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सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

मिल गया असली भूत माही गिल को

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know about mahie gill's spooky experience


अभिनेत्री माही गिल को असली का भूत मिल गया। यह मामला एक फिल्‍म की शूटिंग का है। 

कई बार अच्छे कलाकार फिल्‍म के पात्र में इतनी गहराई से उतर जाते हैं कि उन्हें हर वक्त उस पात्र में ही खोए रहने का भ्रम बना रहता है। 

लगता है कि कुछ ऐसा ही अभिनेत्री माही गिल के साथ हुआ। माही गिल इन दिनों एक भुतही फिल्‍म की शूटिंग कर रही हैं। 

'गैंग्स ऑफ घोस्ट' नाम वाली इस फिल्‍म की इन दिनों आऊटडोर शूटिंग हो रही है। फिल्‍म का निर्देशन सतीश कौशिक कर रहे हैं। 

हुआ यूं कि एक रात माही गिल को एहसास हुआ कि उन्हें प्रेत की कोई छाया दिखाई दी। फिर क्या वह जोर-जोर से चीख उठीं। 

रात के सन्नाटे में माही की इस चीख से हड़कंप मच गया। लोग वहां पहुंचे तो पता चला कि माही को वहां कोई भूत दिख गया। 

इसके पहले कुछ ऐसा ही किस्सा बिपाशा बसु के साथ ऊटी में हो चुका है। वह उस समय 'आत्मा' फिल्म की शूटिंग कर रहीं ‌थीं। sabhar:http://www.amarujala.com/

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सत्यवादी को मृत्यु भी नहीं डराती

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Nation depend on truth

जाबालि मुनि ने भगवान श्रीराम से एक बार प्रश्न किया, राष्ट्र किस तत्व पर आधारित है?

प्रभु श्रीराम ने कहा, तस्मांत सत्यात्मकं राज्यं सत्ये लोकः प्रतिष्ठितः। अर्थात राष्ट्र सत्य पर आश्रित रहता है। सत्य में ही संसार प्रतिष्ठित है। हे मुनि, जिस राष्ट्र की नींव सत्य और संयम पर आश्रित है, उसका शासक व प्रजा हमेशा सुखी रहते हैं। असत्य-कपट का सहारा लेने वाले कभी संतुष्ट व सुखी नहीं रह सकते।

भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को सत्य का स्वरूप समझाते हुए कहा था, सत्य सनातन धर्म है, सत्य सनातन ब्रह्म है। चारों वेदों का सार रहस्य सत्य है।

ऋग्वेद में कहा गया है कि सत्कर्मशील व्यक्ति को सत्य की नौका पार लगाती है। दुष्कर्मी, संयमहीन व छल-कपट करने वाले व्यक्ति की नौका मझधार में डूबकर उसके जीवन को निरर्थक कर देती है।

टॉलस्टाय ने लिखा है, जिसने सत्य का संकल्प ले लिया और सदाचार का मार्ग अपना लिया, वही हर प्रकार के भय, कष्टों से मुक्त रहकर ईश्वर व मनुष्यों का प्रिय बन सकता है। सत्यवादी को मृत्यु भी नहीं डराती।

महर्षि चरक ने आचार रसायन में कहा है, सत्यवादी, क्रोध रहित, मन, कर्म व वचन से अहिंसक तथा विनय के पालन से मानव शारीरिक, मानसिक व आत्मिक रोगों से मुक्त रहता है। उन्होंने इसे सदाचार रसायन कहा है। सत्य-सदाचार जैसे तत्वों को त्यागने के कारण ही मानव अनेक रोगों का शिकार बनता है sabhar ; http://www.amarujala.com/

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श्रद्धा से मनुष्य को प्रेम, रस और आनंद मिलता है

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with trust worship is fruitful

सभी धर्मशास्त्रों में श्रद्धा का महत्व प्रतिपादित किया गया है। कहा गया है कि श्रद्धा-निष्ठा के साथ किया गया प्रत्येक सत्कर्म फलदायक होता है। इसलिए कहा गया है कि श्रद्धां देवा यजमाना वायुगोपा उपासते। श्रद्धां हृदस्य याकूत्या श्रद्धया विन्दते वसु। अर्थात देवता, संतजन, विद्वान, यजमान, दानशील, बलिदानी सब श्रद्धा से कर्म की उपासना करते हैं, इसलिए सुरक्षित रहते हैं।

श्रद्धा को सुमतिदायिनी, कामायनी, कात्यायनी बताकर उसकी उपासना की गई है। वैदिक ऋचा में कहा गया है, हे परमप्रिये श्रद्धे, तेरी कृपा से मैं ऐसा व्यवहार करूं, जिससे संसार का उपकार हो सके। हे सुमतिदायिनी श्रद्धे, मैं जो कुछ आहुति, दान व बलिदान करूं, उसे उपयोगी और सर्वहितकारिणी बना।

