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रविवार, 22 जून 2014

ये है अमेजन का पहला स्मार्टफोन, देता है 3D का मजा

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अमेजन फायर स्मार्टफोन

अमेजन फायर स्मार्टफोन


लंबे समय अमेजन स्मार्टफोन पर लगाए जाने वाले कयासों पर विराम लगा चुका है। ई कॉमर्स कंपनी अमेजन ने अपना पहला स्मार्टफोन अमेजन फायर लॉन्च कर दिया है।

कंपनी ने इस स्मार्टफोन को गोरिल्‍ला ग्लास डिस्‍प्ले को रबर के फ्रेम से सुरक्षित किया है। अमेजन डॉट कॉम के चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर जेफ बेजोस ने बताया कि ये स्मार्टफोन 3डी टेक्नोलॉजी पर काम करेगा जिसमें स्क्रीन 3D कैपेबल होगी, आप 3D साउंड और 3D वीडियो का मजा उठा सकते हैं।
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर

हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर

4.7 इंच डिस्प्ल का कयास एक दम सही रहा, कंपनी ने अमेजन फायर स्मार्टफोन को 4.7 इंच डिस्‍प्ले के साथ पेश किया है जो 720पी रेजल्यूशन पर काम करता है।

प्रोसेसर की बात करें तो एड्रीनो 300 जीपीयू सहित 2.2 गीगाहर्ट्ज क्वालकॉम स्नैपड्रेगन प्रोसेसर और 2जीबी रैम के साथ काम करता है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो ये फायर ओएस 3.5 के साथ है।

कैमरा, स्टोरेज और बैटरी

कैमरा, स्टोरेज और बैटरी

फोन का मुख्य कैमरा 13 मेगापिक्सल का है ‌जबकि सेकेंड्री कैमरा 2.1 मेगापिक्सल है। फोन 32जीबी और 64 जीबी इंटरनल स्टोरेज वर्जन में मौजूद है।

बैटरी की बात करें तो कंपनी ने अमेजन फायर में 2,400 एमएएच बैटरी इस्तेमाल की है। कंपनी का दावा है कि ये 22 घंटे टॉक टाइम और 285 घंटे स्टैंडबाई बैटरी बैकअप देने में सक्षम है।

कमाल के फीचर्स

कमाल के फीचर्स

3D डिस्प्ले होने के कारण इस फोन की पिक्चर क्वालिटी बेहद शानदार होगी। इसमें चार फ्रंट फेसिंग कैमरा हैं जो यूजर के कमांड के अनुसार काम करेंगे।

यूएस यूजर्स के लिए इस फोन में एक्स रे फीचर को शामिल किया गया है जो अमेजन प्राइम वीडियो और म्यूजिक सर्विस के लिए साथ काम करेगा।

कीमत और उपलब्‍धता

अमेजन फायर यूएस ने 25 जुलाई से बिक्री के लिए मौजूद होगा। एटी एंड टी नेटवर्क अनुबंध के साथ 32जीबी फोन की कीमत 199 डॉलर है।

कंपनी ने अभी इस बारे में कोई घोषणा नहीं की है कि अमेजन फायर स्मार्टफोन भारत में कब तक उपलब्‍ध होगा। sabhar :http://www.amarujala.com/



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2030 तक एलियंस का पता लगा लेगा दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन!

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2030 तक एलियंस का पता लगा लेगा दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन!


लंदन. एलियंस होते हैं या नहीं, इसका पता लगाने के लिए नासा नई योजना पर काम कर रहा है। वैज्ञानिकों की योजना अंतरिक्ष में अभी तक का सबसे बड़ा दूरबीन लगाने की है, जिससे लाखों मील दूर दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं का पता लगाया जा सके।
 
खास बात यह है कि यह दूरबीन इतना बड़ा होगा कि इसे धरती से रॉकेट की मदद से नहीं ले जाया जा सकेगा, इसलिए अंतरिक्ष में ही इसे तैयार किया जाएगा। इस काम के लिए नासा जल्द ही अंतरिक्ष में लाखों मील दूर एस्ट्रोनॉट्स की एक टीम भेजना वाला है। यह प्रोजेक्‍ट 2030 तक तैयार हो सकता है।
 
एडवांस्ड टेक्नोलॉजी लार्ज अपर्चर स्पेस टेलिस्कोप (एटीएलएसटी) दुनिया का सबसे शक्तिशाली दूरबीन होगा। ये दूरबीन ग्रहों के वातावरण और 30 प्रकाश वर्ष दूर तक की सौर प्रणाली का विश्लेषण करने में सक्षम होगा। माना जा रहा है कि ये दूरबीन एस्ट्रोनोमर्स के लिए निर्णायक साबित होगा।
 
दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन
दूरबीन के जरिए ये पता लगाना आसान होगा कि अंतरिक्ष के अनदेखे क्षेत्रों में अलौकिक जीवन मौजूद है या नहीं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्रहों का विश्लेषण करने में सक्षम ये दूरबीन 44 फीट वाले हबल स्पेस टेलिस्कोप से चार गुना ज्यादा बड़ा होगा।
 
दूरबीन के अंदर 52 फीट व्यास का एक शीशा होगा, जो धरती पर किसी भी मानव द्वारा निर्मित सबसे बड़ा आइना होगा। चूंकि दूरबीन का आकार इतना बड़ा है कि इसे कोई भी रॉकेट स्पेस में ले जाने में अक्षम है। लिहाजा, नासा ओरियन रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट की एक टीम भेजेगी, जो वहां जाकर दूरबीन को असेम्बल करेगी। बता दें कि ये दूरबीन धरती से 10 लाख मील की दूरी पर होगा।
 
