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सोमवार, 6 जनवरी 2014

एक बछड़ा पैदा हुआ है, जिसके दो मुंह हैं और यह दोनों से ही खाना खाता है

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विचित्र मामला: दो मुंह वाला बछड़ा हुआ पैदा, दोनों मुंह से खाता है खाना

दो मुंह वाला बछड़ा, यह सुनकर काफी विचित्र लगता है। जी हां, ऐसा ही एक बछड़ा पैदा हुआ है, जिसके दो मुंह हैं और यह दोनों से ही खाना खाता है।यह मोरक्को की सिटी ऑफ फेस से 20 किमी दूर सेफ्रोउ नाम के एक गांव में पैदा हुआ है।
गांव के आसपास के लोग बड़ी संख्या में इसे देखने के लिए आ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस बछड़े का नाम साना सैइदा रखा है।इसका जन्म 30 दिसंबर 2013 को हुआ है।लोग इसे न्यू ईयर के गिफ्ट की तरह मान रहे हैं।

विचित्र मामला: दो मुंह वाला बछड़ा हुआ पैदा, दोनों मुंह से खाता है खाना
इस बछड़े के दो मुंह होने के पीछे सेफैलिक डिसआर्डर है। यह पॉलीसेफैली कंडीशन की तरह है, जिसमें एक से अधिक मुंह होता है। सांप और कछुओं में यह स्थिति आमतौर पर पाई जाती है।
विचित्र मामला: दो मुंह वाला बछड़ा हुआ पैदा, दोनों मुंह से खाता है खाना

विचित्र मामला: दो मुंह वाला बछड़ा हुआ पैदा, दोनों मुंह से खाता है खाना

2011 में दो मुंह वाली एक शार्क फ्लोरिडा समुद्री तट पर मिली थी। इसके दो मुंह थे। इसे देखकर मरीन बायोलॉजी से जुड़े वैज्ञानिक भी आश्चर्य चकित रह गए थे।

विचित्र मामला: दो मुंह वाला बछड़ा हुआ पैदा, दोनों मुंह से खाता है खाना

2011 में जब फ्लोरिडा में दो मुंह वाली शार्क मिली थी, तब ठीक उसी समय घाना में दो मुंह वाला मेमना पैदा हुआ था।

चीन में दिसंबर 2013 में जियांगसी प्रांत की राजधानी नानचांगएक विचित्र सुअर का बच्चा पैदा हुआ। इस सुअर के दो मुंह हैं और मुंह से  एक जुड़ा हुआ दूसरा मुंह है। इसके दो नाक, दो मुंह और तीन आंखें हैं। किसान जेनशेंग ने कहा कि यह नवजात सुअर जब दूध पीने की कोशिश करता है तो वह हिचकिचाता है कि कौन सा मुंह दूध पीने के लिए उपयोग करे।जब भी एक मुंह निप्पल को चूसता है तो दूसरा मुंह भी निप्पल्स को चूसने की कोशिश करता है, लेकिन दोनों विफल रहते हैं। पशु विशेषज्ञों का कहना कि यह सुअर जिंदा रहेगा। उसके दो मुंह होने को पशुविज्ञान में पॉलिसेफाली कहते हैं।
विचित्र मामला: दो मुंह वाला बछड़ा हुआ पैदा, दोनों मुंह से खाता है खाना

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मौत से जुड़े ये सबसे गहरे राज

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खुद यमराज ने ही खोले थे मौत से जुड़े ये सबसे गहरे राज
जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु तय है, फिर वह अपना हो या पराया। यह सत्य हर कोई जानता है कि काल की घड़ी में राजा हो या रंक, छोटा हो या बड़ा सभी बराबर हो जाते हैं, जो अक्सर नजर भी आता है। किंतु जीवन में कई तरह की वासनाएं इंसान को इस सच से अनजान बनाती है और वह एक-दूसरे के लिए ऊंच-नीच के कई दोष व क्लेशों में जकड़ा रहता है।  
यह भी वजह है जब भी मृत्यु से जुड़ा कोई भी विषय या घटना इंसान के सामने आती है तो वह उसे जानने के लिए आतुर हो जाता है। मृत्यु से जुड़े किसी भी विषय को लेकर उसकी यह जिज्ञासा आजीवन बनी रहती है। असल में, मृत्यु क्या है और खासतौर पर मृत्यु के बाद क्या होता है? यह जान लेना किसी भी आम इंसान के लिए मुश्किल है या यूं कहें कि मुमकिन नहीं है। 
प्राचीन हिन्दू धर्मशास्त्रों में मृत्यु से जुड़ी सारी जिज्ञासाओं को शांत करने वाले ऐसे ही रहस्य भी उजागर हैं, जो माना जाता है कि मृत्यु से जुड़े सत्य जानने ही जिद पर अड़े 1 मासूम बच्चे के सामने स्वयं मृत्यु के देवता यमराज को भी उजागर करने पड़े।
हिन्दू धर्मग्रंथ कठोपनिषद में मृत्यु और आत्मा से जुड़े कई रहस्य उजागर हैं, जिसका आधार बालक नचिकेता और यमराज के बीच हुए मृत्यु के रहस्य व आत्मज्ञान से जुड़ा संवाद है। नचिकेता वह बालक था, जिसकी पितृभक्ति और आत्म ज्ञान की जिज्ञासा के आगे मृत्यु के देवता यमराज को भी झुकना पड़ा।
विलक्षण बालक नचिकेता से जुड़ा यह प्रसंग न केवल पितृभक्ति, बल्कि गुरु-शिष्य संबंधों के लिए भी बड़ी मिसाल है। प्रसंग के मुताबिक वाजश्रवस (उद्दालक) ऋषि नचिकेता के पिता थे। एक बार उन्होंने विश्वजीत नामक ऐसा यज्ञ किया, जिसमें सब कुछ दान कर दिया जाता है। किंतु दान के वक्त नचिकेता यह देखकर बेचैन हुआ कि पिता ने स्वस्थ गायों के बजाए कमजोर, बीमार गाएं दान कर रहें हैं। तीक्ष्ण व सात्विक बुद्धि का बालक नचिकेता ने समझ लिया कि पुत्र मोह के वशीभूत भी उनके पिता ऐसा कर रहे हैं। 
मोह दूर कर धर्म-कर्म करवाने के लिए ही नचिकेता ने पिता से सवाल किया कि वे मुझे किसे देंगे। उद्दालक ऋषि ने इस सवाल को टाला, पर नचिकेता नहीं माना और उसके बार-बार सवाल पूछने से क्रोधित ऋषि ने कह दिया कि तुझे मृत्यु (यमराज) को दूंगा। पिता को यह बोलने का दु:ख भी हुआ। किंतु सत्य की रक्षा के लिए नचिकेता ने मृत्यु को दान करने का संकल्प पिता से पूरा करवाया।
खुद यमराज ने ही खोले थे मौत से जुड़े ये सबसे गहरे राज
यम के दरवाजे पर पहुंचने पर नचिकेता को पता चला कि यमराज वहां नहीं है, फिर भी उसने हार नही मानी और तीन दिन तक वहीं पर बिना खाए-पिए डटे रहे। यम ने लौटने पर द्वारपाल से नचिकेता बारे में जाना तो उस बालक की पितृभक्ति और कठोर संकल्प से बहुत खुश हुए। यमराज ने नचिकेता की पिता की आज्ञा के पालन व तीन दिन तक कठोर प्रण करने के लिए तीन वर मांगने के लिए कहा। 
तब नचिकेता ने पहला वर पिता का स्नेह मांगा। दूसरा अग्नि विद्या जानने बारे में था। तीसरा वर मृत्यु रहस्य और आत्मज्ञान को लेकर था। यम ने आखिरी वर को टालने की भरपूर कोशिश की और नचिकेता को आत्मज्ञान के बदले कई सांसारिक सुख-सुविधाओं को देने का लालच दिया। लेकिन नचिकेता के आत्मज्ञान जानने के इरादे इतने पक्के थे कि वह अपने सवालों पर टिका रहा। नचिकेता ने नाशवान कहकर भोग-विलास की सारी चीजों को नकार दिया और शाश्वत आत्मज्ञान पाने का रास्ता ही चुना। आखिरकार, विवश होकर यमराज को मृत्यु के रहस्य, जन्म-मृत्यु से जुड़ा आत्मज्ञान देना पड़ा।
खुद यमराज ने ही खोले थे मौत से जुड़े ये सबसे गहरे राज