हे कामायनी श्रद्धे, मेरी अनासक्त कामना है कि मेरे कृत्यों से दान और बलिदान की प्रेरणा उदित होती रहे। हृदय से जब श्रद्धा की उपासना होती है, तब अनंत ऐश्वर्य अनायास ही प्राप्त होने लगते हैं।

ऋग्वेद में कहा गया है, श्रद्धया अग्निः समिध्यते। यानी श्रद्धा से ऐसी अग्नि प्रदीप्त होती है, जो मनुष्य को प्रेम, रस, आनंद और अमृत प्रदान कर उसका लोक-परलोक सफल बनाती है। श्रद्धा ही वृद्धजनों, माता-पिता, गुरु के प्रति कर्तव्यपालन करने, मातृभूमि के लिए प्राणोत्सर्ग करने, समाज व धर्म की सेवा में संलग्न होने की प्रेरणा का स्रोत है। sabhar :http://www.amarujala.com/

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कृष्ण ने ऐसा काम किया कि राधा और गोपियां कृष्ण से दूर-दूर रहने लगी

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krishna kund govardhan radha krishna


भगवान श्री कृष्ण और राधा का प्रेम अनोखा है। दोनों एक दूसरे के हृदय में रहते हैं। लेकिन एक बार श्री कृष्ण ने ऐसा काम किया कि राधा और गोपियां कृष्ण से दूर-दूर रहने लगी। राधा ने कृष्ण से यह भी कहा कि मत छूना मुझे।

इस घटना के बाद कृष्ण ने जो किया उसकी निशानी आज भी गोवर्धन पर्वत की तलहटी में कृष्ण कुंड के रुप में मौजूद है। इस कुंड के निर्माण का कारण राधा कृष्ण यह संवाद माना जाता है जब राधा ने कृष्ण को अपना स्पर्श करने से मना कर दिया था।

इसकी वजह यह थी कि, भगवान श्री कृष्ण ने कंश के भेजे हुए असुर अरिष्टासुर का वध कर दिया था। अरिष्टासुर बैल के रुप में व्रजवासियों को कष्ट देने आया था। बैल की हत्या करने के कारण राधा और गोपियां कृष्ण को गौ का हत्यारा मान रही थी।

कृष्ण ने राधा को खूब समझाने का प्रयास किया कि उसने बैल की नहीं बल्कि असुर का वध किया है। कृष्ण के समझाने के बाद भी जब राधा नहीं मानी तो श्री कृष्ण ने अपनी ऐड़ी जमीन पर पटकी और वहां जल की धारा बहने लगी।

इस जलधारा से एक कुंड बन गया। श्री कृष्ण ने तीर्थों से कहा कि आप सभी यहां आइए। कृष्ण के आदेश से सभी तीर्थ राधा कृष्ण के सामने उपस्थिति हो गए। इसके बाद सभी कुंड में प्रवेश कर गए। श्री कृष्ण ने इस कुंड में स्नान किया और कहा कि इस कुंड में स्नान करने वाले को एक ही स्थान पर सभी तीर्थों में स्नान करने का पुण्य प्राप्त हो जाएगा। sabhar :http://www.amarujala.com/

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कृष्णन आज देश इन्हें हीरो कहता है

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जब कृष्णन है तो कोई भूखे पेट क्यों सोए,कलियुग का 'कृष्ण'...

नई दिल्ली. क्या कोई ऐश्वर्य भरी जिंदगी छोड़ सड़क की धूल छानने की चाहत रखना चाहेगा? क्या कोई अपने सपनों को रौंदना चाहेगा? अधिकांश जवाब 'ना' ही मिलेगा। मगर, ऐसा हुआ है। नारायण कृष्णन। जी हां, आज के समय का बड़ा चेहरा। ये वही शख्सियत हैं, जिन्होंने ऐश्वर्य भरी जिंदगी छोड़कर कांटों भरी राह को गले लगाया है।
 
2002 में हुए एक वाकये ने मदुरई (तमिलनाडु) निवासी कृष्णन की जिंदगी हमेशा के लिए बदल कर रख दी। आज देश इन्हें हीरो कहता है
 
2003 में कृष्णन ने 'अक्षय' नाम से मुनाफा न कमाने वाले ट्रस्ट की शुरुआत की। अब उनके जीवन का एक ही मकसद है, गरीब भूखे पेट न सोए। कृष्णन के मेहमानों की लिस्ट में गरीब, बेसहारा और बेघर लोग शामिल हैं। 34 वर्षीय कृष्णन अब तक मदुरई के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना खिला चुके हैं। वह नि:स्वार्थ भाव से जनसेवा में लगे हुए हैं। पूरे देश को उनपर गर्व है। लेकिन उनकी यही जनसेवा अब मुद्दा बन चुकी है। मुद्दा, गरीबी-अमीरी के बीच के खाई का। मुद्दा, देश में लगातार बढ़ रहे रईसों और उसी अनुपात में बढ़ती गरीबी का। क्योंकि भारत को अरबपतियों का देश भी कहा जाता है। बानगी के तौर पर दुनिया का सबसे महंगा घर भी भारत में ही है।  

जब कृष्णन है तो कोई भूखे पेट क्यों सोए,कलियुग का 'कृष्ण'...