2030 तक तैयार होगा दूरबीन
नासा के इस प्रोजेक्ट की डिटेल का खुलासा, इस हफ्ते पोर्ट्समाउथ में होने वाली नेशनल एस्ट्रोनॉमी मीटिंग में किया जाएगा। ये जानकारी रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के अध्यक्ष मार्टिन बार्स्तो देंगे। बार्स्तो के मुताबिक, ये टेलिस्कोप एस्ट्रोनोमर्स को लगभग 60 नए ग्रहों को एक्सप्लोर करने में मदद करेगा। साथ ही ऑक्सीजन और अन्य गैसों के स्तर के बारे में जानकारी प्रदान कर वहां संभावित जीवन होने का संकेत भी देगा।
 
बार्स्तो ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया, "यह टेलिस्कोप जीवन की संभावनाओं के लिए पृथ्वी जैसे ग्रहों की पड़ताल करेगा। यह कितना शक्तिशाली होगा इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह 30 प्रकाश वर्ष की दूरी तक के ग्रहों का विश्‍लेषण करने में सक्षम होगा। उन्‍होंने कहा क‍ि सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी होने के नाते नासा के लिए इस प्रोजेक्‍ट को लीड करना जरूरी है और हमें उम्‍मीद है क‍ि यह प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा हो जाएगा। sabhar : bhaskar.com
 

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शनिवार, 21 जून 2014

रूपकुंड का भयावह रहस्य

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रूपकुंड का भयावह रहस्य

पिछले सत्तर से भी अधिक बरसों से वैज्ञानिक हिमालय पर्वतमाला में पांच हज़ार मीटर की ऊंचाई पर छिपी हिमानी झील रूपकुंड का रहस्य बूझने की कोशिश कर रहे हैं| वर्तमान उत्तराखंड राज्य में स्थित इस स्थान पर 1942 में लगभग पांच सौ नर-कंकाल मिले थे जिनकी आयु 1100 साल आंकी गई थी|

अभी तक इन लोगों की मृत्यु का सही कारण तय नहीं किया जा सका है| हाल ही में लंदन के क्वीन मेरी विश्वविद्यालय और पूना विश्विद्यालय के वैज्ञानिकों ने मिलकर यहाँ जो शोधकार्य किया है उसके नतीजे जानकर तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं| वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इन लोगों की मृत्यु एक बिलकुल सरल रासायनिक अस्त्र से हुई!
यहाँ मिले अवशेषों का विश्लेष्ण करके वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि सभी लोग एक साथ पलांश में ही मारे गए| यही नहीं सबके कपाल के पिछले भाग में दरारे हैं, कइयों के तो कपाल टूटे भी हुए हैं| इसकी व्याख्या करने के लिए वैज्ञानिकों ने विभिन्न प्राक्कल्पनाएं की हैं – आनुष्ठानिक नर-बलि से लेकर असाधारण ओला-वृष्टि तक| किंतु इनमें कोई भी कल्पना विश्वासप्रद नहीं प्रतीत होती| भारत में कभी भी नर-बलि का, सो भी सामूहिक नर-बलि का प्रचलन नहीं रहा है| अगर यह माना जाए कि पथिकों का दल असाधारण ओला-वृष्टि का शिकार हुआ तो ऐसा होने पर उनके शरीर के दूसरे हिस्सों पर लगी चोटों के निशान भी बचने चाहिए थे|
अब इन अवशेषों के रासायनिक विश्लेषण से पता चला है कि सभी कंकालों में नाइट्रोजन की मात्रा अस्वाभाविकतः अधिक है| वैज्ञानिक जानते हैं कि मानव-शरीर में नाइट्रोजन की मात्रा तेज़ी से बढ़ जाने पर रक्त खौलने लगता है| सो, एक और प्राक्कल्पना प्रस्तुत की गई है: इन लोगों पर किसी तरह का बाहरी प्रभाव नहीं पड़ा था| पलक झपकते ही रक्त में बढ़ गई नाइट्रोजन की मात्रा ने इन अभागों के कपाल अन्दर से फोड़ दिए| यदि ऐसा है तो हमें यह मानना पडेगा कि एक हज़ार साल से भी पहले कई सौ लोग सुदूर झील के तट पर रासायनिक हमले के शिकार हुए थे|
जिस स्थान पर नाइट्रोजन की अत्यधिक मात्रा वाले ये अवशेष मिले हैं वह हिमालय पर्वतमाला में पांच हज़ार मीटर की ऊंचाई पर स्थित है| वहां से निकटतम बस्ती सौ किलोमीटर से भी अधिक की दूरी पर है| इस हिमानी झील तक पहुंचना आज भी दुर्गम है, 1100 साल पहले तो यह बिलकुल ही बियाबान स्थान रहा होगा| तो यहाँ बड़ी संख्या में नर-कंकाल कहाँ से आए?
रासायनिक हमले की प्राक्कल्पना के समर्थक इस बात की ओर ध्यान दिलाते हैं कि यह स्थान सारे संसार से बिलकुल अलग-थलग है| उनके मत में इस झील के तट प्राचीन युग में एक प्रकार की परीक्षण-स्थली हो सकते थे जहां नए अस्त्रों के परीक्षण किए जाते थे|
यदि हम यह मानते हैं कि यहाँ मारे गए लोग रासायनिक अस्त्र के शिकार हुए थे तो यह भी मानना पड़ेगा कि नौंवी सदी ईसवी में भारत में रहनेवाले लोगों के पास तत्संबंधी प्रौद्योगिकी और कौशल थे| इतिहासकारों का कहना है कि भारत में उन दिनों भौतिकी और रसायन शास्त्र काफी विकसित थे| ज्ञात है कि इसी सदी में हुए शंकराचार्य का दूसरे विद्वानों से परमाणु की प्रकृति पर शास्त्रार्थ होता रहा था, जबकि परमाणुवाद के सिद्धांत का प्रतिपादन तो तीसरी सदी ईसवी पूर्व में ही महात्मा बुद्ध के वरिष्ठ समसामयिक कात्यायन ने कर दिया था|
अपने व्यापक ज्ञान के आधार पर प्राचीन विद्वान कुछ रासायनिक तत्वों का संश्लेषण भी करने में सक्षम रहे होंगे| ऐसा वैज्ञानिक कार्य के लिए भी किया जा सकता था और सामरिक लक्ष्यों के लिए भी| रूपकुंड पर रासायनिक हमले के समर्थकों का कहना है कि 1100 साल पहले एक भयानक त्रासदी हुई थी| उनका अनुमान है कि उस युग के लिए असाधारण शक्तिशाली रासायनिक अस्त्र की खोज कर लेने पर प्राचीन विद्वान स्वयं ही इस खोज पर भयभीत हो गए थे| और तब उन्होंने अपनी इस खोज के सभी साक्ष्य नष्ट कर देने का निर्णय किया और सभी प्रत्यक्षदर्शियों को भी|
सभी शोधकर्ता इस प्राक्कल्पना को विश्वासजनक नहीं मानते| किंतु यह भी स्वीकार करना होगा कि इस सिद्धांत के आधार पर पांच सौ लोगों की रहस्यमय मृत्यु की कोई तो व्याख्या हो सकती है, दूसरी कोई भी प्राक्कल्पना कोई उत्तर नहीं पेश करती...
sabhar :http://hindi.ruvr.ru/

