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शनिवार, 4 जनवरी 2014

इंसान या भगवान? दोनों बच्चों का बचपन से ही पूंछ निकल आएं हैं

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SPECIAL: इंसान या भगवान? एक पंजाब का तो दूसरा हरियाणा का

देश के पंजाब और हरियाणा में दो ऐसे बच्चे हैं जिन्हें उन्हीं के परिवार वाले उन बच्चों को देवता का रूप दे रहे हैं। कारण दोनों बच्चों का बचपन से ही जेनेटिक गड़बड़ी के कारण पूंछ निकल आएं हैं। यह कहानी हरियाणा के पानीपत का 9 साल का बच्चा सुमित वर्मा और पंजाब के फतेहगढ़ का 13 साल का बच्चा अर्शिद अली खान की है। तो आइए, सबसे पहले हम पानीपत के सुमित वर्मा के बारे में आपको विस्तृत जानकारी देते हैं। सुमित की पीठ पर जेनेटिक गड़बड़ी के कारण जन्म से ही बालों की पूंछ सी है। इस कथित पूंछ को नौ सालों तक बच्चे के माता-पिता छुपाए रहे, मगर गरीबी ने उन्हें ऐसा बदला कि अब वही माता-पिता चाहते हैं कि यह ‘रहस्य’ दुनिया के सामने आ जाए। 
 
वे सोचते हैं कि यह पता लगने के बाद सरकार और बड़े लोगों के बीच उनका मान सम्मान बढ़ेगा। उन्हें कोई न कोई मदद मिलेगी। इससे उनकी जिंदगी पटरी पर आ जाएगी। खास बात यह है कि माता-पिता के इस ह्रदय परिवर्तन से बच्चा अब तक अनजान है। उसे पता नहीं कि जीवन देने वाले माता-पिता उसे भगवान के अंश रूप में स्थापित करने का मन बना चुके हैं। वह नहीं जानता, अगर ऐसा हुआ तो उसका बचपन एक व्यवसाय में बदल जाएगा। 
SPECIAL: इंसान या भगवान? एक पंजाब का तो दूसरा हरियाणा का

सुमित ने बताया, ‘मुझे पढऩा और खेलना पसंद है। बचपन से ही मेरी पीठ पर घने बाल हैं। मगर कम लोगों को इसकी जानकारी है।’ उसने बताया कि कॉलोनी में किसी को उसकी पूंछ के बारे में जानकारी नहीं है। उसके रिश्तेदार या कोई भी उसकी पूंछ के बारे में चर्चा नहीं करता। सुमित के साथ सबका सामान्य व्यवहार होता है। उसे कभी प्यार, कभी फटकार तो कभी मार भी पड़ती है। सुमित का कहना है कि पूंछ से कभी-कभी परेशानी तो होती है, लेकिन अब वह इसके साथ रहना सीख गया है। वह पूजा के समय ज्योत जलाता है और गणेश भगवान की आरती करता है। 

SPECIAL: इंसान या भगवान? एक पंजाब का तो दूसरा हरियाणा का
 दूसरी कहानी है पंजाब के फतेहगढ़ की, जहां पूंछ लेकर पैदा हुआ, आस्था का केंद्र रहा बच्चा व उसके परिजन आज पूंछ को लेकर ही दुविधा में है। जन्म से ही अपाहिज होने के चलते वह जैसे तैसे अपनी जिंदगी की गाड़ी दूसरों के सहारे खींचने को मजबूर है। आस्था के क्षेत्र में उस समय तहलका मच गया था जब 15 फरवरी 2001 को जिले के गांव नबीपुर में एक मुस्लिम परिवार के घर पैदा हुए बच्चे के पूंछ होने की बात चर्चा में आई। हिन्दू देवता के पूंछ की तुलना बच्चे से करते हुए भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने बच्चे के घर में आना शुरू कर दिया तथा मन्नतें भी मांगी गई।देवता का स्वरूप होने पर श्रद्धालुओं की ओर से भेंटें भी दी जाने लगी। मुस्लिम परिवार में पैदा होने के बावजूद श्रद्धालुओं ने इसका नाम भी बाला जी रख दिया तथा आज वह बाला जी के नाम से ही जाने जाते है। अल्प आयु में तो पूंछ को लेकर इसे कुदरत की देन मानते रहे, लेकिन उमर बढऩे के साथ पूंछ का बढऩा तथा उस पर उग रहे बाल बाला जी के परिजनों की चिंता बढ़ा रहे है। क्योंकि बाला जी के बड़े होने के साथ साथ पूंछ भी बढ़ती जाएगी। चिंता इस बात की भी है कि पूंछ को कैसे हटाया जाए, जिसको लेकर देश के विभिन्न अस्पतालों के माहिर डाक्टरों की भी राय ली गई थी।बच्चे के नाना इकबाल कुरैशी बताते है कि उनके नाती जिसका नाम उन्होंने अर्शिद अली खान रखा था, लोगों ने उन्हें बाला जी का नाम दे दिया। अर्शिद के जन्म से ही पूंछ थी। इसके अलावा उनके लेफ्ट बाजू के ऊपर श्री हनुमान की बाजू की तरह धागे का निशान तथा पैरों के तलों में भी सामान्य से हट कर अलग किस्म के निशान व लक्षण बंदर देवता प्रदर्शित करते थे। बच्चे के पूंछ लेकर पैदा होने से सभी हैरान थे क्योंकि ऐसा कोई केस कभी सुनने में नही आया था। 

