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शनिवार, 20 अक्टूबर 2012

ये है सस्ता लेकिन इन बीमारियों का सबसे पक्का इलाज

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आयुर्वेद में अदरक बहुत उपयोगी माना गया है। अदरक पाचनतंत्र के लिए लाभकारी होता है। कब्ज और डायरिया जैसी बीमारियों से भी बचाव करता है। इसीलिए भोजन में अदरक का प्रयोग किया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं अदरक  के कुछ घरेलू प्रयोग जिनसे आप कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स का इलाज कर सकते हैं...

-अपनी गर्म तासीर की वजह से अदरक हमेशा से सर्दी-जुकाम की बेहतरीन दवाई मानी गई है। अगर आपको सर्दी या जुकाम की प्रॉब्लम है, तो आप इसे चाय में उबालकर या फि र सीधे शहद के साथ ले सकते हैं। साथ ही, इससे हार्ट बर्न की परेशानी भी दूर करता है।

- रोज सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ अदरक का एक टुकड़ा खाएं। इससे खूबसूरती बढ़ती है।

- अदरक का एक छोटा टुकड़ा छीले बिना (छिलकेसहित) आग में गर्म करके छिलका उतार दें। इसे मुंह में रख कर आहिस्ता-आहिस्ता चबाते चूसते रहने से अन्दर जमा और रुका हुआ बलगम निकल जाता है और सर्दी-खांसी ठीक हो जाती है।

-बहुत कम लोग जानते हैं कि अदरक एक नेचरल पेन किलर है, इसलिए इसे आर्थराइटिस और दूसरी बीमारियों में उपचार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

-अदरक कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करता है। दरअसल, यह कोलेस्ट्रॉल को बॉडी में एब्जॉर्व होने से रोकता है।

-कैंसर में भी अदरक बेहतरीन दवाई मानी गई है। खासतौर पर ओवेरियन कैंसर में यह काफी असरदार है।

-यह हमारे पाचन तंत्र को फिट रखता है और अपच दूर करता है।

-अदरक के इस्तेमाल से ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है।

-अदरक खाने से मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया भी मर जाते हैं
sabhar : bhaskar.com
 
 

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मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा

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PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा
PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा

PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा
लंदन। उल्का पिंडों की वर्षा में पृथ्वी पर गिरे मंगल गह के एक छोटे से पत्थर के टुकड़े की अमेरिका में 1,60,000 पाउंड में नीलामी होगी। महज 3.5 इंच लंबा और 326 ग्राम वजनी यह टुकड़ा मंगल की सतह का हिस्सा है और लाखों साल पहले एक एस्ट्रॉयड (क्षुद्रग्रह) के प्रभाव के चलते वहां से छिटक गया। 
अंतरिक्ष में घूमते हुए यह टुकड़ा पिछले साल मोरक्को के रेगिस्तान में उल्का पिंडों की वर्षा के साथ जमीन पर गिरा। डेली मेल की खबर के अनुसार टिसिंट गांव में गिरे इस एस्ट्रॉयड को उल्का पिंडों को एकत्रित करने वाली एक अमेरिकी कंपनी ने इसे खरीद लिया और इस साल की शुरूआत में लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम को बेचे।
ऐसे अनेक टुकड़ों में इसे भी बेच दिया गया। संग्रहालय ने मंगल से गिरे टुकड़े को अपने पास रखा और अब इसे नीलामी के लिए रखा गया है। यह पत्थर आग्नेय चट्टान का हिस्सा है, जो ठोस रूप में बदले लावा से बना है।
गल की सतह पर बीते 6 अगस्त से मौजूद रोवर क्यूरियॉसिटी ने बहुत पनासा ने कहा कि इन चट्टानों के आकार और आकतियां इस धारा की गति और गहराई का अंदाजा देती हैं। क्यूरियॉसिटी विज्ञान के सह जांचकर्ता रेबेका विलियम्स ने कहा कि इनकी आकृतियां बताती हैं कि इन्हें यहां लाया गया है और इनका आकार बताता है कि इन्हें हवा यहां लेकर नहीं आई। ये यहां तक पानी के बहाव के साथ आए हैं। 

PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा



पहले तेजी से बहने वाली जलधारा के साथ बहकर वहां तक आई बजरी को खोज निकाला है। इससे पहले वैज्ञानिकों ने लाल ग्रह पर कभी मौजूद रहे पानी का सबूत ढूंढ़ा था, लेकिन पहली बार उन्होंने धारा के साथ बहकर बनी बजरी की पूरी सतह खोजी है।
अभियान के वैज्ञानिक जॉन ग्रोतजिंगर ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि सतह से निकाला गया चट्टानी अंश ऐसा दिखता है, मानो किसी ने फुटपाथ की एक पट्टी पर हथौड़े मार-मारकर उसे बनाया हो। लेकिन यह वाकई किसी पुरानी धारा की बजरी की सतह का एक अंश है। क्यूरियॉसिटी की भेजी गई तस्वीरों में एक दूसरे से जुड़े हुए पत्थर चट्टानों की सतह के बीच मिले हैं। यह तस्वीर गेल नामक गड्ढे के उत्तरी भाग और शार्प नामक पर्वत के आधार के बीच मिला है। क्यूरियॉसिटी इसी दिशा में बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का आकलन है कि पानी तीन फीट प्रति सेकेंड की रफ्तार से बह रहा था और उसकी गहराई टखने से कमर के बीच रही होगी। क्यूरियॉसिटी नामक यह रोवर मंगल की सतह पर जीवन की संभावना की तलाश के लिए 2 वर्षीय अभियान पर है। इसे यह भी पता लगाना है कि क्या कभी पूर्व में भी मंगल पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियां थीं।बिल्कुल पृथ्वी जैसी है चट्टान : क्यूरियॉसिटी से ली गई तस्वीर की तुलना पृथ्वी पर पानी के बहाव से बजरी बनी चट्टान से की गई है। दोनों में गोल बजरी दिखाई दे रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इतने भारी पत्थर के टुकड़े हवा से उड़कर एक से दूसरे स्थान तक नहीं पहुंच सकते। ऐसी स्थिति तभी बनती है जब पानी के दबाव से चट्टानों का निर्माण होता है। इन्हें सेडिमेंटरी रॉक कहते हैं। इसमें बजरी के कई स्तर होते हैं।नासा ने रद्द किया मलबा हटाने का मिशन : ह्यूस्टन त्न नासा ने कहा कि एक भारतीय रॉकेट और रूसी उपग्रह के अवशेष से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) को कोई खतरा नहीं है। अंतरिक्ष एजेंसी ने ट्विटर के जरिए कहा कि आईएसएस के प्रबंधकों ने फैसला किया है कि इन मलबों से आईएसएस को कोई खतरा नहीं है और अब मिशन की कोई जरूरत नहीं है। इससे पहले नासा ने कहा था कि वह अंतरिक्ष में मलबे पर नजर बनाए हुए है, जो आईएसएस से टकरा सकते हैं।क्‍यूरियोसिटी रोवर को मंगल पर कई जगहों (इस तस्‍वीर सहित) पर बहते पुराने झरनों के सबूत भी मिले हैं। नासा के वैज्ञानिकों की टीम ने इस तस्‍वीर में दिख रहे चट्टान का नाम 'Hottah' रखा है। कनाडा के उत्‍तर पश्चिम में इस नाम से एक झील है।
 PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा
साभार :भास्कर .कॉम
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PHOTOS : 1.50 करोड़ रुपये में बिकेगा मंगल ग्रह का टुकड़ा

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भारत में इस साल कम रह सकता है खाद्यान्न उत्पादन: पवार÷

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केंद्रीय कृषि मंत्री ने चालू वर्ष में देश में खाद्यान्न उत्पादन कम रहने के संकेत दिए हैं। कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि भारत का खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 2012.13 में पिछले वर्ष के 25 करोड़ 74.4 लाख टन के रिकार्ड उत्पादन से कम रहेगा लेकिन अनाज की उपलब्धता घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी।

आर्थिक संपादकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में अनुमानित गिरावट को चालू रबी सत्र के उत्पादन से पाटने की कोशिश करेगी। पवार ने कहा कि इस वर्ष उत्पादन निश्चित तौर पर पिछले वर्ष से कम रहेगा। पिछला वर्ष एक खास वर्ष था, हमारे यहां रिकार्ड उत्पादन हुआ। पवार से पूछा गया था कि फसल वर्ष 2012-13 (जुलाई से जून) में कुल खाद्यान्न उत्पादन कितना होगा। हालांकि मंत्री ने कहा कि इस वर्ष देश के कुछ भागों में असमान और देर से आए मानसून के कारण उन्हें खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है।

पिछले महीने कृषि मंत्रालय ने कमजोर बरसात तथा कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के 360 से भी अधिक तालुकों में सूखे की स्थिति के कारण खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 10 प्रतिशत घटकर 11 करोड़ 71.8 लाख टन रहने का अनुमान व्यक्त किया था। sabhar : bhaskar.com

