गुरुवार, 18 जुलाई 2013
खुदाई में निकला 11 फिट का नरकंकाल, भौंचक्के रह गए लोग, देखिए तस्वीरें
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आगरा. ताजनगरी से सौ किलोमीटर दूर मैनपुरी के औंछा इलाके में हर कोई दंग है। यहां श्रंगी ऋषि के आश्रम की खुदाई के दौरान विशालकाय नर कंकाल मिला है।
इसकी लंबाई 11 फुट है और चौड़ाई सामान्य व्यक्ति से चार गुना ज्यादा है। इस कंकाल पर अघोरी और तांत्रिकों की नजर लग गई है। वे इसकी खोपड़ी पाने के लिए 15 लाख रुपए तक की बोली लगा चुके हैं।
आश्रम के साधु-संतों ने इसकी रक्षा के लिए इसे मिट्टी के नीचे दबा दिया था। लेकिन, दोबारा खोदने पर इसकी खोपड़ी नहीं मिल रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम आगरा से इसकी जांच करने के लिए जाएगी।
राज्य पुरातत्व विभाग में शोध प्रवक्ता मृत्यंजय मंडल कहते हैं कि यह विशालकाय नर कंकाल चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा नरकंकाल शायद अब तक नहीं देखा गया है।
दरअसल, श्रंगी ऋषि के आश्रम में मंदिर निर्माण के लिए खुदाई चल रही थी। तभी ताम्र पत्र, त्रिशूल, पत्थर के औजार सहित नरकंकाल मिला था। ग्रामीणों का मानना है कि यह कंकाल सदियों पुराना है। पहली बार देखने पर विश्वास नहीं होता है कि यह नर कंकाल है, लेकिन पूरा कंकाल देखकर यकीन हो जाता है।
नर कंकाल की सुरक्षा के लिए जिलाधिकारी ने दो सिपाहियों की तैनाती का आदेश दिया है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से यहां सुरक्षा नहीं है। ऐसे में आश्रम के पुजारियों ने ग्रामीणों के सहयोग से उसे मंदिर परिसर में ही दफ़न करा दिया था। तब से लेकर अब तक ग्रामीण पुजारियों के साथ मिलकर उसकी सुरक्षा कर रहे हैं।
हालांकि, मंगलवार को जब दोबारा खोदकर देखा गया तो उसकी खोपड़ी नहीं मिली। आशंका जताई जा रही है कि खोपड़ी शायद मिट्टी के अंदर हो या चोरी कर ली गई हो।
सदियों पुराने इस नर कंकाल की सूचना पर अघोरी और तांत्रिक सक्रिय हो गए हैं। संतों का कहना है कि तांत्रिक इस कंकाल की खोपड़ी और अन्य कंकालों को कब्जाने के लिए ग्रामीणों को लाखों रूपए का लालच दे रहे हैं।
कई रात के अंधेरे में जमीन में दफ़न इस कंकाल को चुराने का प्रयास भी कर रहे हैं। ग्रामीण ऐसे अघोरियों को लगातार भगा रहे हैं।
पुरातत्वविद् मानते हैं कि मूर्तियों और पत्थरों पर जिस तरह की आकृतियां बनाई गई हैं, वह सभी ऋषि परंपरा से जुड़ी हुई हैं। वहीं सबसे ज्यादा जिज्ञासा नर कंकाल को लेकर है।पुरातत्वविद् मंडल ने बताया कि नरकंकाल किसी ऋषि का हो सकता है, जो तपस्या के दौरान मिट्टी में दब गए हों। यह भी हो सकता है कि किसी ऋषि द्वारा समाधि ली गई हो। फॉरेंसिक जांच से पता चल पाएगा कि यह कितना पुराना है।औंछा के आसपास श्रंगी ऋषि के अलावा मार्कण्डेय, मयन और ओम ऋषि द्वारा की गई तपस्या के टीले भी अभी अवशेष के रूप में बचे हुए हैं।
sabhar : bhaskar.com
गुरुवार, 11 जुलाई 2013
कृषि उत्पादों के लिए खुलेगा अमेरिकी बाजार!