ऐसे बदल गई कृष्णन की जिंदगी
 
कृष्णन एक बेहतरीन शेफ हैं। वह इसके लिए अवार्ड तक जीत चुके हैं। उन्हें स्विट्जरलैंड के फाइव स्टार होटल ने शानदार नौकरी ऑफर की। लेकिन यूरोप जाने से पहले ही एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल कर रख दी। कृष्णन बताते हैं 'मैंने सड़क किनारे एक बूढ़े इंसान को कचरे में खाना ढूंढते देखा। वह भूख से तड़प रहा था। उस इंसान को इतनी जोरों की भूख लगी थी कि उसने कचरा तक खा लिया। यह देख मुझे बेहद तकलीफ हुई। मैं फौरन पास के होटल गया और वहां से इडली खरीद कर लाया। फिर उन्हें खाने को दिया। मैंने आज तक इतनी तेजी से किसी को खाते नहीं देखा। खाते समय उसकी आंखों से आंसू झरने लगे। मगर वह खुशी के आंसू थे। यही मेरे जीवन का निर्णायक मोड़ था।'
 जब कृष्णन है तो कोई भूखे पेट क्यों सोए,कलियुग का 'कृष्ण'...
कृष्णन बेसहारा और निशक्तों के लिये आशियाना भी बनवा रहे हैं ताकि इन लोगों को सड़कों पर न भटकना पड़े। आइए एक नजर डालते हैं उनके रोजमर्रा के खर्चों पर...
 
- 400 लोगों का भोजन (खुद के हाथों        बना शाकाहारी भोजन खिलाते हैं)
- दिन में तीन बार
- अगर भूखा व्यक्ति कमजोर है तो अपने हाथों से उसे खाना खिलाते हैं
- औसतन 200 किमी रोज का आनेजाने का खर्च 
(एक बार के भोजन का औसत व्यय 5000 रुपये, मतलब प्रतिदिन 15,000 रुपये)

जब कृष्णन है तो कोई भूखे पेट क्यों सोए,कलियुग का 'कृष्ण'...


देश में केवल 27 करोड़ गरीब: सरकार
 
देश में गरीबी और अमीरी के बीच खाई लगातार बढ़ती जा रही है। मगर सरकार का ध्यान सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी पर है। हाल ही में गुजरात सरकार द्वारा जारी गरीबी के आंकड़ों पर सियासत गरमा गई थी। खूब चला आरोप-प्रत्यारोप का दौर। लेकिन कैसे घटेगी गरीबी इस पर किसी ने चर्चा नहीं की। सरकार ने गरीबों का मखौल उड़ाने के अलावा और कुछ नहीं किया है।गरीबी के आंकड़ों पर नजर डालें तो केंद्र सरकार का कहना है कि देश में गरीबों की संख्या 2004-05 के 40.74 करोड़ लोगों से घटकर 2011-12 में 27 करोड़ ही रह गई है। मतलब, देश में केवल 27 करोड़ लोग ही गरीब हैं। अगर ऐसा है तो सड़कों पर जो बेसहारा और निशक्तजन भटकने को मजबूर हैं उनकी कौन सुध लेगा। ये बड़ा सवाल है। खैर गरीबी को मापने के लिए सरकार के पास कौन सा पैमाना है हम उसकी बात नहीं करेंगे। गरीबी को लेकर जो ताजा आंकड़ा सामने है, वो एनएसएसओ की ओर से कराए गए सर्वे के 68वें दौर में सामने आया है। 

sabhar : bhaskar.com



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रविवार, 9 फ़रवरी 2014

कैमरे के अंदर बैठा हुआ है भूत

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जानी-पहचानी है ये तस्वीर


जानी-पहचानी है ये तस्वीर

इस तस्वीर को देखकर आपको ऐसा नहीं लगा होगा कि आप ये पहली बार देख रहे हैं। आज तक जितनी बार भी भूतों और आत्माओं के साक्ष्य या कैमरे में कैद होने का जिक्र हुआ है, इस तस्वीर को भी उदाहरण के तौर पर लिया गया है।पर क्या आप जानते हैं ‌कि ये तस्वीर कब की है? ये तस्वीर साल 1930 में ली गई थी। लेकिन आश्चर्य ये है कि तस्वीर का भूत आज भी कैमरे में कैद है।
क्या है पूरा मामला?