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सोमवार, 23 जुलाई 2012

तंत्र ने सेक्‍स को स्प्रिचुअल बनाने का दुनिया में सबसे पहला प्रयास किया था

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OSHO SATSANG LIVE


तंत्र ने सेक्‍स को स्प्रिचुअल बनाने का दुनिया में सबसे पहला प्रयास किया था। खजुराहो में खड़े मंदिर, पुरी और कोणार्क के मंदिर सबूत है। कभी आप खजुराहो की मूर्तियों देखी। तो आपको दो बातें अदभुत अनुभव होंगी। पहली तो बात यह है कि नग्‍न मैथुन की प्रतिमाओं को देखकर भी आपको ऐसा नहीं लगेगा कि उन में जरा भी कुछ गंदा है। जरा भी कुछ अग्‍ली है। नग्‍न मैथुन की प्रतिमाओं को देख कर कहीं भी ऐसा नहीं लगेगा कि कुछ कुरूप है; कुछ गंदा है, कुछ बुरा है। बल्‍कि मैथुन की प्रतिमाओं को देखकर एक शांति, एक पवित्रता का अनुभव होगा जो बड़ी हैरानी की बात है। वे प्रतिमाएं आध्‍यात्‍मिक सेक्‍स को जिन लोगों ने अनुभव किया था, उन शिल्‍पियों से निर्मित करवाई गई है।
उन प्रतिमाओं के चेहरों पर……आप एक सेक्‍स से भरे हुए आदमी को देखें, उसकी आंखें देखें,उसका चेहरा देखें, वह घिनौना, घबराने वाला, कुरूप प्रतीत होगा। उसकी आंखों से एक झलक मिलती हुई मालूम होगी। जो घबराने वाली और डराने वाली होगी। प्‍यारे से प्‍यारे आदमी को, अपने निकटतम प्‍यारे से प्‍यारे व्‍यक्‍ति को भी स्‍त्री जब सेक्‍स से भरा हुआ पास आता हुआ देखती है तो उसे दुश्‍मन दिखाई पड़ता है, मित्र नहीं दिखाई पड़ता। प्‍यारी से प्‍यारी स्‍त्री को अगर कोई पुरूष अपने निकट सेक्‍स से भरा हुआ आता हुआ दिखाई देगा तो उसे आसे भीतर नरक दिखाई पड़ेगा, स्‍वर्ग नहीं दिखाई पड़ सकता।
लेकिन खजुराहो की प्रतिमाओं को देखें तो उनके चेहरे को देखकर ऐसा लगता है, जैसे बुद्ध का चेहरा हो, महावीर का चेहरा हो, मैथुन की प्रतिमाओं और मैथुन रत जोड़े के चेहरे पर जो भाव है, वे समाधि के है, और सारी प्रतिमाओं को देख लें और पीछे एक हल्‍की-सी शांति की झलक छूट जाएगी और कुछ भी नहीं। और एक आश्‍चर्य आपको अनुभव होगा।
आप सोचते होंगे कि नंगी तस्‍वीरें और मूर्तियां देखकर आपके भीतर कामुकता पैदा होगी,तो मैं आपसे कहता हूं, फिर आप देर न करें और सीधे खजुराहो चले जाएं। खजुराहो पृथ्‍वी पर इस समय अनूठी चीज है। अध्यात मिक जगत में उस से उत्‍तम इस समय हमारे पास और कोई धरोहर उस के मुकाबले नहीं बची है।
लेकिन हमारे कई निति शास्‍त्री पुरूषोतम दास टंडन और उनके कुछ साथी इस सुझाव के थे कि खजुराहो के मंदिर पर मिटटी छाप कर दीवालें बंद कर देनी चाहिए, क्‍योंकि उनको देखने से वासना पैदा हो सकती है। मैं हैरान हो गया।
खजुराहो के मंदिर जिन्‍होंने बनाए थे, उनका ख्‍याल यह था कि इन प्रतिमाओं को अगर कोई बैठकर घंटे भर देखे तो वासना से शून्‍य हो जाएगा। वे प्रतिमाएं आब्‍जेक्‍ट फार मेडि़टेशन रहीं हजारों वर्ष तक वे प्रतिमाएं ध्‍यान के लिए आब्‍जेक्‍ट का काम करती रही। जो लोग अति कामुक थ, उन्‍हें खजुराहो के मंदिर के पास भेजकर उन पर ध्‍यान करवाने के लिए कहा जाता था। कि तुम ध्‍यान करों—इन प्रतिमाओं को देखो और इनमें लीन हाँ जाओ।
अगर मैथुन की प्रतिमा को कोई घंटे भर तक शांत बैठ कर ध्‍यानमग्‍न होकर देखे तो उसके भीतर जो मैथुन करने का पागल भाव है, वह विलीन हो जाता है।
खजुराहो के मंदिर या कोणार्क और पुरी के मंदिर जैसे मंदिर सारे देश के गांव-गांव में होने चाहिए।
बाकी मंदिरों की कोई जरूरत नहीं है। वे बेवकूफी के सबूत है, उनमें कुछ नहीं है। उनमें न कोई वैज्ञानिकता है, न कोई अर्थ, न कोई प्रयोजन है। वे निपट गँवारी के सबूत है। लेकिन खजुराहो के मंदिर जरूर अर्थपूर्ण है।
जिस आदमी का भी मन सेक्‍स से बहुत भरा हो, वह जाकर इन पर ध्‍यान करे और वह हल्‍का लौटेगा शांत लोटेगा। तंत्रों ने जरूर सेक्‍स को आध्‍यात्‍मिक बनाने की कोशिश की थी। लेकिन इस मुल्‍क के नीति शास्त्री और मारल प्रीचर्स है उन दुष्‍टों ने उनकी बात को समाज तक पहुंचने नहीं दिया। वह मेरी बात भी पहुंचने देना नहीं चाहते है। मेरा चारों तरफ विरोध को कोई और कारण थोड़े ही है। लेकिन मैं न इन राजनितिगों से डरती हूं और न इन नीतिशास्‍त्रीयों से। जो सच है वो में कहता रहूंगा। उस की चाहे मुझे कुछ भी कीमत क्‍यों न चुकानी पड़े।
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ओशो द्वारा दिए गए विभिन्न अमृत प्रवचनों का संकलन.. shabhar :http://satsanglive.com

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क्यों करें योग?

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क्यों करें योग? 
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'

...तो नहीं है आपके लिए योग

आप कह सकते हैं कि इस सबके बावजूद हम क्यों करें योग, जबकि हम स्वस्थ हैं, मानसिक और शारीरिक रूप से हमें कोई समस्या नहीं है? ‍तब पहले तो यह जानना जरूरी है कि आपके भीतर आपका 'क्यों' है कि नहीं।

आनंद की अनुभूति : एक होता है सुख और एक होता है दु:ख। जो लोग योग करते हैं उन्हें पहली दफा समझ में आता है कि आनंद क्या होता है। जैसे सेक्स करते समय समझ में आता है कि सुख और दु:ख से अलग भी कोई अनुभूति है। इस तरह योगस्थ चित्त समस्त प्रकार के सुखों से ऊपर आनंद में स्थि‍त होता है। उस आनंद की अनुभूति न भोग में है न संभोग में और न ही अन्य किन्हीं क्षणिक सुखों में।

चेतना का विकास : मोटे तौर पर सृष्ट‍ि और चेतना के वेद और योग में पाँच स्तर बताए गए हैं। यह पाँच मंजिला मकान है- (1) जड़ (2) प्राण (3) मन (4) आत्मा और (5) परमात्मा।