क्या है आत्मज्ञान और परमात्मा का स्वरूप? 
मृत्यु से जुड़े रहस्यों को जानने की शुरुआत बालक नचिकेता ने यमदेव से धर्म-अधर्म से संबंध रहित, कार्य-कारण रूप प्रकृति, भूत, भविष्य और वर्तमान से परे परमात्म तत्व के बारे में जिज्ञासा कर की। यमदेव ने नचिकेता को 'ॐ' को प्रतीक रूप में परब्रह्म का स्वरूप बताया। उन्होंने बताया कि अविनाशी प्रणव यानी ऊंकार ही परमात्मा का स्वरूप है। यानी ब्रह्म और परब्रह्न दोनों का नाम ही ऊंकार है। ऊंकार ही परमात्मा को पाने के सभी आश्रयों में सबसे सर्वश्रेष्ठ और अंतिम जरिया है। सारे वेद कई तरह के छन्दों व मंत्रों में यही रहस्य उजागर है। जिनका सार यही है कि जगत में परमात्मा के इस नाम व स्वरूप की शरण लेना ही सबसे बेहतर उपाय है।

खुद यमराज ने ही खोले थे मौत से जुड़े ये सबसे गहरे राज

कैसे ह्रदय में माना जाता है परमात्मा का वास?
मनुष्य का ह्रदय ब्रह्म को पाने का स्थान माना जाता है। यमदेव के मुताबिक मनुष्य ही परमात्मा को पाने का अधिकारी माना गया है। उसका ह्रदय अंगूठे की माप का होता है। इसलिए इसके मुताबिक ही ब्रह्म को अंगूठे के आकार का पुकारा गया है और अपने ह्दय में भगवान का वास मानने वाला यह मानता है कि दूसरों के ह्रदय में भी ब्रह्म इसी तरह मौजूद है। इसलिए वह परनिंदा या घृणा से दूर रहता है।

खुद यमराज ने ही खोले थे मौत से जुड़े ये सबसे गहरे राज

क्या है आत्मा का स्वरूप? 
यमदेव के मुताबिक शरीर के नाश होने के साथ जीवात्मा का नाश नहीं होता। आत्मा का भोग-विलास, नाशवान, अनित्य और जड़ शरीर से इसका कोई लेना-देना नहीं है। यह अनन्त, अनादि और दोष रहित है। इसका कोई कारण है, न कोई कार्य यानी इसका न जन्म होता है, न मरती है। 
किस तरह शरीर से होता है ब्रह्म का ज्ञान व दर्शन?
मनुष्य शरीर दो आंखं, दो कान, दो नाक के छिद्र, एक मुंह, ब्रह्मरन्ध्र, नाभि, गुदा और शिश्न के रूप में 11 दरवाजों वाले नगर की तरह है, जो अविनाशी, अजन्मा, ज्ञानस्वरूप, सर्वव्यापी ब्रह्म की नगरी ही है। वे मनुष्य के ह्रदय रूपी महल में राजा की तरह रहते हैं। इस रहस्य को समझ जो मनुष्य जीते जी भगवद् ध्यान और चिन्तन करता है, वह शोक में नहीं डूबता, बल्कि शोक के कारण संसार के बंधनों से छूट जाता है। शरीर छूटने के बाद विदेह मुक्त यानी जनम-मरण के बंधन से भी मुक्त हो जाता है। उसकी यही अवस्था सर्वव्यापक ब्रह्म रूप है। 
क्या आत्मा मरती या मारती है?  
जो लोग आत्मा को मारने वाला या मरने वाला माने वे असल में आत्म स्वरूप को नहीं जानते और भटके हुए हैं। उनके बातों को नजरअंदाज करना चाहिए। क्योंकि आत्मा न मरती है, न किसी को मार सकती है। 
क्या होते हैं आत्मा-परमात्मा से जुड़ी अज्ञानता व अज्ञानियों के परिणाम? 
जिस तरह बारिश का पानी एक ही होता है, किंतु ऊंचे पहाड़ों की ऊबड़-खाबड़ बरसने से वह एक जगह नहीं रुकता और नीचे की और बहकर कई तरह के रंग-रुप और गंध में बदला चारों तरफ फैलता है। उसी तरह एक ही परमात्मा से जन्में देव, असुर और मनुष्यों को जो भगवान से अलग मानता और अलग मानकर ही उनकी पूजा, उपासना करता है, उसे बारिश के जल की तरह ही सुर-असुर के लोकों और कई योनियों में भटकना पड़ता है।
खुद यमराज ने ही खोले थे मौत से जुड़े ये सबसे गहरे राज


कैसा है ब्रह्म का स्वरूप यानी वह कहां और कैसे प्रकट होते हैं?


ब्रह्म प्राकृतिक गुण से परे, स्वयं दिव्य प्रकाश स्वरूप अन्तरिक्ष में प्रकट होने वाले वसु नामक देवता है। वे ही अतिथि के तौर पर गृहस्थों के घरों में उपस्थित रहते हैं, यज्ञ की वेदी में पवित्र अग्रि और उसमें आहुति देने वाले होते हैं। इसी तरह सारे मनुष्यों, श्रेष्ठ देवताओं, पितरों, आकाश और सत्य में स्थित होते हैं। जल में मछली हो या शंख, पृथ्वी पर पेड़-पौधे, अंकुर, अनाज, औषधि तो पर्वतों में नदी, झरनों और यज्ञ फल के तौर पर भी ब्रह्म ही प्रकट होते हैं। इस तरह ब्रह्म प्रत्यक्ष, श्रेष्ठ और सत्य तत्व हैं। 

आत्मा के जाने पर शरीर में क्या रह जाता है? 
एक शरीर से दूसरे शरीर में आने-जाने वाली जीवात्मा जब वर्तमान शरीर से निकल जाती है, तो उसके साथ जब प्राण व इन्द्रिय ज्ञान भी निकल जाता है, तो मृत शरीर में क्या बाकी रहता है, यह नजर तो कुछ नहीं आता, किंतु असल में वह परब्रह्म उसमें रह जाता है, जो हर चेतन और जड़ प्राणी व प्रकृति में सभी जगह, पूर्ण शक्ति व स्वरूप में हमेशा मौजूद होता है। 
खुद यमराज ने ही खोले थे मौत से जुड़े ये सबसे गहरे राज