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जुलाई 11, 2013 in
आम, लीची, अंगूर व अनार को अमेरिकी बाजार में जगह दिलाने की होगी कोशिश
कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी दरवाजा खोलने की खातिर भारत अमेरिका पर दबाव डाल सकता है। केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री आनंद शर्मा अमेरिकी दौरे पर गए हैं जहां अमेरिका के वाणिज्य व उद्योग मंत्री से इस मसले पर बात करेंगे। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक भारत मुख्य रूप से आम, लीची, अंगूर व अनार जैसे फलों को अमेरिकी बाजार में जगह दिलाने का प्रयास करेगा।
कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी दरवाजा खोलने की खातिर भारत अमेरिका पर दबाव डाल सकता है। केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री आनंद शर्मा अमेरिकी दौरे पर गए हैं जहां अमेरिका के वाणिज्य व उद्योग मंत्री से इस मसले पर बात करेंगे। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक भारत मुख्य रूप से आम, लीची, अंगूर व अनार जैसे फलों को अमेरिकी बाजार में जगह दिलाने का प्रयास करेगा।
वाणिज्य मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2007 में अमेरिका ने भारतीय आम को अमेरिकी बाजार में बेचने की इजाजत दे दी थी। लेकिन किरणन जैसी समस्याओं के कारण अमेरिका को आम का निर्यात संभव नहीं हो सका है। अब अमेरिका ने यह प्रस्ताव रखा है कि आम की खेप को नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में क्लीयरेंस देने का काम किया जा सकता है।
इससे आम निर्यातकों की लागत कम आएगी। अनार के निर्यात मामले में भी यही दिक्कत आ रही है। वहीं, भारतीय अंगूर के लिए अमेरिकी बाजार खुलवाने की दिशा में भारत वर्ष 2008 से प्रयासरत है। इस संबंध में अंगूर की खेती में इस्तेमाल किए जाने वाले पेस्ट (कीड़ा हटाने वाली दवा) से जुड़े जोखिम का पूरा विवरण भी अमेरिका को दिया जा चुका है।
लेकिन अब तक इस मामले में अमेरिका की तरफ से कोई अंतिम फैसला नहीं दिया गया है। लीची के निर्यात का मामला भी अमेरिका की पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी (ईपीए) में अटका पड़ा है।
सूत्रों के मुताबिक, इन सभी मसलों पर अमेरिकी सरकार के नुमाइंदों से बात की जाएगी। इस साल जनवरी से मई के दौरान भारत ने अमेरिका को 16.27 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात किया है।
सूत्रों के मुताबिक, इन सभी मसलों पर अमेरिकी सरकार के नुमाइंदों से बात की जाएगी। इस साल जनवरी से मई के दौरान भारत ने अमेरिका को 16.27 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात किया है।
वहीं, इस अवधि में भारत ने अमेरिका से 9.67 अरब डॉलर मूल्य का आयात किया है। वर्ष 2012 में भारत व अमेरिका के बीच कुल 60.98 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। इनमें भारतीय निर्यात की हिस्सेदारी 36.02 अरब डॉलर की रही। sabhar : bhaskar.com
चीन ने बनाया 100 मेगापिक्सल का कैमरा, खीचेगा कई किमी तक की फोटो
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जुलाई 11, 2013 in
बीजिंग: चीन के एक संस्थान ने हवाई मानचित्रण, आपदा निगरानी और बेहतर परिवहन प्रणालियों के उपयोग में आने वाला 100 मेगापिक्सेल का कैमरा बनाया है।
चाइना एकेडमी ऑफ सांइस (सीएएस) ने एक बयान में कहा कि इंस्टीट्यू ऑफ ऑप्टिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स ने 100 मेगापिक्सल वाला आईओ-3-कानबान कैमरा विकसित किया है। सीएएस का दावा है कि यह दुनिया का सर्वाधिक पिक्सल वाला कैमरा है।
बयान में कहा गया है कि यह कैमरा 10,240 गुणा 10,240 पिक्सल की तस्वीर उतार सकता है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ने सीएएस के बयान के आधार पर लिखा है कि यह कैमरा बहुत छोटा है और इसका आकार केवल 19.3 सेमी है।
एजेंसी ने बताया कि इसे शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस से कम और 55 डिग्री सेल्सियस के उच्चतम तापमान पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। sabhar : bhaskar.com
गर्लफ्रेंड को बंधक बना कर सात दिनों तक अपने कुत्ते से करवाता रहा सेक्स
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जुलाई 11, 2013 in

मैसाचुएट्स के एक युवक का अपनी गर्लफ्रेंड को कई दिनों तक बंधक बनाकर उसे अपने कुत्ते के साथ सेक्स करने पर मजबूर करने का मामला सामने आया है। इस दौरान यह अपनी पत्नी के अश्लील वीडियो भी बनाता रहा। 28 जून से 4 जुलाई तक जस्टिन मुस्तफा नाम के इस युवक ने अपनी गर्लफ्रेंड को मारा-पीटा और उसे कई बार हेरोइन का इंजेक्शन भी दिया।
पांच जुलाई को किसी तरह से पीड़ित युवती भागकर पुलिस के पास पहुंची और उसने पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। युवती का कहना था कि उसके ब्वयॉफ्रेंड ने उससे जबरन कुत्ते के साथ सेक्स करने पर मजबूर किया और धमकी दी कि अगर उसने किसी को इस बारे में बताने की सोच तो वह इस हरकत का वीडियो लोगों में बांट देगा।
पुलिस ने मुस्तफा को छह जुलाई को गिरफ्तार कर लिया। उसने अपना गुनाह कबूल नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि मुस्तफा ने अपनी गर्लफ्रेंड पर शक करने के बाद ऐसा किया। मुस्तफा इससे पहले भी जेल जा चुका है और उसे लगता था कि उसके जेल में रहने के दौरान उसकी गर्लफ्रेंड उससे बेवफाई करती है। इससे पहले उसे एक महिला के साथ सेक्स के दौरान चोरी से अपना और उसका वीडियो बनाने के आरोप में पकड़ा था। मुस्तफा ने यह वीडियो बाद में उस महिला और उसके नए ब्वॉयफ्रेंड को भेज दिया था।
