु से जुड़ी सारी जिज्ञासाओं को शांत करने वाले ऐसे ही रहस्य भी उजागर हैं, जो माना जाता है कि मृत्यु से जुड़े सत्य जानने ही जिद पर अड़े 1 मासूम बच्चे के सामने स्वयं मृत्यु के देवता यमराज को भी उजागर करने पड़े।
हिन्दू धर्मग्रंथ कठोपनिषद में मृत्यु और आत्मा से जुड़े कई रहस्य उजागर हैं, जिसका आधार बालक नचिकेता और यमराज के बीच हुए मृत्यु के रहस्य व आत्मज्ञान से जुड़ा संवाद है। नचिकेता वह बालक था, जिसकी पितृभक्ति और आत्म ज्ञान की जिज्ञासा के आगे मृत्यु के देवता यमराज को भी झुकना पड़ा।
विलक्षण बालक नचिकेता से जुड़ा यह प्रसंग न केवल पितृभक्ति, बल्कि गुरु-शिष्य संबंधों के लिए भी बड़ी मिसाल है। प्रसंग के मुताबिक वाजश्रवस (उद्दालक) ऋषि नचिकेता के पिता थे। एक बार उन्होंने विश्वजीत नामक ऐसा यज्ञ किया, जिसमें सब कुछ दान कर दिया जाता है। किंतु दान के वक्त नचिकेता यह देखकर बेचैन हुआ कि पिता ने स्वस्थ गायों के बजाए कमजोर, बीमार गाएं दान कर रहें हैं। तीक्ष्ण व सात्विक बुद्धि का बालक नचिकेता ने समझ लिया कि पुत्र मोह के वशीभूत भी उनके पिता ऐसा कर रहे हैं।
मोह दूर कर धर्म-कर्म करवाने के लिए ही नचिकेता ने पिता से सवाल किया कि वे मुझे किसे देंगे। उद्दालक ऋषि ने इस सवाल को टाला, पर नचिकेता नहीं माना और उसके बार-बार सवाल पूछने से क्रोधित ऋषि ने कह दिया कि तुझे मृत्यु (यमराज) को दूंगा। पिता को यह बोलने का दु:ख भी हुआ। किंतु सत्य की रक्षा के लिए नचिकेता ने मृत्यु को दान करने का संकल्प पिता से पूरा करवाया।
यम के दरवाजे पर पहुंचने पर नचिकेता को पता चला कि यमराज वहां नहीं है, फिर भी उसने हार नही मानी और तीन दिन तक वहीं पर बिना खाए-पिए डटे रहे। यम ने लौटने पर द्वारपाल से नचिकेता बारे में जाना तो उस बालक की पितृभक्ति और कठोर संकल्प से बहुत खुश हुए। यमराज ने नचिकेता की पिता की आज्ञा के पालन व तीन दिन तक कठोर प्रण करने के लिए तीन वर मांगने के लिए कहा।
तब नचिकेता ने पहला वर पिता का स्नेह मांगा। दूसरा अग्नि विद्या जानने बारे में था। तीसरा वर मृत्यु रहस्य और आत्मज्ञान को लेकर था। यम ने आखिरी वर को टालने की भरपूर कोशिश की और नचिकेता को आत्मज्ञान के बदले कई सांसारिक सुख-सुविधाओं को देने का लालच दिया। लेकिन नचिकेता के आत्मज्ञान जानने के इरादे इतने पक्के थे कि वह अपने सवालों पर टिका रहा। नचिकेता ने नाशवान कहकर भोग-विलास की सारी चीजों को नकार दिया और शाश्वत आत्मज्ञान पाने का रास्ता ही चुना। आखिरकार, विवश होकर यमराज को मृत्यु के रहस्य, जन्म-मृत्यु से जुड़ा आत्मज्ञान देना पड़ा।
क्या है आत्मज्ञान और परमात्मा का स्वरूप?
मृत्यु से जुड़े रहस्यों को जानने की शुरुआत बालक नचिकेता ने यमदेव से धर्म-अधर्म से संबंध रहित, कार्य-कारण रूप प्रकृति, भूत, भविष्य और वर्तमान से परे परमात्म तत्व के बारे में जिज्ञासा कर की। यमदेव ने नचिकेता को 'ॐ' को प्रतीक रूप में परब्रह्म का स्वरूप बताया। उन्होंने बताया कि अविनाशी प्रणव यानी ऊंकार ही परमात्मा का स्वरूप है। यानी ब्रह्म और परब्रह्न दोनों का नाम ही ऊंकार है। ऊंकार ही परमात्मा को पाने के सभी आश्रयों में सबसे सर्वश्रेष्ठ और अंतिम जरिया है। सारे वेद कई तरह के छन्दों व मंत्रों में यही रहस्य उजागर है। जिनका सार यही है कि जगत में परमात्मा के इस नाम व स्वरूप की शरण लेना ही सबसे बेहतर उपाय है।
कैसे ह्रदय में माना जाता है परमात्मा का वास?