जड़ : आप तमोगुणी हो, अजाग्रत हो तो आप जिंदा होते हुए भी मृत हो अर्थात् आपकी चेतना या आप स्वयं जड़ हो। बेहोशी में जी रहे हो आप। आपकी अवस्था स्वप्निक है। आपको इस बात का जरा भी अहसास नहीं है कि आप जिंदा हैं। आप वैसे ही जीते हैं जैसे क‍ि एक पत्थर या झाड़ जीता है या ‍फिर वैसा पशु जो चलाने पर ही चलता है।

प्राण : प्राण अर्थात फेफड़ों में भरी जाने वाली प्राणवायु जिससे कोई जिंदा है, इस बात का पता चलता है। यदि आपकी चेतना या कि आप स्वयं अपनी भावनाओं, भावुक क्षणों या व्यग्रताओं के गुलाम हैं तो आप प्राणिक चेतना हैं। आपमें विचार-शक्ति क्षीण है। आप कभी भी क्रोधी हो सकते हैं और किसी भी क्षण प्रेमपूर्ण हो सकते हैं। प्राणिक चेतना रजोगुण-प्रधान मानी जा सकती है।

योग का प्रथम सूत्र है- अथ:योगानुशासनम्। योगश्चित्तिवृत्तिनिरोध। अर्थात यदि आप अपने मन और शरीर से थक गए हैं, आपने जान लिया है क‍ि संसार असार है तो अब योग का अनुशासन समझें, क्योंकि अब आपका मन तैयार हो गया है। मन : मन में जीना अर्थात मनुष्य होना। मन का स्वयं का कोई अस्तित्व नहीं है। भावनाओं और विचारों के संगठित रूप को मन कहते हैं। मन के योग में भी कई स्तर बताए गए हैं। विचारशील मनुष्य मन से श्रेष्ठ बुद्धि में जीता है। उसमें तर्क की प्रधानता होती है। जो तर्कातीत है वही विवेकी है।

आत्मा : योग है मन से मुक्ति। जो मनुष्य मन से मुक्त हो गया है, वही शुद्ध आत्मा है, वही आत्मवान है अर्थात उसने स्वयं में स्वयं को स्थापित कर लिया है।

परमात्मा : परमात्मा को ब्रह्म कहा गया है, जिसका अर्थ विस्तार होता है। उस विराट विस्तार में लीन व्यक्ति को ब्रह्मलीन कहा जाता है और जो उसे जानने का प्रयास ही कर रहा है, उसे ब्राह्मण कहा गया। योगी योग बल द्वारा स्वयं को ब्रह्मलीन कर अमर हो जाता है, फिर उसकी न कोई मृत्यु है और न जन्म और यह भी क‍ि वह चाहे तो जन्मे न चाहे तो न जन्मे।

जागरण : चेतना की चार अवस्थाएँ हैं- (1) जाग्रत (2) स्वप्न (3) सुसुप्ति (4) तंद्रा। योगी व्यक्ति चारों अवस्थाओं में जाग्रत रहता है। तंद्रा उसे कहते हैं, जबकि व्यक्ति शरीर छोड़ चीर निद्रा में चला जाता है। ऐसी तंद्रा में भी योगी जागा हुआ होता है।

अधिकतर जागकर भी सोए-सोए से नजर आते हैं अर्थात बेहोश यंत्रवत जीवन। फिर जब सो जाते हैं तो अच्छे और बुरे स्वप्नों में जकड़ जाते हैं और फिर गहरी नींद अर्थात सुसुप्ति में चले जाते हैं वहाँ भी उन्हें स्वयं के होने का बोध नहीं रहता। यह बेहोशी की चरम अवस्था जड़ अवस्था है, तब तंद्रा कैसी होगी सोचें। योग आपकी तंद्रा भंग करता है। वह आपमें इतना जागरण भर देता है कि मृत्यु आती है तब आपको नहीं लगता क‍ि आप मर रहे हैं। लगता है कि शरीर छूट रहा है।

इस परम विस्तृत ब्रह्मांड में धरती पर खड़े आप स्वयं क्या हो, क्यों हो, कैसे हो, कब से हो, हो भी क‍ि नहीं, कब तक रहोगे। मेरा अस्तित्व है कि नहीं। ऐसा सोचने वाले के लिए ही योग है। जिसने योग के अनुशासन को निभाया उसने सुपर कांसेस मन को जाग्रत करने की दिशा में एक कदम बढ़ाया।

स्वयं की स्थिति समझे : योग का प्रथम सूत्र है- अथ:योगानुशासनम्। योगश्चित्तिवृत्तिनिरोध। अर्थात यदि आप अपने मन और शरीर से थक गए हैं, आपने जान लिया है क‍ि संसार असार है तो अब योग का अनुशासन समझें, क्योंकि अब आपका मन तैयार हो गया है, आप मैच्योर हो गए हैं तो अब समझें और अब भी नहीं समझते हैं तो अंधकार में खो जाने वाले हैं। यदि आपके भीतर का 'क्यों' मर गया है तो नहीं है आपके लिए योग।

अतत: : योग उनके लिए है जो अपना जीवन बदलना चाहते हैं। योग उनके लिए है जो इस ब्रह्मांड के सत्य को जानना चाहते हैं। योग उनके लिए भी है जो शक्ति सम्पन्न होना चाहते हैं और योग उनके लिए जो हर तरह से स्वस्थ होना चाहते हैं। आप किसी भी धर्म से हैं, यदि आप स्वयं को बदलना चाहते हैं तो योग आपकी मदद करेगा। आप विचार करें क‍ि आप योग क्यों और क्यों नहीं करना चाहते हैं।
प्रकाशन तिथि:  


