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गुरुवार, 10 अगस्त 2023

भ्रूणों की जीन एडिटिंग का क्यों हो रहा विरोध?

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आज दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिनके जीन को सीआरआईएसपीआर-केस9 जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल करके संशोधित किया गया है. तकनीक सही है या गलत, इस पर चर्चा होती रहेगी, लेकिन जीन थेरेपी काम कैसे करती हैं और उनकी सीमाएं क्या हैं? 


आज दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिनके जीन को सीआरआईएसपीआर-केस9 जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल करके संशोधित किया गया है. तकनीक सही है या गलत, इस पर चर्चा होती रहेगी, लेकिन जीन थेरेपी काम कैसे करती हैं और उनकी सीमाएं क्या 

 2018 में वैज्ञानिक हे जिआन्की ने संशोधित जीनोम वाली दो बच्चियों के जन्म की घोषणा कर दुनिया को चौंका दिया. उन्होंने दावा किया था कि वह सीआरआईएसपीआर-केस9 जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर दो जुड़वां लड़कियों के जीन को संशोधित करने में कामयाब रहे हैं, ताकि उन्हें भविष्य में एड्स वायरस के संक्रमण से बचाया जा सके.


हे जिआन्की चीन के शेनजेन प्रांत में सदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर कार्यरत थे. जिआन्की ने जुड़वा भ्रूणों पर सीआरआईएसपीआर-केस9 नामक जीन एडिटिंग टूल का इस्तेमाल किया, ताकि उन भ्रूण के सीसीआर5 जीन को संशोधित किया जा सके और उनके अंदर एचआईवी के लिए प्रतिरोध पैदा हो सके.


इन दोनों बच्चियों के अलावा, एक साल बाद तीसरा ऐसा बच्चा पैदा हुआ जिसके जीन में संशोधन किया गया था. ये तीनों दुनिया के पहले जीन संशोधित बच्चों का प्रतिनिधित्व करते हैं. पांच साल बाद भी तीनों कथित तौर पर स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं.


इस घटना से वैज्ञानिकों के साथ-साथ सामान्य लोगों का एक बड़ा तबका आक्रोशित हुआ. जिआन्की के शोध और कार्य की नैतिकता को लेकर दुनिया के कई हिस्सों में काफी तेज और व्यापक आलोचना हुई. नतीजा यह हुआ कि ‘गैर-कानूनी तरीके से डॉक्टरी उपचार' के आरोप मेंजिआन्की को चीन में तीन साल कैद की सजा सुनाई गई.


ये तीनों बच्चे भ्रूण के दौरान जीनोम संशोधन के पहले मामलों के उदाहरण हो सकते हैं, लेकिन वे संशोधित जीनोम वाले एकमात्र इंसान नहीं हैं. सिकल सेल रोग के इलाज के लिए सीआरआईएसपीआर-केस9 का इस्तेमाल करके, क्लिनिकल ट्रायल में 200 से अधिक वयस्कों का इलाज किया गया है.


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क्या भविष्य में बच्चे पेट्री डिश में पैदा होंगे?

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.वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल के उपयोग से प्रयोगशाला में ऐसे भ्रूण का निर्माण कर लिया है जो मानव भ्रूण के बेहद करीब है. वैज्ञानिक दृष्टि से तो यह एक मील का पत्थर है लेकिन नैतिक दृष्टि से यह कई सवालों को जन्म 

मैग्डालेना जर्निका गेट्ज का एक रिसर्च इसी साल जून में नेचर जरनल में प्रकाशित हुआ था. शोध के नतीजे प्रकाशित होने पर गेट्ज का कहना था, "हमारा लक्ष्य जीवन निर्माण करना नहीं है.”


हालांकि कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में डेवलेपमेंटल बॉयोलॉजिस्ट जर्निका गेट्ज और उनकी टीम ने सही मायनों में कुछ ऐसा खोजा है जो आगे चलकर एक दिन इंसानों के बहुत करीब पहुंच सकता है. जिस दिन गेट्ज ने बॉस्टन कॉन्फ्रेंस में अपनी रिसर्च के नतीजे पेश किए, उसके अगले दिन गॉर्डियन अखबार ने इसे रिपोर्ट करते हुए लिखा था कि सिंथेटिक मानव भ्रूण का अभूतपूर्व विकास हुआ है. गॉर्डियन की इस हेडलाइन ने मीडिया में खलबली मचा दी. केंब्रिज में ये स्टडी लगभग उसी समय प्रकाशित हुई थी, जब इस्राएल में एक प्रतिद्वंदी रिसर्च टीम ने अपने अध्ययन में भी ऐसा ही कुछ पाया था.