मनुष्य का ह्रदय ब्रह्म को पाने का स्थान माना जाता है। यमदेव के मुताबिक मनुष्य ही परमात्मा को पाने का अधिकारी माना गया है। उसका ह्रदय अंगूठे की माप का होता है। इसलिए इसके मुताबिक ही ब्रह्म को अंगूठे के आकार का पुकारा गया है और अपने ह्दय में भगवान का वास मानने वाला यह मानता है कि दूसरों के ह्रदय में भी ब्रह्म इसी तरह मौजूद है। इसलिए वह परनिंदा या घृणा से दूर रहता है।
क्या है आत्मा का स्वरूप?
यमदेव के मुताबिक शरीर के नाश होने के साथ जीवात्मा का नाश नहीं होता। आत्मा का भोग-विलास, नाशवान, अनित्य और जड़ शरीर से इसका कोई लेना-देना नहीं है। यह अनन्त, अनादि और दोष रहित है। इसका कोई कारण है, न कोई कार्य यानी इसका न जन्म होता है, न मरती है।
किस तरह शरीर से होता है ब्रह्म का ज्ञान व दर्शन?
मनुष्य शरीर दो आंखं, दो कान, दो नाक के छिद्र, एक मुंह, ब्रह्मरन्ध्र, नाभि, गुदा और शिश्न के रूप में 11 दरवाजों वाले नगर की तरह है, जो अविनाशी, अजन्मा, ज्ञानस्वरूप, सर्वव्यापी ब्रह्म की नगरी ही है। वे मनुष्य के ह्रदय रूपी महल में राजा की तरह रहते हैं। इस रहस्य को समझ जो मनुष्य जीते जी भगवद् ध्यान और चिन्तन करता है, वह शोक में नहीं डूबता, बल्कि शोक के कारण संसार के बंधनों से छूट जाता है। शरीर छूटने के बाद विदेह मुक्त यानी जनम-मरण के बंधन से भी मुक्त हो जाता है। उसकी यही अवस्था सर्वव्यापक ब्रह्म रूप है।
क्या आत्मा मरती या मारती है?
जो लोग आत्मा को मारने वाला या मरने वाला माने वे असल में आत्म स्वरूप को नहीं जानते और भटके हुए हैं। उनके बातों को नजरअंदाज करना चाहिए। क्योंकि आत्मा न मरती है, न किसी को मार सकती है।
क्या होते हैं आत्मा-परमात्मा से जुड़ी अज्ञानता व अज्ञानियों के परिणाम?
जिस तरह बारिश का पानी एक ही होता है, किंतु ऊंचे पहाड़ों की ऊबड़-खाबड़ बरसने से वह एक जगह नहीं रुकता और नीचे की और बहकर कई तरह के रंग-रुप और गंध में बदला चारों तरफ फैलता है। उसी तरह एक ही परमात्मा से जन्में देव, असुर और मनुष्यों को जो भगवान से अलग मानता और अलग मानकर ही उनकी पूजा, उपासना करता है, उसे बारिश के जल की तरह ही सुर-असुर के लोकों और कई योनियों में भटकना पड़ता है।
कैसा है ब्रह्म का स्वरूप यानी वह कहां और कैसे प्रकट होते हैं?
ब्रह्म प्राकृतिक गुण से परे, स्वयं दिव्य प्रकाश स्वरूप अन्तरिक्ष में प्रकट होने वाले वसु नामक देवता है। वे ही अतिथि के तौर पर गृहस्थों के घरों में उपस्थित रहते हैं, यज्ञ की वेदी में पवित्र अग्रि और उसमें आहुति देने वाले होते हैं। इसी तरह सारे मनुष्यों, श्रेष्ठ देवताओं, पितरों, आकाश और सत्य में स्थित होते हैं। जल में मछली हो या शंख, पृथ्वी पर पेड़-पौधे, अंकुर, अनाज, औषधि तो पर्वतों में नदी, झरनों और यज्ञ फल के तौर पर भी ब्रह्म ही प्रकट होते हैं। इस तरह ब्रह्म प्रत्यक्ष, श्रेष्ठ और सत्य तत्व हैं।
आत्मा के जाने पर शरीर में क्या रह जाता है?
एक शरीर से दूसरे शरीर में आने-जाने वाली जीवात्मा जब वर्तमान शरीर से निकल जाती है, तो उसके साथ जब प्राण व इन्द्रिय ज्ञान भी निकल जाता है, तो मृत शरीर में क्या बाकी रहता है, यह नजर तो कुछ नहीं आता, किंतु असल में वह परब्रह्म उसमें रह जाता है, जो हर चेतन और जड़ प्राणी व प्रकृति में सभी जगह, पूर्ण शक्ति व स्वरूप में हमेशा मौजूद होता है।
मृत्यु के बाद जीवात्मा को क्यों और कौन सी योनियां मिलती हैं?