मृत्यु के बाद जीवात्मा को क्यों और कौन सी योनियां मिलती हैं?
यमदेव के मुताबिक अच्छे और बुरे कामों और शास्त्र, गुरु, संगति, शिक्षा और व्यापार के जरिए देखे-सुने भावों से पैदा भीतरी वासनाओं के मुताबिक मरने के बाद जीवात्मा दूसरा शरीर धारण करने के लिए वीर्य के साथ माता की योनि में प्रवेश करती है। इनमें जिनके पुण्य-पाप समान होते हैं वे मनुष्य का और जिनके पुण्य से भी ज्यादा पाप होते हैं, वे पशु-पक्षी के रूप में जन्म लेते हैं। जो बहुत ज्यादा पाप करते हैं, वे पेड़-पौधे, लता, तृण या तिनके, पहाड़ जैसी जड़ योनियों में जन्म लेते हैं।  sabhar : bhaskar.com



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रविवार, 5 जनवरी 2014

वस्तुओं को हवा में स्थानांतरित करने के लिए ध्वनि का प्रयोग :क्या भारतीय योग विद्या को मान रही है

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जापानी वैज्ञानिकों द्वारा वस्तुओं को हवा में स्थानांतरित करने के लिए ध्वनि का प्रयोग


भारतीय योग विद्या की वैज्ञानिक पुष्टि हो रही है और मंत्रा शक्ति की भी ताकत भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित  प्रतीत होती है 
टोक्यो विश्वविद्यालय और नागोया प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने ध्वनिक उत्तोलन की एक जटिल प्रणाली के माध्यम से छोटी वस्तुओं को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया। ध्वनि तरंगों ने छोटी-छोटी चीज़ों को त्रिआयामी वायुमण्डल में एक जगह से दूसरी जगह पहुँचा दिया।
वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस प्रयोग में 20 किलोहार्ट्स से ऊँची ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें मानव के कान सुन नहीं सकते हैं। ये ध्वनि तरंगे चारों तरफ़ से आकर एक सीमित स्थान के भीतर एक दूसरे को काटती हैं, इस तरह नन्ही चीज़ें इन ध्वनि-तरंगों में फँस जाती हैं और वायुमण्डल में लटक-सी जाती हैं। इन ध्वनि तरंगों की दिशा बदलने पर वे उस नन्हीं चीज़ को भी अपने साथ घुमाती हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ध्वनिक-उत्तोलन - गुरुत्वाकर्षण को काबू में कर लेता है। इसलिए नासा जैसे संगठन इस समय भी ध्वनिक उत्तोलक उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। तो क्या भारत के योग ऋषि इसी विधि का प्रयोग करते थे  मंत्रो के द्वारा हवा मे जमीन से उठ जाया करते थे हवा मे तैरने लगते थे | sabhar :http://hindi.ruvr.ru

और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/news/2014_01_03/258032466/

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इंटलिजेंट रोबोट्स किराने की दुकानों में

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robot artificial intelligence

ये सच है कि इंटलिजेंट रोबोट्स हमें सबसे पहले शायद किराने की दुकानों में भुगतान की क़तारों के पास नजर आएं।

किराना दुकानों में काम करने के लिए तैयार किए जा रहे पीआर-2 रोबोट्स फैक्ट्रियों में काम करने वाले रोबोट से अधिक होशियार हैं।

फैक्ट्रियों में काम करने वाले रोबोट को बस एक ही काम को बार-बार दोहराने के लिए तैयार किया गया है।

अमरीका के कोर्नेल विश्वविद्यालय में पीआर-2 पर काम कर रहे असिस्टेंट प्रोफेसर आशुतोष सक्सेना का कहना है कि इन रोबोट्स को अभी भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

रोबोट्स के लिए आज भी सबसे बड़ी चुनौती है, परिवेश और परिस्थितियों को समझ पाना और अगर किसी वजह से उनमें थोड़ी तबदीली हो गई हो तो भी उसके मुताबिक़ काम को अंजाम दे पाने की क्षमता रखना।

रोबोट में आपराधिक प्रवृत्ति

लेकिन घबराए नहीं बैक्सटर में वैसी आपराधिक प्रवृत्ति नहीं पैदा होगी कि वो किसी का कत्ल कर दें, लेकिन अगर ऐसा हुआ भी तो ये महज़ एक दुर्घटना का नतीजा होगी।

कोर्नेल विश्वविद्यालय के छात्र इनमें कॉमन सेंस या व्यावहारिक बुद्दि की क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि किसी धारदार चीज़ को हाथ में लेते वक्त उनमें इससे पैदा होने वाले ख़तरे का एहसास हो सके।

बैक्सटर में इस तरह का एहसास पैदा करने की कोशिश भी की जा रही है कि वो ये जान सके कि आसानी से टूट सकने वाले सामानों को किस तरह संभालना है।

अगर कोई रोबोट स्थिति को समझने में चूक करता है तो साथ मौजूद ह्यूमन हैंडलर उसके हाथ की दिशा ठीक कर देता है। ऐसा करना तब तक जारी रहता है जब तक रोबोट में कुछ खास किस्म के काम कर सकने की समझ विकसित नहीं हो जाती है।
समझने की क्षमता
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कोर्नेल विश्वविद्यालय में शोध कर रहे छात्र आशीष जैन कहते हैं, "ये चीज़ों में फर्क करना सीख जाता है। जैसे अगर वो एक स्क्रू ड्राइवर को मूव कर रहा है तो वो सीख ले कि उसे इसके साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता। अगर वो अंडे के डब्बों को एक जगह से दूसरी जगह उठाकर रख रहा है तो उसे ये समझना होगा कि ये आसानी से टूट सकता है और उसे रखते वक्त हाथ को मेज की सतह के बहुत क़रीब ले जाना होगा।"

लेकिन रोबोट में अगल अलग चीज़ों को देखकर उनकी पहचान करने की क्षमता विकसित करना आसान काम नहीं है।

उसे ये सब कुछ सेंसर और कैमरों की मदद से करना सीखना है। इस काम में उसे तब बहुत आसानी होती है जब किसी जगह मौजूद सामान अलग-अलग रंग के हों। मशीनों में इस तरह की क्षमता तो दशकों से मौजूद रही है कि वो पहले से तय की गई चीज़ों को हैंडल कर पाएं।

लेकिन उनमें अभी भी मेज पर पड़ी अलग-अलग तरह की वस्तुओं में फर्क करने की समक्ष विकसित होने में समय लगेगा।

थ्रीडी कैमरों का इस्तेमाल

कोर्नेल विश्वविद्यालय के एक अन्य छात्र ईयान लेन्ज़ कहते हैं, "हमने थ्रीडी कैमरों का इस्तेमाल किया है लेकिन अभी भी इतने सूक्ष्म कैमरे नहीं तैयार हो पाए हैं कि हम उन्हें रोबोट्स के हाथों पर फिट कर पाएं। सोनार की सुविधा भी है लेकिन वो इस तरह के काम में बहुत सफल नहीं हो पाता है।"

रोबोट्स को विकसित करने वाले पिछले कुछ समय से उनमें पूर्वानिमान की क्षमता पैदा करने की कोशिश की जा रही है। मनुष्य अपनी जिंदगी का बहुत सारा काम हर क्षण इसके सहारे करते हैं, लेकिन मशीन में इस सामर्थ्य को विकसित करने के लिए हज़ारों कोड्स डालने पड़ते हैं।