Source: http://hi.shvoong.com  http://pratima_avasthi@yahoo.com/

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हिग्स बोसोन से बदलेगी दुनिया

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एक्सपट्र्स का मानना है कि गॉड पार्टिकल की खोज के बाद तकनीक, चिकित्सा और लाइफ साइंस के क्षेत्र में तरक्की होगी

जयपुर। आखिरकार पिछले चार वर्षो की कड़ी मेहनत के बाद वैज्ञानिकों ने हिग्स बोसॉन यानी गॉड पार्टिकल जैसे कण को खोज ही निकाला। लगभग 40 वर्ष पहले इसका नाम पहली बार वैज्ञानिक रूप से सामने आया था। हालांकि दुनिया के सबसे प्राचीन वेद ऋगवेद में ब्रह्मकण के नाम से इसका वर्णन मिलता है।

शहर के एक्सपट्र्स का भी मानना है कि हिग्स बोसॉन की उत्पत्ति से न सिर्फ ब्रह्मांड की अनदेखी परतों का पर्दाफाश होगा, बल्कि कम्यूनिकेशन और मेडिकल की फील्ड में भी नई क्रांति आएगी। शहर में विभिन्न वैज्ञानिकों से मेट्रो मिक्स टीम ने जाना, आखिर कैसे होगा हिग्स बोसॉन की खोज से इंसान को फायदा...

इंटरनेट होगा और भी तेज
बिग बैंग थ्योरी के कारण अब लाइफ साइंस को समझने में ज्यादा आसानी होगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा कम्यूनिकेशन को मिलने की संभावना बढ़ गई है। इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन और नैनो पार्टिकल्स की बदौलत अब समूचे विश्व में वापस संचार क्रांति का सूत्रपात हो सकता है। इससे न केवल इंटरनेट की स्पीड में तेजी आएगी, बल्कि मोबाइल भी सुपर कम्प्यूटर के जैसे काम करने लगेगा। जेनेवा में होना वाला यह प्रयोग सच में वैश्विक स्तर पर जीव उत्पत्ति की भी अनेक परतों का खुलासा करने में कामयाबी हासिल करेगा।
- डॉ. रोहित जैन, रिसर्च स्कॉलर, आरयू

गॉड पार्टिकल या हिग्स बोसॉन की खोज से जीवन की उत्पति की विभिन्न परतों पर प्रकाश डाला जा सकेगा। इससे यूनिवर्स की उत्पत्ति और उसकी वर्किग के बारे में गहन अध्ययन करने में आसानी होगी। साथ ही इससे ऑरिजिन ऑफ लाइफ और उसकी निरन्तरता के बारे में भी नए सिरे से सोचा जा सकेगा। यदि बॉयोलॉजी के दृष्टिकोण से सोचा जाए तो यह वैज्ञानिकों की ओर से की जाने वाली अति महत्वपूर्ण खोज में एक है, जिससे दुनिया के बनने की परतों पर भी गौर किया जा सकेगा और कई चीजों के बारे में जानकारी भी हासिल की जा सकेगी।
- प्रो. एसएल कोठारी, साइंटिस्ट, बॉटनी, आरयू

रिसर्च अभी भी चल रही है और कई तरह के तथ्य भविष्य में सामने आते रहेंगे। मेरा मानना है कि इस रिसर्च से सबसे ज्यादा डवपलमेंट टेक्नोलॉजी फील्ड में आएगा। जो पार्टिकल इस रिसर्च में वैज्ञानिकों को मिले हैं, वो मौजूद पार्टिकल से कई लाख गुना क्षमता लिए हुए हैं। ऎसे में टेक्नोलॉजी डवलपमेंट को गति मिल सकती है। इससे संचार और तकनीक में क्रांति आ सकती है, लेकिन इस रिसर्च के कई दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। जिस तरह से हर टेक्नोलॉजी के अच्छे-बुरे दोनों तरह के प्रभाव होते हैं। भविष्य में इन पार्टिकल के जरिए ज्यादा प्रभावी परमाणु बम बनाए जा सकते हैं, जो मानव जाति के लिए हानिकारक भी साबित हो सकते हैं।
- त्रिभुवन सिंह रमन, साइंटिस्ट

उपचार की दिशा में नया रिवोल्यूशन
जब भी कोई बीमारी होती है तो वो जेनेटिक बेस पर होती है। जिसमें कई छोटे-छोटे पार्टिकल मौजूद होते हैं। इन पार्टिकल में बदलाव स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। रिसर्च में जो पार्टिकल्स सामने आए वो पार्टिकल्स ह्यूमन बॉडी में मौजूद पार्टिकल्स की तरह ही हैं। इन पर रिसर्च और उसके परिणाम मेडिकल फील्ड में बीमारी की उत्पत्ति, इसे खत्म करने और इसके उपचार की दिशा में रिवोल्यूशन लेकर आएंगे। इस रिसर्च से नैनो पार्टिकल टेक्नोलॉजी पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वर्तमान में चिकित्सा पद्धति में यह पार्टिकल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जहां डॉक्टर पहुंचकर उपचार नहीं कर सकते हैं वहां डॉक्टर इन पार्टिकल की मदद से इलाज कर रहे हैं। यह उसी तरह है जिस तरह आरबीसी के अंदर ड्रग पहुंचाने के लिए इस पार्टिकल की सहायता से उपचार किया जा रहा है।
- डॉ. रमेश रूपरॉय, मेडिकल एक्सपर्ट