इससे पहले फरवरी महीने में भी ब्रिटेन में बलात्कार की उस घटना ने सबको हिला कर रख दिया था। एक व्यक्ति ने घोड़ी को अपनी हवस का शिकार बनाया। युवक को पड़ोसी के घोड़ी के साथ सेक्स करते गिरफ्तार किया गया।
अमेरिकी नागरिक इस युवक को पुलिस ने सार्वजनिक रूप से अश्लीलता बरतने और आपराधिक अतिचार के आरोप में जेल भेज दिया है। अंग्रेजी अखबार 'द सन' के मुताबिक व्हाट्रोन काउंटी टेक्सास के एंड्र्यू मेंडोजा ने पुलिस के सामने अपनी गलती मान ली है।
29 वर्षीय आरोपी ने हालांकि यह भी कहा कि वह 'अश्व पुरुष' पैदा करने का प्रयास कर रहा था। जानकारी के मुताबिक उस युवक ने पूछताछ पर पुलिस को बताया है, 'मैं अपने घर पर अपनी गर्लफ्रेंड की कॉल का इंतजार कर रहा था। मैंने कहा कि अगर वह मुझे कॉल नहीं करेगी तो मैं पड़ोसी की घोड़ी के पास चला जाऊंगा। मैं घोड़ी से एक बच्चा पैदा करने का प्रयास कर रहा था। मैंने सोचा कि इससे अश्व पुरुष पैदा होगा।'इससे पूर्व अमेरिका के लेक हावासु सिटी से एक बीस वर्षीया युवती को 21 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। इस युवती पर कथित रूप से दो कुत्तों के साथ सेक्स करने का आरोप था। ब्रिटनी एंजेलिक सोनियर ने अपने ब्वॉयफ्रेंड के सामने यह बात मानी थी कि उसने कुत्तों के साथ सेक्स किया है। इस सेक्स के पीछे कारण उसने फंतासी बताया।
पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि सोनियर ने अपने ब्वॉयफ्रेंड को बताया था कि उसने कुत्तों के साथ ओरल व वैजाइनल दोनों ही तरह का सेक्स किया। इसके लिए उसने इन कुत्तों को बाकायदा ट्रेन्ड भी किया था, जिसके कारण उन्होंने कोई अजीब हरकत नहीं की। पुलिस ने पहले सोनियर के खिलाफ जानवरों के साथ वहशीपन दिखाने का मामला दर्ज करवाया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर प्रकृति के खिलाफ अपराध में तब्दील कर दिया गया।
मालूम हो कि विदेशों में इस तरह की यह पहली वारदात नहीं है। इससे पहले भी एक महिला को अपने कुत्ते के साथ सेक्स करना महंगा पड़ गया था। दोनों सेक्स में इस कदर मशगूल हो गये कि एक-दूसरे से अलग होने के लिये डॉक्टर का सहारा लेना पड़ा था। sabhar : bhaskar.com
मंगलवार, 9 जुलाई 2013
एक ऐसी बिल्डिंग जिसके पांचवें, छठे और सातवें माले के बीच से गुजरता है हाईवे
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जुलाई 09, 2013 in

जापान में एक ऐसी गगनचुंबी इमारत है जिसके बीच से हाईवे गुजरता है। ओसाका के फुकुशिमा -कू स्थित गेट टावर बिल्डिंग 236 फीट ऊंची है। हैंशिन एक्सप्रेसवे सिस्टम नामक हाईवे 16 मंजिला इस इमारत के पांचवें, छठे और सातवें माले के बीच से होकर गुजरता है। जगह के इस्तेमाल के कारण प्रशासन बिल्डिंग के मालिक को इन तीन मंजिलों का किराया चुकाता है।
इस बिल्डिंग को डिजाइन किया है अजूसा सेकेई और यमातो निशिहारा ने। इस गोलाकार बिल्डिंग में डबल कोर कंस्ट्रक्शन किया गया है। बिल्डिंग की लिफ्ट हाईवे के तीन मालों पर नहीं रुकती है।
हाईवे बिल्डिंग से सटा हुआ नहीं है इसके नीचे बना ब्रिज हाईवे को सहारा देता है। हाइवे के आस-पास एक खास स्ट्रक्चर बनाया गया है जो गाड़ियों के शोर और वाइब्रेशन को बिल्डिंग में जाने से रोकता है।

इस बिल्डिंग की छत पर एक हैलीपेड भी बना है। 1992 में बनकर तैयार हुई इस बिल्डिंग का नक्शा 198२ में तैयार किया गया था। मगर इसके परमिट को रोक दिया गया था।
sabhar : bhaskar.com
एडिसन की मशीन के जरिए आत्माओं से बातें करने का दावा
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जुलाई 09, 2013 in
कोलकाता. विक्का धर्म की एक पुजारिन ने वैज्ञानिक थॉमस एडिसन की ‘स्पिरिट मशीन’ से आत्माओं से बातें करने का दावा किया है। ऐसा माना जाता है कि आत्माओं से बातचीत करने के लिए एडिसन ने यह मशीन बनाई थी। पुजारिन इप्सिता रॉय चक्रवर्ती ने अपनी नई किताब ‘स्पिरिट्स आई हैव नोन’ में दावा किया है कि एडिसन ने ‘स्पिरिट मशीन’ या ‘स्पिरिट फोन’ का भी आविष्कार किया था।
इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने बताया कि एडिसन का यह उपकरण एक फ्रिक्वेंसी पर काम करता है। जिससे उन तरंगों को पकड़ा जा सकता है जिनकी मदद से आत्माओं का पता लगाया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि एडिसन और उनके असिस्टेंट डॉ. मिलर हचिन्सन आत्माओं से बातचीत करने के लिए एक मशीन बनाने पर काम कर रहे थे। लेकिन उनकी सफलता को लेकर संदेह है। इप्सिता के मुताबिक उन्होंने एक वकील की मृत पत्नी की आत्मा से बातचीत की।
शरीर खत्म होता है तत्व नहीं इप्सिता ने कहा कि एडिसन का मानना था कि हमारा शरीर हजारों तत्वों से बना है। जब शरीर खत्म हो जाता है तो ये तत्व ही रह जाते हैं। वे शरीर से अलग हो जाते हैं। लेकिन खत्म नहीं होते और उनसे संपर्क किया जा सकता है। उनका मानना था कि यदि हम कभी इनसे संपर्क स्थापित करने में सफल रहे तो यह केवल वैज्ञानिक तरीकों से ही संभव होगा। sabhar : baskar.com
इस नाई के पास है अरबों की संपति, आज भी काटते हैं लोगों के बाल
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जुलाई 09, 2013 in
सफलता की बुलंदियों को हर इंसान छूना चाहता है. सफल लोगों के ठाठ-बाट को देख आपमें-हममें भी सफल होने की चाहत जोर मारने लगती है. लेकिन इसके लिए कोई जादू की छड़ी आज तक बनी नहीं. ना ही कोई जिन्न हुआ जो आपकी आज्ञा मान ले और आपको रातों-रात सफल बना दे. यह ऐसी चीज है, जिसके लिए आपको कड़ी मेहनत और लगन की जरूरत होती है. तभी आपकी सफलता और उसके लिए किए गए संघर्ष की कहानियां लोग सुनते-सुनाते हैं, पढ़ते हैं.
