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सोमवार, 24 मार्च 2014

Hindi Film Gazab Nagaria

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Hindi Film Gazab Nagaria


आप कुछ अपने बारे में बताये। . 

मैंने श्री राम आर्ट सेण्टर  से एक साल कोर्स करके  नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में प्रवेश लिया। . सच कहु तो एक्टिंग सही तालीम मैंने  एन एस डी  से ही ली।  आ जो कुछ भी हु वो उसके लिए मै सभी का तह दिल से सुक्रिया अदा करना चाहुगा।  पापा चाहते थे मै डॉक्टर बनू  मगर मेरी जिद और लगन ने मुझे एक्टर बना दिया।

अभी तक आपने कितने फिल्मे की है।  

अभी तक मैंने टोटल १५ फ़िल्म की है ये मेरी  जीवन की पूजी है।   मेरी  आने वाली फ़िल्म फेंटम , गजब नगरिया  है

आप टीवी क्यों नहीं करना चाहते। 

मुझे टीवी पर काफी रोल ऑफर होते रहते है  मुझे लगता है मै थिएटर और फिल्मो के लिए बना हु।  मै फिल्मे ही करना चाहुगा।  मुझे एक अच्छे रोल का इंतजार है जहा मै न्याय कर सकू।  अभी हाल मेरी फ़िल्म हाई वे आई है मुझे ख़ुशी है फ़िल्म काफी अच्छी चल रही है।  इसमे मेरा रोल अच्छा है। 

एक्टिंग के अलावा क्या करते है। 

मैंने कुछ दिन तक बालाजी टेलीफिल्म के एक्टिंग स्कूल में शिक्षा दी।  खाली टाइम मै उन लोगो को एक्टिंग सिखाता हु जो बॉलीवुड में अपनी एक जगह बनाना चाहते है। मुझे संगीत सुनना , लिखना और पढ़ना काफी अच्छी लगता है।

This Interview taken by Editor Sushil Gangwar






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मिडिया दलाल वेब के आडिटर सुशील गंगवार द्वारा टीवी तथा फिल्मी कलाकारो से बातचीत की

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मिडिया दलाल वेब के आडिटर सुशील गंगवार द्वारा टीवी तथा फिल्मी कलाकारो से बातचीत की 
जिसमे कुछ नयी आने वाली फिल्म गजब नागरिया है और आप के पापुलर धारावाहिक लापतागंज के कलाकार है 

Hindi Film Gazab Nagaria











आज जो कुछ भी हु वो अश्वनी धीर की वजह से हु। . रोहिताश गौड़



एन .एस .डी से निकलने के बाद कितना बॉलीवुड में कितना संघर्ष करना पड़ा।

जीवन ही संघर्ष है। हमें जीवन के लिए संघर्ष करते रहना चाहिए। मै अपने जीवन में सबसे जायदा अश्वनी धीर जी को थैंक्स कहना चाहुगा। आज जो कुछ भी मेरे पास है वो उनकी वजह से है।

लापतागंज काफी लोकप्रिय हो रहा है। .

जब मैंने लापतागंज में काम करना शुरू किया था लोग सोचते थे ये सीरियल केवल छे महीना ही चलेगा। आज ऊपर वाले की कृपा से चौथा साल चल रहा है। मेरी भूमिका मुकंदी लाल की है जो काफी लोकप्रिय हो रही है।


आपकी आने वाली फिल्मे और टीवी सीरियल कौन कौन सी है।

अभी मै राज कुमार हिरानी की फ़िल्म पी के कर रहा हु। जिसमे मैंने हरियाणी पुलिस वाले का रोल किया है जो छोटी छोटी रिश्वत लेता है। अभी तो सीरियल लापतागंज ही कर रहा हु। फिल्मो में अच्छे रोल मिल रहे है। अगर कोई अच्छा रोल आता है उसे करता रहूगा।

क्या आप अपने बच्चो को फिल्मो में लाना चाहेगे।

कभी नहीं। . अगर वो अपनी मर्जी से आ जाते है। . तो कोई बात नहीं।


नए लोगो के लिए क्या कहना चाहेगे जो फिल्मो और टीवी में आना चाहते है।

मै तो ये कह सकता हु। जो जिस लाइन के लिए बना है उसे वही काम करना चाहिए। अगर आप आना चाहते है तो बॉलीवुड में सबके लिए जगह है। मगर अपने टैलेंट को पहचान ले। खाली भटके नहीं।

This interview taken by Editor sushil Gangwar

मै छोटे रोल नहीं करना चाहता हु। --ओनकार दास -


आखिर क्या हुआ आप पीपली लाइव के बाद से एक गुम हो गए। . 

मैंने पीपली लाइव फ़िल्म की थी जिसे माद्यम से मेरी बॉलीवुड में एंट्री हुई। मै थैंक्स कहना चाहता हु आमिर खान जी को। मै तो थिएटर का कलाकार हु। भोपाल में थिएटर करता था। आज भी कर रहा हु। फिल्मो से गायब नहीं हुआ हु। मुझे उसके बाद अच्छे रोल नहीं मिल पाये। मुझे ऐसा लगता है जो फिल्मे बन रही। उसमे मेरे लायक रोल नहीं आ रहा है। 

क्या बॉलीवुड में गाड़फाथेर होना जरूरी है। 

हां मुझे ऐसा लगता है.. गाड़फाथेर होना जरूरी है। इससे बहुत मदद मिलती है। आपको पता रहता है क्या और कैसे करना है। फिल्मे मिलने में थोड़ी सी आसानी हो जाती है। वैसे तो तो अपना गाड़फाथेर आमिर खान को ही मानता हु। 

सुना है आप टीवी नहीं करना चाहते है। ऐसा क्यों ?
ऐसा कुछ नहीं है अगर कोई लीड रोल मिलेगा तो मै करना चाहुगा। मै छोटे रोल नहीं करना चाहता हु। अच्छे रोल का टीवी और फिल्मो का इंतजार है। जल्दी ही मेरी कुछ फ़िल्म आने वाली है जो पाइप लाइन में है। .


This interview taken by Editor Sushil Gangwar

एक्टिंग भगवान् का दिया हुआ गिफ्ट है। ---गीतांजलि मिश्रा






आप एक्टिंग के फील्ड में कैसे आयी। . 

मैं बी. ए करने के बाद मुम्बई में नौकरी कर रही थी। . एक मेरे एक दोस्त का फ़ोन आया। . तुम्हारे लिए लिए एक किरदार है तुम चाहो तो कर सकती हो। मैंने उस किरदार के लिए हामी भर दी। . उसके बाद में लगातार छोटे परदे पर आ रही हु। . वैसे तो वनारस कि रहने वाली हु मगर मेरी परवरिश मुम्बई में ही हुई है।

आपका रंग रसिया में रोल क्या है। 

मै इसमे मैथली का रोल कर रही हु। जो अपनी सास से डर कर रहती है। सास जो भी कहती है वह मै करती जाती हु। सच कहु तो एक दब्बू बहु का किरदार निभा रही हु।

आपके बारे में कहा जाता है आप फ़िल्म नहीं करती। इसका क्या कारण है। 

मै अपनी प्रतिभा को घर घर तक पहुचाना चाहती हु। टीवी एक सशक्त माद्यम है। आज कल तो बड़े स्टार भी टीवी ज्वाइन कर रहे है।

आपके आने वाले टीवी सीरियल कौन कौन से है।
मै सावधान इंडिया , क्राइम पेट्रोल , रंग रसिया कर रही हु और आने वाले सीरियल में इक लक्छ आ रहा है।

जो लोग फिल्मो में आना चाहते है उनके लिए क्या सन्देश है। 

एक्टिंग भगवान् का दिया हुआ गिफ्ट है। अगर आपके अंदर प्रतिभा है तो आप बॉलीवुड में आ सकते है। अगर आये तो पूरी तैयारी से आये। हो सके तो कोई एक्टिंग स्कूल या थिएटर कर सकते है। इससे काफी लाभ होगा।

क्या टीवी और फिल्मो में कोम्प्रोमाईज़ चलता है। .