क्या है पूरा मामला?

इतिहासकार मिशाला हल्मे को उनके ब्वॉयफ्रेंड ने उपहार में एक कैमरा दिया था। ये वो ही कैमरा है जिससे ये 'हैप्पी स्नैप' ली गई थी।
पर आश्चर्य और चौंकाने वाली बात ये है कि इस कैमरे में आज भी इस तस्वीर की निगेटिव है। जिसमे चार तस्वीरें इतिहासकार मिशाला को वो निगेटिव मिल गई है और अब वो इसमें मौजूद लोगों को पहचानने के लिए प्रयासरत हैं।
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एजीएफए बॉक्स कैमरे से ली गई है तस्वीर


एजीएफए बॉक्स कैमरे से ली गई है तस्वीर

तस्वीर तो आपे देख ही रखी होगी। इस तस्वीर में कुछ रिश्तेदारों या फिर दोस्तों को एक स्टेशन के पास खड़ा देखा जा सकता है। 

इसमें पीछे की ओर एक शख्स है, जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि वो भूत है। ये कैमरा मिशाला के ब्वॉयफ्रेंड ने उन्हें दिया है। जिसे उन्होंने एंटीक सामानों की एक दुकान से खरीदा है। 

क्‍या है कैमरे का रहस्य?

क्‍या है कैमरे का रहस्य?

वो बताती हैं कि ये कैमरा जर्मनी में बना हुआ है। जो करीब 1930 और 1940 के दौरान बनाया गया है?

डेली मेल के अनुसार, कैमरे से करीब आठ फोटो की निगेटिव मिली है लेकिन उनमें से चार की ही तस्वीर सही बन पाई है। उन्हीं में से एक तस्वीर ये भी है, जिसके संदर्भ में कहा जाता है कि पीछे खड़ा शख्स एक साया है।
मिशाला फिलहाल तो पूरे मामले की तहकीकात करके ही किसी निर्णय पर पहुंचेंगी और तभी इस तस्वीर वाले भूत के रहस्य का पता चल सकेगा। sabhar :http://www.amarujala.com/



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शिव प्रसन्न जिन पर उनके साथ होती हैं ये 3 बातें

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जिन पर हो जाते हैं शिव प्रसन्न, उनके साथ होती हैं ये 3 बातें

उज्जैन। हिन्दू धर्मशास्त्रों में शिव को गुणातीत कहकर भी पुकारा गया है। यानी शिव अनगिनत गुण व शक्तियों के स्वामी है। इन शक्तियों की महिमा भी अपार है। शिव का ऐसा बेजोड़ चरित्र ही शिव को देवों का देव यानी महादेव बनाता है। शास्त्रों में उजागर शिव के बेजोड़ चरित्र पर सांसारिक और व्यावहारिक नजरिए से गौर करें तो पता चलता है कि शिव के देवताओं में सर्वश्रेष्ठ होने के पीछे कुछ खूबियां खास अहमियत रखती हैं। जानिए, आख़िर शिव की ऐसी ही 3 अहम शक्तियां कौन सी हैं।  
दरअसल, इंसानी जीवन की दिशा व दशा तय करने में दो बातों की अहम भूमिका होती हैं - पहली रचना, उत्पत्ति या सृजन और दूसरी आजीविका। ये दोनों ही लक्ष्य पाने और कायम रखने के लिए यहां बताए जा रहे तीन गुण अहम हैं या यूं कहें कि इनके बिना न सृजन करना, न ही जीवन को चलाना संभव है। शिव चरित्र भी इन तीन बेजोड़ गुणों से संपन्न है। यहीं वजह है कि जिस भी व्यक्ति के जीवन में इन 3 गुणों से यश, धन व सुख नजर आता है, धार्मिक नजरिए से माना गया है कि ऐसा होना शिवजी की प्रसन्नता के ही संकेत हैं।
जिन पर हो जाते हैं शिव प्रसन्न, उनके साथ होती हैं ये 3 बातें
पावनता व वैभव - शुद्धता, पावनता या पवित्रता के अभाव में मानव जन्म हो या किसी वस्तु की रचना दोषपूर्ण हो जाती है। शिव चरित्र व उनका निराकार स्वरूप शिवलिंग भी सृजन का ही प्रतीक होकर जीवन व व्यवहार में पावनता और संयम का संदेश देता है। शिव का संयम और वैराग्य दोनों ही तन-मन की पवित्रता की सीख है। 
यही वजह है कि अचानक दरिद्रता, तंगी, रोग या क्लेशों से घिरे शिव या किसी देव भक्त को इन परेशानियों से छुटकारा मिलने लगे, तो धार्मिक आस्था से इसे उस व्यक्ति के जीवन पर शिव कृपा का ही बड़ा संकेत माना गया है। 