 रिसर्च के बाद अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इससे जुड़े नैतिक मुद्दों को उठाना शुरू किया, वैसे ही मानो इसने फ्रैंकस्टीन के दैत्यों की छवियों को उभार दिया. रिसर्चरों की दोनों ही टीमों ने पहले किए गए प्रयासों की तुलना में ह्यूमन स्टेम सेल से बहुत एडवांस स्तर का भ्रूण जैसा एक स्ट्रक्चर तैयार कर लिया था. ये भ्रूण 14 दिनों के प्राकृतिक भ्रूण के बराबर था, जो प्राकृतिक निषेचन यानी फर्टिलाइज़ेशन के बाद विकसित होता है.

भ्रूण अनुसंधान का नैतिक पक्ष

हमने इंसानों को चांद पर पहुंचा दिया है, इंसानों ने समुद्रों की अनंत गहराइयों को नाप दिया है लेकिन सही मायनों में हम शुरुआती जीवन के बारे में बहुत कम जानते हैं. किसी इंसानी जीवन को खतरे में डाले बिना रिसर्चर शुरुआती जीवन के विकास के बारे में कुछ भी पता नहीं लगा सकते हैं, इसीलिए उन्हें अपनी रिसर्च को किसी जानवर के भ्रूण या मानव के मॉडल भ्रूण तक सीमित करना पड़ा था. ये खोज रिसर्चरों को गर्भपात, आनुवंशिक स्थितियों और जन्मजात अंगों में होने वाले दोषों के कारणों को जानने में मददगार हो सकती हैं

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मंगलवार, 8 अगस्त 2023

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से बदलती न्यूज़ की दुनिया

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आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से बदलती न्यूज़ की दुनिया

 

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस आने वाले वक़्त में कई चीज़ों को पूरी तरह बदलने की ताक़त रखता है.


कई एआई जेनेरेटड कैरेक्टर्स इसके उदाहरण हैं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर आए दिन सामने आते रहते हैं.


भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी एआई तकनीक इस्तेमाल हो रही है, जहां एक टीवी चैनल ने इसका इस्तेमाल करते हुए एक टीवी प्रेज़ेंटर तैयार किया है.

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Work Force Age: दुनिया में चलेगा अपना सिक्का, US-जापान-कनाडा अब हो गए बूढ़े, भारत सबसे जवान

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भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के तौर पर उभरा है. विश्व बैंक (World Bank) से लेकर आईएमएफ (IMF) तक ने इंडियन
साल 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका (US) के एक तिहाई (37.3 फीसदी) से भी अधिक वर्कफोर्स 50 वर्ष और उससे अधिक आयु का है, ऐसे में कर्मचारियों का ये आंकड़ा लगभग 16.1 मिलियन होता है. वहीं लगभग 15 फीसदी वर्कफोर्स या 6.4 मिलियन कर्मचारी 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं
वर्ल्ड बैंक के अनुसार आने वाले समय में जहां अमेरिका, जापान, कनाडा एवं अन्य यूरोपीय देश परेशान दिखेंगे वहीं भारत के लिए यह समय बहुत ही बेहतरीन रहने वाला है। ऐसे समय में जहां दुनिया के कुछ देश फाइनेंशियल तौर पर संघर्ष करते नजर आएंगे वहीं भारत सहित कुछ देश फाइनेंशियल तौर पर और भी मजबूत नजर आएंगे। यह सब वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ की रिपोर्ट कह रही है। आइये आपको बताते हैं कि कैसे आने वाले समय में भारत सोने की चिड़िया कहलाएगा यानि कैसे भारत का समय सुनहरी होगा। Indian Economy
यूरोपीय देश हो रहे बूढ़े | Work Force Age दुनिया के फिलहाल जो हालात हैं, उन हालातों में दो ऐसे फैक्टर हैं, जो आने वाले समय में अमेरिका, कनाड़ा, जापान और अन्य यूरोपीय देशों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाले हैं या यूं कहें कि बड़ी मुसीबत बनने वाले हैं। दूसरी तरफ भारत, वियतनाम और चीन जैसे देशों के लिए फायदेमंद रहेंगे। एक्सपर्ट्स की मानें तो पश्चिमी देश बूढ़े होते जा रहे हैं। कनाडा, अमेरिका और यूरोप में कर्मठ, मेहनती युवाओं की कमी होती जा रही है, अन्य कामकाजी लोग बूढ़े होते जा रहे हैं। इस मामले में भारत ऐसा देश होगा जिसे ऐसे हालातों से राहत मिलेगी।