जहा आग होती है वही धुँआ होता है। . मै खुद नहीं जानती आखिर मुझे सिनेमा से क्यों घुटन होती है मगर होती है। हम लोग गिफ्ट का रैपर बनकर रह गए है। मगर रैपर नहीं बनना चाहती हु। इसलिए टीवी की दुनिया में ही खुश हु।

This interview taken by Editor Sushil Gangwar ..

रंग रसिया में मेरा रोल काफी अच्छा है - खुशबु ठक्कर



आपका बॉलीवुड में आना कैसे हुआ। .

ग्रेजुएट करने बाद मुझे टेली चक्कर में मुझे काम मिल गया। . करीव आठ महीना मैंने टेली चक्कर में काम किया। टेली चक्कर के दौरान ही मुझे टीवी सीरियल का ऑफर मिला। जिसे मैंने स्वीकार कर लिया।

आपकी रंग रसिया में क्या भूमिका है।

इसमे मै मैथली की ननद की भूमिका में हु जो थोड़ी चुलबुली है।

आपको रंग रसिया कैसे मिला।

जब मै वीरा कर रही थी उसी टाइम मुझे काम करने का ऑफर मिला था।

आपकी आने वाले टीवी सीरियल कौन कौन से है

अभी तो रंग रसिया और वीरा कर रही हु।

क्या फिल्मे करना चाहेगी। ।

अगर हां रोल सही मिला तो करना पसंद करुँगी। .वर्ना टीवी शो करती रहूगी।


यह इंटरव्यू एडिटर सुशिल गंगवार ने लिया है। .उनसे संपर्क ९१६७६१८८६६ पर कर सकते है।

मुझे एक अच्छे रोल का इंतजार है जहा मै न्याय कर सकू। --- हेमंत माहौर






आप कुछ अपने बारे में बताये। . 

मैंने श्री राम आर्ट सेण्टर से एक साल कोर्स करके नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में प्रवेश लिया। . सच कहु तो एक्टिंग सही तालीम मैंने एन एस डी से ही ली। आ जो कुछ भी हु वो उसके लिए मै सभी का तह दिल से सुक्रिया अदा करना चाहुगा। पापा चाहते थे मै डॉक्टर बनू मगर मेरी जिद और लगन ने मुझे एक्टर बना दिया।

अभी तक आपने कितने फिल्मे की है। 

अभी तक मैंने टोटल १५ फ़िल्म की है ये मेरी जीवन की पूजी है। मेरी आने वाली फ़िल्म फेंटम , गजब नगरिया है

आप टीवी क्यों नहीं करना चाहते। 

मुझे टीवी पर काफी रोल ऑफर होते रहते है मुझे लगता है मै थिएटर और फिल्मो के लिए बना हु। मै फिल्मे ही करना चाहुगा। मुझे एक अच्छे रोल का इंतजार है जहा मै न्याय कर सकू। अभी हाल मेरी फ़िल्म हाई वे आई है मुझे ख़ुशी है फ़िल्म काफी अच्छी चल रही है। इसमे मेरा रोल अच्छा है।

एक्टिंग के अलावा क्या करते है। 

मैंने कुछ दिन तक बालाजी टेलीफिल्म के एक्टिंग स्कूल में शिक्षा दी। खाली टाइम मै उन लोगो को एक्टिंग सिखाता हु जो बॉलीवुड में अपनी एक जगह बनाना चाहते है। मुझे संगीत सुनना , लिखना और पढ़ना काफी अच्छी लगता है।

This Interview taken by Editor Sushil Gangwar




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रविवार, 23 मार्च 2014

वर्जिनिटी नीलाम कर ढाई करोड़ कमाएगी ये मेडिकल स्टूडेंट!

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वॉशिंगटन. अमेरिका की एक मेडिकल स्‍टूडेंट एलिजाबेथ रेने ने अपनी वर्जिनिटी नीलाम करने का फैसला किया है. 27 साल की एलिजाबेथ इंटरनेट के जरिए अपनी वर्जिनिटी बेचेंगी और उन्‍हें उम्‍मीद है कि वे इससे कम से कम 2 करोड़ 43 लाख 84 हजार रुपये कमाएंगी. यह नीलामी रेने की वेबसाइट www.elizabeth-raine.com पर 1 अप्रैल से शुरू होगी.
रेने के मुताबिक, वर्जिनिटी की नीलामी का प्रमुख मकसद पैसे कमाना है. मुझे अपनी वर्जिनिटी से कोई भावनात्‍मक लगाव न तो था और न है. इसलिए मेरे लिए ऐसा करना बड़ा आसान है. और मैं क्‍यों ऐसा न करूं? यह पैसे कमाने का दमदार और आसान तरीका है.
आलीशान होटल में बिताएंगी 12 घंटे
रेने अमेरिका में मेडिकल स्‍टूडेंट हैं, लेकिन उन्‍होंने यह नहीं बताया है कि वे किस कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं. उनके ब्‍लॉग में उन्‍होंने अपनी जो तस्‍वीरें अपलोड की हैं उसमें उनका चेहरा छिपा हुआ है. रेने कहती हैं कि नीलामी में जो जीतेगा उसे उनके साथ एक आलीशान होटल में 12 घंटे बिताने के लिए मिलेंगे. इस दौरान उनके घरवालों को पता होगा कि वो कहां हैं. उनका कहना है कि अगर किसी को लगता है कि सेक्‍स के लिए पैसे चुकाने के बाद मुझे उससे प्‍यार हो जाएगा तो उसे बेहद निराशा होगी.
पहले कभी नहीं किया सेक्स
रेने ने कभी भी सेक्‍स नहीं किया है. उन्‍हें कभी किसी ने न्‍यूड अवस्‍था में भी नहीं देखा और न ही उन्‍होंने किसी न्‍यूड पुरुष को देखा है. उनके मुताबिक, मैंने लड़कों से डेट की है, लेकिन दो या तीन महीनों से ज्‍यादा नहीं. मेरा कभी कोई ब्‍वॉयफ्रेंड नहीं रहा क्‍योंकि मुझे ऐसा कोई नहीं मिला जिसने मुझे इस बात का यकीन दिलाया हो कि सेक्‍स शरीरिक कसरत से ज्‍यादा है. मुझे लड़के पसंद हैं, लेकिन किसी के साथ भी मेरा इमोशनल कनेक्‍शन नहीं रहा. मैं पढ़ाई और प्रोजेक्‍ट्स पर काम करती हूं. मुझे दोस्‍तों के साथ घूमना-फिरना पसंद है और यही मेरे लिए काफी है.
भाई को ऐतराज
रेने के दोस्‍त तो इस फैसले का समर्थन करते हैं, लेकिन उनके भाई को यह पसंद नहीं. रेने के मुताबिक, मेरे दोस्‍त मेरे फैसले का सम्‍मान करते हैं. उन्‍हें मुझ पर भरोसा है, लेकिन मेरे भाई को इस पर आपत्ति है. हालांकि इससे हमारे रिश्‍ते पर कोई फर्क नहीं पड़ा. उसे पता है कि मैं स्‍मार्ट हूं और उसे भरोसा है कि मैं यह सब ठीक से कर पाऊंगी. यही नहीं रेने के माता-पिता भी उनके साथ हैं.
रेने का कहना है कि नीलामी पूरी तरह से कानून के हिसाब से होगी. वे नीलामी से मिले पैसों पर टैक्‍स भी अदा करेंगी और कमाई का 35 फीसदी हिस्‍सा चैरिटी को दान में दे देंगी.
आपको बता दें कि इससे पहले ब्राजील की एक 21 वर्षीय स्‍टूडेंट कटरीना मिगलियोरिनी ने भी अपनी वर्जिनिटी की नीलामी का ऐलान किया था. \sabhar :http://www.palpalindia.com/

