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गुरुवार, 5 जून 2014

18 जून को लॉन्च होगा अमेजोन का 3डी स्मार्टफोन

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Amazon 3D smartphone launch on 18 June 2014
सेन फ्रांसिस्को। ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल अमेजोन भी अब स्मार्टफोन बाजार में दस्तक देने जा रही है। कंपनी इसकी शुरूआत ही 3डी स्मार्टफोन की लॉन्चिंग के साथ करने जा रही है। कंपनी के अनुसार इसें 18 जून को एक कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया जा रहा है।

अमेजोन डॉट कॉम पर इस 3डी स्मार्टफोन पर बनाया गया वीडियो भी पोस्ट किया गया है। अमेजोन 3डी स्मार्टफोन पर बनाए गए इस वीडियो में कई लोगों को दिखाया गया जो इसके फीचर्स और परफोर्मेस देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं।

खबर है कि 3डी तकनीक वाली डिस्पले स्क्रीन के साथ इस अमेजोन स्मार्टफोन में और भी कई अत्याधुनिक फीचर्स दिए जा रहे हैं जो इसें एप्पल, एलजी और सैमसंग के हाई एंड स्मार्टफोन्स की टक्कर का बनाते हैं।

कयास लगाए जा रहे हैं कि सही मायने इस अमेजोन 3डी स्मार्टफोन की सीधी टक्कर दुनिया के पहले 3डी स्मार्टफोन एलजी ऑप्टिमस 3डी से होगी। एलजी ने अपने इस 3डी स्मार्टफोन को बार्सेलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस के दौरान डिस्पले किया था।

अमेजोन 3डी स्मार्टफोन के संभावित खास फीचर्स-

* 4.7 इंच की 3डी (720 पिक्सल रेजोल्युशन) डिस्पले स्क्रीन।

* क्वॉलकोम स्नैपड्रेगन प्रोसेसर और 2जीबी रैम।

* 12-13 एमपी एचडी कैमरा रीयर और वीजीए कैमरा फ्रंट में।

* 16 जीबी इंटरनल मेमोरी, 128 जीबी मेमोरी कार्ड सपोर्ट।

sabhar :http://www.one.in/

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दुनिया को ऑनलाइन करेंगे 180 गूगल उपग्रह

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कैलिफोर्निया : आपने कभी सोचा है कि जब आप इंटरनेट सर्फ ग या चैटिंग में व्यस्त होते हैं, तब 4.8 अरब लोग या दुनिया की दो तिहाई आबादी ऑनलाइन नहीं होती। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। गूगल 180 उपग्रह लांच करने की योजना बना रहा है, जिसके तहत हर किसी के पास वेब की सुविधा होगी। वाल स्ट्रीट जर्नल में यह जानकारी दी गई। 

बहुराष्ट्रीय कंपनी गूगल एक अरब डॉलर की लागत इस तकनीक के लिए खर्च कर रहा है, जिसे उपग्रह संचार स्टार्ट अप ओ3बी नेटवर्क के संस्थापक ग्रेग वीलर विकसित करेंगे। छोटे लेकिन उच्च क्षमता वाले उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर पारंपरिक उपग्रहों की तुलना में कम ऊंचाई पर परिक्रमा करेंगे। 

गूगल का प्रोजेक्ट लून पूरी पृथ्वी के दूर-दराज वाले क्षेत्रों में भी ब्रांडबैंड सेवा उपलब्ध कराने के लिए उच्च ऊंचाई वाले गुब्बारे बना रहा है। गूगल ने इस सेवा के लिए सौर ऊर्जा वाले ड्रोन बनाने की जिम्मेदारी टाइटन एयरोस्पेस को सौंपी है। (एजेंसी) sabhar :http://zeenews.india.com/

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औरत की पीठ की खाल से बना डाली किताब, जरूर देखें

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जांच में खुली बात

जांच में खुली बात


जब हारवर्ड युनिवर्सिटी में एक अजीबोगरीब किताब पाई गई, तो जैसे जब हैरान रह गए। उस किताब की शक्ल किसी भी आम बुक से बिल्कुल अलग थी।

‌हफपोस्ट
 में छपी खबर के अनुसार उस किताब का कवर दफ्ती जैसा दिख रहा था लेकिन वो था एकदम मुलायम और गौर से देखने पर कुछ अलग।