हेमा कपुल्ला बताती हैं कि मनुष्यों के वीडियो को लगातार देखने के बाद इन रोबोट्स में इस बात की 75 फ़ीसद समझ विकसित हो गई है कि आनेवाले तीन सेकंड के भीतर क्या होने जा रहा है, लेकिन अगर समय तीन सेकंड से ज्यादा का होता है तो फिर इनकी सफलता का प्रतिशत कम हो जाता है।

उन्होंने बताया कि इंसानों के कामकाज दिखाने वाली ढेर सारी सामग्री इक्ठ्टा करते हैं और कोशिश करते हैं कि ये उससे सीखे। अगर एक व्यक्ति एक प्याली उठा रहा है तो इसका इस्तेमाल वो कुछ पीने के लिए करेगा या किसी और जगह रखेगा।

रोबोट को लेकर आशंकाएं

तो क्या ऐसा वक्त आएगा जब रोबोट्स दुनियां पर कब्जा कर लेंगे और इंसानों का वजूद ख़त्म हो जाएगा। अगर ऐसा हो सकता है तो भी ये कम से कम हमारे जीवनकाल में तो नहीं होने जा रहा है।

प्रोफेसर आशुतोष सक्सेना का मानना है कि ये हो सकता है कि वो किसी खास काम में इंसानों के साथ-साथ रहकर उनकी मदद करें। जैसे किसी सुपर मार्केट की आलमारियों में सामान रखने का काम।

उन्होंने बताया, "आने वाले दिनों में ये होगा कि इंसान और रोबोट्स मिलकर काम करेंगे जिससे काम में तेज़ी आएगी।"

हो सकता है कि ये सब आनेवाले कुछ दिनों में संभव हो जाए क्योंकि रोबोट पर रिसर्च करने और उन्हें विकसित करने की कीमतों में गिरावट आ रही है। जैसे पीआरटू को तैयार करने में तीन लाख डॉलर का ख़र्च आया। जैसे जैसे इस खर्च में कमी आती जाएगी अधिक से अधिक प्रयोगशालाओं इनपर काम करना शुरू कर देंगी। sabhar :http://www.amarujala.com

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भगवान श्री कृष्ण की थाली यहां पर आज भी मौजूद है

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भगवान श्री कृष्ण अपनी लीला दिखाकर वापस गोलोक चले गए लेकिन उनकी लीला की निशानी आज भी श्री कृष्ण के होने का एहसास दिलाते हैं। ऐसी ही एक निशानी है श्री कृष्ण की थाली।

अगर आप भी श्री कृष्ण की थाली देखना चाहते हैं तो भगवान की जन्मस्थली मथुरा से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामां यानी काम्यवन आइए। यहां पर भगवान श्री कृष्ण ने व्योमासुर का वध किया था। व्योमासुर यहीं पास में एक गुफा में रहता था, जो आज भी इस घटन की गवाही देता है।

व्योमासुर का वध करने के बाद श्री कृष्ण ने एक कुंड में स्नान किया जिसे क्षीर सागर और कृष्ण कुंड के नाम से जाना जाता है। स्नान के बाद श्री कृष्ण ने ग्वाल सखाओं के संग भोजन किया। यहां पहाड़ी पर थाल और कटोरी का चिन्ह मौजूद है।

माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इसी थाल और कटोरे में भोजन किया था। माना जाता है कि भोजन की थाली के पास ही भगवान परशुराम जी ने तपस्या की थी। sabhar : http://www.amarujala.com

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मरने से पहले ही लोगों को बता दिया था कि अब मौत आने वाली है

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कहते हैं मौत बताकर नहीं आती है जब मौत आनी होती है दबे पांव आती है और जिसे ले जाना होता है उसे अपने साथ लेकर चली जाती है।

लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हुए हैं जिन्हें पहले ही पता चल गया था कि अब उनके जाने का समय हो गया है। इन्होंने मरने से पहले ही लोगों को बता दिया था कि अब मौत आने वाली है। जब मरे तो लोग हैरान रह गए।
इस पूर्व प्रधानमंत्री को पता था मौत आने वाली है

इस पूर्व प्रधानमंत्री को पता था मौत आने वाली है


पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपना अंतिम भाषण उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में दिया था। इंदिरा गांधी ने कहा था कि मुझ पर कई बार हमले हो चुके हैं। मुझे मारने की हर संभव कोशिश की जा रही है। लेकिन मुझे इसकी परवाह नहीं है कि मैं जीवित रहूं या मर जाऊं।

लेकिन अपनी अंतिम सांस तक देश की सेवा करती रहूंगी। मेरे शरीर की एक एक बूंद देश को मजबूत और शक्तिशाली बनाएगा। इस भाषण के ठीक के दिन बाद यानी 31 अक्तूबर को इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी।
जब महात्मा गांधी ने कही यह बात

जब महात्मा गांधी ने कही यह बात

20 जनवरी 1948 के बाद महात्मा गांधी अपनी पौत्री मनु से कई बार 'हत्यारे की गोलियां या 'गोलियों की बौछार के बारे में बातें की थीं, जो बुराई की आशंका में नहीं वरना अपने सार्थक जीवन के अन्त के रूप में थी, जिसका आभास उन्हें हो चुका था।

अपनी मृत्यु से एक दिन पहले 29 जनवरी को उन्होंने मनु से कहा था, यदि कोई मुझे गोली मारे और मैं उस गोली को अपने खुले सीने पर बिना पीड़ा से कराहे ले लूं और मेरी जुबान पर राम का नाम हो, तभी तुम्हें कहना चाहिए कि मैं एक सच्चा महात्मा था।

30 जनवरी 1948 को वह घड़ी भी आ पहुंची, जब गांधीजी का पूर्वाभास सच होने वाला था। अपनी पौत्रियों मनु और आभा का सहारा लेकर वह प्रतिदिन होने वाली प्रार्थना सभा में पहुंचे।

अभी उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर लोगों को अभिवादन स्वीकार ही किया था कि एक नवयुवक ने मनु को झटका देकर और गांधीजी के आगे घुटनों के बल अभिवादन के अन्दाज में झुककर तीन गोलियां दाग दीं।

अब्राहम लिंकन ने की थी अपने मौत की भविष्यवाणी

अब्राहम लिंकन ने की थी अपने मौत की भविष्यवाणी

अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को मारने की साजिश चल रही थी। इसी दौरान एक दिन लिंकन ने सपना देखा कि उनकी हत्या कर दी गई है।

लिंकन ने यह बात अपनी पत्नी को बताई। इस घटना के महज कुछ घंटे के बाद लिंकन की हत्या कर दी गई। और इनका पूर्वाभास सच साबित हुआ।
उसने कहा कल सूर्योदय से पहले वह मर चुका होगा

उसने कहा कल सूर्योदय से पहले वह मर चुका होगा

महान ज्योतिषी नस्त्रेदमस ने अपनी मृत्यु से पूर्व अपने मौत की घोषणा कर दी थी। 1 जुलाई1566 को जब एक पुरोहित उनसे मिलने आया तो नस्त्रेदमस ने उनसे अपने बारे में कहा कि 'वह कल सूर्योदय होने तक मर चुके होंगे।

कुछ ऐसी महान हस्तियां हैं जिन्हें मरने से पहले ही पता चल गया था कि मौत आने वाली है।