SPECIAL: इंसान या भगवान? एक पंजाब का तो दूसरा हरियाणा का

रीड़ की हड्डी पर उगी पूंछ को लेकर कई डाक्टरों ने काटने की भी सलाह दी, लेकिन आपरेशन की सफलता के संदेह को लेकर वह आपरेशन से डरते रहे। लोग भी इनमें आस्था जताने लगे दूर दराज के क्षेत्रों से इनका आशीर्वाद लेने पहुंचते रहे। जिन लोगों की मनोकामना पूरी हुई उनकी भेंट भी बाला जी ने स्वीकार की। मुस्लिम परिवार में जन्में बाला जी को दोनों ही धर्मों में आस्था है तथा उन्होंने घर में बाला जी का मंदिर भी बना रखा है। नबीपुर के सरकारी स्कूल में कक्षा सात में शिक्षा ले रहे बाला जी अपाहिज होने के चलते अपने साथी बच्चों के साथ ट्राई साइकिल से ही स्कूल पहुंचते है। 
बाला जी की प्राइमरी स्कूल की अध्यापिका रंजीत कौर ने बताया कि बाला जी का व्यवहार आम बच्चों की तरह है, पर इनकी किसी भी बात को ग्रहण करने की शक्ति दूसरे बच्चों की अपेक्षा कुछ अधिक है। इन्हें गीत गाने तथा संगीत का शौक शुरू से ही रहा तथा एलिमेंटरी स्कूलों के जिला स्तरीय मुकाबलों में इनाम भी जीते। बच्चे के असामान्य होने के चलते इनके सहपाठी व दूसरे बच्चे भी इनको पूरा आदर देते हुए बाला जी के नाम से ही पुकारते है। बाला जी के शौच आदि की मुश्किल को लेकर स्कूल में इनके लिए विभाग की ओर से खास शौचालय भी बनवाया गया था। 
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शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

खुल जाएंगे दिमाग़ के रहस्य

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पॉल मैक्ग्रा
बीबीसी हेल्थ चेक
इंसानी दिमाग

सदियों से इंसानी दिमाग़ एक रहस्य रहा है. हालांकि पिछले कुछ दशकों में वैज्ञानिक इसके कुछ रहस्यों से पर्दा उठाने में सफल रहे हैं.
हाल के कुछ सालों में नई तकनीक और शक्तिशाली कंप्यूटरों की मदद से कुछ प्रमुख खोजें हो सकी हैं.
हालांकि इंसान के दिमाग़ के बारे में अभी भी बहुत कुछ समझना बाक़ी है. यहाँ हम आपको उन पांच महत्पूर्ण विषयों के बारे में बता रहे हैं जिनके पता लगने पर इंसानी दिमाग़ के अनसुलझे रहस्यों का राज़ जाना जा सकता है.

इसे ठीक कैसे करें?

इंसानी दिमाग
वैज्ञानिक डॉ एटीकस हैंसवर्थ का कहना है कि दिमाग के व्हाइट मैटर और इसमें होने वाली ख़ून की सप्लाई महत्वपूर्ण है.
जब हम सोचते हैं, चलते हैं, बोलते हैं, सपने देखते हैं और जब हम प्रेम करते हैं तो यह सब दिमाग़ के ग्रे मैटर में होते हैं. लेकिन हमारे क्लिक करेंदिमाग़ में केवल ग्रे मैटर ही नहीं है बल्कि व्हाइट मैटर की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
डिमेंशिया नाम की बीमारी के बारे में जब शोध किया जाता है तो क्लिक करेंदिमाग़ में मौजूद ग्रे मैटर के भीतर बीटा एमिलॉइड और टाउ प्रोटीन के एक दूसरे के साथ होने वाले रिएक्शन पर ग़ौर किया जाता है.
लेकिन एक ब्रितानी वैज्ञानिक डॉ. एटीकस हैंसवर्थ का कहना है कि दिमाग़ के व्हाइट मैटर और इसमें होने वाली ख़ून की सप्लाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
व्हाइट मैटर तंत्रिका कोशिका के आख़िरी छोर 'एक्जॉन' के आसपास चर्बी के कारण बनता है. एक्जॉन तंत्रिका कोशिकाओं को एक दूसरे से जोड़ते हैं. यही तंत्रिका तंत्र को आपस में तालमेल बिठाने में मदद करते हैं.
डॉ. एटीकस हैंसवर्थ इसके बारे में अधिक जानकारी का पता लगाने के लिए ऑक्सफ़ोर्ड और शीफ़ील्ड में दान दिए गए क्लिक करेंमस्तिष्क के बैंक का प्रयोग कर रहे हैं.
वह कहते हैं, "कुछ मामलों में हमारे पास सीटी स्कैन और एमआरआई मौजूद हैं. इनसे हमें यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि क्या बीमारी की वजह व्हाइट मैटर था और अगर था तो इसकी क्या वजह हो सकती है ?
अगर डिमेंशिया की वजह ख़ून ले जाने वाली नाड़ियों में रिसाव है तो यह नई चिकित्सा प्रणालियों के लिए नया रास्ता मुहैया करा सकती है.

होनहार कैसे बनें ?

इंसानी दिमाग
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के तंत्रिका तंत्र पर काम करने वाली वैज्ञानिक बारबरा सहाकियान ऐसी दवाइयों का पता लगा रही हैं जो हमें और बुद्दिमान बना सकती हैं.
कई सालों तक सतर्कता बढ़ाने के लिए कैफ़ीन का प्रयोग होता था. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के तंत्रिका तंत्र पर काम करने वाली वैज्ञानिक बारबरा सहाकियान ऐसी दवाओं का पता लगा रही हैं, जो हमें और बुद्धिमान बना सकती हैं.
वह इस बात का अध्ययन कर रही हैं कि इन दवाओं का प्रयोग कर सर्जनों और पायलेटों का प्रदर्शन कैसे सुधारा जा सकता है और क्या इनसे आम इंसान की काम करने की क्षमता में भी बढ़ोतरी की जा सकती है ?
लेकिन वह चेतावनी देती हैं कि इन दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल करने का बुरा असर भी हो सकता है. एक समाज के तौर पर हमें इस बारे में चर्चा करने की आवश्यकता है.
उनका कहना है कि मस्तिष्क में डोपामाइन और नॉरएड्रीनलीन जैसे रसायनों के बनने को प्रभावित करने वाली दवाओं से सामने आई वैज्ञानिक और नैतिक चुनौतियों पर बहस की आवश्यकता है. इस बहस में किसी परीक्षा से पहले परीक्षा देने वाले का टेस्ट होना भी शामिल है, जिसमें पता लगाया जाएगा कि कहीं उसने इन दवाओं का प्रयोग तो नहीं किया है.
डॉक्टर सहाकियान कहती हैं, "मैं विद्यार्थियों से इन दवाओं के बारे में अक्सर बात करती हूँ और बहुत से विद्यार्थी पढ़ने और परीक्षा देने के लिए यह दवाएं खाते हैं."
साथ ही उन्होंने कहा, "मगर बहुत से विद्यार्थी इससे नाराज़ होते हैं. उन्हें लगता है कि दवाएं लेने वाले विद्यार्थी बेईमानी कर रहे हैं."

