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सोमवार, 21 जुलाई 2014

ब्लड ग्रुप के मुताबिक चुनें अपना भोजन

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ग्रुप ए
ब्लड ग्रुप ए के लोगों के लिए हरी सब्जियां, अनाज, बींस अंकुरित भोजन, फल, ड्राई फ्रूट्स और ब्रेड, नूडल्स, चाइनीज फूड्स, डिनर रोल, बर्गर जैसे फूड्स को प्राथमिकता देनी चाहिए। वजन घटाने के लिए मीट, दूध से बने उत्पाद, गेहूं को अवॉइड करें।
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ग्रुप बी
ब्लड ग्रुप बी वाले लोग विभिन्न तरह का भोजन ले सकते हैं। इनमें अनेक प्रकार का मांस, सब्जियां, अनाज शामिल हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्लड ग्रुप बी के लोगों को अनेक प्रकार का भोजन सूट करता है। लेकिन संयमित रूप से लें। अगर दिन में मीट लिया है तो शाम में वेजीटेबल आदि खाएं। हालांकि पैकेट बंद खाद्य पदार्थ, गोभी मक्का, मूंगफली, मसूर, तिल आदि को नजरअंदाज करें।
- ग्रुप एबी
इस ब्लड ग्रुप के लोगों को मांस-मछली, सब्जियां, कार्बोहाइड्रेट्स, दूध, दही व दूध से बने पदार्थ और अनाज सूट करते हैं। यानी अधिक से अधिक प्रोटीन लेना चाहिए। इस तरह का भोजन खाने से वे ज्यादा हेल्थी रह सकते हैं। इस ग्रुप के लोग मिश्रित आहर ले सकते हैं लेकिन फिर भी रेड मीट, मक्का आदि को नजरअंदाज करना चाहिए।
-ग्रुप ओ
सबसे पुराना ग्रुप होने के कारण ब्लड ग्रुप ओ के लोगों को उच्च प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ और मांस अधिक लेना चाहिए, लेकिन दूध के उत्पाद को नजरअंदाज करना चाहिए।
sabhar :http://www.onlymyhealth.com/

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अमेरिका तक सुरंग के जरिए दौड़ेगी चीन की बुलेट ट्रेन

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पेइचिंग. चीन अमेरिका तक रेल लाइन बिछाने और बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने की योजना बना रहा है. इसके लिए चीन ने प्रशांत महासागर के नीचे सुरंग बनाकर अमेरिका तक 13 हजार किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन चलाने के लिए रेल लाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है. यह रेलवे लाइन अलास्का और कनाडा होते हुए अमेरिका तक पहुंचेगी.
प्रस्तावित रेल लाइन उत्तर-पूर्वी चीन से शुरू होकर रूस के पूर्वी साइबेरिया, बेरिंग स्ट्रैट, अलास्का, कनाडा होते हुए अमेरिका तक बिछाई जाएगी. चीन की इंजिनियरिंग अकादमी के अधिकारी एवं रेलवे के जानकार वांग मेंगशु ने पत्रकारों को यह जानकारी दी.
इस रेलवे लाइन पर बुलेट ट्रेन 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगी. इससे उत्तर पूर्वी चीन के यात्री मात्र दो दिनों में अमेरिका पहुंच जाएंगे. उन्होंने बताया कि चीन की ही तरह रूस भी रेल नेटवर्क पर बहुत अधिक निर्भर है और उसने भी इस योजना में रूचि दिखाई है.
इस प्रोजेक्ट का नाम रखा गया है-चीन-रूस प्लस अमेरिका रेल लाइन. यह कुल 13,000 किलोमीटर की होगी. दूसरी ओर चीन ट्रांस एशियन रेल लाइन पर अगले महीने से काम शुरू कर रहा है. इसके तहत चीन से रेल लाइन वियतनाम, मलेशिया, सिंगापुर होते हुए थाईलैंड तक जाएगी.