यमदेव के मुताबिक अच्छे और बुरे कामों और शास्त्र, गुरु, संगति, शिक्षा और व्यापार के जरिए देखे-सुने भावों से पैदा भीतरी वासनाओं के मुताबिक मरने के बाद जीवात्मा दूसरा शरीर धारण करने के लिए वीर्य के साथ माता की योनि में प्रवेश करती है। इनमें जिनके पुण्य-पाप समान होते हैं वे मनुष्य का और जिनके पुण्य से भी ज्यादा पाप होते हैं, वे पशु-पक्षी के रूप में जन्म लेते हैं। जो बहुत ज्यादा पाप करते हैं, वे पेड़-पौधे, लता, तृण या तिनके, पहाड़ जैसी जड़ योनियों में जन्म लेते हैं। sabhar : bhaskar.com
रविवार, 5 जनवरी 2014
वस्तुओं को हवा में स्थानांतरित करने के लिए ध्वनि का प्रयोग :क्या भारतीय योग विद्या को मान रही है
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जनवरी 05, 2014 in वस्तुओं को हवा में स्थानांतरित करने के लिए ध्वनि का प्रयोग
और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/news/2014_01_03/258032466/
भारतीय योग विद्या की वैज्ञानिक पुष्टि हो रही है और मंत्रा शक्ति की भी ताकत भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित प्रतीत होती है
टोक्यो विश्वविद्यालय और नागोया प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने ध्वनिक उत्तोलन की एक जटिल प्रणाली के माध्यम से छोटी वस्तुओं को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया। ध्वनि तरंगों ने छोटी-छोटी चीज़ों को त्रिआयामी वायुमण्डल में एक जगह से दूसरी जगह पहुँचा दिया।
वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस प्रयोग में 20 किलोहार्ट्स से ऊँची ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें मानव के कान सुन नहीं सकते हैं। ये ध्वनि तरंगे चारों तरफ़ से आकर एक सीमित स्थान के भीतर एक दूसरे को काटती हैं, इस तरह नन्ही चीज़ें इन ध्वनि-तरंगों में फँस जाती हैं और वायुमण्डल में लटक-सी जाती हैं। इन ध्वनि तरंगों की दिशा बदलने पर वे उस नन्हीं चीज़ को भी अपने साथ घुमाती हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ध्वनिक-उत्तोलन - गुरुत्वाकर्षण को काबू में कर लेता है। इसलिए नासा जैसे संगठन इस समय भी ध्वनिक उत्तोलक उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। तो क्या भारत के योग ऋषि इसी विधि का प्रयोग करते थे मंत्रो के द्वारा हवा मे जमीन से उठ जाया करते थे हवा मे तैरने लगते थे | sabhar :http://hindi.ruvr.ru
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इंटलिजेंट रोबोट्स किराने की दुकानों में
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जनवरी 05, 2014 in इंटलिजेंट रोबोट्स किराने की दुकानों में

ये सच है कि इंटलिजेंट रोबोट्स हमें सबसे पहले शायद किराने की दुकानों में भुगतान की क़तारों के पास नजर आएं।
किराना दुकानों में काम करने के लिए तैयार किए जा रहे पीआर-2 रोबोट्स फैक्ट्रियों में काम करने वाले रोबोट से अधिक होशियार हैं।
फैक्ट्रियों में काम करने वाले रोबोट को बस एक ही काम को बार-बार दोहराने के लिए तैयार किया गया है।
अमरीका के कोर्नेल विश्वविद्यालय में पीआर-2 पर काम कर रहे असिस्टेंट प्रोफेसर आशुतोष सक्सेना का कहना है कि इन रोबोट्स को अभी भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
रोबोट्स के लिए आज भी सबसे बड़ी चुनौती है, परिवेश और परिस्थितियों को समझ पाना और अगर किसी वजह से उनमें थोड़ी तबदीली हो गई हो तो भी उसके मुताबिक़ काम को अंजाम दे पाने की क्षमता रखना।
रोबोट में आपराधिक प्रवृत्ति
लेकिन घबराए नहीं बैक्सटर में वैसी आपराधिक प्रवृत्ति नहीं पैदा होगी कि वो किसी का कत्ल कर दें, लेकिन अगर ऐसा हुआ भी तो ये महज़ एक दुर्घटना का नतीजा होगी।
कोर्नेल विश्वविद्यालय के छात्र इनमें कॉमन सेंस या व्यावहारिक बुद्दि की क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि किसी धारदार चीज़ को हाथ में लेते वक्त उनमें इससे पैदा होने वाले ख़तरे का एहसास हो सके।