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शनिवार, 8 मार्च 2014

आखिर उस पुरुष के प्यार में क्यों पागल है नागिन

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mystery love nagin mathura

यह घटना किसी बॉलीवुड फिल्म की तरह है जिसे पढ़कर आप सोचने पर मजबूर हो सकते हैं कि, क्या कोई किसी से इतना प्यार कर सकता है। प्यार भी कैसा तो एक नागिन का इंसान से, जो आमतौर पर एक दूसरे के जानी दुश्मन माने जाते हैं।

यह प्रेम कहानी मथुरा जिले के अगरयाला गांव की है। यह हर साल नागपंचमी के दिन एक नागिन लक्ष्मण नाम के व्यक्ति से आकर लिपट जाती है। लगभग तीन दिनों तक लक्ष्मण के साथ रहने के बाद यह नागिन कहीं चली जाती है।

नागिन कहां से आती है, कहां चली जाती है और लक्ष्मण नाम के व्यक्ति से क्यों लिपट जाती है यह रहस्य बना हुआ है। लोग इसे पूर्वजन्म की प्रेम कहानी मानते हैं। यह प्रेम कहानी लगभग ग्यारह साल पहले नागपंचमी के दिन लोगों की नजरों में आयी।

लक्ष्मण के परिवार वालों का कहना है कि जब यह सात महीने का था तब नागिन आकर लक्ष्मण के सीने पर बैठ गयी लेकिन काटी नहीं। उस समय तक किसी को नागिन के प्रेम का अंदाजा नहीं था।

जब लक्ष्मण की शादी गंगा नाम की लड़की से हो गयी तब से नागिन ने लक्ष्मण को काटना शुरु कर दिया। लेकिन हर बार लक्ष्मण को बचा लिया जाता। परिवार वालों ने जब इस घटना को जानने के लिए ढाक बजवाया तो पता चला कि नागिन लक्ष्मण की पूर्वजन्म की पत्नी है, यह हमेशा लक्ष्मण के पास रहना चाहती है। sabhar :http://www.amarujala.com/

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मोबाइल से शरीर में पहुंचा 11000 वोल्ट का करंट

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मोबाइल ब्लास्ट से चेहरा और शरीर जला


मोबाइल ब्लास्ट से चेहरा और शरीर जला


आपको यह जानकर आश्चर्य जरूर होगा कि बिजली के तार के नजदीक मोबाइल फोन से बात करने पर एक युवक के शरीर में 11 हजार वोल्ट का करंट पहुंच गया। इससे उसके शरीर के अंदर इतना बड़ा ब्लास्ट होगा।

ब्लास्ट की वजह से मरीज का चेहरा, आंख और शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग बुरी तरीके से जल गए। मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर भी इस घटना से आश्चर्य में हैं।

मरीज की अभी तक 11 सर्जरी की जा चुकी है और करीब आधा दर्जन सर्जरी और होनी है। मरीज को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

करंट कान से होते हुए शरीर में पहुंचा

करंट कान से होते हुए शरीर में पहुंचा

एक अगस्त-2013 को 23 वर्षीय एमबीए ग्रैजुएट युवक छत पर मोबाइल फोन से बात करने गया, छत के पास से 11 हजार वोल्ट बिजली का तार गुजर रहा था। तार में करंट था।

डॉक्टरों का कहना है कि मोबाइल से मैगनेटिक फिल्ड और बिजली की तार से इलेक्ट्रिक फिल्ड निकला। इसकी वजह से करंट युवक के कान से होते हुए शरीर में प्रवेश किया और ब्लास्ट हुआ।

ब्लास्ट के बाद युवक अचेत होकर 45 मिनट तक पड़ा रहा। इसके बाद उसे होश आया। उस दिन उसे ग्वालियर के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो दिन बाद तीन अगस्त-2013 को मरीज को सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

ग्वालियर का रहने वाला, दिल्ली में हो रहा है ईलाज

ब्लास्ट के बाद गंभीर अवस्था में 23 वर्षीय युवक रवि (परिवर्तित नाम) को तीन अगस्त-2013 को ग्वालियर से सर गंगा राम अस्पताल लाया गया।

डॉक्टरों की टीम ने मरीज को देखा इसके बाद उसे प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग रेफर कर दिया गया। मरीज की दाहिनी आंख पूरी तरह से खराब हो चुकी थी। कॉर्निया तक जल चुका था। चेहरा बुरी तरह से जल चुका था।

कान, जांघ और निजी अंगों के अलावा कई अन्य प्रभावित थे। चेहरे की हड्डी तक जल चुकी थी। ऐसे में चिकित्सकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मरीज के घाव में फैल रहे संक्रमण को रोकना था।

10 सर्जरी के बाद हो रहा है सुधार

प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के एसोसिएट कंसलटेंट डॉ. स्वरूप सिंह गंभीर ने बताया कि अभी तक मरीज की 10 सर्जरी की जा चुकी है और 11वीं सर्जरी की तैयारी की जा रही है।

मरीज की कई दिक्कतों को दूर कर दिया गया है। वह अब सुन सकता है और चेहरे की भी रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की जा चुकी है। भौं (आई ब्रो) सहित कुछ अन्य रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी भी की जानी है। डॉ. स्वरूप का कहना था कि ऐसा केस उन्होंने अपने चिकित्सीय जीवन में नहीं देखा, लेकिन मरीज में हो रहे सुधार से वे काफी खुश हैं।

sabhar :http://www.delhincr.amarujala.com/



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उफ! क्या थीं ये फिल्में जो दुनिया भर में तहलका मचा बैन हो गईं

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आखिर क्यों बैन हुई ये फिल्में

आखिर क्यों बैन हुई ये फिल्में


दुनिया भर में कई ऐसी फिल्में बनी जो अपनी विषय वस्तु और कथानक को लेकर आलोचनाओं में रहीं। इन्होंने दुनिया भर में विवाद पैदा कर दिया।

इनमें से कईयों को बैन कर दिया गया तो कुछ एक के निर्माता को अपनी जान तक से हाथ धोना पड़ा। ऐसी ही फिल्मों और इनसे जुड़ी पूरी जानकारियां हम आपको दे रहे हैं। 

 निर्माता की ही जान ले गई  'सालो/द 120 डेज ऑफ सोडम'

निर्माता की ही जान ले गई 'सालो/द 120 डेज ऑफ सोडम'

इटली की ये फिल्म 1975 में आई और मोस्ट कंट्रोवर्सल फिल्मों की सरताज बन गई। फिल्म में बच्चों के एक ग्रुप का अपहरण कर लिया जाता है जो नाजी के हाथों की कठपुतलियां बन जाते हैं।

बच्चों के साथ रेप, मर्डर के अलावा कई वीभत्स टार्चर दिखाए गए। जिसमें ऐनल रेप जैसी कई गंदी हरकतें भी शामिल थीं। फिल्म आस्ट्रेलिया में 1993 तक बेन रही इसके बाद 1998 में इसको फिर से बेन कर दिया गया।

यही नहीं फिल्म बनाने वाले पॉयर पाओलो पासोलोनी के पास तो अपनी फिल्म की सफाई देने का भी वक्त नहीं बचा क्योंकि फिल्म रिलीज के बाद ही उनकी बेहद निर्ममतापूर्ण हत्या भी कर दी गई।