धर्म से जुडे लोग बोले
खोज से विज्ञान और धर्म की दूरियां होंगी कम
आज जिन तथ्यों की खोज वैज्ञानिक कर रहे हैं वो हजारों सालों पहले ही हमारे शास्त्रों में लिखे जा चुके हैं। हमारी संस्कृति में आदिकाल से ही विज्ञान रहा है। मैं यही कहूंगा कि विज्ञान और धर्म की तुलना करना सही नहीं है, क्योंकि ये दोनों ही अपनी जगह है। हमारे हिंदू धर्म की मान्यताओं से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है । मैं वैज्ञानिकों की इस खोज की सराहना करना चाहूंगा, क्योंकि इसमें उन्होंने काफी प्रयास किए हैं। ये उनकी बहुत बड़ी उपलब्घि है। गॉड पार्टिकल की खोज होने से उम्मीद है कि विज्ञान और धर्म के बीच की दूरियां भी कम हो जाए, क्योंकि इससे पहले विज्ञान को ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं था।
- पंडित रामकिशोर शास्त्री, ज्योतिष्ााचार्य।

हमें विज्ञान से कभी भी एतराज नहीं रहा। मगर विज्ञान ने अब वही खोजा है जिसके बारे में हम पहले से जानते हैं। ये खोज हमारे विचारों का समर्थन करती है। ईश्वर का अस्तित्व तो पहले भी था, बस अब उसे विज्ञान ने भी मान लिया हैा। अब आम आदमी विज्ञान की मदद से इसकी गहराई को और अधिक समझ सकेगा। विज्ञान और आध्यात्म दोनों ही अपनी-अपनी जगह है उनकी तुलना नहीं की जा सकती। वैज्ञानिकों ने उसी शक्ति को खोजा है जिसका अस्तित्व पहले से है। ये खोज नई नहीं है। हां, मगर इस खोज का फायदा हमें किसी न किसी तरह से जरूर मिलेगा।  sabhar :
http://www.dailynewsnetwork.in

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रविवार, 24 जून 2012

अप्रैल में सोई लड़की जून में नींद से जागी!

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स्लीपिंग ब्यूटी सिंड्रोम
एक लड़की अप्रैल में सोई थी, जो अब पिछले सप्ताह उठी है.
इस दौरान वह अपनी परीक्षा नहीं दे पाई और अपना जन्म दिन भी नहीं मना पाई.
लंदन के एक समाचार पत्र के मुताबिक 15 वर्षीय स्टेसी कॉमरफोर्ड को स्नायु से सम्बंधित समस्या है, जिसका अर्थ यह है कि वह एक बार में महीनों तक सोती रहती है.
वह क्लीन लेविन सिंड्रोम से पीड़ित दुनिया के एक हजार व्यक्तियों में से एक है, जिसे स्लीपिंग ब्यूटी सिंड्रोम भी कहा जाता है.
दो महीने की नींद में किशोरी नौ परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पाई. स्टेसी कहती है कि इस स्थिति के लिए अक्सर उसका मजाक उड़ाया जाता है.
उसने कहा, "मैं नौ परीक्षा नहीं दे पाई और अपना जन्मदिन नहीं मना पाई. अब थोड़ी आसानी होती है, क्योंकि लोग अब समझने लगे हैं कि यह क्या है. अब लोगों को समझाना आसान है. पहले वे मुझ पर विश्वास नहीं करते थे, जो मेरे लिए सबसे कठिनाई की बात थी."

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अपना डीएनए चुराने से रोकना चाहतीं हैं मैडोना

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अपना डीएनए चुराने से रोकना चाहतीं हैं मैडोना

पॉप गायिका मैडोना ने कथिततौर पर अपने प्रत्येक शो के बाद अपने ड्रेसिंग रूम को अच्छी तरह साफ करने का आदेश दिया है.
इसके पीछे अहम वजह यह बताई जा रही है कि मैडोना अपने प्रशंसकों को अपना डीएनए चुराने से रोकना चाहतीं हैं.
‘मिरर ऑनलाइन’ की रिपोर्ट के अनुसार ‘द मैटेरियल गर्ल’ अपने सनकी प्रशंसकों को लेकर चिंतित हैं.
उन्होंने अपनी त्वचा या लार के जरिए छोड़े गए डीएनए के किसी भी निशान को साफ करने के लिए एक दल का गठन किया है.
53 वर्षीय गायिका ने मांग की है कि नेपथ्य (बैकस्टेज) में आने की सिर्फ उन्हें और उनके अनुगामी लोगों को अनुमति दी जाए.
एकबार ड्रेसिंग रूम तैयार हो जाने के बाद किसी को भी उधर झांकने की अनुमति नहीं दी जाए. sabhar : samaylive.com