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ओशो का चिंतन..जीवन में सतत क्रांति

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क्रांति आज के समय में सतत चलती रहती है। इसका हिस्सा बनना चाहते हैं तो बदलाव के लिए तैयार रहना होगा। ओशो का चिंतन..
अतीत के इतिहास में क्रांतियां होती थीं और समाप्त हो जाती थीं, लेकिन आज हम सतत क्रांति में जी रहे हैं। पहले क्रांति एक घटना थी, अब क्रांति जीवन है। पहले क्रांति समाप्त होती थी, अब वह समाप्त नहीं होगी। आने वाले भविष्य में मनुष्य को सतत क्रांति और परिवर्तन में ही रहना होगा।
अब तक मनुष्य स्थायी समाज का नागरिक था। अब वह सतत क्रांति का नागरिक हो सके, इसका ध्यान रखना जरूरी है। भविष्य के मनुष्य या नए मनुष्य के संबंध में सोचते समय पहली बात यह सोच लेनी जरूरी है कि परिर्वतन के जगत में जहां रोज सब बदल जाएगा, हम कैसी नीति विकसित करें? हम कैसा आचरण विकसित करें? फिर से पुनर्विचार करना जरूरी हो गया है। अब तक के सारे आदर्श और मूल्य जिस ढांचे में विकसित किए गए थे, वे भविष्य के मनुष्य के काम के नहीं रह गए हैं। पहले जिस मनुष्य को बनाने की कोशिश की गई थी, वह भय के ऊपर खड़ा था। वह बुरा न करे, इसलिए नर्क के भय से हमने उसे पीड़ित किया था और वह अच्छा कर सके, इसलिए स्वर्ग के प्रलोभन दिए थे। लेकिन आज स्वर्ग और नर्क दोनों ही विलीन हो गए हैं, उनके साथ ही वह नैतिकता भी विलीन हो रही है, जो भय और प्रलोभन पर खड़ी थी।
एक चर्च के स्कूल में एक पादरी बच्चों को नीति की शिक्षा देने आता था। उसने बच्चों को छोटी-सी कहानी सुनाई। इसके जरिये वह बच्चों को समझाना चाहता था कि नैतिक साहस मनुष्य के जीवन में बहुत जरूरी चीज है। वह कहानी थी, 'तीस बच्चे किसी पर्वत पर घूमने गए। वे दिन भर में थक गए। रात हो गई। भयंकर सर्दी पड़ रही थी। रजाई वाले बिस्तर तैयार थे और सबको नींद भी आ रही थी। उन्तीस बच्चे सो गए, लेकिन एक बच्चा अपनी रात्रि की अंतिम प्रार्थना करने के लिए अंधेरे कोने में ठंड से सिकुड़ा हुआ बैठा है।' पादरी ने बच्चों को कहा, 'वह जो एक है, उसमें बड़ा नैतिक साहस है उन्तीस के विरोध में जाने का। एक बच्चा अपनी रात्रि की अंतिम प्रार्थना पूरी किए बिना नहीं सोता, उसमें बड़ा नैतिक साहस है।'
पादरी सात दिन बाद वापस आया। उसने बच्चों से कहा, 'एक हफ्ते पहले मैंने तुम्हें नैतिक साहस की कहानी सुनाई थी, अब तुम मुझे नैतिक साहस की कोई कहानी सुनाओ?' एक बच्चा खड़ा हुआ। उसने कहा, 'मेरी कहानी में और भी ज्यादा नैतिक साहस है।' बच्चे ने कहानी सुनाई - 'तीस पादरी
पहाड़ पर गए। वे दिन भर थके-मांदे वापस लौटे। बहुत ठंड पड़ रही है। बिस्तर उन्हें पुकार रहे हैं, लेकिन उन्तीस पादरी प्रार्थना करने बैठ गए और एक पादरी सोने चला गया है। उस एक पादरी में बहुत नैतिक साहस है, उन्तीस पादरियों के विरोध में जाने का।'
यह आज का नया मनुष्य है। पिछली सदी के किसी बच्चे ने यह न सोचा होगा। जब उन्तीस लोग इसलिए प्रार्थना कर रहे हों कि जो प्रार्थना नहीं करेगा, वह नर्क भेज दिया जाएगा, ऐसे में एक आदमी का प्रार्थना करने के बजाय बिस्तर पर जाना बहुत साहस की बात है। यह साहस आज किया जा सकता है, क्योंकि नर्क और स्वर्ग हवाई कल्पनाओं से ज्यादा नहीं रह गए हैं। आज आदमी निर्भय है। इस निर्भय आदमी पर पुरानी नीति लागू नहीं हो सकती।
..तो फिर क्या मनुष्य को अनीति में छोड़ देना है? क्या मनुष्य के निर्भय होने का अर्थ यह होगा कि वह अनैतिक हो? अगर यह होगा तो समाज निरंतर गहरे खतरों में पड़ जाएगा। क्योंकि नैतिक होना बहुत जरूरी है। नैतिक होने का एक ही अर्थ है कि मैं दूसरे व्यक्ति की भी चिंता करता हूं। मैं अकेला नहीं हूं। हमारे चारों तरफ पड़ोसियों का बड़ा जाल है और मैं पड़ोसी के लिए भी दायित्वपूर्ण हूं। उसे दुख न पहुंचे, इस भांति जीता हूं। नैतिकता का आधार इतना है।
आदमी को अब डराकर नैतिक नहीं बनाया जा सकता। पुराना आदमी बुद्धि खोकर नैतिक था। बुद्धि खोकर नैतिक होना अनैतिक होने से भी बदतर है। पुराना आदमी नैतिक था व्यक्तित्व खोकर। व्यक्तित्व खोकर नैतिक होना अनैतिक होने से भी बुरा है। पुराना आदमी समूह का एक अंग था, व्यक्ति नहीं। उसके पास कोई व्यक्तित्व न था। वह जातिवादी समूहों में बंद था। वह समूह के खिलाफ इंचभर चलता तो कुएं पर पानी पीना बंद, हुक्का बंद, भोजन बंद, विवाह बंद..।
नए दौर में हमें सब बदल देना पड़ेगा। अब नई नीति- स्वस्थ, सुखी आदमी को, मुस्कराते आदमी को स्वीकार करेगी। हमें बुद्ध और महावीर की नई मूर्तियां ढालनी होंगी, जिनमें वे खिलखिलाकर हंस रहे हों। नए आदमी को सुखी, स्वस्थ्य और आनंदित- किसी स्वर्ग में नहीं, बल्कि इस पृथ्वी पर ही अनुभव कराना पड़ेगा। sabhar : http://www.jagran.com

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सोनाली बेंद्रे के ऐसे फोटोशूट्स

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जब कैमरे में कैद हुए सोनाली बेंद्रे के ऐसे फोटोशूट्स, देखें PICS
बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने 1 जनवरी को अपना 38 वां जन्मदिन मनाया। सोनाली बेंद्रे ने अपने करियर की शुरूआत 1994 से की थी। दुबली-पतली और सुंदर चेहरे वाली सोनाली ज्यादातर फिल्मों में ग्लैमर गर्ल के रूप में नजर आईं।

उनके सेक्सी फिगर के चर्चे हर तरफ होते थे। प्रतिभाशाली होने के बावजूद सोनाली को बॉलीवुड में ज्यादा अवसर नहीं मिल पाए।