और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/2014_06_21/rupkund-rahasya/

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अच्छा तो यहां है क्षीर सागर जहां शेषनाग पर रहते हैं भगवान विष्णु

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जहां रहते हैं भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी के साथ

जहां रहते हैं भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी के साथ


शास्त्रों पुराणों में भगवान शिव का निवास कैलाश पर्वत बताया गया है। और विष्णु का निवास स्थान क्षीर सागर बताया गया है। यह क्षीर सागर कहां है यह आप जरुर जानना चाहते होंगे।

आपकी इस चाहत का ध्यान रखते हुए आइये ले चलते हैं आपको क्षीर सागर के दर्शन करवाने।


दर्शन कीजिए क्षीर सागर का

दर्शन कीजिए क्षीर सागर का

क्षीर सागर के दर्शन के लिए चल पड़े हैं तो क्यों न मार्ग में क्षीर सागर के कुछ चमत्कारी गुणों को जान लें। पुराणों की मानें तो क्षीर सागर की एक परिक्रमा करने वाला व्यक्ति एक जन्म में किए पाप और कर्म बंध से मुक्त हो जाता है।

जो व्यक्ति इसकी दस परिक्रमा कर लेता है उसे दस हजार जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है। क्षीर सागर की 108 परिक्रमा करने वाला व्यक्ति जीवन मरण के चक्र से मुक्त होकर परमपिता परमेश्वर में लीन हो जाता है।

जो इस झील के मीठे जल का पान करता है वह शिव के बनाए स्वर्ग में स्थान पाने का अधिकारी बन जाता है। यहीं कुबेर ने भगवान शिव की तपस्या करके शिव का सखा और ईश्वरीय खजाने का खजांची होने का वरदान प्राप्त किया था।
चलिए डुबकी लगाएं क्षीर सागर में

चलिए डुबकी लगाएं क्षीर सागर में

यह पवित्र क्षीर सागर भगवान शिव की जटा से निकलने वाली गंगा के वेग निर्मित हुआ माना जाता है। भगवान शिव के निवास स्थान कैलाश पर्वत से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर क्षीर सागर है जिसे मानसरोवर झील के नाम से जाना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि इस झील में एक बार डुबकी लगाने मात्र से रुद्रलोक में स्थान प्राप्त होता है। कैलाश पर्वत की यात्रा के दौरान मार्ग में यह पवित्र सरोवर स्थित है। यहां से श्रद्घालु कैलाश पर्वत के दर्शन करके अपनी यात्रा को सफल मानते हैं। sabhar :
http://www.amarujala.com/

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बिहारः किसान का 'बाल संत' बेटा बिना स्‍कूल गए ही 14 साल में बनेगा आईआईटीयन

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बिहारः किसान का 'बाल संत' बेटा बिना स्‍कूल गए ही 14 साल में बनेगा आईआईटीयन

पटना. बिहार के रोहतास जिले का रहने वाला 14 साल का शिवानंद बिना रेगुलर स्कूल गए ही आईआईटी में दाखिला लेने का हकदार हो गया है। शिवानंद ने आईआईटी-जेईई (एडवांस) में 2587वां रैंक हासिल किया है। वह बेटे को 'बाल संत' कह कर बुलाते हैं। 
प्रतिभा को मिला सहारा तो हुआ कमाल  
धरमपुरा गांव के रहने वाले शिवानंद का कहना है, ''2010 तक मेरा पढ़ाई की ओर बिल्कुल भी झुकाव नहीं था, मैं बस गणित के सवाल हल किया करता था। इसके बाद मुझे किसी ने कहा कि तुम IIT के लिए तैयारी करो, फिर मुझे दिल्ली की एक एकेडमी से मदद मिली।'' एकेडमी ने शिवानंद की प्रतिभा देख उसकी पढ़ाई का सारा इंतजाम किया। एकेडमी ने शिवानंद का स्कूल में दाखिला कराया और 10वीं-12वीं की तैयारी कराई। सात साल की उम्र में ही वह दसवीं के गणित के सवाल हल कर लेता था। 
10वीं के लिए कोर्ट ने दी अनुमति
आमतौर पर 10वीं परीक्षा के लिए निर्धारित उम्र 14 से 16 साल के बीच होनी चाहिए, लेकिन शिवानंद ने कोर्ट की अनुमति लेकर 12 साल की उम्र में ही यह परीक्षा पास कर ली। 