'लॉस्ट हाउस ऑन द लेफ्ट: शूटिंग में घबरा गई हीरोइन ही

लॉस्ट हाउस ऑन द लेफ्ट: शूटिंग में घबरा गई हीरोइन ही

1972 में आई ये फिल्म सेक्सअुल टार्चर पर आधारित थी। जिसमें दो टीनेज फ्रेंड्स का किडनेप कर लिया जाता है। इसके बाद इन दोनों को एक दूसरे के साथ सेक्स के लिए बाध्य किया जाता है। फिल्म में सेक्स हिंसा के कई सीन थे।

बताया जाता है कि फिल्म की हीरोइन सांड्रा पीबॉडी खुद शूटिंग के दौरान इतना विचलित हो गई थीं कि वह सैट ही छोड़ कर चली गईं। 

डायरेक्टर को ही जेल में ले गई 'लॉस्ट टेंगो इन पेरिस'

1972 में बनी ये फिल्म अपने कथानक और विषयवस्तु के कारण विवादों में आ गई। फिल्म के डॉयरेक्टर बर्नाडो को तो ‌चार महीने जेल की हवा भी खानी पड़ी।

फिल्म में सेक्स की खुशी पाने के लिए की गई हरकतें लोगों को जरा भी रास नहीं आईं। कई देशों में फिल्म को पूरी तरह से बेन कर दिया गया। इटली, पुर्तगाल और चिली में फिल्म पर 30 साल तक रोक लग गई।
वहशियाना हरकतों से भी आगे निकल गए ये 'किड्स'

वहशियाना हरकतों से भी आगे निकल गए ये 'किड्स'

अमेरिका में 1995 में आई फिल्म किड्स अपने नाम के एकदम विपरीत निकली। फिल्म में सेक्स एडिक्ट टीनेजर्स को दिखाया गया था। एचआईवी पीड़ित लड़के के ग्रुप द्वारा लड़की के साथ रेप जैसे तमाम विवादास्पद सीन थे।

सेक्स, नशा और वहशियाना हरकतों से भरपूर थी ये फिल्म। जिसने दर्शकों और क्रिटिक्स को चौंका कर रख दिया। फिल्म की खूब आलोचना हुई।

'एंटीक्रिस्ट' देख बेहोश हो गए थे चार लोग

डेनमार्क में बनी ये फिल्म इतनी वीभत्स और अजीब थी जिसे देख कान फिल्म फेस्टिवल में हुई स्क्रीनिंग के दौरान चार लोग बेहोश हो गए थे। टेलीग्रॉफ फिल्म क्रिटिक्स ने इस फिल्म को टार्चर पोर्न को लेबल दिया था।

फिल्म में एक कपल्स के सेक्स मूमेंट के दौरान उनके बेटे की खिड़की से गिरकर मौत हो जाती है। निराशा में ये पति-पत्नी एक दूसरे को ही टार्चर करने लगते हैं। फिल्म में पत्नी द्वारा पति के पैर में ड्रिल मशीन से छेद कर लकड़ी डालने जैसे भयंकर दृश्य थे।

बेसी-मोईः सताई महिलाओं ने जब लोगों को सताया

बेसी-मोईः सताई महिलाओं ने जब लोगों को सताया

बेसी-मोई दो ऐसी महिलाओं की कहानी थी जो काफी वॉयलेंस झेल चुकी थीं। ये दोनों मिलती हैं और कुछ नया एक्साइटिंग करने की चाह में एक रोड ट्रिप पर निकल जाती हैं। इसी ट्रिप के बाद शुरु होती है सेक्स और हत्याओं की सिलसिलेवार कहानी।

जिसकी जिम्मेदार ये दोनों महिलाएं होती है। दोनों को देश की मोस्ट वांटेड नॉटीरिअस घोषित कर दिया जाता है। फिल्म की दोनों हीरोइनें पूर्व पोर्न स्टार थीं। फिल्म इतनी वॉयलेंटेड थी कि फ्रांस में इसकी जमकर आलोचना हुई।

ब्रिटेन में फिल्म में 10 सेकेंड के कट के बाद 18 सार्टिफिकेट के साथ रिलीज की इजाजत मिली। फिल्म का पोस्टर लंडन में पूरी तरह बेन कर दिया गया। फ्रांस की ये फिल्म 2000 में आई थी।

रिलीज न हो सकी'द एक्सोरिस्ट'

अमेरिका की ये फिल्म 1973 में बनाई गई थी। जिसे आलोचकों ने रिलीजियस पोर्न बताते हुए बेहद विवादास्पद करार दिया।1984 वीडियो रिकार्डिंग एक्ट के तहत फिल्म को रिलीज करने से साफ मना कर दिया गया साथ ही इस फिल्म की कोई भी वीडियो कॉपी यूके में बिक्री के लिए प्रतिबंधित कर दी गई।

बैन ही रही 'ए क्लोकवाइज ऑरेंज'

यूके की ये फिल्म बनी तो 1971 में थी लेकिन बाद में ये पर्दे पर नहीं दिख सकी। फिल्म में डर्टी रेप सीन्स और वीभत्स हिंसा के कई दृश्य थे। मीडिया ने फिल्म की खूब आलोचना की।
यही नहीं डायरेक्टर और उसके परिवार को जान से मारने की धम‌कियां भी मिलती रहीं। आखिरकार ये फिल्म बैन कर दी गई।

धार्मिक भावनाओं को हिला गई'लाइफ ऑफ ब्रॉयन'

1979 में आई ब्रिटेन की ये फिल्म आते ही विवादों में छा गई। फिल्म को धार्मिक आस्‍थाओं पर प्रहार करने वाली माना गया। चर्च और धार्मिक संगठनों ने इस फिल्म को पूरी तरह से बेन करने की मांग कर दी। 
स्पिट ऑन योर ग्रेव

स्पिट ऑन योर ग्रेव

1978 में आई अमेरिका‌ निर्मित ये फिल्म बदले और बलात्कार पर आधारित थी। फिल्म में रेप सीन के अलावा भयंकर वीभत्स दृश्य भी थे। जिसमें रेप और टार्चर को बहुत ही गंदे ढंग से दिखाया गया।

फिल्म को रिलीज से पहले ही अमेरिका में सेंसर्ड कर दिया गया। बाद में युरोप के कई देशा में फिल्म पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया। क्रिटिक्स का मानना था कि ये फिल्म क्रिमिलन दिमाग वाले लोगों को और अधिक क्राइम करने के लिए प्रेरित करेगी। sabhar :http://www.amarujala.com/

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एक अकेली औरत

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सुरुचि शर्मा

सुरुचि शर्मा की उम्र 28 साल है, वह मुंबई में एक अच्छे पद पर कार्यरत हैं और उनकी अभी तक शादी नहीं हुई है. वह कहती हैं कि पुरुष हो या महिला, अगर आपको अच्छी शिक्षा मिली हो और थोड़ी चतुराई का इस्तेमाल करें तो भारत में मौकों की कमी नहीं है और आपको एक बढ़िया वेतन वाली नौकरी मिलने की संभावना रहती है.
लेकिन अगर आप महिला हैं तो इन हालात में भी ये ज़रूरी है कि 20 की उम्र पार करने के कुछ साल के अंदर आपकी शादी हो जानी चाहिए.

भारत में इस आयु वर्ग की हर अविवाहित महिला को इस तरह के सवालों और बातचीत का सामना लगभग हर वक़्त करना पड़ता है.अगर 30 साल के क़रीब पहुंचते-पहुंचते भी आपकी शादी नहीं हुई है, तो लोग आपसे सहानुभूति जताते हैं, सवाल करते हैं, आपसे पूछा जाता है कि क्या आपको कोई मिला नहीं और आपको एक नाक़ामयाब इंसान समझा जाता है.
मैं एक शहरी मध्यम वर्ग परिवार से हूं. मेरा बचपन वडोदरा में बीता, कॉलेज की पढ़ाई वडोदरा और दिल्ली में हुई और अब मुंबई में एक बड़ी कंपनी में डिजीटल कम्युनिकेशन विभाग की प्रमुख हूं.
मेरी ज़िंदगी उन बहुत सी युवतियों की तरह है जो काम के लिए घर से दूर रहती हैं. अकेले रहना एक ग़ज़ब का अनुभव है.