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रविवार, 20 मई 2012

सनकी...क्रूर....हत्यारे...अय्याश, इन तानाशाहों से थर्रा गई थी दुनिया

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साचा बैरॉन कोहेन की नई कॉमेडी फिल्म 'द डिक्टेटर' एक ऐसे काल्पनिक तानाशाह पर आधारित है जिसका तानाबाना, तानाशाहों की जीवन शैली और गतिविधियों के इर्दगिर्द बुना गया है।  ये काल्पनिक पात्र उत्तरी अफ्रीका का है और इनका नाम एडमिरल जनरल अलादीन है। लेकिन सवाल ये है कि वास्तविकता में ये तानाशाह आम लोगों से अलग क्यों होते हैं और उल्टी-पुल्टी हरकतें क्यों करते हैं? कोहेन का पात्र वाडिया में महिला सुरक्षाकर्मियों से घिरा रहता है और ऐशो-आराम का जीवन बिताता है। इस हफ्ते ये फिल्म पूरी दुनिया में रिलीज की गई है. ये काल्पनिक पात्र साफ तौर पर लीबिया के तानाशाह कर्नल गद्दाफी से प्रेरित है। यूनिवर्सटी ऑफ कोलारोडो में मनोविज्ञान के प्रोफेसर फ्रेड कूलिडगे का मानना है कि इस तरह के नेता स्वयंभू होते हैं और वो ये सोचते हैं कि वो जो भी करते हैं, सही ही करते हैं. आइए नजर डालते हैं इतिहास के कुछ कुख्यात तानाशाहों पर। कैलिग्यूला (ईसा बाद 12-41)रोमन सम्राट कैलिग्यूला इतिहास के पन्नों पर पहले तानाशाहों में गिने जाते हैं जो कि अपने भड़कीले व्यवहार और तुनक मिजाज़ी के लिए जाने जाते हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में इतिहास पढ़ाने वाले वरिष्ठ व्याख्याता डॉक्टर बेनेट बताते हैं कि कैलिग्यूला ने एक बार आदेश दिया कि सारी नौंकाएं नेपल्स की खाड़ी में एक कतार में खड़ी हो जाएं ताकि वो उन पर चल कर एक एक शहर से दूसरे शहर जा सके। कैलिग्यूला को रेस के घोडे़ बेहद पंसद थे। कहा जाता है कि उन्होंने अपने प्रिय घोड़े के लिए अलग से घर बनवाया था, जिसमें उसकी सेवा के लिए सैनिक तैनात थे, साथ ही घोडे़ को सोने के मर्तबान में शराब पिलवाई जाती थी। यूनिवर्सिटी ऑफ एक्स्टर के प्रोफेसर पीटर वाइसमैन का मानना है कि कैलिग्यूला अच्छी तरह से जानता था कि वो क्या कर रहा है। उसने सार्वभौमिक सत्ता और ताकत के इस्तेमाल की सारी संभावनाओं को तलाशा। फ्रांसवा डूवलियर (1907-1971)
हैती के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसवा डूवलियर ने अपने चौदह साल के शासनकाल में तमाम मौकों पर अपना महिमा मंडन किया. वो घोर अंधविश्वासी थे और उनका मानना था कि हर महीने की 22 तारीख को उनमें आत्माओं की ताकत आ जाती है। इसलिए वो हर महीने की 22 तारीख को ही अपने आवास से बाहर निकलते थे। उनका दावा था कि 22 नवंबर 1963 को उन्हीं की आत्माओं की शक्तियों की वजह से अमरीका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या हुई थी। छह बार उनकी हत्या के लिए प्रयास किये गए थे लेकिन वो हर बार बच निकले थे। वर्ष 1971 में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। 
इदी अमीन (1920-2003)
सत्तर के दशक में युगांडा के शासक रहे इदी आमीन ने अपने जीवन को भरपूर जिया। खुद को उन्होंने बार-बार सम्मानित किया और पदकों का अम्बार लगा लिया। उन्होंने खुद को फील्ड मार्शल, विक्टोरिया क्रॉस और मिलिट्री क्रॉस से भी सम्मानित किया। उन्हें अपने आप से इतने ज्यादा मोह था कि वो खुद को क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के समकक्ष या उनसे बड़ा दिखाना चाहते थे। उनका कहना था कि राष्ट्रमंडल का प्रमुख उन्हें होना चाहिए न कि महारानी को। इस तरह की भी खबरें आती रहीं कि वो अपने राजनीतिक विरोधियों के कटे सर अपने फ्रिज में रखा करते थे. हालांकि ये कभी साबित नहीं हुआ। एक बार उन्होंने रात के भोजन की टेबल पर अपने सलाहकार से कहा था कि मैं तुम्हारा जिगर खाना चाहता हूं, मैं तुम्हारे बच्चों को भी खाना चाहता हूं। इदी अमीन की पांच पत्नियां और दर्जन भर बच्चे थे। 
सपरमूरत नियाजोव (1940-2006)तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति नियाजोव खुद को एक ऐसे तानाशाह के रूप में पेश करते थे जैसे कोहन के काल्पनिक पात्र 'डिक्टेटर' का चरित्र है। उन्होंने अपनी 15 मीटर ऊंची सोने की परत चढ़ी प्रतिमा बनवाई थी जिसका मुख सूरज की तरफ था। हालांकि तुर्कमेनिस्तान की अधिकांश जनता गरीबी में जीवन जी रही थी, लेकिन नियाजोवने राजधानी में एक बर्फ का महल बनवाया और रेगिस्तान के बीचोबीच एक झील के निर्माण का आदेश दिया। उन्होंने अपने नाम पर शहर, पार्क बनवाए। यहां तक कि जनवरी महीने का नाम बदलकर उसका नामकरण अपने नाम पर कर दिया। वर्ष 1997 में धूम्रपान छोड़ने के बाद उन्होंने अपने सारे मंत्रियों को ऐसा ही करने को कहा था। उन्होंने नाटक, ओपेरा को तो प्रतिबंधित किया ही, साथ ही पुरुषों के लंबे बाल रखने पर प्रतिबंध लगा दिया। सद्दाम हुसैन की तरह ही उन्होंने एक किताब लिखी। रुखनामा तुर्कमेनिस्तान के इतिहास पर उनके विचारों का संग्रह है। स्कूल और विश्वविद्यालयों में इसे पढ़ाया जाना अनिवार्य कर दिया गया। 2006 में उनका निधन हो गया और 2011 में उनकी स्वर्ण प्रतिमा भी हटा दी गई। किम जोंग इल (1942-2011) उत्तरी कोरिया के किम जोंग इल आधुनिक युग के तानाशाह माने जाते हैं। वो खुद को कोरिया का प्रिय पिता यानी डियर फादर कहलाना पसंद करते थे। किम जोंग इल ने अपनी सत्ता और ताकत का महिमामंडन के लिए सरकारी मीडिया का इस्तेमाल किया। आधिकारिक बयान के मुताबिक जब किम जोंग इल का जन्म हुआ तो आकाश में दो इंद्रधनुष और एक चमकता सितारा दिखाई दिए और उनकी मृत्यु पर बर्फ से ढकी एक विशाल झील के दो टुकड़े हो गए। sabhar : bhaskar.com , BBC Hindi