बैक्सटर में इस तरह का एहसास पैदा करने की कोशिश भी की जा रही है कि वो ये जान सके कि आसानी से टूट सकने वाले सामानों को किस तरह संभालना है।
अगर कोई रोबोट स्थिति को समझने में चूक करता है तो साथ मौजूद ह्यूमन हैंडलर उसके हाथ की दिशा ठीक कर देता है। ऐसा करना तब तक जारी रहता है जब तक रोबोट में कुछ खास किस्म के काम कर सकने की समझ विकसित नहीं हो जाती है।
समझने की क्षमता

कोर्नेल विश्वविद्यालय में शोध कर रहे छात्र आशीष जैन कहते हैं, "ये चीज़ों में फर्क करना सीख जाता है। जैसे अगर वो एक स्क्रू ड्राइवर को मूव कर रहा है तो वो सीख ले कि उसे इसके साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता। अगर वो अंडे के डब्बों को एक जगह से दूसरी जगह उठाकर रख रहा है तो उसे ये समझना होगा कि ये आसानी से टूट सकता है और उसे रखते वक्त हाथ को मेज की सतह के बहुत क़रीब ले जाना होगा।"
लेकिन रोबोट में अगल अलग चीज़ों को देखकर उनकी पहचान करने की क्षमता विकसित करना आसान काम नहीं है।
उसे ये सब कुछ सेंसर और कैमरों की मदद से करना सीखना है। इस काम में उसे तब बहुत आसानी होती है जब किसी जगह मौजूद सामान अलग-अलग रंग के हों। मशीनों में इस तरह की क्षमता तो दशकों से मौजूद रही है कि वो पहले से तय की गई चीज़ों को हैंडल कर पाएं।
लेकिन उनमें अभी भी मेज पर पड़ी अलग-अलग तरह की वस्तुओं में फर्क करने की समक्ष विकसित होने में समय लगेगा।
थ्रीडी कैमरों का इस्तेमाल
कोर्नेल विश्वविद्यालय के एक अन्य छात्र ईयान लेन्ज़ कहते हैं, "हमने थ्रीडी कैमरों का इस्तेमाल किया है लेकिन अभी भी इतने सूक्ष्म कैमरे नहीं तैयार हो पाए हैं कि हम उन्हें रोबोट्स के हाथों पर फिट कर पाएं। सोनार की सुविधा भी है लेकिन वो इस तरह के काम में बहुत सफल नहीं हो पाता है।"
रोबोट्स को विकसित करने वाले पिछले कुछ समय से उनमें पूर्वानिमान की क्षमता पैदा करने की कोशिश की जा रही है। मनुष्य अपनी जिंदगी का बहुत सारा काम हर क्षण इसके सहारे करते हैं, लेकिन मशीन में इस सामर्थ्य को विकसित करने के लिए हज़ारों कोड्स डालने पड़ते हैं।
हेमा कपुल्ला बताती हैं कि मनुष्यों के वीडियो को लगातार देखने के बाद इन रोबोट्स में इस बात की 75 फ़ीसद समझ विकसित हो गई है कि आनेवाले तीन सेकंड के भीतर क्या होने जा रहा है, लेकिन अगर समय तीन सेकंड से ज्यादा का होता है तो फिर इनकी सफलता का प्रतिशत कम हो जाता है।
उन्होंने बताया कि इंसानों के कामकाज दिखाने वाली ढेर सारी सामग्री इक्ठ्टा करते हैं और कोशिश करते हैं कि ये उससे सीखे। अगर एक व्यक्ति एक प्याली उठा रहा है तो इसका इस्तेमाल वो कुछ पीने के लिए करेगा या किसी और जगह रखेगा।
रोबोट को लेकर आशंकाएं
तो क्या ऐसा वक्त आएगा जब रोबोट्स दुनियां पर कब्जा कर लेंगे और इंसानों का वजूद ख़त्म हो जाएगा। अगर ऐसा हो सकता है तो भी ये कम से कम हमारे जीवनकाल में तो नहीं होने जा रहा है।
प्रोफेसर आशुतोष सक्सेना का मानना है कि ये हो सकता है कि वो किसी खास काम में इंसानों के साथ-साथ रहकर उनकी मदद करें। जैसे किसी सुपर मार्केट की आलमारियों में सामान रखने का काम।
उन्होंने बताया, "आने वाले दिनों में ये होगा कि इंसान और रोबोट्स मिलकर काम करेंगे जिससे काम में तेज़ी आएगी।"
हो सकता है कि ये सब आनेवाले कुछ दिनों में संभव हो जाए क्योंकि रोबोट पर रिसर्च करने और उन्हें विकसित करने की कीमतों में गिरावट आ रही है। जैसे पीआरटू को तैयार करने में तीन लाख डॉलर का ख़र्च आया। जैसे जैसे इस खर्च में कमी आती जाएगी अधिक से अधिक प्रयोगशालाओं इनपर काम करना शुरू कर देंगी। sabhar :http://www.amarujala.com
ये सच है कि इंटलिजेंट रोबोट्स हमें सबसे पहले शायद किराने की दुकानों में भुगतान की क़तारों के पास नजर आएं।
किराना दुकानों में काम करने के लिए तैयार किए जा रहे पीआर-2 रोबोट्स फैक्ट्रियों में काम करने वाले रोबोट से अधिक होशियार हैं।