जिन पर हो जाते हैं शिव प्रसन्न, उनके साथ होती हैं ये 3 बातें
ज्ञान - ज्ञान या शिक्षा के अभाव में जीवनयापन संघर्ष और संकट भरा हो जाता है। ज्ञान व बुद्धि के मेलजोल से बेहतर आजीविका यानी जीवन के 4 पुरुषार्थों में एक 'अर्थ' प्राप्ति के रास्ते खुल जाते हैं। भगवान शिव भी जीवन के लिए जरूरी ज्ञान, कलाओं, गुण और शक्तियों के स्वामी होने से जगतगुरु भी पुकारे जाते हैं, जो धर्मशास्त्र, तंत्र-मंत्र और नृत्य के रूप में जगत को मिले। 
कोई भी धर्म व ईश्वर को मानने वाला अगर ज्ञान के जरिए यश व सफलता की बुलंदियों को छूने लगे, तो धार्मिक नजरिए से यह शिव कृपा ही मानी गई है, जिसे कायम रखने के लिए अहंकार से परे रहकर व विवेक के साथ ज्ञान, कला या हुनर को बढ़ाने या तराशने के लिए संकल्पित हो जाना चाहिए। 
जिन पर हो जाते हैं शिव प्रसन्न, उनके साथ होती हैं ये 3 बातें


पुरुषार्थ - जीवन के लक्ष्यों को पाने के लिए संकल्पों के साथ पूरी तरह डूबकर परिश्रम को अपनाना ही पुरुषार्थ का भाव है। इसे धर्म या अध्यात्म क्षेत्र में साधना या तप के रूप में भी जाना जाता है। भगवान शिव भी महायोगी, तपस्वी माने गए हैं।

शिव का योग व तप जीवन में सुख, सफलता व शांति के लिए पुरुषार्थ की अहमियत बताता है। मन व तन के आलस्य से परे श्रम के जरिए जीवन को साधना ही शिव के बेजोड़ तप और योग का संदेश है।
 
यही वजह है कि व्यावहारिक तौर पर जब भी किसी इंसान को नौकरी, कारोबार में या जीवनयापन के लिए किसी भी रूप में की गई भरसक कोशिशों के सुफल मिलते या सफलता हाथ लगती है, तो यह धर्म के नजरिए से शिव कृपा ही मानी जाती है।

इस तरह शिव चरित्र की ये तीन खासियत इंसानी जीवन में गहरी अहमियत रखने से भक्तों के मन में श्रद्धा और आस्था पैदा कर शिव भक्ति और उपासना को सर्वोपरि बनाती है। साथ ही शिव के महादेव स्वरूप को हृदय में बसाए रखती है। sabhar : bhskar.com




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दिन में 60 तक लोगों के साथ सेक्स करने के लिए मजबूर किया जाता था

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सेक्स रैकेट पीड़िता की दर्दनाक दास्तां, एक दिन में 60 लोगों से बनवाते थे संबंध


न्यूयॉर्क। मानव तस्करी और सेक्स रैकेट का शिकार हुई महिला कैरमेन की आपबीती दिल दहला देने वाली है। मैक्सिको की रहने वाली कैरमेन ने आखिरकार कोर्ट में चुप्पी तोड़ी और अपने कैद होने के दौरान की भयानक सच्चाई बयां की। 
 
कैरमेन ने बताया कि उसे 14 साल की उम्र में ही वेश्यावृत्ति के धंधे में उतार दिया गया था। उसने बताया कि न्यूयार्क में उसकी जिंदगी नरक के जैसी थी। उसे कई बार दिन में 60 तक लोगों के साथ सेक्स करने के लिए मजबूर किया जाता था। वहीं सेक्स रैकेट में पकड़ी गई दूसरी पीड़िता ने भी अपनी बात रखी।  
 
कैमरेन ने बताया कि न्यूयॉर्क में बिताई उनकी पांच साल की जिंदगी किसी नरक से कम नहीं थी। तीन भाइयों बेनिटो, एनसटासियो और जोस गेबिनो ने मिलकर उसे बंधक बना रखा था और उससे वेश्यावृत्ति कराते थे। इस मामले में तीनों भाइयों समेत दर्जनों लोगों को वेश्यावृत्ति कराने और यौन शोषण के आरोप में कैद की सजा सुनाई गई है।