खुद सोनाली को भी इस बात का मलाल रहा कि उनके सेक्सी फिगर पर ही सबकी नजरें गईं मगर उनके एक्टिंग टैलेंट की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया।

सोनाली आमिर और शाहरुख खान जैसे सितारों की नायिका भी बनीं। 'सरफरोश' जैसी सुपर हिट फिल्म में आमिर खान की हीरोइन रह चुकीं सोनाली ने शादी के बाद बड़े परदे से दूरी बना ली थी। उन्होंने जाने माने फ़िल्म निर्माता गोल्डी बहल से शादी की है। दोनों का एक बेटा भी है जिसका नाम रणवीर है।

सोनाली ने अपने करियर के दौरान कुछ फोटोशूट्स भी कराये। इनमें उन्होंने कुछ बोल्ड पोज भी दिए मगर इनमें से कुछ पोज अजीबोगरीब भी थे।

जब कैमरे में कैद हुए सोनाली बेंद्रे के ऐसे फोटोशूट्स, देखें PICS

जब कैमरे में कैद हुए सोनाली बेंद्रे के ऐसे फोटोशूट्स, देखें PICS

जब कैमरे में कैद हुए सोनाली बेंद्रे के ऐसे फोटोशूट्स, देखें PICS

जब कैमरे में कैद हुए सोनाली बेंद्रे के ऐसे फोटोशूट्स, देखें PICS

जब कैमरे में कैद हुए सोनाली बेंद्रे के ऐसे फोटोशूट्स, देखें PICS

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शनिवार, 4 जनवरी 2014

कैमरे की जरूरत नहीं पड़ेगी

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यदि आप बेहतर कैमरे के साथ शानदार फीचर्स वाला हाइ एंड स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं तो जोलो क्यू 3000 से बेहतर शायद ही कोई दूसरा हो. कंपनी ने अपने इस फोन को 13 मेगापिक्सल कैमरे के साथ हाल ही में बाजार में उतारा है.
जोलो क्यू 3000 की कीमत भारतीय बाजार में 20,999 रूपए रखी गई है, जबकि फीचर्स के मामले में माइक्रोमैक्स केनवस डूडल 2 को चुनौति देने वाला है.
जोलो क्यू 3000 के फीचर्स की बात करें तो इसमें 5.7 इंच की डिस्पले स्क्रीन दी गई जिसका रेजोल्यूशन 1920*1080 पिक्सल है, जबकि स्क्रीन में 396 पिक्सल पर इंच हैं.
बेतहर स्पीड के लिए इस आकर्षक जोलो फोन में मीडियाटेक क्वॉडकोर प्रोसेसर दिया गया है जो 1.5 गीगाहर्टज की स्पीड से रन करता है. जिसकी वजह से हाईडेफिनेशन वीडियो देखने के साथ कई प्रकार के गेम आसानी से खेल सकते हैं.
जोलो क्यू 3000 में लगा 13 मेगापिक्सल कैमरा 1080 पिक्सल क्वालिटी के साथ वीडियो रिकॉर्डिग करता है. जबकि वीडियो चेटिंग या सेल्फी के लिए इसके फ्रंट में 5 एमपी का कैमरा दिया गया है.
जोलो क्यू 3000 की इंटरनल मेमोरी 16 जीबी है, जबकि रैम 2 जीबी की है. इसमें लगी 4000 एमएएच की बैटरी 21 घंटे का टॉक टाम तथा 634 घंटे का स्टैंडबॉय टाइम देती है.
एंड्रॉयड 4.2 जैलीबीन ओएस पर चलने वाला वाला यह जोलो स्मार्टफोन दो सिम सपोर्ट करता है. इसके अलावा यह 3जी, वाय-फाय, ब्लूटूथ 4.0 जैसे कनेक्टीविटी ऑप्शंस सपोर्ट करता है. sabhar : http://www.palpalindia.com

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पोर्न स्टार्स की दुनिया

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पोर्न स्टार्स और स्ट्रिप क्लब्स

पोर्न इंडस्ट्री और पोर्न स्टार्स के बारे में लोगों को कई मिथ हैं। लेकिन एक ऑनलाइन वेबसाइट ने पोर्न इंडस्ट्री पर एक रिपोर्ट तैयार की है।औसत रूप से पुरुष पोर्न स्टार की सालाना कमाई तकरीबन 30 लाख 75 हजार रूपए होती है जबकि महिला पोर्न स्टार की कमाई 50 लाख है।

इसके अलावा महिला पोर्न स्टार की कमाई के और भी माध्यम हैं। सोशल मीडिया पर इनकी उपस्थिति तो है ही इसके अलावा ये इवेंट्स में भी जाती हैं और स्ट्रिप क्लब्स में भी जहां एक रात में इनकी कमाई 2 लाख या इससे ज्यादा हो जाती है। 

उदाहरण के तौर पर पोर्न स्टार जेन्ना जैमसन नाईट क्लब्स में प्रति रात 2 लाख रूपए तक ‌कमा लेती थी जबकि स्ट्रिप क्लब्स से पोर्न स्टार हूस्टन 20 लाख रुपए हर हफ्ते कमा लिया करती थी।

द रिचेस्ट ऑनलाइन के 2013 के आंकड़ों के मुताबिक, औसतन हर सेकंड में इंटरनेट पर 28,258 लोग पोर्नोग्राफी देखते हैं। इंटरनेट से जो मैटर डाउनलोड किए जाते हैं उनमें से 35 % पोर्न होता है। यही वजह है पोर्नोग्राफी के बिज़नेस की लोकप्रियता की।

इस इंडस्ट्री में प्रोडक्ट आसानी से बनते हैं और ये आसानी से उपलब्ध है। आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ यूएस में हर 34 वें मिनट एक नया पोर्न वीडियो बनता है।

पोर्न इंडस्ट्री दुनिया की ऐसी इंडस्ट्री है जिसके बारे में लोगों को काफी गलतफहमियां हैं। आइए जानते हैं पोर्न इंडस्ट्री और पोर्न स्टार्स के बारे में।2013 की एक रिपोर्ट के अनुसार पोर्न देखने वालों की संख्या सबसे ज्यादा युवाओं और बच्चे को जन्म दे चुकी मांओं की है। लेकिन अगर कोई यह सोचता है कि इंटरनेट पर महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा पोर्न देखते हैं तो उसका सोचना गलत नहीं होगा।

ऑनलाइन पोर्न का 72 फीसदी हिस्सा पुरुष देखते हैं जबकि महिलाओं की संख्या है मात्र 28 फीसदी है। दरअसल 70 फीसदी महिलाएं इंटरनेट पर पोर्न देखने की बात को गोपनीय रखती हैं। 9.4 मिलियन यानी तकरीबन 94 लाख महिलाएं महिलाएं हर महीने पोर्न देखती हैं लेकिन केवल 13 फीसदी महिलाएं पोर्न देखने की बात को स्वीकार करती हैं।

इंटरनेट पर पोर्न संबं‌धित तकरीबन 42 लाख वेबसाइटस हैं जो ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री का 12 फीसदी है। ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि पोर्न देखने वालों की सबसे ज्यादा युवाओं की है लेकिन बात ऐसी नहीं है।  
आपको जानकर हैरानी होगी मेल पोर्न स्टार्स की तुलना में फीमेल पोर्न स्टार्स कहीं ज्यादा कमाती हैं। एक पोर्न एक्टर प्रति सीन 15 हजार से डेढ़ लाख तक कमा सकता है।