रतन टाटा, मुकेश अंबानी, मार्क जुकरबर्ग को आज कौन नहीं जानता? लेकिन क्या ये सारे लोग पैदा होते ही सफलता का स्वाद चख चुके थे? या इनकी सफलता के पीछे इनका संघर्ष, इनका परिश्रम और इनकी लगन है? इन नामचीन लोगों के अलावा और भी कई ऐसे नाम हैं, जिन्होंने अपने मेहनत के दम पर सफलता का इतिहास रचा. बैंग्लोर के रमेश बाबू कभी एक मामूली से नाई हुआ करते थे. लेकिन अपनी दूरदृष्टि, मेहनत और लगन से आज अरबों के मालिक हैं. इनके पास रोल्स रॉयस, मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू जैसे लग्जरी कारों का काफिला है.
रमेश बाबू
इन सज्जन का नाम है रमेश बाबू और इनकी उम्र् है महज 41 साल। जब वे 7 साल के थे तो उनके पिता गुजर गए। पिता वहां नाई का काम रते थे। रमेश बाबू की मां ने लोगों के घरों में खाना पकाने का काम किया ताकि बच्चों का पेट भर सकें। उन्होंने अपने पति की दुकान महज 5 रुपए महीना पर किराए में दे दी।
रमेश बाबू तमाम कठिनाई के बावजूद पढ़ाई करते थे। उन्होंने इलैक्ट्रोनिक्स में डिप्लोमा किया। 1989 में उन्होंने पिता की दुकान वापस लेकर उसे नए सिरे से चलाया। इस दुकान को मॉडर्न बनाकर उन्होंने खूब पैसे कमाए और एक मारुति वैन खरीद ली। लेकिन चूंकि वह कार खुद नहीं चला पाते थे तो उन्होंने कार को किराए पर देना शुरु कर दिया। इस तरह से उन्होंने अपनी कंपनी रमेश टूर ऐंड ट्रेवल्स की शुरुआत की।
आज रमेश बाबू के पास 90 कारों का काफिला है इनमें मर्सिडीज से लेकर बीएमडब्ल्यू तक है। वह रॉल्स रॉयस जैसी महंगी कारें भी चलाते हैं जिनका एक दिन का किराया 50,000 रुपए तक है।
रमेश बाबू के पास 60 से भी ज्यादा ड्राइवर हैं। लेकिन आज भी उनका सैलून इनर स्पेस चल रहा है, जिसमें वो हर दिन 2 घंटे ग्राहकों का बाल काटते हैं।
sabhar ; bhaskar.com
अश्लील डांस पड़ेगा महंगा, गिरफ्तार हो सकती हैं मल्लिका शेरावत
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जुलाई 09, 2013 in अश्लील डांस पड़ेगा महंगा, गिरफ्तार हो सकती हैं मल्लिका शेरावत
वडोदरा. फिल्मी दुनिया की हॉट क्वीन मल्लिका शेरावत के लिए सोमवार का दिन बुरी खबर लेकर आया तो ऋषि कपूर की पत्नी और रणबीर कपूर की मां नीतू सिंह ने अपना जन्मदिन मनाया। मल्लिका को वडोदरा की एक कोर्ट ने अश्लील डांस के मामले में वारंट जारी किया है। हालांकि मल्लिका के लिए जमानती वारंट जारी किया गया है लेकिन जिस तरह से वे कोर्ट में पेश नहीं हो रही हैं यह उन पर भारी भी पड़ सकता है। वह सोमवार को भी कोर्ट में पेश नहीं हुईं।
31 दिसंबर-2006 की रात मुंबई के जे डब्ल्यू मेरिएट होटल में मल्लिका ने कथित अश्लील नृत्य किया था। आरोप है कि डांस के दौरान ही मल्लिका ने एक युवक की पैंट उतार दी थी। कोर्ट ने एक फिल्म की शूटिंग के लिए मल्लिका के विदेश जाने की खबर पर यह वारंट जारी किया। मल्लिका पिछले काफी समय से कोर्ट में पेश नहीं हो रही हैं।
आज युवा लोकप्रिय सितारे रणबीर कपूर की मां और निष्णात चरित्र अभिनेता ऋषि कपूर की पत्नी नीतू(सिंह) कपूर का जन्मदिन है। उनका परिचय मात्र सुपर स्टार की मां या लंबी सार्थक पारी खेलने वाले की पत्नी ही नहीं है, उन्होंने स्वयं लंबी पारी खेली है।
बाल कलाकार परंतु केन्द्रीय दोहरी भूमिकाओं ‘दो कलियां’ से ‘दो दूनी चार’ तक उन्होंने गहरा प्रभाव छोड़ा है और अभी खेल जारी है। नीतू रणबीर कपूर अभिनीत अभिनव कश्यप की ‘बेशर्म’ में लेडी इंस्पेक्टर बुलबुल पांडे बनी हैं और उनके पति इंस्पेक्टर चुलबुल पांडे हैं।