शादी का दबाव

मैं आत्मनिर्भर हूं और मेरी जीवनशैली ऐसी है जिसका मैं हमेशा सपना देखती थी. भारतीय महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और आगे बढ़ने के मौका मिल रहा है. हमें हर क़दम पर लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है लेकिन हम फिर भी रास्ता ढूंढ लेती हैं और आगे बढ़ जाती हैं.
"अगर 30 साल के करीब पहुंचते-पहुंचते भी आपकी शादी नहीं हुई है, तो लोग आपसे सहानुभूति जताते हैं, सवाल करते हैं, आपसे पूछा जाता है कि क्या आपको कोई मिला नहीं और आपको एक नाक़ामयाब इंसान समझा जाता है."
सुरुचि शर्मा
लेकिन फिर भी भारत में लड़कियों पर शादी दबाव हमेशा रहता है. हमसे हमेशा पूछा जाता कि हम कब शादी करेंगे. भारत में एक लड़की की पहचान और व्यक्तित्व शादी के इर्द-गिर्द घूमता है और बचपन से ही हमें समझाया जाता है कि बड़े होकर हमें शादी करनी होगी और दूसरे परिवार में बहू बन कर जाना होगा.
हम जो भी सीखते हैं, वो भविष्य में एक पत्नी और बहू की भूमिका को ध्यान में रखकर सिखाया जाता है. हमें खाना बनाना, घर के काम करना, अच्छा बर्ताव करना और सही छवि बनाना सिखाया जाता है.
अगर आप शादी की किसी वेबसाइट पर नज़र डालें तो उपयुक्त वधू के लिए 'फैमिली-ओरिएंटेड', 'घरेलू' और 'बहुत ज़्यादा नौकरी या करियर में दिलचस्पी नहीं लेने वाली' जैसे गुण पाएंगे. हर कोई ऐसी पत्नी चाहता है जिसकी करियर से पहले गृहस्थी में दिलचस्पी हो.
किसी भी पुरुष की ज़िंदगी में आदर्श महिला बनने के लिए ज़रूरी है कि उसे अच्छी शिक्षा मिली हो, वह देखने में आकर्षक हो, उसका एक बढ़िया करियर हो और इसके बावजूद वह इस सबको ठंडे बस्ते में डालने के लिए भी तैयार हो.
हिंदू विवाह
भारत में लड़कियों पर शादी दबाव हमेशा रहता है. एक लड़की की पहचान और व्यक्तित्व शादी के इर्द-गिर्द घूमता है.

सही साथी का इंतज़ार

मैंने शादी इसलिए नहीं की क्योंकि मुझे अब तक उन्हें अपने लिए सही साथी नहीं मिला है. सुनने में शायद ऐसा लगे कि मैं शादी के ख़िलाफ़ हूं लेकिन ऐसा नहीं है.
भारतीय मान्यताओं के मुताबिक तो अब तक मेरी शादी हो जानी चाहिए थी और इस मामले में अब देर हो गई है. शादी के लिए योग्य महिलाओं की सूची में मैं शायद काफ़ी नीचे हूं. लेकिन मैं फिर भी 'सिर्फ़ घर बसाने' के लिए कोई समझौता नहीं करना चाहतीं और किसी से भी शादी नहीं करना चाहती.
"मैंने शादी इसलिए नहीं की क्योंकि मुझे अब तक उन्हें अपने लिए सही साथी नहीं मिला है. लेकिन मैं फिर भी ''सिर्फ़ घर बसाने'' के लिए किसी से भी शादी नहीं करना चाहती."
सुरुचि शर्मा
मेरे लिए कौन सा व्यक्ति सही या उपयुक्त है, इसका फ़ैसला दूसरों को नहीं बल्कि मुझे करना है.
भारत में आज भी एक महिला के लिए अविवाहित होना एक धब्बा है. अगर कोई महिला अपनी मर्ज़ी से शादी नहीं करती, तो ये मान लिया जाता है कि वह इज़्ज़तदार नहीं है.

मुश्किलें

सुरुचि बताती हैं कि कई बार उन्होंने किसी बढ़िया इलाक़े में किराए पर मकान लेने की कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
अकेली, कामकाजी महिला को लोग मकान किराए पर नहीं देना चाहते. उन्हें डर होता है कि मुझ जैसी महिला का बर्ताव अनैतिक होगा, मेरे घर में पार्टियां होंगी, रात भर पुरुष रहेंगे और मैं आस-पास के परिवारों पर बुरा असर डालूंगी. कोई ये सोच भी नहीं सकता कि मैं एक सामान्य इंसान हो सकती हूं जो एक सामान्य जीवन बिता रही है.
मकान मालिक अकेली महिला किराएदारों को निकालने का मौका हमेशा तलाशते रहते हैं. थोड़ी सी भी कमी या भूल होने पर उन्हें मकान खाली करने के लिए कहा जाता है. अकेली महिला के लिए हर जगह क़ायदे-क़ानून हैं और हम सामान्य जीवन नहीं बिता सकतीं.
दूसरे शब्दों में, ये मान लिया जाता है कि अपने परिवार से दूर, एक स्वतंत्र जीवन बिता रहीं अकेली महिला चरित्रहीन होगी.
जितना ज़्यादा समय मैं इस तरह की ज़िंदगी बिताउंगी, उतना ही एक प्रतिष्ठित परिवार में मेरी शादी होनी की संभावना कम होगी. कई बार मैं सोचती हूं कि अपने माता-पिता को लोगों की बातें सुनने से बचाने के लिए क्या मैं समझौता कर लूं और किसी ठीक-ठाक इंसान से शादी कर लूं.
मैं ख़ुशकिस्मत हूं क्योंकि मेरे माता-पिता मेरा पूरा साथ देते हैं.
सुरुचि शर्मा का परिवार
सुरुचि शर्मा ख़ुद को ख़ुशकिस्मत मानती हैं कि उनका परिवार उनका पूरा साथ दे रहा है.

परिवार का सहयोग

जब मैं सही इंसान के लिए इंतज़ार करने की बात करती हूं तो मेरे माता-पिता मेरा साथ देते हैं. लेकिन उन पर भी रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों का बहुत ज़्यादा दबाव है. उनसे हर रोज़ पूछा जाता है, 'सुरुचि कब शादी कर रही है?' और इस तरह के सवालों से वे परेशान हो जाते हैं.
"जब तक मैं इस समाज का हिस्सा हूं, तब तक मुझ पर शादी करने का दबाव बढ़ता रहेगा. सच कहूं तो अगर मैं अगले एक-दो साल में शादी नहीं करती, तो मैंने विदेश जाने के बारे में भी सोचा है."
सुरुचि शर्मा
वे सोचने लगते हैं कि अपनी बेटी को ख़ुद फ़ैसले करने की छूट देकर वे कहीं कुछ ग़लत तो नहीं कर रहे. उन्हें नहीं लगता कि अगर मैंने शादी नहीं की तो भारतीय समाज मुझे ख़ुशहाल ज़िंदगी बिताने देगा.
इन दबावों से जूझने के लिए मैं अपनी मां-बाप की शुक्रगुज़ार हूं. मुझे अपने बारे में इतनी चिंता नहीं है लेकिन मैं हमेशा सोचती हूं कि अपने मां-बाप के लिए कैसे हालात कैसे आसान बना सकती हूं.
जब तक मैं इस समाज का हिस्सा हूं, तब तक मुझ पर शादी करने का दबाव बढ़ता रहेगा. सच कहूं तो अगर मैं अगले एक-दो साल में शादी नहीं करती, तो मैंने विदेश जाने के बारे में भी सोचा है.
समाज की ताक-झांक और दखलअंदाज़ी से बचने और एक शांत ज़़िंदगी बिताने का एकमात्र तरीक़ा भारत से चले जाना ही है. अगर मैं किसी दूसरे देश में रहूंगी तो लोग मुझसे मेरी शादी की योजना के बारे में नहीं पूछेंगे. मुझे लगता है कि विदेश में शादी करने का दबाव इतना नहीं होता.