अवचेतन से काम कैसे लें?

इंसानी दिमाग
बार बार संगीत की एक ही धुन बजाने से उसके सबसे मुश्किल हिस्से को भी बेहतरीन ढंग से बजाया जा सकता है.
किसी वाद्ययंत्र को बजाने के लिए या किसी बम को निष्क्रिय करने जैसे काम के लिए बहुत अच्छी कुशलता चाहिए होती है.
शोध यह बताते हैं कि हमारा अवचेतन दिमाग़ हमें सबसे बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकता है.
बार-बार संगीत की एक ही धुन बजाने से उसके सबसे मुश्किल हिस्से को भी बेहतरीन ढंग से बजाया जा सकता है.
लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ म्यूज़िक के सेंटर फॉर परफॉर्मेस साइंस में काम करने वाली सेलिएस्ट तानिया लिस्बोआ कहती हैं, "इससे संगीत की धुन का सबसे मुश्किल हिस्सा हमारे दिमाग़ के चेतन हिस्से से अवचेतन हिस्से में भी चला जाता है."
वह कहती हैं, "कई घंटे तक रियाज़ करने के बाद एक पारंगत संगीतज्ञ के दिमाग़ के पिछले हिस्से सेरेब्रम में इसकी जानकारी चली जाती है."
ससेक्स विश्विद्यालय के तंत्रिका वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर अनिल सेठ कहते हैं," सेरेब्रम में दिमाग़ के बाक़ी हिस्से की तुलना में ज़्यादा ब्रेन सेल होती हैं. "

सपने किसके लिए?

इंसानी दिमाग
प्रोफ़ेसर रॉबर्ट स्टिकगोल्ड का मानना है कि याददाश्त से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने में सपनों की अहम भूमिका होती है.
सपनों को लेकर हमारा आकर्षण तक़रीबन पांच हज़ार साल पुराना है. प्राचीन मेसोपिटामिया की सभ्यता के दौरान मान्यता थी कि सपने में हम जिस जगह को देखते हैं वहाँ हमारी आत्मा सोते हुए शरीर से निकलकर विचरण करती है.
बोस्टन के बेथ इस्राइल डिएकोनेस मेडिकल सेंटर फ़ॉर स्लीप एंड कॉग्निशन के प्रोफ़ेसर रॉबर्ट स्टिकगोल्ड का मानना है कि याददाश्त से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने में सपनों की अहम भूमिका होती है.
वह जापान की स्कैनिंग रिसर्च के मुरीद हैं. इसमें वैज्ञानिक किसी एमआरआई स्कैन की तरह सपनों को पढ़ सकते हैं.
लेकिन उनका कहना है कि शोर-शराबे वाले महंगे स्कैनर में किसी व्यक्ति को सुलाना मुश्किल है.
तो भविष्य में क्या? प्रोफ़ेसर रॉबर्ट स्टिकगोल्ड कहते हैं, " मैं ऐसे अध्ययन होते देखना चाहूँगा, जहाँ सपनों के बनने के नियम पता लगाए जा सकें और यह पता लगाया जाए कि नींद के दौरान याददाश्त कैसे काम करती है?"
अगर ऐसा होता है, तो यह भी पता लगा सकते हैं कि केवल अच्छे सपने कैसे देखें और बुरे सपनों से कैसे बचें?

दर्द दूर हो सकता है?

इंसानी दिमाग
बहुत तेज़ दर्द से निपटना चिकित्सा विज्ञान के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.
बहुत तेज़ दर्द से निपटना चिकित्सा विज्ञान के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.
सर्जक अब इस सिद्धांत का परीक्षण कर रहे हैं कि डीप ब्रेन स्टिमुलेशन से दर्द से राहत दिलाई जा सकती है.
डीप ब्रेन स्टिमुलेशन मस्तिष्क के ऑपरेशन की वह तकनीक है, जिसमें दिमाग़ के भीतर गहरे में अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए दिमाग़ में इलेक्ट्रोड्स डाले जाते हैं.
इससे पहले इस तकनीक का प्रयोग पर्किंसन और अवसाद जैसी बीमारियां ठीक करने में किया गया है. अब इसका प्रयोग ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर और असहनीय दर्द को ठीक करने में भी किया जा रहा है.
ऑक्सफ़ोर्ड के जॉन रेडक्लिफ अस्पताल के प्रोफ़ेसर टीपू अज़ीज़ इस तकनीक की शुरुआत करने वालों में से एक हैं. इस तकनीक के प्रयोग से वह अपने मरीज़ों का दर्द भी काफ़ी हद तक दूर कर रहे हैं.

वह कहते हैं, "दिमाग़ में इलेक्ट्रोड डालकर याददाश्त सुधारी जा सकती है या फिर आप सैनिकों पर इसका प्रयोग कर उन्हें ख़तरे से बेख़बर भी बना सकते हैं." sabhar :http://www.bbc.co.uk

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मंगल की यात्रा पर भेजने के लिए लोगों का चयन किया गया

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2024 की मंगल यात्रा के लिए 1,058 लोगों का चयन, इनमें 62 भारतीय भी शामिल

लंदन। मंगल की यात्रा पर भेजने के लिए 1,058 लोगों का चयन किया गया है। इसमें 62 भारतीय भी शामिल हैं। 2024 में होने वाली इस एकतरफा निजी यात्रा में चार पुरुष एवं महिलाएं भेजी जाएंगी। इन लोगों को वहां पर कॉलोनी बनानी होगी। इस प्रोजेक्ट का नाम 'मार्स वन' है। इसे नीदरलैंड की एक कंपनी पूरा कर रही है। 
 
मार्स वन के पास मंगल पर मानव जीवन स्थापित करने के लिए 140 देशों के दो लाख आवेदन आए थे। इसमें 20 हजार भारतीयों ने आवेदन भेजे थे। स्पेस डॉट कॉम के मुताबिक, अमेरिका से 297, कनाडा से 75, भारत से 62 और रूस से 52 लोगों का चयन किया गया है। 
 