उस किताब को जांच के लिए भेजा गया। जांच में पाया गया कि इस बुक का कवर इंसानी खाल का है। ये भी पाया गया कि इस बुक में किसी औरत के पीठ की खाल लगाई गई है।

आत्मा और मृत्यु पर है बुक

जब इस बुक के ऐसा होने का कारण तलाशा गया तो जांचकर्ताओं का पता चला कि बुक आत्मा और मृत्यु के बाद के जीवन पर आधारित है।

वो इंसान के मर जाने के बाद की बात कहती है। इस किताब को 19वीं सदी के फ्रेंच राइटर हूजे ने लिखा था।

ये भी पता चला कि हूजे ने ये किताब लिखकर अपने एक दोस्त डॉ लूडोविक को दे दी थी जिसे उन्होंने पढ़कर किताब के टॉपिक के मुताबिक ही ढाल देने का सोचा।
बहुत पुरानी इस किताब के ऊपर इंसानी खाल होना इस जमाने के लोगों के ‌लिए कुछ अलग है।

लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि पुराने जमाने में लोग इसी तरह से बुक को संजोकर रखते थे और उस दौरान ऐसा करना कॉमन था।

इस रिपोर्ट को एन्थ्रोपोडर्मिक बिबलियोपेजी, एटलांटिक रिपोर्ट में छापा गया है।
sabhar :http://www.amarujala.com/

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बुधवार, 4 जून 2014

ऐसा उपन्यास जिससे फैल रहा है यौन संक्रमण

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Fifty Shades of Grey effect leading to rise of STDs in older couples'

अमेरिका में वृद्घ लोगों में असुरक्षित सेक्स संबंध बनाने का क्रेज हो गया है। नजीतन, वृद्घ लोगों में क्लामीडिया, सिफलिस और इसी तरह की अन्य यौन संक्रमित रोग फैल रहे हैं। पिछले दस सालों में यौन संक्रमित रोग और सं‌क्रमण तकरीबन तीन गुना हो गए हैं।डेली न्यूज ऑनलाइन की खबर के मुताबिक, सेक्सुअली ट्रांसमिटिड इंफेक्‍शन (STIs) जैसे क्लामीडिया, सिफलिस और गानरीअ 50 से अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखने को मिल रहा है। ऐसे में डॉक्टर्स ने ईएल जेम्स के इरोटिक उपन्यास 'फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे' को दोषी बताया है।उनके मुताबिक, लोग इस किताब को पढ़कर उसकी नकल करने की कोशिश कर रहे हैं इसी का नतीजा है कि लोगों को यौन संक्रमण फैल रहा है।ब्रिटीश मेडिकल ऐसोसिएशन जनरल प्रैक्टिसनर कमेटी के चेयरमैन डॉ. चार्लोट जोंस के मुताबिक, जब भी सुरक्षित सेक्स की बात आती है तो ऐसा माना जाता है कि युवा सुरक्षित सेक्स नहीं करते। लेकिन 'फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे'� उपन्यास के कारण बड़ी उम्र के लोग भी कंडोम जैसे कंट्रासेप्‍शन का इस्तेमाल नहीं कर रहे।2012 की सीडीसी रिपोर्ट से अब तक इंग्लैंड में 45 से 65 की उम्र के लोगों में सेक्सुअल ट्रांसमिटिड इंफेक्‍शन तीन गुना हो गया है। जबकि 2011 से 2012 में मात्र 7 फीसदी यौन संक्रमण की वृद्घि हुई थी।आपकी बता दें 'फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे' उपन्यास बंधक सेक्स और दर्द देकर खुशी पाने जैसे सेक्स प्रयोगों को सपोर्ट करता है। इस नॉवेल की 100 मिलियन से अधिक कॉपी बिक चुकी हैं और इस उपन्यास पर फिल्म भी बनने जा रही है। sabhar :http://www.amarujala.com/