फैक्ट्रियों में काम करने वाले रोबोट को बस एक ही काम को बार-बार दोहराने के लिए तैयार किया गया है।
अमरीका के कोर्नेल विश्वविद्यालय में पीआर-2 पर काम कर रहे असिस्टेंट प्रोफेसर आशुतोष सक्सेना का कहना है कि इन रोबोट्स को अभी भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
रोबोट्स के लिए आज भी सबसे बड़ी चुनौती है, परिवेश और परिस्थितियों को समझ पाना और अगर किसी वजह से उनमें थोड़ी तबदीली हो गई हो तो भी उसके मुताबिक़ काम को अंजाम दे पाने की क्षमता रखना।
रोबोट में आपराधिक प्रवृत्ति
लेकिन घबराए नहीं बैक्सटर में वैसी आपराधिक प्रवृत्ति नहीं पैदा होगी कि वो किसी का कत्ल कर दें, लेकिन अगर ऐसा हुआ भी तो ये महज़ एक दुर्घटना का नतीजा होगी।
कोर्नेल विश्वविद्यालय के छात्र इनमें कॉमन सेंस या व्यावहारिक बुद्दि की क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि किसी धारदार चीज़ को हाथ में लेते वक्त उनमें इससे पैदा होने वाले ख़तरे का एहसास हो सके।
बैक्सटर में इस तरह का एहसास पैदा करने की कोशिश भी की जा रही है कि वो ये जान सके कि आसानी से टूट सकने वाले सामानों को किस तरह संभालना है।
अगर कोई रोबोट स्थिति को समझने में चूक करता है तो साथ मौजूद ह्यूमन हैंडलर उसके हाथ की दिशा ठीक कर देता है। ऐसा करना तब तक जारी रहता है जब तक रोबोट में कुछ खास किस्म के काम कर सकने की समझ विकसित नहीं हो जाती है।
समझने की क्षमता
कोर्नेल विश्वविद्यालय में शोध कर रहे छात्र आशीष जैन कहते हैं, "ये चीज़ों में फर्क करना सीख जाता है। जैसे अगर वो एक स्क्रू ड्राइवर को मूव कर रहा है तो वो सीख ले कि उसे इसके साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता। अगर वो अंडे के डब्बों को एक जगह से दूसरी जगह उठाकर रख रहा है तो उसे ये समझना होगा कि ये आसानी से टूट सकता है और उसे रखते वक्त हाथ को मेज की सतह के बहुत क़रीब ले जाना होगा।"
लेकिन रोबोट में अगल अलग चीज़ों को देखकर उनकी पहचान करने की क्षमता विकसित करना आसान काम नहीं है।
उसे ये सब कुछ सेंसर और कैमरों की मदद से करना सीखना है। इस काम में उसे तब बहुत आसानी होती है जब किसी जगह मौजूद सामान अलग-अलग रंग के हों। मशीनों में इस तरह की क्षमता तो दशकों से मौजूद रही है कि वो पहले से तय की गई चीज़ों को हैंडल कर पाएं।
लेकिन उनमें अभी भी मेज पर पड़ी अलग-अलग तरह की वस्तुओं में फर्क करने की समक्ष विकसित होने में समय लगेगा।
थ्रीडी कैमरों का इस्तेमाल
कोर्नेल विश्वविद्यालय के एक अन्य छात्र ईयान लेन्ज़ कहते हैं, "हमने थ्रीडी कैमरों का इस्तेमाल किया है लेकिन अभी भी इतने सूक्ष्म कैमरे नहीं तैयार हो पाए हैं कि हम उन्हें रोबोट्स के हाथों पर फिट कर पाएं। सोनार की सुविधा भी है लेकिन वो इस तरह के काम में बहुत सफल नहीं हो पाता है।"
रोबोट्स को विकसित करने वाले पिछले कुछ समय से उनमें पूर्वानिमान की क्षमता पैदा करने की कोशिश की जा रही है। मनुष्य अपनी जिंदगी का बहुत सारा काम हर क्षण इसके सहारे करते हैं, लेकिन मशीन में इस सामर्थ्य को विकसित करने के लिए हज़ारों कोड्स डालने पड़ते हैं।
हेमा कपुल्ला बताती हैं कि मनुष्यों के वीडियो को लगातार देखने के बाद इन रोबोट्स में इस बात की 75 फ़ीसद समझ विकसित हो गई है कि आनेवाले तीन सेकंड के भीतर क्या होने जा रहा है, लेकिन अगर समय तीन सेकंड से ज्यादा का होता है तो फिर इनकी सफलता का प्रतिशत कम हो जाता है।
उन्होंने बताया कि इंसानों के कामकाज दिखाने वाली ढेर सारी सामग्री इक्ठ्टा करते हैं और कोशिश करते हैं कि ये उससे सीखे। अगर एक व्यक्ति एक प्याली उठा रहा है तो इसका इस्तेमाल वो कुछ पीने के लिए करेगा या किसी और जगह रखेगा।
रोबोट को लेकर आशंकाएं
तो क्या ऐसा वक्त आएगा जब रोबोट्स दुनियां पर कब्जा कर लेंगे और इंसानों का वजूद ख़त्म हो जाएगा। अगर ऐसा हो सकता है तो भी ये कम से कम हमारे जीवनकाल में तो नहीं होने जा रहा है।