रामायण-महाभारत याद
शिवानंद के पिता कमल कांत तिवारी पेशे से किसान है। वह बताते हैं, ''उसे बचपन से धार्मिकता पसंद थी, जिसके चलते उसने रामायण, महाभारत, भगवदगीता और कई पुराण पढ़ डाले। वह कई आयोजनों में इन धार्मिक ग्रंथों में लिखी बातें सुनाता भी है।'' 
भौतिकी में विशेष दिलचस्‍पी 
आईआईटी-जेईई की तैयारी के दौरान शिवानंद ने स्वामी विवेकानंद को भी पढ़ा। उसका कहना है कि वह आध्यात्मिकता और विज्ञान को एक साथ जोड़ना चाहता है और वैज्ञानिक बनकर देश सेवा करना चाहता है। शिवानंद की भौतिकी (फिजिक्‍स) में बड़ी दिलचस्‍पी थी। वह आईआईटी कानपुर से इस विषय से जुड़ी रिसर्च करना चाहते थे।

उसे दोबारा पढ़ने की जरूरत नहीं-

शिवानंद ने सीबीएसई की 12वीं परीक्षा 93.4% से इसी साल पास की। शिवानंद के मेंटर और पढ़ाई के शुरुआती दिनों में उसे कोचिंग देने वाले दीपक कुमार बताते हैं, ''उसे याद करने के लिए कुछ भी दो बार पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ती।'' sabhar : bhaskar.com

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गुरुवार, 19 जून 2014

सौर ऊर्जा को सूर्य नमस्कार

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कोयले की कमी ने भारत में कई कंपनियों की हालत खराब की. लेकिन जब कोई हल नहीं निकला तो कुछ कंपनियों ने सौर ऊर्जा का रुख किया. इस तरह देश में दुर्घटनावश ही सही, लेकिन चुपचाप ऊर्जा क्रांति की शुरुआत हो गई.



लगातार छह साल तक भारत के कोयला उत्पादक मांग को पूरा नहीं कर पाए. इसकी वजह से बिजली बनाने वाले संयंत्रों की हालत खराब हो गई. शुरुआत में उन्होंने कुछ महीनों तक विदेशों से कोयला खरीदा लेकिन दाम ज्यादा होने की वजह से देर सबेर ये खरीद बंद हो गई. ऊर्जा संकट के घने बादलों के बीच कुछ कंपनियों ने सौर ऊर्जा में निवेश करना शुरू किया. देखा देखी दूसरों ने भी की और धीरे धीरे भारत में बाबा आदम के जमाने का ऊर्जा ढांचा बदलने लगा.
तीन साल पहले भारत की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग शून्य थी. लेकिन आज यह क्षमता 2.2 गीगावॉट है. इतनी बिजली से 20 लाख घरों की जरूरत पूरी की जा सकती है. इस साल क्षमता को और दो गीगावॉट बढ़ाने की योजना है. भारत ने 2017 तक 15 गीगावॉट वैकल्पिक ऊर्जा बनाने का लक्ष्य तय किया है. हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स के चैयरमैन रातुल पुरी कहते हैं, "मैंने कोयला प्लांट विकसित करने बंद कर दिए हैं. यहां पर्याप्त कोयला ही नहीं है और मैं बाहर के कोयले पर निर्भर नहीं रहने वाला हूं. ये बहुत जोखिम भरा है."
हिंदुस्तान पावर सौर ऊर्जा से बिजली बनाने वाले दो संयंत्र लगा चुकी है. उत्पादन इसी साल शुरू हो जाएगा. कंपनी भविष्य में भी सौर ऊर्जा में तीन अरब डॉलर का निवेश करने जा रही है. 2017 तक उत्पादन 350 मेगावॉट से बढ़ाकर एक गीगावॉट करने का लक्ष्य है.
कोयले में छुपी कालिख
भारत के कोयला उत्पादन में सरकारी कंपनी कोल इंडिया का एकाधिकार है. बीते सालों में कोयला घोटाले जैसे बड़े मामले सामने आए हैं. बिजली कंपनियों को लगता है कि कोल इंडिया के तौर तरीकों में बदलाव की उम्मीद करने के बजाए सौर ऊर्जा के रास्ते पर बढ़ना ज्यादा आसान विकल्प है. कोल इंडिया काफी कोयला निकाल चुकी है. बाकी का कोयला शहरों, जंगलों या फिर रिजर्व पार्कों के नीचे हैं. उसे निकालना पर्यावरण के लिहाज से भी ठीक नहीं.
कोयला खदानों में नियम भी ताक पर
भारत में अब भी 30 करोड़ लोगों के पास बिजली नहीं है. करोड़ों लोगों को दिन में कुछ ही घंटे बिजली मिल पाती है. देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 234 गीगावॉट है. इसमें कोयला प्लांटों की हिस्सेदारी 59 फीसदी है. भारत 2017 तक कोयले से और 70 गीगावॉट बिजली बनाना चाहता है लेकिन इसके लिए फिलहाल निवेशक नहीं मिल रहे हैं.
भारतीय रिजर्व बैंक भी विदेशों से कोयला खरीदने पर अलार्म बजा चुका है. आरबीआई के मुताबिक कोयला आयात की वजह से देश को 18 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है.
सरकार से सहायता
सौर ऊर्जा के विकास में सरकार की योजनाएं भी सहायक साबित हो रही हैं. सौर ऊर्जा योजनाओं को जल्द प्रशासनिक अनुमति मिल रही है. छह से 12 महीने के भीतर बिजली बनाने का काम शुरू हो जा रहा है. इसके उलट कोयला पावर प्लांट को तैयार करने में करीब आठ साल लग जाते हैं. सरकारी सब्सिडी की वजह से भी सौर ऊर्जा सस्ती पड़ रही है. सौर ऊर्जा से बनी बिजली जहां सात रुपये किलोवॉट घंटा पड़ती है, वहीं कोयले की बिजली की लागत 5-6 रुपये किलोवॉट घंटा है.
विशेषज्ञों को लगता है कि भारत 2022 तक वैकल्पिक स्रोतों से 15 फीसदी बिजली बनाने के लक्ष्य को आराम से पार कर जाएगा. फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सीनियर डायरेक्टर विवेक पंडित कहते हैं, "कोयले की कमी है. निवेशक चिंता में है. अगर भारत में कोयला कम पड़ा तो ऊर्जा संकट होगा. इसका असर औद्योगिक विकास पर पड़ेगा."
गुजरात में सौर ऊर्जा के बड़े प्लांट
पर्यावरण को भी फायदा
सौर और पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों से पर्यावरण को भी फायदा है. भारत में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है. 2005 से 2012 के बीच देश मेंसल्फर डाय ऑक्साइड (एसओटू) का उत्सर्जन 60 फीसदी बढ़ा है. इसके चलते अम्लीय वर्षा और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ी हैं. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को आंकड़ों के मुताबिक एसओटू के उत्सर्जन के मामले में भारत अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है. चीन के बाद भारत इस दूषित गैस का दूसरा बड़ा उत्सर्जक है.
सिडनी का आर्क्स इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट हरित ऊर्जा नाम का फंड चलाता है. संस्थान के विश्लेषक टिम बाकले के मुताबिक भारत को जल्द कोयले के रास्ते से हटाना होगा, वरना उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. सौर ऊर्जा योजनाएं बाकले में कुछ उम्मीदें जगाती हैं, "यह एक बुरा समय है लेकिन हमेशा सुबह से पहले अंधेरा होता है."
ओएसजे/एमजे (एपी)sabhar :http://www.dw.de/