ज्ञातव्य है कि ‘दबंग’ के निर्देशक की यह दूसरी फिल्म है और उसमें सलमान खान ने इंस्पेक्टर चुलबुल पांडे की भूमिका इतनी सफलतापूर्वक निभाई थी कि यह उनका ब्रांड हो चुका है और इस ब्रांड चरित्र को रचने का श्रेय फिल्म के लेखक दिलीप शुक्ला व अभिनव को जाता है। नैतिकता का तकाजा है कि लेखक को भी धन्यवाद दिया जाना चाहिए, परंतु इन मूल्यों को लोप हुए लंबा वक्त गुजर गया।
बहरहाल, नीतू कपूर ने हबीब फैजल की ‘दो दूनी चार’ में आदर्शवादी गणित शिक्षक की पत्नी की भूमिका बड़े ही प्रभावोत्पादक ढंग से की थी। पटकथा पूरी तरह गणित शिक्षक ऋषि कपूर के पक्ष में थी और ऐसी पटकथा में दृश्य चुराना आसान नहीं था, गोया कि शेर के सामने बकरी चारा चर ले और शेर से आंख भी मिलाए। याद आता है कि नीतू सिंह ने फिल्म ‘चोरनी’ में भी कमाल का अभिनय किया था। shabhar : bhaskar.com
शनिवार, 22 जून 2013
यह है दुनिया का सबसे लंबा केबिल पुल, चीन ने इसे 7 साल में बनाया
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जून 22, 2013 in

चीन ने विश्व का सबसे लंबा और चौड़ा केबल पुल तैयार किया है। यह चीन की हैंगझू बे के शाओजियांग में बनाया गया है। इस पुल की लंबाई 6.2 मील (10 किमी) है। इस पुल का नाम जियाजिंग-शाओजिंग सी ब्रिज है। इसे तैयार करने में चीन को सात साल लग गए। इस पुल की कई खासियतें हैं, जो अपने-आप में बेहद अनोखी हैं।

यह पुल मुख्य रूप से दो केबल-टॉवरों पर टिका हुआ है। इन दोनों टावरों के बीच 745 फीट एयर डिस्टेंस है। पुल की मुख्य बॉडी 2,560 फीट तक फैली है।

यह पुल एक केबल पर टिका है। कई टॉवर हैं, जिनसे केबल जुड़ी हुई हैं। इससे पुल के डेक को सपोर्ट मिला हुआ है।

चीन ने विश्व का सबसे लंबा और चौड़ा केबल पुल तैयार किया है। यह चीन की हैंगझू बे के शाओजियांग में बनाया गया है। इस पुल की लंबाई 6.2 मील (10 किमी) है। इस पुल का नाम जियाजिंग-शाओजिंग सी ब्रिज है। इसे तैयार करने में चीन को सात साल लग गए। इस पुल की कई खासियतें हैं, जो अपने-आप में बेहद अनोखी हैं।
यह पुल मुख्य रूप से दो केबल-टॉवरों पर टिका हुआ है। इन दोनों टावरों के बीच 745 फीट एयर डिस्टेंस है। पुल की मुख्य बॉडी 2,560 फीट तक फैली है।
यह पुल एक केबल पर टिका है। कई टॉवर हैं, जिनसे केबल जुड़ी हुई हैं। इससे पुल के डेक को सपोर्ट मिला हुआ है।
विशिष्ट ट्रैवलिंग वाहन 60 मील प्रति घंटे की स्पीड से इस पुल से गुजर सकेंगे, जबकि आम आदमी की मोटरबाइक और कारों की गति 45 मील से अधिक नहीं होगी।
यह पुल हैकांग जिले की जियमेन से माकिंग रोड पर शुरू होता है और झांगझू के हुजहई लांगहई में समाप्त होता है। सिक्स लेन पुल को बनाने में सात साल का वक्त लगा। विगत 28 मई को इस पुल को आम ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया। sabhar : bhaskar.com
शनिवार, 12 जनवरी 2013
जर्मन एक्टर पर बेटी ने लगाया रेप का आरोप
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जनवरी 12, 2013 in
sabhar :
दुनिया क्लाउस किंस्की को फिट्जकराल्डो जैसी महान फिल्मों के शानदार हीरो
के रूप में याद करती है लेकिन उनकी बेटी ने पिता पर बचपन में 14 साल तक
बलात्कार करने का आरोप लगाया है. आरोप का जिक्र बेटी पोला किंस्की की किताब
में है.
क्लाउस किंस्की की 1991 में मौत हो गई और तब उनकी उम्र 65 साल थी. उनकी
बेटी पोला किंस्की अब 60 साल की हो गई हैं और पिता की मौत के 20 साल बाद
उन्होंने इस बारे में अपनी जुबान खोली है. पोला ने बताया, "मैं सालों तक
चुप रही क्योंकि वे मुझे इस बारे में बात करने से मना करते थे." पोला के
मुताबिक क्लाउस किंस्की ने छह सात साल की उम्र से ही उनके साथ यौन हरकतें
शुरू कर दी थी और 9 साल की उम्र में पहली बार सेक्स किया.