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गुरुवार, 29 मई 2014

चीनी व्यक्ति ने बनाया स्कूटर वाला सूटकेस

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बीजिंग। पहिए वाले सूटकेस में सामान तो आप भी ले गए होंगे, लेकिन अगर आपसे कहा जाए कि सूटकेस पर आप सफर भी कर सकते हैं। जी हां, चीन के एक व्यक्ति ने ऐसा सूटकेस वाला स्कूटर तैयार किया है, जिसे चलाकर वो अपनी मंजिल तक जा सकता है।
ही लियांगसाई चीन के हनान क्षेत्र में रहते हैं। उन्होंने चांगशा ट्रेन स्टेशन के पास अपने इस अनोखे सूटकेस का प्रदर्शन किया। इस स्कूटर का वजन 7 किलोग्राम है और यह दो लोगों को लेकर चल सकता है। इससे 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 50-60 किमी तक की दूरी तय की जा सकती है। इसमें जीपीएस सिस्टम और अलार्म भी लगा है। ही पेशे से किसान हैं और उन्हें इस स्कूटर को बनाने में दस साल का समय लगा। इसे एक इलेक्ट्रिक स्कूटर के जरिए बनाया गया है, जिसे एक सूटकेस में फिट किया गया है। ही एक प्रतिष्ठित खोजकर्ता हैं। उन्हें 1999 में इस क्षेत्र में पुरस्कार भी मिल चुका है।
कई और खास सूटकेस
कई साल पहले माजदा ने एक सूटकेस कार का निर्माण किया था। इसे सबसे पहले 1991 में डिजाइन किया गया था। हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के पांच छात्रों ने एक इको फ्रेंडली सूटकेस कार बनाने में सफलता हासिल की। इस कार को बैटरी से चलाया जा सकता है। इसके अलावा मेक्सिकन डिजाइनर विक्टर एलमैन ने एक ऐसी साइकिल बनाई है जिसे मोड़कर एक सूटकेस में रखा जा सकता है।sabhar :http://www.jagran.com/

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यह अलमारी बिना ढूढे निकाल देगी कपड़े

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त्रिभुवन शर्मा

अब आपको अपने कपड़े ढूंढने के लिए ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ऐसी अलमारी बन चुकी है, जो एक क्लिक करने से आपके हाथ में पसंद वाले कपड़े पकड़ा देगी। जी हां, यह कोई कल्पना नहीं है बल्कि हकीकत है। इसमें आप अपने कपड़ों को आराम से रख सकते हैं और इसे स्मार्टफोन और टैबलेट के जरिए हैंडल कर सकते है। इस अलमारी के अंदर नॉर्मल अलमारी से ज्यादा जगह होगी और ज्यादा कपड़े रखे जा सकते हैं। इस अलमारी के अंदर एक ऑटोमैटिक रेल मशीन लगी होती है, जिस पर ज्यादा कपड़े टांगे जा सकते हैं। इसे इटली के डिजाइनर अमांडा ने तैयार किया है।


(फिल्म 'क्लूलेस' की तस्वीर, जिसमें पहली बार इस तरह के ऑटोमैटिक सिस्टम को दिखाया गया था)


यह कॉन्सेप्ट सबसे पहले 1995 में आई एक हॉलिवुड फिल्म 'क्लूलेस' से लिया गया है, जिसमें कपड़े खोजने के लिए कंप्यूटर सिस्टम जुड़ा होता है। असल में कपड़े रखने से पहले कपड़ों की टैबलेट और स्मार्टफोन के जरिए फोटो खिंची जाती है। अलमारी में लगी ऑटोमैटिक रेल मशीन में एक सेंसर लगा होता है, जिसका कनेक्शन स्मार्टफोन से होता है।

जब ओनर अपने स्मार्टफोन या टैबलेट के जरिए एक निश्चित कपड़ा खोजने के लिए क्लिक करता है तो सेंसर यह जानकारी दे देता है कि कपड़ा कहां रखा गया है। सेंसर में लगी ऑटोमैटिक रेल घूमती है और कपड़ों को ओनर के सामने पेश कर देती है। इस अलमारी की बेसिक कॉस्ट 2 लाख 32 हजार रुपए है और इसके डबल मॉडल की कॉस्ट 3 लाख 44 हजार रुपये है। sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

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गूगल सिक्योरिटी फर्म ड्रॉपकैम को खरीदने वाली है

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गूगल सिक्योरिटी फर्म ड्रॉपकैम को खरीदने वाली है