इतना ही नहीं, सामान्य सेक्स सींस की तुलना में गे सींस करने पर ज्यादा पैसे मिलते हैं। यह राशि तकरीबन 50 हजार या इससे ज्यादा हो सकती है। वहीं एक्ट्रेस को प्रति सीन 40 हजार से तकरीबन 2 लाख का भुगतान किया जाता है। कई बार प्रति सेक्स सीन के पैसे फ़िल्म बनाने वाली कंपनी और एक्ट्रेस के अनुभव के ऊपर निर्भर करता है।

उदाहरण के तौर पर अपने लंबे अनुभव के कारण पोर्न स्टार असा अकीरा को प्रति सीन तकरीबन लाख रूपए मिलते हैं। आम तौर पर टॉप फीमेल पोर्न एक्ट्रेस को गे सीन के लिए 80 हजार, सामान्य सेक्स सीन के लिए एक लाख, बहुत ज्यादा सेक्सी और समझौता वाले सीन के लिए 5 लाख या इससे ज्यादा मिलते हैं। इस राशि का दस से पंद्रह फीसदी रकम एजेंट का कमीशन भी होता है।ऐसे भी पोर्न एक्टर और एक्ट्रेस हैं जो केवल कॉन्ट्रैक्ट पर ही काम करते हैं। बड़ी कंपनियों से कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए फ्रीलान्स काम कर उन्हें अपनी इमेज बनानी होती है या फिर एजेंसी के माध्यम से वो काम पाते हैं। कॉन्ट्रैक्ट में काम कर रहे पोर्न स्टार को हर सीन के लिए 50 हजार से लेकर 3 लाख रूपए तक मिलता है। कॉन्ट्रैक्ट की शर्त होती है कि एक बार किसी पोर्न स्टार ने किसी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन कर दिया तो वह दूसरी जगह काम नहीं कर सकता। 

कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले लड़के और लड़कियों को इस बात की छूट रहती है कि वे अपनी पसंद का पार्टनर चुनें। कॉन्ट्रैक्ट के काम में यात्रा की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि इसकी शूटिंग एक ख़ास लोकेशन पर होती हैबात जहां तक न्यूडिटी की है तो 1953 में प्लेब्वॉय शुरू करने वाले हग हेफनर के आसपास कोई दूसरा नाम नहीं है। प्लेब्वॉय की कई वेबसाइट्स हैं। जैसे प्लेब्वॉय डॉट कॉम, प्लेब्वॉय एक्सक्लूसिव डॉट कॉम और प्लेब्वॉय आर्काइव डॉट कॉम। तकरीबन 441 करोड़ के मालिक हेफनर की वेब साइट्स से सालाना कि कमाई तकरीबन 10 करोड़ 25 लाख से भी ज्यादा है। इंडस्ट्री के जाने- माने नाम होने के बावजूद हेफनर कि कंपनी सबसे बड़ी नहीं है। समय के साथ- साथ कई कंपनियों ने इनको पीछे छोड़ दिया। 

पोर्नोग्राफी और सेक्स की बात आती है हस्टलर का नाम भी सामने आता है। इनकी भी कई वेबसाइट्स हैं, जैसे ए स हस्टलर डॉट कॉम, हस्टलर टूब डॉट कॉम, मॉडल्स हस्टलर डॉट कॉम आदि।

1974 में पोर्नोग्राफिक पत्रिका के प्रकाशन से इस कंपनी की शुरुआत हुई। हस्टलर के मालिक लैरी फ्ल्यंट की अनुमानित संपत्ति 4 हजार 101 करोड़ 88 लाख रूपए है और वेबसाइट्स से इनकी सालाना कमाई तकरीबन 13 करोड़ 33 लाख है।

दुनिया भर में पोर्न का नंबर एक डिस्ट्रीब्यूटर है माइंड गीक जो पहले मैनविन के नाम से जाना जाता था। इनके पास सबसे ज्यादा पोर्न वेबसाइट्स हैं। यूपोर्न और पोर्नहब इन्हीं की वेबसाइट्स हैं जो कि सबसे ज्यादा देखी जाती हैं। इसके अलावा इनके पास 73 फ्री वेबसाइट्स हैं। बताया जाता है कि इनकी सालाना कमाई तकरीबन 2 हजार 50 करोड़ 94 लाख है।

एडल्ट एक्ट्रेस की कमाई
बच्चों जैसे चेहरे वाली स्टारलेट हिलेरी स्कॉट ने सेक्स जेड पिक्चरस के साथ तकरीबन 6 करोड़ 18 लाख, 40 हजार का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है जो कि पोर्न इंडस्ट्री का सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट है। दूसरे नंबर पर नाम आता है मारिया तगाकी का जिसने 30 एडल्ट फिल्मों के लिए जापानी कंपनी मैक्स ए के साथ 16 करोड़ 7 लाख का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। तकरीबन 37 करोड़ 10 लख की मालकिन जेन्ना जामेसन एक फ़िल्म के लिए तकरीबन 5 लाख 32 हजार लेती है। हूटर्स की पूर्व वेट्रेस जेस्से जेन पोर्न इंडस्ट्री की सबसे अमीर एक्ट्रेस है। 49 करोड़ 46 लाख से अधिक की संपत्ति वाली जेस्से जेन का प्लेब्यॉय पर अपना शो भी चलता है। जेन शायद सबसे महशूर पोर्न स्टार है जिसकी अभी भी फिल्में बनती है।

पोर्न इंडस्ट्री कि तीन टॉप पेड स्टार्स के लुक में काफी अंतर है। जेना जेमेसन जो अब तक की सबसे महंगी पोर्न स्टार है के बूब्स काफी बड़े हैं, बाल हल्के सुनहरे भूरे रंग के हैं और उसकी त्वचा गोरी है। पोर्न इंडस्ट्री की दूसरी सबसे दौलतमंद टेरा पैट्रिक कि त्वचा काली और बाल भी काले हैं। लोग सोच सकते हैं कि बड़े ब्रेस्ट पोर्न स्टार को लोकप्रिय बनाते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल, इनके ब्रेस्ट औसत साइज के ही हैं। इससे बड़े ब्रेस्ट की हसीनाएं भी आई हैं।
पोर्न इंडस्ट्री के पुरुष
पुरुष पोर्न स्टार को प्रोड्यूसर उतने पैसे नहीं देता जितने महिला पोर्न स्टार को देता है। क्योंकि वह सड़क पर से किसी को भी उठा ला सकता है। लेकिन कुछ ऐसे पुरुष पोर्न स्टार हैं जिन्होंने पैसे बनाए। उदाहरण के तौर पर पीटर नॉर्थ ने 1800 पोर्न फिल्में की हैं और उसने तकरीबन 61 करोड़ 84 लाख रूपए कमाएं। पोर्न इंडस्ट्री के दूसरे लिविंग लीजेंड का नाम है रॉन जेरेमी जिसने दो हजार फिल्में बनाईं और 34 करोड़ 1 लाख से भी ज्यादा के मालिक हैं। रॉन पोर्न इंडस्ट्री के दूसरे नंबर के सबसे दौलतमंद स्टार हैं।
किसने कितना कमाया

