रविवार, 29 सितंबर 2013
अब जल्द बड़े होंगे पेड़
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रांची। 20 साल में पूर्ण रूप से विकसित होने वाला सागवान अब महज 10 सालों में ही तैयार हो जाएगा। प्राकृतिक रूप से बढ़ने वाले पेड़ों को समय से पूर्व विकसित करने की तकनीक झारखंड के वन विभाग ने इजाद की है। इस तकनीक को रूट ट्रेनर का नाम दिया गया है। वन विभाग की नर्सरी में सागवान के अलावा शीशम, गम्हार, आंवला और एकेसिया पर इसका सफल प्रयोग किया जा चुका है। इससे पेड़ लगाने वाले किसानों को बहुत बड़ा फायदा होगा। अब वृक्षारोपण को बढ़ावा मिलेगा।
क्या है रूट ट्रेनर
रूट ट्रेनर काले रंग के प्लास्टिक की कड़ी टैपरिंगवाली ग्लासनुमा संरचना है। जो एक भी हो सकती है और ट्रे नुमा फ्रेम में समान दूरी पर ढली हुई भी। प्रत्येक संरचना में नीचे की ओर छिद्र होते हैं। इन्हें जमीन से ऊपर स्टैंड पर रखा जाता है।
कैसे कार्य करता है रूट ट्रेनर
आम तौर पर पौधों की तैयारी पॉलिथीन बैग में की जाती है। पॉली बैग में पौधों की तैयारी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसमें पौधों की जड़ें घुमावदार हो जाती है। इससे उनकी उत्तरजीवता पर खराब प्रभाव पड़ा है। रूट ट्रेनर में ऐसा नहीं होता। पौधे की मूसला जड़ जब विकसित होकर रूट ट्रेनर के पेंदे पर स्थित छिद्र के पास पहुंचती है तो रूट ट्रेनर के जमीन के ऊपर स्टैंड पर रखे होने के कारण हवा के संपर्क में आती हैं। इससे मूसला जड़ों की वृद्धि स्वाभाविक रूप से रूक जाती है। ऐसा होने से मूसला जड़ में घुमाव की समस्या खत्म हो जाती है और उसमें प्रतिस्थानी जड़ें विकसित होने लगती हैं। 60 से 90 दिनों में रूट ट्रेनर में तैयार पौधों को जमीन में गढ्डा कर रोपा जा सकता है। बंजर भूमि में कारगर साबित हो सकती है यह तकनीक : झारखंड के कुल भू-भाग 79.14 हजार वर्ग किमी की 20 प्रतिशत भूमि बंजर है। हालांकि वन भूमि के लिहाज से झारखंड काफी समृद्ध है। यहां 29 फीसद भू-भाग में जंगल है लेकिन गैर वन भूमि में पेड़ नहीं के बराबर हैं। वन विभाग की योजना गैर वानिकी क्षेत्र और बंजर भूमि में अधिक से अधिक वृक्षारोपण की है।
आय का जरिया भी यह तकनीक
भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गठित कमेटी ने गैर वन क्षेत्र में पेड़ लगाने और ट्रांजिट रूल में परिवर्तन की वकालत की है। यदि कमेटी के सुझावों को भारत सरकार मान लेती है तो निजी जमीन में फसल की तरह पेड़ लगाए और काट कर बेचे जा सकते हैं। ऐसे में वन विभाग की यह तकनीक बहुत उपयोगी साबित होगी। कम समय में पेड़ तैयार होंगे और उन्हें बेचकर किसान मोटा मुनाफा अर्जित कर सकेंगे। sabhar : jagaran.com
पेड़ पर उगेगा शाकाहारी अंडा
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सितंबर 29, 2013 in पेड़ पर उगेगा शाकाहारी अंडा

वाशिंगटन। शाकाहारी अंडा! जी हां, अभी तक तो शायद ही किसी ने शाकाहारी अंडे के बारे में सुना होगा, मगर अब शाकाहारी लोगों के लिए यह एक अच्छी खबर हो सकती है।
एक अमेरिकी कंपनी ने ईजाद किया है यह शाकाहारी अंडा। इस कृत्रिम अंडे को पूरी तरह से पौधों से बनाया गया है। .तो हुआ ना शाकाहारी लोगों के लिए यह नया तोहफा! कंपनी ने सफलतापूर्वक फॉक्स मेयोनेज और कई तरह की बेक्ड चीजों को मिलाकर इन अंडे का सब्सिट्यूट तैयार किया है। ये अंडे बहुत ही साधारण तरीके से लेकिन मटर की अद्भुत प्रजातियों, ज्वार और 11 अन्य तरह के पौधों से मिलकर बनाया गया है। फॉक्सन्यूज डॉट कॉम ने कंपनी के सीईओ जोश टेटरिक के हवाले से यह बात कही। टेटरिक ने इसके लिए टीवी शो टॉप शेफ के कंटेस्टेंट क्त्रिस जोन्स और बायोकेमिस्ट जोशुआ क्लेन की मदद ली। जिसमें उन्होंने एक ऐसा अंडा बनाने में उनकी मदद मांगी जो पूरी तरह से असली अंडे की तरह दिखे, एग फ्री प्रोडक्ट हो। टेटरिक ने इस बात पर भी जोर दिया कि पौधों से तैयार यह अंडा सिर्फ शाकाहारियों के लिए ही नहीं सभी के लिए हैं। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि इससे अंडा या पोल्ट्री इंडस्ट्री किसी तरह प्रभावित नहीं होगी। वास्तविक रूप से यह कोई पोल्ट्री इंडस्ट्री के महत्व को कम भी नहीं करेगा। अमेरिका में एग्रीकल्चर रिसर्च फिजियोलॉजिस्ट डिपार्टमेंट के रेमंड ग्लाहन ने बताया कि यह प्रोडक्ट लंबे समय तक उपलब्ध रहेगा। वहीं उन्होंने इस बात पर भी सहमति जताई कि प्लांट बेस्ड फूड होने के कारण इस अंडे की न्यूट्रीशनल वेल्यू बहुत अधिक होगी। सैन फ्रांसिस्को स्टार्टअप हैम्पटन क्त्रीक फूड्स वेबसाइट ने दावा किया है कि यह प्रोडक्ट न सिर्फ अधिक स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि सामान्य अंडों से इसकी कीमत 19 प्रतिशत कम भी होगी। टेटरिक ने कहा कि कंपनी का यह नया प्रोडक्ट बिल्कुल अलग है और बाजार में भी उपलब्ध है। इसमें प्राकृतिक अंडे जैसी ही पौष्टिकता है। sabhar : jagaran.com
एक ही पेड़ पर उगे आलू और टमाटर
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सितंबर 29, 2013 in एक ही पेड़ पर उगे आलू और टमाटर
लंदन। एक ही पेड़ पर आलू और टमाटर लगे देखकर चौंकिए नहीं। शाकाहारी लोगों के लिए ये खोज किसी वरदान से कम नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसा हाईब्रिड पौधा तैयार किया है जिसमें एक ही समय में लाल रसीले टमाटर और आलू दोनों लगते हैं। इसे नाम दिया गया है टॉमटैटो।
इप्सविच की हार्टिकल्चर कंपनी थांपसन एंड मारगन ने ब्रिटेन के बाजार के लिए तैयार किए इस हाईब्रिड पौधे के जीन में कोई परिवर्तन नहीं किया है। इसलिए ये दोनों सब्जियां सामान्य आलू और टमाटर जितनी ही स्वादिष्ट और पौष्टिक हैं। हालांकि कंपनी का कहना है कि इस पौधे के टमाटर दुकान पर बिकने वाले टमाटरों से अधिक स्वादिष्ट होंगे। रायल हार्टीकल्चर सोसाइटी (आरएचएस) के गाय बारटर ने बताया कि प्रयोग के तौर पर ब्रिटेन में भी ऐसे पौधे तैयार किए गए हैं। लेकिन वाणिज्यिक उपयोग के लिहाज से इतने बड़े पैमाने पर आलू-टमाटर की एक ही पौधे से खेती पहली बार की गई है। ऐसी संकर प्रजातियों के कई पौधों को ग्राफ्टिंग की तकनीक से तैयार किया गया है। हालांकि ये तकनीक पुरानी है पर इससे तैयार पौधों पर उगने वाले फलों और सब्जियों का स्वाद अच्छा नहीं होता था।
कंपनी के निदेशक पॉल हानसोर्ड ने दावा किया कि इसके टमाटरों का स्वाद सामान्य टमाटरों से भी अच्छा है। इस पौध पर पिछले एक दशक से काम किया जा रहा है। ये लक्ष्य हासिल करना बहुत ही मुश्किल रहा चूंकि टमाटर और आलू के तने दोनों ही समान रूप से पतले होने चाहिए थे। ये बहुत ही उच्च प्रशिक्षण से अंजाम दी गई तकनीक है। एक ही गमले में उगे टमाटर और आलू पर पैनी नजर रखी गई। ताकि आलू का विकास भी सही तरीके से हो। कंपनी का कहना है कि पिछले मौसम से ही वह एक साथ पौधे से टमाटर और आलू एक साथ उगा रहे हैं। अब दोनों ही सब्जियां पककर पौधे से तोड़ने के लिए तैयार हैं। उद्देश्य शक्ति और लचीलापन प्रदान करता है कि एक और की जड़ों के साथ फूल या फलने के गुणों का गठबंधन है। इसतरह आलू और टमाटर के रूप में अधिकांश पौधों अपनी ही प्रजाति के भीतर संकर किए जाने की जरूरत है, लेकिन यह कभी-कभी एक भिन्न रूप लेकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ का जरिया भी बन सकता है। इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है।
बहुत से लोग अपने बागानों में कम स्थान के कारण ये तकनीक अपना कर ऐसे ही हरी सब्जियां और फल अपने किचन गार्ड या लान में उगाना चाहेंगे। इसीतरह का उत्पाद पुटैटो टाम नाम से इसी हफ्ते न्यूजीलैंड में भी एक बगीचे में उगाया गया है। sabhar :
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शनिवार, 28 सितंबर 2013
रागिनी MMS 2' के बाद सामने आया सनी लियोनी का न्यू फोटोशूट
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सितंबर 28, 2013 in सनी लियोनी का न्यू फोटोशूट
रागिनी MMS 2' के ट्रेलर से तहलका मचाने के बाद सनी लियोनी फिर चर्चा में हैं। सनी की चर्चा का वजह है एक 'मैनफोर्स' ब्रांड के लिए उनके द्वारा कराया गया विज्ञापन।
सनी इस ब्रांड के विज्ञापन में पहले भी नजर आ चुकी हैं और अब एक बार फिर कंपनी ने यह नया विज्ञापन जारी कर दिया है।