मार्स वन के सह-संस्थापक बास लांसडॉर्प ने इस सूची के बारे में कहा कि ये अभी पहली सूची है। इन्हें देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे लोग मंगल पर जाएंगे। हमने उन लोगों का चयन किया जो शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद स्वस्थ हैं। ये लोग मंगल पर 'मानव दूत' के रूप में जाएंगे। बास ने बताया कि हमने उन लोगों को ईमेल भेजा है जिनका चयन इस राउंड में नहीं हुआ है। उनके लिए आगे भी मौका है। वे दोबारा आवेदन भेज सकते हैं। वर्ष 2015 तक विभिन्न प्रकार के परीक्षण होंगे। जिनमें यात्रियों को भी परखा जाएगा। जो बेहद कठिन होगा। इसके बाद परीक्षण के लिए 2018 में मानवरहित मिशन भेजा जाएगा। फिर मानव भेजे जाएंगे।  sabhar : bhaskar.com

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श्रीदेवी 50 साल की हो चुकी हैं, लेकिन ब्लैक स्विमसूट में

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स्विमसूट में श्रीदेवी का ग्लैमरस लुक, बेटी ने भी दी टक्कर

श्रीदेवी ने ट्विटर पर फैमिली के साथ अपनी फोटो अपलोड की। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "2014 की शुरुआत बहुत खुशी और शांति के साथ हुई, हैप्पी न्यू ईयर।"

इस दौरान श्रीदेवी स्विमसूट पहने हुए नजर आईं। यूं तो श्रीदेवी 50 साल की हो चुकी हैं, लेकिन ब्लैक स्विमसूट में बेहद हॉट दिख रही हैं। वहीं उनकी बेटी जाह्नवी अपनी हॉट मॉम को बिकनी में कड़ी टक्कर देती हुई दिखीं।

श्रीदेवी ने कई फिल्मों में अपनी खूबसूरती और शानदार अभिनय से दर्शकों के दिल पर राज किया। अब 50 साल के बाद भी उनका ग्लैमर बरकरार है। श्रीदेवी के फैन्स का मानना है कि वह आज भी ग्लैमरस नजर आती हैं।

वह अपनी इस अदा से फिल्म प्रमोशन्स और प्राइवेट पार्टीज के जरिए हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं।
स्विमसूट में श्रीदेवी का ग्लैमरस लुक, बेटी ने भी दी टक्कर


स्विमसूट में श्रीदेवी का ग्लैमरस लुक, बेटी ने भी दी टक्कर

स्विमसूट में श्रीदेवी का ग्लैमरस लुक, बेटी ने भी दी टक्कर


स्विमसूट में श्रीदेवी का ग्लैमरस लुक, बेटी ने भी दी टक्कर

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बुधवार, 1 जनवरी 2014

विज्ञान की खोज?

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एक छुद्रग्रह


बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट के विज्ञान संपादक पॉल रिंकन बता रहे हैं कि साल 2013 में विज्ञान और पर्यावरण की दुनिया में क्या-क्या ख़ास हुआ, जिसे दुनिया याद रखेगी.

आसमान में आग

अंतरिक्ष पर नज़र रखने वाले वैज्ञानिकों ने 15 फ़रवरी को एक क्लिक करें छोटे से ग्रह को धरती के क़रीब आते देखा.



मगर इसके सुरक्षित गुज़रने के बाद दस हज़ार टन की एक अंतरिक्षीय चट्टान रूस के क्लिक करें चेल्याविंस्क के ऊपर आसमान में जलकर राख हो गई. हालांकि उसके अवशेषों के ज़मीन पर गिरने से क़रीब एक हज़ार लोग घायल हो गए और आस-पास की कई इमारतों को नुकसान पहुंचा.

इस क्लिक करें असाधारण घटना ने वैज्ञानिकों को क्लिक करें क्षुद्र ग्रह के क्लिक करें 'हमले' का अध्ययन करने का दुर्लभ संयोग दिया. इस जांच के लिए गाड़ियों के डैशबोर्ड पर लगे कैमरों को धन्यवाद देना चाहिए.

ये कैमरे रूसी चालकों ने बीमा कंपनियों और पुलिस का भ्रष्टाचार उजागर करने को लगाए थे. इस उल्कापिंड का एक बड़ा हिस्सा बाद में क्लिक करें चेबराकुल झील की तली से बरामद किया गया.
अमरीकी अंतरिक्ष यान वोएज़र-एक

मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान क्लिक करें वॉयजर-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. मगर नासा के वैज्ञानिकों ने तुरंत ही इसका खंडन कर दिया.

सितंबर में यह दृष्टिकोण बदल गया और मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने अपने प्रमाण दिए. इसमें कुछ अतिरिक्त आंकड़े भी शामिल थे. इसमें तारों के बीच के इलाक़े की जांच की पुष्टि की गई थी.

वॉयजर-1 को 1977 में बाहरी ग्रहों का अध्ययन करने के लिए छोड़ा गया था. तारों के बीच अंतरिक्ष में पहुँचने वाला यह पहला मानवनिर्मित यान था.
3 डी प्रिंटेड गन से फ़ायरिंग

मई में बीबीसी न्यूज़ ने सबसे पहले ख़बर दी कि दुनिया की पहली क्लिक करें थ्रीडी प्रिंटेड बंदूक़ से अमरीका में फ़ायर किया गया है. एक विवादास्पद समूह ने टेक्सस के ऑस्टिन के पास इस हथियार का परीक्षण किया.

ख़ुद को साइबर अराजकतावादी बताने वाले डिज़ायनर कोडी विल्सन ने कहा,''यह एक ऐसी दुनिया में झांकना है, जहाँ तकनीक कहती है कि आप वह सब कर सकते हैं, जो आप करना चाहते हैं.'

प्लास्टिक की इस बंदूक़ को बनाने के लिए प्रयोग में लाए गए ब्लूप्रिंट के ऑनलाइन होने के पहले हफ़्ते में ही उसे क़रीब एक लाख बार डाउनलोड किया गया. बंदूक़ का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं की आलोचना के बाद अमरीका ने इसे क्लिक करें इंटरनेट से हटाने का निर्देश दिया.
आसमान की ओर देखो

इस साल सबूत मिला कि मौजूदा खगोल विज्ञान में एक नई शाखा को जन्म देने की क्षमता है. मई में बीबीसी न्यूज़ की वेबसाइट ने पहली बार दक्षिणी ध्रुव पर हुए क्लिक करें आइस क्यूब परीक्षण की ख़बर दी थी. इसमें पहली बार अधिक ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो को हमारे सौरमंडल से बाहर से आता दिखाया गया था.