इंजन सर्च कंपनी गूगल अब आपके घरों की सुरक्षा करने की कवायद कर रही है।

जागरण ने यह खबर दी। गूगल सिक्योरिटी फर्म ड्रॉपकैम को खरीदने वाली है। इंटरनेट से जुड़े सीसीटीवी कैमरे बेचने वाली ये हाईटेक कंपनी खरीदकर गूगल पहले से खरीदी गई सॉफ्टवेयर कंपनी नेस्ट के साथ एक विशेष प्रकार का एप्लीकेशन तैयार करेगा जो घर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा प्रणाली को क्रांतिकारी बना देगा।
ड्रॉपकैम कंपनी फिलहाल अपनी सीसीटीवी प्रणाली 150 डॉलर (करीब 8500 रुपये) में बेचती है। ड्रापकैम एक क्लाउड आधारित वाईफाई एचडी वीडियो निगरानी सेवा है। इसमें अत्यधिक गुणवत्ता वाले मुफ्त सजीव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिग हासिल होती है। इसमें दोनों तरफ से बातचीत और हरेक कोने में कैमरे को घुमाकर देखना भी संभव होता है।
अब गूगल की नेस्ट कंपनी के तैयार किए ऐप की मदद से इस सेवा को और बेहतर बना देगी। इस खास ऐप से यूजर जूम, लाइव फीड और रिकॉर्डिग भी देख सकेगा। दोनों तरफ से बेहतर तरीके से लगातार आवाज कटे बगैर बात हो सकेगी। नाइट विजन मोड भी सेट हो सकेगा। इस कैमरे को आसानी से स्मार्ट फोन और ई-मेल से भी जोड़ा जा सकेगा। ताकि आप कहीं से भी और कभी भी अपने घर या दफ्तर पर नजर रख सकें। इस कैमरे में ई-मेल और स्मार्टफोन अलर्ट भी हैं। यानी कोई भी गड़बड़ी होने पर ये तत्काल आपको स्वत सूचित करेगा।
कंपनी का दावा है कि वह इन वीडियो को सुरक्षित रखने के लिए बैंकों में इस्तेमाल की जाने वाली उच्च स्तरीय ऑनलाइन सुरक्षा व्यवस्था रखता है। ताकि सॉफ्टवेयर को हैक या खराब न किया जा सके। सैनफ्रांसिस्को की कंपनी ड्रापकैम का कहना है कि उनका एचडी कैमरा 720 पी स्ट्रीमिंग के साथ मिलता है। 2009 में स्थापित इस कंपनी के मालिक ग्रैग डफी और आमिर वीरानी का कहना है कि उनकी कंपनी ने पिछले साल ही 300 लाख डालर का कारोबार किया है। sabhar :http://hindi.ruvr.ru/
और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/news/2014_05_28/272892167/

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मंगलवार, 27 मई 2014

ब्रेन पर लगी चोट तो बन गया जीनियस

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Brain injury turns man into mathematical genius


सुबोध वर्मा (टीएनएन), नई दिल्ली
हादसा अगर हासिल में बदल जाए तो इससे अच्छा क्या होगा! कभी-कभी कुदरत के करिश्मे से ऐसा मुमकिन होता है, जैसा कि एक अमेरिकी शख्स के साथ हुआ। साइंटिस्ट भी हैरान हैं और यह पता लगाने की कोशिश में जुटे हैं कि कैसे इस व्यक्ति के दिमाग में लगी चोट ने उसे मैथेमेटिक्स का जीनियस बना दिया। उन्हें इस दिशा में कुछ कामयाबी भी मिली है।

इस दिलचस्प घटना पर 'लाइव साइंस' में एक रिपोर्ट छपी है। साइंटिस्ट्स ने कहा है कि इसके पीछे वजह यह लगती है कि चोट के बाद हेड के क्राउन के पिछले हिस्से में एक खास एरिया, जिसे पराइटल कॉर्टेक्स कहते हैं, ज्यादा एक्टिव हो गया।