पोला किंस्की
14 साल तक एक मशहूर पिता अपनी बेटी के साथ यौन दुराचार करता रहा. बचपन में
ही जवान बनने को मजबूर कर दी गई पोला किंस्की इन अत्याचारों की वजह से अपनी
जवानी के दिनों में हमेशा गलती और शर्म के अहसास के नीचे दबी रहीं और कभी
भी सामान्य जिंदगी नहीं जी सकीं.
क्लाउस अपनी बेटी के साथ सेक्स करते और इसे सामान्य बात बताते. पोला के मुताबिक, "भयानक यह था कि एक बार उन्होंने मुझसे कहा कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और दुनिया भर के पिता अपनी बेटियों के साथ ऐसा करते हैं." इसी महीने छपने वाली पोला किंस्की की आत्मकथा, "किंडरमुंड" का मतलब है, बच्चों के मुख से. पोला ने बताया है कि क्लाउस पहले उनके साथ बलात्कार करते और फिर उन्हें महंगे तोहफे लाकर देते. स्टर्न नाम की एक पत्रिका से बातचीत में पोला ने कहा, "वह रेशमी गद्दे पर रखे छोटे से सेक्स खिलौने के रूप में मुझे भुगतान कर रहे थे."
फिट्जकराल्डो का एक दृश्य
पोलैंड में जन्मे क्लाउस किंस्की ने जर्मन सेना की तरफ से दूसरे विश्व
युद्ध में भी हिस्सा लिया था और उनके मानसिक रूप से बीमार होने की बात
रिकॉर्ड में दर्ज है. क्लाउस किंस्की ने कई बार खुदकुशी करने की भी कोशिश
की थी. कहीं भी अचानक आक्रामक हो जाना किंस्की की आदत थी. फिल्मी पर्दे पर
उन्होंने पागल, उन्मादी और आक्रामक रूपों को जिंदा किया था. ब्लैक एंड
व्हाइट नोसेफेरातु में ड्रैकूला बन चुके क्लाउस किंस्की के खाते में रैथ ऑफ
गॉड से लेकर कई और भी इस तरह की डरावनी भूमिकाएं हैं और कहा जाता है कि वह
निजी जिंदगी में भी ऐसे ही थे.
पोला का का कहना है कि उन्होंने किताब इसलिए लिखी ताकि इस तरह की तकलीफ से गुजर रहे लोगों की मदद कर सकें. साथ ही यह भी सच है कि वो अपने पिता के बारे में अच्छा सुनते सुनते पक चुकी हैं. वो कहती हैं, "मैं अब और नहीं सुनना चाहतीः तुम्हारे पिता कूल, जीनियस थे, मैंने हमेशा उन्हें प्यार किया. मैं हमेशा जवाब देती हां... हां. उनकी मौत के बाद तो हालत और खराब हो गए."
क्लाउस और नस्तास्या किंस्की
पोला को इस बारे में कुछ नहीं पता कि क्या उनके भाई बहनों के साथ ही क्लाउस
ने ऐसा ही किया. क्लाउस किंस्की की दूसरी और तीसरी बीवी से एक बेटी और
बेटा और हैं. फिल्म स्टार नाताश्या किंस्की और बेटा निकोलाई को मिलाकर उनके
तीनों बच्चे अभिनय की दुनिया में हैं. पोला की सौतेली बहन नस्तास्या
किंस्की ने अपने बहन की तारीफ की है. जर्मन अखबार बिल्ड के लिए लिखे एक
आर्टिकल में उन्होंने लिखा है, मुझे "गहरा सदमा" लगा है.
यह एक कठिन स्थिति है लेकिन नस्तास्या को अपनी बहन पर गर्व है जिन्होंने हिम्मत जुटा कर किताब लिखी, किसी को ऐसे नहीं बताया. उन्होंने यह भी कहा है, "मेरी बहन एक नायिका है क्योंकि उसने अपना दिल, अपनी आत्मा साफ कर ली है और अपने भविष्य को रहस्य के बोझ से मुक्त कर लिया है.
जर्मनी में सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबार बिल्ड ने पोला किंस्की के लिए लिखा है कि उन्हें "एक नायिका" समझा जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने इस बारे में बात करने का साहस दिखाया है जो शायद हजारों बेटियां कहने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं.
एनआर/एमजे (डीपीए, एपी, रॉयटर्स)
क्लाउस अपनी बेटी के साथ सेक्स करते और इसे सामान्य बात बताते. पोला के मुताबिक, "भयानक यह था कि एक बार उन्होंने मुझसे कहा कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और दुनिया भर के पिता अपनी बेटियों के साथ ऐसा करते हैं." इसी महीने छपने वाली पोला किंस्की की आत्मकथा, "किंडरमुंड" का मतलब है, बच्चों के मुख से. पोला ने बताया है कि क्लाउस पहले उनके साथ बलात्कार करते और फिर उन्हें महंगे तोहफे लाकर देते. स्टर्न नाम की एक पत्रिका से बातचीत में पोला ने कहा, "वह रेशमी गद्दे पर रखे छोटे से सेक्स खिलौने के रूप में मुझे भुगतान कर रहे थे."