28 साल की उम्र में अविवाहित होना आसान नहीं है. मैं इस दबाव को 24 घंटे सहती हूं. मैंने इसके साथ रहने का फ़ैसला किया है. sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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अब लैब में भी उगाए जा सकेंगे कान और नाक

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अब लैब में भी उगाए जा सकेंगे कान और नाक

लंदन के ग्रेट अरमंड स्ट्रीट अस्पताल के डॉक्टरों ने इंसान के शरीर की वसा (फैट) से स्टेम सेल निकालकर उससे चेहरा विकसित करने की योजना बनाई है। डॉक्टरों की एक टीम ने प्रयोगशाला में कार्टिलेज यानी नरम हड्डी विकसित कर ली है। माना जा रहा है कि इसका उपयोग कान और नाक बनाने में किया जा सकता है। 
 
नैनोमेडिसिन नाम की विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में डॉक्टरों ने कहा है कि यह तकनीक इलाज के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में अभी और काम करने की जरूरत है। डॉक्टर इसके जरिए माइक्रोटिया जैसी समस्या का इलाज करना चाहते हैं, जिसमें इंसान के कान का बाहरी हिस्सा ठीक से विकसित नहीं हो पाता है। 
 
अभी माइक्रोटिया के इलाज के लिए बच्चों की पसलियों से कार्टिलेज लेकर डॉक्टर कोमलता से उससे कान बनाते हैं और उसे बच्चे में प्रत्यारोपित करते हैं। इसके लिए कई तरह के ऑपरेशन की जरूरत होती है, जो सीने पर घाव के स्थायी निशान छोड़ जाते हैं। वहीं पसलियों से निकाले गए कार्टिलेज की कभी भरपाई भी नहीं हो पाती है। 
 
इस नई तकनीक का प्रयोग नाक जैसे अंगों के लिए टिश्यू तैयार करने के लिए कार्टिलेज बनाने में किया जा सकता है, जो कैंसर के ऑपरेशन के दौरान क्षतिग्रस्त हो सकती है। डॉक्टरों ने कहा है कि वो इसी तरह की शुरुआती सामग्री की मदद से हड्डी भी बना सकते हैं। 
 
पैट्रिजिया फेरेटी कहते हैं कि ज़ाहिर है कि हम इसकी शुरुआत में हैं। अगला कदम सामग्री के चयन का होगा और इसे विकसित करेंगे। इस अध्ययन में लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज के प्रोफेसर मार्टिन बिरचाल भी प्रयोगशाला में विकसित की गई श्वासनली के प्रत्यारोपण के लिए हुए ऑपरेशन में शामिल थे। 

अब लैब में भी उगाए जा सकेंगे कान और नाक


ऐसे बनेगी कोशिका 
 
डॉक्टरों का कहना है कि वसा का एक छोटा सा टुकड़ा बच्चे के शरीर से निकाला जा सकता है। इस टुकड़े से स्टेम सेल निकालकर उसे विकसित किया जा सकता है। कान के आकार के एक ढांचे को स्टेम सेल के घोल में रखा जाएगा। इससे कोशिका ठीक उसी प्रकार का आकार लेगी, जैसा ढांचा डाला गया है। 
 
प्रक्रिया में रसायनों का उपयोग स्टेम सेल को कार्टिलेज सेल में विकसित करने में किया जाएगा। ढांचे में कार्टिलेज विकसित करने में सफलता तो मिली, लेकिन इसे मरीज में प्रत्यारोपित करने पर वह कितना कारगर होगा, इस पर काम कर रहे हैं। 
 
इस तकनीक से 15 साल के सैमुअल क्लॉम्पस जैसे रोगियों को फायदा मिल सकता है, जिनका कान सुधारने के लिए ऑपरेशन करना पड़ा है। उनकी मां सू ने कहा कि उनका परिवार इस तकनीक का स्वागत करता है। 
 
(तस्वीर में- ऑपरेशन से पहले सैमुअल)

अब लैब में भी उगाए जा सकेंगे कान और नाक

डॉक्टरों की नई योजना पर प्रतिक्रिया ? 
 
''यह वास्तव में रोमांचक है कि हमारे पास इस तरह की कोशिकाएं हैं जिससे ट्यूमर होने की संभावना न हो, जिन्हें उसी मरीज में डाला जा सकता है, इसलिए हम वह काम कर सकते हैं, जो करना चाहते हैं।''
 
डॉक्टर पार्तिजिया फेरिटि, शोधकर्ता 
 
''बच्चे के कान को आकार देने के लिए इसे त्वचा के नीचे प्रत्यारोपित किया जा सकता है। अगर आपके पास कुछ है, जो वास्तव में पुनरोत्पादक है, तो वह परिवर्तनकारी होगा। तकनीक को अपनी अंतिम अवस्था में पहुंचने के लिए और सुरक्षा परीक्षणों की जरूरत होगी।'' sabhar : bhaskar.com


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शुक्रवार, 7 मार्च 2014

एलियन के रहस्‍य से अब उठेगा पर्दा!

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एलियंस

इंसान का पाला तमाम रहस्यों से पड़ता है, लेकिन एलियन एक ऐसा रहस्य है, जिसकी गुत्थी सुलझाने के लिए इंसान पिछले 64 सालों से माथापच्ची कर रहा है. फिर भी उड़नतश्तरी से आने वाला वो मेहमान कभी हकीकत लगता है तो कभी हौवा. इस हौवे को तोड़ने के लिए अमेरिका के वैज्ञानिकों और खगोलशास्त्रियों ने सबसे बड़ी खोज शुरू कर दी है.रूस के एक एयर ट्राफिक कंट्रोलर ने दावा किया है कि उसने एलियन को देखा है. उसने रडार की स्क्रीन पर तेजी से घूमता हुआ यूएफओ देखा और उससे संपर्क साधने की कोशिश की. उड़नतश्तरी से आने वाले मेहमानों की तमाम कहानियों से लोग वाकिफ हो चुके हैं. कैसे एलियन चुपके से इस धरती पर आते हैं और कैसे वो कुछ जगहों पर अपनी निशानी छोड़ जाते हैं. दुनिया का कोई ऐसा मुल्क नहीं जहां एलियन्स के वजूद को लेकर चर्चा गर्म नहीं है. नासा के कंट्रोल रूम से लेकर जापान की संसद तक औऱ इंगलैंड के खुफिया विभाग से लेकर रोमानिया की सरकार तक. हर तरफ दूसरे ग्रहों से आने वाले प्राणियों की हकीकत को लेकर उठ रहे हैं सवाल. क्या सचमुच पृथ्वी से परे भी है जिंदगी की सुगबुगाहट? क्या सचमुच वो छिप-छिप कर आते हैं हमारी धरती पर, हमारी टोह लेने ? क्या वाकई विज्ञान और तकनीक के मामले में हमसे काफी आगे हैं? जाने ऐसे कितने सवाल हैं जो एलिएन्स का नाम सुनते ही एकबारगी आपके जेहन में उठ खड़ा होते हैं? और जिसका कोई ठोस जवाब अबतक किसी के पास नहीं है. दुनिया में उडनतस्तरियों और दूसरे ग्रहों के लोगों को देखे जाने की बातें कई बार सामने आ चुकी है.  कई बार लोगों ने इसके सबूत भी पेश किए. एलियंस कभी तस्वीरों में दिखे तो कभी एलियन का चेहरा वीडियो में भी दिखा. वैसे इस बात से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है कि यूएफओ जैसी चीज़ कोई है ही नहीं.
एक रूसी अखबार ने अपने देश के एक चैनल पर दिखाई खबर के हवाले से छापा है कि अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री जब चाँद पर पहुँचे थे तो उन्हें वहाँ एलियन दिखाई दिए थे, जिन्होंने अमेरिकियों को वहाँ से भाग जाने की चेतावनी दी थी. चैनल ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दावा किया गया है कि चंद्रमा पर एलियन के कदमों के निशान हैं.