सनी इस विज्ञापन के लिए एक हॉट फोटोशूट कराया है जिसमें उनका चिरपरिचित बोल्ड अंदाज सामने आया है। सनी की इस वक्त पांचों उंगलियां घी में नजर आ रही हैं। 2011 में सबसे पहले बिग बॉस में हिस्सा लेने के लिए वह भारत आईं और इसके बाद उन्होंने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इस शो में आने के बाद उन्हें महेश भट्ट की फिल्म 'जिस्म 2' में काम करने का मौका मिला। फिल्म नहीं चली मगर सनी का सितारा चमक गया। इस साल उनकी दो फिल्में 'रागिनी MMS 2' और टीना और लोलो रिलीज़ होने वाली है।
फिल्मों के अलावा उनके पास कई कंपनियों के विज्ञापन हैं और मैनफोर्स कंडोम कंपनी उनमें से एक है
sabhar : bhaskar.com
राखी सावंत ने दोबारा करवाई सर्जरी, देखें चेहरे का हो गया क्या हाल
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सितंबर 28, 2013 in देखें चेहरे का हो गया क्या हाल, राखी सावंत ने दोबारा करवाई सर्जरी

छोटे पर्दे की कंट्रोवर्सी क्वीन मानी जाने वाली राखी सावंत इन दिनों काफी फ्रेश और बदली-बदली सी नजर आ रही हैं। हाल ही में जब वो कॉमेडी सर्कस के प्रोड्यूसर राज मल्होत्रा की बर्थडे पार्टी में आई थीं तब भी उनका लुक काफी बेहतरीन था।
लेकिन बताया जा रहा है कि इस ड्रामा क्वीन ने एक बार फिर से सर्जरी कराई है। और ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आप इनकी पुरानी और अब की तस्वीरें देखकर खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं।
छोटे पर्दे के हमारे विश्वसनीय सूत्रों ने ये बताया है कि राखी ने परफेक्ट लुक पाने के लिए एक बार फिर से अपने चेहरे की सर्जरी कराई है। इससे पहले भी वो एक बार सर्जरी करवा चुकी हैं।
sabhar : bhaskar.com
बोले 'बेशरम' रणबीर, 'शादी करूंगा तभी सच आएगा सामने'
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सितंबर 28, 2013 in 'शादी करूंगा तभी सच आएगा सामने', बोले 'बेशरम' रणबीर

रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ के बीच प्यार के चर्चे अब आम हो चुके हैं. लेकिन रणबीर कपूर ने कहा है कि जब तक वो शादी नहीं कर लेते तब तक सच सामने नहीं आएगा.
रणबीर कपूर ने कहा, 'जब मैं शादी कर लूंगा तो इन खबरों के पीछे की सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी. मीडिया इस तरह की खबरों को छाप रही है.' दीपिका पादुकोण के साथ ब्रेकअप के बाद रणबीर आजकल कैटरीना कैफ के साथ डेट कर रहे हैं.

रणबीर कपूर ने कहा है कि उनका पूरा ध्यान अपनी फिल्मों पर है. रणबीर ने कहा कि वो हेल्दी कॉम्प्टीशन में विश्वास रखते हैं. रणबीर ने कहा कि उनका कॉम्प्टीशन अमिताभ बच्चन से लेकर वरुण धवन, सिद्धार्थ मल्होत्रा और अर्जुन कपूर जैसे अभिनेताओं से है और ये सभी शानदार काम कर रहे हैं.

रणबीर ने कहा कि उनके लिए पिता ऋषि कपूर हिंदी सिनेमा के बेस्ट एक्टर हैं, इसीलिए वो अपने पिता की फिल्मों के रिमेक में काम नहीं करना चाहते हैं. लेकिन इसके बावजूद अगर उन्हें चुनना पड़े तो वो 'कर्ज' (1980) और 'जमाने को दिखाना है' (1981) फिल्मों के रिमेक में काम करना पसंद करेंगे.
रणबीर कपूर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सांवरिया' से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी. 2 अक्टूबर को रणबीर की फिल्म 'बेशरम' रिलीज हो रही है.
sabhar.. http://aajtak.intoday.in/
रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ के बीच प्यार के चर्चे अब आम हो चुके हैं. लेकिन रणबीर कपूर ने कहा है कि जब तक वो शादी नहीं कर लेते तब तक सच सामने नहीं आएगा.
रणबीर कपूर ने कहा, 'जब मैं शादी कर लूंगा तो इन खबरों के पीछे की सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी. मीडिया इस तरह की खबरों को छाप रही है.' दीपिका पादुकोण के साथ ब्रेकअप के बाद रणबीर आजकल कैटरीना कैफ के साथ डेट कर रहे हैं.
रणबीर कपूर ने कहा है कि उनका पूरा ध्यान अपनी फिल्मों पर है. रणबीर ने कहा कि वो हेल्दी कॉम्प्टीशन में विश्वास रखते हैं. रणबीर ने कहा कि उनका कॉम्प्टीशन अमिताभ बच्चन से लेकर वरुण धवन, सिद्धार्थ मल्होत्रा और अर्जुन कपूर जैसे अभिनेताओं से है और ये सभी शानदार काम कर रहे हैं.