पेइचिंग टाइम्स समाचार पत्र ने वांग के हवाले से लिखा है कि रूस के मध्य बेरिंग स्ट्रैट और अलास्का से जाने वाली रेलवे लाइन के लिए 200 किमी की भूमिगत सुरंग बनायी जाएगी.
sabhar :http://www.palpalindia.com/

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शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

दिल के अंदर ही बन जाएगा पेसमेकर

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जैविक पेसमेकर, सेडार्स सिनाई

अपने ही शरीर में खुद का पेसमेकर तैयार करने की कल्पना जल्द ही हक़ीक़त में बदल सकती है. वैज्ञानिकों ने सुअरों में इसके कामयाब प्रयोग किए हैं.
वैज्ञानिकों ने हृदय की कोशिकाओं में एक जीन डालकर उन्हें पेसमेकर कोशिका में बदल दिया.

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लॉस एंजेलिस के सिडार्स-सिनाई हार्ट इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के अनुसार 'जैविक पेसमेकर एक बीमारी का प्रभावी ढंग इलाज करने में' कामयाब रहा है.
ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के अनुसार क्लिक करेंसाइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन में प्रकाशित शोध को प्रयोग में आने में 'अभी बहुत समय लगेगा.'
शोधकर्ताओं ने ऐसे सुअरों में एक जीन को डाला जिन्हें हृदयगति धीमी रहने की बीमारी थी.
इस जीन थैरेपी ने करोड़ों की संख्या में मौजूद दिल की मांसपेशियों में से कुछ को बहुत दुर्लभ उन विशेष कोशिकाओं में बदल दिया जो दिल की धड़कन को एक समान रखती हैं.

पारंपरिक पेसमेकर

जैविक पेसमेकर कोशिकाओं की तस्वीर
(जैविक पेसमेकर कोशिकाओं की तस्वीर)
शोध दल का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर एडुआर्डो मार्बन ने कहा, "पहली बार हम एक जैविक पेसमेकर तैयार करने में कामयाब हुए हैं जिसमें कम से कम बाहरी दखल दिया गया है. इससे यह भी पता चला है कि जैविक पेसमेकर रोज़मर्रा की ज़िंदगी का बोझ उठा सकता है."

पारंपरिक पेसमेकर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जिसे छाती के अंदर लगाया जाता है और ये अनियमित हृदयगति को नियंत्रित करता है.sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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गुरुवार, 17 जुलाई 2014

सावधान! नहीं तो आपको भी हो सकता है ब्रेन स्ट्रोक

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शरीर में रक्त प्रवाह में किसी तरह की बाधा आपको भारी नुकसान पहुंचा सकती है। आपकी जान भी जा सकती है। खासकर उस स्थिति में जब मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति बाधित होती हो। इसे हम ब्रेन स्ट्रोक भी कहते हैं। ब्रेन स्ट्रोक किसी बाधा के कारण इश्चेमिया (रक्त संचार में कमी) या फिर हेमरेज (रक्तस्त्राव) के कारण होता है।
हलांकि एक आम इंसान को ब्रेन स्ट्रोक के बारे में पता नहीं होता। इसके क्या प्रभाव होते हैं, इसके होने पर तुरन्त क्या करना चाहिए, क्या इसका इलाज संभव है आदि बातों से वह पूरी तरह से अंजान रहता है। वैसे एक आम इंसान के सामने सबसे जरूरी सवाल तो यही होता है कि ब्रेन स्ट्रोक के सामान्य लक्षण क्या हैं?
तनाव, मधुमेह, धूम्रपान, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर और हृदय रोग ब्रेन स्ट्रोक के लिए प्रमुख खतरे हो सकते हैं। अगर आप भी इस तरह के खतरों से पीड़ित हैं तो हो जाइए सावधान!
ब्रेन स्ट्रोक के सामान्य लक्षण
1. बांह में कमजोरी :
स्ट्रोक के मरीज को एक या दोनों बांहों में सुन्न होने या कमजोरी का एहसास हो तो जरूर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। याद रहे सुन्न होने की स्थिति में मरीज का हाथ उपर नहीं उठता।
2. चेहरे का झुकना :
अगर मरीज का चेहरा एक तरफ झुक जाए या फिर चेहरा सुन्न हो जाए तो समझ लीजिए मामला गंभीर है। इस दौरान आप उसे हंसने के लिए कहें, यदि वह ऐसा न कर सके तो तुरन्त अस्पताल ले जाएं।
3. बोलने में परेशानी :
स्ट्रोक के दौरान यदि मरीज को बोलने में परेशानी होती है, साधारण से सवाल का वह जवाब नहीं दे पाता, तो समझिए की उसे डॉक्टर की जरूरत है।
4. सन्तुलन खोना
शरीर को सन्तुलित करने में परेशानी, सीधे खड़ा नहीं हो पाना या चलने में परेशानी आदि ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण हैं।
5. सिर में दर्द
बिना किसी कारण सिर में भयंकर दर्द हो तो यह सामान्यत: हेमरेज (रक्तस्त्राव) के कारण स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
6. यदि सामान्य अवस्था में थोड़े समय के लिए यादाश्य भी चली जाती है तो समझे यह बीमारी होने वाली है।
7. कई बार आंखों के सामने अंधेरा छा जाना और चक्कर आना भी ब्रेन स्ट्रोक की वजह हो सकती है।sabhar :http://www.jagran.com/