कैमरन ने बताया कि बेनिटो नाम का शख्स उससे वेश्यावृत्ति कराता था। जिस दिन से वो न्यूयार्क आई थी और जब तक उसे छुड़ाया नहीं गया, तब तक बेनिटो उससे हफ्ते में सातों दिन काम कराता था। कैमरन ने बताया कि वो उसके लिए एक सौदे के सामान की तरह थी। बेनिटो के साथी और ग्राहक उसके साथ जानवरों की तरह पेश आते थे।  
 
कैमरेन ने कोर्ट में सबूत पेश करते हुए बताया कि बेनिट उससे वेश्यावृत्ति का काम अपने घर में ही कराता था। वेश्यावृत्ति के लिए उसे कनेक्टिकट, न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क से आने वाले मजदूरों के पास भी भेजता था। 
 
दलाल बेनिटो कई बार दिन में 60 लोगों के साथ उसे सेक्स करने पर मजबूर करता था। इतना ही नहीं अगर वो पैसे नहीं कमाकर नहीं दे पाती तो उसे जानवरों की तरह पीटता भी था।  
 
कैमरेन ने बताया कि जब बेनिटो उसे पीटता था तो वो चाहती थी कि उसे तब तक पीटा जाए जब तक वो मर ना जाए। लेकिन बेनिटो उसे जान से नहीं मारता था। उसे अगले दिन फिर वही प्रताड़ना झेलने के लिए छोड़ देता था। 
 
कैरमेन को आखिरकार साल 2010 में कैद से छुड़ाया गया। हालांकि, इसके बाद भी उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे सिटी हॉस्पिटल के सुसाइड वार्ड में रखा गया था। ताकि वो खुदकुशी जैसा कदम ना उठा ले। 
 
कैमरेन ने कहा कि यही एक ऐसा वक्त था, जब वो खुद को सुरक्षित महसूस कर रही थीं। जज के सामने अपनी बात रखते हुए उसने कहा, ''आपके लिए ये जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि कोई भी महिला खुद वेश्यावृत्ति के धंधे में जाने का फैसला कर ऐसी जिंदगी नहीं जीना चाहती। मैं मानव तस्करी का शिकार हूं।''
वहीं, दूसरी पीड़िता ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उस पर एनसटासियो वेश्यावृत्ति के लिए दबाव बनाता था। 
एनसटासियो ने तो उसके पेट पर अपना नाम भी गुदवाया था। वो पीड़िता को अपनी जागीर मानता था। तीसरे भाई जोस गेबिनो पर योजना में शामिल होने का आरोप है। जोस पर शहर में तमाम जगहों पर वेश्यावृत्ति के लिए महिलाओं को छिपाकर रखने का आरोप भी है। 
 
बेनिटो और एनसटासियो को कोर्ट ने 18 साल कैद की सज़ा सुनाई है। जबकि बड़े भाई जोस गेबिनो को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई है। sabhar : bhaskar.com

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शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

2013विज्ञान की दुनिया की तस्वीर

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photo ; gogale

1-जर्मनी के लिपिज में स्थित मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर इवोल्यूशनरी एंथ्रोपॉलॉजी के शोधकर्ताओं ने चार लाख साल पुराने इंसान की जांघ की हड्डियों में डीएनए का पता लगाया. यह हड्डी स्पेन में हड्डियों का गड्ढ़ा के नाम से मशहूर जगह से लाई गई थी. यहां से कम से कम 28 लोगों के अवशेष मिले हैं.

2-वैज्ञानिकों के मुताबिक फ़रवरी में रूस के आसमान में एक बहुत बड़ा क्षुद्रग्रह जलकर नष्ट हो गया. इस क्षुद्रग्रह ने दो बार पूरी दुनिया का चक्कर लगाया. एक हज़ार से अधिक लोग उस समय घायल हो गए जब 17 मीटर लंबा-चौड़ा और दस हज़ार टन भारी टुकड़ा चेल्याविंस्क के ऊपर जल गया.


3-चेल्याविंस्क इलाक़े के चेबराकुल की एक झील से इस क्षुद्रग्रह का एक बड़ा टुकड़ा बरामद किया गया.चेबराकुल की झील से जिस टुकड़े को स्थानीय अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने निकाला था, उसे चेल्याविंस्क के स्थानीय संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया.

4-यूरोप के सैटेलाइट प्लांक सर्वेयर ने आसमान में सबसे 'पुराना प्रकाश' दिखाने वाला एक मानचित्र पेश किया. इसके पैटर्न के आधार पर ब्रह्मांड की उत्पत्ति के 'बिग बैंग' सिद्धांत की पुष्टि हुई.


5-लंदन में क्रॉसरेल के लिए हो रही खुदाई के दौरान अचानक कुछ शव मिले. इनके 14वीं शताब्दी में पूरे यूरोप में महामारी की वजह से मरे लोगों का शव माना जा रहा है. माना जाता था कि लंदन के बाहरी इलाक़े में एक क़ब्रगाह बनाई गई थी लेकिन वह जगह वास्तव में कहाँ है, यह एक रहस्य था.