ऐसा माना जाता है कि पोर्न स्टार्स एक्टिंग से खूब पैसे कमाते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। उन्हें हर शॉट के हिसाब से पेमेंट मिलती है। उन्हें न तो कोई रॉयलिटी मिलती है और न ही फिल्म की बिक्री या डिस्ट्रीब्यूशन में उनकी कोई साझेदारी होती है। उन्हें पैसे कमाने के दूसरे विकल्पों की तलाश करनी पड़ती है। जैसे व्‍यक्तिगत रूप से प्रकट होना, सोशल नेटवर्किंग और ब्रांडिंग। असल में बहुत सारे पोर्न स्टार्स ने अन्य साधनों से पैसे बनाए हैं। उदाहरण के तौर पर जेन्ना जैमसन ने अपने नाम के एडल्ट सेक्स टॉयज की ब्रांडिंग कर 185 करोड़ 52 लाख रूपए कमाए। टेरा पैट्रिक ने टेराविज़न नाम की एजेंसी खोली जो एडल्ट परफॉमर्स और मॉडल्स को सप्लाई करती है। आज की तारीख में यह कंपनी करोड़ों कमाती है। बेलाडोना ने एक्टिंग छोड़ फिल्में बनानी और डायरेक्ट करनी शुरू की जिससे उसने 11 करोड़ 15 लाख कमाए।

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ये देसी नुस्खे नपुंसकता को जड़ से मिटा सकते हैं

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पुरुषों में कमजोरी की समस्या आजकल आम है। नपुंसकता, स्वप्नदोष, धातु दोष आदि ऐसी समस्याएं हैं जो वैवाहिक जीवन को बहुत अधिक प्रभावित करती हैं। असंयमित खान-पान या शरीर में पोषक तत्वों के कारण या अन्य गलत आदतों से  पुरुषों को दुर्बलता या कमजोरी की परेशानी होने लगती है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं बेहद साधारण घरेलू नुस्खे जिनसे आप इस समस्या से बहुत जल्द छुटकारा पा सकते हैं।

नपुंसकता को जड़ से मिटा सकते हैं ये देसी नुस्खे




आंवला- 2 चम्मच आंवला के रस में एक छोटा चम्मच सूखे आंवले का चूर्ण तथा एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर दिन में दो बार सेवन करना चाहिए। इसके इस्तेमाल से सेक्स शक्ति धीरे-धीरे बढ़ती चली जाएगी। इस प्रकार की परेशानी में आंवला बहुत फायदेमंद होता है। अत: प्रतिदिन रात्रि में गिलास में थोड़ा सा हुआ सुखा आंवले का चूर्ण लें और उसमें पानी भर दें। सुबह उठने के बाद इस पानी में हल्दी मिलाएं एवं छानकर पीएं। आंवले के चूर्ण में मिश्री पीसकर मिलाएं। इसके बाद प्रतिदिन रात को सोने से पहले करीब एक चम्मच इस मिश्रित चूर्ण का सेवन करें। इसके बाद थोड़ा सा पानी पीएं। जिन लोगों को अत्याधिक स्वप्नदोष होने की समस्या है, वे प्रतिदिन आंवले का मुरब्बा खाएं।
नपुंसकता को जड़ से मिटा सकते हैं ये देसी नुस्खे

सेब-  एक सेब में जितनी हो सके उतनी लौंग लगा दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग लगाकर दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग बोतल में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।

नपुंसकता को जड़ से मिटा सकते हैं ये देसी नुस्खे

अश्वगंधा- अश्वगंधा का चूर्ण, असगंध तथा बिदारीकंद को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। चूर्ण को आधा चम्मच मात्रा में दूध के साथ सुबह और शाम लेना चाहिए। यह मिश्रण वीर्य को ताकतवर बनाकर शीघ्रपतन की समस्या से छुटकारा दिलाता है।
सोंठ- 4 ग्राम सोंठ, 4 ग्राम सेमल का गोंद, 2 ग्राम अकरकरा, 28 ग्राम पिप्पली तथा 30 ग्राम काले तिल को एकसाथ मिलाकर तथा कूटकर बारीक चूर्ण बना लें। रात को सोते समय आधा चम्मच चूर्ण लेकर ऊपर से एक गिलास गर्म दूध पी लें। यह रामबाण औषधि शरीर की कमजोरी को दूर करती है और सेक्स शक्ति को बढ़ाती है।अजवायन- 100 ग्राम अजवायन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखा लें। सूखने के बाद उसे फिर से प्याज के रस में गीला करके सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें। उसके बाद इसे कूटकर किसी बोतल में भरकर रख लें। आधा चम्मच इस चूर्ण को एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें। इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है
अजवायन- 100 ग्राम अजवायन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखा लें। सूखने के बाद उसे फिर से प्याज के रस में गीला करके सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें। उसके बाद इसे कूटकर किसी बोतल में भरकर रख लें। आधा चम्मच इस चूर्ण को एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें। इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है।

छुहारे- चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू और दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना रात को सोते समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा और काम करने की शक्ति बढ़ती है।
गाजर- 1 किलो गाजर, चीनी 400 ग्राम, खोआ 250  ग्राम, दूध 500 ग्राम, कद्यूकस किया हुआ नारियल 10 ग्राम, किशमिश 10 ग्राम, काजू बारीक कटे हुए 10-15 पीस, एक चांदी का वर्क और 4चम्मच देशी घी ले लें। गाजर को कद्दूकस करके कडा़ही में डालकर पकाएं। पानी के सूख जाने पर इसमें दूध, खोआ और चीनी डाल दें तथा इसे चम्मच से चलाते रहें। जब यह सारा मिश्रण गाढ़ा होने को हो तो इसमें नारियल, किशमिश, बादाम और काजू डाल दें। जब यह गाढ़ा हो जाए तो थाली में देशी घी लगाकर हलवे को थाली पर निकालें और ऊपर से चांदी का वर्क लगा दें। इस हलवे को चार-चार चम्मच सुबह और शाम खाकर ऊपर से दूध पीना चाहिए। यह वीर्यशक्ति बढ़ाकर शरीर को मजबूत रखता है। इससे सेक्स शक्ति भी बढ़ती है।
इमली-आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी बोतल में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।

कौंच का बीज- 100 ग्राम कौंच के बीज और 100  ग्राम तालमखाना को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें फिर इसमें 200 ग्राम मिश्री पीसकर मिला लें। हल्के गर्म दूध में आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर रोजाना इसको पीना चाहिए। इसको पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है और नामर्दी दूर होती है।
चोबचीनी-100 ग्राम तालमखाने के बीज, 100 ग्राम चोबचीनी, 100 ग्राम ढाक का गोंद, 100 ग्राम मोचरस तथा 250 ग्राम मिश्री को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना सुबह के समय एक चम्मच चूर्ण में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं। यह मिश्रण यौन रुपी कमजोरी, नामर्दी तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे रोग को खत्म कर देता है।
प्याज-आधा चम्मच सफेद प्याज का रस, आधा चम्मच शहद और आधा चम्मच मिश्री के चूर्ण को मिलाकर सुबह और शाम सेवन करें। यह मिश्रण वीर्यपतन को दूर करने के लिए काफी उपयोगी रहता है।सफेद प्याज के रस को अदरक के रस के साथ मिलाकर शुद्ध शहद तथा देशी घी पांच-पांच ग्राम की मात्रा में लेकर एक साथ मिलाकर सुबह नियम से एक माह तक सेवन करें और लाभ देखें इससे यौन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जाती है। sabhar : bhaskar.com

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