1969 से लेकर 1972 तक अमेरिका के छः अपोलो मिशन चाँद पर गए थे. रूसी अखबार प्रवादा ने शक जताया है कि चाँद पर गए सभी मिशन के दौरान वैज्ञानिकों का वास्ता एलियन से पड़ा था और नासा इस सच को लगातार छिपाता रहा है. वैसे चाँद पर एलियन होने और नासा की तरफ से इसे छुपाए जाने की खबरें पहले उड़ती रही हैं.

एलियन की मौजूदगी पर यकीन करने वालों ने इसके पक्ष में इंटरनेट पर अपनी तरफ से तमाम सबूत भी रखे हैं, लेकिन स्पूतनिक की 50वीं सालगिरह मना रहे रूस के सबसे चर्चित अखबार प्रावदा ने इसे पहली बार प्रकाशित किया है. चाँद पर अमेरिका ने 1969 से 1972 तक 12 अंतरिक्ष यात्री भेजे जबकि रूस अभी तक एक भी अंतरिक्ष यात्री चाँद पर नहीं भेज पाया है. वैसे 1972 के बाद से चाँद पर मानव के कदम नहीं प़ड़े हैं.

आरटीआर चैनल ने एलियन और यूएफओ जैसे मामलों के दो विशेषज्ञों को इस बारे में खुलासा करते दिखाया है. नासा का कहना है कि अपोलो मिशन से जु़ड़े कई दस्तावेज, तस्वीरें और फुटेज खो गई हैं जबकि चैनल ने कहा कि असलियत कुछ और है. दस्तावेज खोने की बात सीआईए का महज बहाना है. इसके मुताबिक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने सेंटर को जो मैसेज भेजे थे उनमें यूएफओ देखे जाने और चाँद पर कुछ उजड़ी हुई बस्तियाँ नजर आने की बात कही थी.


... http://aajtak.intoday.in/



तो क्या क्यूरियोसिटी ने मंगल पर देखा एलियन!


नासा के क्यूरियोसिटी रोवर को मंगल के आकाश में एक अजीब सी सफेद रोशनी नाचती हुई दिखी है। इसके अलावा क्यूरियोसिटी द्वारा भेजी गई तस्वीरों में आकाश में दिखने वाले चार धब्बे भी दिखाई पड़े हैं।यूएफओ को पहचानने वाले लोगों का दावा है कि ये धब्बे दरअसल एलियन्स (दूसरे ग्रह के वासी) के अंतरिक्षयान हैं, जो अंतरिक्ष में मानव के कदमों पर नजर रख रहे हैं।
   
नासा के क्यूरियोसिटी द्वारा मंगल की सतह से भेजी गई ये तस्वीरें फिलहाल एक पहेली बनी हुई हैं। हालांकि नासा और फोटोग्राफी के विशेषज्ञों का कहना है कि यह और कुछ नहीं कैमरे के लेंस पर लगे कुछ दाग ही हैं। 
   
डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, नासा ने तो अब तक इन संदिग्ध दृश्यों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। क्यूरियोसिटी द्वारा भेजी गई तस्वीरों में इन संदिग्ध धब्बों की पहचान यूट्यूब के यूजर स्टीफन हैनर्ड ने की।
हैनर्ड एलियन डिस्कलोजर यूके नामक समूह के सदस्य हैं। नासा की वेबसाइट पर ये तस्वीरें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। हैनर्ड ने इस रोशनी का रहस्य सुलझाने के लिए तस्वीरों पर कई फिल्टरों का इस्तेमाल किया। 
लियन और उनकी कहानियां पूरी दुनिया में दशकों से कही और सुनी जा रही हैं। कोई उड़ान तश्तरी देखता है तो किसी चित्र में एलियन जैसी आकृति दिखने का दावा किया जाता है। हालांकि अब तक कोई दावा या व्यक्ति दूसरी दुनिया के इन निवासियों के बारे में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया है। 


रूस में मिला एलियन का शव

एक ऐसा सबूत जो पूरी दुनिया को ये मानने पर मजबूर कर दे कि वास्तविकता में एलियन हैं और कहां हैं। हालांकि बुधवार को कुछ ऐसा दावा किया गया जिससे एलियन के होने मुहर लगती हुई दिख रही है।

एक रूसी महिला मार्ता येगोरोवनेम के फ्रिज से अधिकारियों को एलियन का शव मिला है। मार्ता ने अधिकारियों को बताया है कि वह पिछले दो साल से इस शव को फ्रिज में रखे हुई थी। 

एलियन का शव
ND
मार्ता के अनुसार यह विचित्र शव उसे पश्चिमी रूस के पेत्रोजावोदस्क शहर में मिला था। महिला ने इसके पांच चित्र खींचे हैं। इस मृत एलियन की लम्बाई दो फीट है। ऐसा माना जा रहा है कि 2009 में देखे गए यूएफओ से ये उतरा था। इसका सिर हॉलीवुड फिल्मों में दिखाए गए एलियन की तरह है। इसकी आंखें बिल्कुल बल्ब जैसी हैं। इस एलियन को बिल्कुल पतली लकड़ी जैसा एक हाथ भी है। 

पिछले कुछ महीनों में रूस में एलियन देखे या पाए जाने का यह तीसरा दावा है। मार्ता को यह एलियन अपने समर हाउस के पास 2009 में मिला था।

मार्ता ने बताया कि उन्हें एक जलती हुई चीज दिखाई दी। वह उसके पास गई और धातु की उस गर्म चीज को हटाया तो उसके नीच ये एलियन मिला। इसका शव किसी मछली जैसा है। कुछ दिनों पहले साइबेरिया के सुदूर इर्कटस्क क्षेत्र में उतरे एक यूएफओ की तस्वीर जारी की गई थी। इसमें साफ दिख रहा था कि चमकदार यूएफओ में से पांच लोग निकले। इनमें से चार साथ थे और एक अलग खड़ा था। 

मिस मार्ता ने इसे वहां से उठा लिया और फ्रिज में स्टोर करके रख दिया। मार्ता ने डेली मेल को बताया कि कुछ दिनों पहले दो लोग आए उन्होंने कहा कि यह चीज रूस विज्ञान अकादमी के कारेलियन रिसर्च सेंटर की है और उसे ले गए। पैरानॉर्मल गतिवधियों के विशेषज्ञ माइकल कोहेन ने कहा कि यह असली एलियन हो सकता है। 

उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे रूस एलियन की गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई घटनाएं घट चुकी हैं। हो सकता है कि सैन्य और नागरिक एजेंसियों ने भी इन गतिविधियों को ट्रैक किया है।
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जानिए ओशो की फिलास्फी, जो ले जाती है "संभोग से समाधि की ओर!"

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भोपाल। ओशो यानी दुनिया वालों को सेक्स से जुड़ी भ्रांतियों से उबारने वाले एक संत! ओशो एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु, जिन्होंने जीवन को आनंद से जीने के गुर सिखाए!