6-विज्ञान पत्रिका 'साइंस' में प्रकाशित एक अध्ययन से कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आईं. जापान में एक शोधकर्ता ने एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल कर लोगों के सपनों को पढ़ने का दावा किया.कुछ स्वयंसेवक जब स्कैनर में सोते थे तो एक टीम उन पर नज़र रखती थी और बाद में उन्हें सवालों की एक सूची देती थी. इसके बाद शोधकर्ताओं ने वैसी तस्वीरों की कल्पना की, जिन्हें इन लोगों ने सोते समय देखा. उनकी भविष्यवाणी क़रीब 60 फ़ीसदी तक सही थी.


7-बीबीसी न्यूज़ ने मई में पहली बार यह ख़बर दी कि थ्री डी प्रिंटर से तैयार दुनिया की पहली बंदूक से अमरीका में सफलतापूर्वक फ़ायर किया गया है. टेक्सस के ऑस्टिन के फ़ायरिंग रेंज में एक विवादित समूह ने यह फ़ायरिंग की. बाद में अमरीकी सरकार ने इस बंदूक का ब्लूप्रिंट इंटरनेट से हटाने की अपील की.

8-आईबीएम के शोधकर्ताओं ने कॉपर (तांबे) की एक सतह पर एक अणु को लुढ़काकर दुनिया की सबसे छोटी फ़िल्म बनाई.

9-खगोलशास्त्रियों ने किसी ग्रह की परिक्रमा कर रहे उपग्रह के रंग का निर्धारण पहली बार किया. दुनिया इसे एचडी 189733बी के नाम से जानती है. यह गहरे नीले रंग का है, वातावरण में सिलिकेट की बारिश की वजह से ऐसा शायद हुआ हो, जिससे नीला प्रकाश निकलता है.

10-लंदन में अगस्त में हुए एक संवाददाता सम्मेलन में लैब में बना दुनिया का पहला बर्गर चखा गया. इसके लिए वैज्ञानिकों ने नीदरलैंड के एक संस्थान से एक गाय की कोशिका निकालकर उसे मांसपेशियों की एक पट्टी के रूप में विकसित किया था.

11-प्रोफ़ेसर पीटर हिग्स को स्कॉटहोम में आयोजित एक कार्यक्रम में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया. एडिनबरा विश्वविद्यालय के इस अवकाशप्राप्त प्रोफ़ेसर ने इस पुरस्कार को फ़्रांस्वा इंगलर्ट के साथ हिग्स बोसॉन के सिद्धांत पर किए काम के लिए साझा किया.

12-मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान वॉयज़र-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. सितंबर में वैज्ञानिकों ने इसके पिछले साल तारों के क्षेत्र में चल जाने की पुष्टि की. बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि 1977 में छोड़ा गया वॉयज़र-1 तारों की दुनिया में पहुँचने वाला दुनिया का पहला मानवनिर्मित उपग्रह है.


13-चीन ने जेड रैबिट नाम के अपने पहले रोबोटिक रोवर को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतार दिया. पिछले 40 साल में यह इस तरह की पहली सफलता है.
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मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान वॉयज़र-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. सितंबर में वैज्ञानिकों ने इसके पिछले साल तारों के क्षेत्र में चल जाने की पुष्टि की. बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि 1977 में छोड़ा गया वॉयज़र-1 तारों की दुनिया में पहुँचने वाला दुनिया का पहला मानवनिर्मित उपग्रह है.




मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान वॉयज़र-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. सितंबर में वैज्ञानिकों ने इसके पिछले साल तारों के क्षेत्र में चल जाने की पुष्टि की. बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि 1977 में छोड़ा गया वॉयज़र-1 तारों की दुनिया में पहुँचने वाला दुनिया का पहला मानवनिर्मित उपग्रह है.कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान वॉयज़र-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. सितंबर में वैज्ञानिकों ने इसके पिछले साल तारों के क्षेत्र में चल जाने की पुष्टि की. बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि 1977 में छोड़ा गया वॉयज़र-1 तारों की दुनिया में पहुँचने वाला दुनिया का पहला मानवनिर्मित उपग्रह है.



चेल्याविंस्क इलाक़े केयूरोप के सैटेलाइट प्लांक सर्वेयर ने आसमान में सबसे 'पुराना प्रकाश' दिखाने वाला एक मानचित्र पेश किया. इसके पैटर्न के आधार पर ब्रह्मांड की उत्पत्ति के 'बिग बैंग' सिद्धांत की पुष्टि हुई. चेबराकुल की एक झील से इस क्षुद्रग्रह का एक बड़ा टुकड़ा बरामद किया गया.