रणबीर ने कहा कि उनके लिए पिता ऋषि कपूर हिंदी सिनेमा के बेस्ट एक्टर हैं, इसीलिए वो अपने पिता की फिल्मों के रिमेक में काम नहीं करना चाहते हैं. लेकिन इसके बावजूद अगर उन्हें चुनना पड़े तो वो 'कर्ज' (1980) और 'जमाने को दिखाना है' (1981) फिल्मों के रिमेक में काम करना पसंद करेंगे.
रणबीर कपूर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सांवरिया' से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी. 2 अक्टूबर को रणबीर की फिल्म 'बेशरम' रिलीज हो रही है.
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डेंगू से निपटने के लिए पपीते की बढ़ी मांग
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सितंबर 28, 2013 in डेंगू से निपटने के लिए पपीते की बढ़ी मांग
नई दिल्ली। क्या पपीते के पत्ते डेंगू से निजात दिला सकते हैं? इस सवाल का कोई वैज्ञानिक उत्तर तो नहीं है, लेकिन मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी के पांव पसारते ही राजधानी दिल्ली में पपीते के पत्ते का इस्तेमाल पिछले कुछ सप्ताह के दौरान बढ़ गया है। पपीता के पत्तों के बारे में धारणा है कि यह रक्त में कम होते प्लेटलेट काउंट को बढ़ाता है। इन दिनों दिल्ली के पौधशाला में इसकी मांग बेतहाशा बढ़ी है।
दक्षिणी दिल्ली के पंडारा रोड इलाके में स्थित मस्जिद नर्सरी के निदेशक विक्रम सैनी ने कहा कि पपीते का पौधा खरीदने के लिए कई लोग आ रहे हैं। लाडो सराय स्थित ग्रीनवे नर्सरी के वाईसी सिंह ने कहा कि पपीते का पौधा खरीदने के लिए हर सप्ताह कम से कम 20 से 25 लोग आते रहते हैं। उन्होंने कहा, कि पौधा खरीदने आने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। हम पपीते का अंकुर 20 रुपये में और पौधा 25 रुपये में बेचते हैं।
चिकित्सकों ने हालांकि कहा कि ऐसा कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं है जिससे साबित होता हो कि पपीते का पत्ता डेंगू से निजात दिला सकता है या रक्त में प्लेटलेट काउंट बढ़ा सकता है। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के चिकित्सक सुरोनजीत चटर्जी ने बताया कि मैं पिछले 10 वर्षों से यह धारणा देख रहा हूं। बड़ी संख्या में रोगियों ने मुझे बताया कि उन्हें इससे लाभ हुआ, लेकिन अभी तक वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं हो पाया है।sabhar :http://khabar.ibnlive.in.com
ये हैं सात जानलेवा पाप, इनकी सजा से नहीं बच सकते खुदा के फरिश्ते भी
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सितंबर 28, 2013 in ये हैं सात जानलेवा पाप

धरती पर ऐसा कोई इंसान नहीं है, जिसने जाने-अनजाने पाप न किया हो। बाइबिल के अनुसार, सिर्फ जीसस क्राइस्ट ही एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिनसे कोई पाप नहीं हुए। पवित्र बाइबिल में पाप करने को भगवान से घृणा करना माना गया है।
ब्रेड पिट और मॉर्गन फ्रीमैन अभिनीत 1995 में आई हॉलीवुड फिल्म 'सेवन' ऐसे सात पापों की कहानी कहती है, जिसका जिक्र बाइबल में किया गया है। फिल्म सीरियल किलिंग पर आधारित है, जिसमें हत्यारा एक के बाद एक हत्याओं को अंजाम देता है। यह सिरफिरा हत्यारा बाइबिल द्वारा बताए गए सात पापों के आधार पर अपना शिकार चुनता था और धार्मिक किताब में उल्लेखित सजाएं देता था।