एशियाई देश इनमें शामिल होंगे। भारत और वियतनाम की बात करें तो इन देशों में कार्य करने वाले अधिकतर लोग युवा हैं और युवा देश के कर्णधार होते हैं। अगर आंकड़ों की बात की जाए तो अमेरिका सहित अन्य यूरोपीय देशों में काम करने वाले कर्मचारियों की उम्र के आंकड़े ये साफ करते हैं कि आने वाले समय में हालात कैसे होंगे। 2020 के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के एक तिहाई से भी अधिक वर्कफोर्स 50 साल और उससे ज्यादा उम्र की है। इस प्रकार ऐसे कर्मचारियों का यह आंकड़ा करीब 16.1 मिलियन होता है। दूसरी तरफ 15 प्रतिशत के करीब वर्कफोर्स या 6.4 साल या उससे ज्यादा आयु के हैं।

बात अगर जापान की करें तो जापान भी अपनी बूढ़ी होती आबादी को लेकर चिंतित है। उसके सामने यह बड़ी समस्या बनकर खड़ी है। इसको लेकर सरकार काफी परेशान नजर आ रही है। बता दें कि जापान के जन्मदर में हो रही लगातार गिरावट तथा बच्चों की हो रही निरंतर कमी के कारण जापान का भविष्य संकट में आ सकता है। वर्ष 2022 के आंकड़ों में पहली बार जापान में बच्चों वाले परिवार एक करोड़ से भी कम हो गए हैं।

इससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर जरूर देखने को मिल सकता है। अगर जन्मदर में कमी आएगी तो जाहिर सी बात है कि वर्कफोर्स भी कम होगा, जिससे बूढ़े लोगों की आबादी बढ़ेगी। इसी गिरती जन्मदर के कारण कामकाजी युवाओं की कमी हो जाएगी जिसका सीधा असर उद्योगों, कारोबार पर पड़ता दिख सकता है। क्योंकि अगर बुजुर्ग कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी तो उत्पादन क्षमता अपने आप ही कम होती चली जाएगी और देश की ग्रोथ कम हो जाएगी, आर्थिक तौर पर वो देश कमजोर हो जाएगा।

आज के दौर में, आज के समय में सभी देशों की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए ऐसे देशों को खोज रही हैं जहां पर प्रोडक्शन फैक्ट्री लगाना आसान और फायदेमंद हो और जहां काम करने वाले लोग भी कम सेलरी में मिल जाएं। ऐसे में भारत देश ही एक ऐसा दिखता है जहां ऐसे लोगों की भरमार है। इस मामले में भारत वियतनाम और चीन जैसे देश को भी पीछे छोड़ सकता है। आज बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने उद्योगों को लगाने के लिए भारत पर अपनी नजर गढाए हुए हैं। ऐपल से लेकर टेस्ला जैसी कंपनियों के हाल ही में उठाए गए कुछ कदम ताजा उदाहरण हैं। भविष्य में भी भारत में कई बड़ी कंपनियां अपना कारोबार यहां जमा सकती हैं, जिसका सीधा फायदा देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और इकोनॉमी और भी रफ्तार पकडेÞगी।

ऐसी कंपनियों के लिए भारत, वियतनाम और चीन जैसे देश बड़े अहमियत रखते हैं जो कंपनियां सस्ती मैनपावर और किफायती प्रोडक्शन सेट करने के लिए दूसरे देशों का रूख कर रही हैं। ऐसी कंपनियों को टेक फ्रेंडली देश ज्यादा भा रहे हैं। भारत टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी पैठ जमा रहा है और भारत की सरकार भी टैक्नोलॉजी में बेहतरीन कदम उठा रही है।