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बुधवार, 18 जून 2014

अरबपतियों की रईसी, 'गल्फस्ट्रीम' से भरा दिल, तो खरीदने लगे LUXURY 'बोइंग'

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अरबपतियों की रईसी, 'गल्फस्ट्रीम' से भरा दिल, तो खरीदने लगे LUXURY 'बोइंग'
इंटरनेशनल डेस्क। सऊदी के राजकुमार, ऑयल मैग्नेट्स और रूसी अरबपति सरीखे लोग ऐश्वर्य पसंद होते हैं। ये विमान से जहां भी यात्रा करते हैं, उनके साथ दर्जनों प्रतिनिधिमंडल भी साथ होता है। ऐसे में इन धनकुबेरों को कभी सबसे ज्यादा पसंद आने वाला गल्फस्ट्रीम (दुनिया का सबसे एडवांस्ड बिजनेस जेट एयरक्राफ्ट) भी छोटा लगने लगा है। यही वजह है कि अरबपति गल्फस्ट्रीम की बजाए मनमुताबिक तैयार किए गए लग्जरियस बोइंग को तरजीह देना शुरू कर दिया है।

अंग्रेजी वेबसाइट 'वायर्ड' की रिपोर्ट के मुताबिक, जंबो जेट (747 और ए380) निर्माता ने राजकुमारों व अरबपतियों की पसंद-नापसंद का ख्याल रखते हुए खुशी-खुशी लग्जरियस जंबो जेट्स डिजाइन करना शुरू कर दिया है।
 
एयरबस भी इस बिजनेस में इस कदर रुचि ले रहा है कि उसने अरबपतियों पर अध्ययन करा डाला। 'बिलियनेयर स्टडी' नाम से इस अध्ययन में ये बात सामने आई कि ऑयल मैग्नेट, चीनी बिजनेसमैन, रूसी अरबपति अपने साथ दर्जनों लोगों के साथ यात्रा करते हैं।
 
वेबसाइट के मुताबिक, 65 मिलियन डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग 4 अरब रुपए) का गल्फस्ट्रीम G650, निजी जेट मार्केट में शिखर पर हो सकता है, लेकिन यह उन अरबपतियों के लिए परफेक्ट नहीं, जो अपने साथ कई लोगों को लेकर चलना पसंद करते हैं। 
अरबपतियों की रईसी, 'गल्फस्ट्रीम' से भरा दिल, तो खरीदने लगे LUXURY 'बोइंग'


अरबपतियों की रईसी, 'गल्फस्ट्रीम' से भरा दिल, तो खरीदने लगे LUXURY 'बोइंग'

अरबपतियों की रईसी, 'गल्फस्ट्रीम' से भरा दिल, तो खरीदने लगे LUXURY 'बोइंग'


अरबपतियों की रईसी, 'गल्फस्ट्रीम' से भरा दिल, तो खरीदने लगे LUXURY 'बोइंग'

अरबपतियों की रईसी, 'गल्फस्ट्रीम' से भरा दिल, तो खरीदने लगे LUXURY 'बोइंग'
 sabhar :bhaskar.com



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एक जादुई हेलमेट, जो दिमाग पढकर तैयार करेगा रूटमैप