प्रोफेसर आशुतोष सक्सेना का मानना है कि ये हो सकता है कि वो किसी खास काम में इंसानों के साथ-साथ रहकर उनकी मदद करें। जैसे किसी सुपर मार्केट की आलमारियों में सामान रखने का काम।
उन्होंने बताया, "आने वाले दिनों में ये होगा कि इंसान और रोबोट्स मिलकर काम करेंगे जिससे काम में तेज़ी आएगी।"
हो सकता है कि ये सब आनेवाले कुछ दिनों में संभव हो जाए क्योंकि रोबोट पर रिसर्च करने और उन्हें विकसित करने की कीमतों में गिरावट आ रही है। जैसे पीआरटू को तैयार करने में तीन लाख डॉलर का ख़र्च आया। जैसे जैसे इस खर्च में कमी आती जाएगी अधिक से अधिक प्रयोगशालाओं इनपर काम करना शुरू कर देंगी। sabhar :http://www.amarujala.com
भगवान श्री कृष्ण की थाली यहां पर आज भी मौजूद है
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जनवरी 05, 2014 in भगवान श्री कृष्ण की थाली यहां पर आज भी मौजूद है

भगवान श्री कृष्ण अपनी लीला दिखाकर वापस गोलोक चले गए लेकिन उनकी लीला की निशानी आज भी श्री कृष्ण के होने का एहसास दिलाते हैं। ऐसी ही एक निशानी है श्री कृष्ण की थाली।
अगर आप भी श्री कृष्ण की थाली देखना चाहते हैं तो भगवान की जन्मस्थली मथुरा से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामां यानी काम्यवन आइए। यहां पर भगवान श्री कृष्ण ने व्योमासुर का वध किया था। व्योमासुर यहीं पास में एक गुफा में रहता था, जो आज भी इस घटन की गवाही देता है।
व्योमासुर का वध करने के बाद श्री कृष्ण ने एक कुंड में स्नान किया जिसे क्षीर सागर और कृष्ण कुंड के नाम से जाना जाता है। स्नान के बाद श्री कृष्ण ने ग्वाल सखाओं के संग भोजन किया। यहां पहाड़ी पर थाल और कटोरी का चिन्ह मौजूद है।
माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इसी थाल और कटोरे में भोजन किया था। माना जाता है कि भोजन की थाली के पास ही भगवान परशुराम जी ने तपस्या की थी। sabhar : http://www.amarujala.com
भगवान श्री कृष्ण अपनी लीला दिखाकर वापस गोलोक चले गए लेकिन उनकी लीला की निशानी आज भी श्री कृष्ण के होने का एहसास दिलाते हैं। ऐसी ही एक निशानी है श्री कृष्ण की थाली।
अगर आप भी श्री कृष्ण की थाली देखना चाहते हैं तो भगवान की जन्मस्थली मथुरा से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामां यानी काम्यवन आइए। यहां पर भगवान श्री कृष्ण ने व्योमासुर का वध किया था। व्योमासुर यहीं पास में एक गुफा में रहता था, जो आज भी इस घटन की गवाही देता है।
व्योमासुर का वध करने के बाद श्री कृष्ण ने एक कुंड में स्नान किया जिसे क्षीर सागर और कृष्ण कुंड के नाम से जाना जाता है। स्नान के बाद श्री कृष्ण ने ग्वाल सखाओं के संग भोजन किया। यहां पहाड़ी पर थाल और कटोरी का चिन्ह मौजूद है।
माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इसी थाल और कटोरे में भोजन किया था। माना जाता है कि भोजन की थाली के पास ही भगवान परशुराम जी ने तपस्या की थी। sabhar : http://www.amarujala.com
राकेश झा
टीम डिजिटल
मरने से पहले ही लोगों को बता दिया था कि अब मौत आने वाली है
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जनवरी 05, 2014 in मरने से पहले ही लोगों को बता दिया था कि अब मौत आने वाली
कहते हैं मौत बताकर नहीं आती है जब मौत आनी होती है दबे पांव आती है और जिसे ले जाना होता है उसे अपने साथ लेकर चली जाती है।
लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हुए हैं जिन्हें पहले ही पता चल गया था कि अब उनके जाने का समय हो गया है। इन्होंने मरने से पहले ही लोगों को बता दिया था कि अब मौत आने वाली है। जब मरे तो लोग हैरान रह गए।

लिंकन ने यह बात अपनी पत्नी को बताई। इस घटना के महज कुछ घंटे के बाद लिंकन की हत्या कर दी गई। और इनका पूर्वाभास सच साबित हुआ।
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लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हुए हैं जिन्हें पहले ही पता चल गया था कि अब उनके जाने का समय हो गया है। इन्होंने मरने से पहले ही लोगों को बता दिया था कि अब मौत आने वाली है। जब मरे तो लोग हैरान रह गए।