कई लोग अक्सर सवाल करते हैं कि बाइबिल में सात पापों की ही जिक्र क्यों किया गया। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सात शब्द ईश्वर को सबसे प्रिय है। माना जाता है कि सात दिन में ही पूरी सृष्टि का निर्माण हुआ था। सप्ताह में सात दिन होते हैं, भगवान सातवें दिन आराम करते हैं। ये सात पाप कौन से हैं, जिनसे सभी को बचना चाहिए। इजरायल का बुद्धिमान बादशाह हजरत सोलोमन नीतिवचन की पुस्तक का जिक्र करते हुए चेतावनी देता है।
LUST लस्ट (लालसा, हवस)
लालसा तीव्र इच्छा को जन्म देती है। यह पाप यौन इच्छाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। फिर भी इसे सही मायनों में किसी चीज की तीव्र अभिलाषा से जोड़ा जाता है। यह पैसे, पद, शक्ति और प्रसिद्धि आदि के लिए भी हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को सजा के तौर पर उस पर गंधक लपेट कर आग में जलने के लिए छोड़ दिया जाता है।
Gluttony ग्लूटोनी (अत्यधिक खाना)
ग्लूटोनी लैटिन भाषा के ग्लूटाइर से बना है। इसका मतलब निगलना है। इसमें व्यक्ति अपनी सीमा से अत्यधिक खाने पर पाप का भागी बनता है। बाइबिल में इसे इसलिए भी बुरा माना गया है क्योंकि अत्यधिक खाने वाला व्यक्ति किसी जरूरतमंद का हक छीन रहा है। ऐसे व्यक्ति को स्वार्थी भी कहा जाता है।
इस पाप को करने के बाद ईश्वर आपको छोड़ेगा नहीं। वह आपको इसकी सजा चूहे, मेंढ़क और सांप खिला कर देगा।
Greed ग्रीड (लालच)
इस पाप को लस्ट और ग्लूटोनी से भी ज्यादा बुरा माना है। इसे करने वाले व्यक्ति को अत्यधिक महत्वकांक्षी और भौतिक सुख-सुविधाओं का गुलाम माना जाता है। इस तरह के लोग पाप करने के दौरान ईश्वर की भी अनदेखी करते हैं। ऐसे पापियों को खौलते हुए तेल में डाला जाएगा। यह तेल सबसे महंगा और अच्छा होगा, जिसे पैसे से खरीदना होगा।
Sloth स्लोथ (आलस्य)
आलस्य करने वाले को भगवान बुरी नजर से देखते हैं। इसे कभी-कभी शारीरिक आलस्य से लेकर आध्यात्मिक आलस्य से जोड़ा जाता है। जब व्यक्ति के अंदर आलस्य आ जाता है वह धर्म, ईश्वर और आध्यात्म से विमुख हो जाता है। ईसाई धर्म का मानना है कि आलसी व्यक्ति भगवान और अनुग्रह को भूल जाता है।
ऐसे लोगों को सजा देने के लिए ईश्वर उन्हें सांप के बिल में डाल देता है, जहां पापी अपनी जान बचाने के लिए काफी हाथ-पैर मारता है।
Wrath रैथ (क्रोध)
इस पाप में व्यक्ति अनियंत्रित भावनाओं से गुस्सा और घृणा को जन्म देता है। क्रोध आत्म-घातकता, हिंसा और घृणा का रूप है। सिर्फ इसी पाप के कारण इंसान सदियों से युद्ध करता आ रहा है। ऐसे लोग अपने आसपास भय का वातावरण बनाते हैं और लोग इनसे कटने लगते हैं।
ऐसे पापी को सजा के तौर पर जिंदा ही छोटे-छोटे टुकड़ों में काट दिया जाएगा।
Envy एन्वी (ईर्ष्या)
ग्रीड और लस्ट मिल कर लालची इच्छा को जन्म देते हैं। ईर्ष्या किसी भी व्यक्ति के पद, योग्यता, पैसे को देख कर जन्म लेती हैं। ऐसे व्यक्ति को सजा के लिए एकदम ठंडे पानी में रखा जाता है।
Pride प्राइड (घमंड)
अभिमानी आंखें हमारे आसपास के सभी लोगों के पास होती हैं। घमंड के नशे में चूर लोग अपने से कमतर आदमी को अजीब नजरों से देखते हैं। यह वह पहला अपराध है, जो मानव सभ्यता की शुरुआत में किया गया था। सुबह के समय चमकने वाला तारा ल्यूसिफर को उसके घमंड के लिए शैतान और दानव का दर्जा दिया गया था।
बाइबिल में इस घटना पर एजेकेल 28:17 में जिक्र किया गया है, सुंदरता ने तुम्हारा हृदय अभिमान से भर दिया है। अपना वैभव देखकर तुम अपनी बुद्धि भ्रष्ट कर चुके हैं। इसलिए मैं तुम्हे धरती पर गिरा रहा हूं।
घमंड को सभी पापों की जड़ माना गया है। इसलिए इसे पहला स्थान दिया गया। sabhar : bhaskar.com
शुक्रवार, 27 सितंबर 2013
ये हैं पांच सुपर फूड, रोजाना खाने से बढ़ती है याददाश्त, तनाव होता है दूर!