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वाशिंगटन। दिमाग पढने वाला हेलमेट! सुनने में भले ही अटपटा लगे, लेकिन ये सच है। ब्रुकलिन के स्टार्टअप ड्यूकॉर्प ने इस जादुई हेलमेट को तैयार किया है। यह हेलमेट बाइक से सफर करने के दौरान आपके दिमाग का नक्शा तैयार करेगा।
यह हेलमेट आपके दिमाग के सहारे तैयार इस रूटमैप पर हरे रंग में स्वीटस्पॉट्स और लाल रंग में हॉटस्पॉट्स भी दिखाएगा। स्वीटस्पॉट वह जगह होगी जहां आपको सबसे ज्यादा रिलेक्स महसूस हुआ होगा, वहीं हॉटस्पॉट वह जगह होगी, जहां आपको सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत पडी होगी। हेलमेट को सबसे पहले कंपनी की प्रमुख खोजकर्ता अरलीन डुकाओ ने उस वक्त तैयार किया था, जब वे मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मीडिया लैब की छात्रा थीं।
कैसे करेगा काम :
इस हेलमेट में माथे पर लगने वाला सेंसर है, जिसमें ईईजी के प्रयोग से चालक के दिमाग की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है। इसके साथ एक ऐप के जरिए ब्लूटूथ से जु़डे स्मार्टफोन पर हेलमेट के ब्रेन कम्प्यूटर का डेटा भेजकर जीपीएस के माध्यम से नक्शा तैयार होता है। चालक चाहें तो हॉटस्पॉट की संख्या को कम करते हुए दूसरा नक्शा भी तैयार कर सकते हैं। या फिर इसके प्रयोग से सफर में पडने वाले हॉटस्पॉट की जानकारी लेकर उनसे निपटने की बेहतर तैयारी कर सकते हैं। sabhar :http://www.jagran.com/

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रविवार, 15 जून 2014

जब कम्प्यूटर से होगा इश्क

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love-with-computer

लिजी डियरडेन

2029 में आपका बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड न हो तो आप अपने ही कम्प्यूटर से इश्क लड़ा सकेंगे। आज से 15 साल बाद, कम्प्यूटर से फ्लर्ट करना यहां तक कि इश्क हो जाना भी संभव होगा। यह दावा है एक फ्यूचरिस्ट का। 'Her' नाम की एक अंग्रेजी फिल्म में एक आदमी एक इंटेलिजेंट कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ रिश्ते कायम करता है। गूगल के इंजिनियरिंग डायरेक्टर रे कुर्जवील का कहना है कि आने वाले कुछ सालों में ऐसी असली कहानियां भी बनेंगी। 

एनबीसी न्यूज की खबर के मुताबिक, पिछले हफ्ते न्यू यॉर्क की एक्सपोनेंशल फाइनैंस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि कुछ साल बाद इंसान टेक्नॉलजी से भावनात्मक संबंध बनाने में भी कामयाब हो सकेगा। उन्होंने कहा, 'मुझे जहां तक लगता है कम्प्यूटर्स ह्यूमन लेवल तक आ जाएंगे। 2029 तक तो वे इतने करीब होंगे कि हम उनके साथ रिश्ते भी बना सकेंगे।' 

'Her' की तारीफ करते हुए कुर्जवील ने दावा किया कि यह आने वाले कल की सटीक तस्वीर है। उन्होंने कहा, 'ह्यूमन लेवल से मेरा मतलब इमोशनल इंटेलिजेंस से है। मसलन, जोक सुनाना, मजेदार बातें करना, रोमांटिक होना, प्यार औऱ केयर करना, सेक्सी होना, ये सब ह्यूमन इंटेलिजेंस की निशानियां हैं। यह सब होगा।' 

कुर्जवील ने इससे पहले भी चेतावनी दी थी कि 2029 में कम्प्यूटर इन्सान से भी आगे निकल जाएंगे। टेक्नॉलजी कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, इसे साबित करने के लिए उन्होंने वॉइस रेकग्निशन सॉफ्टवेयर और गूगल की सेल्फ-ड्राइविंग कारों का उदाहरण दिया था। 

एक्सपोनेंशल फाइनैंस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक और संभावना जताई। उनके मुताबिक 'प्रोग्रामिंग' जीन आने वाले वक्त में कैंसर, दूसरी बीमारियों और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोक सकेंगे। कपड़ों पर पर्सनलाइज्ड 3डी प्रिंटिंग की भी भविष्यवाणी उन्होंने की। 

66 वर्षीय कुर्जवील ने 1990 में भविष्यवाणी की थी कि 1998 तक एक कम्प्यूटर चेस गेम में इंसान को हराने के काबिल हो जाएगा। 1997 में आईबीएम के डीप ब्लू ने गैरी कैस्परोव को हराकर इसे साबित कर दिखाया। 

हालांकि, हाल ही में ट्यूरिंग टेस्ट पास करने वाले रूसी प्रोग्राम यूजीन गूस्टमन के बारे में उनका मानना है कि वह काफी 'सीमित' क्षमताओं वाला प्रोग्राम है।sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

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8 सबसे विचित्र मानसिक बीमारियां, इंसान खुद को मानने लगता है राक्षस

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8 सबसे विचित्र मानसिक बीमारियां, इंसान खुद को मानने लगता है राक्षस

मानसिक बीमारियों से इंसान की जिंदगी  बुरी तरह प्रभावित होती है। कई मामलों में यह बर्बाद हो जाती है। कुछ मेंटल इलनेस इतनी विचित्र होती हैं कि इन्हें समझना मुश्किल होता है। तेजी से बढ़ती मानसिक बीमारियांं पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कोई  Mentle Illness कभी भी भयावह हो सकती है। इनके डरावने लक्षणों से प्रेरित होकर हॉलीवुड और बॉलीवुड में कई फिल्में तक बनाई जा चुकी हैं। एक मानसिक बीमारी ऐसी है कि व्यक्ति खुद को राक्षस मानने लगता है। 
 