इस पूर्व प्रधानमंत्री को पता था मौत आने वाली है
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपना अंतिम भाषण उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में दिया था। इंदिरा गांधी ने कहा था कि मुझ पर कई बार हमले हो चुके हैं। मुझे मारने की हर संभव कोशिश की जा रही है। लेकिन मुझे इसकी परवाह नहीं है कि मैं जीवित रहूं या मर जाऊं।
लेकिन अपनी अंतिम सांस तक देश की सेवा करती रहूंगी। मेरे शरीर की एक एक बूंद देश को मजबूत और शक्तिशाली बनाएगा। इस भाषण के ठीक के दिन बाद यानी 31 अक्तूबर को इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी।
लेकिन अपनी अंतिम सांस तक देश की सेवा करती रहूंगी। मेरे शरीर की एक एक बूंद देश को मजबूत और शक्तिशाली बनाएगा। इस भाषण के ठीक के दिन बाद यानी 31 अक्तूबर को इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी।
जब महात्मा गांधी ने कही यह बात
20 जनवरी 1948 के बाद महात्मा गांधी अपनी पौत्री मनु से कई बार 'हत्यारे की गोलियां या 'गोलियों की बौछार के बारे में बातें की थीं, जो बुराई की आशंका में नहीं वरना अपने सार्थक जीवन के अन्त के रूप में थी, जिसका आभास उन्हें हो चुका था।
अपनी मृत्यु से एक दिन पहले 29 जनवरी को उन्होंने मनु से कहा था, यदि कोई मुझे गोली मारे और मैं उस गोली को अपने खुले सीने पर बिना पीड़ा से कराहे ले लूं और मेरी जुबान पर राम का नाम हो, तभी तुम्हें कहना चाहिए कि मैं एक सच्चा महात्मा था।
30 जनवरी 1948 को वह घड़ी भी आ पहुंची, जब गांधीजी का पूर्वाभास सच होने वाला था। अपनी पौत्रियों मनु और आभा का सहारा लेकर वह प्रतिदिन होने वाली प्रार्थना सभा में पहुंचे।
अभी उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर लोगों को अभिवादन स्वीकार ही किया था कि एक नवयुवक ने मनु को झटका देकर और गांधीजी के आगे घुटनों के बल अभिवादन के अन्दाज में झुककर तीन गोलियां दाग दीं।
अपनी मृत्यु से एक दिन पहले 29 जनवरी को उन्होंने मनु से कहा था, यदि कोई मुझे गोली मारे और मैं उस गोली को अपने खुले सीने पर बिना पीड़ा से कराहे ले लूं और मेरी जुबान पर राम का नाम हो, तभी तुम्हें कहना चाहिए कि मैं एक सच्चा महात्मा था।
30 जनवरी 1948 को वह घड़ी भी आ पहुंची, जब गांधीजी का पूर्वाभास सच होने वाला था। अपनी पौत्रियों मनु और आभा का सहारा लेकर वह प्रतिदिन होने वाली प्रार्थना सभा में पहुंचे।
अभी उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर लोगों को अभिवादन स्वीकार ही किया था कि एक नवयुवक ने मनु को झटका देकर और गांधीजी के आगे घुटनों के बल अभिवादन के अन्दाज में झुककर तीन गोलियां दाग दीं।
अब्राहम लिंकन ने की थी अपने मौत की भविष्यवाणी
अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को मारने की साजिश चल रही थी। इसी दौरान एक दिन लिंकन ने सपना देखा कि उनकी हत्या कर दी गई है।लिंकन ने यह बात अपनी पत्नी को बताई। इस घटना के महज कुछ घंटे के बाद लिंकन की हत्या कर दी गई। और इनका पूर्वाभास सच साबित हुआ।
उसने कहा कल सूर्योदय से पहले वह मर चुका होगा
महान ज्योतिषी नस्त्रेदमस ने अपनी मृत्यु से पूर्व अपने मौत की घोषणा कर दी थी। 1 जुलाई1566 को जब एक पुरोहित उनसे मिलने आया तो नस्त्रेदमस ने उनसे अपने बारे में कहा कि 'वह कल सूर्योदय होने तक मर चुके होंगे।
कुछ ऐसी महान हस्तियां हैं जिन्हें मरने से पहले ही पता चल गया था कि मौत आने वाली है।
कुछ ऐसी महान हस्तियां हैं जिन्हें मरने से पहले ही पता चल गया था कि मौत आने वाली है।
ओशो का चिंतन..जीवन में सतत क्रांति
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जनवरी 05, 2014 in ओशो का चिंतन..जीवन में सतत क्रांति
क्रांति आज के समय में सतत चलती रहती है। इसका हिस्सा बनना चाहते हैं तो बदलाव के लिए तैयार रहना होगा। ओशो का चिंतन..