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स्टीफन हॉकिंग ने लांच किया सुपर कंप्यूटर

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लंदन। प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने सुपर कंप्यूटर लांच किया है। हॉंिकंग का मानना है कि एसजीआइ कंपनी द्वारा निर्मित कॉसमॉस सुपरकंप्यूटर अपनी तरह का पहला कंप्यूटर है जो संभावनाओं के नए द्वार खोल सकेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के सेंटर फॉर मैथेमेटिकल साइंसेज में न्यूमेरिकल कॉस्मोलॉजी कार्यशाला में सुपरकंप्यूटर के लांच के मौके पर हॉकिंग ने कहा कि हमने हाल ही में पार्टिकल फिजिक्स और कॉस्मोलॉजी
[ब्रह्मांड विज्ञान] के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। कॉस्मोलॉजी अब एक वास्तविक विज्ञान है। इसलिए हमें वास्तविक ब्रह्मांड तक पहुंच और उसके बारे में अनुसंधान करने के लिए कॉस्मॉस की जरूरत है। कार्यशाला का आयोजन इनटेल की मदद से किया गया था। इसमें कंप्यूटेशनल कॉस्मोलॉजी से जुड़े प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया। हॉंिकंग ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि जल्द ही ऐसी परिकल्पना मिल जाएगी जिससे सैद्धांतिक तौर पर ब्रह्मांड में होने वाली प्रत्येक घटना की भविष्यवाणी की जा सकेगी।' कॉस्मॉस संघ का वर्तमान शोध कार्यक्रम ब्रह्मांड की उत्पत्तिऔर संरचना को लेकर समझ बढ़ाने से संबंधित है। sabhar :http://www.jagran.com/

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शोधकर्ताओं ने ढूंढा स्टीफन हाकिंग की बीमारी का इलाज

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लंदन। शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के मशहूर भौतिक शास्त्री स्टीफन हॉकिंग की तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारी मोटर न्यूरोन का उपचार खोज निकालने की उम्मीद जताई है। नई तकनीक का अगले साल तक चिकित्सकीय परीक्षण किया जा सकता है।
शेफील्ड इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल न्यूरोसाइंस के मुताबिक, इस तकनीक से मोटर न्यूरोन बीमारी के उपचार का मार्ग प्रशस्त होगा। इसकी मदद से ऐसे लोगों की पहचान की जा सकेगी, जिसके परिवार में तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारी रही हो। इससे जीन संबंधी गड़बड़ी को पहले ही सुधारा जा सकेगा।
जीन थेरेपी के प्रोफेसर मिमोन अजोज के मुताबिक, मोटर न्यूरोन बीमारी का कोई इलाज नहीं है। इससे पीड़ित व्यक्ति के जिंदा बचने की संभावना बहुत कम होती है। व्यक्ति अपनी मांसपेशियों पर नियंत्रण खो बैठता है। इसके कुछ मामले अनुवांशिक होते हैं जिनमें एसओडी1 जीन की गड़बड़ी पाई जाती है। हम इस जीन की गड़बड़ी को सही करने के प्रयास कर रहे हैं। ताकि बीमारी के लक्षण उभरने से पहले ही जीन का उपचार किया जा सके।
प्रोफेसर अजोज ने कहा, मौजूदा समय में रिलुजोल नाम की दवा से मरीज के जीवनकाल को तीन से छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। लेकिन इसका प्रभाव सभी मरीजों पर एक जैसा नहीं होता।
दुनिया भर में सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब 'ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' के लेखक और कैम्ब्रिज सेंटर फॉर थ्योरेटिकल कॉस्मोलॉजी में शोध निदेशक स्टीफन हाकिंग बोलने के लिए कंप्यूटर तकनीक की मदद लेते हैं, जिससे उनके जबड़े की मांसपेशियों से संचालित होती हैं। यह पहेली शोधकर्ताओं की समझ से अभी तक बाहर है कि वह मोटर न्यूरोन जैसी खतरनाक बीमारी के साथ 40 साल से कैसे जीवित हैं
sabhar : http://www.jagran.com/