 
भारत में हर पांच व्यक्ति में से एक व्यक्ति मानसिक बीमारी से ग्रसित है। देश में ऐसी बीमारियों के इलाज के लिए केवल 5,000 मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत के बजट में मेंटल हेल्थ के लिए महज 1 फीसदी राशि की व्यवस्था है, जबकि दूसरे देशों में 10%, 12% और 18 फीसदी तक है। एक अनुमान के अनुसार, पूरे विश्व में 450 मिलियन लोग मानसिक बीमारियों से पीड़ित हैं। ये बीमारियां बेहद अजीब होती है और व्यक्ति का व्यवहार विचित्र हो जाता है। आप यहां कुछ ऐसी मानसिक बीमारियों के बारे में जान सकते हैं।
1- वेंडिगो साइकोसिस (Wendigo Psychosis): वेंडिगो नाम की मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को मानव-मांस खाने इच्छा होती है। यह बीमारी अधिकतर उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी इंडियंस में पाई जाती है। इस पर कई फिल्में बनाई जा चुकी हैं। कुछ लोगों का दावा है कि यह बीमारी कल्चर पर आधारित होती है। इसका मतलब यह है कि एक निश्चित संस्कृति में जन्में लोग वेंडिगो सिंड्रोम से पीड़ित होते हैं। हालांकि, यह बीमारी बहुत कम लोगों को होती है।
2- एलिस इन वंडरलैंड सिंड्रोम (Alice In Wonderland Syndrome): मरीज को भयंकर माइग्रेन होता है और उसके मन में दुनिया को लेकर कई तरह की भ्रांतियां पैदा हो जाती हैं। एलिस इन वंडरलैंड सिंड्रोम से ग्रसित इंसान को आवाजें धीमी या तेज सुनाई देती हैं। चीजों का वास्तविक आकार भी छोटा या बड़ा दिखाई देता है। इसके बहुत से लक्षण एलएसडी के नशे की स्थिति से मिलते-जुलते हैं। इस बीमारी का प्रभाव केवल 20 साल की उम्र के युवकों पर ही दिखाई देता है।
3- एलियन हैंड सिंड्रोम (Alien Hand Syndrome): इससे पीड़ित व्यक्ति को लगता है कि उसकी श्वांस रुक गई है, कपड़े फट गए हैं और वह रक्तरंजित हो गया है। जब कोई व्यक्ति AHS से ग्रसित होता है, तो उसे लगता है कि घुटनों पर कोई नियंत्रण नहीं रहा। उसे लगता है कि वह अपने आप ही चल रहा है। यदि उसकी बॉडी फ्री कर दी जाए, तो वह कुछ भी कर सकता है। एलियन हैंड सिंड्रोम की मेडिकल रिपोर्ट् बहुत कम सामने आती हैं। दुर्भाग्य से यदि यह बीमारी हो गई, तो इसका कोई इलाज नहीं है, सिर्फ हाथों को व्यस्त रखना ही उपाय है।

4- क्लुवेर- बुसी सिंड्रोम(Kluver-Bucy Syndrome): मानसिक बीमारियों में से एक क्लुवेर- बुसी सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति के व्यवहार में कुछ बेहद बुरे बदलाव देखने को मिलते हैं। पीड़ित व्यक्ति याददाश्त खो बैठता है। वह गैर खाद्य वस्तुएं खाने लगता है उसका तीव्र झुकाव और सेक्स की ओर होता है। वह किसी अमानवीय वस्तु के साथ ऐसी हरकत करने लगता है। इन तीन लक्षणों से बीमारी की पहचान की जाती है। शुरुआती इलाज से इस पर नियंत्रण संभव है, लेकिन स्थिति खराब होने पर कोई इलाज कारगर नहीं है

5- कोटार्ड डिलूशन (Cotard Delusion) : इस बीमारी को “Walking Corpse Syndrome” कहा जाता है। पीड़ित व्यक्ति को लगता है कि वह मर चुका है, लेकिन धरती पर लगातार चल रहा है। कोटार्ड समझना काफी कठिन रहा है। अभी हाल ही में मेडिकल विशेषज्ञों ने इस बीमारी की समस्या को सही ठहराया है। इसके बारे में 1880 में पहली बार बताया गया था, लेकिन इस बीमारी को औपचारिक मान्यता 2007 में दी गई। कोटार्ड से पीड़ित व्यक्ति अपने भ्रम की सच्चाई जानने के लिए कई बार आत्महत्या की कोशिश करता है।
6-फ्रेगोली डिलूशन: इस मानसिक बीमारी का नाम इटली के एक्टर लियापोल्डो फ्रेगोली पर रखा गया है, क्योंकि वह अपना कॉस्ट्यूम तेजी से बदल लेता था। दरअसल, फ्रेगोली सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति कई लोगों को देखकर भ्रमित होता है। उसे लगता है एक ही व्यक्ति ने अपने कपड़े कई बार बदल लिए हैं। फ्रेगोली से पीड़ित व्यक्ति की याददाश्त पर स्थान और घटनाओं के बदलने का बहुत असर पड़ता है। उसके लिए जीवन बिलकुल बदला हुआ नजर आता है। वह किसी भी चीज को तनावपूर्ण मुद्दा बना देता है।
7- कैपग्रास डिलूशन Capgras Delusion : आप ऐसे जीवन की कल्पना कीजिए, जहां आपको पता नहीं होता कि किस पर भरोसा करना है। कुछ ऐसी ही स्थिति कैपग्रास डिलूशन सिंड्रोम से ग्रसित व्यक्ति की होती है। उसे लगता है कि राक्षस, रोबोट या अन्य किसी खतरे ने उसे अपने दायरे में ले लिया है। वह जान का खतरा महसूस करता है। भ्रम की स्थिति आमतौर पर अन्य मानसिक बीमारियों जैसे- सिजोफ्रेनिया से बनती है, लेकिन यह सिर में चोट लगने से भी हो सकती है।
8 सबसे विचित्र मानसिक बीमारियां, इंसान खुद को मानने लगता है राक्षस