आखिर क्या हुआ था शख्स के साथ: दरअसल, जैसन पैडगेट उस वक्त तक टैकोमा (वॉशिंगटन) का एक साधारण-सा फर्नीचर सेल्समैन था जब तक उसके साथ हादसा पेश नहीं आया था। सन् 2002 की बात है जब एक दिन एक बार के बाहर जैसन पर दो लोगों ने गंभीर रूप से हमला किया। घटना में जैसन के दिमाग पर गहरी चोट लगी, वहीं उसकी किडनी भी जख्मी हो गई। चोटों से उबरने के बाद भी उसे आघात के बाद होने वाले स्ट्रेस डिसऑर्डर ने घेर लिया।
आमतौर पर यह एक मनोवैज्ञानिक कंडिशन है जो वॉर वेटरन्स के साथ पेश आती है। लेकिन ज्यों-ज्यों वक्त बीतता गया, जैसन पैडगेट ने महसूस किया कि अब वह दुनिया को अलग तरीके से देखने लगा है। उसे ऐसा लगने लगा कि हर चीज ज्यॉमेट्रिकल शेप में ढली है। उसे एकाएक तरह-तरह के जटिल ज्यॉमेट्रिकल शेप बनाने आ गए।

बढ़ी वैज्ञानिकों की दिलचस्पीः जैसे ही जैसन की इस गणितीय काबिलियत और उसे हासिल करने के तरीके के बारे में लोगों ने जाना, ब्रेन साइंटिस्टों की इस बात में काफी दिलचस्पी पैदा हो गई कि आखिर उसके ब्रेन के साथ ऐसा क्या हुआ जो वह सामान्य से अद्भुत क्षमता वाला शख्स बन गया। रिसर्च शुरू कर दी गई। यूनिवर्सिटी ऑफ मायामी के प्रोफेसर बेरिट ब्रोगार्ड और उनके सहयोगियों ने जैसन के ब्रेन की स्टडी करने के लिए उसकी MRI (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) भी कराई।

स्कैन से पता चला कि हमले के बाद जैसन के ब्रेन में लेफ्ट पराइटल कॉर्टेक्स ज्यादा उत्तेजित हो गया, जिससे यह चमत्कार मुमकिन हुआ। यही नहीं, वैज्ञानिक इस नतीजे पर भी पहुंचे कि जैसन जैसी क्षमता हर शख्स के ब्रेन में सुसुप्त हालत में हो सकती है। एक भौतिक विज्ञानी जैसन की खूबी से अभिभूत हो गया। जैसन के दिन बदल गए। उसने जैसन को कॉलेज जॉइन करने को राजी किया, जहां उसने नंबर थिअरी की स्टडी शुरू कर दी। sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

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क्या सोचते हैं पीडोफील

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बाल यौन शोषण एक क्रूर अपराध है और ये प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन अभी तक ये साफ नहीं हो सका है कि बच्चों का यौन शोषण करने वालों के दिमाग में गड़बड़ी होती कहां हैं.