जबकि खगोल विज्ञान की मौजूदा शाखाएं ऑप्टिकल या इंफ्रारेड जैसी, अलग-अलग प्रकार के प्रकाश का प्रयोग करती हैं. इस प्रयोग से कणों का उपयोग करते हुए ब्रह्मांड की तस्वीर बनाना संभव हो सका. इसके अलावा खगोलविदों के लिए खुशी की एक बात और थी कि उनके पास अब तक प्रकाश का सबसे पुराना नक्शाक्लिक करें प्लैंक नाम की दूरबीन से लिए गए आंकड़ों के आधार पर बनाया गया था.

नैनो ट्यूब से कंप्यूटर

स्टैनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस साल सितंबर में क्लिक करें कार्बन के नैनोट्यूब से बना दुनिया का पहला कंप्यूटर पेश किया. इसे 'सेड्रिक' नाम दिया गया है. यह इस मशीन का बुनियादी प्रोटोटाइप है, पर इसे नए ज़माने के डिजिटल उपकरण के रूप में विकसित किया जा सकता है, जो आजकल के सिलिकॉन मॉडल की तुलना में छोटा, तेज़ और प्रभावशाली होगा.


इसके अलावा अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और गूगल क्लिक करें क्वांटम भौतिकी का उपयोग कर रफ़्तार बढ़ाने वाले डेढ़ करोड़ डॉलर के कंप्यूटर का प्रयोग करने पर सहमत हो गए. यह कंप्यूटर नासा में लगाया जाएगा. क्वांटम भौतिकी के क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों का ध्यान डी वेव मशीन ने अप्रैल में तब खींचा जब एक शोधपत्र में यह बताया गया कि यह क्वांटम स्तर पदार्थ के अजीब व्यवहार का पता लगाने में सक्षम है. हालांकि वास्तविक मशीन पर अभी असमंजस बरकरार है.

अतीत की तलाश

2013 में हुए परीक्षणों से पता चला कि आयरलैंड के लोइसी काउंटी में मिले जीवाश्म क़रीब चार हज़ार साल पुराने हैं और यह जीवाश्म सबसे पुराने क्लिक करें कुत्ते के भी हो सकते हैं.

इस साल दुनिया ने इंसान के क्लिक करें डीएनए के सबसे पुराने अनुक्रम के साथ-साथ निएंडरथल मानव के संपूर्ण जिनोम अनुक्रम को देखा. इन अध्ययनों ने मानव समूहों में अप्रत्याशित संबंधों का भी पता लगाया. इससे इंसान के प्रवासन की गुत्थी सुलझाने में भी मदद मिलेगी.



माइंड मैपिंग

ब्रेन मैपिंग

मार्च में अमरीका के नेतृत्व वाले एक दल ने इंसानी दिमाग़ की वायरिंग का क्लिक करें पहला नक्शा जारी किया. द ह्यूमन कनेक्शन नाम की परियोजना इस पर प्रकाश डाल सकती हैं कि इंसान के दिमाग़ की संरचना किस तरह उसकी योग्यता और व्यवहार को प्रभावित कर सकती है.


बीबीसी ने यह भी ख़बर दी कि एक किशोर के दिमाग़ के काम करने के तरीक़ों को समझने और आवेग और भावनात्मक व्यवहार के दौरान उसके दिमाग़ में होने वाले परिवर्तन का पता लगाने का प्रयास हो रहा है. वहीं जापान में वैज्ञानिकों ने एमआरआई स्कैनर का उपयोग कर स्वप्न में देखी गई तस्वीरों का पता लगाने में सफलता पाई है.sabhar  : http://www.bbc.co.uk

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खाली बोतलों से बना सपनों का आशियाना

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अभय तिवारी, महेश्वर (खरगोन)। अपने आशियाने को अनोखा और सबसे सुंदर बनाने की हर किसी को चाहत होती है। घर के डिजाइन को लेकर कई इंजीनियरों से सलाह लेने के अलावा घंटों इंटरनेट पर बैठकर कुछ अलहदा तरीका ढूंढ़ा जाता है। ऐसा ही एक आशियाना इन दिनों मंडलेश्वर मार्ग पर प्राचीन वृद्धकालेश्वर के समीप बन रहा है। मटके के आकार वाले इस निर्माणाधीन मकान की खासियत यह है कि इसके निर्माण में ईंटों की जगह पानी की खाली बोतलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस मकान की निर्माण शैली ऐसी है कि इस पर सीमेंट-कंक्रीट की छत नहीं होगी, अपितु इसकी दीवारें ही धीरे-धीरे गोलाई लेती हुई मकान को मटके का आकार देंगी। हॉल, बेडरूम और बाथरूम वाले इस मकान को बनाने वाले कारीगर हैं इंदौर के रवि बामनिया। उन्होंने बताया कि इस मकान के निर्माता चंद्रमोहन पंवार के परिवार ने इंटरनेट पर किसी विदेशी द्वारा इस प्रकार के मकान के बारे में देखा था। इसके बाद उन्होंने भी ऐसे ही मकान के निर्माण की इच्छा जाहिर की। 1500 वर्गफीट, 30 हजार बोतल लगभग 1500 वर्गफीट में बने रहे मकान में खाली बोतलों में मिट्टी को भरा जा रहा है। इसके पश्चात सलीके के साथ लोहे की जाली पर एक-एक बोतल को बांधकर उसे रेत और सीमेंट से जोड़कर मजबूती दी जा रही है। रवि बामनिया ने बताया कि पूरे मकान के निर्माण में लगभग 30 हजार बोतलों का उपयोग होगा। बोतलें करीब एक फीट लंबाई की होने से इसकी दीवारें करीब एक फीट मोटी होंगी।
समय और लागत दोगुनी: मिट्टी का उपयोग होने से यह मकान वातानुकूलित जैसा होगा। यह न तो गर्मी के मौसम में गर्म होगा और न ही ठंड में ज्यादा ठंड लगेगी। बामनिया ने बताया कि आमतौर पर बनने वाले मकानों की अपेक्षा इस मकान के काम में जहां ज्यादा समय लगता है, वहीं इसकी लागत भी दोगुनी बैठती है। बहरहाल जैसे-जैसे इस मकान की जानकारी लोगों को हो रही है, उत्सुकतावश लोग इसे अनूठे मकान को देखने पहुंच रहे हैं। sabhar :jagran.com