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सितंबर 27, 2013 in तनाव होता है दूर!, ये हैं पांच सुपर फूड, रोजाना खाने से बढ़ती है याददाश्त

भोपाल: रोजमर्रा की जिंदगी में हमें सेहत के लिए समय नहीं मिल पाता। खाने में कुछ खास चीजों को शामिल करके अच्छी सेहत के लिए जरूरी पोषण हासिल कर सकते हैं। आजकल बहुत से लोग तेज दिमाग पाने की कामना करते हैं। तेज दिमाग उसी के पास होता है जो अच्छा आहार लेता है और अपनी लाइफस्टाइल को अच्छे से जीता है।
इसी तरह, आपके आस-पास ऐसी कई चीजें और किस्म-किस्म के लोग हैं, जो आपका दिमाग खराब कर सकते हैं। ऑफिस का टेंशन, बीवी का टेंशन और दोस्तों के ताने सुन-सुनकर टेंशन होने लगती हैं। इसलिए अपने आहार में फल को जितना शामिल हो सके शामिल करें।
ब्ल्यूबेरी
इसमें क्या है: ब्ल्यूबेरी में एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन सी और फाइबर होता है।
क्या होगा फायदा: फाइबर कॉलेस्ट्रॉल और शुगर कम करता है। एंटीऑक्सिडेंट से कैंसर से लड़ने की शक्ति मिलती है।
कैसे खाएं : फूट्र सलाद में डालें। दही में मिलाकर भी खा सकते हैं।
कितना खाएं : आधी मुट्ठी पर्याप्त होगा।
ब्लैक टी
इसमें क्या है : ब्लैक टी में बहुत अधिक मात्रा में एंटीआक्सिडेंट होता है।
क्या होगा फायदा : रक्तचाप कम करने में मदद मिलेगी।
कैसे पीएं: गर्म पानी में तीन मिनट चाय पत्ती को उबालें और छानकर पी लें।
कितना पीएं: दिन में दो से तीन बार लें।
ब्रोक्कली
इसमें क्या है : ब्रोक्कली में विटामिन सी व विटामिन के होता है। फॉलिक एसिड, कैल्शियम और फाइबर भी होता है।
क्या होगा फायदा : विटामिन के से खून साफ होता है। कैल्शियम से हड्डियां मजबूत होती हैं।
कैसे खाएं : दूसरी सब्जियों के साथ पकाकर खाएं। काबुली चने की चटनी के साथ भी खा सकते हैं।
कितना खाएं : एक कटोरी काफी होगा।
अखरोट
इसमें क्या है: अखरोट में विटामिन ई होता है। इसके साथ ही बहुत मात्रा में ओमेगा 3 ऑयल होता है।
क्या होगा फायदा : दिल की सेहत अच्छी रहती है। शुगर और तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।
कैसे खाएं: मिठाई में इस्तेमाल करें। पाउडर बनाकर खाएं।
कितना खाएं: सप्ताह में एक कटोरी खाएं तो बेहतर होगा।
पालक
इसमें क्या है: पालक में बहुत मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। इसके साथ ही इसमें विटामिन ए और विटामिन के भी होता है।
क्या होगा फायदा : दिल मजबूत होता है।
इसे खाने से उम्र के साथ कम होने वाली स्मरण शक्ति बनी रहती है।
कैसे खाएं: सलाद में मिला लें। आप इसे पकाकर या कच्च दोनों तरह से खा सकते हैं।
कितना खाएं: दिन में कभी भी एक कटोरी काफी होगा।
sabhar : bhaskar.com
जानें, बार-बार झूठ बोलने वाले ओबामा के अमेरिका की हैरान करने वाली सच्चाई!
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सितंबर 27, 2013 in ओबामा के अमेरिका की हैरान करने वाली सच्चाई!

पिछले कई दिनों से अमेरिकन एजेंसियों से लेकर वहां के सरकारी विभाग और बाकी लोग इस देश को गरीब साबित करने में लगे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि अमेरिका को मिल रही आर्थिक राहत जारी रहे। आपको बताते चलें कि ओबामा के अमेरिका की असली सच्चई कुछ और ही है। ये देश खुद को अभी गरीब ही साबित करने के लिए एक के बाद एक झूठ बोल रहा है। ये झूठ पैसों की जरूरतों को पूरा करने और चीन-पाकिस्तान जैसे देशों के सामने खुद को ताकतवर दिखाने के लिए बोला जा रहा है।
आज हम आपको ओबामा के उस झूठ का काला सच बताने जा रहे हैं जो वो कई सालों से बोल रहे हैं। ये सच आपकी आंखें खोलने के लिए काफी है। आगे की स्लाइड पर एक के बाद क्लिक कर जानें दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान ओबामा के अमेरिका की पोल खोलती असलियत..
(तस्वीर: अमेरिका में गरीबी को लेकर प्रोटेस्ट करती एक महिला को जबरदस्ती पकड़ कर ले जाती अमेरिकी पुलिस।)
अमेरिका के जनगणना ब्यूरो ने कहा है कि अमेरिकी परिवारों की औसत आय 1989 की तुलना में 2012 में 1.3 फीसदी कम हो गई है। यह वास्तविक आय है, यानि महंगाई को समायोजित कर इसका आंकड़ा निकाला गया है। इससे पता चलता है कि पिछले 24 साल में अमेरिकियों की खपत भी लगभग स्थिर है। लेकिन ब्यूरो के यह आंकड़े कई लिहाज से संदिग्ध लगते हैं।