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मस्तिष्क चिप लगाई, लकवाग्रस्त हाथ में हुई हलचल

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नई दिल्ली। आए दिन तकनीक के ऐसे कारनामे सामने आते हैं, जिन्हें देखकर हर कोई वाह-वाह कर उठता है। अमेरिका के ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर और धर्मार्थ ट्रस्ट बैटेले मेमोरियल इंस्टीट्यूट के संयुक्त प्रयासों से शोधकर्ताओं ने चार सालों से लकवाग्रस्त व्यक्ति के हाथों में हलचल पैदा कर दी, वह भी उसके मस्तिष्क के पूर्ण नियंत्रण के साथ।
23 वर्षीय इयान बर्कहार्ट का शरीर चार साल पहले लकवाग्रस्त हो गया था। इसके बाद से ही वह अपने हाथों का इस्तेमाल करने में अक्षम हो गया था। शोधकर्ताओं ने एक बेहद छोटे चिप न्यूरोब्रिज को इयान के मस्तिष्क में लगाकर इस कारनामे को अंजाम दिया। यह न्यूरोब्रिज प्रभावित क्षेत्र को पार करते हुए मस्तिष्क के संकेतों को सीधे इयान की मांसपेशियों तक पहुंचा देता है। न्यूरोब्रिज को तैयार करने में वैज्ञानिकों को दस साल का वक्त लगा। इयान के हाथ को इस इलाज के लिए तैयार करने में भी लंबा वक्त लगा और फिर तीन घंटे के ऑपरेशन के जरिए चिप को उसके दिमाग में लगा दिया गया। इयान ने कहा, 'यह एक स्वप्निल सा अनुभव है। मैं यह स्वीकार कर चुका था कि अब मैं कभी अपने हाथ का इस्तेमाल नहीं कर सकूंगा।'
तकनीक का भविष्य :
संभव है कि आने वाली सदी में मनुष्य मस्तिष्क में चिप लगाकर अपनी मेमोरी कैपेसिटी ब़़ढा सके। कहीं ज्यादा तेजी से गणनाएं कर सके। ऐसे चिप या साधन मनुष्य को स्मार्ट रोबोट या कंप्यूटर से कहीं ज्यादा स्मार्ट बना देंगे। तमाम चिप्स की मदद से हमारा अपना शरीर सीधे इंटरनेट, संचार के साधनों या मशीनों से जुड़़कर उनसे व्यवहार करने और कमांड के आदान--प्रदान में सक्षम हो सकेगा।
भविष्य के रोबोटिक अंग
बायोनिक आंख :
एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से जन्म से अंधा व्यक्ति भी देखने में सक्षम हो पायेगा।
हड्डी उगाने की तकनीक :
यूसीबी--1 नामक प्रोटीन के जरिए अब नई हड्डी के ब़़ढाव को अपने तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।
पोर्टेबल पेंट्रियाट :
ये किसी व्यक्ति के ब्लड शुगर और इंसुलिन को शरीर की जरूरतों के हिसाब से एडजस्ट करने में सक्षम होगा।
इलेक्ट्रॉनिक जीभ :
इसकी मदद से ये पता चल सकेगा कि जो खाद्य पदार्थ है, उसका स्वाद कैसा होगा और इसमें कौन से तत्व, विटामिन, वसा और प्रोटीन की मात्रा कितनी है।
नए कृत्रिम अंग :
नैनो और बायोटेक्नोलॉजी के विकास के साथ कोशिकीय और कृत्रिम अंग विकसित किए जा सकेंगे, जो हमारे शरीर के संवेदी प्रणाली के साथ असरदार ढंग से जु़़डकर काम करेंगे। sabhar :http://www.jagran.com/

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