11 दिसंबर 1931 में मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के कुचवाड़ा गांव के एक साधारण से कपड़ा व्यापारी के घर में जन्में एक बालक की चेतना ने उसे लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया। अपने 11 भाई-बहनों में से ओशो से सबसे बड़े थे। उनको लोग कई नामों से जानते है बचपन में उनका नाम चंद्रमोहन जैन फिर रजनीश जैन, आचार्य श्री और गुरु ओशो शामिल है।

दुनिया को मेडिटेशन, योग, सेक्स, जीवन की सार्थकता और जीवन का रहस्य समझाने वाले ओशो का निधन 19 जनवरी 1990 को (58 वर्ष) पुणे महाराष्ट्र में हुआ था।

साहित्य से मिली लोकप्रियता : ओशो ने स्कूली शिक्षा के बाद जबलपुर से बीए फिलोस्पी एवं रायपुर से एमए किया। बीए ओशो साहित्य की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि ओशो की आत्मकथा नामक पुस्तक के पहले संस्करण की दस हजार प्रतियां इटली में केवल एक महीने में ही बिक गई। कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में ओशो की किताबें आज भी काफी प्रचलित है। इसी तरह स्पेनिश भाषा में ओशो की पुस्तकों की सालाना बिक्री ढाई लाख से भी अधिक है।

कई भाषाओं में है किताबें: ओशो की पुस्तक जीवन की अभिनव अंतदृष्टि का पेपर बैंक संस्करण सारी दुनिया में बेस्ट सेलर साबित हुआ है। वियतनामी, थाई और इंडोनेशियाई समेत 18 भाषाओं में इसकी दस लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। भारतीय भाषाओं में हिन्दी के साथ ही तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मराठी, गुजराती, गुरुमुखी, बंगाली, सिंधी तथा उर्दू में ओशो की सैकड़ों पुस्तकें अनुवादित हो चुकी है। हिन्दी और अंग्रेजी में एक साल में ओशो की करीब 50 हजार पुस्तकें बिकती हैं।

उनकी चर्चित किताबें : ओशो ने हर विषय पर खुल कर अपने विचार लोगों के सामने रखें, जिन्हें लोगों ने माना भी और नकारा भी। फिर चाहे विषय राजनीति, धर्म, शांति, सेक्स, ध्यान, योग, जीवन और मृत्यु का ही क्यूं न हो। यूं तो ओशो के हर साहित्य को लोगों ने खूब सराहा, जो विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित होते आ रहे हैं। लेकिन इनमें भी कुछ खास है जिनमें अंनत से अंत तक, मैं मृत्यू सीखाता हूं, धर्म और राजनीति, ओशो युद्ध और शांति, ध्यान की कला, संभोग से समाधि की ओर जैसे कई साहित्य शामिल है।

विवादों से भी रहा है गहरा संबंध : आधुनिक संत के रूप में जाने जाने वाले ओशो को कम समय में ही काफी सफलता मिली। देखते ही देखते समाज में इनके अनुयाईयों के साथ ही आलोचकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी।

अमेरिका जाना प्रतिबंधित: लोगों के सामने खुलकर अपने विचार रखने के लिए कई बार इन्हें लोंगों की आलोचनाएं भी सहनी पड़ी। राजनीति, धर्म और सेक्स पर दिए उपद्देश्यों के लिए अक्सर विवादों में रहे ओशो का अमेरिका में भी काफी विरोध हुआ और उनका अमेरिका जाना प्रतिबंधित हो गया।

इनके जीवन पर बनी हैं फिल्में : ओशो की जीवनशैली से प्रभावित होकर कई अमेरिकन, ब्रिटिश, जर्मनी के प्रोड्यूसर एवं डॉयरेक्टर्स ने फिल्में भी बनाई है। कुछ डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी इनके जीवन और उपद्देश्यों पर बनाई गई। जिन्हें काफी सफलता मिली। कीताबों के साथ ही इनके उपद्देश्य के कई ऑडियों एवं विडियों भी बनाए गए। जो हर वर्ग के लोगों में प्रसिध्द रहे हैं और आज भी इनकी डिमांड लोगों में बरकरार है।





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एक मुल्क ऐसा, जहां हर औरत के पास है एक पुरुष गुलाम

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यहां है लेडीज रूल का दबदबा

यहां है लेडीज रूल का दबदबा


महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें पुरुषों के बराबर ला खड़ा करने से जुडे कई अभियान चलते रहते हैं, लेकिन इसी दुनिया का एक मुल्क ऐसा है, जहां सिर्फ महिलाओं की चलती है।

लेडीज रूल का जोर कुछ इस कदर है कि पुरुषों को उनका हर हुक्म मानना होता है। जानकर हैरानी हो सकती है, लेकिन इस खबर में पूरा दम है।

आज जब महिलाओं के खिलाफ सारी दुनिया में अपराध बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में आपको जानकर आश्चर्य होगा कि एक ऐसा देश है, जहां महिलाएं सबसे ऊपर हैं और पुरुष उनके लिए गुलाम से बढ़कर कुछ भी नहीं।

पुरुषों की स्थिति जानवरों जैसी?

अदर वर्ल्ड किंगडम। जी हां, यही नाम है उस छोटे से देश का जहां महिलाएं राज करती हैं और पुरुष गुलामी। यहां रानी पैट्रिसिया-1 का एकमुश्त राज है।

चेक रिपब्लिक से 1996 में अलग होकर बने इस देश को अन्य राष्ट्रों ने देश का दर्जा नहीं दिया है, लेकिन इनकी खुद की करेंसी, पासपोर्ट, झंडा और पुलिस दल है।

इस देश में बाहर से आने वाले पुरुषों को रानी के लिए सौफा या कुर्सी बनना पड़ता है। इतना ही नहीं, उन्हें मारा-पीटा भी जाता है। पुरुषों को यहां पालतू जानवर के समान समझा जाता है।

नागरिकता चाहिए, तो पुरुष गुलाम चाहिए

नागरिकता चाहिए, तो पुरुष गुलाम चाहिए

यदि कोई महिला यहां की नागरिकता प्राप्त करना चाहती है, तो ये जरूरी है कि उसके पास एक पुरुष गुलाम हो और उसे कम से कम चार दिन रानी के म‌हल में गुजारने पड़ेंगे।

इसीलिए यहां लगभग सभी महिलाओं के पास एक पुरुष गुलाम के तौर पर है। इन गुलामों को कोई भी अधिकार नहीं है। इनके साथ वे जब चाहें, जैसा चाहें, वैसा व्यवहार करने के लिए स्वतंत्र हैं।

इस देश का लक्ष्य ही यही है कि रानी के अधिकार में ज्यादा से ज्यादा पुरुषों को गुलाम बनाया जाए। जिसके लिए हर संभव प्रयास किया जाता है।

सिर्फ चंद पुरुषों को है कुछ सीमित अधिकार

देश में सर्वोच्च पद पर रानी काबिज है। वह कोई भी निर्णय लेने के लिए आजाद है। इसके बाद विशिष्ट महिला व महिला नागरिक होती हैं। जिनके पास रानी के बनाए गए कानून के अंतर्गत सभी अधिकार होते हैं।

दूसरे स्तर पर वे पुरुष होते हैं, जिन्हें रानी चुनती है। ये रानी को टैक्स चुकाते हैं। इन्हें घूमने, काम करने, शादी करने व प्रॉपर्टी खरीदने जैसे अधिकार रानी से प्राप्त होते हैं। सबसे निचले स्तर पर होते हैं, गुलाम वर्ग।

इन गुलाम पुरुषों को सभी अधिकारों से वंचित रखा जाता है और इनकी मालकिन इन्हें जैसा चाहें, वैसे उपयोग करती हैं। SABHAR :http://www.amarujala.com/


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