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सोमवार, 7 अगस्त 2023

क्या दवाइयां मोटापे से निजात दिला सकती हैं?- दुनिया जहान

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जून 2023 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने देश में मोटापे की समस्या सुलझाने के लिए एक शुरुआती योजना यानी पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा की. इस योजना पर 4 करोड़ पाउंड खर्च होंगे. उन्होंने कहा कि देश के लोगों में ओबेसिटी यानी मोटापा घटाने के लिए नवीनतम दवाओं के इस्तेमाल से बड़ी सफलता मिल सकती है. इसमें से एक दवा की मांग तो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अभी से आसमान छू रही है. सोशल मीडिया पर भी अटकलों का बाज़ार गर्म है कि हॉलीवुड के कौन से सितारे इस दवा के इस्तेमाल से मोटापा घटा रहे हैं? मगर यह सबके लिए नहीं है. इस सप्ताह दुनिया जहान में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या दवाओं के इस्तेमाल से मोटापे की समस्या हल हो सकती है?

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Atiq Ahmed Case: माफिया अतीक अहमद की फरार पत्नी शाइस्ता परवीन भगोड़ा घोषित, पुलिस ने घर की कुर्की भी की

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Atiq Ahmed Case: माफिया अतीक अहमद की फरार पत्नी शाइस्ता परवीन भगोड़ा घोषित, पुलिस ने घर की कुर्की भी की

UP News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में माफिया अतीक अहमद (Atiq Ahmed) की फरार पत्नी शाइस्ता परवीन (Shaista Parveen) को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है. 50 हजार रुपये की इनामी शाइस्ता परवीन को प्रयागराज पुलिस ने भगोड़ा घोषित किया है. भगोड़ा घोषित करने के बाद पुलिस ने शाइस्ता परवीन के घर की कुर्की भी की. हालांकि, यह मकान दूसरे के नाम पर है और उमेश पाल हत्याकांड के बाद इसे बुलडोजर के जरिए धवस्त किया जा चुका है.
प्रयागराज के धूमनगंज थाने की पुलिस ने शाम करीब 6:30 बजे कुर्की का नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई की. चकिया इलाके में स्थित मकान की कुर्की की प्रक्रिया का नोटिस चस्पा किया गया. इस दौरान डुगडुगी बजाकर मुनादी भी कराई गई. पुलिस ने जिस तोड़े गए मकान को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की, वहां इसका नोटिस भी चस्पा किया गया. कोर्ट के आदेश पर

प्रयागराज के धूमनगंज थाने की पुलिस ने शाम करीब 6:30 बजे कुर्की का नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई की. चकिया इलाके में स्थित मकान की कुर्की की प्रक्रिया का नोटिस चस्पा किया गया. इस दौरान डुगडुगी बजाकर मुनादी भी कराई गई. पुलिस ने जिस तोड़े गए मकान को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की, वहां इसका नोटिस भी चस्पा किया गया. कोर्ट के आदेश पर मकान को कुर्क किए जाने की कार्रवाई शुरू की गई. कुर्की नोटिस की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी.


पुलिस को लगातार चकमा दे रही शाइस्ता परवीन


चर्चित उमेश पाल और दो सरकारी गनर की हत्या में माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन नामजद आरोपी है. 24 फरवरी को धूमनगंज इलाके में फिल्मी अंदाज में उमेश पाल और दो सरकारी गनर की हत्या की गई थी. इस मामले में अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित है. शाइस्ता परवीन वारदात के बाद से लगातार पुलिस को चकमा दे रही है. पति और बेटे की मौत के बाद भी वह सामने नहीं आई.


जफर अहमद के नाम पर था मकान


पुश्तैनी घर पर बुलडोजर चलने के बाद माफिया अतीक अहमद का परिवार चकिया के इसी 297/205 एफ मकान में रहता था. यह मकान जफर अहमद के नाम पर था. 7 जनवरी 2021 को जफर अहमद के नाम इसकी रजिस्ट्री हुई थी. माफिया अतीक अहमद का पुश्तैनी मकान तोड़े जाने के बाद उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन और उनके बेटे इसी मकान में रहते थे.


कौन है जफर अहमद?


24 फरवरी को उमेश पाल और दो सरकारी गनर की हत्या के बाद पीडीए ने एक मार्च को इस मकान पर बुलडोजर चला दिया था. एक मार्च 2023 को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में मकान को ध्वस्त कर दिया गया था. उस समय यह जानकारी आई थी कि मकान के बिजली का कनेक्शन शाइस्ता परवीन के नाम पर ही था. जफर अहमद माफिया अतीक अहमद के वकील खान सौलत हनीफ का साला है. जफर अहमद बांदा का रहने वाला है और एक न्यूज एजेंसी में पत्रकार भी था. इसी मकान को पुलिस अब कुर्क करने की कार्रवाई कर रही है.