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कुदरत की हैरतअंगेज कारीगरी

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तीन तस्वीरों में देखिए कुदरत की बेहतरीन कारीगरी

दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जो कुदरत की हैरतअंगेज कारीगरी के लिए विख्यात हैं। इन्हीं में से तीन ऐसे टूरिस्ट स्पॉट से हम आपको रूबरू करा रहे हैं जो करोडों सैलानियों को आकर्षित करते हैं।
तीन तस्वीरों में देखिए कुदरत की बेहतरीन कारीगरी

सूरज से आंखें चार: तमिलनाडु मेंतिरुचिरापल्ली का यह मंदिर 83 मीटर ऊंची रॉक पर है। करीब सात सदियों तक कई राजाओं ने इस रॉक फोर्ट टेंपल का रचा। विशाल चट्टान पर हैरतअंगेज कारीगरी को देखना जैसे सूर्य से आंखें चार करना है। यहां आने वाले करीब दो करोड़ सैलानियों के आकर्षण का केंद्र इस रॉक से सुबह के समय कावेरी नदी और उसके पार श्रीरंगम के मंदिर का मनोरम दृश्य देखना ऊर्जा की गहरी अनुभूति देता है।
तीन तस्वीरों में देखिए कुदरत की बेहतरीन कारीगरी


दुनिया में सबसे ऊंचाई पर बना लॉज: 4,250 मीटर की ऊंचाई और इसी ऊंचाई पर बसा येटी माउंटेन होम। यह दुनिया में सबसे ऊंचाई पर स्थित लॉज है। माउंट एवरेस्ट रेंज के सबसे करीब इतनी ऊंचाई पर होने के बावजूद नए साल के शुरुआती दिनों में फुल रहता है। माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848 मीटर है।

तीन तस्वीरों में देखिए कुदरत की बेहतरीन कारीगरी


लिविंग रूट ब्रिज: मेघालय के नांगरियट में सैकड़ों साल पुराने विशाल पेड़ की फैलती जड़ों व शाखाओं से बना ‘लिविंग रूट डबल डेकर सस्पेंशन ब्रिज‘ आज भी मजबूती का नायाब उदाहरण है। इस पर से 50 लोग एकसाथ गुजर सकते हैं। चेरापुंजी के पास होने के कारण यह स्थान पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। खूबसूरत वादियां पसंद करने वाले पर्यटक यहां नया साल मनाने परिवार व दोस्तों के साथ पहुंचते हैं। sabhar : bhaskar.com

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मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

ब्रह्मचारी पर यौन शोषण का आरोप

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 UPDATE:'जब मैं 26 का था, तब से ब्रह्मचारी मेरे संग भी करते आ रहे थे दुष्कर्म'!


महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश वर्मा एक नई मुसीबत में फंस गए हैं। वर्मा पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला के पति ने मीडिया के सामने यह कहते हुए सनसनी पैदा कर दी कि, उनके संग भी दुष्कर्म होता रहा। उधर, कोर्ट द्वारा 1 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजे गए गिरीश वर्मा मंगलवार को महिला थाने बयान के लिए लाए गए। उससे कुछ देर पहले पीडि़ता भी अपने पति के संग बयान देने पहुंची।

जिस ब्रह्मचारी के आगे हजारों लोग श्रद्धा से झुक जाते हैं, वे मंगलवार जब महिला थाने में बयान के लिए लाए गए, तब उनके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था। तेजस्वी सूरत मुरझाई हुई थी। देर रात तक पुलिस की पूछताछ के कारण थकावट और टेंशन पूरी बॉडी में स्पष्ट दिखाई पड़ रही थी। सोमवार को महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गिरीश वर्मा को मजिस्ट्रेट वर्षा शर्मा की कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें 1 जनवरी तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

UPDATE:'जब मैं 26 का था, तब से ब्रह्मचारी मेरे संग भी करते आ रहे थे दुष्कर्म'!

ऐसे आलीशान महलनुमा कोठी में रहते है गिरीश वर्माः गिरीश वर्मा का महलनुमा कोठी दस एकड़ में फैली है। पहले यह पांच एकड़ में बनी थी। इसमें एक गार्डन है जिसमें जयपुर से मंगाया हुआ सफेद मार्बल का फव्वारा लगा हुआ है। तकरीबन 11 हजार स्क्वायर फुट में बनी हुई कोठी में दो फ्लोर है। दोनों फ्लोर अपने आप में अलग है। गिरीश वर्मा ऊपर वाले फ्लोर में रहते है। इस कोठी में दोनों फ्लोर में ड्राइंग और डायनिंग रूम के अलावा चार कमरे है। ऊपर जाने के लिए एक लिफ्ट लगी हुई है। कोठी में ऊपरी ओर पीतल का कलश लगा हुआ है। अंदर गार्डन के आसपास हाथी सहित विभिन्न कलाकृति लगी हुई है। पूरी कोठी में सफेद मार्बल का काम हुआ है।
पीडि़ता के पति ने भी लगाया दुराचार होने का आरोपः गिरीश वर्मा को सोमवार को जब अदालत में ले जाया गया था, वहां पर पीडि़ता के पति पहुंच गए। पीडि़ता के पति ने मीडिया के सामने इस बात का खुलासा किया कि गिरीश वर्मा ने उनके साथ भी दुराचार किया है। उन्होंने बताया कि जब वे 26 वर्ष के तब से श्री वर्मा ने उनके साथ लगातार दुराचार किया। उसके बाद उन्होंने वर्मा से दूरी बनाने के लिए कई प्रयास किए उनका कहना था कि वे भय वश ये बात किसी को नहीं बता पाए। उनका कहना है कि अब जब गिरीश वर्मा की करतूत सामने आई तो वे दुनिया को बताना चाहते है कि गिरीश वर्मा बहुत ही खराब व्यक्ति हैं।
रहस्यमय तरीके से बयान देने पहुंचे गिरीश वर्मा: निज सचिव की पत्नी के साथ ज्यादती का आरोप लगने के 10 महीने बाद महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गिरीश वर्मा 27 दिसंबर को बयान दर्ज कराने रहस्यमय तरीके से महिला थाने पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस को बताया था कि आरोप लगाने वाली महिला के पति को काम में गड़बड़ी करने के कारण संस्थान से निकाल दिया था। इसीलिए उसने उन्हें बदनाम करने का षड्यंत्र रचा और ब्लैकमेल कर रही है। इससे पहले वर्मा ने यह भी कहा था कि शिक्षिका का पति घर खरीदने के लिए संस्थान ने पैसे मांग रहा था, जो कि उसे नहीं दिए गए। पैसे ने मिलने से नाराज पति-पत्नी मेरे साथ इस तरह का गंदा खेल खेल रहे हैं।
आरोप के बाद स्कूल से निकाल दिया गया शिक्षिका को: गिरीश वर्मा की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पीडि़त महिला अपने पति के साथ थाना परिसर में ही धरने पर बैठ गई थी। इस दौरान उसके पति ने गुस्से में वर्मा को कुछ बोलने की कोशिश की, लेकिन महिला और पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुलिस में मामले की शिकायत होने के 278 दिन बाद पहली बार थाने पहुंचे वर्मा तीन घंटे चालीस मिनट तक बयान देने के बाद वहां से चले गए थे। जाते-जाते मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि मुझे इस मामले में कुछ नहीं कहना है। मेरे वकील ही इस बारे में बात करेंगे।महिला महर्षि विद्या मंदिर रतनपुर की शिक्षिका थी। वर्मा पर आरोप लगाने के बाद उसे और उसके पति को स्कूल से निकाल दिया गया था। sabhar : bhaskar.com