पोला का का कहना है कि उन्होंने किताब इसलिए लिखी ताकि इस तरह की तकलीफ से गुजर रहे लोगों की मदद कर सकें. साथ ही यह भी सच है कि वो अपने पिता के बारे में अच्छा सुनते सुनते पक चुकी हैं. वो कहती हैं, "मैं अब और नहीं सुनना चाहतीः तुम्हारे पिता कूल, जीनियस थे, मैंने हमेशा उन्हें प्यार किया. मैं हमेशा जवाब देती हां... हां. उनकी मौत के बाद तो हालत और खराब हो गए."
यह एक कठिन स्थिति है लेकिन नस्तास्या को अपनी बहन पर गर्व है जिन्होंने हिम्मत जुटा कर किताब लिखी, किसी को ऐसे नहीं बताया. उन्होंने यह भी कहा है, "मेरी बहन एक नायिका है क्योंकि उसने अपना दिल, अपनी आत्मा साफ कर ली है और अपने भविष्य को रहस्य के बोझ से मुक्त कर लिया है.
जर्मनी में सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबार बिल्ड ने पोला किंस्की के लिए लिखा है कि उन्हें "एक नायिका" समझा जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने इस बारे में बात करने का साहस दिखाया है जो शायद हजारों बेटियां कहने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं.
एनआर/एमजे (डीपीए, एपी, रॉयटर्स)
DW.DE
मंगलवार, 8 जनवरी 2013
ये पांचों ऐप्स हैं या इंसान की जिंदगी बदलने वाले जादूगर...हैरान करने वाली हैं इनकी खूबियां
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जनवरी 08, 2013 in

आज की तारीख में आपकी करीब-करीब हर जरूरत को पूरा करने के लिए
ऐप मौजूद हैं। हम ऐसे ही पांच ऐप्स पर नजर डालते हैं, जिन्होंने भारतीय
बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
दस वर्षीया श्वेता ने गणित में अपने खराब प्रदर्शन में शानदार सुधार
किया है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसके लिए उसे किसी ट्यूटर ने नहीं,
बल्कि एक मोबाइल अप्लीकेशन ‘टैबटर’ से सहायता मिली। ‘टैबटर’ ऐपल के आईओएस
प्लेटफार्म पर चलने वाला एक विशेष एजुकेशनल ऐप है। इस ऐप को डेवलप करने
वाली कंपनी ‘प्राजऐज’ उन हजारों कंपनियों में से एक है जो देश में स्मार्ट
मोबाइल फोन, टैबलेट्स और अन्य गैजेट्स के बढ़ रहे बाजार में अपने लिए
संभावनाएं तलाश रहीं हैं।
स्मार्टफोन धारकों की बढ़ती संख्या ने इस बाजार को और आकर्षक बना दिया
है। एक अनुमान के मुताबिक 2016 तक देश, दुनिया के अग्रणी ऐप बाजारों में
शामिल हो जाएगा। भारत, उस समय तक दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका को भी
पीछे छोड़ दे तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन
ऑफ इंडिया के मुताबिक वर्तमान में देश में ऐप का बाजार करीब 1800 करोड़
रुपए का है।
टैबटर
कठिन सवाल करे चुटकियों में हल
बिट्स पिलानी और आईआईटी के पूर्व छात्रों ने टैबटर ऐप को विकसित किया
है, जिसके एडॉप्टिव लर्निग सॉफ्टवेयर को अमेरिका और भारत के 14 स्कूलों के
छात्र इस्तेमाल कर रहे हैं। प्राजऐज नामक कंपनी ने इस ऐप की डिजाइन को अपने
चेन्नई और बेंगलुरू स्थित डेवलपमेंट सेंटर में तैयार किया है। जीईएआर
इनोवेटिव इंटरनेशनल स्कूल में गणित की टीचर संध्या खांडेकर कहती हैं, ‘हम
भी बच्चों की तरह ही उत्साहित हैं।’ बेंगलुरू के इसी स्कूल में बच्चे
आईपैड्स के जरिए पढ़ाई करते हैं। इस स्कूल के संस्थापक और चेयरमैन एम.