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सिंगल से मैरीड हुआ जकरबर्ग का फेसबुक स्टेट्स

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पॉउलो आल्टो.फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने अपनी प्रेमिका प्रिससिला चैन से शनिवार को शादी कर ली। शुक्रवार को ही जकरबर्ग की कंपनी फेसबुक का आईपीओ लांच हुआ था। फेसबुक के आईपीओ को जबरदस्त रेस्पांस मिला है। आपीओ लांच करने के बाद शनिवार को ही जकरबर्ग ने अपने अधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर अपना स्टेस्ट चेंज करके मैरीड कर दिया। 28 साल के जकरबर्ग और 27 साल की चैन लंबे समय से एक साथ रह रही हैं। जकरबर्ग ने एक बेहद सादे समारोह में कैलिफोर्निया के पॉउलो आल्टो में अपने घर में चैन के साथ शादी की। इस समारोह में 100 से भी कम लोग शामिल हुए।
जकरबर्ग ने  अपनी शादी का फोटो फेसबुक पर भी पोस्ट किया है। इसमें वो ब्लू सूट और टाई पहने हुए है। जकरबर्ग के जीवन पर लिखी गई एक किताब के मुताबिक उनकी मुलाकात चैन से हारवर्ड यूनिवर्सिटी का बॉथरूम इस्तेमाल करने के दौरान हुई थी। इसके बाद कॉलेज के दिनों में भी वो डेट करते रहे। जकरबर्ग ने साल 2004 में हारवर्ड के अपने कमरे से ही फेसबुक की शुरुआत की थी। जैसे-जैसे फेसबुक बढ़ती गई चैन और उनका रिश्ता भी मजबूत होता गया। दोनों लंबे समय से साथ रह रहे थे। शनिवार को उन्होंने अपना स्टेटस भी सिंगल से मैरीड कर दिया।
sabhar : bhaskar.com

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लव मेकिंग सीन में सनी को आई शरम, चौंक गए सबः महेश भट्ट

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'हर चमकने वाली चीज गोल्ड नहीं होती, हर पोर्न स्टार बोल्ड नहीं होती' यह बात फिल्म जिस्म 2 में मुख्य भूमिका निभा रही पोर्न स्टार सनी लियोनी के बारे में निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट ने कही। महेश भट्ट ने कहा कि फिल्म में लव सींस की शूटिंग के दौरान सनी को काफी शरम आ रही थी और वो असहज महसूस कर रही थी। 




सनी को शर्मीली बताते हुए महेश भट्ट ने कहा, 'वो पोर्न स्टार है इसका मतलब ये नहीं है कि उसमें शरम करने की महिलाओं की फितरत नहीं है। मैं हमेशा से जानता था कि वो एक बेहद शर्मीली लड़की है। रनदीव के साथ लव मेकिंग सीन की शूटिंग के दौरान वो काफी असहज थी।'




महेश भट्ट ने कहा, 'जो नजर आता है वो होता नहीं है, हर चमकने वाली चीज गोल्ड नहीं होती, हर सैनिक साहसी नहीं होता, सभी पुजारी पवित्र नहीं होते और सभी पोर्न स्टार भी बोल्ड नहीं होती। कभी-कभी हकीकत बहुत अलग होती है।'
गौरतलब है कि बिग बॉस सीजन 5 में आने के बाद भारतीय कनाडाई मूल की पोर्न स्टार को फिल्म निर्माता महेश भट्ट ने अपनी फिल्म जिस्म 2 के लिए साइन किया था। इस फिल्म की शूटिंग इन दिनों श्रीलंका में चल रही है। जिस्म 2 साल 2003 में पूजा भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म जिस्म का ही सीक्वल है। पूजा भट्ट ही जिस्म 2 का निर्देशन कर रही हैं। 




सनी के बारे में बात करते हुए महेश ने कहा, 'उसके व्यावहार ने सबको चौंका दिया। लेकिन मैं समझ गया था कि यह मुश्किल होगा। लव मेकिंग सीन को शूट करना आसान नहीं होता है, यह बहुत कुछ मांगता है। जो लोग यह समझते थे कि सनी के लिए यह सीन शूट करना केक खाने जैसा होगा वो सब शूटिंग के दौरान चौंक गए।'




प्रेम त्रिकोण पर बन रही फिल्म जिस्म 2 में सनी लियोन इजना के किरदार में दिखेंगी। फिल्म में रनदीप के अलावा अरुणोदय सिंह और इमरान जाहिद भी मुख्य भूमिका में हैं। 




सनी लियोनी को साल 2010 में मेक्सिम ने विश्व की शीर्ष दस पोर्न स्टारों की सूची में रखा था। सनी का असली नाम  केरेन मल्होत्रा है। हाल ही में उन्होंने अपना 31वां जन्मदिन मनाया है।  sabhar : bhaskar.com
 

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