अतीत के इतिहास में क्रांतियां होती थीं और समाप्त हो जाती थीं, लेकिन आज हम सतत क्रांति में जी रहे हैं। पहले क्रांति एक घटना थी, अब क्रांति जीवन है। पहले क्रांति समाप्त होती थी, अब वह समाप्त नहीं होगी। आने वाले भविष्य में मनुष्य को सतत क्रांति और परिवर्तन में ही रहना होगा।
अब तक मनुष्य स्थायी समाज का नागरिक था। अब वह सतत क्रांति का नागरिक हो सके, इसका ध्यान रखना जरूरी है। भविष्य के मनुष्य या नए मनुष्य के संबंध में सोचते समय पहली बात यह सोच लेनी जरूरी है कि परिर्वतन के जगत में जहां रोज सब बदल जाएगा, हम कैसी नीति विकसित करें? हम कैसा आचरण विकसित करें? फिर से पुनर्विचार करना जरूरी हो गया है। अब तक के सारे आदर्श और मूल्य जिस ढांचे में विकसित किए गए थे, वे भविष्य के मनुष्य के काम के नहीं रह गए हैं। पहले जिस मनुष्य को बनाने की कोशिश की गई थी, वह भय के ऊपर खड़ा था। वह बुरा न करे, इसलिए नर्क के भय से हमने उसे पीड़ित किया था और वह अच्छा कर सके, इसलिए स्वर्ग के प्रलोभन दिए थे। लेकिन आज स्वर्ग और नर्क दोनों ही विलीन हो गए हैं, उनके साथ ही वह नैतिकता भी विलीन हो रही है, जो भय और प्रलोभन पर खड़ी थी।
एक चर्च के स्कूल में एक पादरी बच्चों को नीति की शिक्षा देने आता था। उसने बच्चों को छोटी-सी कहानी सुनाई। इसके जरिये वह बच्चों को समझाना चाहता था कि नैतिक साहस मनुष्य के जीवन में बहुत जरूरी चीज है। वह कहानी थी, 'तीस बच्चे किसी पर्वत पर घूमने गए। वे दिन भर में थक गए। रात हो गई। भयंकर सर्दी पड़ रही थी। रजाई वाले बिस्तर तैयार थे और सबको नींद भी आ रही थी। उन्तीस बच्चे सो गए, लेकिन एक बच्चा अपनी रात्रि की अंतिम प्रार्थना करने के लिए अंधेरे कोने में ठंड से सिकुड़ा हुआ बैठा है।' पादरी ने बच्चों को कहा, 'वह जो एक है, उसमें बड़ा नैतिक साहस है उन्तीस के विरोध में जाने का। एक बच्चा अपनी रात्रि की अंतिम प्रार्थना पूरी किए बिना नहीं सोता, उसमें बड़ा नैतिक साहस है।'
पादरी सात दिन बाद वापस आया। उसने बच्चों से कहा, 'एक हफ्ते पहले मैंने तुम्हें नैतिक साहस की कहानी सुनाई थी, अब तुम मुझे नैतिक साहस की कोई कहानी सुनाओ?' एक बच्चा खड़ा हुआ। उसने कहा, 'मेरी कहानी में और भी ज्यादा नैतिक साहस है।' बच्चे ने कहानी सुनाई - 'तीस पादरी
पहाड़ पर गए। वे दिन भर थके-मांदे वापस लौटे। बहुत ठंड पड़ रही है। बिस्तर उन्हें पुकार रहे हैं, लेकिन उन्तीस पादरी प्रार्थना करने बैठ गए और एक पादरी सोने चला गया है। उस एक पादरी में बहुत नैतिक साहस है, उन्तीस पादरियों के विरोध में जाने का।'
यह आज का नया मनुष्य है। पिछली सदी के किसी बच्चे ने यह न सोचा होगा। जब उन्तीस लोग इसलिए प्रार्थना कर रहे हों कि जो प्रार्थना नहीं करेगा, वह नर्क भेज दिया जाएगा, ऐसे में एक आदमी का प्रार्थना करने के बजाय बिस्तर पर जाना बहुत साहस की बात है। यह साहस आज किया जा सकता है, क्योंकि नर्क और स्वर्ग हवाई कल्पनाओं से ज्यादा नहीं रह गए हैं। आज आदमी निर्भय है। इस निर्भय आदमी पर पुरानी नीति लागू नहीं हो सकती।
..तो फिर क्या मनुष्य को अनीति में छोड़ देना है? क्या मनुष्य के निर्भय होने का अर्थ यह होगा कि वह अनैतिक हो? अगर यह होगा तो समाज निरंतर गहरे खतरों में पड़ जाएगा। क्योंकि नैतिक होना बहुत जरूरी है। नैतिक होने का एक ही अर्थ है कि मैं दूसरे व्यक्ति की भी चिंता करता हूं। मैं अकेला नहीं हूं। हमारे चारों तरफ पड़ोसियों का बड़ा जाल है और मैं पड़ोसी के लिए भी दायित्वपूर्ण हूं। उसे दुख न पहुंचे, इस भांति जीता हूं। नैतिकता का आधार इतना है।
आदमी को अब डराकर नैतिक नहीं बनाया जा सकता। पुराना आदमी बुद्धि खोकर नैतिक था। बुद्धि खोकर नैतिक होना अनैतिक होने से भी बदतर है। पुराना आदमी नैतिक था व्यक्तित्व खोकर। व्यक्तित्व खोकर नैतिक होना अनैतिक होने से भी बुरा है। पुराना आदमी समूह का एक अंग था, व्यक्ति नहीं। उसके पास कोई व्यक्तित्व न था। वह जातिवादी समूहों में बंद था। वह समूह के खिलाफ इंचभर चलता तो कुएं पर पानी पीना बंद, हुक्का बंद, भोजन बंद, विवाह बंद..।
नए दौर में हमें सब बदल देना पड़ेगा। अब नई नीति- स्वस्थ, सुखी आदमी को, मुस्कराते आदमी को स्वीकार करेगी। हमें बुद्ध और महावीर की नई मूर्तियां ढालनी होंगी, जिनमें वे खिलखिलाकर हंस रहे हों। नए आदमी को सुखी, स्वस्थ्य और आनंदित- किसी स्वर्ग में नहीं, बल्कि इस पृथ्वी पर ही अनुभव कराना पड़ेगा। sabhar : http://www.jagran.com
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