अमेरिका आज इलेक्ट्रॉनिक्स की टेक्नोलॉजी में हुई कई बड़ी खोजों का मजा चख रहा है। वर्ष 1989 तक तो वहां मोबाइल फोन भी नहीं थे। पेव इंटरनेट एंड अमेरिकन लाइफ प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार आज वहां के 90 फीसदी से ज्यादा वयस्कों के पास मोबाइल फोन हैं और इनमें से आधे के पास स्मार्टफोन हैं। इस प्रोजेक्ट के अनुमान के अनुसार अमेरिका के करीब 70 फीसदी वयस्क हर दिन इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 1989 में वहां इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाला कोई नहीं था
इलेक्ट्रॉनिक सामान के बढ़े खपत को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आज सामान्य अमेरिकी परिवार को पहले की तुलना में गरीब तब ही माना जा सकता है, यदि अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं की खपत में गिरावट से तुलना की जाए। लेकिन विडंबना यह है कि इसको भी दिखाने के लिए मेरे पास कोई आंकड़े नहीं हैं।
अब सवाल उठता है कि खपत में कमी कहां आई है। अगर आवास की बात करें तो सरकारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में 1985 से 2005 के बीच प्रति व्यक्ति रहने का औसत स्थान 15 फीसदी बढ़ा है। नये और बड़े मकान अब भी खड़े दिख रहे हैं। इसलिए बाद में जो हाउसिंग बाजार का जो बुलबुला फूटा वह इस सेक्टर के फायदों को पूरी तरह से साफ नहीं कर सका और अभी तक जो कुछ बढ़त हुई है वह काफी हद तक जनसंख्या के सबसे धनी हिस्से के लिए बने तथाकथित मैकमैन्सन की वहज से हो सकता है।
तो क्या यात्रा में कमी आई है? बिल्कुल नहीं। वर्ष 1989 से अब तक देखें तो प्रति व्यक्ति कार और एयरलाइंस यात्रा में 12 फीसदी की गिरावट आई है। चलिए स्वाथ्य क्षेत्र यानि हेल्थकेयर की बात करते हैं। वर्ष 1989 की तुलना में अब तक अमेरिकी जीडीपी में हेल्थकेयर का हिस्स 11 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी हुआ है। हेल्थकेयर पर कितना खर्च हुआ इसकी गणना करना आसान है, लेकिन इस सब रकम से वास्तव में क्या खरीदा गया है। मोटापे में अच्छी बढ़त के बावजूद बुनियादी स्वास्थ्य का रुख सकारात्मक दिख रहा है। उदाहरण के लिए वर्ष 1989 अब तक अमेरिका में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा में 4 फीसदी की बढ़त हुई है।
अब बात पर्यावरण की करते हैं। अमेरिका के पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (टीईपीए) की गणना के मुताबिक वर्ष 1989 से अब तक छह बड़े प्रदूषक उद्योगों के उत्सर्जन में 60 फीसदी तक की गिरावट आई है। परिवारों की आय बढ़ने की गति से तो साफ हवा और पानी की खपत नहीं बढ़ी है, लेकिन पर्यावरणीय फायदों में सबने साझेदारी की है।
स्कूलों में बिताए जाने वाले औसत वर्षो के दौरान उपभोग किये जाने वाले कैलोरी में भी लगातार बढ़त हुई है। तो इस तरह से अगर जनगणना ब्यूरो कुछ भी कहे, सच तो यह है कि अमेरिका में वर्ष 1989 की तुलना में वर्ष 2012 में औसत पारिवारिक आय पर्याह्रश्वत रही है और लोगों गुणवत्ता और मात्रा, दोनों लिहाज से खपत भी ज्यादा की है। यह बढ़त कोई चकित करने वाली बात नहीं है। यह औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में जीवनशैली सुधरते रहने के पिछली दो शताब्दियों के रुख के मुताबिक ही है।
अन्य लोगों की तरह, अर्थशास्त्री भी यह देख रहे हैं कि नए और सुधरे हुए उत्पाद आ रहे हैं। लेकिन जनगणना ब्यूरो की आमदनी रिपोर्ट को बहुत से मीडिया रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था में लंबे दौर के ठहराव का संकेत माना गया है। तकनीकी रूप से इस तरह के ठहराव के संकेतों को सुखदायक या गुणवत्तापूर्ण समयोजन के द्वारा खारिज किया जा सकता है। उदाहरण के लिए अब किसी नये कार की कीमत पहले के मुकाबले 5 फीसदी ज्यादा हो सकती है। कुछ तो उच्च गुणवत्ता और कुछ महंगाई की वजह से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है। अर्थशास्त्रियों को यह तय करना पड़ेगा कि कितनी बढ़त महंगाई की वजह से हुई है और कितनी गुणवत्ता की वजह से। मान लीजिए कि कार की कीमत में इस बढ़त को 3 फीसदी महंगाई की वजह से और 2 फीसदी गुणवत्ता की वजह से माना जाता।
अन्य लोगों की तरह, अर्थशास्त्री भी यह देख रहे हैं कि नए और सुधरे हुए उत्पाद आ रहे हैं। लेकिन जनगणना ब्यूरो की आमदनी रिपोर्ट को बहुत से मीडिया रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था में लंबे दौर के ठहराव का संकेत माना गया है। तकनीकी रूप से इस तरह के ठहराव के संकेतों को सुखदायक या गुणवत्तापूर्ण समयोजन के द्वारा खारिज किया जा सकता है। उदाहरण के लिए अब किसी नये कार की कीमत पहले के मुकाबले 5 फीसदी ज्यादा हो सकती है। कुछ तो उच्च गुणवत्ता और कुछ महंगाई की वजह से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है। अर्थशास्त्रियों को यह तय करना पड़ेगा कि कितनी बढ़त महंगाई की वजह से हुई है और कितनी गुणवत्ता की वजह से। मान लीजिए कि कार की कीमत में इस बढ़त को 3 फीसदी महंगाई की वजह से और 2 फीसदी गुणवत्ता की वजह से माना जाता।