जर्मनी के कील यूनिवर्सिटी क्लीनिक की एक टीम एमआरआई जांच से पता लगा रही है कि पीडोफिल क्यों बच्चों के प्रति आकर्षित होते हैं. भले ही फ्रांस, कनाडा, स्कैंडेनेवियाई देशों में इस मुद्दे पर शोध हो रहा हो लेकिन पीडोफिल के दिमाग के बारे में बहुत कम शोध हुए हैं. मनोवैज्ञानिक योर्ग पोनसेटी बताते हैं, "एमआरआई से मस्तिष्क की सक्रियता और संरचना का अच्छे से पता चल सकता है. अच्छी बात ये है कि खोपड़ी खोले बिना ही हम दिमाग के बारे में सटीकता से बता सकते हैं कि कौन सा हिस्सा सक्रिय है और कौन सा नहीं. फिलहाल हम एक मिलीमीटर के हिस्से तक को देख सकते हैं."
एमआरआई के कारण पीडोफिल लोगों के बारे में कई तरह की जानकारियां इकट्ठी हुई हैं. और पता लग गया है कि उनके दिमाग में कुछ अलग होता है, "पीडोफिल के दिमाग में कई तरह की न्यूरोसाइकोलॉजिकल असामान्यताएं देखी जाती हैं. उनका बुद्धिमत्ता औसत से आठ फीसदी कम होती है. यह भी रोचक है कि यौन दुराचार करने वाले अपराधियों की उम्र और आईक्यू एक दूसरे से जुड़े हैं." आसान शब्दों में पोनसेटी कहते हैं, "जितना मूर्ख अपराधी होगा, शिकार बच्चा उतना ही छोटा होगा."
बीमारी या और कुछ?
शोध के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी जाती. अगर कोई विस्तार से जानकारी पाना चाहता है तो वह यूनिवर्सिटी क्लीनिक के हॉटलाइन पर फोन कर सकता है या फिर इंटरनेट से जानकारी हासिल कर सकता है. पोनसेटी कहते हैं, "हर पीडोफिल बच्चों का यौन शोषण नहीं करता और इसलिए अपराधी भी नहीं पोता." लेकिन वो यह भी मानते हैं कि पीड़ित माता पिता को ये समझाना मुश्किल होता है. कई लोग नहीं जानते कि यौन चिकित्सा में पीडोफिल भी मानसिक रूप से बीमार के तौर पर गिने जाते हैं. लेकिन ये मानसिक बीमारी या पीडोफिल मानसिक रूप से बीमार के तौर पर तभी माना जाता है जब वह ऐसा कोई काम करे यानि बच्चों के साथ दुराचार करे.
तंदुरुस्त और पीडोफिल में फर्क
पोनसेटी और उनकी टीम ने बायोलॉजी लेटर्स नाम की पत्रिका में शोध छापा है. नए शोध के मुताबिक पीडोफिल जब बच्चों को देखते हैं तो उनके दिमाग का वो हिस्सा सक्रिय हो जाता है जो सामान्य इंसान में तब सक्रिय होता है जब वह विपरीतलिंगी या किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं जिनके प्रति वो कामुक हों. पोनसेटी के मुताबिक शायद सामान्य व्यक्ति में उम्र को आंकने की क्षमता होती और इसिलिए वो बच्चों के प्रति काम भाव से नहीं देखते.
पोनसेटी बताते हैं,"हम दिमाग के हर हिस्से की सक्रियता को देखते हैं. इसलिए हमें एक आंकड़ा मिल जाता है. अलग अलग लोगों के साथ हम जान सकते हैं कि कोई पीडोफिल है या नहीं. इसमें करीब दो साल लग जाते हैं हालांकि नतीजा 95 फीसदी सटीक रहता है." लेकिन दिमाग की सक्रियता के अलावा और भी जांच की जाती हैं. कंप्यूटर पर खास प्रोग्रामों के जरिए व्यक्ति की मानसिक उत्तेजना और दूसरे के प्रति दया दिखाने की क्षमता को आंका जाता है. इतना ही नहीं, खून की भी जांच की जाती है और जेनेटिक के साथ ही न्यूरोट्रांसमीटरों के साथ जांच भी. क्योंकि सिर्फ एमआरआई से पीडोफिल का पता नहीं लगाया जा सकता.
रिपोर्टः फ्रांक हायाष/एएम sabhar :http://www.dw.de/

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पिछले जन्मों के पाप इस जन्म में रोग बनते हैं

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Sins of past lives are formed in disease

ज्योतिर्मय

रोग शरीर में हों या मन में इनके बीज अचेतन मन की परतों में छुपे होते हैं। आयुर्वेद को व्यवस्थित रूप देने वाले महर्षि चरक के अनुसार पिछले जन्मों के पाप इस जन्म में रोग बन कर सताते हैं।

आयुर्वेद की इस मान्यता को को विज्ञान अभी तक यूं ही मानता था। पर अब इस बात को जांचा परखा और सही पाया जाने लगा है। आयुर्विज्ञान के पिछले सौ साल के अनुभव बताने लगे हैं कि रोग की जड़ें अचेतन मन में छुपी हुई है।

अचेतन मन क्या है? सामान्य उत्तर है कि और कुछ नहीं बस हमारा बीता हुआ कल। उस कल की अनुभूतियों में कटुता, संताप. पछतावा या कोई कसक है, तो वह रोग-शोक के रूप में प्रकट होती है।

आध्यात्मिक चिकित्सकों का कहना है कि बीते हुए कल की सीमाएँ वर्तमान से लेकर बचपन तक ही सिमटी नहीं हैं। इसके दायरे में हमारे पूर्वजन्म की अनुभूतियाँ भी आ जाती हैं। �

इस सिद्धान्त को कई आधुनिक मनोचिकित्सकों ने स्वीकारा है। अमेरिका में फ्लोरिडा क्षेत्र के मियामी शहर में मनोचिकित्सा कर रहे डॉ. ब्रायन वीज़ की कहना है कि जटिल रोगों को उपचार करते समय रोग के लक्षणों पर गौर करने से ज्यादा रोगी की ज्ञात अज्ञात स्मृतियों को भी जांचना चाहिए।

अपने कई रोगियों का इलाज करते समय� उन्होंने पाया कि रोगी के दुःख द्वन्द्व के कारण उसके व्यक्तित्व की अतल गहराइयों में है। पहले तो उन्होंने प्रचलित विधियों का प्रयोग करके तह तक जाने की कोशिश की।

कोई खास सफलता नहीं मिली तो नई विधियों के जरिए उन्होंने रोगी के पिछले जीवन को खगाला और पाया कि रोग की जडें पिछले जन्म में हैं। इस तरह वे पूर्वजन्म की वैज्ञानिकता को जानने में सफल रहे। �

डॉ. वीज़ ने अपने निष्कर्षों को अलग-अलग ढंग से पुस्तकों में प्रकाशित किया। इन पुस्तकों में 'मैसेजेस फ्राम दि मास्टर्स मैनी लाइव्स, मैनी मास्टर्स ओनली लव इज़ रियल एवं थ्रू टाइम इन्टू हीलिंग' मुख्य है।

उनकी इस आध्यात्मिक चिकित्सा के दौरान रोगियों के पूर्वजन्म को भी समझा जा सकता है। पुराने जमाने में उपनिषदों, बौद्ध साधनाओं, चीन में मेंग पो नामक देवी के अनुग्रहों, जापान में जातिस्मरण के प्रयोगों को इस चिकित्सा विधि का उल्लेख मिलता हैं।

नए जमाने में थियोसोफिकल सोसायटी की जनक मैडम ब्लेव्ट्सकी ने शुरु किया और आधुनिक चिकित्सावि‌आनियों ने इस विधा में तरह तरह के प्रयोग किए।

इयान स्टीवेन्स, पाल एडवर्ड्स, जिम बी टकर, गोडविन एर मार्टन और एर्लर हेरल्डसन� जैसे विज्ञानियों मे ढाई से चार हजार मामलों या रोगों की जांच पड़ताल इस विधि से की और सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं।

डॉ. राबर्ट ने इस तरह के केसों को साइटोमेंन्शिया और कान्फेबुलेशन जैसे मनोरोगों की श्रेणा में रखा है। वजह सिर्फ इतनी है कि उनके धार्मिक विश्वास पुनर्जन्म से इत्तफाक नहीं रखते। लेकिन वह जो विधि अपनाते हैं वह भी अवचेतन और अचेतन में छुप कर बैठी पिछली स्मृतियों मे ही ले जाती हैं। sabhar :http://www.amarujala.com/

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अभिनेत्रियां, जो बचपन में हुई यौन शोषण का शिकार

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बहुत ही सेलिब्रिटीज का हुआ रेप

बहुत ही सेलिब्रिटीज का हुआ रेप


हाल ही में 'बिग बॉस 4' की प्रतिभागी रह चुकी पामेला एंडरसन ने इस राज से पर्दा उठाया कि उनका बचनन में गैंगरेप और यौन शोषण हुआ था। सिर्फ पामेला अकेली ऐसी सेलिब्रिटी नहीं है।

बल्कि बॉलीवुड और हॉलीवुड में कई ऐसी सेलिब्रिटीज और अभिनेत्रियां है जो बचपन में कभी ना कभी या तो यौन शोषण का शिकार हुईं हैं या फिर उनका रेप हुआ है।

टाइम्स ऑनलाइन ने ऐसे सेलिब्रिटीज की एक सूची बनाई है। जानिए, कौन हैं वे सेलिब्रिटीज।
पामेला एंडरसन

पामेला एंडरसन

कनाडियन-अमेरिकन एक्ट्रेस और 'बिग बॉस 4' की प्रतिभागी रह चुकी पामेला एंडरसन ने हाल ही में बताया कि जब वे मात्र 6 साल की थी तो उनका यौन शोषण होता था। इतना ही नहीं, 12 साल की उम्र में उनका बलात्कार हुआ था और टीनेज में ही उनका गैंगरेप हुआ था।
मैडोना