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श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर कितनी बड़ी हो गई है

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देखिए कितनी हॉट हो गई है श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी, बॉलीवुड में करेगी एंट्री


टाईम कैसे बीत जाता है पता ही नहीं चलता. अब श्रीदेवी की बेटी को ही देखिए...जाह्नवी कपूर कितनी बड़ी हो गई है. जी हां, अभी तक जाह्नवी की बॉलीवुड में एंट्री तक नहीं हुर्इ, फिर भी आज वह किसी बॉलीवुड एक्ट्रेस से कम नहीं है. हाल ही में जाह्नवी ने अपनी फोटो ट्विटर पर डाली है. जिसमें वह काफी हॉट दिखाई दे रही है. इन फोटोज में वह खूब मस्ती करती नजर आ रही है.वैसे जहां तक श्रीदेवी की बात है तो वो अब तक यही कहती आई हैं कि उनकी बेटी बॉलीवुड में कदम नहीं रखेगी.








टाईम कैसे बीत जाता है पता ही नहीं च






लता. अब श्रीदेवी की बेटी को ही देखिए...जाह्नवी कपूर 


















श्री चाहती हैं कि जाह्नवी पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें, लेकिन अगर सूत्रों की मानें तो उन्हें अभी से बॉलीवुड फिल्मों के ऑफर मिलना शुरू हो गए हैं. ऐसे में उम्मीद तो यही की जा रही है कि वो जल्दी ही बड़े पर्दे पर दिखाई देंगी.
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श्री चाहती हैं कि 
जाह्नवी पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें, लेकिन अगर सूत्रों की मानें तो उन्हें अभी से बॉलीवुड फिल्मों के ऑफर मिलना शुरू हो गए हैं. ऐसे में उम्मीद तो यही की जा रही है कि वो जल्दी ही बड़े पर्दे पर दिखाई देंगी.

कितनी बड़ी हो गई है. जी हां, अभी तक जाह्नवी की बॉलीवुड में एंट्री तक नहीं हुर्इ, फिर भी आज वह किसी बॉलीवुड एक्ट्रेस से कम नहीं है. हाल ही में जाह्नवी ने अपनी फोटो ट्विटर पर डाली है. जिसमें वह काफी हॉट दिखाई दे रही है. इन फोटोज में वह खूब मस्ती करती नजर आ रही है.वैसे जहां तक श्रीदेवी की बात है तो वो अब तक यही कहती आई हैं कि उनकी बेटी बॉलीवुड में कदम नहीं रखेगी.

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महिंद्रा ने अपनी एक ऐसी कार लॉन्च की है एक बार फुल चार्ज कर देने के बाद करीब 200 किमी तक जाती है

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1 घंटे चार्ज करके चलेगी 200 किमी, 8 सेकेंड में पकड़ लेगी 100 की स्पीड


महिंद्रा ने अपनी एक ऐसी कार लॉन्च की है जो स्पोर्ट्स के दीवानों के लिए बहुत खास है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने ऑटो एक्सपो में 6 फरवरी को अपनी स्पोर्ट्स कॉन्सेप्ट कार ‘होलो’ लॉन्च की है। यह कार सिर्फ 8 सेकंड के अंदर ही 100 किमी प्रति घंटे की स्पीड पकड़ लेती है। इस कार की अधिकतम स्पीड 160 किमी प्रति घंटे की है। यह कार अगले तीन सालों के अंदर बाजार में लॉन्च हो जाएगी।
यह कार एक इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार है जो एक बार फुल चार्ज कर देने के बाद करीब 200 किमी तक जाती है। यह कार सिर्फ 1 घंटे में फुल चार्ज हो जाती है लेकिन अगर इसे 15 मिनट तक ही चार्ज किया जाए तो सिर्फ 25 किमी ही जाएगी। फिलहाल कंपनी की तरफ से इसकी कीमत के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। कीमत जानने के लिए हमें इस कार के बाजार में आने का इंतजार करना होगा।
महिंद्रा रेवा इलेक्ट्रिक विहिकल के CEO चेतन मैनी ने कहा कि यह कार एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ पूरी तरह से भारत में ही डिजाइन की गई है। कंपनी ने अपनी एक दूसरी इलेक्ट्रिक कार E2O भी लॉन्च की है जो एक इलेक्ट्रिक कार है। यह कार भी स्मार्ट टेक्नोलॉजी के साथ लॉन्च हुई है।
1 घंटे चार्ज करके चलेगी 200 किमी, 8 सेकेंड में पकड़ लेगी 100 की स्पीड
1 घंटे चार्ज करके चलेगी 200 किमी, 8 सेकेंड में पकड़ लेगी 100 की स्पीड

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