अर्थशास्त्रियों को इस तरह के आंकड़े पेश करने में इस्तेमाल किये गए तकनीक के बारे में कुछ कठिन सवालों का जवाब देना होगा। संभवत: उन्होंने गुणवत्ता में बढ़त और आम कीमत रुख को एक ही आंकड़े में रखने की जरूरत न महसूस की हो। लेकिन उनकी इस समस्या की वजह से जनगणना ब्यूरो के रिपोर्ट का तो मजाक बनता ही है।
मैं पूरी तरह से यह तो नहीं कह सकता कि क्या हो रहा है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि लोग पहले की तुलना में थोड़ा गरीब कहा जाना पसंद करते हैं या हो सकता है कि अमेरिका में जिस तरह से आर्थिक असमानता बढ़ रही है, उसकी वजह से अमेरिकी किसी भी संदिग्ध आंकड़े पर भी भरोसा करने लगते हैं। जो भी हो, इसमें सुधार की जरूरत तो है।
(लेखक एडवर्ड हदास न्यूज एजेंसी रायटर्स से जुड़े हैं।) sabhar : bhaskar.com
हवा में उड़ने से महंगा रेल की पटरी का ये शाही सफर
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सितंबर 27, 2013 in हवा में उड़ने से महंगा रेल की पटरी का ये शाही सफर
आप रेलवे काउंटर पर गये, टिकट बुक की और उसका किराया दिया 2 लाख रुपये। हैरान हो गए ना। ऐसा भी होता है। आपको लगता है कि देश में सफर करने के लिए हवाई यात्रा ही सबसे महंगी है, लेकिन भारतीय रेल उससे भी ज्यादा महंगी है। हमारे देश में ऐसी भी ट्रेने हैं जिनका एक दिन का किराया 50 हजार रुपये से ज्यादा का है। ये किराया है उन लग्जरी ट्रेनों का है जो आपको देश के सबसे अच्छे सफल पर लेकर जाती हैं और इनका अंदाज भी ऐसा कि आप खुद को किसी महाराजा से कम नहीं समझेंगे। आइये देखें दुनिया भर के यात्रियों को आकर्षित करने वाली इन ट्रेनों की खासियत और ये आपको कहां और कैसे कराती हैं सफर।
पैलेस ऑन व्हील्स : इस ट्रेन को दुनिया की 10 शीर्ष ट्रेनों में गिना जाता है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि इसे एक महल जैसा ही बनाया गया है और ट्रेन के अंदर आपको शाही माहौल नजर आएगा। इस ट्रेन में राजपूताना, हैदराबाद के निजाम और ब्रिटिश इंडिया की क्वीन विक्टोरिया के लिए व्यक्तिगत कोच बनाए गए थे।
देशी-विदेशी पर्यटकों को शाही जीवन शैली जैसा अनूठा अनुभव देने वाली एवं पांच सितारा होटलों जैसी सुविधाओं से परिपूर्ण भारतीय रेल एंव राजस्थान पर्यटन विकास निगम द्वारा संयुक्त रूप से चलाई जा रही विश्व प्रसिद्ध 'पैलेस ऑन व्हील्स' का सफर नई दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से शुरू होता है। यदि आप 7 दिन का पैकेज लेते हैं तो यह आपको जयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, स्वामी मेघापुर, उदयपुर, भरतपुर, आगरा की यात्रा कराएगी। इसके लिए एक रात का किराया करीब 35,000 रुपये है। यदि सात दिन की बात करें तो इसके लिए लगभग 2.40 लाख रुपये से ज्यादा देने होंगे।
फेरी क्वीन : यह ट्रेन दुनिया के सबसे पुराने लोकोमोटिव स्टीम इंजन पर चलती है। इस ट्रेन ने अपना सफर 1855 में शुरू किया। ये आपको दिल्ली, अलवर और सरिस्का के वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की यात्रा कराती है। दिल्ली और अलवर के बीच एक तरफ की यात्रा का किराया करीब 1,36,000 रुपये है। इस ट्रेन को राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार भी मिला है।
गोल्डन चैरीअट : ये देश की सबसे बेहतरीन लग्जरी ट्रेन में से एक है, जिसे कर्नाटक राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा चलाया जाता है। ये अपने अतिथियों को पौराणिक कथाओं, प्राकृतिक चमत्कार, वन्य जीवन, साहस, समुद्र तटों आदि से रूबरू कराती है। 7 सात और 8 दिन की इस यात्रा की बेंगलुरू से शुरू होकर काबिनी के बाघों को बीचे होते हुए श्रीरंगापटना, राजसी मैसूर, श्रवणबेलगोला, बेलूर के चमत्कारी वास्तु कलाओं और हेलबिड, शाही हम्पी और पट्टकल के बाद अंत में गोवा के समुद्र तटों तक पहुंचती है। इसके लिए एक रात का किराया करीब 22,000 हजार रुपये है।
डेक्कन ओडिसी : ये ट्रेन आपको प्राचीन काल के शाही दिनों की यात्रा पर लेकर जाएगी। इसके पूरे पैकेज का किराया करीब 2.15 लाख रुपये है।
हैरिटेज ऑन व्हील्स : यदि आपको राजी अंदाज के साथ शेखावटी क्षेत्रों जैसे बिकानेर, नवलगढ़, रामगढ़, गजनर और ताल छापर सेंचुरी आदि की यात्रा कराती है। इसके लिए आपको प्रति रात के लिए लगभग 18,600 रुपये देने होंगे। JAGRAN.COM
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