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सोमवार, 30 दिसंबर 2013

स्कूल छोड़ने के 74 साल बाद पीएचडी की.

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बुजुर्ग और पीएचडी
लंदन के एक मजदूर के बेटे डॉ वूफ ने सोलह साल की उम्र में नौकरी करने के लिए स्कूल छोड़ दिया था लेकिन बाद में उन्होंने गणित के शिक्षक के रूप में नौकरी की और सेवानिवृत होने के बाद पढ़ाई पूरी करने लौट आए.

स्कूल के दिनों में उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी लेकिन युद्ध शुरू होने के कारण उन्हें 16 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़ के जाना पड़ा और उनकी विश्वविद्यालय की पढ़ाई अधूरी रह गई.डॉ वूफ ने कहा, " डॉक्टरेट होना मेरे जीवन का सबसे सम्मानजनक अनुभव है. स्कूल के दिनों में मैं विश्वविद्यालय के बारे में नहीं सोचता था."
मेरे पिता का मानना था कि "मुझे काम करके घर के बजट में योगदान देना चाहिए. आक्रमण शुरू होने से पहले मैं वापस लंदन आ गया और शहर के पश्चिमी भाग के एक ऑफिस में नौकरी करने लगा. घर ध्वस्त होने से पहले हमें घर छोड़ के जाना था."

युद्ध में सेना को अपनी सेवा देने के बाद जब वो नौकरी पर लौटे तो उनके पास 39 साल की अवस्था में एक अच्छी खासी नौकरी के साथ बीवी और चार बच्चे थे."
वे कहते हैं, "मैंने अपने आप से पूछा क्या मैं ऐसी ही जिंदगी जीना चाहता था शायद नहीं. मेरी बीवी का रवैया काफी सहयोगपूर्ण था."
इसलिए उन्होंने कॉलेज़ में प्रशिक्षिण लेने के बाद क्यूमबरिया के एप्पलबाई स्कूल में गणित शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू कर दी. वे पढ़ाने के काम से 20 साल तक जुड़े रहे.
उनका कहना है, "पढ़ाने में मुझे बहुत मजा आता है और इसमें मुझे आत्मसंतुष्टि मिलती है."
डॉ वूफ ने वर्ष 2003 में ईस्ट एंजेलिया विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री हासिल की.
जब उन्होंने साल 2008 में क्यूमबरिया विश्वविद्यालय में फिर से अपनी पढ़ाई शुरू की तो वहां के काम करने वालों ने लैंसेस्टर विश्वविद्यालय से पीएचडी करने के लिए प्रोत्साहित किया.
बूफ बताते हैं, " विश्वविद्यालय का महौल बहुत उत्साहवर्द्धक और प्रेरणादायी था. दूसरे छात्र और कर्माचारी काफी मददगार थे. उनसे मिलना-जुलना मुझे बहुत अच्छा लगता था."
उनकी बीवी की मौत हो चुकी है. उनका कहना है " मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि इस उम्र में भी स्वस्थ हूं और इतने सारे लोग मुझे प्यार करते हैं . sabhar :
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खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया अकेले 23 साल के कठिन परिश्रम से तैयार कर दी

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एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया
नार्वे के महान मूर्तिकार गुस्ताव विगेलैंड (11 अप्रैल 1869-12 मार्च 1943) ने कला की एक अद्भुत की दुनिया को अकेले 23 साल के कठिन परिश्रम से तैयार कर दी। इस समय इसे दर्शकों के लिए खोल दिया गया है। गुस्ताव विगेलैंड वह ऑर्टिस्ट हैं, जिन्होंने दुनिया के सबसे श्रेष्ठ नोबल शांति पुरस्कार के पदक को भी डिजाइन किया था।
इस कला के विशाल संग्रह के शिल्प के नमूनों में मानवीय मनोवीय भावों की कुछ उसी तरह की अभिव्यक्ति दिखाई देती है जैसी खजुराहों की प्रतिमाओं में। इन आर्ट वर्क में पुरुष और महिला के बीच के रिश्ते को चित्रित किया गया। मनुष्य की विभिन्न अवस्थाओं जैसे, वयस्क अवस्था और बचपन को दिखाया है।
यहां मानवीय व्यवहार जैसे शौक, पेशा, तलाश, दौड़, पहलवानी, नृत्य, आलिंगन आदि को कला के माध्यम से चित्रित किया गया  है। हालांकि, गुस्ताव विगेलैंड के कुछ आर्ट बेहद अब्सट्रैक्ट (अबूझ) हैं।

एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया
ओस्लो सिटी प्रशासन ने 1921 में एक लंबे विवाद के बाद इस महान कलाकार का मकान गिराना तय किया था। गुस्ताव विगेलैंड के मकान मेंं उनका आर्ट स्टूडियो और लाइब्रेरी थी। उन्होंने शहर से दूर नई बिल्डिंग में रहना स्वीकार कर लिया था। आर्टिस्ट गुस्ताव विगेलैंड ने यह भी वादा किया था कि वह इसके बदले सिटी को अपने सभी आर्ट वर्क जैसे शिल्प के नमूने, ड्राइंग, रेखाचित्र, नक्काशी आदि दान में वापस कर देंगे

एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया

गुस्ताव विगेलैंड 1924 में नए स्टूडियो में पहुंचे। यह फ्रोगनर पार्क के पास स्थित था। उन्होंने अकेले ही यहां 23 साल तक काम करके अदभुत कलाकृतियां तैयार कर दी। उनकी इन कलाकृतियों को 320,000 वर्ग मीटर (80 एकड़) क्षेत्र में फैले पार्क में रखा गया है। इसमें 212 ब्रॉन्ज और ग्रेनाइट के शिल्प हैं।
एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया
गुस्ताव विगेलैंड के शिल्प में सैकड़ों पुरुष, महिला और बच्चों के जीवन की विभिन्न अवस्थाओं (नवजात, बचपन, वयस्क, किशोर, यौवन और प्रौढ़ावस्था आदि)में दिखाया गया है। इस पार्क का मुख्य आकर्षण द मोनोलिथ है। यह 14 मीटर लंबा ग्रेनाइट का स्ट्रक्चर है, जो आकाश की ओर रुख किए नजर आता है। इसमें 121 फिगर टॉप पर चढऩे के लिए संघर्ष करते हुए नजर आते हैं।

एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया

इस पार्क का मुख्य आकर्षण द मोनोलिथ है। यह 14 मीटर लंबा ग्रेनाइट का स्ट्रक्चर है, जो आकाश की ओर रुख किए नजर आता है। इसमें 121 फिगर टॉप पर चढऩे के लिए संघर्ष करते हुए नजर आते हैं।


गुस्ताव विगेलैंड की कला का यह विशाल संग्रह विश्व की एक धरोहर है। दुनिया के इस सबसे विशाल स्कल्चर पार्क में मूर्ति, रेखाचित्र, नक्शी के नमूने और मॉडल उपलब्ध हैं, जिनमें 212 कांस्य और ग्रेनाइट की कलाकृतियां हैं। 80 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला यह कला पार्क ओस्लो के फ्रोगनर गेट के पास स्थित है। इसे विगीलैंड स्कल्पचर अरेंजमेंट इन फ्रोगनर पार्क कहा जाता है।

गुस्ताव विगेलैंड की मूर्तिकला का मुख्य उद्देश्य पुरुष और महिला के बीच के रिश्ते को चित्रित करना है। इसमें वयस्क अवस्था और बचपन की अवस्थाओं में मनुष्य की स्थितियों को दिखाना है। इसमें मनुष्य के व्यवहार को दर्शाने वाली बातें शौक, पेशा, तलाश, दौड़, पहलवानी, नृत्य, आलिंगन आदि को दिखाया है। इतना सबके बावजूद भी गुस्ताव विगेलैंड के कुछ आर्ट अब्सट्रैक्ट हैं।
एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया

गुस्ताव विगेलैंड ने अपने सभी शिल्पों का आकार बिना किसी व्यक्ति या कलाकार की सहायता के किया है। गुस्ताव अपनी कला के नमूनों को संग्रहित रूप में देखने के लिए जिंदा नहीं रहे। 1950 तक उनके अधिकांश शिल्प और ऑर्किटेक्चर डिजाइन बिखरे ही पड़े रहे। इसके बाद इन्हें इकट्ठा करने की कोशिश की गई और बाद में यह कला पार्क का रूप ले पाया। sabhar : bhaskar.com


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शनिवार, 28 दिसंबर 2013

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार सबसे गरीब मुख्यमंत्री

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देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री से 100 गुना अमीर हैं केजरीवाल, जानें पूरा सच

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार (फोटो ऊपर देखें) भारत के सबसे गरीब मुख्यमंत्री हैं। उनके पास करीब 2.5 लाख रुपए की चल-अचल संपत्ति है। इनमें 9720 रुपए का बैंक जमा और 1080 रुपए की नकद राशि शामिल है। माणिक के मुताबिक, उन्होंने ज्वैलरी, शेयर, बांड और अन्य निवेश के साधनों में कोई पैसा नहीं लगाया है। उनका कहना है कि जब उन्हें देश का सबसे गरीब मुख्यमंत्री कहा जाता है, तो उन्हें शर्म महसूस होने की बजाय अच्छा लगता है।आम आदमी के हक की लड़ाई लड़ने की बात कर रहे अरविंद देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री नहीं हैंकेजरीवाल दपंत्ति देश के करोड़पति मुख्यमंत्री दंपत्तियों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। दिलचस्प है कि उनके और उनकी पत्नी सुनीता के पास कुल मिलाकर 2.10 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
केजरीवाल द्वारा चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक, अरविंद के नाम 93.62 लाख रुपए की दौलत है। इनमें गाजियाबाद (यूपी) के इंद्रापुरम में 55 लाख रुपए का फ्लैट और हरियाणा में करनाल जिले के शिवानी में 37 लाख रुपए का एक फ्लैट शामिल है। इसके अलावा दिल्ली के नवनियुक्त मुख्यमंत्री के पास 1.62 लाख रुपए का बैंक डिपॉजिट और 5000 रुपए की नकदी भी है।

देनदारियों की बात करें तो केजरीवाल के नाम कुल 23 हजार रुपए की देनदारी है, जो कि उनके द्वारा बिजली का बिल न जमा करने के चलते आई है।

उधर, अरविंद की पत्नी सुनीता के पास पति से ज्यादा दौलत है। चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक सुनीता के नाम गुड़गांव में 1 करोड़ रुपए का घर, 9 लाख रुपए की ज्वैलरी सहित 16.85 लाख रुपए का बैंक डिपॉजिट और 10 हजार रुपए की नकदी है। sabhar : bhaskar.com

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