8- स्टॉकहोम सिंड्रोम(Stockholm Syndrome): यह तस्वीर करीब 40 साल पहले जान एरिक की है। इसमें ओस्लो में बैंक डकैती और बंधक की स्थिति सामने आई थी। स्टॉकहोम सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति को अपने बंधक बनाने वाले से सहानुभूति होती है। यह तब होता है, जब पीड़ित अपनी इच्छा के विरुद्ध स्थिति का सामना करता है। 

1974 में इस सिंड्रोम के कारण एक बेहद चर्चित घटना सामने आई थी। हार्ट्स मीडिया फैमिली की महिला पैटी हार्ट्स का अपहरण सिम्बोनीज लिबरेशन आर्मी ने कर लिया था। महिला ने घोषणा कर दी कि वह इस ग्रुप में शामिल हो गई है। बाद में पैटी ने कहा कि उसकी ब्रेनवाशिंग की गई और यौन उत्पीड़न किया गया था। sabhar : bhaskar.com


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शनिवार, 14 जून 2014

इस तरह परलोक गई आत्माओं से बात कर सकते हैं आप?

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और होने लगती हैं अनहोनी घटनाएं

और होने लगती हैं अनहोनी घटनाएं


आत्मा एक उर्जा की तरह होती है जो कभी नहीं नष्ट होती है। यह जिस शरीर में जाती है उस रूप रंग में ढल जाती है। जब तक यह शरीर से बाहर है एक उर्जा के रुप में ब्रह्माण्ड में कहीं मौजूद रहती है।

लेकिन शरीरधारी जीव और अशरीरी आत्मा के बीच संपर्क बनाना कठिन होता है क्योंकि दोनों का अपना अलग अस्तित्व और अपनी सीमाएं हैं। अगर आत्माएं जीवित लोगों की दुनिया में आ जाती हैं या जीवित व्यक्ति आत्माओं की दुनिया में झांकने का प्रयास करते हैं तो यह दोनों के लिए प्रकृति के नियम के विपरीत है।

लेकिन कभी कभी ऐसी स्थिति बन जाती है कि आत्माएं अपनी दुनिया से निकलकर जीवित लोगों की दुनिया में आ जाती है और अनहोनी घटनाएं होने लगती है।

आत्माओं से बात करने का तरीका

आत्माओं से बात करने का तरीका

ऐसे दावे किए जाते हैं कि इंसानों ने कुछ ऐसे माध्यम और तरीके खोज निकाले हैं जिनसे आत्माओं की दुनिया से संपर्क किया जा सकता है और आत्माओं से बात की जा सकती है।

यहां ऐसे ही कुछ माध्यमों की चर्चा की जा रही है जिनके विषय में कहा जाता है कि इससे मनुष्य आत्माओं से संपर्क बनाने में सफल होता हैं।

तीन पैर के टेबल से भूत बुलाने की विधि

इस विधि में एक तिपाए टेबल का इस्तेमाल किया जाता है तो हल्का और गोल होता है। एक पाए के नीचे लकड़ी का एक गुटका रखा जाता है। इसके बाद टेबल को चारों तरफ से घेर कर लोग बैठ जाते हैं। इसके बाद जिस व्यक्ति की आत्मा को बुलाना होता है उनका सभी मिलकर ध्यान करते हैं।

माना जाता है कि जब अपने आप टेबल के पाए खटखटाने लगे तो इसका मतलब है कि आत्मा का आगमन हो चुका है। इसके बाद उनसे प्रश्न किया जाता है और संकेतिक तौर पर टेबल की खटखट से हर प्रश्न मिलने लगता है।
प्लेनचिट से होती है भूतों से बातें

प्लेनचिट से होती है भूतों से बातें

भूतों से बात करने का एक जरिया है प्लेनचिट। यह एक दिल के आकार का दिखने वाला लकड़ी का टुकड़ा होता है। इसमें पीछे की ओर सभी ओर घूमने वाले पहिये लगे होते हैं। इसकी नोक की तरफ एक छेद होता है जिसमें एक पेंसिल लगा दी जाती है।

मेज पर एक सादा कागज रखकर उसके ऊपर इस यंत्र को रखा जाता है। इसके बाद जिस आत्मा को बुलाना होता है उसका एकाग्रता पूर्वक ध्यान किया जाता है।

जैसे ही आत्मा आ जाती है यंत्र अपने आप चलने लगता है। आमतौर पर इस यंत्र से अतृप्त आत्माओं को बुलाया जाता है। यंत्र में लगे पेंसिल से आत्मा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देती है।

आत्मा शरीर में प्रवेश करके बात करती है

आत्माओं से संपर्क करने का एक माध्यम यह भी है कि इसमें किसी व्यक्ति को माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें आत्मा का आवाहन किया जाता है और आत्मा माध्यम के शरीर में प्रवेश करके संवाद करती है।

इसके अलावा एक और विधि है जिसमें प्रयोगकर्ता खुद माध्यम बन जाता है। आवाहन करने पर आत्मा आती है और प्रयोगकर्ता के हाथ में रखी पेंसिल खुद ही कागज पर चलनी शुरु होती है और प्रश्नों के उत्तर देती है।

भूतों को बुलाने से पहले यह जरुर जान लें

भूतों को बलाने के जितने भी माध्यम हैं। उनके विषय में यह माना जाता है कि इनसे भूत तो जाते हैं लेकिन जाने में कई बार आनाकानी करने लगते हैं।

इसलिए भूतों को बुलाने से पहले इसके जोखिम का भी ध्यान रखें। दूसरी बात यह ध्यान रखें कि अपने पूरे प्रयोग के दौरान अपने अंदर साहस और आत्मविश्वास बनाए रखें। घबराने या डर जाने पर प्रयोगकर्ता का व्यक्तिगत नुकसान हो सकता है। sabhar :http://www.amarujala.com/


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