श्रीनिवासन का कहना है, ‘यहां तक कि जो छात्र विषय में कमजोर हैं वो भी
तेजी से प्रॉब्लम सॉल्व करने लगे हैं।’ उनका कहना है कि हमारा उद्देश्य हर
किसी को अपना लक्ष्य खुद हासिल करने के योग्य बनाना है। ‘हम किसी छात्र पर
उसी गति और मार्ग पर चलने के लिए दबाव नहीं बनाते जिस मार्ग और गति से
दूसरे जाते हैं।’ इस स्कूल की योजना अन्य विषयों जैसे अंग्रेजी और विज्ञान
को भी इस ऐप में कस्टमाइज करने की है। प्राजऐज एक कस्टमाइज वर्शन क्रिएट कर
उसे मोनेटाइज करना चाहता है।
म्यूजिगुरु
यात्रा के दौरान सिखाए संगीत
काम के दबाव में अक्सर यात्रा करने वाले पेशेवरों को ध्यान में रखकर
इस ऐप को बनाया गया है। ऐसे लोगों को अपनी पसंद की चीजों के लिए समय नहीं
मिलता। म्यूजिगुरु एक मोबाइल अप्लीकेशन है, जिसे बेंगलुरू की एक कंपनी
लेविटम सॉफ्टवेयर सिस्टम ने लॉन्च किया है। यह एक वीडियो आधारित लर्निग
प्लेटफार्म है, जहां यूजर्स को संगीत सिखाया जाता है। आईओएस प्लेटफार्म पर
आधारित यह ऐप यूजर्स को यात्रा करते समय या घर से बाहर रहते हुए म्यूजिक
सीखने का मौका देता है। इसके सह संस्थापक अरविंद कृष्णास्वामी के मुताबिक
यह उन म्यूजीशियन और टीचर्स के लिए भी यह शानदार ऐप है जो अपना कंटेंट और
ब्रांड बेचना चाहते हैं। इस ऐप को डेवलप करने वालों की योजना, इसमें संगीत
देने वाले म्यूजीशियन को कमाई बांटना हैं। इनकी योजना कंटेंट को एक्सेस
करने के लिए विभिन्न म्यूजिक कॉलेजों के साथ समझौता करने की भी है।
जाना केयर
मधुमेह के मरीजों की करे जांच
जाना केयर को विकसित करने का खर्च मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ
टेक्नोलॉजी (एमआईटी) और हार्वड बिजनेस स्कूल के एक पूर्व छात्रों के संगठन
ने उठाया था। यह मधुमेह के मरीजों की सहायता के लिए विकसित किया गया एक
शानदार ऐप है। बेंगलुरू स्थित सेंटर में डेवलप किए गए इस ऐप से मधुमेह के
मरीज अपना ब्लड ग्लूकोज लेवल और हेल्थ पैरामीटर को एक सेंसर में प्लगइन कर
चेक कर सकते हैं। आपके मोबाइल फोन के लिए इस सेंसर को जाना केयर ने ही
डेवलप किया है। इस ऐप ने आपके स्मार्टफोन को एक बेहद सस्ती जांच डिवाइस में
बदल दिया है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र सिद्धांत जेना और
एमआईटी के रिसर्चर माइकल डेपा ने इस ऐप के फंडिंग संयुक्त रूप से की है। इस
कंपनी के सलाहकार बोर्ड में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर तरुण खन्ना
और नारायण हृदयालय के संस्थापन और जाने माने हृदय रोग विशेषज्ञ देवी
शेट्टी सलाहकार हैं। कंपनी की योजना इस साल के शुरुआत में इस प्रोड्क्ट को
बाजार उतारने की है। इस तरह अगर आप या आपके घर में कोई व्यक्ति मधुमेह रोग
से पीड़ित है तो उन्हें हर समय ग्लूकोज लेवल की जांच करवाने के लिए किसी
पैथोलॉजी जाने की जरूरत नहीं है।
शॉप सर्किल
खरीदारी बनाए किफायती
इस ऐप को बेंगलुरू की एक डाटा कंपनी एक्टिव क्यूब्स ने डेवलप किया है।
इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को किसी उत्पाद की कीमत के बारे में जानकारी
देना है। इस तरह इस ऐप की मदद से शॉपिंग काफी आसान बन जाती है। इस ऐप की
मदद से कोई उपभोक्ता अपने 10 किलोमीटर के दायरे में उस विशेष उत्पाद पर मिल
रहे ऑफर्स को देख सकता है। एक्टिव क्यूब्स के सीईओ और सह संस्थापक राजेश
वैरियर का कहना है कि अब ग्राहकों को उत्पाद की कीमत पता करने के लिए अपना
बाजार की हर दुकान पर जाकर कीमती समय खर्च करने की जरूरत नहीं है। इस ऐप की
मदद से आप घर बैठे विभिन्न खुदरा स्टोर्स से प्राप्त कीमत की तुलना कर
अपने लिए किफायती स्टोर की पहचान कर सकते हैं, जिसके बाद आप सीधे उक्त
दुकान से सामान मंगवा सकते हैं। हाल में बाजार में आए इस ऐप को कई हजार
लोगों ने डाउनलोड किया है। इस ऐप को बनाने वाली कंपनी का उद्देश्य रिटेलर्स
को इस ऐप से जोड़कर विज्ञापन के जरिए पैसा कमाना है।
तवांग
संगीत का शानदार खजाना
तवांग को डेवलप करने वालों के मुताबिक अच्छी गुणवत्ता के म्यूजिकल
कंटेंट को वैध तरीके से उपलब्ध कराना ही, इस ऐप को इस समूह के अन्य ऐप्स से
अलग करता है। बीते साल नवंबर में इस ऐप को लॉन्च किया गया, जिसे साउंड
वेंचर्स ने डेवलप किया है। ऐप के जरिए दुनिया के लोगों को अच्छा म्यूजिक
उपलब्ध कराने के लिए जाने-माने 50 संगीतकारों से उनके संगीत को उपभोक्ताओं
तक पहुंचाने के लिए समझौता किया गया है। साउंड वेचर्स के सह संस्थापक
विष्णु रानेड के मुताबिक यह ऐप ऐसा म्यूजिक आपके पास पहुंचाता हैं जो आसानी
उपलब्ध नहीं हैं। इस फ्री ऐप की मदद से आप छह हजार से अधिक अलबम के 75
हजार से अधिक गाने सुन सकते हैं। इन गानों में चार हजार से अधिक कलाकार
शामिल हैं। डेवलपर्स की योजना इस ऐप में गानों की संख्या एक लाख से अधिक
करने की है। साथ ही कंपनी नए साल में इस ऐप के नए वर्शन भी ला सकती है। ऐसे
में अगर आप खास तरह के म्यूजिक को पसंद करते हैं तो इस ऐप को आजमा सकते
हैं।
sabhar : bhaskar.com
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