मैडोना

क्वीन ऑफ पॉप’ के नाम से मशहूर अंतरराष्ट्रीय पॉप सिंगर मैडोना ने बताया कि जब वह सिंगर बनने के लिए संघर्ष कर रही थीं तो एक अजनबी ने उनके साथ रेप किया था। उस समय वह 19 साल की थीं। मैडोना ने बताया कि एक बिल्डिंग की छत पर मुझे घसीटकर ले जाया गया। वह मेरे पीछे चाकू लगाया हुआ था और बंदूक दिखाकर रेप किया।

ओपरा विनफ्रे

ओपरा विनफ्रे

विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी टीवी होस्ट ओपरा विनफ्रे ने बताया था कि 9 साल की उम्र में उनका यौन शोषण हुआ था। ओपरा जब 9 साल की थी तो उनके कुछ रिश्तेदारों ने मिलकर उनका रेप किया था। इतना ही नहीं, ओपरा का कई साल तक यौन शोषण भी हुआ। जिसके कारण वे 14 साल की उम्र में ही प्रेगनेंट हो गईं थीं।
टेरी हत्चेर

टेरी हत्चेर

अमेरिकन एक्ट्रेस टेरी हत्चेर ने बताया था कि जब वे 5 साल की थी तो उनके अंकल ने उनका यौन शोषण किया था। ट्रेरी इस पूरे ट्रॉमा से उबरने की भरपूर कोशिश करती है। टेरी ने अपने अंकल की इस हरकत को सबसे सामने लेकर आईं थी और उनके अंकल को इसकी सजा भी मिली थी।

ब्रिटनी स्पीयर्स

ब्रिटनी स्पीयर्स

हालांकि ये बात सच है या नहीं लेकिन पॉप स्टार ब्रिटनी स्पीयर्स के सहयोगी बताते हैं कि बचपन में ब्रिटनी के पिता उनका यौन शोषण करते थे। 

ऐश्ले जुड

ऐश्ले जुड

हॉलीवुड में सबसे ज्यादा कमाने वाली अभिनेत्री ऐश्ले जुड भी बचपन में यौन शोषण का शिकार हो चुकी है। ऐश्ले बताती हैं कि उनका बचपन में कई बार रेप हुआ। उन्होंने अपनी आपबीती के बारे में घर पर भी बताया लेकिन उनके पेरेंट्स ने उनका विश्वास नहीं किया। इतना ही नहीं, ऐश्ले का मॉडलिंग कॅरियर के दौरान भी रेप हुआ। 
सोफिया हयात

सोफिया हयात

‌'बिग बॉस 7' खासी चर्चा में आई सोफिया हयात ने बताया कि बचपन में उनका भी यौन शोषण हुआ था। सोफिया ने माना कि बचपन में उनके अंकल ने उनका रेप किया था।


अनुष्का शंकर

अनुष्का शंकर

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सितार वादक स्वर्गीय पंडित रविशंकर की बेटी अनुष्का शंकर ने कहा कि बचपन में उनका भी यौन शोषण हुआ था। बचपन में एक शख्स ने वर्षों तक मेरा यौन शोषण किया. उस शख़्स पर मेरे मां-बाप बहुत भरोसा करते थे. लेकिन उसने वो भरोसा तोड़ा।"

अनुष्का ने ये भी कहा कि जब वो बड़ी हो रही थीं तो भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर उनके साथ छेड़छाड़ हुई। "भीड़भाड़ में या अन्य जगहों पर कई मर्दों ने मुझे स्पर्श करने की, मुझे पकड़ने की चेष्टा की। मेरे साथ गाली-गलौज भी की गई। मुझे उस वक़्त पता भी नहीं था कि ऐसे हालातों से कैसे निपटा जाए।"

काल्कि कोचलीन


काल्कि कोचलीन

काल्कि कोचलीन भी यौन शोषण का शिकार हो चुकी हैं। उन्होंने बताया था कि बचपन में उनका यौन शोषण हुआ था। उन्होंने इंटरव्यू में कहा था कि ये उनके जीवन का एक ऐसा कड़वा सच है, जिसके साथ वे बचपन से जी रही हैं। sabhar :
http://www.amarujala.com/



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