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राहुल गांधी लोकसभा सदस्यता बहाल होने के बाद पहुंचे संसद, गांधी की प्रतिमा को किया नमन

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 राहुल गांधी लोकसभा सदस्यता बहाल होने के बाद पहुंचे संसद, गांधी की प्रतिमा को किया नमन

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता लगभग चार महीने बाद बहाल हो गई है. इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है. राहुल गांधी की सदस्‍यता ऐसे समय में बहाल हुई है, जब संसद में कुछ दिनों बाद ही अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर बहस होने वाली है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी लोकसभा की सदस्यता बहाल होने के बाद सोमवार को संसद पहुंचे. राहुल गांधी जैसे ही संसद भवन के परिसर में अपनी गाड़ी से नीचे उतरे, वैसे ही वहां मौजूद उनकी पार्टी और कुछ अन्य सहयोगी दलों के सांसदों ने उनका स्वागत किया तथा उनके समर्थन में नारेबाजी की. राहुल गांधी की लोकसभा सदस्‍यता लगभग चार महीने बाद बहाल हुई है. 

संसद भवन पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने सबसे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा को नमन किया और फिर लोकसभा की कार्यवाही में शामिल हुए. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, राज्यसभा में पार्टी के उप नेता प्रमोद तिवारी, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एनके प्रेमचंद्रन और कई अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद भवन के प्रवेश द्वार पर राहुल गांधी का स्वागत किया.

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मणिपुर हिंसाः सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाई कमेटी, हाईकोर्ट की तीन पूर्व जजों को किया शामिल

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मणिपुर हिंसाः सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाई कमेटी, हाईकोर्ट की तीन पूर्व जजों को किया शामिल

सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा मामले से जुड़े मुद्दों की पड़ताल के लिए हाईकोर्ट के तीन पूर्व जजों की कमेटी बनाई है. जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पद से रिटायर जस्टिस गीता मित्तल, जस्टिस आशा मेनन और जस्टिस शालिनी पनसाकर जोशी की तीन सदस्यीय न्यायिक जांच कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने बनाई है.

मणिपुर हिंसा मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा मामले से जुड़े मुद्दों की पड़ताल और मानवीय सुविधाओं के लिए हाईकोर्ट के तीन पूर्व जजों की कमेटी बनाई है. ये कमेटी सीबीआई और पुलिस जांच से अलग मामलों को देखेगी. ये समिति महिलाओं से जुड़े अपराधों और अन्य मानवीय मामलों व सुविधा की निगरानी करेंगी. 

तीन सदस्यीय कमेटी में ये होंगी शामिल
जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पद से रिटायर जस्टिस गीता मित्तल, जस्टिस आशा मेनन और जस्टिस शालिनी पनसाकर जोशी की तीन सदस्यीय न्यायिक जांच कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने बनाई.

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि, 'हम जमीनी स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं. हम सभी शांति की बहाली चाहते हैं. कोई भी छोटी चूक बहुत गहरा असर डाल सकती है. वृंदा ग्रोवर ने कहा कि इन मामलों के अलावा अब तक जिन मामलों में अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया उनमें भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. 

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सांसद ने पूछा, क्या 'गौमाता' को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाएगा, सरकार ने दिया यह जवाब

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 ससंद में पूछा गया कि क्या सरकार भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग गौमाता को राष्ट्रीय पशु के रूप में मान्यता देने का इरादा रखती है? इस पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर कानून बनाने की शक्ति राज्य सरकार के पास है। गाय सहित पशुओं की सुरक्षा के लिए भारतीय पशु कल्याण बोर्ड की भी स्थापना की है।

नई दिल्ली, पीटीआई। भाजपा के लोकसभा सदस्य ने संसद में सरकार से सवाल किया कि क्या वह गौमाता (गाय) को राष्ट्रीय पशु घोषित करेगी। अजमेर के सांसद भागीरथ चौधरी द्वारा सोमवार को लोकसभा में पूछे गए इस प्रश्न का केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने सीधा जवाब नहीं दिया। सांसद ने पूछा, क्या सरकार संसद में कानून बनाकर भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग गौमाता को राष्ट्रीय पशु के रूप में मान्यता देने पर विचार कर रही है। sabhar Jagran.com

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